📍नई दिल्ली | 25 Oct, 2025, 12:25 PM
Bharat Forge CQB Carbine Deal: देश की डिफेंस इक्विपमेंट्स मैन्युफैक्चरिंग कंपनी भारत फोर्ज लिमिटेड ने स्पष्ट किया है कि अभी तक भारतीय सेना के साथ क्लोज क्वार्टर बैटल यानी सीक्यूबी कार्बाइन की सप्लाई को लेकर कोई औपचारिक कॉन्ट्रैक्ट नहीं हुआ है। कंपनी ने यह बयान बीएसई और एनएसई को भेजे अपने स्पष्टीकरण पत्र में दिया है।
रक्षा समाचार डॉट कॉम ने डीजी इन्फैंट्री के हवाले से खबर छापी थी कि भारत फोर्ज और पीएलआर सिस्टम्स ने रक्षा मंत्रालय के साथ 4.25 लाख सीक्यूबी कार्बाइन की सप्लाई के लिए कॉन्ट्रैक्ट पर दस्तखत किए हैं। इन रिपोर्टों के बाद शेयर बाजारों ने कंपनी से स्पष्टीकरण मांगा था।
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भारत फोर्ज (Bharat Forge CQB Carbine Deal) ने अपने जवाब में कहा कि कंपनी ने मार्च 2023 में इस प्रोजेक्ट के लिए बोली लगाई थी। इसके बाद भारतीय सेना ने कार्बाइन के कई चरणों में परीक्षण किए। जुलाई 2025 में कमर्शियल बिड्स खोली गईं, जिसमें भारत फोर्ज एल-1 बिडर घोषित हुआ, यानी उसने सबसे कम कीमत पर सप्लाई की पेशकश की थी।
कंपनी ने कहा कि उसे कुल ऑर्डर के 60 फीसदी हिस्से की सप्लाई के लिए चयनित किया गया है। हालांकि, अभी कॉन्ट्रैक्ट को अंतिम रूप नहीं दिया गया है और रक्षा मंत्रालय के साथ बातचीत जारी है। भारत फोर्ज ने कहा कि जैसे ही समझौते पर दस्तखत होंगे, उसकी जानकारी नियामक संस्थाओं को दी जाएगी।
भारतीय सेना के इन्फैंट्री के डीजी लेफ्टिनेंट जनरल अजय कुमार ने 22 अक्टूबर को इस प्रोजेक्ट का जिक्र किया था और कहा था कि प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, यह सौदा ‘बॉय (इंडियन)’ कैटेगरी के तहत किया जा रहा है, जिसके तहत हथियार भारतीय कंपनियों से ही खरीदे जाते हैं और उनमें कम से कम 50 फीसदी स्वदेशी सामग्री का होनी जरूरी है। (Bharat Forge CQB Carbine Deal)
सेना की जरूरत के मुताबिक, इन नई 5.56×45 मिमी सीक्यूबी कार्बाइनों की संख्या 4,25,213 तय की गई है। ये हथियार शहरों में कम दूरी की मुठभेड़ों, आतंकवाद-रोधी अभियानों और विशेष बलों के ऑपरेशन में इस्तेमाल होंगे। इन कार्बाइनों की रेंज 200 मीटर से अधिक होगी और वजन लगभग 3 किलोग्राम रखा गया है।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह आधुनिक सीक्यूबी कार्बाइन (Bharat Forge CQB Carbine Deal) पुरानी 9×19 मिमी स्टर्लिंग सब-मशीन गन की जगह लेगी, जो सेना में दो दशकों से अधिक समय से इस्तेमाल हो रही है। 1940 के दशक में डिजाइन की गई स्टर्लिंग गन अब आधुनिक लड़ाई के लिए अनुपयुक्त मानी जाती है।
रक्षा मंत्रालय द्वारा तैयार योजना के अनुसार, कॉन्ट्रैट साइन होने के बाद दोनों कंपनियों को दो साल के भीतर सभी कार्बाइनों की सप्लाई करनी होगी। भारत फोर्ज को 60 फीसदी हिस्से की डिलीवरी करनी है, जबकि बाकी कार्बाइन पीएलआर सिस्टम्स देगी, जो अदाणी समूह और इजरायल वेपन इंडस्ट्रीज के बीच जॉइंट वेंचर है। (Bharat Forge CQB Carbine Deal)
कंपनी ने बताया कि वह रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रही है। भारत फोर्ज की मूल कंपनी कल्याणी स्ट्रैटेजिक सिस्टम्स पहले से ही भारतीय सेना के लिए तोपखाना और गोला-बारूद से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है।
इससे पहले भी भारत फोर्ज कई रक्षा उत्पादों जैसे आर्टिलरी गन, बख्तरबंद वाहन और मिसाइल कॉम्पोनेन्ट्स के निर्माण में अग्रणी रही है। अब सीक्यूबी कार्बाइन प्रोजेक्ट (Bharat Forge CQB Carbine Deal) के जरिये यह कंपनी छोटे हथियारों के क्षेत्र में भी बड़ा कदम रखने जा रही है।

