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Air force Day 2025: एयर चीफ बोले- ऑपरेशन सिंदूर ने दिखाया कैसे एयर पॉवर बदल सकती है युद्ध की दिशा, अनुशासित ट्रेनिंग, सटीक योजना का है शानदार उदाहरण

Air force Day 2025 IAF chief
IAF chief on Air force Day 2025

Air force Day 2025: भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने बुधवार को 93वें वायुसेना दिवस के मौके पर कहा कि ऑपरेशन सिंदूर सावधानीपूर्वक बनाई गई योजना, सटीक ट्रेनिंग और शानदार कार्रवाई का एक बेहतरीन उदाहरण है। उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन ने कुछ ही दिनों में पाकिस्तान के अंदर तक जाकर उसके सैन्य और आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया।

IAF Chief on Operation Sindoor: वायुसेना प्रमुख बोले- पाकिस्तान का नैरेटिव मनोहर कहानियों जैसा, ऑपरेशन सिंदूर में गिराए एफ-16 और जेएफ-17 समेत 10 फाइटर जेट

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित हिंडन एयरबेस पर एयर वॉरियर्स को संबोधित करते हुए एपी सिंह ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर यह दिखाता है कि अनुशासित ट्रेनिंग, सटीक योजना और दृढ़ संकल्प के साथ क्या कुछ हासिल किया जा सकता है।” उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन में भारत की साहसिक कार्रवाई ने दिखा दिया कि एयर पॉवर किस तरह से कुछ ही दिनों में युद्ध की दिशा बदल सकती है। बता दें कि हिंडन एयरबेस पर तीन साल बाद वायुसेना दिवस आयोजित किया जा रहा है।

पहलगाम में 22 अप्रैल को 26 निर्दोष पर्यटकों की हत्या के बाद भारत ने 7 मई की रात को पाकिस्तान और पाक के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादी ठिकानों पर हवाई हमले शुरू किए। ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारत ने नौ आतंकवादी शिविरों को निशाना बनाया और अंतरराष्ट्रीय सीमा या नियंत्रण रेखा को पार किए बिना पाकिस्तान के भीतर तक जा कर हमला किया, जो पाकिस्तान के लिए अप्रत्याशित था।

भारतीय वायुसेना ने केवल 23 मिनट में इस पूरे ऑपरेशन को अंजाम दिया। इस दौरान वायुसेना ने पाकिस्तान के चीनी एयर डिफेंस सिस्टम को जाम किया और रडार से बचते हुए पाकिस्तान के मिलिट्री और आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया किया।

“ऑपरेशन सिंदूर ने एयर पावर की अहमियत दिखाई”- एयर चीफ

एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर में हमारे प्रदर्शन ने हमें प्रोफेशनली गर्व से सिर ऊंचा कर दिया है। इसने दुनिया को दिखाया कि कैसे एयर पावर को कुछ ही दिनों में निर्णायक तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। भारत के सटीक और साहसिक हवाई हमलों ने देश में आक्रामक हवाई कार्रवाई की अहमियत को लोगों के मन में दोबारा मजबूती से बिठा दिया है।”

उन्होंने कहा कि ऑपरेशन के दौरान स्वदेशी हथियार प्रणालियों जैसे आकाश मिसाइल और ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ने जबरदस्त प्रभाव छोड़ा है। दुश्मन की सीमा में अंदर तक जाकर की गई सटीक स्ट्राइक ने स्वदेशी तकनीकी क्षमताओं पर वायुसेना के भरोसे को सही साबित किया।

एयर चीफ ने बताया कि ऑपरेशन में भारत ने आकाश और ब्रह्मोस जैसी स्वदेशी मिसाइल प्रणालियों का इस्तेमाल किया। इन मिसाइलों ने पाकिस्तान के भीतर गहराई में स्थित ठिकानों को सटीकता से निशाना बनाया। उन्होंने कहा कि इन हथियारों का शानदार प्रदर्शन इस बात का प्रमाण है कि भारत की स्वदेशी क्षमताएं अब रियल वार सिचुएशंस में भी पूरी तरह सक्षम हैं।

नाकाम रही पाकिस्तान की जवाबी कोशिश

8 मई को पाकिस्तान ने गुजरात से लेकर पंजाब तक भारतीय सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और वैक्टर के जरिए हमला करने की कोशिश की। इसके बाद 9–10 मई की रात को भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तानी रडार सिस्टम को धोखा देने के लिए कई डमी और बिना पायलट वाले विमान तैनात किए, जिन्हें देखकर पाकिस्तान ने अपने रडार और मिसाइल सिस्टम एक्टिवेट कर दिए।

इस दौरान पाकिस्तान ने चीनी HQ-9 एयर डिफेंस सिस्टम और अन्य मिसाइल सिस्टम एक्टिवेट किए, जिससे भारतीय सर्विलांस सिस्टम को उनके असली ठिकानों की सटीक जानकारी मिल गई। इसके बाद भारतीय वायुसेना ने फॉलो-अप स्ट्राइक में पाकिस्तान के कई एयरबेस, रनवे, राडार स्टेशन और कमांड सेंटर्स को निशाना बनाया।

9–10 मई की रात को भारतीय वायुसेना ने ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, स्कैल्प और अन्य प्रिसिजन एम्युनिशन का इस्तेमाल किया। इन हमलों में हैंगर में मैंटेनेंस के लिए खड़े पाकिस्तान के पांच अमेरिकी एफ-16 लड़ाकू विमान जमीन पर ही नष्ट कर दिए गए। इसके अलावा सात अन्य विमान, जिनमें जेएफ-17 और एक निगरानी अवॉक्स विमान शामिल थे, वे भी इस हमले में तबाह हो गए।

भारतीय वायुसेना प्रमुख ने हाल ही में अपनी वार्षिक प्रेस ब्रीफिंग में बताया था कि पाकिस्तान को कुल 12 विमानों का नुकसान हुआ था।

93वें वायुसेना दिवस के मौके पर अपने संबोधन में एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा, “1932 में चार वापिति विमानों से शुरू हुई भारतीय वायुसेना आज विश्व की चौथी सबसे बड़ी वायुसेना बन चुकी है, जिसने हर युद्ध और संकट में देश की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आज के अनिश्चित वैश्विक माहौल में वायु शक्ति राष्ट्रीय सुरक्षा का निर्णायक उपकरण बन चुकी है और भारतीय वायुसेना हर चुनौती के लिए तत्पर है।”

उन्होंने कहा कि पाहलगाम में आतंकवादी हमले के बाद भारत ने मानवीयता-विरोधी कार्रवाई का सटीक और दृढ़ जवाब दिया। भारतीय वायुसेना ने इतने सटीक हमले किए कि पाकिस्तान को संघर्षविराम की बातचीत के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर हमारे इतिहास का एक स्पष्ट और अमिट उदाहरण है, जो राष्ट्र सेवा में हमारी अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

एयर चीफ ने कहा कि भारतीय वायुसेना न केवल युद्ध में बल्कि आपदा और संकट के समय भी देश के लिए सबसे पहले खड़ी होती है। बाढ़, प्राकृतिक आपदाओं और विदेशी संघर्ष क्षेत्रों से भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने में वायुसेना ने हमेशा अग्रणी भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने यह दिखाया कि भारतीय वायुसेना न केवल युद्धक्षेत्र में बल्कि मानवीय मिशनों में भी कितनी सक्षम है।

AIM-120 AMRAAM: ऑपरेशन सिंदूर में जेएफ-17 और एफ-16 खोने से घबराया हुआ है पाकिस्तान, जानता है भारत के अस्त्र और गांडीव से बचना है बेहद मुश्किल, इसलिए की ये डील

AIM-120 AMRAAM Missiles To Pakistan: How India’s Astra Mk2 & Gandiva Counter “MiG-21 Killer” Threat

AIM-120 AMRAAM: ऑपरेशन सिंदूर के बाद से पाकिस्तान बेहद घबराया हुआ है। जिस तरह से ऑपरेशन के दौरान भारत ने हवा में ही पाकिस्तान के पांच-छह 5 हाई-टेक फाइटर जेट्स को हवा में गिराया गया था, जिनमें एफ-16 के अलावा जेएफ-17 थंडर भी शामिल थे। ये वही थंडर जेट थे जिनमें चीनी पीएल-15 मिसाइलें लगी हुई थीं। वहीं एफ-16 फाइटर जेट्स को हवा में मार गिराने से पाकिस्तान सकते में है। जिसके बाद पाकिस्तान ने अमेरिका जाकर एफ-16 फाइटर जेट्स के लिए AIM-120 एडवांस्ड मीडियम रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल- AMRAAM मांगी थी। वहीं अमेरिका ने इन मिसाइल को बेचने की मंजूरी दे दी है। हालांकि ये मिसाइल काफी एडवांस हैं, लेकिन भारत पहले ही इन मिसाइलों की काट की तैयारी कर चुका है।

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मिग-21 को बनाया था निशाना

AIM-120 वही मिसाइल है जिसने 2019 में बालाकोट स्ट्राइक के बाद पाकिस्तानी एफ-16 से डॉग फाइट के दौरान विंग कमांडर अभिनंदन वर्थमान के मिग-21 बाइसन को टारगेट किया था। वहीं, इस सौदे के बाद पाकिस्तान को आधुनिक रडार-गाइडेड मिसाइलें मिलेंगी, जिनकी रेंज 150 किलोमीटर से अधिक है और जिन्हें “फायर एंड फॉरगेट” तकनीक से बनाया गया है।

सबसे बड़ा एयर-टू-एयर मिसाइल एक्सपोर्ट पैकेज

अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ वॉर ने हाल ही में एक अधिसूचना जारी कर पाकिस्तान को उन 30 देशों की सूची में शामिल किया है जो रेथियन कंपनी से AIM-120 मिसाइल (AIM-120 AMRAAM) खरीद सकते हैं। कुल सौदे की कीमत 41.6 अरब डॉलर बताई जा रही है, जो दुनिया का अब तक का सबसे बड़ा एयर-टू-एयर मिसाइल एक्सपोर्ट पैकेज है। इस सूची में ब्रिटेन, जापान, सऊदी अरब और तुर्की जैसे देश भी शामिल हैं। इस सौदे से पाकिस्तान को AIM-120C8 वर्जन की मिसाइलें मिलेंगी, जो अमेरिकी वायुसेना के AIM-120D मॉडल का एक्सपोर्ट वर्जन है। इस मिसाइल को एफ-16, यूरोफाइटर टाइफून, एफ-22 रैप्टर और एफ-35 के साथ इंटीग्रेट किया जा सकता है।

इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग से बचने में सक्षम

AIM-120C8 मिसाइल (AIM-120 AMRAAM) की सबसे बड़ी खासियत यह है कि पायलट एक बार मिसाइल दागने के बाद अपने विमान को सुरक्षित दिशा में मोड़ सकता है और मिसाइल अपने रडार से टारगेट को ट्रैक कर मार गिराती है। इस मिसाइल में इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग से बचाव के लिए टू वे डेटा लिंक्स, एडवांस गाइडेंस सिस्टम, जीपीएस असिस्टेंस और हाई-स्पीड टारगेट्स को ट्रैक करने की क्षमता है। यह मिसाइल एफ-16 फाइटर जेट के साथ ही इंटीग्रेट हो सकती है।

पाकिस्तान के पास 66 एफ-16

पाकिस्तान के पास इस समय करीब 66 एफ-16ए/बी और 19 एफ-16सी/डी फाइटर जेट हैं, जो चार स्क्वाड्रनों में तैनात हैं। इन विमानों में AIM-120 मिसाइलों को इंटीग्रेट करने से पाकिस्तान की बियोंड विजुअल रेंज यानी BVR यानी दृश्य सीमा से बाहर लड़ाकू क्षमता में बड़ा इजाफा होगा। पाकिस्तान पहले से ही AIM-120C5 वर्जन (AIM-120 AMRAAM) का इस्तेमाल कर चुका है, जिसने मिग-21 को निशाना बनाया था।

इसके अलावा पाकिस्तान चीन से पीएल-15 मिसाइल भी खरीद चुका है, जिसे उसने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय विमानों के खिलाफ इस्तेमाल करने का दावा किया था। पीएल-15 की रेंज 200 किलोमीटर के करीब है। अब अमेरिकी AIM-120 मिसाइल मिलने से पाकिस्तान के पास दो एडवांस बीवीआर मिसाइल सिस्टम होंगे। जिन्हें वो एफ-16 और जेएफ-17 पर लगाएगा।

AIM-120 AMRAAM Missiles To Pakistan: How India’s Astra Mk2 & Gandiva Counter “MiG-21 Killer” Threat
Gandiva Missile

भारत की अस्त्र और गांडीव तैयार

वहीं, भारत के एस्ट्रा एमके1 का एडवांस वर्जन एस्ट्रा एमके2 मिसाइल और गांडीव (एस्ट्रा एमके3) तैयार कर रहा है। एस्ट्रा एमके2 को डीआरडीओ ने डेवलप किया है। यह स्वदेशी बियोंड विजुअल रेंज एयर टू एयर मिसाइल है जिसकी रेंज 160 से 200 किलोमीटर तक है। यह भी “फायर एंड फॉरगेट” तकनीक पर आधारित है और इसमें डुअल-पल्स सॉलिड रॉकेट मोटर लगी है, जिससे यह मैक 4 यानी लगभग 4,940 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से उड़ सकती है।

एस्ट्रा एमके2 में स्वदेशी कु-बैंड आरएफ सीकर, इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम और डेटा लिंक शामिल हैं। इसके जरिए यह इलेक्ट्रॉनिक काउंटरमेजर्स को झेलते हुए भी लक्ष्य को सटीक रूप से भेद सकती है। इसे सुखोई-30एमकेआई, एलसीए तेजस मार्क1ए के अलावा और भविष्य के एएमसीए में लगाया जा सकेगा। 2025 में इसके कई यूजर ट्रायल सफल रहे हैं, जिनमें 160 किमी से अधिक दूरी पर हाई-स्पीड यूएवी टारगेट्स को निशाना बनाया है।

AIM-120 AMRAAM Missiles To Pakistan: How India’s Astra Mk2 & Gandiva Counter “MiG-21 Killer” Threat
ASTRA MK2

गांडीव के 2026 से फुल एयर ट्रायल

वहीं गांडीव यानी एस्ट्रा एमके3 की बात करें तो यह एस्ट्रा परिवार की सबसे एडवांस मिसाइल है, जिसमें सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट प्रोपल्शन सिस्टम है। यह तकनीक मिसाइल को लगातार हाई-स्पीड पर उड़ान बनाए रखने में सक्षम बनाती है। इसकी रेंज 300–350 किलोमीटर तक मानी जा रही है, जो अमेरिकी AIM-120 और चीनी पीएल-15 दोनों से अधिक है। गांडीव को अवॉक्स, रिफ्यूलिंग टैंकर और स्टेल्थ फाइटर जैसे हाई-वैल्यू टारगेट्स को दूर से ही तबाह करने के लिए डेवलप किया जा रहा है। 2025 में इसके ग्राउंड और फ्लाइट टेस्ट सफल रहे हैं और 2026 से इसका फुल एयर ट्रायल शुरू होने की तैयारी है।

AIM-120 AMRAAM Missiles To Pakistan
meteor missile rafale

राफेल में है घातक मिटिओर

वहीं राफेल भी बियोंड विजुअल रेंज हवा-से-हवा मार करने वाली मिसाइल मिटिओर से लैस है। जिसे यूरोप की एमबीडीए कंपनी ने बनाया है। इसकी सबसे बड़ी ताकत इसकी 150 से 200 किलोमीटर की लंबी रेंज है, जिससे यह दुश्मन के विमानों को दूर से ही निशाना बना सकती है। मिटिओर में रैमजेट इंजन लगा है, जो इसे मैक4 से ज्यादा की रफ्तार दे सकता है। यह “फायर-एंड-फॉरगेट” मिसाइल है, यानी इसे दागने के बाद पायलट को लक्ष्य पर नजर रखने की जरूरत नहीं होती। इसमें लगा एक्टिव रडार होमिंग सिस्टम और डेटा लिंक दुश्मन के इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग को भी फेल कर देता है। मिटिओर का “नो-एस्केप जोन” काफी बड़ा है, जिससे लक्ष्य का बच निकलना लगभग नामुमकिन हो जाता है। यह हर मौसम में और दिन-रात काम करने में सक्षम है।

मिटिओर ने गिराए जेएफ-17 और एफ16

मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान राफेल जेट्स से दागी गई मिटिओर ने पाकिस्तानी जेएफ-17 थंडर ब्लॉक III और एफ16 जेट्स को 150-200 किमी दूर से मार गिराया था। 7 मई की शुरुआती हवाई हमलों में, जब पीएएफ ने पीएल-15 मिसाइलों से जवाब दिया, तो मिटिओर के “नो-एस्केप जोन” में 2-3 पाकिस्तानी जेएफ-17 और 1 एफ-16 जेट्स फंस गए थे, जो हवा में मिटिओर का निशाना बन गए थे। ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान एयर फोर्स ने जब ड्रोन और मिसाइल स्वार्म अटैक किए, लेकिन मिटिओर ने राफेल के स्पैक्ट्रा इलैक्टॉनिक वॉरफेयर सिस्टम के साथ मिलकर इनमें से कई को बेकार कर दिया। यह मिटिओर ही थी जिसमें भारतीय वायुसेना को “फर्स्ट शॉट-फर्स्ट किल” एज दी, जिसके से पाकिस्तान एयर फोर्स को पीछे हटना पड़ा और 10 मई को सीजफायर के लिए पाकिस्तान को मजबूर किया।

अमेरिका-पाकिस्तान डील से भारत को चुनौती

फरवरी 2025 में अमेरिकी ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान के एफ-16 फ्लीट के रखरखाव के लिए 397 मिलियन डॉलर की सहायता को मंजूरी दी थी। जुलाई में पाकिस्तान एयर चीफ ने अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट के अधिकारियों से मुलाकात की, जिसके बाद मिसाइल सौदे का रास्ता साफ हुआ। अमेरिका ने पाकिस्तान को यह भरोसा दिलाया कि मिसाइलों का इस्तेमाल केवल आतंकवाद-रोधी अभियानों में किया जाएगा, लेकिन भारत में सुरक्षा एजेंसियां इसे लेकर सतर्क हैं।

इस डील का समय भी अहम है। 2024 में भारत-अमेरिका रक्षा संबंध चरम पर थे। एमक्यू-9बी ड्रोन, स्ट्राइकर कॉम्बैट व्हीकल और अन्य रक्षा तकनीक सौदे हुए। लेकिन 2025 के अंत तक दोनों देशों के बीच रिश्तों में तनाव आ गया। इस मिसाइल सौदे को भारत के सुरक्षा हलकों में रणनीतिक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।

Veer Nari Shaurya Samman Samaaroh 2025: भारतीय सेना और आर्मी वाइव्स वेलफेयर एसोसिएशन ने वीर नारियों के साहस को किया सलाम

Veer Nari Shaurya Samman Samaaroh 2025: Indian Army and AWWA Honour the Spirit of Sacrifice
Mrs Sunita Dwivedi, President AWWA at VEER NARI SHAURYA SAMMAN SAMAAROH – 2025 Event.

Veer Nari Shaurya Samman Samaaroh 2025: भारतीय सेना और आर्मी वाइव्स वेलफेयर एसोसिएशन ने इस वर्ष के वीर नारी शौर्य सम्मान समारोह 2025 के तहत तीन दिवसीय विशेष कार्यक्रम का आयोजन नई दिल्ली में किया। यह आयोजन 6 से 8 अक्टूबर के बीच शौर्य दिवस समारोहों के हिस्से के रूप में हुआ। इस समारोह का उद्देश्य उन वीर नारियों और वीर माताओं को सम्मान देना था, जिनके परिजनों ने देश की सेवा में सर्वोच्च बलिदान दिया।

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6 अक्टूबर को शुरू हुए इस कार्यक्रम में वीर नारियों और वीर माताओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का पहला चरण नेशनल वॉर मेमोरियल पर आयोजित श्रद्धांजलि समारोह से शुरू हुआ। इस अवसर पर वीर नारियों और माताओं ने देश के उन शहीद सैनिकों को पुष्पांजलि अर्पित की, जिन्होंने राष्ट्र की संप्रभुता और अखंडता की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए।

Veer Nari Shaurya Samman Samaaroh 2025

वहीं, 7 अक्टूबर को कार्यक्रम का दूसरा चरण दिल्ली छावनी स्थित इन्फैंट्री ऑफिसर्स मेस में आयोजित किया गया, जहां वीर नारी लाउंज में एक वेलफेयर इंटरैक्शन हुआ। इस सेशन में भारतीय सेना के विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इनमें डायरेक्टरेट ऑफ इंडियन आर्मी वेटरन्स, सेंट्रल रिकॉर्ड ऑफिस, रेजिमेंटल रिकॉर्ड ऑफिस, आर्मी ग्रुप इंश्योरेंस फंड, एक्स-सर्विसमैन कॉन्ट्रिब्यूटरी हेल्थ स्कीम, आर्मी वेलफेयर एजुकेशन सोसाइटी और आर्मी वेलफेयर प्लेसमेंट ऑर्गेनाइजेशन शामिल थे।

इस इंटरैक्शन के दौरान वीर नारियों और उनके परिजनों को विभिन्न वित्तीय सहायता योजनाओं, स्वास्थ्य लाभ, शिक्षा से जुड़ी सुविधाओं और रोजगार के अवसरों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। इस सत्र का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि शहीद सैनिकों के परिवारों को सभी अधिकार, योजनाएं और संसाधन सहज रूप से उपलब्ध हो सकें।

इस कार्यक्रम का एक अहम हिस्सा था वन-टू-वन ग्रिवेंस रिड्रेसल सेशन, जिसमें वीर नारियों और माताओं को सीधे संबंधित वेलफेयर एजेंसियों के प्रतिनिधियों से अपनी व्यक्तिगत समस्याएं साझा करने और समाधान प्राप्त करने का मौका मिला। इस दौरान शहीद परिवारों को न केवल भरोसा दिलाया गया कि भारतीय सेना उनके साथ हर कदम पर खड़ी है।

वहीं, शाम को मानेकशॉ सेंटर में वीर नारी शौर्य सम्मान समारोह 2025 का मुख्य समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर आर्मी वाइव्स वेलफेयर एसोसिएशन की अध्यक्ष सुनीता द्विवेदी, उपाध्यक्ष राजेश्वरी सिंह और वीर नारी समिति की चेयरपर्सन डॉ. मनीषा राठी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और पदाधिकारी उपस्थित थे। समारोह में जम्मू-कश्मीर, सियाचिन, अरुणाचल प्रदेश और आतंकवाद विरोधी अभियानों में शहीद हुए जवानों की 24 वीर नारियों और वीर माताओं को सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम का तीसरा और अंतिम चरण 8 अक्टूबर को आयोजित होगा, जिसमें वीर नारियां और वीर माताएं बिरला मंदिर का दौरा करेंगी और सरोजिनी नगर मार्केट का भ्रमण करेंगी। जिसमें वे कुछ समय के लिए औपचारिकता से दूर देश की राजधानी के सामाजिक-सांस्कृतिक माहौल से जुड़ सकेंगी।

Veer Nari Shaurya Samman Samaaroh 2025 यह आयोजन आर्मी वाइव्स वेलफेयर एसोसिएशन की उस निरंतर पहल को भी रेखांकित करता है जिसके जरिए वह “आशा, विश्वास और आस्था” के सिद्धांतों पर चलते हुए वीर नारियों को सशक्त बनाने का कार्य कर रही है।

आर्मी वाइव्स वेलफेयर एसोसिएशन पिछले कई दशकों से शहीदों के परिवारों के लिए सामाजिक सुरक्षा, कल्याण योजनाओं और पुनर्वास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इस बार भी संगठन ने विभिन्न एजेंसियों को एक साथ लाकर यह सुनिश्चित किया कि वीर नारियों और वीर माताओं को उनका हक और सम्मान पूरी गरिमा के साथ मिले।

इन्फैंट्री डे के मौके पर हर साल ये समारोह आयोजित किया जाता हैं, जिनमें शहीदों को श्रद्धांजलि देने के साथ-साथ उनके परिजनों को राष्ट्र की सामूहिक कृतज्ञता का अहसास कराया जाता है। इस बार का Veer Nari Shaurya Samman Samaaroh 2025 आयोजन इसलिए भी खास रहा क्योंकि इसमें इंटरैक्शन, संवाद, समाधान और सांस्कृतिक जुड़ाव चारों पहलुओं को खूबसूरती से जोड़ा गया।

India-South Korea Maritime Exercise: भारत और दक्षिण कोरिया की नौसेनाएं पहली बार इंचियोन में करेंगी संयुक्त समुद्री युद्धाभ्यास

India South Korea Maritime Exercise

India-South Korea Maritime Exercise: भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ को मजबूती देते हुए भारतीय नौसेना और दक्षिण कोरिया की नौसेना इस महीने के अंत में पहली बार इंचियोन में एक ऐतिहासिक बाइलेटरल मैरीटाइम एक्सरसाइज करने जा रही हैं। यह अभ्यास हिंद-प्रशांत क्षेत्र में किया जाएगा। खास बात यह होगी इसमें भारतीय नौसेना का अत्याधुनिक युद्धपोत आईएनएस सह्याद्री (INS Sahyadri) हिस्सा लेगा, जो फिलहाल नॉर्थ वेस्ट पैसिफिक रीजन और साउथ चाइना सी में ऑपरेशनल डिप्लॉयमेंट पर है।

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India-South Korea Maritime Exercise से दोनों देशों की संबंध होंगे मजबूत

आईएनएस सह्याद्री इस समय मलेशिया में तैनात है, जहां वह भारत-मलेशिया नौसैनिक सहयोग को मजबूत बनाने, दोनों नौसेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ाने के मिशन पर है। मलेशिया उन पांच देशों में से एक है जिनका साउथ चाइना सी में चीन के साथ समुद्री क्षेत्र को लेकर विवाद चल रहा है, इसलिए इस क्षेत्र में भारत की नौसैनिक उपस्थिति सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

India-South Korea Maritime Exercise रक्षा सूत्रों ने बताया कि भारतीय नौसेना और रिपब्लिक ऑफ कोरिया नेवी के बीच यह पहला मौका होगा जब दोनों देश औपचारिक रूप से द्विपक्षीय समुद्री अभ्यास कर रहे हैं। इससे पहले दोनों नौसेनाएं केवल मैरीटाइम पार्टनरशिप में एक्सरसाइज में हिस्सा लेती रही हैं, लेकिन अब इस सहयोग को एक नए स्तर पर ले जाया जा रहा है।

यह अभ्यास दो चरणों में आयोजित होगा हार्बर फेज और सी फेज। हार्बर फेज में दोनों नौसेनाओं के बीच रणनीतिक बातचीत, पेशेवर इंटरैक्शन, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और योजनाओं पर काम होगा। इसके बाद समुद्र में प्रैक्टिकल एक्सरसाइज की जाएंगी जिनमें सी बैटल स्ट्रेटेजी, मैन्युवर्स और जॉइंट ऑपरेशंस पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। सूत्रों ने बताया कि यह अभ्यास भारत और दक्षिण कोरिया के बीच लगातार मजबूत हो रहे नौसैनिक संबंधों को दर्शाता है।

आईएनएस सह्याद्री का यह अभियान केवल दक्षिण कोरिया तक सीमित नहीं रहेगा। नौसेना सूत्रों के अनुसार, आईएनएस सह्याद्री अगले महीने जापान और पापुआ न्यू गिनी की नौसेनाओं के साथ भी संयुक्त अभ्यास करेगा। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत के मल्टीलेटरल सुरक्षा सहयोग को और व्यापक रूप देने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

भारत और दक्षिण कोरिया के बीच संबंध केवल रणनीतिक नहीं बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से भी गहरे हैं। दोनों देशों ने 2003 में पहला द्विपक्षीय रक्षा संवाद और 2005 में पहला विदेश नीति और सुरक्षा संवाद आयोजित किया था। इसके बाद से दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग लगातार बढ़ता गया है।

भारतीय नौसेना की ओर से यह भी पुष्टि की गई है कि दक्षिण कोरियाई नौसेना को फरवरी 2026 में भारत के पूर्वी तट पर आयोजित होने वाले इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया जाएगा। यह आयोजन ग्लोबल नेवल फोर्सेस के लिए बड़ी एग्जीबिशन होता है, जिसमें भारत अपनी नौसैनिक क्षमता और रणनीतिक पहुंच को प्रदर्शित करता है।

India-South Korea Maritime Exercise है अहम दोनों देशों के लिए

आईएनएस सह्याद्री की भूमिका इस पूरे अभियान में बेहद अहम है। शिवालिक क्लास का यह स्वदेशी रूप से निर्मित मल्टी-रोल स्टेल्थ फ्रिगेट जुलाई 2012 में भारतीय नौसेना में शामिल की गया था। यह युद्धपोत अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों से लैस है और इसे सतह तथा वायु दोनों से आने वाले खतरों का सामना करने के लिए तैयार किया गया है। इसमें लंबी दूरी की एंटी-शिप मिसाइलें, मीडियम और शॉर्ट रेंज सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें और विभिन्न कैलिबर की ताकतवर गनें लगी हैं। इसके अलावा इसमें दो मल्टी-रोल हेलीकॉप्टर भी रखे जा सकते हैं, जिससे यह निगरानी, पनडुब्बी रोधी अभियानों और आपातकालीन स्थितियों में भी सक्षम है।

आईएनएस सह्याद्री की तैनाती नॉर्थ वेस्ट पैसिफिक रीजन और साउथ चाइना सी में भारत की बढ़ती रणनीतिक भूमिका को रेखांकित करती है। यह क्षेत्र एशिया-प्रशांत में व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और सामरिक हितों के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण है। चीन के बढ़ते प्रभाव और आक्रामक रुख के बीच भारत की नौसेना की सक्रियता क्षेत्रीय स्थिरता और संतुलन के लिए अहम मानी जाती है।

वहीं, भारत अपनी ‘एक्ट ईस्ट’ नीति को केवल राजनीतिक और आर्थिक मंचों तक सीमित नहीं रख रहा, बल्कि इसे रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र में भी सक्रिय रूप से लागू कर रहा है। दक्षिण कोरिया, जापान और पापुआ न्यू गिनी जैसे देशों के साथ लगातार सैन्य सहयोग बढ़ाकर भारत क्षेत्र में एक भरोसेमंद और प्रभावशाली सुरक्षा साझेदार के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है।

सूत्रों के अनुसार, इंचियोन में होने वाला यह द्विपक्षीय अभ्यास दोनों नौसेनाओं को न केवल एक-दूसरे की परिचालन क्षमता को समझने में मदद करेगा, बल्कि भविष्य में जॉइंट ऑपरेशंस के लिए तालमेल भी विकसित करेगा।

India-South Korea Maritime Exercise भारतीय नौसेना ने पिछले कुछ वर्षों में अपने युद्धपोतों को रणनीतिक रूप से उन क्षेत्रों में तैनात करना शुरू किया है जो भारत के सामरिक हितों से सीधे जुड़े हैं। नॉर्थ वेस्ट पैसिफिक में आईएनएस सह्याद्री की मौजूदगी यही बताती है कि भारत न केवल सामरिक उपस्थिति को मजबूत कर रहा है, बल्कि सहयोगी देशों के साथ उसके रिश्तों को भी नई दिशा दे रहा है।

Raksha Navachar Samvaad में बोले रक्षा मंत्री- बदल गया युद्ध का स्वरूप, भविष्य में क्वांटम कंप्यूटिंग और डायरेक्टेड एनर्जी वेपंस से लड़ी जाएंगी लड़ाइयां

Raksha Navachar Samvaad
Raksha Mantri Rajnath Singh

Raksha Navachar Samvaad: भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को कहा कि आज का युद्धक्षेत्र पूरी तरह बदल चुका है और भविष्य के युद्ध एल्गोरिद्म, ऑटोनॉमस सिस्टम्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन और क्वांटम कम्प्यूटिंग से तय होंगे। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में डायरेक्टेड एनर्जी वेपन्स जैसे हाई-टेक हथियार भी युद्ध की दिशा तय करेंगे। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हमने इसका डेमो भी देखा।

Rajnath Singh on Terrorism: रक्षा मंत्री बोले- ऑपरेशन सिंदूर में हमने आतंकियों का धर्म नहीं पूछा, बल्कि आतंक को बनाया निशाना

विज्ञान भवन में आयोजित ‘रक्षा नवाचार संवाद: इंटरेक्शन विद आईडीईएक्स स्टार्टअप्स’ (Raksha Navachar Samvaad) कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री ने आईडीईएक्स (इनोवेशन्स फोर डिफेंस एक्सलेंस) स्टार्टअप्स से बातचीत में कहा कि “युद्धक्षेत्र पूरी तरह बदल चुका है… अब युद्ध पारंपरिक हथियारों से नहीं, तकनीक से जीते जाएंगे।” उन्होंने इनोवेटर्स से अपील की कि वे मौजूदा समाधानों से आगे बढ़कर ऐसी तकनीकें विकसित करें जो युद्ध की परिभाषा ही बदल दें।

Raksha Navachar Samvaad के बारे में रक्षा मंत्री दिया बयान

उन्होंने कहा कि भारत को केवल फॉलोअर या नकलची नहीं, बल्कि नई तकनीक का क्रिएटर और ग्लोबल स्टैंडर्ड सेट करने वाला बनना होगा। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इन तकनीकों के प्रभावी प्रदर्शन का उदाहरण भी दिया।

राजनाथ सिंह ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में भारत ने रक्षा उत्पादन में स्वदेशीकरण की दिशा में बड़ी छलांग लगाई है। उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में घरेलू स्रोतों से पूंजीगत खरीद यानी (कैपिटल एक्विजिशन) 2021-22 में 74,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में 1.2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसे उन्होंने सिर्फ एक सांख्यिकीय बदलाव नहीं, बल्कि “निर्भरता से आत्मविश्वास” की मानसिकता में परिवर्तन बताया।

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Raksha Mantri Shri Rajnath Singh

उन्होंने कहा कि भारत सरकार की पब्लिक प्रोक्योरमेंट पॉलिसी के तहत सालाना खरीद में कम से कम 25 फीसदी हिस्सा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों के लिए आरक्षित है और 350 से अधिक सामान खासतौर पर इन्हीं के लिए चिन्हित की गई हैं। उन्होंने कहा कि “रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता अब नारा नहीं रहा, यह एक आंदोलन बन चुका है। पॉलिसी से लेकर प्रैक्टिस तक और इनोवेशन से लेकर इम्पैक्ट तक, यह परिवर्तन हमारे इनोवेटर्स और युवाओं की बदौलत संभव हुआ है।”

रक्षा मंत्री ने कहा कि आज भारत में 100 से अधिक यूनिकॉर्न कंपनियां हैं, लेकिन डिफेंस सेक्टर में एक भी यूनिकॉर्न नहीं है। उन्होंने स्टार्टअप्स से आह्वान किया कि वे भारत का पहला डिफेंस यूनिकॉर्न बनाएं। उन्होंने कहा कि “यह सिर्फ एक कंपनी नहीं होगी, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय होगी।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार इनोवेटर्स और स्टार्टअप्स के साथ खड़ी है और “विचार से कार्यान्वयन” तक हर कदम पर उनका साथ देगी।

राजनाथ सिंह ने बताया कि रक्षा उत्पादन में भारत ने बीते वित्त वर्ष में 1.5 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड तोड़ उत्पादन किया और 23,000 करोड़ रुपये से अधिक का निर्यात किया। उन्होंने कहा, “आप उस नए भारत के निर्माता हैं जो अपने लिए डिजाइन करता है, डेवलप करता है और प्रोड्यूस करता है। आपकी ऊर्जा और इनोवेशन ही आत्मनिर्भर भारत की तकनीकी दृष्टि को साकार कर रहे हैं।”

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Raksha Mantri Shri Rajnath Singh

उन्होंने 2018 में शुरू हुए आईडेक्स कार्यक्रम को एक क्रांतिकारी पहल बताया जिसने भारत में डिफेंस इनोवेशन को लोकतांत्रिक बनाया। उन्होंने कहा कि जब आईडेक्स लॉन्च हुआ था तो इसका आइडिया था भारत के युवाओं की प्रतिभा को सशस्त्र बलों की तकनीकी जरूरतों से जोड़ना। “आज, सिर्फ सात वर्षों में 650 से अधिक आईडेक्स विजेता उभरे हैं और 3,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के प्रोटोटाइप प्रोक्योरमेंट्स सुनिश्चित किए गए हैं। यह भारत के डिफेंस इनोवेशन में एक क्रांति है।”

रक्षा मंत्री ने कहा कि आईडेक्स से पहले भारत का टैलेंट विश्व स्तर पर आईटी, टेलीकॉम और स्पेस में तो योगदान दे रहा था, लेकिन रक्षा क्षेत्र में उसका पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा था। उन्होंने कहा, “आईडेक्स के जरिए हमने सुनिश्चित किया कि भारत की प्रतिभा भारत की सुरक्षा के लिए काम करे। आज यह पहल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक आंदोलन बन चुकी है जो भारतीय रक्षा निर्माण के भविष्य को गढ़ रही है।”

उन्होंने बताया कि सरकार ने स्टार्टअप्स और एमएसएमई को सपोर्ट देने के लिए रक्षा खरीद, उत्पादन और टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में कई अहम सुधार किए हैं। नया डिफेंस प्रोक्योरमेंट मैनुअल- 2025 पांच साल की गारंटीड ऑर्डर का वक्त देता है, जिसे पांच साल और बढ़ाया जा सकता है। डिफेंस एक्विजिशन प्रोसीजर में भी सुधार किए जा रहे हैं ताकि ट्रायल्स को तेज किया जा सके और इनोवेटिव सॉल्यूशंस के लिए सुनिश्चित प्रोक्योरमेंट हो सके।

Raksha Navachar Samvaad के बारे में कहा कि आईडेक्स, टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड, डिफेंस टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर स्कीम और सेल्फ-सर्टिफिकेशन प्रावधानों के जरिए एक व्यापक इकोसिस्टम बनाया जा रहा है जहां इनोवेशन को प्रोत्साहित, समर्थित और स्केल किया जा सके।

राजनाथ सिंह ने उन स्टार्टअप्स की भी सराहना की, जिन्हें ऑपरेशन सिंदूर में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया। इनमें रेफी एम फाइबर और ग्रेविटी सिस्टम्स जैसी कंपनियां शामिल थीं। उन्होंने कहा कि भारतीय स्टार्टअप्स द्वारा विकसित तकनीकें अब दुबई एयरशो 2025 जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी सराही जा रही हैं।

उन्होंने बताया कि रक्षा मंत्रालय, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, डीपीआईआईटी और वित्तीय संस्थानों के साथ रणनीतिक साझेदारी कर रहा है Raksha Navachar Samvaad ताकि स्टार्टअप्स को एंड-टू-एंड सपोर्ट मिल सके। उद्देश्य ऐसा इकोसिस्टम बनाना है जहां हर आइडिया प्रोडक्ट बन सके, हर प्रोटोटाइप स्केल हो सके और हर इनोवेशन भारत की डिफेंस प्रिपेयर्डनेस में योगदान दे सके।

Mir Shafiq ISIS Logistics Pakistan: बलूचिस्तान में आईएसआईएस को जिंदा कर रहा है पाकिस्तान, लश्कर, जैश और दाएश को एक साथ लाने की है तैयारी

Mir Shafiq ISIS Logistics Pakistan

Mir Shafiq ISIS Logistics Pakistan: पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में आतंक एक बड़ा खुलासा सामने आया है। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) ने मीर शफीक-उर-रहमान मेंगल नाम के एक कुख्यात कबायली नेता को आईएसआईएस (इस्लामिक स्टेट इन इराक एंड सीरिया) और आईएसकेजेपी (इस्लामिक स्टेट खोरासान प्रोविंस) के लिए हथियारों और लॉजिस्टिक सप्लाई का कॉर्डिनेटर नियुक्त किया है।

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मीर शफीक खुजदारजिले का एक प्रभावशाली कबायली नेता है, जो लंबे समय से पाकिस्तानी आईएसआई का नजदीकी माना जाता है। खुफिया सूत्रों ने बताया कि उसे लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, आईएसआईएस और दाएश यानी “अल-दौला अल-इस्लामिया फिल-इराक वाल-शाम” जैसे संगठनों को बलूचिस्तान में एक साथ लाने की गुप्त जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह नियुक्ति उस समय की गई जब बलूचिस्तान में पााकिस्तान की सेना लगातार हिंसा कर रही है। रिपोर्टों के मुताबिक, शफीक को आतंकी नेटवर्क को मजबूत करने, भर्ती अभियान चलाने, सुरक्षित ठिकानों की व्यवस्था करने और लॉजिस्टिक सप्लाई चैन को संभालने का काम सौंपा गया है।

मीर शफीक का नाम पहले भी हिंसा, गुमशुदगियों और कथित डेथ स्क्वाड्स से भी जुड़ा रहा है। 2008 में जब पाकिस्तानी सेना ने बलूचिस्तान में ‘किल एंड डंप’ नीति लागू की, तब आईएसआई ने स्थानीय मिलिशिया गठित की। इन्हीं दिनों शफीक को खुजदारमें एक ब्रिगेडियर ने भर्ती किया और उसे “एसेट” घोषित किया गया। उन्होंने बलूच मुसल्लाह डिफ़ा तंजीम नामक मिलिशिया बनाई, जिसने अपहरण, यातनाएं और सामूहिक हत्याओं को अंजाम दिया। 2011 में तोटक गांव में सेना के ऑपरेशन के बाद उसे वहां का कंट्रोल भी सौंपा गया। इसी दौरान 82 वर्षीय मोहम्मद राहिम खान कलंदरानी और उनके परिवार के 16 सदस्यों का अपहरण हुआ और बाद में कई शव सामूहिक कब्रों में पाए गए।

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Mir Shafiq with CM Balochistan sarfaraz Bugti. Ex PM Pakistan Anwar ul haq kakad, and a top Army officer. Mir Shafiq is responsible of bombing on Lawyers in Quetta killed 100’s, also bnp gathering were targeted past month killed dozens.

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, पाकिस्तान के जनरल हेडक्वार्टर ने लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और दूसरे जिहादी संगठनों को बलूचिस्तान में एक साझा प्लेटफॉर्म पर लाकर संगठित किया है। इन संगठनों को न केवल बलूचिस्तान में स्वतंत्रता आंदोलन को दबाने के लिए बल्कि अफगानिस्तान, भारत और अन्य पड़ोसी क्षेत्रों में अस्थिरता फैलाने के लिए तैयार किया जा रहा है।

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Mir Shafiq ISIS Logistics Pakistan मीर शफीक का आईएसआईएस से जुड़ाव भी नया नहीं है। 2016 में सिंध के शिकारपुर में पकड़े गए एक आत्मघाती हमलावर उस्मान ब्रोही ने कबूल किया कि उसे शफीक के शिविर में आईएसआईएस के लिए ट्रेनिंग दी गई गई थी। उसी साल आईएसआईएस ने बलूचिस्तान में अपनी मौजूदगी का ऐलान किया और शफीक को अपना खासमखास बताया। 2017 में रॉयटर्स को दिए एक साक्षात्कार में एक पाकिस्तानी लड़के ने बताया कि वह वाध इलाके में शफीक के ट्रेनिंग कैंप में प्रशिक्षण ले रहा था। सितंबर 2025 में क्वेटा के शाहवानी स्टेडियम में हुए आईएसकेजेपी आत्मघाती हमले में 15 लोगों की मौत हुई। इस हमले के पीछे भी शफीक का नेटवर्क सक्रिय था।

खुफिया रिपोर्टों का दावा है कि पाकिस्तान बलूचिस्तान को एक “कंट्रोल्ड कॉन्फ्लिक्ट जोन” में तब्दील कर रहा है। उद्देश्य यह है कि इस क्षेत्र में स्थायी सैन्य उपस्थिति बनाए रखी जाए, पश्चिमी देशों से आतंकवाद-रोधी मदद ली जाए और सारी हिंसा का दोष आईएसआईएस पर डालकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर “डिनाएबिलिटी” बरकरार रखी जाए। सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान की खुफिया Mir Shafiq ISIS Logistics Pakistan एजेंसियों की योजनाा है कि निकट भविष्य में होने वाले कुछ धमाकों को आईएसआईएस के नाम पर किया जाए।

बलूच वॉयस फॉर जस्टिस जैसे संगठनों ने आरोप लगाया है कि मीर शफीक पिछले दो दशकों से आईएसआई के संरक्षण में इस क्षेत्र में चरमपंथी नेटवर्क चला रहे हैं। सरदार अख्तर मेंगल ने भी जुलाई 2023 में उन पर अपने घर पर मोर्टार हमला करने का आरोप लगाया था।

मीर शफीक के पिता नसीर मेंगल बलूचिस्तान के अंतरिम मुख्यमंत्री रहे थे, जबकि उनके भाई अत्ता-उर-रहमान मेंगल को जून 2025 में बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने मार गिराया। बीएलए ने इसे “राज्य-प्रायोजित डेथ स्क्वाड” के खिलाफ कार्रवाई बताया। जुलाई 2023 में वाध में उसके समर्थकों और बीएनपी-एम के कार्यकर्ताओं के बीच झड़प में चार लोग मारे गए थे।

शफीक की नियुक्ति को लेकर सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। सोशल मीडिया एक्स पर अफगान और भारतीय यूजर्स का कहना है कि यह पाकिस्तान की “हाइब्रिड वॉरफेयर” रणनीति है। उनका कहना है कि आईएसआई ईरान और अफगानिस्तान को अस्थिर करने के लिए ऐसे संगठनों को औजार के तौर पर इस्तेमाल कर रही है। यूरेशिया रिव्यू की रिपोर्ट में कहा गया कि आईएसकेजेपी अब बलूच राष्ट्रवादियों को निशाना बना रहा है और इसमें आईएसआई का सीधा हाथ है।

मीर शफीक ने लाहौर के एलीट एचिसन कॉलेज से पढ़ाई करने के बाद उन्होंने एक दाओबंदी मदरसे में दाखिला लिया, जहां वह लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा। 2020 में उसे इस्लामाबाद बुलाकर नई जिम्मेदारी दी गई। इसके कुछ ही महीनों बाद उसने क्वेटा में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसने स्थानीय राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी। जेम्सटाउन फाउंडेशन ने अपनी रिपोर्ट में उसे “पाकिस्तान का सबसे घातक मर्सनरी लीडर” बताया।

अमेरिका, यूएई और अन्य देशों ने आईएसआईएस की पाकिस्तान में गतिविधियों पर और Mir Shafiq ISIS Logistics Pakistan  चिंता जताई है। बलूचिस्तान पोस्ट ने शफीक को “राज्य का घातक हथियार” करार दिया। क्षेत्रीय विशेषज्ञों का कहना है कि आईएसआई के संरक्षण में पनप रहा यह नेटवर्क न केवल बलूचिस्तान बल्कि पूरे ईरान-अफगानिस्तान-पाकिस्तान त्रिकोण क्षेत्र की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन चुका है।

Tent-Based Homestay: भारतीय सेना ने कुमाऊं के “गेटवे टू शिवनगरी गूंजी” में शुरू किया टेंट बेस्ड होमस्टे, प्रति रात के लिए चुकाने होंगे इतने रुपये

Tent-Based Homestay

Tent-Based Homestay: उत्तराखंड के सीमावर्ती कुमाऊं सेक्टर में पर्यटन को बढ़ावा देने और सीमांत इलाकों के सामाजिक-आर्थिक विकास को मजबूत बनाने के लिए भारतीय सेना लगातार पहल कर रही है। ऑपरेशन सद्भावना के तहत सेना ने कुमाऊं के गरब्यांग गांव में टेंट बेस्ड होमस्टे (Tent-Based Homestay) की शुरुआत की है। 6 अक्टूबर को इस परियोजना का उद्घाटन उत्तर भारत एरिया के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल डीजी मिश्रा ने किया। यह पहल केंद्र सरकार के वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य सीमांत इलाकों में पर्यटन को बढ़ावा देना, स्थानीय संस्कृति को संरक्षित करना और गांवों में रोजगार के नए अवसर पैदा करना है।

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Tent-Based Homestay – गरब्यांग गांव में टेंट बेस्ड होमस्टे

गरब्यांग गांव अपनी ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता के लिए जाना जाता है। हिमालय की गोद में बसा यह खूबसूरत इलाका बर्फ से ढकी पर्वत श्रृंखलाओं और शांत घाटियों से घिरा हुआ है। इसे अक्सर “गेटवे टू शिवनगरी गूंजी” कहा जाता है। यहीं से दो प्रसिद्ध तीर्थ मार्ग निकलते हैं, एक आदि कैलाश की ओर तो दूसरा ओम पर्वत व कालापानी की तरफ। धार्मिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक दृष्टि से यह उच्च हिमालयी क्षेत्र का अहम पर्यटन स्थल है।

होमस्टे परियोजना (Tent-Based Homestay) के उद्घाटन के मौके पर गांववालों ने इसमें उत्साहपूर्वक भाग लिया और भारतीय सेना के इस प्रयास की सराहना की। ग्रामीणों ने बताया कि इस प्रकार की पहल से न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि पर्यटन से जुड़ी आर्थिक गतिविधियां भी तेज होंगी।

यह टेंट आधारित होमस्टे सुविधा भारतीय सेना ने तैयार की है और अब इसे स्थानीय ग्रामीणों को स्वतंत्र रूप से चलाने के लिए सौंप दिया गया है। इसका प्रबंधन गरब्यांग ग्राम समिति द्वारा किया जाएगा। पर्यटक यहां आ कर स्थानीय संस्कृति, परंपराओं और जीवनशैली से भी रूबरू होंगे। टेंट का एक व्यक्ति के लिए प्रति रात का किराया 1000 रुपये रखा गया है, जिसमें भोजन भी शामिल है। बुकिंग के लिए 9410734276, 7579811930 और 9596752645 पर संपर्क किया जा सकता है।

गरब्यांग और इसके आस-पास का इलाका धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों से भरा हुआ है। यहां ओम पर्वत, कैलाश पर्वत (लिपुलेख दर्रे के रास्ते), कालिमाता मंदिर (जहां से काली नदी का उद्गम होता है), ऋषि व्यास गुफा, आदि कैलाश, पार्वती कुंड, गौरी कुंड और गूंजी स्थित रंग समुदाय संग्रहालय जैसे कई महत्वपूर्ण स्थल हैं। ये सभी स्थान देशी और विदेशी यात्रियों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं।

पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ भारतीय सेना कुमाऊं के सीमावर्ती इलाकों में विकास के कई अन्य कार्य भी कर रही है। गांवों में विद्युतीकरण, हाइब्रिड सोलर प्लांट की स्थापना, चिकित्सा शिविरों का आयोजन, पॉलीहाउस की स्थापना और अन्य आधारभूत ढांचा परियोजनाएं सेना की प्रमुख पहलों में शामिल हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य सीमांत समुदायों के जीवन स्तर को बेहतर बनाना, आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करना और स्थानीय लोगों को राष्ट्र के विकास के साथ जोड़ना है।

टेंट आधारित होमस्टे परियोजना

गरब्यांग में शुरू की गई यह टेंट आधारित होमस्टे परियोजना (Tent-Based Homestay) इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो न केवल पर्यटन को नई ऊंचाइयां देगी बल्कि सीमावर्ती इलाकों में समुदाय आधारित विकास मॉडल को भी मजबूत करेगी। यह पहल इस बात का स्पष्ट संकेत है कि भारतीय सेना केवल सीमाओं की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि वह स्थानीय समाज और अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में भी सक्रिय भूमिका निभा रही है।

Indian Army Artificial Intelligence: इंडियन आर्मी बन रही AI फ्रैंडली, ऑपरेशन सिंदूर में एआई ने बताईं दुश्मन की हरकतें, सेना ने दिया मुंह तोड़ जवाब

Indian Army Artificial Intelligence
Lt Gen Rajiv Kumar Sahni,- DG EME

Indian Army Artificial Intelligence: भारतीय सेना अब पारंपरिक लड़ाई की सीमाओं से बाहर निकलकर अब डिजिटल नेटवर्क, ऑटोमेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर फोकस कर रही है। सेना के मॉडर्नाइजेशन में तकनीक बड़ा रोल रहा है। जिस समय दुनिया भर की सेनाएं अपने स्ट्रक्चर में नई तकनीक को तेजी से शामिल कर रही हैं, तो भारतीय सेना ने भी अपनी क्षमताओं को आधुनिक समय के अनुरूप ढालने में एक बड़ा कदम आगे बढ़ाया है। बात ऑपरेशन सिंदूर की ही करें, तो टेक्नोलॉजी के बिना इसे सफलतापूर्वक पूरा कर पाना लगभग असंभव ही था।

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दुनियाभर के सेनाएं ऑटोमेशन, डिजिटाइजेशन और बिग डेटा एनालिटिक्स जैसी तकनीकों को अपनाकर अपने कॉम्बैट सिस्टम को स्मार्ट और फास्ट बना रही हैं। चाहे वह लड़ाई के मैदान की स्थिति हो, खुफिया जानकारियों का विश्लेषण हो, लॉजिस्टिक्स का प्रबंधन हो या ट्रेनिंग की प्रक्रिया, हर स्तर पर तकनीक की भूमिका निर्णायक बन चुकी है।

भारतीय सेना में “डिकेड ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन” – Indian Army Artificial Intelligence

भारतीय सेना ने भी इसे समय रहते समझा और “डिकेड ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन” यानी परिवर्तन का दशक शुरू किया। इस अभियान के तहत वर्ष 2024–2025 को “ईयर ऑफ टेक्नोलॉजी एब्सॉर्प्शन” घोषित किया गया ताकि तकनीक केवल हेडक्वॉटर्स तक सीमित न रहे, बल्कि हर सैनिक और हर यूनिट तक पहुंचे।

इस बदलाव में रक्षा मंत्रालय के “ईयर ऑफ रिफॉर्म्स” ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन दोनों पहलों के तालमेल से भारतीय सेना एक आधुनिक, फुर्तीली और तकनीकी रूप से एडवांस हुई है। सेना में ऑटोमेशन और डिजिटाइजेशन केवल नए सिस्टम लगाने भर की प्रक्रिया नहीं रही, बल्कि इसने काम करने के तरीके को मूल रूप से बदल दिया है। सभी प्रणालियां और प्रक्रियाएं अब एक ऐसे स्ट्रक्चर में काम कर रही हैं, जो तेज, भरोसेमंद और नेटवर्क-फोकस फैसले लेने में सक्षम है।

एआई से फैसले लेना हुआ आसान

इस क्रांतिकारी बदलाव के पीछे सेना की “डायरेक्टरेट जनरल ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड मैकेनिकल इंजीनियर्स” (DGEME) की अहम भूमिका रही है। डीजी ईएमई के नेतृत्व में डिजिटल सिस्टम में जबदस्त इजाफा हुआ है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लेकर क्लाउड सिस्टम और स्मार्ट वेपंस तक भारतीय सेना ने तकनीकी मोर्चे पर कई ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। ऑटोमेशन के चलते यूजर बेस में 1200 फीसदी की बढ़ोतरी, और डेटा स्टोरेज क्षमता में 620 फीसदी का इजाफा हुआ है। इस बदलाव ने हर स्तर पर फैसले लेने की रफ्तार बढ़ी है।

एआई बना ‘फोर्स मल्टीप्लायर’

डीजी ईएमई लेफ्टिनेंट जनरल राजीव कुमार साहनी ने बताया कि भारतीय सेना में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका अब ‘फोर्स मल्टीप्लायर’ की बन चुकी है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने आधुनिक युद्ध की परिभाषा ही बदल दी है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इसका प्रभाव साफ तौर पर दिखाई दिया, जब रीयल टाइम डेटा एनालिटिक्स, मौसम संबंधी रिपोर्ट और इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस ने न केवल दुश्मन की गतिविधियों और संभावित खतरों का पता लगाने में मदद की बल्कि सटीक निशाना लगाने में भी अहम भूमिका निभाई। एआई ने स्पष्ट कर दिया कि भविष्य के युद्धों में यह तकनीक निर्णायक भूमिका निभाएगी।

कई स्वदेशी एआई सिस्टम तैयार

पूर्व में डीजी इन्फो सिस्टम रह चुके लेफ्टिनेंट जनरल राजीव कुमार साहनी के मुताबिक भारतीय सेना ने कई स्वदेशी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रणालियां डेवलप की हैं। इनमें सबसे अहम है इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस कॉलेशन एंड एनालिसिस सिस्टम यानी ECAS। यह सिस्टम रियल टाइम में दुश्मन के खतरों की पहचान कर सकता है। इसके अलावा ऑपरेशन सिंदूर में त्रिनेत्र सिस्टम को प्रोजेक्ट संजय के साथ जोड़ कर ऑपरेशनल कमांड और ग्राउंड यूनिट्स को कॉमन ऑपरेशनल पिक्चर उपलब्ध कराई, जिससे तुरंत फैसले लेने में आसानी हुई। उन्होंने बताया कि ECAS सॉफ्टवेयर को बहुत कम समय में मॉडिफाई किया गया ताकि ऑपरेशन की जरूरतों के अनुसार दुश्मन के सेंसरों का पता लगाया जा सके।

उन्होंने बताया कि भारतीय सेना ने खतरे की भविष्यवाणी में भी Indian Army Artificial Intelligence को पूरी तरह शामिल कर लिया है। टाइम, स्पेस और रिसोर्सेज के जटिल मैट्रिक्स में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित प्रेडिक्टिव थ्रेट मॉडलिंग ने यह सुनिश्चित किया कि सही समय पर सही संसाधनों को सही जगह पर तैनात किया जा सके। मल्टी-सेंसर और मल्टी-सोर्स डेटा फ्यूजन लगभग रीयल टाइम में हासिल किया गया, जिससे बैटल फील्ड में कमांडरों को फैसला लेने में आसानी हुई।

जिज्ञासा- मिलिट्री जनरेटिव एआई मॉडल

डीजी ईएमई के मुताबिक Indian Army Artificial Intelligence फील्ड में भारत ने अपने लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स और स्मॉल लैंग्वेज मॉडल्स डेवलप करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। सेना ने जिज्ञासा नामक मिलिट्री जनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल तैयार किया है, और एआई ऐज ए सर्विस प्लेटफॉर्म” को भी ऑपरेशनल किया गया है। इन सभी पहल का का उद्देश्य भारत की सैन्य जरूरतों के मुताबिक एक सुरक्षित और स्वदेशी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्ट्रक्चर तैयार करना है।

बैटलफील्ड सर्विलांस सिस्टम शुरू

उन्होंने बताया कि डिजिटाइजेशन के मोर्चे पर भी भारतीय सेना ने तेजी से कदम बढ़ाए हैं। डेटा गवर्नेंस पॉलिसी लागू की गई है। उत्तरी और पश्चिमी मोर्चों पर प्रोजेक्ट संजय के तहत बैटलफील्ड सर्विलांस सिस्टम शुरू किया गया है। प्रोजेक्ट अवागत को पूरे भारतीय थलसेना में लागू किया गया है। दो वर्षों में 70 से अधिक डिजिटल एप्लिकेशन तैयार की गई हैं और एक डेटा डिक्शनरी भी बनाई गई है ताकि सभी विभागों में जानकारी का सिंगल सोर्स बनाया जा सके। उनका कहना है कि इस डिजिटल क्रांति ने डेटा डेमोक्रेटाइजेशन को बढ़ावा दिया है और एक डेटा-सेंट्रिक इंडियन आर्मी की नींव रखी है।

यूनिफाइड एआई प्लेटफॉर्म भी तैयार

डीजी ईएमई ने बताया कि भारतीय सेना ने 18 दिसंबर 2024 को बेंगलुरु में “आर्मी एआई रिसर्च एंड इनक्यूबेशन सेंटर” की स्थापना की थी। यह केंद्र डीआरडीओ, उद्योग जगत और शैक्षणिक संस्थानों के साथ मिलकर एआई प्रोजेक्ट्स को तेजी से आगे बढ़ा रहा है। इसके साथ ही एक यूनिफाइड एआई प्लेटफॉर्म भी बनाया जा रहा है जो ऑपरेशन, इंटेलिजेंस, लॉजिस्टिक्स और ट्रेनिंग को एक ही स्ट्रक्चर में जोड़ेगा। इसके अलावा डीजीआईएस और आर्टपार्क-आईआईएससी के सहयोग से “डिफेंस एआई हब” भी तैयार किया जा रहा है, जो Indian Army Artificial Intelligence की प्रगति की निगरानी करेगा।

Tejas Mk1A Order: वायुसेना क्यों कर रही तेजस MK1A के नए ऑर्डर से तौबा? LCA मार्क2 को ‘वर्कहॉर्स’ बनाने की तैयारी!

Tejas Mk1A Order: Indian Air Force not willing New Procurement Amid Delivery Delays and Production Challenges

Tejas Mk1A Order: भारतीय वायुसेना ने स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट एलसीए तेजस एमके1ए को लेकर बड़ा फैसला लिया है। भारतीय वायुसेना ने अब घरेलू लड़ाकू विमान तेजस एमके1ए के नए ऑर्डर जारी नहीं करने का फैसला किया है। अभी तक दो चरणों में 180 तेजस एमके1ए फाइटर एयरक्राफ्ट के ऑर्डर Tejas Mk1A Order दिए जा चुके हैं। लेकिन इनमें से अभी तक एक भी फाइटर जेट की डिलीवरी नहीं हुई है। वहीं, अक्टूबर में पहले दो तेजस एमके1ए की डिलीवरी की जानी है।

Tejas Mk1A Engine Delivery: एचएएल को जीई से मिला चौथा एफ404 इंजन, वायुसेना को जल्द होगी दो तेजस जेट्स की डिलीवरी

देरी से रणनीतिक योजनाओं पर पड़ा असर

वायुसेना सूत्रों ने बताया कि तेजस एमके1ए (Tejas Mk1A Order) के उत्पादन में देरी और इंजन सप्लाई की दिक्कतों के चलते यह फैसला लिया गया है। वायुसेना के उच्च अधिकारियों का कहना है कि हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड द्वारा समय पर डिलीवरी न होने से वायुसेना की रणनीतिक योजनाओं पर असर पड़ा है। उन्होंने बताया कि 2021 में दिए गए 83 तेजस एमके1ए विमानों के ऑर्डर की डिलीवरी अभी पूरी नहीं हुई, जबकि नए 97 विमानों का ऑर्डर जारी हो चुका है।

मार्क1ए के नए ऑर्डर देने की कोई गुंजाइश नहीं

सूत्रों ने कहा कि फरवरी 2021 में हुए 48,000 करोड़ रुपये के पहले सौदे के तहत 83 विमानों (73 सिंगल-सीटर और 10 ट्रेनर) की डिलीवरी मूल रूप से मार्च 2024 से शुरू होनी थी, लेकिन देरी से यह मार्च 2025 तक खिसक गई। वहीं इनमें से दो विमान की डिलीवरी अक्टूबर 2025 में प्रस्तावित है, और वित्त वर्ष 2025 के अंत तक 12 विमान वायुसेना को मिलने की उम्मीद है।

सूत्रों ने कहा कि डिलीवरी में देरी इतनी हो चुकी है कि फिलहाल तेजस मार्क1ए (Tejas Mk1A Order) के नए ऑर्डर देने की कोई गुंजाइश ही नहीं हैं। उन्होंने बताया कि अब वायुसेना का पूरा फोकस तेजस मार्क2 पर है। जिसके प्रोटोटाइप की पहली उड़ान 2026 के आखिर तक या 2027 की शुरुआत में होने की उम्मीद है। उम्मीद जताई जा रही है कि इसका प्रोडक्शन 2028 से शुरू हो जाएगा, जो 2035 तक चलेगा।

एयर चीफ ने भी की मार्क2 की वकालत

हाल ही में 93वें एयर फोर्स डे पर भारतीय वायुसेना के प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि तेजस भविष्य की हल्के लड़ाकू विमानों की जरूरतों के लिए हमारी रीढ़ है। उन्होंने कहा कि एलसीए मार्क2 मेरी नजर में मार्क1ए का ही एक एक्सटेंशन है। यह एक बड़ा प्लेटफॉर्म होगा, जो अधिक हथियार ले जा सकेगा, लंबी दूरी और ज्यादा समय तक ऑपरेट कर सकेगा और बड़े हथियार ले जाने में सक्षम होगा। इसलिए यह वायुसेना की योजनाओं में बड़ी अहमियत रखता है।

उन्होंने कहा कि अगर एमके2 प्रोग्राम समय पर होता, तो संभव है कि एलसीए मार्क1ए (Tejas Mk1A Order) की कुछ अगली खेप मार्क2 के रूप में ऑर्डर की जाती। उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में इस पर विचार हो सकता है। तेजस मार्क1ए की टाइमलाइन पर उन्होंने कहा कि यह विमान वायुसेना की दी गई क्वॉलिफिकेशन रिक्वायरमेंट्स के अनुसार डेवलप किया जा रहा है, और जैसे ही एचएएल इसे सर्टीफाइड करेगा, वायुसेना इसे शामिल करने के लिए तैयार है। उन्होंने बताया कि उत्पादन शुरू हो चुका है, कुछ वादे किए गए हैं, कुछ रिसर्च और डेवलपमेंट का काम बाकी है। जैसे ही यह पूरा होगा, हम विमान लेने के लिए तैयार हैं।

प्रोडक्शन स्पीड है असली चुनौती

हालांकि, एयर चीफ ने साफ कहा कि असली चुनौती प्लेटफॉर्म की नहीं बल्कि प्रोडक्शन स्पीड की है। उन्होंने कहा, “वायुसेना को हर साल कम से कम दो स्क्वाड्रन यानी 30 से 40 फाइटर विमान चाहिए ताकि पुरानी हो चुकी फ्लीट को समय रहते बदला जा सके।” वर्तमान में वायुसेना के पास करीब 30 फाइटर स्क्वाड्रन हैं, जो उसकी स्वीकृत 42 स्क्वाड्रन की ताकत से काफी कम है। पुराने मिग-21, मिग-27 और जैगुआर विमानों के तेजी से रिटायर होने के कारण यह अंतर और बढ़ता जा रहा है।

एयर चीफ मार्शल सिंह ने एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट प्रोग्राम पर भी भरोसा जताया। उन्होंने कहा, “AMCA की पहली उड़ान 2028 के आसपास और इंडक्शन 2035 तक का लक्ष्य है। अगर फोकस बनाए रखा जाए तो यह समयसीमा पूरी हो सकती है या उससे भी बेहतर प्रदर्शन हो सकता है। हमें अब स्पष्ट रूप से पता है कि हमें कौन-सी तकनीक चाहिए और वह कहां उपलब्ध है।”

एमके2 पर शिफ्ट कर दें 97 विमानों का ऑर्डर – Tejas Mk1A Order

वहीं सूत्रों का कहना है कि एमके1ए के 97 विमानों के दूसरे ऑर्डर को एमके2 पर शिफ्ट कर देना चाहिए। अगर हम जल्दी ऑर्डर देते हैं, तो दोनों का प्रोडक्शन साथ शुरू हो सकता है, जिससे समय और क्षमता दोनों में बड़ा अंतर आएगा।”

एमके2 में अधिक पेलोड, लंबी रेंज और एडवांस्ड एवियोनिक्स होंगे, जिससे यह अगले दशक में भारत की सामरिक बढ़त बनाए रखने के लिए उपयुक्त प्लेटफॉर्म साबित होगा। भारतीय वायुसेना और सरकार अब तेजस एमके1, एमके1ए और एमके2 के तीनों वेरिएंट्स में कुल 350 से अधिक स्वदेशी एलसीए को शामिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

83 विमानों का पहला ऑर्डर दिया था 2021 में – Tejas Mk1A Order

फरवरी 2021 में कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी ने 83 तेजस एमके1ए विमानों के ऑर्डर को मंजूरी दी थी, जिसमें 73 सिंगल-सीटर और 10 ट्रेनर शामिल थे। इस सौदे की कुल लागत 48,898 करोड़ रुपये थी और प्रति विमान की कीमत लगभग 579 करोड़ रुपये के आसपास थी, जिसमें हथियार, रखरखाव और ट्रेनिंग का खर्च शामिल था। इसके लिए अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक के साथ अगस्त 2021 में 5,375 करोड़ रुपये की सौदे के तहत 99 जीई-एफ404 टर्बोफैन इंजन देने का करार किया गया था।

सितंबर 25 में दूसरा ऑर्डर

वहीं, इस साल 25 सितंबर को रक्षा मंत्रालय ने 97 तेजस मार्क1ए की खरीद का ऑर्डर जारी किया, जिसकी कुल लागत 62,370 करोड़ रुपये थी। इन विमानों में 68 लड़ाकू और 29 ट्विन-सीटर ट्रेनर शामिल हैं। वहीं, इस डील के मुताबिक इन विमानों की डिलीवरी 2027-28 से शुरू होगी और अगले छह सालों में 2034 तक पूरी की जानी है। जल्द ही हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड और जीई के बीच 113 अतिरिक्त इंजनों की खरीद का नया सौदा लगभग 1 बिलियन डॉलर का होने वाला है।

एचएएल ने बढ़ाई क्षमता

Chlenge Tejas Mk1A Order तेजस एमके1ए की डिलीवरी फरवरी 2024 से शुरू होनी थी, लेकिन जनरल इलेक्ट्रिक के एफ-404 इंजनों की सप्लाई चेन समस्या के चलते डिलीवरी की तारीख आगे खिसकती रही जो इस साल मार्च 2025 तक पहुंच गई। इस साल अक्तूबर तक चार एफ404 इंजन हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के पास पहुंच चुके हैं। और साल के अंत तक सात और आने की उम्मीद है।

एचएएल के मुताबिक अक्टूबर में नासिक स्थित प्रोडक्शन लाइन से फ्लाइट टेस्ट शेड्यूल किए गए हैं। नासिक फैसिलिटी को अप्रैल 2023 में 150 करोड़ रुपये से अधिक की लागत के साथ शुरू किया गया था। यह एचएएल की तीसरी प्रोडक्शन लाइन है। यहां हर साल आठ विमान तैयार करने की क्षमता है। बेंगलुरु की दो मौजूदा लाइनों के साथ मिलकर एचएएल का टारगेट है कि वर्ष 2027 से हर साल 24 तेजस एमके1ए विमानों की डिलीवरी की जाए। एचएएल का कहना है कि मार्च 2026 तक उसे 12 इंजन मिल जाएंगे। इसके बाद अगले वित्त वर्ष में सप्लाई सुचारू हो जाएगी। 2026–27 तक एचएएल का लक्ष्य हर साल 30 तेजस एमके1ए विमान तैयार करना है। इसमें निजी और सरकारी साझेदार कंपनियों को भी शामिल किया जाएगा।

2031-32 तक 180 एमके1ए की डिलीवरी

सूत्रों का कहना है कि एचएएल की मौजूदा रफ्तार का आकलन करें तो अकेले 83 विमानों का सौदा 2028-29 तक पूरा हो सकेगा। वहीं, दूसरे सौदे की डिलीवरी 2028 से शुरू होगी, और 2031 तक पूरी होने की उम्मीद है। कुल मिलाकर, 2031-32 तक 180 एमके1ए वायुसेना में शामिल हो जाएंगे, जिससे कुल एलसीए तेजस फ्लीट 220 तक पहुंचेगी।

तेजस मार्क1 के दो एक्टिव स्क्वाड्रन

Tejas Mk1A Order वहीं, तेजस मार्क 1 की बात करें तो 2009-2010 में वायुसेना ने 40 तेजस एमके1 विमानों का पहला ऑर्डर दिया था, जिसकी लागत 8,802 करोड़ रुपये थी। प्रति विमान लगभग 220 करोड़ रुपये पड़े। इनमें से 32 सिंगल-सीट इनिशियल ऑपरेशनल क्लियरेंस कॉन्फिगरेशन में थे, जो 2016 में इंडक्ट हुए। दूसरा ऑर्डर 2016 में 20 फाइनल ऑपरेशनल क्लियरेंस विमानों का था, जिसकी कीमत 6,500 करोड़ रुपये थी। ये तेजस मार्क 1 वायुसेना की दो स्क्वाड्रन नंबर 45 ‘फ्लाइंग डैगर्स’ और नंबर 18 ‘फ्लाइंग बुलेट्स’ में तैनात हैं, जो तमिलनाडु के सुलुर एयर फोर्स स्टेशन में है।

INS Androth in Indian Navy: भारतीय नौसेना में शामिल हुआ दूसरा एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट, 14 और जहाज कमीशनिंग के लिए कतार में

INS Androth in Indian Navy

INS Androth in Indian Navy: भारतीय नौसेना ने आज विशाखापत्तनम के नेवल डॉकयार्ड में आईएनएस अंद्रोथ को औपचारिक रूप से अपने बेड़े में शामिल कर लिया। अंद्रोथ भारतीय नौसेना का दूसरा एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट है, जो INS Androth का हिस्सा है। ईस्टर्न नेवल कमांड के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल राजेश पेंढरकर ने आईएनएस अंद्रोथ को नौसेना में कमीशन किया।

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INS Androth in Indian Navy आईएनएस अंद्रोथ को आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत स्वदेश में ही बनाया गया है। इस जहाज में 80 फीसदी से अधिक स्वदेशी सामग्री और तकनीक इस्तेमाल की गई है। वहीं, इस जहाज को कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स ने बनाया है, जिसने इससे पहले आईएनएस अर्नाला को भी बनाया है।

आईएनएस अंद्रोथ की ऑपरेशनल क्षमता

आईएनएस अंद्रोथ की लंबाई 77.6 मीटर और चौड़ाई 10.5 मीटर है। इसका ड्राफ्ट 2.7 मीटर है और डिस्प्लेसमेंट लगभग 1,490 टन (ग्रॉस टनेज) है। यह जहाज तीन डीजल इंजन से चलने वाले वॉटरजेट प्रोपल्जन सिस्टम से लैस है, जिससे यह 25 नॉट्स की अधिकतम रफ्तार प्राप्त कर सकता है। 14 नॉट्स की रफ्तार पर इसकी रेंज 1,800 नॉटिकल मील तक है, जिससे यह लंबे समय तक तटीय और उथले जलक्षेत्रों में लगातार ऑपरेशन कर सकता है।

इस जहाज में सात अधिकारी समेत कुल 57 सदस्यीय चालक दल है। यह भारतीय नौसेना का अब तक का सबसे बड़ा शैलो वाटर वेसल है जो उथले पानी में भी ऑपरेशन कर सकता है।

लगे हैं अत्याधुनिक हथियार और सेंसर सिस्टम

आईएनएस अंद्रोथ में एडवांस सोनार और सेंसर सिस्टम लगे हैं, जिनमें हल-माउंटेड सोनार, लो-फ्रीक्वेंसी वेरिएबल डेप्थ सोनार और इंटीग्रेटेड एंटी-सबमरीन वॉरफेयर डिफेंस सूट शामिल हैं, जिसे महिंद्रा डिफेंस ने बनाया है। जिसकी मदद से यह जहाज पानी के भीतर छिपी पनडुब्बी को भी ट्रेक कर सकता है।

हथियारों में लाइटवेट टॉरपीडो, स्वदेशी एंटी-सबमरीन रॉकेट्स, 30 मिमी नेवल गन और दो 12.7 मिमी स्टेबलाइज्ड रिमोट कंट्रोल्ड गन शामिल हैं। इन सभी हथियारों और सेंसरों को नेटवर्क में जोड़कर एक एंटी सबमरीन शील्ड तैयार की गई है, जो किसी भी नजदीकी या मध्यम दूरी के खतरे का जवाब तुरंत देने में सक्षम है।

जहां पारंपरिक जहाज फेल, वहां अंद्रोथ रहेगा एक्टिव

आईएनएस अंद्रोथ को खास तौर पर लिटोरल जोन यानी तटीय जलक्षेत्र में तैनाती के लिए डिजाइन किया गया है। इसकी मुख्य भूमिका शैलो वाटर में दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाना, ट्रैक करना और उन्हें तबाह करना है। इसके अलावा यह जहाज मैरिटाइम सर्विलांस, सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन, माइन लेइंग, तटीय रक्षा और लो इंटेंसिटी मैरिटाइम ऑपरेशंस जैसे अभियानों में भी भाग ले सकता है।

इसकी तैनाती से भारतीय नौसेना की नॉर्थ-वेस्टर्न, ईस्टर्न और आइलैंड कमांड्स की क्षमताओं में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी। यह जहाज विशेष रूप से उन इलाकों में तैनात किया जाएगा जहां उथले पानी में पारंपरिक बड़े जहाज आसानी से काम नहीं कर पाते हैं।

इस जहाज का नाम अंद्रोथ द्वीप के नाम पर रखा गया है, जो लक्षद्वीप समूह का उत्तरी छोर है। अंद्रोथ द्वीप ऐतिहासिक और रणनीतिक दृष्टि से भारत के समुद्री क्षेत्र में एक अहम स्थान रखता है। इस नामकरण से भारतीय नौसेना ने न केवल भौगोलिक विरासत का सम्मान दिया है बल्कि तटीय इलाकों की सामरिक अहमियत समझा है।

आईएनएस अर्नाला क्लास का हिस्सा – INS Androth in Indian Navy

आईएनएस अंद्रोथ दरअसल, आईएनएस अर्नाला क्लास के 16 जहाजों में से दूसरा है। इस क्लास के जहाज पुराने अभय-क्लास कोरवेट्स की जगह ले रहे हैं। पहले आठ जहाज कोलकाता स्थित जीआरएसई द्वारा बनाए जा रहे हैं जबकि बाकी आठ कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा तैयार किए जा रहे हैं। सभी जहाज 80 फीसदी से अधिक स्वदेशी सामग्री से बनाए जा रहे हैं और इनकी डिलीवरी 2025 से 2028 के बीच चरणबद्ध तरीके से होगी।

INS Androth in Indian Navy को 18 जून को कमीशन किया गया था, जबकि आईएनएस अंद्रोथ 6 अक्टूबर को शामिल हुआ। आने वाले महीनों में इसी क्लास के अन्य जहाज जैसे आईएनएस अरिहंत, आईएनएस अमिनिदिवि, आईएनएस अंजादिवी और आईएनएस अजय भी नौसेना में शामिल होने की प्रक्रिया में हैं। सभी जहाज भारतीय द्वीपों के नाम पर रखे गए हैं, जो राष्ट्रीय एकता और समुद्री विरासत का प्रतीक हैं।

2035 तक हों 200 युद्धपोत और पनडुब्बियां

भारतीय नौसेना लगातार अपनी समुद्री ताकत को तेजी से मजबूत बनाने की दिशा में बढ़ रही है। लक्ष्य है कि वर्ष 2035 तक भारतीय नौसेना के पास 200 से अधिक युद्धपोत और पनडुब्बियां हों, ताकि देश के विशाल समुद्री हितों की रक्षा की जा सके और चीन व पाकिस्तान से समुद्री मोर्चे पर बढ़ती दोहरी चुनौतियों का मुकाबला किया जा सके।

वर्तमान में भारतीय शिपयार्ड्स में 55 छोटे-बड़े युद्धपोतों का निर्माण लगभग 99,500 करोड़ रुपये की लागत से चल रहा है। इसके अलावा, नौसेना को 74 नए जहाजों और पोतों के स्वदेशी निर्माण के लिए 2.35 लाख करोड़ रुपये की स्वीकृति मिल चुकी है। इनमें नौ डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियां, सात अगली पीढ़ी की स्टेल्थ फ्रिगेट्स, आठ एंटी-सबमरीन वारफेयर कोरवेट्स और 12 माइन-काउंटरमेजर वेसल शामिल हैं।

वर्तमान में नौसेना के पास 140 युद्धपोत

नौसेना भविष्य में चार अगली पीढ़ी के 10,000 टन डिस्प्लेसमेंट वाले डेस्ट्रॉयर्स और एक दूसरा एयरक्राफ्ट कैरियर बनाने पर भी विचार कर रही है, जो पुराने आईएनएस विक्रमादित्य की जगह लेगा। वर्तमान में नौसेना के पास कुल 140 युद्धपोत हैं, जिनमें 17 डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियां और दो एसएसबीएन शामिल हैं, साथ ही 250 से अधिक विमान और हेलिकॉप्टर भी हैं।

2035 तक यह संख्या 200 युद्धपोत और पनडुब्बियों तथा 350 नौसैनिक विमानों तक पहुंचाने की योजना है। चीन के पास फिलहाल 370 युद्धपोतों के साथ दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना है और वह हिंद महासागर में अपना प्रभाव तेजी से बढ़ा रहा है। वहीं पाकिस्तान को भी चीन से आधुनिक हंगोर-क्लास पनडुब्बियां मिलने वाली हैं, जिससे उसकी समुद्री क्षमता में बड़ा इजाफा होगा।

INS Androth commissioning marks a significant milestone in India’s naval modernisation and self-reliance drive. Commissioned on 6 October 2025 at Naval Dockyard, Visakhapatnam, INS Androth is the second Anti-Submarine Warfare Shallow Water Craft (ASW-SWC) built by GRSE, Kolkata with over 80% indigenous content. Designed for coastal and shallow water operations, it features advanced sonar, weapons, and waterjet propulsion systems for high manoeuvrability. The vessel enhances India’s anti-submarine warfare capabilities, maritime surveillance, and coastal defence, showcasing the Indian Navy’s focus on Aatmanirbharta and indigenous innovation. This induction strengthens India’s maritime security architecture significantly.