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Theatre Command: CDS चौहान ने कहा- ऑपरेशन सिंदूर से मिले पाठ थिएटराइजेशन में होंगे शामिल, एयर चीफ बोले- विचार-विमर्श के बाद ही बढ़ें आगे

जनरल चौहान ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने यह दिखाया कि इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस को दुश्मन की सीमा के पार भी प्रभावी तरीके से तैनात किया जाना चाहिए और यह अब न्यू नॉर्मल होना चाहिए...

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📍नई दिल्ली | 5 Nov, 2025, 11:19 AM

Theatre Command: चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर से भारतीय सेनाओं को कई अहम सबक मिले हैं, जिन्हें थिएटराइजेशन मॉडल में शामिल किया जाएगा। उन्होंने इंडिया डिफेंस कॉन्क्लेव में बताया कि यह अनुभव थिएटर कमांड का स्ट्रक्चर बनाने में काम आएगा। वहीं, भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह कहना है कि भारतीय वायुसेना को थिएटर कमांड के गठन से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन इसे पर्याप्त विचार-विमर्श के बाद ही आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

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कार्यक्रम में जनरल चौहान ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने यह दिखाया कि इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस को दुश्मन की सीमा के पार भी प्रभावी तरीके से तैनात किया जाना चाहिए और यह अब न्यू नॉर्मल होना चाहिए। सीडीएस ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने यह भी सिखाया कि सर्विस चीफ्स की भूमिका अहम है और चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी की भूमिका को फिर से परिभाषित करने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि जॉइंट कमांडर कॉन्क्लेव से मिले अनुभवों को मिलाकर एक ऐसा आर्गेनाइजेशनल स्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है जो हर परिस्थिति के लिए काम आएगा।

थिएटराइजेशन योजना के तहत देश को कई संयुक्त थिएटर कमांड्स में बांटा जाएगा, जिनमें थलसेना, नौसेना और वायुसेना की यूनिटें एक साथ काम करेंगी। ये कमांड अपने-अपने भौगोलिक इलाकों की सुरक्षा और रणनीतिक अभियानों के लिए जिम्मेदार होंगी।

जनरल चौहान ने हंसते हुए कहा, “ऑपरेशन सिंदूर के बाद सबसे बड़ी चुनौती यह है कि चारों शीर्ष अधिकारी तीनों सेनाओं के प्रमुख और सीडीएस को एक साथ दिल्ली में मिलना मुश्किल हो गया है।”

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जनरल चौहान ने आगे कहा कि नए मॉडल में एयर डिफेंस, काउंटर-यूएएस और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर को अहम जगह दी जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य में मोबाइल टारगेट्स से निपटना भी जरूरी होगा और तकनीकी रूप से दुश्मन से आगे रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि थिएटराइजेशन से हर क्षेत्र के लिए अलग-अलग कमांड नहीं बल्कि एक कोआर्डिनेटेड कमांड मिलेगी, जहां थल, नौ और वायु सेनाएं एक साथ काम करेंगी।

सीडीएस ने बताया कि उरी, बालाकोट, गलवान और डोकलाम से मिली सीखों से मिले अनुभव नया आर्गेनाइजेशनल मॉडल तय करने में मदद करेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि अब चौथे स्तरीय मुद्दा यह है कि शीर्ष नेतृत्व के साथ कैसे संवाद और रणनीतिक फैसले लिए जाएं, इस पर भी काम किया जा रहा है।

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वहीं, इसी कार्यक्रम में वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा कि वायुसेना नई मिलिट्री फॉर्मेशंस बनाने के विरोध में नहीं है, लेकिन इसे पूरी चर्चा के बाद ही आगे बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि थिएटर कमांड जैसे स्ट्रक्चर तभी कारगर होंगं, जब वे भारत की जरूरतों के अनुरूप हों और विदेश के किसी मॉडल की नकल न हों। एयर चीफ ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने ट्राई-सर्विसेज सिनर्जी को दिखाया, पर औपचारिक स्ट्रक्चर से यह कॉर्डिनेशन और मजबूत होगा।

उन्होंने कहा कि तीनों सेनाओं थलसेना, वायुसेना और नौसेना के बीच बेहतर तालमेल के लिए एक जॉइंट स्ट्रक्चर बनाया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह सुझाव दिया कि इस स्ट्रक्चर में पैरामिलिट्री फोर्सेज और सिविल एजेंसियों को भी शामिल किया जाए।

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उन्होंने आगे कहा कि हाल ही में हुए ऑपरेशन सिंदूर ने दिखाया कि तीनों सेनाएँ एकजुट होकर कितनी प्रभावी कार्रवाई कर सकती हैं। “शायद इस बार हमारे व्यक्तिगत तालमेल से यह संभव हुआ, लेकिन भविष्य में मतभेद भी हो सकते हैं। इसलिए अगर कोई फॉर्मल स्ट्रक्चर होगा, तो यह हमारे लिए सहायक होगा।”

सितंबर में एयर चीफ मार्शल सिंह ने थिएटर कमांड योजना पर विचार-विमर्श की जरूरत पर बल देते हुए कहा था कि जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया था कि दिल्ली में एक संयुक्त योजना और समन्वय केंद्र बनाया जाए, जिससे तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय हो सके।

वायु प्रमुख ने आत्मनिर्भरता पर कहा कि देश सही दिशा में बढ़ रहा है पर रफ्तार बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने रेगुलेटरी एंड पॉलिसी अकोमोडेशंस का जिक्र करते हुए कहा कि निजी उद्योग और छोटे उद्यम भी रक्षा क्षेत्र में सक्रिय रूप से जुड़ सकें। एयर चीफ ने जोर दिया कि जहां देश की विशेषज्ञता कम है, वहां सही साझेदारी करके क्षमता बढ़ाई जानी चाहिए।

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