📍नई दिल्ली | 24 Sep, 2025, 12:09 PM
IAF MiG-21 ceremony: भारतीय वायुसेना 26 सितंबर के दिन को एतिहासिक बनाने की तैयारी कर रही है। 62 साल की सेवा के बाद 26 सितंबर को उसका सबसे पुराना फाइटर जेट मिग-21 आखिरी बार आसमान में गरजता नजर आएगा। चंडीगढ़ वायुसेना स्टेशन पर होने वाले इस भव्य विदाई समारोह में एयर चीफ मार्शल एपी सिंह खुद कॉकपिट में बैठेंगे। उनके साथ स्क्वॉड्रन लीडर प्रिया शर्मा भी MiG-21 की आखिरी उड़ान का हिस्सा होंगे और इस तरीके से MiG-21 ceremony होगी।
IAF MiG-21 ceremony: बादल और पैंथर फॉर्मेशन
वायुसेना सूत्रों के मुताबिक मिग-21 नंबर 23 स्क्वॉड्रन “पैंथर्स” का हिस्सा हैं, आखिरी बार दो अलग-अलग फॉर्मेशन में उड़ान भरेंगे। इनमें पहला होगा तीन विमानों का “बादल फॉर्मेशन”, जिसमें एयर चीफ मार्शल एपी सिंह लीड करेंगे। वे लैंडिंग करेंगे जबकि बाकी दो मिग-21 ऊपर उठकर कॉम्बैट एयर पेट्रोल (CAP) का प्रदर्शन करेंगे।
दूसरा होगा “पैंथर फॉर्मेशन”, जिसमें तीन MiG-21 और दो स्वदेशी तेजस एलसीए मैक-1 शामिल होंगे। जैसे ही मिग-21 स्क्वॉड्रन सलामी देंगे, वे अलग हो जाएंगे और तेजस विमान भारतीय आसमान में आगे बढ़ते हुए भविष्य का संकेत देंगे। MiG-21 ceremony नजारा पुराने युग से नए युग की ओर बढ़ते कदमों की तस्वीर पेश करेगा।
IAF MiG-21 ceremony: जगुआर भी बनेंगे हिस्सा
समारोह में सिर्फ मिग-21 ही नहीं बल्कि जगुआर लड़ाकू विमान भी हिस्सा लेंगे। वे बेस स्ट्राइक का डेमो देंगे और दिखाएंगे कि वायुसेना की ताकत अब किस तरह आधुनिक विमानों पर टिक चुकी है। इसके अलावा स्वदेशी तेजस भी पहली बार मिग-21 के साथ आधिकारिक विदाई में शामिल होंगे।
🚨 ✈️ IAF Chief and woman fighter pilot set to take the skies in MiG-21s during the grand send-off ceremony.
The Air Chief and a woman fighter pilot will take the skies in MiG-21s, flying in the iconic Badal (3-aircraft) and Panther (5-aircraft) formations. ✈️
Just weeks ago, Air… pic.twitter.com/g2lYGpb5sK— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) September 24, 2025
प्रिया शर्मा ने पहले भी उड़ाया था मिग
कुछ हफ्ते पहले राजस्थान के नाल एयरबेस पर एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने खुद मिग-21 बाइसन सीयू2777 पर सोलो कॉम्बैट सॉर्टी की थी। खास बात यह रही कि उस फॉर्मेशन की अगुवाई स्क्वॉड्रन लीडर प्रिया शर्मा ने की थी। वायुसेना ने इसे “ट्रेडिशन एंड ट्रांसफॉर्मेशन” का पल बताया था। अब यही जोड़ी MiG-21 की आखिरी उड़ान में भी हिस्सा लेकर इतिहास का हिस्सा बनेगी।
राजस्थान के झुंझुनू जिले में जन्मी स्क्वाड्रन लीडर प्रिया शर्मा आईएएफ की सातवीं महिला फाइटर पायलट हैं। वे 2018 में एयर फोर्स अकादमी, दुंदिगल से ग्रेजुएट हुईं, जहां उन्होंने स्टेज-1 (पिलाटस पीसी-7), स्टेज-2 (किरण) पर ट्रेनिंग पूरी की। जनवरी 2019 से स्टेज-3 (बीदर AFS) में मिग-21 पर एडवांस्ड ट्रेनिंग ली। वहीं वे मोहना सिंह औऱ प्रतिभा सिंह के बाद राजस्थान की तीसरी महिला फाइटर पायलट हैं। उनके पिता भी बीदर एयरफोर्स स्टेशन में सेवाएं चुके हैं।
वहीं भारतीय वायुसेना के लिए यह सिर्फ MiG-21 ceremony नहीं बल्कि दुनिया को यह संदेश भी देना है कि वायुसेना में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है।
एसीएम एपी सिंह के पास 5000 घंटे का फ्लाइंग एक्सपीरियंस
मिग-21 केवल एक विमान नहीं बल्कि कई पीढ़ियों के पायलटों की पहचान रहा है। भारतीय वायुसेना के लगभग हर एयर चीफ ने इस विमान को उड़ाया है और इसकी कठिन उड़ानों से खुद को तैयार किया है। वर्तमान एयर चीफ मार्शल एपी सिंह के पास कुल पांच हजार घंटे से ज्यादा का फ्लाइंग अनुभव है और उन्होंने MiG-21 पर लंबा समय बिताया है। 1984 में कमीशन हुए एसीएम एपी सिंह मिग-21 पर कमांडर रहे थे और 1985 में उन्होंने तेजपुर में टाइप-77 वेरिएंट उड़ाया था। उन्होंने कहा था कि मिग-21 ने पीढ़ियों को ट्रेनिंग दी है, इसकी एजिलिटी और क्विक एक्सेलरेशन ने ऑपरेशनल फिलॉसफी को प्रभावित किया है। खुद एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने मिग-29 अपग्रेड प्रोजेक्ट भी लीड किया है।
उनके पहले एयर चीफ्स का इतना है फ्लाइंग अनुभव
उनके पूर्ववर्ती एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी (2021-2024) के पास 3,800 घंटे का फ्लाइंग एक्सपीरियंस है, जिसमें मिग-21, मिग-23एमएफ, मिग-29 और सुखोई-30एमकेआई शामिल हैं।
वहीं रिटायर्ड एसीएम आरकेएस भदौरिया (2019-2021) के नाम 26 तरह के विमानों पर 4,250 घंटे का फ्लाइंग एक्सपीरियंस है। जबकि बीएस धनोआ (2016-2019) ने 3,000 घंटे लॉग किए। वे 1999 कारगिल में नंबर 17 स्क्वाड्रन कमांडर रहे, जहां उन्होंने मिग-21 पर सॉर्टी उड़ाईं। उन्होंने 2019 में विंग कमांडर अभिनंदन वर्थमान के साथ अंतिम ट्रेनर सॉर्टी उड़ाई थी।
जबकि उनके पूर्ववर्ती एसीएम अरूप राहा (2013-2016) के 3,400 घंटे का फ्लाइंग एक्सपीरियंस है। उन्होंने मिग-29 स्क्वाड्रन कमांड किया। जबकि एनएके ब्राउन (2012-2013) ने 3,500 घंटे लॉग किए। एक बार MiG-21 ने उनकी जान बचाई थी, जब इंजन फेल होने पर बेली आउट के बजाय इमरजेंसी लैंडिंग की। वहीं उनके भी पूर्ववर्ती पीवी नाइक (2009-2012) के 3,000 घंटे हैं, जिनमें 2,000 घंटे मिग-21 पर बिताए। उन्होंने 1971 युद्ध में भाग लिया और मिग-21 बाइसन अपग्रेड शुरू किया। एफएच मेजर (2007-2009) ने 3,200 घंटे लॉग किए, जिनमें मिग-21 प्रमुख रहा।
उनके पहले एसपी त्यागी (2005-2007) के 3,000 घंटे हैं, और उन्होंने मिग-21 पर खूब सोलो सॉर्टी उड़ाईं। 1980 के दशक में बॉर्डर टेंशन के दौरान कमांड किया।
जबकि उनके पहले प्रदीप वासंत नाइक (2009-2011) के पास 3,000 घंटे काा फ्लाइंग एक्सपीरियंस रहा। उन्होंने मिग-21 के सभी वैरियंट्स पर उड़ान भरी। साथ ही, उन्होंने 1971 युद्ध में पूर्वी-पश्चिमी सेक्टर में सक्रिय भूमिका भी निभाई थी।
मिग का कॉकपिट किसी राजा की गद्दी से भी ज्यादा कीमती
मिग-21 का सफर भारतीय वायुसेना में लगभग 900 विमानों से शुरू हुआ था। अलग-अलग वेरिएंट्स में इसे शामिल किया गया। दशकों तक यह भारतीय वायुसेना का सबसे बड़ा फाइटर फ्लीट रहा। 1971 में पाकिस्तान के खिलाफ निर्णायक जीत से लेकर 1999 कारगिल युद्ध में हवाई सुरक्षा तक इसने अपनी क्षमता दिखाई। वहीं, 2019 की बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद पाकिस्तान के एफ-16 को गिराने वाले मिग-21 बाइसन की सफलता आज भी लोगों को याद है।
पूर्व एयर चीफ मार्शल एवाई टिपनिस ने “भारतीय वायुसेना के साथ मिग-21 के 50 साल” किताब में लिखा था कि मिग-21 का कॉकपिट किसी राजा की गद्दी से भी ज्यादा कीमती है, क्योंकि यह लड़कों को मर्द और पायलटों को योद्धा बना देता है।
पहला सुपरसोनिक इंटरसेप्टर
1963 में भारतीय वायुसेना में शामिल हुआ मिग-21 सोवियत संघ का पहला सुपरसोनिक इंटरसेप्टर था। जो आने वाले दशकों में भारत की एयर पावर की बैक बोन बना। 1971 के युद्ध में पाकिस्तान के कई ठिकाने तबाह करने से लेकर करगिल युद्ध और बालाकोट एयरस्ट्राइक तक में मिग-21 ने अपनी क्षमता साबित की। पिछले छह दशकों में 400 से ज्यादा मिग-21 हादसों का शिकार हुए औऱ तकरीबन 200 पायलटों ने अपनी जान गंवाई। बावजूद इसके, भारतीय वायुसेना अपने इस वर्कहॉर्स को लगातार अपग्रेड किया और नए हथियारों की मदद से इसे 21वीं सदी तक ऑपरेशन में बनाए रखा और अब MiG-21 ceremony हो रही है।
