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Explainer: DRDO की MPATGM मिसाइल ने चलते टैंक पर किया ऊपर से अटैक, जानें पहले के ट्रायल्स से यह टेस्ट क्यों है अलग?

जनवरी 2026 का परीक्षण इन सभी पुराने टेस्टों से इसलिए अलग है, क्योंकि इसमें पहली बार मूविंग टारगेट को निशाना बनाया गया। युद्ध के हालात में टैंक कभी भी एक जगह खड़े नहीं रहते...

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📍नई दिल्ली | 12 Jan, 2026, 10:02 PM

Explainer MPATGM Missile Test: डीआरडीओ ने आज मैन पोर्टेबल एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल यानी एमपीएटीजीएम का सफल फ्लाइट ट्रायल किया। यह टेस्ट महाराष्ट्र के अहिल्यानगर स्थित केके रेंज में किया गया। इस दौरान मिसाइल ने मूविंग टारगेट पर टॉप अटैक मोड में सीधा और सटीक हमला किया।

यह मिसाइल तीसरी पीढ़ी की फायर एंड फॉरगेट श्रेणी की है, यानी इसे एक बार टारगेट पर लॉक करने के बाद दोबारा गाइडेंस की जरूरत नहीं होती। मिसाइल अपने आप टारगेट तक पहुंचकर उसे नष्ट कर देती है। (Explainer MPATGM Missile Test)

Explainer MPATGM Missile Test: चलती टैंक यूनिट पर किया टॉप अटैक

नए टेस्ट की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि एमपीएटीजीएम मिसाइल ने पहली बार मूविंग टारगेट को निशाना बनाया। यह टारगेट थर्मल टारगेट सिस्टम के जरिए तैयार किया गया था, जिससे यह बिल्कुल असली टैंक की तरह दिखाई देता है। मिसाइल ने ऊंचाई पर जाकर टैंक की छत पर सीधा वार किया। इसे टॉप अटैक कहा जाता है, क्योंकि टैंक की छत उसकी सबसे कमजोर जगह मानी जाती है।

डीआरडीओ अधिकारियों के मुताबिक यह टेस्ट बिल्कुल युद्ध जैसे हालात में किया गया था, ताकि मिसाइल की क्षमता को पूरी तरह परखा जा सके। (Explainer MPATGM Missile Test)

पहले के परीक्षणों से यह टेस्ट क्यों है अलग

इससे पहले डीआरडीओ ने एमपीएटीजीएम के कई टेस्ट किए थे, लेकिन वे सभी मिसाइल के डेवलपमेंट और टेक्निकल वैलिडेशन से जुड़े थे। लेकिन नए टेस्ट में पहली बार यह साबित हुआ कि मिसाइल पूरी तरह ऑपरेशनल रोल निभाने के लिए तैयार है।

पिछले कुछ सालों में किए गए शुरुआती परीक्षणों में एमपीएटीजीएम को मुख्य रूप से स्टेशनरी यानी रुके हुए टारगेट्स पर किया गया था। इन परीक्षणों का मकसद मिसाइल की बुनियादी क्षमताओं को परखना था। जैसे कि मिसाइल सही दिशा में उड़ान भर रही है या नहीं, गाइडेंस सिस्टम टारगेट को पहचान पा रहा है या नहीं, वॉरहेड सही समय पर फट रहा है या नहीं, और टॉप अटैक प्रोफाइल तकनीकी रूप से काम कर रही है या नहीं। (Explainer MPATGM Missile Test)

इन शुरुआती परीक्षणों में मिसाइल को अलग-अलग दूरी पर फायर किया गया। कहीं कम दूरी से तो कहीं अधिकतम रेंज के पास से लॉन्च किया गया। इन टेस्ट में यह देखा गया कि मिसाइल ऊपर की ओर चढ़कर कैसे टारगेट की छत पर वार करती है। हालांकि ये सभी अपनी जगह पर खड़े टैंक जैसे मॉडल थे। (Explainer MPATGM Missile Test)

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मिसाइल में फायर एंड फॉरगेट फीचर

इसके बाद के चरण में डीआरडीओ ने मिसाइल के फायर एंड फॉरगेट फीचर पर काम किया। इन ट्रायल्स में यह साबित हुआ कि एक बार टारगेट को लॉक करने के बाद मिसाइल को किसी बाहरी कंट्रोल या गाइडेंस की जरूरत नहीं पड़ती। सैनिक मिसाइल दागने के बाद तुरंत अपनी पोजीशन बदल सकता है, जो युद्ध के दौरान उसकी सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी होता है।

पुराने ट्रायल्स में इमेजिंग इंफ्रारेड सीकर की क्षमता को भी परखा गया था। दिन और रात दोनों परिस्थितियों में यह देखा गया कि मिसाइल हीट सेंसिंग के जरिए टागरेट को कितनी सटीकता से पहचानती है। इन टेस्टों में थर्मल सिग्नेचर वाले टारगेट का इस्तेमाल किया गया, लेकिन वे भी अपनी जगहों पर स्थिर थे। (Explainer MPATGM Missile Test)

चलते टारगेट को निशाना बनाना होता है मुश्किल

जनवरी 2026 का परीक्षण इन सभी पुराने टेस्टों से इसलिए अलग है, क्योंकि इसमें पहली बार मूविंग टारगेट को निशाना बनाया गया। युद्ध के हालात में टैंक कभी भी एक जगह खड़े नहीं रहते। वे लगातार स्पीड में रहते हैं, दिशा बदलते हैं और कई बार स्पीड भी बढ़ाते या घटाते हैं। ऐसे में किसी मिसाइल के लिए चलते टारगेट को पहचानना, उसका पीछा करना और फिर सटीक हमला करना सबसे कठिन चुनौती होती है।

हालिया टेस्ट में डीआरडीओ ने एक थर्मल टारगेट सिस्टम का इस्तेमाल किया, जो बिल्कुल असली टैंक जैसा व्यवहार करता है। यह टारगेट न केवल गर्मी उत्सर्जित कर रहा था, बल्कि तय रफ्तार से आगे बढ़ भी रहा था। एमपीएटीजीएम मिसाइल ने पहले टारगेट को लॉक किया, फिर ऊंचाई पर जाते हुए अपनी उड़ान प्रोफाइल बदली और आखिर में टॉप अटैक मोड में सीधे टारगेट की छत पर हमला किया। चलते हुए टारगेट पर टॉप अटैक करना तकनीकी रूप से मुश्किल होता है, क्योंकि मिसाइल को उड़ान के दौरान लगातार यह एनालिसिस करना पड़ता है कि टारगेट किस दिशा में और किस रफ्तार से आगे बढ़ रहा है। (Explainer MPATGM Missile Test)

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यह ट्रायल इस बात का सबूत है कि मिसाइल का सीकर सिस्टम, गाइडेंस एल्गोरिद्म और कंट्रोल सिस्टम सभी एक साथ सही तरीके से काम कर रहे हैं।

पुराने परीक्षणों में मिसाइल की मारक क्षमता और पेनिट्रेशन को जरूर साबित किया गया था, लेकिन इस नए टेस्ट में यह साबित हुआ कि मिसाइल असली युद्ध जैसे हालात में भी उतनी ही सटीक और भरोसेमंद है। यही वजह है कि इस परीक्षण को डेवलपमेंट टेस्ट से आगे बढ़कर यूजर ट्रायल्स और इंडक्शन की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। (Explainer MPATGM Missile Test)

टर्निंग पॉइंट है आज का टेस्ट

डीआरडीओ के अधिकारियों के अनुसार, यह परीक्षण भारतीय सेना की जरूरतों के सबसे करीब है, जिसमें पैदल सैनिक को दुश्मन के आधुनिक टैंकों से निपटने के लिए हल्का, भरोसेमंद और अत्यधिक घातक हथियार चाहिए। यही कारण है कि जनवरी 2026 का यह ट्रायल एमपीएटीजीएम के पूरे विकास कार्यक्रम में एक टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है और इसे पहले के सभी परीक्षणों से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण समझा जा रहा है। (Explainer MPATGM Missile Test)

पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से बनी मिसाइल

एमपीएटीजीएम पूरी तरह भारत में विकसित की गई मिसाइल है। इसमें इमेजिंग इंफ्रारेड होमिंग सीकर, ऑल इलेक्ट्रिक कंट्रोल सिस्टम, फायर कंट्रोल सिस्टम, टैंडम वॉरहेड और आधुनिक प्रोपल्शन सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है।

इस मिसाइल के डेवलपमेंट में डीआरडीओ की कई प्रयोगशालाओं ने मिलकर काम किया है। इनमें हैदराबाद, चंडीगढ़, पुणे और देहरादून की प्रयोगशालाएं शामिल हैं। लक्ष्य को असली टैंक जैसा दिखाने के लिए थर्मल टारगेट सिस्टम जोधपुर स्थित डिफेंस लैबोरेटरी ने तैयार किया।

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इस मिसाइल सिस्टम के डेवलपमेंट और प्रोडक्शन में भारत डायनामिक्स लिमिटेड और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड अहम भूमिका निभा रहे हैं। ये दोनों कंपनियां डीआरडीओ के डेवलपमेंट-कम-प्रोडक्शन पार्टनर हैं। (Explainer MPATGM Missile Test)

दिन और रात दोनों में हमला करने में सक्षम

एमपीएटीजीएम मिसाइल का इमेजिंग इंफ्रारेड सीकर दिन और रात दोनों समय काम करने में सक्षम है। मिसाइल में लगा टैंडम वॉरहेड आधुनिक मेन बैटल टैंकों की सुरक्षा को भी भेदने में सक्षम है, जिसमें रिएक्टिव आर्मर शामिल होता है। (Explainer MPATGM Missile Test)

ट्राइपॉड और मिलिटरी व्हीकल से लॉन्च की सुविधा

एमपीएटीजीएम को ट्राइपॉड से भी लॉन्च किया जा सकता है और सैन्य वाहन से भी। इससे इसे अलग-अलग तरह के ऑपरेशन में इस्तेमाल करना आसान हो जाता है। पैदल सैनिक इसे अपने साथ ले जा सकते हैं, जिससे एंटी-टैंक क्षमता सीधे फ्रंटलाइन तक पहुंच जाती है। (Explainer MPATGM Missile Test)

रक्षा मंत्री और डीआरडीओ चीफ ने दी बधाई

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफल परीक्षण के लिए डीआरडीओ, उद्योग साझेदारों और पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने इसे आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

वहीं रक्षा अनुसंधान और विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के चेयरमैन डॉक्टर समीर वी कामत ने कहा कि यह परीक्षण पूरी तरह सफल रहा और सभी टारगेट हासिल किए गए। उन्होंने बताया कि यह मिसाइल सिस्टम अब भारतीय सेना में शामिल किए जाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। (Explainer MPATGM Missile Test)

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  • हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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