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Quantum Entanglement: DRDO-IIT दिल्ली ने रचा इतिहास! 1 किमी दूर तक भेजा हैक-प्रूफ कम्युनिकेशन, जानें फ्यूचर वॉरफेयर में कैसे मिलेगी मदद?

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📍नई दिल्ली | 16 Jun, 2025, 8:22 PM

Quantum Entanglement: भारत ने एक ऐसा कारनामा कर दिखाया है जो ना सिर्फ देश के रक्षा क्षेत्र में बल्कि पूरे वैश्विक तकनीकी जगत में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। डीआरडीओ (DRDO) और IIT दिल्ली की साझेदारी में एक बेहद अहम प्रयोग सफलतापूर्वक पूरा किया गया है। क्वांटम एंटैंगलमेंट (Quantum Entanglement) यानी क्वांटम पर आधारित फ्री-स्पेस क्वांटम सिक्योर कम्युनिकेशन। यह तकनीक सामान्य भाषा में समझें तो ऐसा सुरक्षित सिक्योर कम्युनिकेशन है जिसे कोई हैक नहीं कर सकता। यानी यह भविष्य की ‘Unbreakable Communication’ यानी हैकप्रूफ कम्यूनिकेशन टेक्नोलॉजी की तरफ एक बड़ा कदम है। इस एक्सपेरीमेंट में क्वांटम एंटैंगलमेंट का इस्तेमाल करके 1 किमी से ज्यादा की दूरी पर फ्री-स्पेस क्वांटम सिक्योर कम्युनिकेशन को सफलतापूर्वक डेमो करके दिखाया गया।

क्या है यह Quantum Entanglement तकनीक?

डीआरडीओ और IIT दिल्ली ने क्वांटम एंटैंगलमेंट (Quantum Entanglement) का उपयोग करते हुए एक किलोमीटर से ज़्यादा दूरी तक बिना किसी फाइबर या तार के, पूरी तरह से सुरक्षित संचार प्रणाली का सफल परीक्षण किया है। इसे ‘Free-Space Quantum Secure Communication’ कहा जाता है।

इस प्रयोग में वैज्ञानिकों ने क्वांटम एंटैंगलमेंट की मदद से एक खास तरह का सिक्योर कम्युनिकेशन बनाया। इसमें दो फोटोन (प्रकाश के कण) को आपस में जोड़ा गया, जो एक-दूसरे से दूर होने के बावजूद एक साथ व्यवहार करते हैं। यानी कि जब इन दोनों में से किसी एक में कोई बदलाव होता है, तो दूसरे में भी वही बदलाव तुरंत आ जाता है, भले ही वे कितनी भी दूर क्यों न हों। यही ‘Quantum Entanglement’ की ताकत है।

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इस तकनीक से डेटा को इतने सुरक्षित तरीके से भेजा जा सकता है कि कोई भी इसे चुरा या तोड़ नहीं सकता। प्रयोग के दौरान करीब 240 बिट्स प्रति सेकंड की सिक्योर की रेट (Secure Key Rate) हासिल की गई, और क्वांटम बिट एरर रेट (Quantum Bit Error Rate) 7 फीसदी से कम रहा। यानी यह सिस्टम बहुत सटीक और भरोसेमंद है।

कहां और कैसे हुआ यह डेमो?

यह डेमो IIT दिल्ली के कैंपस में हुआ। प्रोफेसर भास्कर कंसारी की रिसर्च टीम ने इसे अंजाम दिया, जिन्होंने डीआरडीओ के डायरेक्टोरेट ऑफ फ्यूचरिस्टिक टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट (DFTM) के सपोर्ट से यह प्रोजेक्ट शुरू किया था। इस मौके पर डीआरडीओ के डीजी, डायरेक्टर SAG, डायरेक्टर DFTM, IIT दिल्ली के डीन (R&D), और डीए-कोई (DIA-CoE) के डायरेक्टर समेत कई कई अहम लोग मौजूद थे।

डेमो के दौरान एक फ्री-स्पेस ऑप्टिकल लिंक (optical beam path) के जरिए एक किलोमीटर की दूरी तय कर सुरक्षित ‘Quantum Key Distribution’ (QKD) संभव बनाया गया।

यह कैसे काम करता है?

क्वांटम एंटैंगलमेंट (Quantum Entanglement) विज्ञान का हिस्सा है। इसमें दो या ज्यादा कणों को इस तरह जोड़ा जाता है कि अगर एक कण में बदलाव होता है, तो दूसरा कण तुरंत उस बदलाव को महसूस करता है, चाहे वे कितनी भी दूर क्यों न हों। इस प्रॉपर्टी का इस्तेमाल करके वैज्ञानिकों ने एक ऐसी Key बनाई, जो डेटा को सुरक्षित रखती है। अगर कोई इस Key को चुराने की कोशिश करेगा, तो क्वांटम सिस्टम खुद बता देगा कि कोई गड़बड़ हो रही है। यह पारंपरिक तरीकों से कहीं बेहतर है, जहां डिवाइस खराब होने पर सिक्योरिटी कमजोर पड़ सकती है और हैकिंग का खतरा बढ़ जाता है। पारंपरिक सिस्टम में अगर कोई बीच में सिग्नल को इंटरसेप्ट करता है तो आसानी से डेटा चुराया जा सकता है। लेकिन क्वांटम सिस्टम में जैसे ही कोई अनधिकृत व्यक्ति सिग्नल को छूने की कोशिश करता है, पूरे सिस्टम की स्थिति (quantum state) बदल जाती है और वह पकड़ में आ जाता है। इसलिए इसे अनहैकेबल कम्यूनिकेशन कहा जाता है।

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इससे क्या होगा फायदा?

यह तकनीक कई तरीकों से फायदेमंद है। सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह डेटा पूरी तरह से सुरक्षित रहता है। इसका इस्तेमाल डिफेंस, फाइनेंस, और टेलीकम्युनिकेशन जैसे अहम सेक्टर्स में हो सकता है, जहां डेटा लीक का बड़ा खतरा होता है। इसके अलावा, जंग के दौरान यह नेशनल सिक्योरिटी के लिए भी बहुत उपयोगी ।

दूसरा फायदा यह है कि इसमें ऑप्टिकल फाइबर बिछाने की जरूरत नहीं पड़ती। आमतौर पर सिक्योर कम्युनिकेशन के लिए जमीन के नीचे फाइबर केबल्स डाली जाती हैं, जो महंगी और मुश्किल होती हैं। वहीं, पहाड़ी या घनी आबादी वाले इलाकों में फाइबर केबल बिछाने में कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। लेकिन फ्री-स्पेस QKD (Quantum Key Distribution) से यह दिक्कत खत्म हो सकती है। Free-Space QKD में हवा के जरिए (laser-based optical path) सिग्नल भेजे जा सकते हैं, जो सस्ता और आसान है। यह बिल्कुल उसी तरह है जैसे लेज़र बीम दो टावरों के बीच भेजी जा रही हो।

2022 में मिली थी बड़ी सफलता

यह पहली बार नहीं है जब भारत ने क्वांटम टेक्नोलॉजी में सफलता हासिल की हो। 2022 में डीआरडीओ ने विन्ध्याचल और प्रयागराज के बीच पहला इंटरसिटी क्वांटम कम्युनिकेशन लिंक बनाया था। इसमें कमर्शियल ग्रेड अंडरग्राउंड डार्क ऑप्टिकल फाइबर का इस्तेमाल हुआ था, और प्रोफेसर भास्कर की टीम ने इसमें अहम भूमिका निभाई। फिर 2024 में, उनकी टीम ने 100 किमी लंबे टेलीकॉम ग्रेड ऑप्टिकल फाइबर पर क्वांटम कीज को सफलतापूर्वक भेजा। ये दोनों प्रोजेक्ट्स डीआरडीओ के सपोर्ट से हुए थे।

अब यह नया प्रयोग फ्री-स्पेस में हुआ, जो एक बड़ी छलांग है। यह तकनीक क्वांटम साइबर सिक्योरिटी, क्वांटम नेटवर्क्स, और फ्यूचर क्वांटम इंटरनेट के विकास का रास्ता खोलेगी।

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यह सफलता डीआरडीओ-इंडस्ट्री-अकादमिया सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (DIA-CoE) की बदौलत संभव हुई है। यह डीआरडीओ की एक खास पहल है, जिसमें 15 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाए गए हैं। ये सेंटर IITs, IISc, और यूनिवर्सिटीज में हैं, जहां कटिंग-एज डिफेंस टेक्नोलॉजीज पर काम हो रहा है। इन सेंटर्स की मदद से भारत नई-नई तकनीकों को डेवलप कर रहा है, जो देश की सुरक्षा को मजबूती देंगे।

रक्षा मंत्री ने दी बधाई

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि पर डीआरडीओ और IIT दिल्ली को बधाई दी। उन्होंने कहा कि भारत अब क्वांटम युग में कदम रख चुका है, जहां खासकर फ्यूचर वॉरफेयर में सिक्योर कम्युनिकेशन एक गेम चेंजर साबित होगा। उन्होंने कहा कि यह तकनीक भारत को दुश्मनों से लड़ने में नई ताकत देगी।

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इस एक्सपेरीमेंट की सफलता में डीआरडीओ के सेक्रेटरी और चेयरमैन डॉ. समीर वी. कामत, और IIT दिल्ली के डायरेक्टर प्रोफेसर रंगन बनर्जी ने भी टीम को शाबाशी दी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि भारत के साइंस और टेक्नोलॉजी के लिए एक मील का पत्थर है। टीम ने दिन-रात मेहनत करके इस तकनीक को हकीकत में बदला, और यह उनकी कड़ी मेहनत का नतीजा है।

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  • हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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