📍नई दिल्ली | 22 Dec, 2025, 1:10 PM
CAG Report 2025: भारतीय सेना की इमरजेंसी खरीद को लेकर सीएजी ने जो रिपोर्ट पेश की है, उसमें कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, सेना की इमरजेंसी खरीद प्रक्रिया में जितने भी कॉन्ट्रैक्ट्स की जांच की गई, उनमें से ज्यादातर वक्त पर पूरे ही नहीं हुए। सीएजी ने बताया, करीब 72 फीसदी मामलों में सप्लायर्स डेडलाइन तक ऑर्डर की डिलीवरी तक नहीं कर सके। (CAG Report 2025)
ये रिपोर्ट दिसंबर 2025 में संसद में रखी गई थी, जिसमें मार्च 2023 तक के डिफेंस सर्विसेज (आर्मी) से जुड़े समझौतों का ऑडिट हुआ था। इसमें डिफेंस मिनिस्ट्री, आर्मी, मिलिट्री इंजीनियर सर्विसेज, बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन और डीआरडीओ जैसी एजेंसियों से जुड़े कई मामलों की जांच भी शामिल है।
CAG Report 2025: 72 फीसदी मामलों में ऑर्डर की डिलीवरी है नहीं
गलवान घाटी में चीन के साथ तनाव बढ़ने के बाद, जुलाई 2020 में सेना को कुछ चीजों की तुरंत जरूरत पड़ी। उस वक्त डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल ने इमरजेंसी खरीद की इजाजत दी, ताकि हथियार, उपकरण, गोला-बारूद और जरूरी सिस्टम्स जल्दी खरीदे जा सके। फास्ट ट्रैक प्रोसीजर के तहत कई नियमों में छूट मिली और आर्मी हेडक्वार्टर्स को ज्यादा अधिकार दिए गए, ताकि खरीद में देरी न हो। इसका मकसद था कि सिस्टम्स जल्द से जल्द फौजियों तक पहुंच जाए। (CAG Report 2025)
लेकिन, सीएजी रिपोर्ट बताती है, हकीकत में ऐसा हो नहीं पाया। जिन कॉन्ट्रैक्ट्स की ऑडिट हुई, उनमें से 72 फीसदी मामलों में ऑर्डर वक्त पर डिलीवर नहीं हुआ। जबकि नियम यही थे कि खरीद एक साल के अंदर या टेंडर में जितना वक्त तय किया गया है, उसी में पूरी हो जानी चाहिए। सीएजी ने यह भी नोट किया कि कई बार सेना ने नियमों से बाहर जाकर बदलाव किए, और बाद में उन्हें जैसे-तैसे नियमों में फिट करने की कोशिश की। रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसे मामलों में मंजूरी सिर्फ आर्मी हेडक्वार्टर्स लेवल पर ही मिलनी चाहिए थी। (CAG Report 2025)
ऑपरेशन सिंदूर के बाद इमरजेंसी खरीद के लिए रक्षा मंत्रालय ने मौजूदा वित्त वर्ष में इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट-6 के तहत करीब 40 हजार करोड़ रुपये रखे थे, ताकि सेना की कमियों को दूर किया जा सके और गोला-बारूद, स्पेयर पार्ट्स वगैरह का स्टॉक बढ़ाया जा सके। इससे पहले इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट-5 में काउंटर इंसर्जेंसी जरूरतों के लिए और इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट-1 से इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट-4 तक की खरीद गलवान के बाद की गई थी। बावजूद इसके, सीएजी ने पाया कि कई प्रोजेक्ट्स पूरे नहीं हो पाए या बहुत देर से पूरे हुए। (CAG Report 2025)
रद्द करने पड़े 30 फीसदी प्रोजेक्ट्स
अब बात करते हैं स्वदेशीकरण की। सीएजी ने ये भी बताया कि देश में बन रहे हथियार और स्पेयर पार्ट्स की जो सप्लाई ऑर्डर दी गई थी, उनमें से लगभग 30 फीसदी प्रोजेक्ट्स बीच में ही रद्द करने पड़े। ये प्रोजेक्ट्स आर्मी के डायरेक्टरेट ऑफ इंडिजिनाइजेशन (डीओआई) के तहत चल रहे थे। बीते पांच साल में इस पर करीब 24.32 करोड़ रुपये खर्च हुए, फिर भी कई सप्लायर्स तय क्वालिटी या टेक्निकल स्टैंडर्ड्स पर सामान नहीं बना पाए। (CAG Report 2025)
डीओआई की स्थापना जनवरी 2010 में इसी मकसद से हुई थी कि जरूरी स्पेयर पार्ट्स देश में ही बनें। लेकिन रिपोर्ट में साफ कहा गया है, इंडिजिनाइजेशन की पूरी प्रक्रिया कई स्तरों पर सुस्त और कमजोर रही। जिन पार्ट्स के लिए ऑर्डर दिए गए, उनमें से लगभग 30 फीसदी ऑर्डर बीच में ही रद्द कर दिए गए। वजह, कई कंपनियों को दिलचस्पी ही नहीं थी, कुछ तकनीकी तौर पर सामान नहीं बना सकीं, और कई बार तो जरूरी कच्चा माल ही नहीं मिला।
सीएजी ने इसे लेकर डीओआई को भी कटघरे में खड़ा किया है। बोला गया, शुरू से ही सप्लायर्स से बेहतर कम्युनिकेशन होना चाहिए था। उन्हें साफ-साफ बताना चाहिए था कि इंडिजिनाइजेशन के लिए क्या-क्या चाहिए। ऊपर से, डीओआई और जुड़ी एजेंसियों में स्टाफ की कमी की वजह से कंपनियों की जांच और ट्रायल सैंपल वगैरह में भी देरी होती रही।
रिपोर्ट में ये भी सामने आया कि जिन स्पेयर पार्ट्स को देश में बनाना कामयाब रहा, उनमें से सिर्फ 43 फीसदी को ही आर्मी के स्टॉक रिकॉर्ड में अपडेट किया गया। बाकी 57 फीसदी मामलों में प्रोक्योरमेंट एजेंसियों को पता ही नहीं था कि ये पार्ट्स अब भारत में बन रहे हैं। कई डिपो तो उन्हीं कंपनियों से खरीद ही नहीं कर रहे थे, जिन्होंने इन पार्ट्स को स्वदेश में ही तैयार कर लिया है।
सीएजी ने सिफारिश की है कि रक्षा मंत्रालय को डीओआई की कार्यशैली की दोबारा समीक्षा करनी चाहिए और इसे मजबूत बनाना होगा, ताकि स्वदेशी स्पेयर पार्ट्स की खरीद में कोई देरी या दिक्कत न आए।
आखिर में, रिपोर्ट के मुताबिक स्वदेशीकरण से जुड़े ऑर्डर रद्द होने की बड़ी वजह सप्लायर्स का ढीला-ढाला रवैया रहा। कहीं दिलचस्पी नहीं दिखाई, कहीं टेक्निकल दिक्कतें आईं, तो कहीं कच्चा माल ही नहीं मिला। इन सब वजहों से इंडिजिनाइजेशन के अलग-अलग स्टेप्स में देरी हुई, और आखिरकार सेना को जिन स्पेयर पार्ट्स की देश में बनने की आस थी, वो पूरी नहीं हो पाई।
सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में साफ-साफ कहा है कि रक्षा मंत्रालय और सेना को बजट, खरीद, ट्रेनिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर की कमियों पर अब और ज्यादा ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा है कि मानव संसाधन, ट्रेनिंग और फाइनेंस मैनेजमेंट में सुधार जरूरी है, वरना आगे फिर देरी होगी। (CAG Report 2025)

