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1909 में शुरू हुए फौजी अखबार “सैनिक समाचार” के पूरे हुए 117 साल, दो विश्व युद्धों से लेकर आज तक है जवानों की आवाज

द्वितीय विश्व युद्ध के समय तो इस पत्रिका की लोकप्रियता चरम पर पहुंच गई। इसकी सर्कुलेशन तीन लाख से अधिक कापियों तक पहुंच गई। इस दौरान ‘जंग की खबरें’ नाम से विशेष सप्लीमेंट निकाले गए...

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📍नई दिल्ली | 6 Jan, 2026, 10:51 AM

Sainik Samachar 117 Years: भारतीय सशस्त्र बलों की आवाज मानी जाने वाली पत्रिका सैनिक समाचार के 117 साल पूरे हो गए हैं। यह केवल एक पत्रिका नहीं है, बल्कि भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के शौर्य इतिहास का जीवित दस्तावेज है। अंग्रेजी शासनकल से लेकर आजाद भारत तक, दो विश्व युद्धों से लेकर आधुनिक रक्षा सुधारों तक, सैनिक समाचार ने हर दौर की कहानी अपने पन्नों में दर्ज की है।

Sainik Samachar 117 Years: उर्दू साप्ताहिक से शुरू हुआ सफर

सैनिक समाचार की शुरुआत 2 जनवरी 1909 को हुई थी। उस समय इसका नाम फौजी अखबार था और यह उर्दू भाषा का साप्ताहिक था। इसका प्रकाशन इलाहाबाद से होता था, जबकि संपादकीय कार्यालय शिमला में था। यह अखबार खास तौर पर भारतीय सेना के जवानों के लिए निकाला गया था, ताकि उन्हें सेना से जुड़ी खबरें, आदेश और सूचनाएं अपनी भाषा में मिल सकें।

उस दौर में बिजली हर जगह नहीं थी, इसलिए अखबार को इस तरह छापा जाता था कि उसे मिट्टी के तेल के लैंप की रोशनी में भी आसानी से पढ़ा जा सके। उस समय इसकी कीमत एक आना प्रति प्रति रखी गई थी और सालाना सदस्यता चार रुपये थी। उस समय यह राशि भी एक आम सैनिक के लिए सोच-समझकर खर्च की जाने वाली रकम मानी जाती थी। (Sainik Samachar 117 Years)

हिंदी और पंजाबी में विस्तार

1909 में ही फौजी अखबार के हिंदी और पंजाबी संस्करण भी शुरू किए गए। इन संस्करणों में केवल सैन्य समाचार ही नहीं, बल्कि गांवों के विकास, समाज सुधार और सामान्य ज्ञान से जुड़ी सामग्री भी छपती थी। इसका मकसद सैनिकों को सिर्फ युद्ध की जानकारी देना नहीं, बल्कि उन्हें जागरूक नागरिक बनाना भी था।

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1911 में छपाई को लाहौर स्थानांतरित किया गया। इससे छपाई की लागत कम हुई और अखबार की कीमत घटकर तीन पैसे रह गई। इससे इसकी पहुंच और बढ़ गई। (Sainik Samachar 117 Years)

दोनों विश्व युद्धों में अहम भूमिका

प्रथम विश्व युद्ध के दौरान फौजी अखबार की भूमिका और बढ़ गई। 1914 के बाद इसमें दैनिक सप्लीमेंट निकलने लगे और पन्नों की संख्या भी बढ़ा दी गई। युद्ध से जुड़ी ताजा खबरें सैनिकों तक तेजी से पहुंचाई जाने लगीं।

द्वितीय विश्व युद्ध के समय तो इस पत्रिका की लोकप्रियता चरम पर पहुंच गई। इसकी सर्कुलेशन तीन लाख से अधिक कापियों तक पहुंच गई। इस दौरान ‘जंग की खबरें’ नाम से विशेष सप्लीमेंट निकाले गए, जो कई भाषाओं में प्रकाशित होते थे। विदेशों में तैनात भारतीय सैनिकों के लिए काहिरा से रोमन उर्दू में संस्करण भी छापा गया।

इसी समय पत्रिका के स्टाफ की संख्या 15 से बढ़कर 60 हो गई। तस्वीरों के साथ खबरें छपने लगीं और दुनिया की अन्य घटनाओं, जैसे स्पेन का गृह युद्ध, की जानकारी भी सैनिकों तक पहुंचाई गई। (Sainik Samachar 117 Years)

आजादी के बाद बदला नाम

1947 में देश के बंटवारे के बाद कुछ समय के लिए इस पत्रिका का प्रकाशन रुका रहा। कर्मचारियों और प्रिंटरों के पाकिस्तान में जाने की वजह से मुश्किलें आईं, लेकिन जल्द ही इसे फिर से शुरू किया गया।

1954 में बड़ा बदलाव हुआ। पत्रिका को पखवाड़े में एक बार प्रकाशित करने का फैसला लिया गया और सभी संस्करणों के लिए एक ही नाम रखा गया सैनिक समाचार। इसके बाद यह नाम भारतीय सशस्त्र बलों के साथ स्थायी तौर पर जुड़ गया। (Sainik Samachar 117 Years)

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बढ़ा भाषाओं का दायरा 

समय के साथ सैनिक समाचार को देश की कई भाषाओं को भी निकाला गया। इसका मलयालम संस्करण 1964 में शुरू हुआ। जबकि बंगाली संस्करण 1971 में आया। वहीं, असमिया, कन्नड़ और ओड़िया संस्करण 1983 में जोड़े गए।

आज सैनिक समाचार 13 भाषाओं में प्रकाशित होता है, जिनमें हिंदी, अंग्रेज़ी, उर्दू, पंजाबी, तमिल, तेलुगु, मराठी, मलयालम, बंगाली, असमिया, कन्नड़, ओड़िया और गोरखाली शामिल हैं। इतनी भाषाओं में प्रकाशित होने वाली यह दुनिया की गिनी-चुनी सैन्य पत्रिकाओं में से एक है।

वर्तमान में सैनिक समाचार रक्षा मंत्रालय के अधीन दिल्ली से प्रकाशित होता है। इसकी सर्कुलेशन लगभग 22,000 प्रतियों का है। इसमें डिफेंस से जुड़े ताजा अपडेट, सैन्य अभ्यास, पूर्व सैनिकों की कहानियां, सम्मान और वीरता से जुड़ी रिपोर्टें शामिल रहती हैं। यह पत्रिका जवानों, जेसीओ, एनसीओ और अधिकारियों के लिए आज भी उतनी ही उपयोगी है, जितनी सौ साल पहले थी। (Sainik Samachar 117 Years)

Sainik Samachar 117 Years: डिजिटल वर्जन की तैयारी

117वीं वर्षगांठ के मौके पर सैनिक समाचार के संपादक ने भविष्य की योजनाओं को लेकर अहम बातें साझा कीं। उनके अनुसार, “हम पूरी पत्रिका का कायाकल्प कर रहे हैं। बहुत जल्द यह ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और हमारे मोबाइल ऐप पर भी उपलब्ध होगी।

पाठकों के लिए कई नए सेक्शन जोड़े जाएंगे, खासकर रक्षा विषयों पर विस्तृत सामग्री दी जाएगी। पत्रिका की आर्थिक मजबूती के लिए विज्ञापन भी शुरू किए जाएंगे और पन्नों की संख्या में काफी बढ़ोतरी होगी। इसके साथ ही सैनिक समाचार अपने बैनर तले विभिन्न विषयों पर सेमिनार भी आयोजित करेगा।” (Sainik Samachar 117 Years)

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