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S-400 Air Defence System: भारत खरीद सकता है पांच और एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम, चीनी पीएल-15 मिसाइलों का भी तोड़ निकालने की तैयारी

S-400 Air Defence System

S-400 Air Defence System: भारत और रूस के बीच एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम की पांच और यूनिट्स खरीदने को लेकर बातचीत चल रही है। रक्षा मंत्रालय के टॉप अफसर इस हफ्ते मॉस्को में रूसी अधिकारियों के साथ मुलाकात करेंगे। इस बैठक में तय किया जाएगा कि ये सिस्टम भारत सीधे खरीदेगा या कुछ यूनिट्स का निर्माण देश में ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी के तहत किया जाएगा।

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यह फैसला ऐसे समय में लिया जा रहा है जब ऑपरेशन सिंदूर के दौरान एस-400 ने पाकिस्तान के जबरदस्त नुकसान पहुंचाया था। आलम ये था कि 10 मई को सीजफायर के एलान से पहले तक पाकिस्तान वायुसेना अपने फाइटर जेट्स को सिंधु नदी के पूर्वी इलाके में उड़ान भरने तक की हिम्मत नहीं जुटा पाई थी।

300 किमी पीछे चले गए थे पाक के जेट्स

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने चीन से खरीदे लंबी दूरी के हथियारों से भारतीय एयरबेस आदमपुर और भुज को निशाना बनाया। शुरुआती हमलों के बाद जब भारत ने अपना एस-400 एक्टिव किया तो पाकिस्तान इतना घबरा गया कि उसने अपने सभी एयर एसेट्स को 300 किलोमीटर पीछे खींच लिया। 10 मई को पाकिस्तान का कोई भी फाइटर जेट भारतीय सीमा के पास उड़ान नहीं भर सका।

इसी दौरान भारतीय एस-400 ने पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में 314 किलोमीटर दूर एक पाकिस्तानी अवॉक्स विमान को मार गिराया था। इसके अलावा एस-400 ने उत्तर में पाकिस्तान के एप-16 और जेएफ-17 विमानों को भी निशाना बनाया। इन हमलों ने एस-400 को केवल एक “स्टैंड-ऑफ वेपन” नहीं, बल्कि एक प्रभावी डिटरेंस हथियार बना दिया।

बाकी दो 2026 के आखिर तक डिलीवरी

अक्टूबर 2018 में भारत ने रूस के साथ 5.43 बिलियन डॉलर (लगभग 40,000 करोड़ रुपये) की डील पर दस्तखत किए थे, जिसके तहत पांच एस-400 सिस्टम खरीदे जाने थे। इन पांच में से तीन स्क्वाड्रन भारत को पहले ही मिल चुके हैं और बाकी दो 2026 के आखिर तक मिल जाएंगे।

अब दोनों देशों के बीच अलग से पांच सिस्टम की खरीदने को लेकर सहमति बन चुकी है। कीमत 2018 की दर से सालाना बढ़ोतरी के साथ तय की गई है। योजना के अनुसार तीन सिस्टम भारत सीधे खरीदेगा और बाकी दो का निर्माण भारतीय प्राइवेट सेक्टर कंपनियों के सहयोग से किया जाएगा।

S-400 Air Defence System – नई डील गवर्नमेंट-टू-गवर्नमेंट

एस-400 खरीद की नई डील गवर्नमेंट-टू-गवर्नमेंट होगी। इसके तहत भारत में मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल की सुविधा भी बनाई जाएगी। इसके लिए प्राइवेट सेक्टर को भी शामिल किया जाएगा, ताकि सिस्टम की सर्विसिंग भारत में ही हो सके। सूत्रों के अनुसार एस-500 सिस्टम की खरीद की खबरें गलत हैं। रूस का एस-500 फिलहाल डिजाइन के स्तर पर है और उसका निर्यात शुरू नहीं हुआ है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 5 दिसंबर को भारत की यात्रा पर आने वाले हैं। माना जा रहा है कि इससे पहले इस नई डील को हरी झंडी दी जा सकती है।

क्या कहा था वायुसेना प्रमुख ने

हाल ही में भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह से जब प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूछा गया था कि क्या भारत अतिरिक्त S-400 Air Defence System देगा, तो उनका कहना था, “यह तो साफ है कि इस सिस्टम ने अच्छा प्रदर्शन किया है। ऐसे और सिस्टम की जरूरत है, और इसकी संख्या पर कोई सीमा नहीं है कि कितने खरीदे जा सकते हैं। अभी मैं इस पर ज्यादा कुछ नहीं कहूंगा कि हमारी योजना क्या है, हम और खरीदेंगे या कितनी संख्या में खरीदेंगे उन्होंने कहा कि यह एक प्रभावी हथियार प्रणाली साबित हुई है। हमारे अपने सिस्टम भी डेवलप हो रहे हैं, इसलिए इस पर फैसला लिया जाएगा।”

उनका इस बयान से संकेत मिलते हैं कि वायुसेना एस-400 से संतुष्ट है और भविष्य में अधिक यूनिट्स की खरीद पर विचार किया जा सकता है।

भारत का 7,000 किलोमीटर से अधिक लंबा तटीय क्षेत्र और उत्तरी सीमाएं रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील हैं। मौजूदा एस-400 स्क्वाड्रन इनका एक बड़ा हिस्सा कवर करते हैं, लेकिन पूरे देश में 360° कवरेज के लिए और यूनिट्स की जरूरत है।

नए सिस्टम भारतीय तटवर्ती इलाकों, उत्तरी कमान क्षेत्र और समुद्री इलाकों की सुरक्षा के लिए तैनात किए जा सकते हैं। इससे किसी भी संभावित हमले की स्थिति में भारत की रेस्पॉन्स क्षमता और बढ़ जाएगी।

पीएल-15 मिसाइलों का तोड़

इसके अलावा भारत, रूस से आरवीवी-बीडी एयर-टू-एयर मिसाइल की भी मांग कर रहा है जिसकी रेंज 200 किलोमीटर से अधिक है। इसे सुखोई-30 एमकेआई फ्लीट में लगाया जाएगा। पाकिस्तान पहले से चीनी पीएल-15 मिसाइलों का इस्तेमाल कर रहा है। आरवीवी-बीडी को सुखोई-30 एमकेआई में इंटीग्रेट करने के लिए ऑन-बोर्ड रडार अपग्रेड की जरूरत होगी।

भारत के स्वदेशी सिस्टम भी तैयार

S-400 Air Defence System के साथ-साथ भारत अपने स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम्स पर भी काम कर रहा है। डीआरडीओ के बनाए आकाश, मीडियम रेंज सरफेस टू एय़र मिसाइल और अन्य लंबी दूरी के मिसाइल सिस्टम भी भारतीय नेटवर्क का हिस्सा बन रहे हैं। एस-400 ने इस नेटवर्क में लंबी दूरी के टारगेट इंटरसेप्शन में एक “गेम चेंजर” की भूमिका निभाई है। इसकी मारक क्षमता 300 किसी से ज्यादा है और यह पाकिस्तान में अंदर तक घुस कर मार कर सकता है।

India is in advanced talks with Russia to acquire five additional S-400 air defence systems, boosting its long-range defensive capabilities. The S-400 played a decisive role during Operation Sindoor, deterring Pakistan’s air operations and neutralising key targets. The deal, expected before President Putin’s visit to India, includes both direct purchases and joint production with Indian firms. This move aims to strengthen India’s air defence along its vast borders and coastline while enhancing indigenous capabilities. The S-400’s proven effectiveness positions it as a critical asset in India’s evolving defence strategy and security architecture.

INS Androth Commissioning: भारतीय नौसेना में सोमवार को शामिल होगा आईएनएस अंद्रोथ, दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगा कर करेगा तबाह

Indian Navy INS Androth Commissioning

INS Androth Commissioning: नौसेना 6 अक्टूबर को विशाखापट्टनम के नेवल डॉकयार्ड में आईएनएस अंद्रोथ को कमीशन करने जा रही है। यह दूसरा एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट होगा, जिसे नौसेना के बेड़े में शामिल किया जाएगा। नौसेना के ईस्टर्न नेवल कमांड के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल राजेश पेंढरकर इसे नेवी को समर्पित करेंगे।

Indian Navy Androth: समंदर में एंटी-सबमरीन वॉरफेयर को मिलेगी मजबूती, इस दिन भारतीय नौसेना में शामिल होगा अंद्रोथ 

INS Androth Commissioning होना से भारतीय नौसेना की क्षमताओं में बढ़ोतरी होगी। पिछले कुछ महीनों में नौसेना के बेड़े में कई अत्याधुनिक युद्धपोतों को शामिल किया गया है। इससे पहले इस साल 18 जून को भारतीय नौसेना को पहली एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट आईएनएस अर्नाला कमीशन की गई थी।

आईएनएस अंद्रोथ को कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) ने बनाया है, जिसमें में 80 फीसदी से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। वहीं, आईएनएस अंद्रोथ के शामिल होने से विशेष रूप से तटीय क्षेत्रों में भारतीय नौसेना की एंटी-सबमरीन वॉरफेयर क्षमता में जबरदस्त बढ़ोतरी होगी। इससे पहले गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स ने पहली एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट आईएनएस अर्नाला को भी बनाया था।

हाल के महीनों में भारतीय नौसेना ने अर्नाला, निस्तार, उदयगिरी और नीलगिरि जैसे कई एडवांस वॉरशिप्स को अपने बेड़े में शामिल किया है। अब अंद्रोथ के जुड़ने के बाद नौसेना समुद्री अभियानों के पूरे स्पेक्ट्रम में संतुलित दिशा में आगे बढ़ रही है। आईएनएस अंद्रोथ के कमीशन होने के बाद नौसेना की ऑपरेशनल और स्ट्रैटेजिक क्षमताओं को मजबूत मिलेगी।

INS Androth Commissioning क्लास की है, जिसका नाम लक्षद्वीप के अंद्रोथ द्वीप के नाम पर रख गया है। यह पुराने पुरानी अभय-क्लास कोरवेट्स की जगह लेगी। इसकी लंबाई 77.6 मीटर और चौड़ाई 10.5 मीटर की है। इसका डिस्प्लेसमेंट 900 टन और ग्रॉस टनेज 1,490 टन है। 57 सदस्यों (7 अधिकारी सहित) के चालक दल वाली यह वाटर क्राफ्ट डीजल इंजन-वॉटरजेट प्रोपल्जन सिस्टम से ऑपरेट होती है। इसकी अधिकतम रफ्तार 25 नॉट्स है और 14 नॉट्स की स्पीड पर 1,800 नॉटिकल मील तक ऑपरेट कर सकती है। यह शैलो वाटर यानी उथले जल में ऑपरेशन के लिए डिजाइन की गई है।

इसमें एडवांस सोनार सिस्टम लगाया गया है, जिसमें हल-माउंटेड सोनार ‘अभय’ और लो-फ्रीक्वेंसी वेरिएबल डेप्थ सोनार शामिल हैं। हथियारों में लाइटवेट टॉरपीडोज, स्वदेशी एंटी-सबमरीन वॉरफेयर रॉकेट्स, 30 मिमी नेवल गन और दो 12.7 मिमी स्टेबलाइज्ड रिमोट कंट्रोल्ड गन शामिल हैं। साथ ही इसमें महिंद्रा डिफेंस का इंटीग्रेटेड एंटी-सबमरीन वॉरफेयर डिफेंस सूट लगा है, जो डिकॉय सिस्टम के रूप में काम करता है।

INS Androth Commissioning

यह शिप शैलो वाटर में पनडुब्बियों की डिटेक्शन, ट्रैकिंग और न्यूट्रलाइजेशन में सक्षम है। इसके अलावा यह समुद्री निगरानी, सर्च एंड रेस्क्यू, तटीय रक्षा, माइन बिछाने और लिटोरल जोन में सब-सर्फेस सर्विलांस में अहम भूमिका निभा सकती है। 13,440 करोड़ रुपये की लागत वाली 16 नावों की इस परियोजना को कोलकाता स्थित जीआरएसई और सीएसएल द्वारा बनाया जा रहा है। यह भारतीय महासागर क्षेत्र में चीनी और पाकिस्तानी पनडुब्बी खतरों से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

Missile Production to private sector: चीन-पाकिस्तान की दोहरी चुनौती को देखते हुए सरकार का बड़ा फैसला, अब प्राइवेट कंपनियां भी बनाएंगी मिसाइल और गोला-बारूद

Pinaka Rocket System
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Missile Production to private sector: भारत सरकार ने चीन-पाकिस्तान की दोहरी चुनौती को देखते हुए बड़ा फैसला लिया है। लंबे समय तक चलने वाले युद्ध की स्थिति में सेना के पास हथियारों की कमी न हो, इसके लिए सरकार ने मिसाइल और गोला-बारूद के उत्पादन को निजी क्षेत्र के लिए खोल दिया है। रक्षा मंत्रालय के इस फैसले को ‘आत्मनिर्भरता’ की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। इस कदम से न केवल देश की उत्पादन क्षमता में इजाफा होगा बल्कि विदेशी निर्भरता भी कम होगी।

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Missile Production to private sector

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब हाल में हुए ऑपरेशन सिंदूर ने यह साबित किया कि भविष्य के युद्ध पारंपरिक तरीकों की बजाय स्टैंड-ऑफ वेपन्स और लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों से लड़े जाएंगे। इस ऑपरेशन में पाकिस्तान ने चीन निर्मित लॉन्ग रेंज एयर-टू-एयर और एयर-टू-सरफेस मिसाइलों का इस्तेमाल किया था, जिसके बाद भारत ने अपनी मिसाइल निर्माण नीति में अहम बदलाव करने का निर्णय लिया।

अब निजी कंपनियां बनाएंगी मिसाइल और गोला-बारूद

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, रक्षा मंत्रालय ने रेवेन्यू प्रोक्योमेंट मैनुअल में संशोधन किया है। पहले किसी भी निजी कंपनी को बम और गोला-बारूद निर्माण इकाई लगाने के लिए म्यूनिशन्स इंडिया लिमिटेड से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना जरूरी था। लेकिन अब इस अनिवार्यता को हटा दिया गया है।

इसका मतलब है कि अब निजी कंपनियां 105 मिमी, 130 मिमी, 150 मिमी आर्टिलरी शेल्स, पिनाका मिसाइल, 1000 पाउंड बम, मोर्टार बम, हैंड ग्रेनेड और छोटे व मध्यम कैलिबर की गोलियां और हथियार बना सकेंगी। इसके अलावा, रक्षा मंत्रालय ने डीआरडीओ को भी पत्र लिखकर यह बताया है कि मिसाइल विकास और Missile Production to private sector इंटीग्रेशन में निजी कंपनियों को शामिल करने का निर्णय लिया गया है।

बीडीएल और बीईएल तक सीमित नहीं रहेगा उत्पादन

अब तक भारत में मिसाइलों का निर्माण मुख्य रूप से भारत डायनेमिक्स लिमिटेड और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड जैसी सरकारी कंपनियों तक सीमित था। ये दोनों कंपनियां डीआरडीओ के तहत काम करती हैं और आकाश, एस्ट्रा, कॉन्कर्स, मिलन जैसी सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें और टॉरपीडो बनाती हैं।

लेकिन सशस्त्र बलों की जरूरतें अब इतनी बड़ी हो गई हैं कि केवल इन कंपनियों से मांग पूरी नहीं हो सकती। इसीलिए, रक्षा मंत्रालय ने पारंपरिक मिसाइलों के विकास में निजी क्षेत्र को लाने का फैसला किया है, जबकि सामरिक मिसाइलों का विकास डीआरडीओ के अधीन ही रहेगा।

ऑपरेशन सिंदूर से मिली सीख

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने चीन से मिली लॉन्ग रेंज मिसाइलों और रॉकेट्स का इस्तेमाल किया। वहीं, भारत ने भी अपने आधुनिक एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल कर पाकिस्तान के एक अवाक्स एयरक्राफ्ट (संभावित रूप से SAAB AEW या Dassault DAC-20 ELINT) को पंजाब प्रांत में 314 किलोमीटर अंदर गिराया। यह कार्रवाई 10 मई की सुबह हुई जिसने दिखाया कि भारत के पास लंबी दूरी तक मार करने की क्षमता है।

वहीं, रूस-यूक्रेन युद्ध और मिडल ईस्ट में संघर्ष के कारण हथियारों और गोला-बारूद की अंतरराष्ट्रीय मांग बहुत बढ़ गई है। ऐसे में भारत को यह सुनिश्चित करना होगा कि लंबी अवधि तक चले किसी संघर्ष के दौरान उसे विदेशी कंपनियों से महंगे दामों पर आपातकालीन खरीदारी न करनी पड़े।

रक्षा मंत्रालय के इस Missile Production to private sector फैसले से घरेलू रक्षा उद्योग को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। निजी कंपनियों के आने से उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, और भारतीय सशस्त्र बलों को समय पर और पर्याप्त मात्रा में गोला-बारूद उपलब्ध कराया जा सकेगा।

सरकार का मानना है कि भविष्य के युद्ध ब्रह्मोस, निर्भय, प्रलय और शौर्य जैसी मिसाइलों पर निर्भर होंगे, क्योंकि अब लड़ाकू विमानों का युग खत्म हो रहा है और ओवर-द-होराइजन मिसाइलों व एयर डिफेंस सिस्टम का युग शुरू हो चुका है।

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब भारत को पश्चिम में पाकिस्तान और उत्तर में चीन से दोहरी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। पाकिस्तान को चीन से लगातार हथियारों की सप्लाई होती रहती है। इसलिए भारत को अपने मिसाइल स्टोरेज को मजबूत करना और उत्पादन क्षमता को घरेलू स्तर पर बढ़ाना रणनीतिक तौर पर जरूरी हो गया है।

Operation Sarp Vinash: 22 साल पहले में जम्मू की पहाड़ियों में चला था ऐतिहासिक मिलिट्री ऑपरेशन, अब लेफ्टिनेंट जनरल लिड्डर ने अपनी किताब में खोले राज

Operation Sarp Vinash: Lt Gen H.S. Lidder’s Book Revisits the Historic Counter-Terror Operation in Poonch
Operation Sarp Vinash: Lt Gen H.S. Lidder’s Book Revisits the Historic Counter-Terror Operation in Poonch

Operation Sarp Vinash Book launch: इस साल सुरक्षा बलों ने जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के खात्मे के लिए ऑपरेशन सर्प विनााश 2.0 चलाया था। लेकिन जम्मू–कश्मीर में आज से 22 साल पहले चलाए ऑपरेशन सर्प विनाश के बारे में कम ही लोग जानते हैं। उस ऑपरेशन जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के नेटवर्क को समूल नष्ट कर दिया था।

लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) एचएस लिड्डर ने Operation Sarp Vinash Book launch अपनी नई किताब  “ऑपरेशन सर्प विनाश” में उस ऐतिहासिक सैन्य ऑपरेशन के बारे में विस्तार से बताया है। इस किताब में भारतीय सेना द्वारा 2003–04 में जम्मू-पुंछ के इलाकों में चलाए गए ऐतिहासिक आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन के कई अहम पहलुओं को पहली बार विस्तार से पेश किया है।

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लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) हरदेव सिंह लिड्डर ने बताया कि इस ऑपरेशन की योजना, क्रियान्वयन और परिणाम को समझे बिना आज की सुरक्षा चुनौतियों का आकलन अधूरा रहेगा। उन्होंने कहा कि यह ऑपरेशन भारतीय सेना के इतिहास में एक मील का पत्थर था, क्योंकि यह एक ऐसा अभियान था, जिसमें आतंकवादियों को उनके मजबूत बिलों से बाहर निकालकर आतंकवाद के फन को कुचला गया।

बताई ऑपरेशन की अंदरूनी रणनीति

लेफ्टिनेंट जनरल लिड्डर ने बताया कि ऑपरेशन की योजना बेहद सावधानी से बनाई गई थी और इसका लक्ष्य आतंकवादियों को भागने का कोई रास्ता नहीं देना था। उन्होंने कहा कि आतंकियों की रणनीति हमेशा शूट एंड रन की होती है। इसे खत्म करने के लिए सेना ने ऑपरेशन को इस तरह डिजाइन किया कि आतंकवादी चारों ओर से घिर जाएं।

लेफ्टिनेंट जनरल लिड्डर ने कहा कि ऑपरेशन से पहले ही इलाके को चारों तरफ से कवर कर लिया गया था। उन्होंने 15 कोर के कमांडर को बताया था कि आतंकवादी भागने की कोशिश करेंगे, इसलिए सभी संभावित रास्तों को जाल की तरह बंद कर दिया गया।

जब आतंकवादी भागने लगे, तो 18 आतंकी घेराबंदी में मारे गए। उन्होंने कहा कि यह ऑपरेशन सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं थी, बल्कि एक ऐसा निर्णायक मोड़ था जिसने उस समय जम्मू-पुंछ क्षेत्र में आतंकवाद की रीढ़ तोड़ दी। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन के दौरान लॉन्चर, आर्टिलरी, और हेलिकॉप्टर जैसे सभी संसाधन तैयार रखे गए थे ताकि किसी भी स्थिति से निपटा जा सके। इस अभियान में सेना ने अपनी रणनीतिक और सामरिक क्षमता का प्रदर्शन किया।

लेफ्टिनेंट जनरल लिड्डर ने किताब में बताया है कि यह ऑपरेशन केवल आतंकियों की संख्या घटाने के लिए नहीं था, बल्कि उनके ठिकानों को स्थायी रूप से खत्म करने के लिए था। जब तक आतंकियों के सुरक्षित बेस मौजूद रहते हैं, तब तक आतंकवाद खत्म नहीं किया जा सकता। सेना ने इन बेसों को खत्म कर आतंकवाद की जड़ पर चोट की।

Operation Sarp Vinash: Lt Gen H.S. Lidder’s Book Revisits the Historic Counter-Terror Operation in Poonch
Operation Sarp Vinash: Author Lt Gen H.S. Lidder and Co-Author Jaishree

को-ऑथर जयश्री ने बताई किताब लिखने की वजह – Operation Sarp Vinash Book launch

किताब की को-ऑथर जयश्री ने भी इस मौके पर अपने अनुभव साझा किए। जयश्री ने कहा कि 2023 के अंत में उन्होंने लेफ्टिनेंट जनरल लिड्डर से लंबी बातचीत की थी, जिसमें उन्होंने ऑपरेशन सर्प विनाश के विवरण साझा किए। इसके बाद उन्होंने इस ऑपरेशन के इतिहास को दस्तावेज के रूप में सामने लाने का फैसला लिया।

जयश्री ने बताया कि उनके लिए जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी इलाकों के नाम और भूगोल शुरू में अनजान थे। लेकिन ऑपरेशन में शामिल वरिष्ठ अधिकारियों और सैनिकों की मदद से वे इस अभियान के हर चरण को समझ पाईं। उन्होंने कहा कि यह किताब उन लोगों के लिए है जो यह जानना चाहते हैं कि भारतीय सेना ने किस तरह कठिन परिस्थितियों में एक बड़े आतंकी गढ़ को ध्वस्त किया।

लोग पूछते थे “कितने आतंकवादी मारे गए”

बुक लॉन्च में लेफ्टिनेंट जनरल रमन धवन ने भी अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि उस समय ऑपरेशन के दौरान उन पर काफी दबाव था और मीडिया में भी इसे लेकर खूब चर्चा हुई थी। कई वरिष्ठ अधिकारी इस ऑपरेशन को समझ नहीं पा रहे थे, क्योंकि उस दौर में आतंकवाद विरोधी अभियानों को सिर्फ “कितने आतंकवादी मारे गए” के आंकड़ों से आंका जाता था।

उन्होंने कहा कि 2001 से 2003 के बीच पुंछ-राजौरी क्षेत्र में हालात बेहद गंभीर थे। पहाड़ों और जंगलों से भरे इस इलाके में आतंकवादी 5,000 से 7,000 फीट की ऊंचाई पर बने अपने ठिकानों से सुरक्षा बलों और स्थानीय लोगों को निशाना बनाते थे। हर महीने औसतन 35-45 आतंकवादी मारे जाते थे, लेकिन इसके साथ ही 10-12 सुरक्षाकर्मी भी शहीद होते थे। कई बार जवानों और अधिकारियों को हर दूसरे दिन अपने साथियों की अंत्येष्टि में शामिल होना पड़ता था।

हिलकाका में चलाया था ऑपरेशन सर्प विनाश

उन्होंने बताया कि साल 2001 से लेकर 2003 के बीच जम्मू क्षेत्र में आतंकवादी गतिविधियों में भारी बढ़ोतरी हुई थी। विशेष रूप से पुंछ-राजौरी के हिलकाका इलाकों में स्थिति बेहद गंभीर थी। पाकिस्तान से प्रशिक्षित आतंकवादी नियंत्रण रेखा पार कर इस घने जंगल और पहाड़ी क्षेत्र में आसानी से छिप जाते थे। इस इलाके की ऊंचाई 5,000 से 7,000 फीट तक थी।

हिलकाका का इलाका घने जंगलों, दुर्गम पहाड़ियों और बिना सड़कों वाला क्षेत्र था। नियंत्रण रेखा से महज 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इन पहाड़ियों में आतंकवादी को प्राकृतिक गुफाएं और अस्थायी ‘धोक’ को अपना ठिकाना बनाते थे। गुर्जर-बकरवाल जनजातियां हर साल गर्मियों में यहां मवेशी चराने आती थीं और सर्दियों में खाली छोड़ जाती थीं। आतंकवादी इन्हीं खाली ‘धोक’ पर कब्जा कर लेते थे और सालों तक बिना रुकावट के गतिविधियां चलाते रहे। यह क्षेत्र इतना सुरक्षित माना जाता था कि आतंकवादी स्थानीय लोगों के साथ क्रिकेट तक खेलते थे।

रोमियो फोर्स और 163 इन्फैंट्री ब्रिगेड ने बनाई रणनीति

आतंकवाद को खत्म करने के लिए सेना ने मल्टी डायमेंशनल रणनीति अपनाई। ऑपरेशन की प्लानिंग गुप्त रखी गई। चार वरिष्ठ अधिकारियों तक ही रणनीति सीमित रही ताकि आतंकियों को भनक न लगे। पहाड़ियों में फिश नेट की तरह घेराबंदी कर आतंकियों को भागने का कोई रास्ता नहीं छोड़ा गया। इस ऑपरेशन को नाम दिया गया ‘ऑपरेशन सर्प विनाश’। इसमें दो कोर श्रीनगर स्थित 15 कोर और नागरोटा स्थित 16 कोर ने मिलकर अभियान चलाया।

16 कोर की रिजर्व फॉर्मेशन 163 इन्फेंट्री ब्रिगेड को इलाके में भेजा गया। 9 पैरा कमांडो पहले से इलाके में सक्रिय थे और उन्होंने नई टुकड़ियों को रात के समय गाइड कर ऑपरेशन शुरू कराया। साथ ही वायुसेना की मदद से हेलिपैड और सप्लाई बेस बनाये गये ताकि दुर्गम क्षेत्रों में रसद और घायल सैनिकों को निकाला जा सके। स्थानीय गुर्जर-बकरवाल समुदाय से भी खुफिया जानकारी जुटाई गई।

सबसे अहम भूमिका 9 पैरा कमांडो की थी, जो पहले से इलाके में सक्रिय थे और इलाके से भलीभांति परिचित थे। इन कमांडो को गाइड बनाकर 163 इन्फेंट्री ब्रिगेड को रात के समय तीन दिशाओं से इलाके में उतारा गया। उद्देश्य था आतंकियों को चारों तरफ से घेरकर उनके ठिकानों पर सर्च एंड डिस्ट्रॉय अभियान चलाना।

65 आतंकवादियों को मार गिराया

सर्दियों के बाद मार्च के आखिरी सप्ताह में सेना की टुकड़ियां हिलकाका और आसपास के इलाकों में दाखिल हुईं। ऑपरेशन की प्लानिंग इस तरह से थी कि आतंकवादी भाग न सकें। वहीं, आतंकवादी भागने की कोशिश में 15 कोर की घात में फंस गए।

लगभग एक महीने तक चले इस ऑपरेशन में सेना ने 65 आतंकवादियों को मार गिराया, तीन को जिंदा पकड़ा और भारी मात्रा में युद्ध सामग्री बरामद की। इस दौरान पांच सैनिक शहीद हुए। आतंकियों के ठिकाने पूरी तरह नष्ट कर दिए गए और हिलकाका क्षेत्र को दोबारा भारत के नियंत्रण में सुरक्षित कर लिया गया और सुरक्षा बलों ने ऊंचाई वाले इलाकों में स्थायी चौकियां स्थापित कर दीं।

इस ऑपरेशन की खासियत यह थी कि इसे लिखित ऑपरेशन ऑर्डर के तहत, हेलिकॉप्टरों और मल्टी-डायरेक्शनल रणनीति के साथ अंजाम दिया गया। आमतौर पर आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन इतने बड़े पैमाने पर नहीं होते, लेकिन यह अभियान उस दृष्टि से ऐतिहासिक था। हिलकाका का इलाका ऊबड़-खाबड़ पहाड़ियों, घने जंगलों और सीमित रास्तों वाला था। कोई पक्की सड़कें नहीं थीं, जिससे सेना को पैदल और हवाई रास्तों से ऑपरेशन चलाना पड़ा। दुश्मन की नज़रों से बचकर रात में पहाड़ियों पर चढ़ाई करना सैनिकों के लिए बड़ी चुनौती थी। फिर भी भारतीय सेना ने बिना हिचके ऑपरेशन को अंजाम दिया।

ऑपरेशन सर्प विनाश की अहमियत

लेफ्टिनेंट जनरल लिड्डर ने कहा कि सैकड़ों ऑपरेशन होते हैं, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर, इतनी सफलता के साथ आतंकवाद विरोधी अभियान कम ही हुए हैं। इस ऑपरेशन को सैन्य अकादमियों में अध्ययन के लिए एक ‘स्टडी केस’ के रूप में लिया जाना चाहिए।

वहीं, लेफ्टिनेंट जनरल धवन ने बताया कि हिलकाका को खत्म कर सेना ने पाकिस्तान के संभावित युद्धकालीन रणनीतिक खतरे को भी समाप्त कर दिया। अगर वह क्षेत्र आतंकियों के हाथ में रहता, तो किसी भी संघर्ष की स्थिति में पाकिस्तान की घुसपैठ को बड़ी सामरिक बढ़त मिल सकती थी।

Operation Sarp Vinash Book launch हो चुकी है हर आप इस बुक को पढ़ना चाहते है तो ऑनलाइन खरीद सकते है।

POJK Protests Update: पाक के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में पांचवें दिन भी भड़का जनविरोध, सड़कों पर उतरे हजारों लोग, तस्वीरों में देखें

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POJK Protests Update: पाक के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में पिछले पांच दिनों से चल रहा जनविरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। इंटरनेट और कॉलिंग सेवाओं की बंदी के बीच हजारों प्रदर्शनकारी राजधानी मुजफ्फराबाद की ओर मार्च कर रहे हैं। यह विरोध पाकिस्तान सरकार और जम्मू-कश्मीर अवामी एक्शन कमेटी के बीच चल रही वार्ताओं के बावजूद और तेज हो गया है।

Protests in POJK: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के लोगों ने पाक को बताया चुड़ैल; कोटली से मुजफ्फराबाद तक हालात हुए बेकाबू

सेहंसा, कोटली, अरजा ब्रिज और झेलम वैली जैसे इलाकों में जनता का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। नागरिकों की कथित हत्याओं के बाद स्थानीय लोगों में उबाल है और उन्होंने पुलिस वाहनों व बुलडोजरों में आग लगाकर अपनी नाराजगी जाहिर की।

सेहंसा में हिंसा, अरजा ब्रिज पर नाकेबंदी

POJK Protests Update बीते 24 घंटों में सेहंसा में स्थिति सबसे अधिक तनावपूर्ण रही। नागरिकों की कथित हत्याओं के बाद गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने पुलिस वैन और सरकारी बुलडोजरों को आग के हवाले कर दिया। सरकारी संपत्तियों को भी आग के हवाले कर दिया गया।

अरजा ब्रिज पर प्रदर्शनकारियों ने नाकेबंदी कर लोगों और सामान की आवाजाही पूरी तरह बाधित हो गई है। बता दें कि यह इलाका पाकिस्तान-पीओजेके के बीच एक अहम संपर्क मार्ग है।

कोटली में पूर्ण बंद

कोटली शहर में शुक्रवार को पूर्ण बंद देखा गया। दुकानें बंद रहीं, सार्वजनिक परिवहन ठप रहे और लोगों ने सड़कों पर उतरकर प्रशासनिक कार्रवाई के खिलाफ विरोध जताया। आजाद पट्टन और पलंदरी में भी लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं। भीड़ खुलेआम पाकिस्तान सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रही है। प्रदर्शनकारी कह रहे हैं कि जब तक इंटरनेट सेवाएं बहाल नहीं होतीं और नागरिकों की हत्या के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं होती, यह विरोध जारी रहेगा।

इंटरनेट बंदी के खिलाफ ब्रिटेन में भूख हड़ताल

पाकिस्तानी सरकार ने चार दिन पहले पूरे पीओजेके में इंटरनेट और कॉलिंग सेवाएं बंद कर दी थीं। इसके खिलाफ कई युवाओं ने ब्रिटेन स्थित पाकिस्तानी हाई कमीशन के बाहर टेंट लगाकर भूख हड़ताल शुरू कर दी है। उन्होंने घोषणा की है कि जब तक पीओजेके में इंटरनेट और कॉलिंग सेवाएं बहाल नहीं की जातीं, वे हड़ताल जारी रखेंगे।

झेलम वैली से मुजफ्फराबाद की ओर हजारों का मार्च

सुबह होते ही झेलम वैली में विरोध प्रदर्शन फिर से तेज हो गए। हजारों की संख्या में लोग राजधानी मुजफ्फराबाद की ओर कूच कर रहे हैं। कोहाला एंट्री पॉइंट पर सुबह से ही भारी भीड़ जमा है, जिसने पाकिस्तान से पीओजेके जाने वाले सड़क को पूरी तरह रोक दिया है। विभिन्न इलाकों से लोग लगातार मुज़फ्फराबाद पहुंच रहे हैं, जिससे राजधानी में तनाव और बढ़ गया है।

बातचीत का दूसरा चरण शुरू – POJK Protests Update

शुक्रवार की नमाज के बाद पाक प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ के सलाहकारों और अवामी एक्शन कमेटी के सदस्यों के बीच बातचीत का दूसरा दौर शुरू हुआ। पहले दौर की बातचीत गुरुवार को बेनतीजा रही थी। गुरुवार को कमेटी के सदस्यों ने स्पष्ट कहा था कि अगली बैठक तभी होगी जब इंटरनेट और कॉलिंग सेवाएं बहाल की जाएंगी। हालांकि, ढेरीकोट में हुई अलग बैठक में कमेटी ने पाकिस्तानी सरकार को एक और मौका देने का फैसला किया। भारतीय मानक समय के अनुसार, शुक्रवार को दोपहर 3:10 बजे मुजफ्फराबाद में बैठक का दूसरा दौर शुरू हुआ।

संवैधानिक संशोधन की बात

पाकिस्तान की संघीय संसदीय कार्य मंत्री चौधरी तारिक फजल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि पाकिस्तान सरकार कश्मीरियों के हित में की गई कई मांगों को स्वीकार करती है। हालांकि कुछ मांगें संवैधानिक संशोधन से जुड़ी हैं और उन पर विचार चल रहा है। उन्होंने अवामी एक्शन कमेटी से बातचीत जारी रखने की अपील की और कहा कि हिंसा किसी समस्या का समाधान नहीं है।

COAS Visits Forward Areas: आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने किया राजस्थान के बॉर्डर इलाकों का दौरा, टेक्नोलॉजी एब्जॉर्प्शन पर दिया जोर

COAS Visits Forward Areas
COAS Visits Forward Areas

COAS Visits Forward Areas: भारतीय थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने शुक्रवार को फॉरवर्ड इलाकों और बीकानेर मिलिट्री स्टेशन का दौरा कर सैनिकों की ऑपरेशनल रेडीनेस की रिव्यू की। इस दौरान उन्होंने वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों, पूर्व सैनिकों, नागरिक गणमान्य व्यक्तियों और सैनिकों से मुलाकात की।

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दौरे के दौरान जनरल द्विवेदी ने सेना के आधुनिकीकरण, कॉम्बैट प्रिपेयर्डनेस, टेक्नोलॉजिकल कैपेबिलिटी को मजबूत करने और ऑपरेशनल एक्सीलेंस पर भारतीय सेना के फोकस को दोहराया।

सैनिकों से की सीधी बातचीत – COAS Visits Forward Areas

इस मौके पर थलसेना प्रमुख ने राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाले वेटरंस को सम्मानित किया। इनमें लेफ्टिनेंट कर्नल हेम सिंह शेखावत (सेवानिवृत्त), लेफ्टिनेंट कर्नल बीरबल बिश्नोई (सेवानिवृत्त), रिसालदार भंवर सिंह (सेवानिवृत्त) और हवलदार नाकत सिंह (सेवानिवृत्त) शामिल थे।

उन्होंने सभी रैंकों से संवाद किया और बदलते युद्ध के स्वरूप पर जोर देते हुए बताया कि भारतीय सेना कैसे अनमैंड एरियल सिस्टम्स और काउंटर-UAS टेक्नोलॉजीज को अपने ऑपरेशनल स्पेक्ट्रम में तेजी से शामिल कर रही है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव सेना को नई चुनौतियों के प्रति अधिक अनुकूल और तैयार बनाएगा।

बीकानेर में सैनिकों और वेटरंस को संबोधित करते हुए जनरल द्विवेदी ने कठिन रेगिस्तानी और अर्ध-रेगिस्तानी इलाकों में डटे रहने वाले सैनिकों के समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा की सराहना की। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती इलाकों में काम करने के लिए न केवल शारीरिक क्षमता बल्कि मानसिक मजबूती, बेहतर समन्वय और टेक्नोलॉजी की समझ की भी आवश्यकता होती है।

उन्होंने मल्टी-एजेंसी कोऑर्डिनेशन के प्रभावी मॉडल की प्रशंसा की और कहा कि इस कॉर्डिनेशन ने ऑपरेशनल एफिशिएंसी को और बढ़ाया है।

थलसेना प्रमुख ने अपने संबोधन में कहा कि युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और इस बदलाव से निपटने के लिए सभी स्तरों पर टेक्नोलॉजी एब्जॉर्प्शन को बढ़ाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन सिस्टम्स और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर जैसे क्षेत्रों में तेजी से इनोवेशन हो रहा है और भारतीय सेना इन तकनीकों को अपनी रणनीतियों में शामिल कर रही है।

उन्होंने बताया कि बदलते सुरक्षा परिदृश्य में भारतीय सेना का मकसद हर परिस्थिति में उच्च स्तरीय ऑपरेशनल तैयारी को बनाए रखना है।

जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि सशस्त्र बलों, सरकारी एजेंसियों, उद्योग जगत, शैक्षणिक संस्थानों और समाज के बीच सीमलेस सिनर्जी बनाए रखने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि व्होल-ओएफ-नेशन एप्रोच को अपनाकर ही भारत अपनी सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बना सकता है।

उन्होंने मिलिटरी-सिविल फ्यूजन को लेकर पूर्व सैनिकों के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि वेटरन्स का अनुभव और समर्पण भारत की डिफेंस प्रिपेयर्डनेस को और मजबूती देता है COAS Visits Forward Areas और यह भारत की बैटलफील्ड डॉमिनेंस में अहम भूमिका निभाता है।

Rajnath Singh on Terrorism: रक्षा मंत्री बोले- ऑपरेशन सिंदूर में हमने आतंकियों का धर्म नहीं पूछा, बल्कि आतंक को बनाया निशाना

Rajnath Singh on Terrorism

Rajnath Singh on Terrorism: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक, 2019 की बालाकोट एयर स्ट्राइक और 2025 के ऑपरेशन सिंदूर को याद करते हुए कहा कि भारत ने हमेशा अपनी गरिमा और संप्रभुता की रक्षा के लिए निर्णायक कार्रवाई की है।

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उन्होंने साफ कहा, “जब पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में हमने कार्रवाई की, तो हमने आतंकियों का धर्म नहीं पूछा। हमने आतंक पर निशाना साधा- न नागरिकों पर, न सैन्य ठिकानों पर।”

हैदराबाद में आयोजित जैन इंटरनेशनल ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन के एक कार्यक्रम में बोलते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत ने आतंकवाद के खिलाफ हर बार साफ और निर्णायक रुख अपनाया। उन्होंने बताया कि जब भी देश की गरिमा, सुरक्षा और नागरिकों की जान पर खतरा आया, तब भारत ने कभी समझौता नहीं किया।

उन्होंने कहा कि 2016 में नियंत्रण रेखा पार कर सर्जिकल स्ट्राइक की गई, 2019 में बालाकोट एयरस्ट्राइक में आतंकी ठिकानों को ध्वस्त किया गया और 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सीमा पार आतंक के खिलाफ कड़ा एक्शन लिया गया। इन तीनों ऑपरेशनों ने दिखाया कि भारत किसी भी हमले को बिना जवाब दिए नहीं छोड़ता।

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राजनाथ सिंह ने जोर देकर कहा कि इन कार्रवाइयों में भारत ने कभी किसी नागरिक या सैन्य प्रतिष्ठान को निशाना नहीं बनाया। बल्कि लक्ष्य केवल आतंक और उसके ढांचे को ध्वस्त करना था।

कार्यक्रम में रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत की बढ़ती सैन्य और आर्थिक शक्ति का उद्देश्य किसी पर दबाव बनाना नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक विरासत, अध्यात्मिक परंपराओं और भगवान महावीर द्वारा सिखाए गए मानवीय आदर्शों की रक्षा करना है।

उन्होंने कहा कि भारत शांति में विश्वास करता है, लेकिन सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं करेगा। उन्होंने देशवासियों को आश्वस्त किया कि भारत अपनी रक्षा क्षमता को आधुनिक बना रहा है ताकि किसी भी चुनौती का सामना किया जा सके।

राजनाथ सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने रक्षा क्षेत्र में जबरदस्त प्रगति की है। 2014 में भारत के रक्षा निर्यात लगभग 600 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 24,000 करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है।

उन्होंने विश्वास जताया कि 2029 तक भारत के रक्षा निर्यात 50,000 करोड़ रुपये के स्तर को पार कर जाएगा। उन्होंने कहा कि तेजस फाइटर जेट, आकाश मिसाइल सिस्टम और अर्जुन टैंक जैसी स्वदेशी प्रणालियां अब भारतीय सशस्त्र बलों को और मजबूत बना रही हैं।

भारत बन रहा है दुनिया का मैन्युफैक्चरिंग हब – Rajnath Singh on Terrorism

रक्षा मंत्री ने कहा, “आज भारत खिलौनों से लेकर टैंक तक सब कुछ बना रहा है। भारत तेजी से दुनिया के मैन्युफैक्चरिंग हब की ओर बढ़ रहा है। वह दिन दूर नहीं जब भारत पूरी दुनिया की फैक्ट्री बन जाएगा।”

उन्होंने हाल ही में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड से 97 हल्के लड़ाकू विमान खरीदने के समझौते का जिक्र किया, जिसमें 64 फीसदी से अधिक सामग्री स्वदेशी है। उन्होंने इसे आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक अहम कदम बताया।

आर्थिक मोर्चे पर तेजी से उभर रहा भारत

Rajnath Singh on Terrorism राजनाथ सिंह ने बताया कि भारत आज दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। 2030 तक भारत का जीडीपी 7.3 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जिससे वह तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की रिपोर्टों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि 2038 तक परचेजिंग पावर पैरिटी (PPP) के आधार पर भारत दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है।

IAF Chief on Operation Sindoor: वायुसेना प्रमुख बोले- पाकिस्तान का नैरेटिव ‘मनोहर कहानियों’ जैसा, ऑपरेशन सिंदूर में गिराए एफ-16 और जेएफ-17 समेत 10 फाइटर जेट

IAF Chief on Operation Sindoor
Photo: Raksha Samachar

IAF Chief on Operation Sindoor: भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने वायुसेना दिवस से पहले आयोजित सालाना प्रेस कॉन्फ्रेंस में पाकिस्तान और ऑपरेशन सिंदूर को लेकर कई खुलासे किए। उन्होंने बताया कि मई में हुई झड़पों के दौरान भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के 10 से अधिक फाइटर जेट गिराए, जिनमें अमेरिका निर्मित एफ-16 और चीन-पाकिस्तान के बनाए जेएफ-17 भी शामिल थे।

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उन्होंने पाकिस्तान के दावों को खारिज करते हुए कहा कि “उनकी बातें मनोहर कहानियों जैसी हैं।” एयर चीफ ने बताया कि भारतीय वायुसेना ने 300 किलोमीटर अंदर जाकर पाकिस्तान के एयरबेस, राडार, कमांड एंड कंट्रोल सेंटर और लड़ाकू विमानों को सटीक हमलों में निशाना बनाया। यह भारतीय वायुसेना का अब तक का सबसे लंबा “किल” माना जा रहा है।

पाकिस्तान का झूठा नैरेटिव- “मनोहर कहानियों” जैसा

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हाल ही में संयुक्त राष्ट्र महासभा में दावा किया था कि उन्होंने भारत के 7 फाइटर जेट गिराए। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए एयर चीफ मार्शल सिंह ने व्यंग्य में कहा, “अगर उन्हें लगता है कि उन्होंने हमारे 15 विमान गिराए हैं, तो उम्मीद है अगली बार जब वे लड़ाई में आएंगे, तो 15 कम विमान लेकर आएंगे।”

ऑपरेशन सिंदूर को लेकर पाकिस्तान की तरफ से किए जा रहे दावों पर एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा कि पाकिस्तान की जो नैरेटिव फैलाया जा रहा है वह “मनोहर कहानियों जैसा” है, जिनका कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के एयरबेस, एयर डिफेंस और कमांड सेंटरों को स्ट्राइक्स में निशाना बनाया।

ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय वायुसेना की जबरदस्त स्ट्राइक -IAF Chief on Operation Sindoor

22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत के बाद भारत ने जवाबी कार्रवाई करते हुए 6 और 7 मई की दरमियानी रात ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया। यह 2019 की बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद सबसे बड़ा सैन्य अभियान था।

इस ऑपरेशन में भारतीय वायुसेना ने बिना एलओसी या इंटरनेशनल बॉर्डर पार किए पाकिस्तान की सीमा के अंदर 300 किलोमीटर तक अंदर जाकर रडार स्टेशन, कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, रनवे और हैंगर को निशाना बनाया।

एयर चीफ ने बताया कि इस अभियान में चार रडार साइट, दो कमांड कंट्रोल सेंटर, दो रनवे और तीन बड़े हैंगर को भारी नुकसान पहुंचा। एक सी-130 श्रेणी का विमान और पांच एफ-16 व जेएफ-17 वर्ग के लड़ाकू विमान भी नष्ट कर दिए गए।

उन्होंने कहा कि यह ऑपरेशन रणनीतिक और मनोवैज्ञानिक दोनों स्तरों पर पाकिस्तान के लिए झटका था और अंततः उन्हें 10 मई को सीजफायर के लिए भारत से अनुरोध करना पड़ा।

एयर चीफ मार्शल सिंह ने बताया कि भारतीय वायुसेना ने हवा में 4 से 5 फाइटर जेट मार गिराए। इनमें अमेरिकी एफ-16 और जेएफ-17 श्रेणी के लड़ाकू विमान थे। इसके अलावा, एक लॉन्ग रेंज स्ट्राइक में पाकिस्तान का एक अवॉक्स या सिग्निफिकेंट इंटेलिजेंस एयरक्राफ्ट भी ध्वस्त हुआ।

IAF Chief on Operation Sindoor

उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने एक बार फिर दिखा दिया कि भारतीय वायुसेना किसी भी चुनौती का जवाब निर्णायक और सटीक तरीके से दे सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि ऑपरेशन सिंदूर का मकसद आतंकवाद के खिलाफ सर्जिकल और सीमित कार्रवाई करना था, न कि व्यापक युद्ध को भड़काना।

स्वदेशी हथियारों और नई तकनीक पर फोकस

प्रेस कॉन्फ्रेंस में एयर चीफ ने भारत की आत्मनिर्भरता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि तेजस एमके1ए, एएमसीए (AMCA), आकाश-NG, एस्ट्रा मिसाइल, नए रडार सिस्टम्स और एयरबॉर्न वॉर्निंग सिस्टम्स पर तेजी से काम हो रहा है।

उन्होंने कहा कि भारतीय वायुसेना घरेलू उद्योगों, एमएसएमई सेक्टर और स्टार्टअप्स को रक्षा उत्पादन में बढ़ावा दे रही है। स्वदेशी हथियार प्रणालियों के जरिए न सिर्फ आयात पर निर्भरता घटाई जाएगी बल्कि भारत को रक्षा निर्यातक बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं।

एयर चीफ ने कहा कि भारत भविष्य के लिए फिफ्थ जनरेशन और उससे आगे की टेक्नोलॉजी को अपनाने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। एएमसीए प्रोग्राम पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है और इसकी पहली उड़ान परीक्षण इस दशक के अंत तक होने की उम्मीद है। और 2035 तक इसे ऑपरेशनल करने का लक्ष्य है। इस बार निजी उद्योगों को भी प्रोजेक्ट में शामिल किया गया है जिससे प्रगति तेज होने की उम्मीद है।

वहीं, राफेल और एस-400 को लेकर उन्होंने कहा कि भारतीय वायुसेना किसी भी वेपन सिस्टम के सिलेक्शन में अपनी दीर्घकालिक जरूरतों और ऑपरेशनल क्षमता को प्राथमिकता देती है। राफेल जैसे विमानों को शामिल करना आसान है क्योंकि इनकी ट्रेनिंग और मेंटेनेंस सिस्टम पहले से मौजूद है। एयर चीफ ने कहा कि 114 रफाल विमान भारत के लिए एक संभावित विकल्प हैं। पहले के अनुभव और तैयारियों के कारण राफेल को शामिल करना आसान होगा। जो भी कंपनी भारत में मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर का प्रस्ताव देगी, उस पर विचार किया जाएगा।

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बढ़ेगी अनमैन्ड सिस्टम की जरूरत

एयर चीफ ने कहा कि भविष्य में अनमैन्ड सिस्टम (UAV/UCAV) की भूमिका और बढ़ेगी। हालांकि, उन्होंने साफ कहा कि मैन और मशीन का कॉन्बिनेशन ही निर्णायक रहेगा। अनमैन्ड सिस्टम कुछ मिशनों में अहम भूमिका निभाएंगे, लेकिन मैन सिस्टम को पूरी तरह रिप्लेस नहीं करेंगे।

भारतीय वायुसेना इस क्षेत्र में स्वदेशी प्रोजेक्ट्स और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के साथ तेज़ी से काम कर रही है। डीआरडीओ के कई प्रोजेक्ट्स इस दिशा में आगे बढ़ चुके हैं।

एयर चीफ ने बताया कि 2047 तक का एक रोडमैप तैयार किया गया है जिसमें वायुसेना को मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस के लिए सक्षम बनाया जा रहा है। तीनों सेनाओं के बीच तालमेल को औपचारिक ढांचा देने पर काम हो रहा है ताकि किसी भी ऑपरेशन में सामूहिक ताकत का प्रभावी इस्तेमाल हो सके।

उन्होंने कहा कि भविष्य के युद्ध में साइबर, स्पेस और इंफॉर्मेशन वॉरफेयर की भूमिका अहम होगी और भारतीय वायुसेना इस दिशा में पूरी तैयारी कर रही है।

बेसिक ट्रेनर एयरक्राफ्ट की कमी से ट्रेनिंग पर असर?

एयर चीफ ने माना कि बेसिक ट्रेनर विमानों में सप्लाई चेन की दिक्कतों के कारण देरी हुई है। हालांकि, वायुसेना ने अपनी ट्रेनिंग संरचना को पुनर्गठित किया है ताकि कम प्लेटफॉर्म होने के बावजूद पायलटों की ट्रेनिंग प्रभावित न हो। वहीं, नए विमान के आने से यह समस्या हल हो जाएगी।

वहीं सुखोई-30 के अपग्रेड को लेकर उन्होंने कहा कि एक विस्तृत अध्ययन के आधार पर वायुसेना का प्रॉस्पेक्टिव प्लान तैयार किया गया है। इसमें न केवल प्लेटफॉर्म अपग्रेड, बल्कि नए रडार, सरफेस-टू-एयर सिस्टम, ट्रेनिंग और मानव संसाधन सुधार शामिल हैं। वहीं अधिकांश सुखोई-30 बेड़े का 70–75% अपग्रेड किया जाएगा।

किए कई अंतरराष्ट्रीय अभ्यास

एयर चीफ ने बताया कि पिछले एक साल में भारत ने अमेरिका, फ्रांस, ग्रीस, सिंगापुर, मिस्र जैसे देशों के साथ कई बड़े सैन्य अभ्यास किए हैं। IAF Chief on Operation Sindoor इन अभ्यासों में इन देशों ने भारतीय वायुसेना की पेशेवर क्षमता और सटीकता की तारीफ की। उन्होंने कहा कि इन अभ्यासों से न केवल इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ती है बल्कि भारत की एयर पावर की वैश्विक विश्वसनीयता भी मजबूत होती है।

Amir Khan Muttaqi visit India: अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी अगले हफ्ते आएंगे दिल्ली, तालिबान सरकार को सौंपा जा सकता है नई दिल्ली स्थित अफगान दूतावास

Amir Khan Muttaqi India visit: Taliban flag sparks diplomatic dilemma
(File Photo)

Amir Khan Muttaqi visit India: अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी अगले हफ्ते भारत का दौरा करेंगे। सूत्रों के मुताबिक, मुत्ताकी 9 और 10 अक्टूबर को नई दिल्ली में रहेंगे और इस दौरान कई अहम बैठकों में हिस्सा लेंगे। माना जा रहा है कि यह दौरा भारत और तालिबान के बीच बढ़ते कूटनीतिक रिश्तों में एक अहम पड़ाव साबित हो सकता है।

India-Taliban Talks: भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच भारतीय राजनयिक की तालिबान से मुलाकात, अफगान मोर्चे पर नई चाल?

अगस्त में नहीं मिली थी यात्रा की अनुमति

दरअसल, मुत्ताकी की पहले अगस्त 2025 के आखिरी हफ्ते में दिल्ली आने की योजना थी, लेकिन उस समय उन्हें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से यात्रा प्रतिबंध छूट नहीं मिल पाई थी। अब जब यह औपचारिकता पूरी हो गई है, तो उनका यह दिल्ली दौरा तय हुआ है।

2021 के बाद बदले हालात

2021 में तालिबान के अफगानिस्तान की सत्ता संभालने के बाद से भारत और काबुल के बीच रिश्तों में बड़ा बदलाव आया है। हालांकि भारत ने अब तक तालिबान शासन को औपचारिक मान्यता नहीं दी है, लेकिन मानवीय सहायता भेजने से लेकर काबुल में अपना दूतावास फिर से खोलने तक, कई स्तरों पर दोनों देशों के बीच बातचीत और संपर्क जारी है।

इस्लामाबाद-काबुल रिश्तों में तनाव

Amir Khan Muttaqi visit India का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब काबुल और इस्लामाबाद के बीच रिश्ते लगातार खराब हो रहे हैं। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के आतंकियों को पनाह देने का आरोप लगाया है। हाल ही में पाकिस्तान ने अफगान सीमा पर हवाई हमले भी किए, जिनका तालिबान ने कड़ा विरोध किया। ड्यूरंड लाइन पर हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं।

विदेश सचिव गए थे तालिबान

इससे पहले जनवरी 2025 में भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने दुबई में तालिबान के कार्यवाहक विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी से मुलाकात की थी। यह 2021 के बाद बड़े स्तर दूसरा द्विपक्षीय संपर्क था। चर्चा में अफगानिस्तान की सुरक्षा, विकास परियोजनाएं, मानवीय सहायता और ईरान के चाबहार पोर्ट के माध्यम से व्यापार बढ़ाने पर फोकस रहा। तालिबान ने भारत को “महत्वपूर्ण क्षेत्रीय और आर्थिक साझेदार” बताया। यह पाकिस्तान-तालिबान तनाव (जैसे पाकिस्तानी हवाई हमलों) के बीच हुआ, जिससे भारत को फायदा मिला।

इसके बाद मई 2025 में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मुत्तकी से फोन पर बात की थी। जयशंकर ने अफगानिस्तान के लिए “बोल्ड मूव्स” और प्रत्यक्ष मानवीय सहायता बढ़ाने का संकेत दिया था। वहीं, तालिबान ने अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की थी।

नई दिल्ली में तालिबान के कई अधिकारी

पिछले कुछ महीनों में तालिबान के कई वरिष्ठ अधिकारी दिल्ली आ चुके हैं। पिछले महीने ही अफगानिस्तान के दवा और खाद्य उप मंत्री हमदुल्लाह जाहिद फार्मास्यूटिकल्स और हेल्थकेयर की एक अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी में भाग लेने के लिए भारत आए थे। इसके अलावा, एक और वरिष्ठ तालिबान अधिकारी, जो सुरक्षा और रणनीतिक मामलों को देखते हैं, सितंबर में लगभग एक महीने तक दिल्ली में रहे और भारतीय अधिकारियों के साथ बातचीत करते रहे।

वहीं, भारत ने अफगानिस्तान को लगातार मानवीय मदद भेजी है। पिछले साल आए भूकंप के बाद भी भारत ने लगातार मदद पहुंचाई। इसके साथ ही, भारत ने मुंबई और हैदराबाद में अफगानिस्तान के कॉन्सुलेट्स तालिबान अधिकारियों को सौंप दिए हैं। हालांकि, नई दिल्ली स्थित अफगान दूतावास अब भी अशरफ गनी सरकार के प्रतिनिधि चार्ज डी’अफेयर्स मोहम्मद इब्राहिम खिल के पास है। सूत्रों का कहना है कि मुत्ताकी की इस यात्रा के दौरान नई दिल्ली स्थित अफगान दूतावास को भी तालिबान अधिकारियों को सौंपे जाने की संभावना पर चर्चा हो सकती है।

Amir Khan Muttaqi visit India

मुत्ताकी 2021 से तालिबान सरकार में विदेश मंत्रालय संभाल रहे हैं और उनकी यह यात्रा भारत-अफगान रिश्तों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। खास बात यह है कि ऐसे समय में जब पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव चरम पर है, Amir Khan Muttaqi visit India तालिबान के विदेश मंत्री का भारत आना कूटनीतिक समीकरणों में नई हलचल ला सकता है।

Afghanistan FM Amir Khan Muttaqi visit India: Afghanistan’s Foreign Minister Amir Khan Muttaqi is scheduled to visit New Delhi on October 9-10, 2025, marking a key development in India-Afghanistan relations under the Taliban regime. This visit comes at a time of rising Kabul-Islamabad tensions over the Durand Line and Pakistan’s cross-border strikes. India, which has not formally recognized the Taliban government, continues to engage through humanitarian aid, embassy operations, and dialogue. Sources indicate discussions may also cover handing over Afghanistan’s New Delhi embassy to Taliban diplomats, signaling deeper engagement between New Delhi and Kabul despite complex regional challenges.

Mig La Pass: दशहरा पर BRO ने रचा इतिहास, 19,400 फीट पर बनाया दुनिया का सबसे ऊंचा मोटरेबल पास, उमलिंग ला पहुंचा दूसरे नंबर पर

Mig La Pass: BRO Creates History with World’s Highest Motorable Road at 19,400 Feet

Mig La Pass: भारत ने दशहरा के अवसर पर एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन ने लद्दाख में दुनिया का सबसे ऊंचा मोटरेबल पास मिग ला पास तैयार कर लिया है। विजयादशमी के दिन बीआरओ ने मिग ला पास पर झंडा भी फहराया 19,400 फीट की ऊंचाई पर बना यह पास मौजूदा उमलिंगला पास से भी ऊंचा है, जिसकी ऊंचाई 19,024 फीट है। मिग ला पास न केवल इंजीनियरिंग का चमत्कार है, बल्कि यह भारत की सामरिक क्षमता और संकल्प का प्रतीक भी है।

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प्रोजेक्ट हिमांक के तहत बना पास

यह सफलता बीआरओ के प्रसिद्ध प्रोजेक्ट हिमांक के अंतर्गत हासिल हुई। 1 अक्टूबर 2025 को चीफ इंजीनियर ब्रिगेडियर विशाल श्रीवास्तव के नेतृत्व में टीम ने मिग ला पास पर राष्ट्रीय ध्वज और बीआरओ का झंडा फहराया।

इससे पहले लद्दाख का ही उमलिंग ला पास (19,024 फीट, लगभग 5,799 मीटर) दुनिया का सबसे ऊंचा मोटरेबल पास माना जाता था। यह लद्दाख, भारत में हंसुला घाटी में स्थित है और पहले दुनिया का सबसे ऊंचा मोटरेबल पास था। लेकिन अब मिग ला पास (19,400 फीट) ने यह रिकॉर्ड तोड़कर नया इतिहास रच दिया है। बीआरओ ने लगातार कठिन चुनौतियों के बीच काम करते हुए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड को फिर से अपने नाम कर लिया।

Mig La Pass: BRO Creates History with World’s Highest Motorable Road at 19,400 Feet

क्या है इसका रणनीतिक महत्व

Mig La Pass का महत्व केवल ऊंचाई तक सीमित नहीं है। यह मार्ग लिकारू-मिग ला-फुकचे रोड अलाइनमेंट का हिस्सा है और सीधे फुकचे गांव तक कनेक्टिविटी प्रदान करता है। फुकचे भारत-चीन सीमा के बेहद नजदीक है, इसलिए यह मार्ग भारतीय सेना के लिए एक तीसरा अहम एक्सिस बन गया है। मिग ला पास से जुड़ी सड़क फुकचे गांव तक जाती है। यह गांव भारत-चीन सीमा के पास स्थित है और यहां के स्थानीय निवासियों को भी इस सड़क से बड़ा फायदा होगा। पहले यहां तक पहुंचना बेहद कठिन था, लेकिन अब बेहतर कनेक्टिविटी से लोगों के जीवन स्तर में सुधार आएगा।

इस पास के जरिए तेजी से सैनिकों, वाहनों और रसद की आवाजाही आसान होगी। अब दौलत बेग ओल्डी जैसे सामरिक एयरबेस और अन्य फॉरवर्ड पोस्ट तक पहुंच आसान हो जाएगी।

किया कई चुनौतियों का सामना

19,400 फीट की ऊंचाई पर सड़क निर्माण किसी भी इंजीनियरिंग संस्था के लिए आसान नहीं होता। यहां ऑक्सीजन की मात्रा समुद्र तल की तुलना में लगभग 50 फीसदी कम होती है। -40°C तक गिरने वाले तापमान, लगातार बर्फबारी, भूस्खलन और ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी इलाकों ने निर्माण कार्य को और कठिन बना दिया।

फिर भी BRO की टीम ने अदम्य साहस और तकनीकी उत्कृष्टता दिखाते हुए असंभव को संभव बना दिया। ब्रिगेडियर विशाल श्रीवास्तव ने कहा, “यह उपलब्धि हमारी टीम की निष्ठा, दृढ़ संकल्प और भारत की सीमाओं की सुरक्षा के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रतीक है।”

वहीं, मिग ला पास का सीधा लाभ भारतीय सेना को मिलेगा। इस मार्ग से अब भारी सैन्य वाहन और सप्लाई ट्रक आसानी से आगे तक जा सकेंगे। इसके अलावा, यह सड़क से किसी भी आकस्मिक परिस्थिति में सेना की तेजी से तैनाती संभव होगी। सरहद पर चीन के साथ मौजूद संवेदनशील परिस्थितियों को देखते हुए यह उपलब्धि सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

Mig La Pass: BRO Creates History with World’s Highest Motorable Road at 19,400 Feet

वहीं, सैन्य महत्व के अलावा मिग ला पास का पर्यटन की दृष्टि से भी बड़ा महत्व है। लद्दाख पहले से ही रोमांचक पर्यटन और एडवेंचर स्पोर्ट्स का गढ़ है। अब 19,400 फीट की ऊंचाई पर स्थित मिग ला पास साहसिक यात्रियों और बाइकर्स के लिए एक नया आकर्षण होगा।

यह पास आगंतुकों को सिंधु घाटी के अद्भुत नज़ारे और बर्फीले पहाड़ों की भव्यता का अनुभव कराएगा। हालांकि, इतनी ऊंचाई पर यात्रा करने से पहले स्वास्थ्य और सुरक्षा के विशेष इंतजाम जरूरी होंगे।

बीआरओ ने बनाए सबसे ऊंचे मोटरेबल पास

बीआरओ अब तक दुनिया के 14 सबसे ऊंचे मोटरेबल पास में से 11 का निर्माण कर चुका है। जिससे न केवल भारत की सीमाओं को मजबूत हो रही हैं, बल्कि इंजीनियरिंग की दृष्टि से नए आयाम भी स्थापित कर रही है। Mig La Pass पर काम पूरा करना इस बात का प्रमाण है कि भारतीय इंजीनियर किसी भी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अपनी क्षमता का परिचय दे सकते हैं।

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Mig La Pass उमलिंग ला से भी ऊंचा

अगर Mig La Pass पास की तुलना उमलिंग ला पास से की जाए तो दोनों ही लद्दाख की ऊंचाई वाली घाटियों में हैं। उमलिंग ला पास 19,024 फीट पर स्थित है और यह भी बीआरओ द्वारा बनाया गया था। लेकिन मिग ला पास 19,400 फीट की ऊंचाई के साथ अब सबसे ऊपर है।

यह ऊंचाई माउंट एवरेस्ट बेस कैंप (17,600 फीट) से भी अधिक है और एवरेस्ट कैंप-1 (20,000 फीट) से केवल 600 फीट नीचे है। जिससे पता चलता है यहां सड़क बनाना कितना चुनौतीपू्र्ण रहा होगा।