📍नई दिल्ली | 29 Dec, 2025, 7:07 PM
DAC Meeting 2025: सोमवार को हुई इस साल की आखिरी डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल यानी डीएसी की बैठक में तीनों सेनाओं के लिए तकरीबन 79,000 करोड़ रुपये के रक्षा प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। यह बैठक रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में नई दिल्ली में हुई। इस फैसले से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना की ऑपरेशनल क्षमताओं में बड़ा इजाफा होगा। खास बात यह रही कि इस बैठक में एंटी-ड्रोन सिस्टम, लंबी दूरी के सटीक मार करने वाले हथियारों और आधुनिक सर्विलांस सिस्टम को प्राथमिकता दी गई।
रक्षा मंत्रालय की तरफ से जारी रिलीज के मुताबिक यह मंजूरी एक्सेप्टेंस ऑफ नेसेसिटी (एओएन) के तहत दी गई है। बता दें कि एओएन किसी भी बड़ी डिफेंस डील की पहली और सबसे अहम प्रक्रिया होती है। एओएन मिलने के बाद अब इन प्रोजेक्ट्स पर आगे की खरीद और कॉन्ट्रैक्ट प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी। रक्षा मंत्रालय का कहना है कि इन फैसलों का मकसद सेना को भविष्य की जंग के लिए तैयार करना और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देना है।
DAC Meeting 2025: सेना की जरूरतों पर खास फोकस
साल की आखिरी डीएसी बैठक में सबसे ज्यादा फोकस भारतीय सेना की जरूरतों पर रहा। हाल के सालों में दुनिया भर में हुए युद्धों से यह साफ हो गया है कि ड्रोन और प्रिसिजन गाइडेड हथियार अब किसी भी युद्ध का अहम हिस्सा बन चुके हैं। इन्हीं अनुभवों को ध्यान में रखते हुए सेना के लिए कई बड़े सिस्टम्स को मंजूरी दी गई।
सैन्य सूत्रों के मुताबिक सबसे अहम फैसला इंटीग्रेटेड ड्रोन डिटेक्शन एंड इंटरडिक्शन सिस्टम (IDD&IS) मार्क-II को लेकर लिया गया। यह एक एडवांस्ड काउंटर-ड्रोन सिस्टम है, जिसे खास तौर पर दुश्मन के ड्रोन को पहचानने, ट्रैक करने और नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें हाई-पावर लेजर वेपन सिस्टम लगा होगा, जो लंबी दूरी से ही ड्रोन को मार गिराने में सक्षम है। यह सिस्टम न सिर्फ ड्रोन की मूवमेंट को ट्रैक कर सकता है, बल्कि उनके कंट्रोल और नेविगेशन लिंक को भी जाम कर सकता है।
🇮🇳🛡️ Major Boost to India’s Military Modernisation in DAC Meeting
The Defence Acquisition Council has approved defence procurement proposals worth ₹80,000 crore, strengthening capabilities across the Army, Navy and Air Force.
Key approvals include:
🔹 Overhaul of T-90 tanks
🔹…— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) December 29, 2025
सेना सूत्रों के मुताबिक, इंटीग्रेटेड ड्रोन डिटेक्शन एंड इंटरडिक्शन सिस्टम मार्क-II की खासियत यह है कि यह कम पावर वाले, बार-बार फ्रीक्वेंसी बदलने वाले और नॉन-स्टैंडर्ड ड्रोन सिग्नल्स को भी पहचान सकता है। इसका मतलब यह है कि अगर दुश्मन एक साथ कई ड्रोन भेजता है, यानी ड्रोन स्वार्म अटैक करता है, तब भी यह सिस्टम काम करेगा। इसे टैक्टिकल बैटल एरिया के साथ-साथ देश के अंदरूनी इलाकों में मौजूद अहम सैन्य और नागरिक ठिकानों की सुरक्षा के लिए तैनात किया जाएगा।
DAC Meeting 2025: लो-लेवल लाइट वेट रडार की मंजूरी
ड्रोन खतरे से निपटने के लिए ही सेना को लो लेवल लाइट वेट रडार (इम्प्रूव्ड) यानी LLLR(I) को भी मंजूरी दी गई है। यह एक खास तरह का सर्विलांस रडार है, जिसे छोटे और बेहद नीचे उड़ने वाले ड्रोन और अनमैन्ड एरियल सिस्टम को पकड़ने के लिए तैयार किया गया है। आम रडार सिस्टम कई बार ऐसे छोटे ड्रोन को नहीं पकड़ पाते, लेकिन यह खास रडार इस कमी को दूर करेगा।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह रडार संवेदनशील सीमावर्ती इलाकों और अहम इंस्टॉलेशंस के आसपास तैनात किया जाएगा। इससे किसी भी संदिग्ध हवाई गतिविधि की समय रहते पहचान हो सकेगी और सेना को तुरंत कार्रवाई का मौका मिलेगा।
DAC Meeting 2025: लोइटरिंग म्यूनिशन से बढ़ेगी सेना की ताकत
डीएसी ने लोइटरिंग म्यूनिशन सिस्टम की खरीद को भी मंजूरी दी है। इसे आम भाषा में ‘कामिकाजे ड्रोन’ भी कहा जाता है। यह ड्रोन हवा में कुछ समय तक मंडराता रहता है और जैसे ही टारगेट दिखता है, सीधे उस पर हमला कर देता है। सेना का कहना है कि यह सिस्टम हाई वैल्यू टारगेट्स को बेहद सटीक तरीके से नष्ट करने में मदद करेगा।
यह लोइटरिंग म्यूनिशन पूरी तरह स्वदेशी होगा और इसे हाल ही में गठित शक्तिबाण और दिव्यास्त्र यूनिट्स को दिया जाएगा। इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर जैसे कठिन माहौल में भी यह सिस्टम काम करने में सक्षम होगा। सेना के अनुसार, इससे दुश्मन पर सिर्फ फिजिकल ही नहीं, बल्कि मानसिक दबाव भी बनेगा।
पिनाका के लिए 120 किलोमीटर रेंज के गाइडेड रॉकेट
सेना की डीप-स्ट्राइक क्षमता को और मजबूती देने के लिए पिनाका मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम (MLRS) के लिए लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट को मंजूरी दी गई है। अभी तक पिनाका की रेंज करीब 75 किलोमीटर तक थी, लेकिन नए गाइडेड रॉकेट की मदद से यह दूरी बढ़कर 120 किलोमीटर तक हो जाएगी।
रक्षा अधिकारियों के मुताबिक, यह रॉकेट पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से तैयार किया गया है और इसमें चार अलग-अलग तरह के वॉरहेड्स लगाए जा सकते हैं। इससे सेना को दुश्मन के हाई वैल्यू टारगेट्स पर ज्यादा असरदार और सटीक हमला करने का विकल्प मिलेगा।
DAC Meeting 2025: नेवी को मिलेंगे और HALE ड्रोन
डीएसी बैठक में भारतीय नौसेना के लिए भी कई अहम फैसले लिए गए। नौसेना के लिए बोलार्ड पुल टग्स की खरीद को मंजूरी दी गई है। ये टग्स बंदरगाहों में जहाजों और पनडुब्बियों को सुरक्षित तरीके से बर्थिंग और अनबर्थिंग में मदद करते हैं। इससे नेवी ऑपरेशंस ज्यादा सुरक्षित और सुचारु हो सकेंगे।
इसके अलावा, हाई फ्रीक्वेंसी सॉफ्टवेयर डिफाइंड रेडियो (HF SDR) मैनपैक की भी मंजूरी दी गई है। यह सिस्टम बोर्डिंग और लैंडिंग ऑपरेशंस के दौरान लंबी दूरी की सुरक्षित कम्युनिकेशन सुनिश्चित करेगा।
सबसे अहम फैसला हाई एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस (HALE) रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट सिस्टम को लीज पर लेने का है। इससे हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस (ISR) क्षमता में बड़ा इजाफा होगा और मैरिटाइम डोमेन अवेयरनेस मजबूत होगी।
बता दें कि अभी भारतीय नौसेना के पास 2 हाई एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट सिस्टम हैं। ये दोनों एमक्यू-9बी सीगार्जियन ड्रोन अमेरिका से लीज पर लिए गए हैं, जो 2020 से ऑपरेशनल हैं। हालांकि, इनमें से एक क्रैश हो गया था, जिसका रिप्लेसमेंट नेवी को मिल चुका है। ये ड्रोन हिंद महासागर में लगातार सर्विलांस और मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस के लिए इस्तेमाल हो रहे हैं। वहीं, अमेरिका से खरीदे गए 31 एमक्यू-9बी ड्रोन्स (जिनमें नौसेना के लिए 15 हैं) की डिलीवरी 2029 से शुरू होगी।
वायुसेना की मारक और ट्रेनिंग क्षमता बढ़ेगी
भारतीय वायुसेना के लिए भी इस डीएसी बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। इनमें अस्त्रा मार्क-II एयर-टू-एयर मिसाइल शामिल है, जिसकी रेंज ज्यादा है और यह दुश्मन के विमानों को दूर से ही मार गिराने में सक्षम होगी। इसके अलावा स्पाइस-1000 लॉन्ग रेंज गाइडेंस किट्स को भी मंजूरी दी गई है, जिससे सटीक निशाना लगाया जा सकेगा।
स्पाइस-1000 लॉन्ग रेंज गाइडेंस किट्स को इजरायली कंपनी राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स ने बनाया है। स्पाइस-1000 प्रिसिजन गाइडेड म्यूनिशन किट सामान्य अनगाइडेड बॉम्ब्स जैसे 450 किग्रा/1000 पाउंड एमके-83 को स्मार्ट ग्लाइड बॉम्ब में बदल देती हैं। इससे वायुसेना स्टैंड-ऑफ डिस्टेंस से हाई-वैल्यू टारगेट्स (बंकर्स, कमांड सेंटर्स आदि) पर सटीक हमला करने की क्षमता मिलेगी। देगी।
इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह 100 किलोमीटर तक की दूरी से हमला करने की क्षमता देती है, जिससे पायलट को दुश्मन की एयर डिफेंस के खतरे में जाने की जरूरत नहीं पड़ती। यह दिन हो या रात, किसी भी मौसम में काम करता है और जीपीएस या कैमरे की मदद से बहुत सटीक निशाना लगाता है। इसमें पंख (डिप्लॉयेबल विंग्स) भी होते हैं जिससे यह हवा में दूर तक ग्लाइड कर जाता है।
भारतीय वायु सेना के पास पहले से स्पाइस-2000 है जिसका इस्तेमाल 2019 की बालाकोट एयरस्ट्राइक में मिराज-2000 विमानों से किया गया था। स्पाइस-1000 की कुछ किट्स भी 2019 में आपात खरीद के तहत ली गई थीं। स्पाइस-1000 मिराज-2000, जगुआर, सु-30एमकेआई आदि पर इंटीग्रेट हो सकता है।
इसके अलावा डीएसी में वायुसेना के पायलटों की ट्रेनिंग को बेहतर बनाने के लिए एलसीए तेजस के लिए फुल मिशन सिम्युलेटर को मंजूरी दी गई है। वहीं, ऑटोमैटिक टेक-ऑफ और लैंडिंग रिकॉर्डिंग सिस्टम से एविएशन सिक्योरिटी को और मजबूत किया जाएगा।
DAC Meeting 2025: स्वदेशी रक्षा उत्पादन पर जोर
रक्षा मंत्रालय का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया में स्वदेशीकरण पर खास ध्यान दिया गया है। ज्यादातर सिस्टम्स देश में ही विकसित किए गए हैं या किए जा रहे हैं। इससे न सिर्फ सेना को आधुनिक हथियार मिलेंगे, बल्कि घरेलू रक्षा उद्योग को भी मजबूती मिलेगी।

