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रूस ने शाहेद ड्रोन पर लगा दी यह घातक मिसाइल, इस नए इनोवेशन से उड़ गए यूक्रेन के होश

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📍नई दिल्ली | 6 Jan, 2026, 1:59 PM

Russia Shahed drone MANPADS: रूस-यूक्रेन युद्ध को शुरू हुए 3 साल 10 महीने हो चुके हैं। लेकिन जंग है कि खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। वहीं जंग में ड्रोन सबसे अहम हथियार बन चुके हैं, जिन्होंने पूरी दुनिया की सैन्य सोच को ही बदल दिया है। लंबे समय से चल रही ड्रोन वॉर में रोजाना नए नए इनोवेशन भी देखने को मिल रहे हैं। जंग में एक नया और खतरनाक इनोवेशन देखने को मिला है। पहली बार यह पुष्टि हुई है कि रूस ने अपने ड्रोन को मैनपैड्स से लैस किया है। जिसके बाद ये ड्रोन अब और घातक हो गया है।

पहली बार यह पुष्टि हुई है कि रूस ने अपने शाहेद कामिकाजे ड्रोन को मैन-पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम (MANPADS) से लैस कर दिया है। वहीं अब ये ड्रोन केवल जमीन पर नहीं, बल्कि हवा में उड़ रहे हेलीकॉप्टर और लो-फ्लाइंग एयरक्राफ्ट के लिए भी खतरा बन सकते हैं। यूक्रेनी रेडियो टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट सेरही ब्रेस्ट्रेनोव ने इस नई तकनीक की पहचान की। यह ऐसा पहला मामला है, जब किसी शाहेद ड्रोन पर इग्ला या वर्बा जैसे मैनपैड्स जैसे मिसाइल सिस्टम को लगाया गया है। (Russia Shahed drone MANPADS)

Russia Shahed drone MANPADS: क्या है शाहेद ड्रोन और क्यों है खतरनाक?

शाहेद-136 ड्रोन मूल रूप से ईरान का बनाया एक वन-वे अटैक ड्रोन है, जिसे रूस बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहा है। रूस ने इन्हें गेरान-2 नाम दिया है। इन ड्रोन की खूबी यह है कि ये सस्ते होते हैं, लंबी दूरी तक उड़ान भर सकते हैं और सीधे टारगेट से टकराकर ब्लास्ट करते हैं।

अब तक इनका इस्तेमाल यूक्रेन के बिजली घरों, शहरों, सैन्य ठिकानों और इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों के लिए होता रहा है। लेकिन अब इस ड्रोन को रूस ने केवल “उड़ता हुआ बम” न रखकर, एयर डिफेंस प्लेटफॉर्म बनाने की कोशिश शुरू कर दी है। (Russia Shahed drone MANPADS)

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Russia Shahed drone MANPADS: कैसे किया अपग्रेड

इस अपग्रेडेड शाहेद ड्रोन में एक कैमरा और रेडियो मॉडेम लगाया गया था। यह ड्रोन पूरी तरह ऑटोमैटिक नहीं था, बल्कि इसे रिमोट तरीके से कंट्रोल किया जा रहा था। मिसाइल को ड्रोन ऑपरेटर रिमोट से लॉन्च कर सकता है। यह ऑपरेटर रूसी इलाके से ड्रोन को कंट्रोल करता है। कैमरे से मिलने वाली लाइव वीडियो फीड के जरिए वह यह तय करता है कि कब और किस दिशा में मिसाइल दागनी है।

Russia Shahed Drone MANPADS
Russia Arms Shahed Drones With MANPADS, Creating New Threat for Ukrainian Helicopters

रूस ने समय-समय पर शाहेद ड्रोन में कई छोटे-छोटे बदलाव किए हैं। इनमें नए गाइडेंस सिस्टम, बेहतर कम्युनिकेशन लिंक और इलेक्ट्रॉनिक काउंटरमेजर्स शामिल हैं। इन बदलावों का मकसद यूक्रेनी एयर डिफेंस को चकमा देना और ड्रोन को ज्यादा असरदार बनाना रहा है। (Russia Shahed drone MANPADS)

Russia Shahed drone MANPADS: क्या है ड्रोन पर लगा मैनपैड्स?

MANPADS यानी मैन-पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम एक ऐसा मिसाइल सिस्टम होता है, जिसे आमतौर पर एक सैनिक कंधे पर रखकर हेलीकॉप्टर या लो-फ्लाइंग एयरक्राफ्ट पर दागता है। रूस के पास दो तरह के मैनपैड्स सिस्टम हैं, इनमें 9के38 इग्ला और 9के333 वर्बा (इग्ला का एडवांस वर्जन) है।

मैनपैड्स सिस्टम आमतौर पर इन्फैंट्री के लिए बनाए जाते हैं। इग्ला और वर्बा जैसी मिसाइलें इंफ्रारेड होमिंग तकनीक पर काम करती हैं, यानी ये टारगेट की गर्मी को पकड़कर उसे ट्रैक करती हैं। इनकी मारक दूरी करीब 5 से 6 किलोमीटर तक होती है और ये हेलीकॉप्टर या कम ऊंचाई पर उड़ रहे विमानों के लिए खतरनाक मानी जाती हैं। इन्हें ड्रोन पर लगाना तकनीकी रूप से आसान नहीं होता, लेकिन अब पहली बार इन्हीं मिसाइलों को एक ड्रोन के ऊपर फिट किया गया है। रूस ने यह प्रयोग करके यह दिखा दिया है कि वह नए-नए तरीकों से यूक्रेन के डिफेंस सिस्टम को चुनौती देना चाहता है। (Russia Shahed drone MANPADS)

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Russia Shahed Drone MANPADS
Russia Arms Shahed Drones With MANPADS, Creating New Threat for Ukrainian Helicopters

ये मिसाइलें इन्फ्रारेड होमिंग तकनीक पर काम करती हैं, यानी ये हेलीकॉप्टर या विमान की गर्मी को पकड़कर लक्ष्य तक पहुंचती हैं। आमतौर पर इनकी मारक दूरी 5 से 6 किलोमीटर तक होती है।

इस नए सेटअप का मुख्य मकसद यूक्रेनी हेलीकॉप्टरों और विमानों को डराना और उनके इंटरसेप्शन मिशन को मुश्किल बनाना है। अब तक यूक्रेनी फोर्सेस शाहेद ड्रोन को खासकर रात के समय जमीन से एयर डिफेंस सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और फाइटर जेट या हेलीकॉप्टरों की मदद से गिराती रही हैं। (Russia Shahed drone MANPADS)

Russia Shahed drone MANPADS: यूक्रेन ने जारी की चेतावनी

यूक्रेन ने इस नए खतरे को लेकर यूक्रेनी आर्मी एविएशन के पायलटों को सीधे तौर पर चेतावनी भी दी है। उन्होंने कहा कि शाहेद ड्रोन के सामने से सीधे उड़ान भरते हुए उसे इंटरसेप्ट करने की कोशिश अब ज्यादा खतरनाक हो सकती है। खास तौर पर उन हेलीकॉप्टरों और लो-फ्लाइंग एयरक्राफ्ट के लिए जोखिम बढ़ गया है, जो इन ड्रोन को गिराने का काम करते हैं। वहीं, इसे देखते हुए यूक्रेन अपने इंटरसेप्शन तरीकों में भी बदलाव कर रहा है। (Russia Shahed drone MANPADS)

कोई बड़ा “गेम-चेंजर” नहीं

हालांकि, कई सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि यह फिलहाल कोई बड़ा “गेम-चेंजर” नहीं है। शाहेद ड्रोन की स्पीड (150-200 किमी/घंटा) कम होती है, उसकी मैन्युवर करने की क्षमता सीमित है और मिसाइल को सही समय पर टारगेट पर लॉक कराना आसान नहीं होता। हेलीकॉप्टर फ्लेयर्स छोड़कर, दिशा बदलकर या जमीन की आड़ लेकर ऐसे हमलों से बच सकते हैं। यह आर-60 एयर-टू-एयर मिसाइल के पिछले प्रयोगों का ही नया रूप है।

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Russia Shahed drone MANPADS: लागत है बेहद ज्यादा

इसके अलावा, लागत भी अहम है। एक साधारण शाहेद ड्रोन की कीमत अपेक्षाकृत कम मानी जाती है, जबकि इग्ला या वर्बा मिसाइल उससे कहीं ज्यादा महंगी होती है। एक शाहेद की कीमत लगभग 20 हजार डॉलर होती है, जबकि एक इग्ला की कीमत 80 हजार डॉलर के लगभग पड़ती है, जो रूस के लिए महंगा सौदा है, क्योंकि रूस रोजाना 100 से ज्यादा ड्रोन्स लॉन्च करता है।

यूक्रेनी सेना की अनमैन्ड सिस्टम फोर्सेस ने दावा किया है कि उन्होंने ऐसे ही एक अपग्रेडेड शाहेद ड्रोन को इंटरसेप्ट कर गिरा दिया है। बताया गया है कि 412वीं नेमेसिस ब्रिगेड के डार्कनोड बटालियन ने इस ड्रोन को गिराया था। ड्रोन को गिराने के बाद उसके मलबे में मैनपैड्स सिस्टम और उससे जुड़े अतिरिक्त उपकरण पाए गए थे। (Russia Shahed drone MANPADS)

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  • रूस ने शाहेद ड्रोन पर लगा दी यह घातक मिसाइल, इस नए इनोवेशन से उड़ गए यूक्रेन के होश

    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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