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MoD capital outlay India: रक्षा मंत्रालय ने सितंबर तक 50 फीसदी से ज्यादा पूंजीगत बजट किया खर्च, मिलिट्री मॉडर्नाइजेशन पर फोकस

India Releases DAP-2026 Draft, Invites Public Comments to Boost Indigenous Defence Manufacturing
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (फाइल फोटो)

MoD capital outlay India: रक्षा मंत्रालय ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 के पहले छह महीनों में अपने कुल पूंजीगत बजट का 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सा खर्च कर लिया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर 2025 के अंत तक मंत्रालय ने 92,211.44 करोड़ रुपये, यानी कुल आवंटित 1,80,000 करोड़ रुपये का 51.23% इस्तेमाल किया है।

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पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में रक्षा मंत्रालय ने अपने पूरे पूंजीगत बजट का 100% उपयोग किया था, जो 1,59,768.40 करोड़ रुपये रहा था। इस बार भी मंत्रालय ने वित्तीय वर्ष के मध्य में ही आधे से अधिक बजट उपयोग कर यह संकेत दिया है कि चालू वर्ष में भी पूरा आवंटन खर्च किया जाएगा।

रक्षा मंत्रालय यह फंड MoD capital outlay India उन परियोजनाओं पर खर्च कर रहा है जो भारतीय सेनाओं के आधुनिकीकरण के लिए अत्यंत जरूरी हैं। इसमें एयरक्राफ्ट, शिप्स, सबमरीन, वेपन सिस्टम्स, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर इक्विपमेंट, और आर्मामेंट्स शामिल हैं।

इस राशि का सबसे बड़ा हिस्सा एयरक्राफ्ट और एयरो इंजन पर खर्च किया गया है, जबकि बाकी फंड लैंड सिस्टम्स, मिसाइल, रडार और हथियार निर्माण जैसे सेक्टर्स में किया जा रहा है।

MoD capital outlay India

पूंजीगत खर्च यानी कैपिटल एक्सपेंडीचर रक्षा क्षेत्र के लिए इसलिए अहम है क्योंकि यह नई खरीद, अनुसंधान एवं विकास , और सीमा क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इससे देश की राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होती है और आर्थिक विकास के साथ नए रोजगार पैदा करने में भी मदद मिलती है।

रक्षा मंत्रालय ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 में 1,11,544.83 करोड़ रुपये घरेलू उद्योगों से खरीद के लिए आरक्षित किए हैं। अभी तक इस राशि का 45% हिस्सा खर्च किया जा चुका है। यह कदम आत्मनिर्भर भारत अभियान को सशक्त बनाने के लिए उठाया जा रहा है। मंत्रालय का उद्देश्य है कि अधिक से अधिक एमएसएमई, स्टार्टअप्स और निजी कंपनियां रक्षा उत्पादन में शामिल हों। इससे न केवल भारत की स्वदेशी रक्षा उत्पादन क्षमता बढ़ेगी बल्कि विदेशी आयात पर निर्भरता भी घटेगी।

वित्त मंत्रालय ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 में रक्षा मंत्रालय को 1,80,000 करोड़ रुपये का पूंजीगत बजट आवंटित किया था, जो पिछले वर्ष के वास्तविक खर्च से 12.66% अधिक है। यह लगातार छठा साल है जब पूंजीगत आवंटन में बढ़ोतरी हुई है।

MoD capital outlay India मंत्रालय अब रीवाइज्ड बजट अनुमान की दिशा में काम कर रहा है ताकि वित्त वर्ष के अंत तक सभी स्वीकृत परियोजनाओं के लिए पर्याप्त फंड उपलब्ध हो सके। इसके साथ ही, रक्षा सेवाओं के लिए पूंजीगत आवंटन में पिछले पांच वर्षों में लगभग 60% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

Defence Stocks India: डिफेंस सेक्टर में तेजी का नया दौर! HAL-BEL जैसे शेयरों पर नई रिपोर्ट में बड़ा अपडेट

Defence Stocks India: Nuvama raises outlook on HAL, BEL, BDL, Data Patterns, Zen Tech and Solar Industries amid Rs 10 lakh crore defence pipeline

Defence Stocks India: नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है कि भारत का डिफेंस सेक्टर अब एक हाई ग्रोथ फेज में प्रवेश कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले वर्षों में रक्षा उद्योग में बूस्ट देखने को मिलेगा, जिसका फायदा प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, भारत डायनामिक्स, डाटा पैटर्न, जेन टेक्नोलॉजीज और सोलार इंडस्ट्रीज को मिलेगा।

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नुवामा की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का डिफेंस सेक्टर वर्तमान में लगभग 10 लाख करोड़ रुपये के ऑर्डर पाइपलाइन पर काम कर रहा है। इसमें रक्षा मंत्रालय की ओर से ज्यादा बजट आवंटन, एयरफोर्स और नेवी की नई आवश्यकताओं और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत घरेलू उत्पादन पर जोर दिया गया है।

डिफेंस सेक्टर में तेजी का नया दौर

रक्षा मंत्रालय की नई 15-वर्षीय योजना में न्यूक्लियर पावर्ड वॉरशिप्स, हाइपरसोनिक मिसाइल्स, स्टेल्थ यूसीएवी, डायरेक्टेड एनर्जी वेपन्स और स्पेस-वॉरफेयर जैसी एडवांस क्षमताओं पर निवेश की योजना शामिल है। नुवामा के अनुसार, यह सब दर्शाता है कि भारत का रक्षा उद्योग न केवल आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ रहा है, बल्कि तकनीकी दृष्टि से भी तेजी से परिपक्व हो रहा है।

रिपोर्ट में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड को सबसे मजबूत दांव बताया गया है। कंपनी की 75,000 करोड़ रुपये की ऑर्डर बुक और लगभग 28 प्रतिशत ऑपरेटिंग मार्जिन ने इसे नुवामा का टॉप पिक बना दिया है।

नुवामा का अनुमान है कि बीईएल का अगले वित्तवर्ष की दूसरी तिमाही में 15% की ग्रोथ हो सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बीईएल की मजबूत एक्सीक्यूशन क्षमता और मार्जिन विजिबिलिटी के कारण यह अन्य पीएसयू से आगे रह सकती है। नुवामा ने यह भी कहा कि क्यूआरएसएएम मिसाइल ऑर्डर मिलने पर बीईएल के शेयर में री-रेटिंग देखने को मिल सकती है।

एचएएल को लेकर नुवामा ने कहा है कि कंपनी के पास भारी ऑर्डर बैकलॉग है, लेकिन एक्सीक्यूशन और कॉस्ट कंट्रोल अभी भी अहम चुनौती है। रिपोर्ट के अनुसार, एचएएल को अगले वित्तवर्ष में 12 तेजस यूनिट्स डिलीवर करनी हैं, लेकिन संभवतः केवल 7 यूनिट्स ही तैयार हो पाएंगी। यह कंपनी की कुल बिक्री में लगभग 13% योगदान देगा। नुवामा का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में एचएएल में 10% की ग्रोथ देखने को मिल सकता है।

नुवामा ने सोलार इंजस्ट्रीज और डाटा पैटर्न को लॉन्ग टर्म क्वालिटी स्टोरीज बताया है। सोलार के पास 16,800 करोड़ रुपये से अधिक की ऑर्डर बुक है। कंपनी का वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में 30% वर्ष-दर-वर्ष ग्रोथ का अनुमान है, जो इंटरनेशनल ऑर्डर्स से संचालित होगा। हालांकि भारत में मानसून के कारण माइनिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर गतिविधियों पर असर पड़ा है, लेकिन विदेशी बाजारों में बेहतर प्रदर्शन इसकी भरपाई करेगा।

वहीं डाटा पैटर्न्स के लिए नुवामा ने 1,800 करोड़ रुपये के नए ऑर्डर्स की उम्मीद जताई है और कंपनी की एक्सीक्यूशन ग्रोथ 28.5% रहने का अनुमान लगाया है।

साथ ही, भारत डायनेमिक्स लिमिटेड के लिए रिपोर्ट में कहा गया है कि कंपनी 22,800 करोड़ रुपये से अधिक के ऑर्डर बुक पर काम कर रही है। जैसे-जैसे सप्लाई चेन की बाधाएं कम होंगी, कंपनी का एक्सीक्यूशन तेज होगा। नुवामा का अनुमान है कि वित्त वर्ष 25–28 के दौरान कंपनी का राजस्व 50% की दर से बढ़ सकता है। हालांकि, बढ़ती प्रतियोगिता के कारण मार्जिन पर दबाव बना रहेगा।

Zen Technology – Defence Stocks India

जेन टेक्नोलॉजी को लेकर नुवामा ने कहा है कि कंपनी के मैनेजमेंट ने तिमाही के लिए 650 करोड़ रुपये के ऑर्डर्स की गाइडेंस दी थी, लेकिन ऑर्डर इंफ्लो कमजोर रहा। हालांकि, कंपनी का ऑपरेटिंग मार्जिन लगभग 34% रहने की उम्मीद है, जो सिमुलेशन ऑर्डर्स से समर्थित होगा।

रिपोर्ट के अनुसार, डिफेंस सेक्टर का सबसे तेजी से बढ़ने वाला हिस्सा डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स रहेगा। इस सेगमेंट में 14–15% की वार्षिक वृद्धि की उम्मीद है। बड़े प्लेटफॉर्म ऑर्डर्स, मेक-इन-इंडिया इनिशिएटिव और मॉडर्नाइजेशन की योजनाएं इस ग्रोथ को गति देंगी।

रिपोर्ट के मुताबिक, डिफेंस सेक्टर में मौसमी सुस्ती के बावजूद लॉन्ग टर्म विजिबिलिटी मजबूत बनी हुई है। नुवामा ने बीईएल को अपनी टॉप पिक बनाए रखा है, जबकि सोलार और डाटा पैटर्न्स को मल्टी-ईयर कंपाउंडिंग स्टॉक्स बताया है।

Explainer: भारतीय सेनाओं को क्यों चाहिए ब्रिटेन की Martlet LLM मिसाइलें? भारत के एयर डिफेंस सिस्टम को कैसे मिलेगा बूस्ट?

Martlet LLM-missile

Martlet LLM: हाल ही में भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच 468 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 3,900 करोड़ रुपये) की एक बड़ी डिफेंस डील हुई है, जिसके तहत भारतीय सेना को ब्रिटेन में बनी थेल्स कंपनी की मार्टलेट मल्टीरोल मिसाइलें मिलेंगी। यह समझौता ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर की दो दिवसीय भारत यात्रा के दौरान मुंबई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठक के बाद हुआ।

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ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक, यह कॉन्ट्रैक्ट बेलफास्ट स्थित थेल्स एयर डिफेंस द्वारा बनाई जा रही लाइटवेट मल्टीरोल मिसाइल (एलएलएम) (Martlet LLM) की सप्लाई के लिए है। ब्रिटेन के रक्षा मंत्री जॉन हीली ने इस समझौते को भारत और ब्रिटेन के रक्षा उद्योगों के बीच गहरे सहयोग का प्रतीक बताया है। उन्होंने बताया कि इससे न केवल भारत की रक्षा क्षमता में वृद्धि होगी बल्कि उत्तरी आयरलैंड में करीब 700 नौकरियां भी पैदा होंगी। ब्रिटिश सरकार के अनुसार, भारत को भेजी जाने वाली मिसाइलें वही हैं, जो वर्तमान में यूक्रेन के लिए बनाई जा रही हैं।

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Martlet LLM Missile positioned on Humvee

Martlet LLM: क्या है थेल्स मार्टलेट मिसाइल?

थेल्स एयर डिफेंस द्वारा विकसित मार्टलेट मिसाइल को लाइटवेट मल्टीरोल मिसाइल (एलएलएम) (Martlet LLM) के नाम से भी जाना जाता है। यह एक मल्टीरोल मिसाइल है जो हवा और जमीन दोनों प्लेटफॉर्म से दागी जा सकती है।

इस मिसाइल का वजन केवल 13 किलोग्राम है, लेकिन यह ध्वनि की गति से 1.5 गुना अधिक रफ्तार से उड़ान भर सकती है। इसकी मारक क्षमता 6 किलोमीटर तक है, यानी यह नजदीक के एयर डिफेंस अटैक (शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस) में बेहद प्रभावी साबित होती है।

यह मिसाइल पहले ब्रिटिश रॉयल नेवी के लिए बनाई गई थी, ताकि उनकी फ्यूचर एयर-टू-सरफेस गाइडेड वेपन (लाइट) की जरूरतों को पूरा किया जा सके। इसका “मार्टलेट” नाम एक पौराणिक पक्षी के नाम पर रखा गया है, जो कभी रुकता नहीं।

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Ukraine Army using British LMM Martlet type laser-guided man-portable air-defense missiles (warhead mass 3kg) with an 8km range

Martlet LLM: कहां-कहां इस्तेमाल होती है मार्टलेट मिसाइल

मार्टलेट मिसाइल का इस्तेमाल ब्रिटेन की सेना और नौसेना दोनों कर रही हैं। इसे वाइल्डकैट हेलिकॉप्टर से दागा जा सकता है और यह समुद्री सतह पर छोटे वॉरशिप्स या ड्रोन जैसे टारगेट्स को निशाना बना सकती है।

2021 में रॉयल नेवी ने इसे बंगाल की खाड़ी में एक कैरियर स्ट्राइक ग्रुप ने एख एक्सरसाइज के दौरान सफलतापूर्वक टेस्ट किया था। इसके बाद यह यूक्रेन युद्ध में भी तैनात की गई, जहां इसने रूसी ड्रोन और मिसाइलों को निशाना बनाया।

ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह मिसाइल (Martlet LLM) सिस्टम ऑपरेशन प्रॉस्परिटी गार्डियन जैसे अभियानों में भी काम आ चुका है, जिसमें कॉमर्शियल जहाजों को हूथी विद्रोहियों के हमलों से बचाया गया था।

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British AW159 Wildcat attack chopper with 20 Thales ‘Martlet’ Lightweight Multirole Missiles (LMM)

Martlet LLM: भारत के लिए क्या होगा फायदा

भारतीय सेना के लिए यह डील कई मायनों में अहम है। सबसे पहले, यह मिसाइल भारत की शॉर्ट-रेंज एयर डिफेंस (SHORAD) क्षमता को बढ़ाएगी, जिससे ड्रोन, हेलिकॉप्टर और अन्य हवाई खतरों का मुकाबला किया जा सकेगा।

दूसरे, यह मिसाइलें हल्की होने के कारण इन्हें हेलिकॉप्टर, व्हीकल्स और समुद्री प्लेटफॉर्म से भी लॉन्च किया जा सकता है। इससे भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना तीनों को इसका फायदा मिलेगा।

तीसरे, यह डील भारत के आत्मनिर्भर भारत मिशन को भी आगे बढ़ाएगी। दोनों देशों के बीच इस साझेदारी के तहत भविष्य में संयुक्त उत्पादन और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर भी काम किया जा सकता है।

बेलफास्ट में बनेंगी मिसाइलें

थेल्स एयर डिफेंस कंपनी की बात करें, तो यह एक ब्रिटिश डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कंपनी है, जो बेलफास्ट (उत्तरी आयरलैंड) में स्थित है। कंपनी की एडवांस विपेंस सिस्टम, रडार, मिसाइल और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम्स के निर्माण में महारत हाासिल है। थेल्स की मिसाइलें ब्रिटिश सेना, रॉयल नेवी और कई विदेशी सेनाओं द्वारा इस्तेमाल की जा रही हैं, जिनमें यूक्रेन, मलेशिया और कतर शामिल हैं।

Martlet LLM-missile

थेल्स की एक और प्रसिद्ध मिसाइल स्टारस्ट्रीक है, जो तेज रफ्तार मैक-3 मैन-पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम है। यह मिसाइल तीन तेज रफ्तार वाले “डार्ट्स” लॉन्च करती है जो लक्ष्य को सटीकता से भेदती हैं। स्टारस्ट्रीक और मार्टलेट (Martlet LLM) दोनों मिसाइलें तकनीकी रूप से आपस में जुड़ी हुई हैं, और थेल्स इन्हें एक ही जगह बनाती है। हाल ही में, ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय ने थेल्स को 176 मिलियन पॉउंड का एक और कॉन्ट्रैक्ट दिया है, जिसमें ब्रिटिश सेना के लिए नई मिसाइलें और लॉन्चर बनाए जा रहे हैं।

ब्रिटेन और भारत के बीच यह डील सिर्फ मिसाइल (Martlet LLM) सप्लाई तक सीमित नहीं है। दोनों देशों ने नेवल शिप्स के लिए इलेक्ट्रिक इंजन डेवलप करने पर भी सहमति जताई है। इस सहयोग के तहत, भारत और ब्रिटेन मिलकर नौसैनिक जहाजों के लिए नए एनर्जी एफिशिएंट इंजन बनाएंगे। यह प्रोजेक्ट लगभग 2,600 करोड़ रुपये की लागत का है।

Indian AMCA fighter jet: स्टेल्थ फाइटर प्रोजेक्ट के लिए कंपनियों में कड़ा मुकाबला, अब अदाणी डिफेंस और एमटीएआर टेक्नोलॉजीज ने मिलाया हाथ

Indian AMCA Fighter Jet: Adani Defence and MTAR Technologies join hands to bid for Rs 15,000 crore AMCA project amid intense competition

Indian AMCA fighter jet: अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस और हैदराबाद की प्रिसिजन इंजीनियरिंग कंपनी एमटीएआर टेक्नोलॉजीज ने मिलकर भारत के एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एएमसीए) प्रोजेक्ट में बोली लगाने की तैयारी की है। दोनों कंपनियां मिलकर लगभग 15,000 करोड़ रुपये के इस कॉन्ट्रैक्ट के लिए बोली लगाएंगी प्रतिस्पर्धा, जिसके तहत भारत का पहला फिफ्थ जनरेशन स्टेल्थ फाइटर जेट डेवलप किया जाना है।

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यह प्रोजेक्ट भारतीय वायु सेना) की भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जा रहा है। इसके डिजाइन और डेवलपमेंट की जिम्मेदारी डीआरडीओ और उसकी सहायक एजेंसी एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी के पास है। अब पहली बार, निजी कंपनियां भी इस प्रोजेक्ट के प्रोटोटाइप डेवलपमेंट में भागीदारी करने की तैयारी रही हैं।

अदाणी ग्रुप की कंपनी अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने 2019 के बाद से तेजी से एयरोस्पेस और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में अपनी पकड़ मजबूत की है। एक तरफ जहां अदाणी डिफेंस एयरोस्ट्रक्चर, कॉम्पोजिट्स और एवियोनिक्स जैसे सेक्टर्स में एक्सपर्ट है, तो दूसरी ओर, एमटीएआर टेक्नोलॉजीज हाई-प्रिसिजन इंजीनियरिंग में माहिर है और यह पहले से ही इसरो, डीआरडीओ और न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन जैसी संस्थाओं के लिए काम कर चुकी है।

एमटीएआर की विशेषज्ञता क्रायोजेनिक और हाई-टेम्परेचर अलॉयज में है, जो स्टेल्थ जेट्स के निर्माण में बेहद जरूरी होते हैं। वहीं, अदाणी की बड़ी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और सप्लाई चेन नेटवर्क इस प्रोजेक्ट की रफ्तार बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस साझेदारी का एलान आधिकारिक तौर पर नहीं किया गया है, लेकिन दोनों कंपनियों का लक्ष्य एएमसीए प्रोटोटाइप डेवलपमेंट फेज के लिए क्वालिफाई करना है। वे एयरफ्रेम इंटीग्रेशन, सिस्टम इंजीनियरिंग और रैपिड प्रोटोटाइपिंग जैसे सेक्टर में फोकस कर रहे हैं।

एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) भारत का पहला स्वदेशी फिफ्थ जनरेशन मल्टीरोल स्टेल्थ फाइटर जेट है। यह ट्विन इंजन, सिंगल सीट और ऑल-वेदर विमान होगा, जो वायु सेना और नौसेना दोनों के लिए तैयार किया जा रहा है।

इसकी खासियत इसका स्टेल्थ डिजाइन है, जिससे रडार पर इसे पकड़ पाना मुश्किल होगा। यह हल्के कंपोजिट मटेरियल्स और रडार-एब्जॉर्बेंट कोटिंग्स से बनाया जाएगा। इसके अलावा, इसमें इंटरनल वेपन बे, एआई-बेस्ड एवियोनिक्स सिस्टम, सुपरक्रूज क्षमता और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम शामिल होंगे।

सरकार ने 2023 में इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दी थी, जिसकी अनुमानित लागत लगभग 15,000 करोड़ रुपये है। पहले प्रोटोटाइप की टेस्ट फ्लाइट 2029 में होने की उम्मीद है, जबकि सीरिज प्रोडक्शन 2035 तक शुरू किया जा सकता है।

एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी की तरफ से जून 2025 में जारी एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट के बाद कुल सात बड़ी कंपनियों या कंसोर्टियम्स ने एएमसीए प्रोटोटाइप डेवलपमेंट के लिए आवेदन किया है। इनमें हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड, टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (टीएएसएल), बीईएमएल-कल्याणी ग्रुप, एलएंडटी-बीईएल और अब अदाणी-एमटीएआर कंसोर्टियम शामिल हैं। कुल 28 प्राइवेट फर्म्स ने एचएएल के साथ पार्टनरशिप के लिए अप्लाई किया है।

एचएएल पहले से ही तेजस फाइटर जेट बना रहा है, जबकि टाटा ने एफ-16 और सी-295 जैसे विमानों के स्ट्रक्चर पर काम किया है। दूसरी ओर, भारत फोर्ज और एल एंड टी जैसे समूह अपने-अपने क्षेत्रों में मजबूत मेटलर्जी और सिस्टम इंटीग्रेशन क्षमताओं के लिए जाने जाते हैं।

वहीं, डीआरडीओ और एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी जल्द ही उन कंपनियों को शॉर्टलिस्ट करेंगे जो टेक्निकल, फाइनेंशियल और प्रोडक्शन कैपेबिलिटीज के आधार पर योग्य साबित होंगी।

एएमसीए प्रोजेक्ट भारत को उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में लाने वाला है, जिनके पास अपनी फिफ्थ जनरेशन स्टेल्थ फाइटर तकनीक है। अभी तक यह क्षमता केवल अमेरिका, रूस और चीन के पास है। एएमसीए में इस्तेमाल होने वाले इंजन के विकास के लिए डीआरडीओ की गैस टर्बाइन रिसर्च एस्टैब्लिशमेंट (जीटीआरई) फ्रांसीसी कंपनी साफरान के साथ मिलकर काम कर रही है। यह नया इंजन 120 किलो न्यूटन थ्रस्ट कैटेगरी का होगा और इसमें 100 फीसदी टेक्नोलॉजी ट्रांसफर भी शामिल है।

साथ ही, एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी ने 9 प्रोटोटाइप बनाने की योजना तैयार की है, जिनमें से 5 उड़ान के लिए और 1 स्ट्रक्चरल टेस्ट के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।

UNTCC Chiefs Conclave: भारतीय सेना करेगी इस बड़ी शांति बैठक की मेजबानी, 32 देशों के आर्मी चीफ और वाइस चीफ होंगे शामिल

UNTCC Chiefs Conclave: Indian Army to host global peacekeeping meet in New Delhi from Oct 14

UNTCC Chiefs Conclave: भारतीय सेना 14 से 16 अक्टूबर तक नई दिल्ली में यूनाइटेड नेशंस ट्रूप कंट्रीब्यूटिंग कंट्रीज (यूएनटीसीसी) चीफ्स कॉन्क्लेव की मेजबानी करेगी। इस वैश्विक सम्मेलन में दुनिया के 32 देशों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और प्रमुख शामिल होंगे, जो संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

India UN Peacekeeping Policy: भारत ने कहा- यूक्रेन और गाजा में सैनिक तैनाती केवल यूएन के तहत ही, UNTCC में 30 देश होंगे शामिल, चीन-पाकिस्तान नहीं

यह आयोजन भारतीय सेना की पहल पर हो रहा है और इसे भारत की अंतरराष्ट्रीय शांति, स्थिरता और सहयोग के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक माना जा रहा है। नई दिल्ली में आयोजित इस सम्मेलन में वैश्विक स्तर पर सैन्य सहयोग को मजबूत करने और शांति अभियानों में आने वाली चुनौतियों पर चर्चा होगी।

संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में सबसे बड़े योगदान देने वालों देशों में भारत अग्रणी रहा है। भारतीय सैनिक दशकों से दुनिया के विभिन्न हिस्सों में संयुक्त राष्ट्र के झंडे के नीचे सेवा दे रहे हैं। इस पृष्ठभूमि में, भारतीय सेना द्वारा आयोजित यह सम्मेलन न केवल भारत की सैन्य कूटनीति को मजबूती देगा बल्कि वैश्विक सहयोग को भी नई दिशा देगा।

यूएनटीसीसी चीफ्स कॉन्क्लेव का उद्देश्य शांति अभियानों के ऑपरेशन से जुड़ी चुनौतियों, नई तकनीकों, प्रशिक्षण और भविष्य की तैयारियों पर विचार-विमर्श करना है। सम्मेलन में प्रतिभागी देश अपने अनुभव साझा करेंगे और शांति अभियानों को अधिक प्रभावी बनाने के उपायों पर चर्चा करेंगे।

यह सम्मेलन 14 अक्टूबर से शुरू होकर 16 अक्टूबर तक चलेगा। इसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और संयुक्त राष्ट्र के अंडर-सेक्रेटरी-जेनरल फोर पीस आपरेशंस जीन-पियरे लाक्रुआ भी शामिल होंगे।

इस दौरान विभिन्न प्लेनरी सत्रों में अलग-अलग देशों के सैन्य प्रमुख अपने अनुभव, विचार और रणनीतियां साझा करेंगे। सम्मेलन में द्विपक्षीय वार्ताएं, डिफेंस एक्जीबिशन, और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे, जो भारत की “वसुधैव कुटुंबकम” यानी “पूरा विश्व एक परिवार है” की भावना को प्रकट करेंगे।

मिली जानकारी के अनुसार इस सम्मेलन में 32 देश हिस्सा लेंगे, जो संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में योगदान देते रहे हैं। इनमें से 15 देश अपने सैन्य प्रमुखों के स्तर पर प्रतिनिधित्व करेंगे, जबकि 17 देशों के उप-प्रमुख और सात देशों के अन्य वरिष्ठ सैन्य अधिकारी इसमें शामिल होंगे।

मुख्य स्तर पर शामिल देशों में भूटान, बुरुंडी, इथियोपिया, फिजी, फ्रांस, घाना, कजाखस्तान, किर्गिस्तान, मंगोलिया, पोलैंड, श्रीलंका, तंजानिया, युगांडा, उरुग्वे और वियतनाम के सैन्य प्रमुख शामिल हैं। इसके अलावा अल्जीरिया, आर्मेनिया, बांग्लादेश, ब्राज़ील, कंबोडिया, इटली, नेपाल, केन्या, रवांडा, सेनेगल, ऑस्ट्रेलिया, मिस्र, मलेशिया, मोरक्को, नाइजीरिया, थाईलैंड और मेडागास्कर अपने-अपने देशों का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ स्तर पर करेंगे।

FM Amir Khan Muttaqi Presser: अफगान विदेश मंत्री बोले- पाकिस्तान के कुछ तत्व चाहते हैं दोनों देशों के बीच बढ़े तनाव, झंडे पर कही ये बात

FM Amir Khan Muttaqi Presser: Some elements in Pakistan want tension, our flag symbolizes Jihad, says Afghan Foreign Minister
FM Amir Khan Muttaqi Presser: Some elements in Pakistan want tension, our flag symbolizes Jihad, says Afghan Foreign Minister

FM Amir Khan Muttaqi Presser: भारत दौरे पर आए अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री मावलवी आमिर खान मुत्ताकी ने रविवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर बढ़ते तनाव, महिलाओं की शिक्षा पर प्रतिबंध, भारत के साथ संबंधों और मीडिया विवादों पर विस्तार से अपनी बात रखी। मुत्ताकी ने कहा कि पाकिस्तान की आम जनता शांति चाहती है और अफगानिस्तान भी अच्छे संबंधों का पक्षधर है। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान अपनी सीमाओं और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करेगा, भले ही इसके लिए सैन्य कार्रवाई क्यों न करनी पड़े।

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FM Amir Khan Muttaqi Presser: पाकिस्तान से तनाव पर बोले मुत्ताकी 

मुत्ताकी ने पाकिस्तान के साथ हालिया सीमा झड़पों पर कहा कि अफगानिस्तान ने सिर्फ अपनी संप्रभुता की रक्षा की है। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान की जनता अधिकांश रूप से शांति चाहती है और अफगानिस्तान से अच्छे संबंध बनाना चाहती है। हमें पाकिस्तानी नागरिकों से कोई समस्या नहीं है। लेकिन पाकिस्तान के कुछ तत्व ऐसे हैं जो दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ाने का काम कर रहे हैं।”

उन्होंने दावा किया कि अफगानिस्तान ने सीमा पर हुई बढ़ोतरी का तुरंत जवाब दिया और “अपना सैन्य लक्ष्य हासिल किया।” मुत्ताकी ने कहा कि यह कार्रवाई सीमित समय के लिए की गई थी, करीब चार घंटे तक चली और इसमें नागरिकों को कोई नुकसान नहीं हुआ।

मुत्ताकी ने बताया कि कतर और सऊदी अरब ने संघर्ष रोकने की अपील की, जिसके बाद अफगानिस्तान ने कार्रवाई रोक दी। उन्होंने कहा कि अब स्थिति नियंत्रण में है और उनका देश शांति चाहता है, लेकिन यदि पाकिस्तान ने अपने रवैये में सुधार नहीं किया, तो अफगानिस्तान के पास “अन्य विकल्प” भी मौजूद हैं।

उन्होंने कहा कि “हमने अपने देश की रक्षा के लिए जिहाद लड़ा और अब जब अफगानिस्तान स्वतंत्र है, तो कोई भी देश हमारे आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं कर सकता।”

“ड्यूरंड लाइन को कोई नहीं रोक पाया, पाकिस्तान अपने घर को संभाले”

मुत्ताकी ने पाकिस्तान के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि अफगानिस्तान की धरती पर टीटीपी के आतंकी मौजूद नहीं हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की सेना के अभियानों के कारण कई लोग विस्थापित हुए, जिन्हें अफगानिस्तान ने शरणार्थी के रूप में जगह दी।

उन्होंने कहा, “ड्यूरंड लाइन लगभग 2,400 किलोमीटर लंबी है। इसे न तो ब्रिटिश, न सोवियत और न ही अमेरिकी सेनाएं पूरी तरह नियंत्रित कर सकीं। अगर पाकिस्तान चाहता है कि सीमा पर शांति बनी रहे, तो उसे अपनी सीमाओं पर नियंत्रण रखना चाहिए। यह संघर्ष पाकिस्तान के अंदरूनी हालात का नतीजा है।”

मुत्ताकी ने कहा कि यदि समस्या अफगानिस्तान की होती, तो चीन, ईरान और उज्बेकिस्तान जैसे अन्य पड़ोसी देश भी शिकायत करते। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान की नीति साफ है, “हम शांति चाहते हैं, लेकिन अपने देश की सुरक्षा से समझौता नहीं करेंगे।”

महिलाओं की शिक्षा पर बोले ‘हमने शिक्षा को हराम नहीं कहा’

अंतरराष्ट्रीय आलोचनाओं के बीच मुत्ताकी ने महिलाओं की शिक्षा पर लगाए गए प्रतिबंध पर सफाई दी। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में वर्तमान में 10 मिलियन (एक करोड़) छात्र पढ़ाई कर रहे हैं, जिनमें से 2.8 मिलियन (28 लाख) छात्राएं हैं।

मुत्ताकी बोले, “अफगानिस्तान के उलेमा और मदरसों से हमारे गहरे संबंध हैं, जिनमें दारुल उलूम देवबंद भी शामिल है। धार्मिक संस्थानों में शिक्षा ग्रेजुएशन स्तर तक दी जा रही है। कुछ स्थानों पर सीमाएं हैं, लेकिन इसका यह अर्थ नहीं कि हम शिक्षा के विरोधी हैं। हमने शिक्षा को धार्मिक रूप से ‘हराम’ नहीं घोषित किया है। केवल कुछ हिस्सों में इसे अस्थायी रूप से रोका गया है।”

उन्होंने कहा कि तालिबान सरकार महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, “इस्लामी शासन में सभी के अधिकार पुरुषों के भी और महिलाओं के भी सुरक्षित हैं।”

FM Amir Khan Muttaqi Presser: महिला पत्रकारों को नहीं बुलाने पर दी सफाई

दो दिन पहले हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला पत्रकारों को नहीं बुलाए जाने पर पूछे गए सवाल पर मुत्ताकी ने कहा कि यह जानबूझकर नहीं किया गया था। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम को बहुत कम समय में आयोजित किया गया था और मीडिया सूची पहले से तय थी। उन्होंने कहा, “प्रेस कॉन्फ्रेंस में भागीदारी की सूची बहुत सीमित थी और इसे तकनीकी कारणों से कम किया गया था। इसमें किसी को जानबूझकर बाहर नहीं रखा गया। यह केवल प्रक्रिया की वजह से हुआ।”

FM Amir Khan Muttaqi Presser: ‘चाबहार, व्यापार और निवेश पर बात हुई’

मुत्ताकी ने बताया कि उनकी मुलाकात भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से हुई, जिसमें व्यापार, अर्थव्यवस्था और कनेक्टिविटी पर चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि भारत ने काबुल में अपनी टेक्निकल मिशन को एम्बेसी में अपग्रेड करने का निर्णय लिया है और अफगान राजनयिक जल्द ही नई दिल्ली पहुंचेंगे।

उन्होंने कहा, “भारत के विदेश मंत्री ने कहा कि भारत अफगानिस्तान में विकास कार्य फिर से शुरू करेगा और लंबित परियोजनाओं को पूरा करेगा। हमने भारत को खनिज, कृषि और खेल के क्षेत्र में निवेश के लिए आमंत्रित किया है।”

मुत्ताकी ने यह भी बताया कि बैठक में चाबहार पोर्ट (और वाघा बॉर्डर को लेकर भी चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि वाघा सीमा सबसे नजदीकी और तेज व्यापारिक मार्ग है, इसलिए भारत-अफगान व्यापार के लिए इसे खोला जाना चाहिए।

‘हमारा झंडा जिहाद का प्रतीक है, अब दूतावास पर हमारा नियंत्रण है’

प्रेस कॉन्फ्रेंस में दूतावास परिसर में लगाए गए इस्लामी अमीरात के झंडे पर सवाल पूछे जाने पर मुत्ताकी ने कहा कि यह वही झंडा है जिसके नीचे “जिहाद” लड़ा गया और जीत हासिल की गई। उन्होंने कहा, “हमने इस झंडे के नीचे लड़ाई लड़ी और जीते। इसलिए यह झंडा आज हमारे साथ है। यही हमारे संघर्ष और स्वतंत्रता का प्रतीक है।”

उन्होंने दावा किया कि नई दिल्ली स्थित अफगान दूतावास अब पूरी तरह तालिबान सरकार के नियंत्रण में है। उन्होंने कहा, “जो हमारे खिलाफ लड़े थे, वे भी अब हमारे साथ काम कर रहे हैं।” (हालांकि, वर्तमान में दूतावास में अफगान रिपब्लिक का झंडा बाहर लहरा रहा है, और स्टाफ अब भी पूर्व प्रशासन से जुड़ा है।)

‘हमने खून के लिए खून नहीं बहाया, माफी दी’

मुत्ताकी ने अपने बयान में कहा कि तालिबान सरकार ने सत्ता में आने के बाद अपने विरोधियों को भी माफ कर दिया। उन्होंने कहा, “हमने जब शासन संभाला, तब पिछले 40 वर्षों के संघर्ष को समाप्त करने का फैसला किया। हमने उन सभी को माफ कर दिया जो हमारे खिलाफ लड़े। यहां तक कि जो लोग हमारे नागरिकों के खिलाफ थे, वे भी अब काबुल में स्वतंत्र जीवन जी रहे हैं। हमारा उद्देश्य था कि लोग समझें, कि हमने खून के लिए खून नहीं बहाया।”

उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में अब अमन और सुरक्षा है। अगर किसी को अब भी अत्याचार का सामना करना पड़ता है, तो उसके लिए हमारे पास कानून हैं। हमारे राज्यपाल और अन्य लोगों के पास सुरक्षा नहीं है। खुद मुत्ताकी ने कहा कि वे बिना किसी सुरक्षा के मोटरसाइकिल पर काबुल की सड़कों पर घूमते हैं।

‘हम शांति चाहते हैं, लेकिन ताकत से अपनी रक्षा करेंगे’

मुत्ताकी ने अपने संबोधन में कहा कि अफगानिस्तान एक शांति-प्रिय देश है, लेकिन अगर किसी ने उसकी सीमाओं या संप्रभुता को चुनौती दी, तो वह जवाब देने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को चाहिए कि वह अपने आंतरिक मामलों को संभाले और अफगानिस्तान को दोष देना बंद करे।

उन्होंने कहा, “हमारे पास दिल बड़ा है, हमें किसी से डर नहीं। लेकिन अगर कोई हमारी सीमाओं में हस्तक्षेप करता है, तो हम जवाब देंगे। हमने अपने सैन्य उद्देश्यों को पूरा किया और किसी नागरिक को नुकसान नहीं पहुंचाया।”

Four Stars of Destiny book: जनरल एमएम नरवणे बोले- मेरी जिम्मेदारी किताब लिखना थी, रक्षा मंत्रालय की मंजूरी का अभी भी है इंतजार

Four Stars of Destiny Book: Gen MM Naravane says his job was to write, MoD clearance still awaited
Former Army Chief Gen MM Naravane

Four Stars of Destiny book: भारतीय सेना के पूर्व थल सेनाध्यक्ष जनरल एमएम नरवणे का कहना है कि उनकी आत्मकथा फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी को लेकर रक्षा मंत्रालय की मंजूरी अभी भी पेंडिंग है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका काम किताब लिखना था, जबकि प्रकाशक की जिम्मेदारी थी कि वह सरकार से इसकी अनुमति ले। उनका यह बयान कसौली में खुशवंत सिंह लिटरेचर फेस्टिवल में एक सेशन के दौरान दिया, जहां उनकी नई फिक्शनल किताब पर चर्चा हुई थी।

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कार्यक्रम में रियर एडमिरल निर्मला कन्नन (सेवानिवृत्त) के साथ बातचीत के दौरान एक दर्शक ने सवाल किया कि उनकी आत्मकथा अभी तक प्रकाशित क्यों नहीं हुई। इस पर जनरल नरवणे ने जवाब दिया, “मेरा काम किताब लिखना था और उसे प्रकाशकों को सौंपना था। अब सरकार से अनुमति लेना उनकी जिम्मेदारी है। किताब रक्षा मंत्रालय को भेजी जा चुकी है और वह अभी रिव्यू में है। पिछले एक साल से यह रिव्यू प्रक्रिया चल रही है।”

उन्होंने आगे कहा कि प्रकाशक और रक्षा मंत्रालय लगातार संपर्क में हैं। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “अब गेंद प्रकाशक और मंत्रालय के पाले में है। मैंने अपना काम कर लिया और किताब लिखने में मुझे बहुत आनंद आया।”

जनरल नरवणे की आत्मकथा फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी चर्चा में इसलिए भी है क्योंकि इसमें उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान कुछ सरकारी नीतियों पर सवाल उठाए थे। किताब में एलएसी पर चीन के साथ हुई झड़पें, गलवान विवाद की डिटेल्स, और अग्निपथ योजना पर भी अपने विचार साझा किए थे। जिसके बाद सरकार ने किताब की “सुरक्षा समीक्षा” का आदेश दिया था। यह किताब पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया (पेंगुइन वीर इम्प्रिंट) द्वारा जनवरी 2024 में प्रकाशित होने वाली थी, लेकिन संवेदनशील सैन्य जानकारी के कारण भारतीय सेना और रक्षा मंत्रालय द्वारा इसकी समीक्षा चल रही है।

अपनी आत्मकथा में जनरल नरवणे के बचपन से लेकर सेना प्रमुख बनने तक की यात्रा को कलमबद्ध किया है, जिसमें उनके चार दशक लंबे सैन्य करियर की रोमांचक और चुनौतीपूर्ण घटनाओं का वर्णन है। किताब न केवल व्यक्तिगत अनुभवों पर फोकस है, बल्कि नेतृत्व, प्रबंधन के सबक और भारतीय सेना को 21वीं सदी की चुनौतियों के लिए मजबूत बनाने के सुझाव भी दिए हैं।

बता दें कि जनरल नरवणे अकेले नहीं हैं जिनकी किताब सरकारी समीक्षा में हैं। बल्कि इससे पहले कारगिल पर लिखी जनरल एनसी विज की “अलोन इन द रिंग” भी इसी वजह से अभी तक लंबित है। पूर्व सैन्य अधिकारियों के लिए नियम हैं कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी कोई भी किताब पहले मंत्रालय से पास होनी चाहिए।

जनरल नरवणे ने यह भी कहा कि किताब की सामग्री को लेकर उनका उद्देश्य केवल अपने अनुभव साझा करना था, न कि किसी विवाद को जन्म देना। उन्होंने कहा कि उन्होंने पुस्तक को एक “पारदर्शी और ऐतिहासिक दृष्टिकोण” से लिखा है, ताकि पाठकों को भारतीय सेना की जिम्मेदारियों और चुनौतियों की झलक मिले।

जनरल नरवणे ने अपने कार्यकाल में भारतीय सेना के आधुनिकीकरण, थिएटर कमांड्स के गठन और आत्मनिर्भर भारत अभियान को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनकी नेतृत्व शैली और संतुलित रणनीति की प्रशंसा देश-विदेश में भी हुई थी। फिलहाल किताब रक्षा मंत्रालय की समीक्षा प्रक्रिया में है और इसके प्रकाशन की कोई आधिकारिक तिथि घोषित नहीं की गई है।

Defence Stocks India: एचडीएफसी डिफेंस फंड ने रक्षा क्षेत्र के इन शेयरों में बढ़ाई हिस्सेदारी, इन कंपनियों में मिलेगा बंपर रिटर्न!

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Defence Stocks India: भारत के प्रमुख म्यूचुअल फंड हाउस एचडीएफसी म्यूचुअल फंड की एचडीएफसी डिफेंस फंड ने सितंबर 2025 में अपने पोर्टफोलियो में बड़ा बदलाव किया है। फंड ने डिफेंस सेक्टर के कई शेयरों में हिस्सेदारी बढ़ाई है, जिनमें मझगांव डॉक बिल्डर्स, भारत डायनेमिक्स, कोचीन शिपयार्ड, एएचएल, बीईएल और सोलर इंडस्ट्रीज शामिल हैं। इसके साथ ही फंड ने आयशर मोटर्स को भी अपने पोर्टफोलियो में शामिल किया है।

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रिपोर्ट्स के अनुसार, एचडीएफसी डिफेंस फंड ने सितंबर माह में कुल 6 डिफेंस कंपनियों में अपनी होल्डिंग बढ़ाई है। डिफेंस फंड ने यह विस्तार तब किया है जब भारत का रक्षा बाजार तेजी से आगे बढ़ रहा है। मझगांव मझगांव डॉक बिल्डर्स का प्रदर्शन पिछले एक वर्ष में मजबूत रहा है और यह कंपनी नौसैनिक जहाजों और पनडुब्बियों के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभा रही है। कंपनी के शेयरों में पिछले छह महीनों में 40% तक की वृद्धि हुई है।

इसी तरह भारत डायनेमिक्स और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स भी सरकारी डिफेंस कॉन्ट्रैक्ट्स में हिस्सा ले रहे हैं। दोनों कंपनियां मिसाइल और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम्स निर्माण में अग्रणी हैं। फंड हाउस ने इन दोनों में अपनी हिस्सेदारी को थोड़ा बढ़ाते हुए लंबे समय के निवेश के रूप में रखा है।

कोचीन शिपयार्ड में भी फंड ने अपनी स्थिति मजबूत की है। यह कंपनी नौसेना के लिए नए जहाजों के निर्माण में सक्रिय है और हाल ही में उसे भारतीय नौसेना से 20,000 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला है।

फंड ने सोलर इंडस्ट्रीज में भी निवेश बढ़ाया है, जो रक्षा क्षेत्र में एक्सप्लोसिव और मिसाइल सिस्टम्स की आपूर्ति करती है। कंपनी का बाजार पूंजीकरण 1.25 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच चुका है और इसे प्राइवेट सेक्टर की सबसे सफल डिफेंस कंपनियों में गिना जाता है।

मार्केट डेटा के अनुसार, एचडीएफसी डिफेंस फंड के कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट 6,800 करोड़ रुपये से अधिक हो गए हैं। फंड का 85% निवेश डिफेंस और एयरोस्पेस सेक्टर की कंपनियों में है, जबकि बाकी 15% अन्य इंडस्ट्रियल और मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों में लगाया गया है।

विश्लेषकों के अनुसार, डिफेंस सेक्टर में निवेश बढ़ाने का निर्णय उस समय आया है जब सरकार ने 2025–26 के बजट में रक्षा पूंजीगत व्यय को 1.8 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ाया है। साथ ही ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ योजनाओं के तहत निजी कंपनियों को रक्षा निर्माण में भागीदारी के अधिक अवसर दिए जा रहे हैं।

मझगांव डॉक, बीईएल, एचएएल और कोचीन शिपयार्ड जैसी कंपनियों के पास लंबे समय के सरकारी ऑर्डर हैं। सितंबर के आंकड़ों के अनुसार, फंड ने मझगांव डॉक में 2.1%, बीईएल में 1.8%, और सोलर इंडस्ट्रीज में 1.5% तक हिस्सेदारी बढ़ाई है।

सितंबर माह में एचडीएफसी डिफेंस फंड का कुल रिटर्न लगभग 3.2% रहा, जबकि एक वर्ष में फंड ने करीब 38% तक का वार्षिक रिटर्न दर्ज किया।

डिस्क्लेमर: शेयरों में निवेश करने से वित्तीय नुकसान का जोखिम होता है। इसलिए, निवेशकों को शेयरों में निवेश या ट्रेडिंग करते समय सावधानी बरतनी चाहिए। निवेश करने से पहले कृपया अपने निवेश सलाहकार से सलाह लें।

Ex-Servicemen Rally: देहरादून में मेगा एक्स-सर्विसमैन रैली में जुटे 5,000 से अधिक पूर्व सैनिक, सीडीएस बोले- जल्द खुलेगा वेटरंस वेलनेस एंड सेवा केंद्र

Ex-Servicemen Rally: Uttarakhand Governor and CDS Anil Chauhan honour veterans in Dehradun
Ex-Servicemen Rally: Uttarakhand Governor and CDS Anil Chauhan honour veterans in Dehradun

Ex-Servicemen Rally: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के गढ़ी कैंट स्थित जसवंत सिंह ग्राउंड में शनिवार को देवभूमि मेगा एक्स-सर्विसमैन रैली का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में 5,000 से अधिक पूर्व सैनिकों ने हिस्सा लिया। इस आयोजन की मेजबानी हेडक्वार्टर उत्तराखंड सब एरिया ने की थी। कार्यक्रम में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए।

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राज्यपाल ने पूर्व सैनिकों को बताया “राष्ट्रीय संपत्ति”

इस अवसर पर राज्यपाल ने पूर्व सैनिकों को देश की “राष्ट्रीय संपत्ति” बताते हुए उनके अमूल्य योगदान के लिए धन्यवाद व्यक्त किया। उन्होंने हाल ही में धराली क्षेत्र में आई प्राकृतिक आपदा का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार प्रभावित परिवारों के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है। उन्होंने 14 राजपूताना राइफल्स के उन वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने इस आपदा में कर्तव्य निभाते हुए अपने प्राणों की आहुति दी।

राज्यपाल ने भारतीय सेना के साहस और अदम्य मनोबल की प्रशंसा करते हुए कहा कि भारतीय सेना और सिविल प्रशासन के प्रयासों से प्रभावित क्षेत्रों में तेजी से हालात सामान्य हुए। उन्होंने केंद्र सरकार की सराहना करते हुए भरोसा जताया कि उत्तराखंड भविष्य में और अधिक मजबूत और आपदा-प्रबंधन के प्रति जागरूक राज्य बनेगा।

कार्यक्रम में राज्यपाल ने सेना, नौसेना और वायुसेना के उन सभी पूर्व सैनिकों का धन्यवाद किया, जिन्होंने राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान जारी रखा है। उन्होंने सभी शहीदों को नमन करते हुए कहा कि उनका बलिदान सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा।

इस अवसर पर राज्यपाल ने वार वाउंडेड फाउंडेशन के कार्यों की भी सराहना की, जिसका नेतृत्व लेफ्टिनेंट जनरल (रि.) असीत मिस्त्री और ब्रिगेडियर (रि.) हरचरण सिंह कर रहे हैं। उन्होंने 14 दिव्यांग पूर्व सैनिकों को मोटराइज्ड स्कूटर दिए जाने की पहल की सराहना की। इसके साथ ही 20 वीर नारियों को भी सम्मानित किया। राज्यपाल ने उन्हें उनके साहस और त्याग के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि देश सदैव उनके योगदान का ऋणी रहेगा।

सीडीएस बोले- जल्द खुलेगा वेटरन्स वेलनेस एंड सेवा केंद्र

वहीं, सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने अपने संबोधन में राष्ट्र निर्माण में पूर्व सैनिकों की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि वीरों की भूमि उत्तराखंड ने हमेशा अपने सैनिकों के साहस और वीरता से देश को गौरवान्वित किया है। उन्होंने बताया कि भारतीय सेनाएं अब आधुनिक युद्ध रणनीतियों और अत्याधुनिक तकनीकों को तेजी से अपना रहे हैं।

उन्होंने कहा, “भारत एक शांतिप्रिय राष्ट्र है, लेकिन अपनी संप्रभुता पर किसी भी खतरे को कभी बर्दाश्त नहीं करेगा।” उन्होंने पूर्व सैनिकों की निष्ठा, सेवा भावना और कर्तव्यनिष्ठा की प्रशंसा करते हुए युवाओं से उनके जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।

सीडीएस ने यह भी कहा कि देहरादून मिलिट्री स्टेशन में जल्द ही एक “इंटीग्रेटेड वेटरन्स वेलनेस एंड सेवा केंद्र” बनाया जाएगा, जो तकनीकी सुविधाओं से लैस एक आधुनिक केंद्र होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि यह प्रोजक्ट जल्द ही पूरा हो जाएगा।

इस अवसर पर 21 कंपनियों द्वारा जॉब फेयर आयोजित किया गया, जिसमें रोजगार के अवसर प्रदान किए गए। बैंकिंग और सरकारी योजनाओं की जानकारी देने वाले स्टॉल भी लगाए गए। साथ ही पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के लिए मुफ्त मेडिकल कैंप भी लगाया गया।

इस आयोजन में सेंट्रल कंमाड के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता, त्तर भारत एरिया के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल डीजी और उत्तराखंड सब एरिया के जीओसी मेजर जनरल एमपीएस गिल समेतत कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

Defence Shares Weekly Report: डिफेंस शेयर्स में हल्की गिरावट, ये शेयर रहे टॉप गेनर्स, देख लें टॉप लूजर्स की लिस्ट

Defence Shares Weekly Report 7–10 Oct. 2025

Defence Shares Weekly Report: इस सप्ताह (6-10 अक्टूबर 2025) भारतीय डिफेंस सेक्टर में हल्की गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी इंडिया डिफेंस इंडेक्स लगभग 1.28 प्रतिशत गिरकर 8,000.30 रुपये पर बंद हुआ। सप्ताह की शुरुआत स्थिर रही, लेकिन मध्य सप्ताह में वैश्विक बाजार की अस्थिरता, जियोपॉलिटिकल तनाव और सप्लाई चेन चिंताओं के कारण बिकवाली बढ़ी। हालांकि, कुछ प्रमुख शेयरों जैसे साइंट डीएलएम्, भारत डायनामिक्स (बीडीएल) और बीईएल ने मजबूती दिखाई।

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सप्ताह के दौरान डिफेंस सेक्टर में औसतन 15% अधिक ट्रेडिंग वॉल्यूम देखा गया, जो बताता है कि निवेशकों की रुचि बनी हुई है। ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान और लगातार बढ़ते डिफेंस ऑर्डर बुक के चलते सेक्टर का लॉन्गटर्म आउटलुक पॉजिटिव है।

Defence Shares Weekly Report: निफ्टी इंडिया डिफेंस इंडेक्स

7 अक्टूबर को इंडेक्स की ओपनिंग 8,103.60 रुपये रही, जबकि 10 अक्टूबर को यह 8,000.30 रुपये पर बंद हुआ। सप्ताह के दौरान इंडेक्स का उच्च स्तर 8,119.15 रुपये और निचला स्तर 7,972.30 रुपये दर्ज किया गया। यह गिरावट मामूली मानी जा रही है, क्योंकि निवेशक अब भी सरकारी रक्षा परियोजनाओं, निर्यात बढ़ोतरी और निजी भागीदारी को लेकर पॉजिटिव हैं।

टॉप गेनर्स: जिन शेयरों ने दिखाया दमखम

सप्ताह के दौरान कुछ कंपनियों ने मजबूत प्रदर्शन किया। Cyient DLM के शेयर में सबसे अधिक बढ़ोतरी देखी गई। यह शेयर 457 से बढ़कर 470 रुपये पर बंद हुआ, जो 2.84% की साप्ताहिक वृद्धि है। कंपनी को हाल ही में Elbit Systems (Israel) से 34 करोड़ रुपये का इलेक्ट्रो-ऑप्टिक्स ऑर्डर मिला है।

Bharat Dynamics Ltd (BDL) ने 1,520 से 1,536.35 रुपये तक का सफर तय किया। मिसाइल एक्सपोर्ट में 12% की सालाना वृद्धि और इंडोनेशिया को 1,200 करोड़ रुपये के ऑर्डर की खबर ने निवेशकों का भरोसा मजबूत किया।

Bharat Electronics Ltd (BEL) का प्रदर्शन भी स्थिर रहा। स्टॉक 409.50 से 413.25 रुपये तक पहुंचा। डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स सेगमेंट में 60% मार्केट शेयर रखने वाली BEL को नए QRSAM प्रोजेक्ट के लिए संभावित कॉन्ट्रैक्ट मिलने की उम्मीद से मजबूती मिली।

Unimech Aerospace में भी हल्की तेजी दर्ज की गई। HAL के साथ टेक्नोलॉजी ट्रांसफर डील की खबरों ने इस स्टॉक को 950 से 961 रुपये तक पहुंचाया।

Dynamatic Technologies 7,670 से 7,733.75 रुपये तक चढ़ा। कंपनी को भारतीय नौसेना के लिए इंडिजेनाइज्ड हाइड्रॉलिक सिस्टम्स और Airbus से रिन्यूअल कॉन्ट्रैक्ट मिला है।

जहां दिखा दबाव

जहां कुछ शेयरों में तेजी रही, वहीं MTAR Technologies और Astra Microwave Products जैसे स्टॉक्स पर दबाव देखने को मिला।

Zen Technologies में मामूली बढ़त

Zen Technologies के शेयर 1,419.40 रुपये पर बंद हुए, जिसमें 0.32% की हल्की बढ़त दर्ज की गई। कंपनी का मार्केट कैप 11,500 करोड़ रुपये रहा और ट्रेडिंग वॉल्यूम लगभग 1.2 लाख शेयरों का था। इस बढ़त का मुख्य कारण था भारतीय वायुसेना के लिए उसके सिमुलेटर और एंटी-ड्रोन सिस्टम्स की बढ़ती मांग। जेन टेक्नोलॉजीज ने हाल ही में अपने ट्रेनिंग सॉल्यूशंस को कई डिफेंस प्रोजेक्ट्स में शामिल किया है, जिससे कंपनी की स्थिति मजबूत हुई है।

DCX Systems में हल्की तेजी 

डीसीएक्स सिस्टम्स के शेयर 243.00 रुपये पर बंद हुए, जिसमें मामूली 0.16% की बढ़त रही। कंपनी का मार्केट कैप 3,900 करोड़ रुपये है और वॉल्यूम लगभग 80,000 शेयर रहा। डीसीएक्स केबल और वायर हार्नेस सप्लाई में एक प्रमुख नाम है, और रक्षा क्षेत्र में इसकी निरंतर मांग बनी हुई है।

BEML में स्थिरता

भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड के शेयर 4,357.20 रुपये पर मामूली 0.05% की बढ़त के साथ बंद हुए। कंपनी का मार्केट कैप 17,800 करोड़ रुपये है और वॉल्यूम लगभग 1.5 लाख शेयर रहा। BEML को बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन के विभिन्न प्रोजेक्ट्स से निरंतर सपोर्ट मिल रहा है।

Paras Defence में सीमित बढ़त, लेकिन बना रहा रिस्क

पारस डिफेंस एंड स्पेस टेक्नोलॉजीज 721.00 रुपये पर बंद हुआ, जिसमें 0.03% की मामूली बढ़त देखी गई। कंपनी का मार्केट कैप 5,300 करोड़ रुपये और वॉल्यूम 70,000 शेयर रहा। हालांकि कंपनी को कुछ छोटे ऑर्डर्स मिले हैं, लेकिन जियोपॉलिटिकल रिस्क के कारण निवेशकों में सतर्कता बनी रही।

एचएएल पर दबाव, इंजन सप्लाई में देरी

हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड के शेयर 0.26% की गिरावट के साथ 4,833.60 रुपये पर बंद हुए। कंपनी का मार्केट कैप 3.23 लाख करोड़ रुपये है। ट्रेडिंग वॉल्यूम लगभग 3 लाख शेयर रहा। यह गिरावट तेजस लड़ाकू विमान की डिलीवरी में देरी और जीई इंजन की सप्लाई में अड़चन के कारण आई।

Cochin Shipyard में हल्की गिरावट

कोचीन शिपयार्ड के शेयर 0.52% की गिरावट के साथ 1,776.30 रुपये पर बंद हुए। कंपनी का मार्केट कैप 23,000 करोड़ रुपये और वॉल्यूम लगभग 1.1 लाख शेयर रहा। गिरावट का मुख्य कारण नेवल शिपबिल्डिंग कॉन्ट्रैक्ट्स में देरी और प्रोजेक्ट टाइमलाइन के विस्तार को माना जा रहा है।

Mazagon Dock Shipbuilders पर दबाव

मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स के शेयर 0.63% की गिरावट के साथ 2,870.05 रुपये पर बंद हुए। कंपनी का मार्केट कैप 1.15 लाख करोड़ रुपये रहा। वॉल्यूम लगभग 2.8 लाख शेयरों का था। इस गिरावट के पीछे P75I सबमरीन प्रोजेक्ट में अनिश्चितता मुख्य कारण रही।

Solar Industries India में गिरावट, लेकिन ओवरसोल्ड जोन में पहुंचा स्टॉक

Solar Industries India के शेयर 0.96% की गिरावट के साथ 14,090.00 रुपये पर बंद हुए। कंपनी का मार्केट कैप 1.27 लाख करोड़ रुपये और वॉल्यूम 90,000 शेयर रहा। अम्यूनिशन प्रोडक्शन में लागत बढ़ने से कंपनी पर दबाव देखा गया। विश्लेषकों के अनुसार, इसका टारगेट 14,300 रुपये के आसपास रह सकता है।

Data Patterns में मामूली गिरावट

Data Patterns (India) 2,795.00 रुपये पर बंद हुआ। कंपनी का मार्केट कैप 15,200 करोड़ रुपये और वॉल्यूम 1 लाख शेयर रहा। गिरावट का मुख्य कारण एक्सपोर्ट ऑर्डर्स में देरी और नई परियोजनाओं में अनिश्चितता रहा।

Mishra Dhatu Nigam (MIDHANI) में मेटल प्राइस का असर

MIDHANI के शेयर 1.55% की गिरावट के साथ 388.40 रुपये पर बंद हुए और वॉल्यूम लगभग 1.3 लाख शेयर का रहा। गिरावट का प्रमुख कारण मेटल प्राइस वोलेटिलिटी, खासकर निकिल और टाइटेनियम के दामों में तेजी रही।

Garden Reach Shipbuilders में भारी गिरावट

कोलकाता का गार्डन रीच शिपबिल्डर्स 2,660.15 रुपये पर बंद हुआ। 2.28% की गिरावट रही। मार्केट कैप 28,500 करोड़ रुपये और वॉल्यूम 2 लाख शेयर रहा। कंपनी को जहाजों की डिलीवरी में देरी और बढ़ी हुई लागत से नुकसान हुआ।

MTAR Technologies में सबसे बड़ी गिरावट

MTAR Technologies का शेयर 3.40% की गिरावट के साथ 1,884.90 रुपये पर बंद हुआ। कंपनी का मार्केट कैप 5,800 करोड़ रुपये और वॉल्यूम 1.7 लाख शेयर रहा। निवेशकों ने भारी प्रॉफिट बुकिंग की, जबकि सप्लाई चेन में बाधाओं ने भी असर डाला।

Astra Microwave Products सबसे बड़ा लूजर

एस्ट्रा माइक्रोवेव प्रोडक्ट्स 1,093.50 रुपये पर बंद हुआ। शेयर में 5.98% की बड़ी गिरावट देखने को मिली। कंपनी का मार्केट कैप 9,500 करोड़ रुपये और वॉल्यूम 2.3 लाख शेयर रहा, जो औसत से 25% अधिक था। गिरावट का मुख्य कारण जियोपॉलिटिकल रिस्क और रडार सिस्टम्स के कॉन्ट्रैक्ट्स में देरी रहा।

डिस्क्लेमर: शेयरों में निवेश करने से वित्तीय नुकसान का जोखिम होता है। इसलिए, निवेशकों को शेयरों में निवेश या ट्रेडिंग करते समय सावधानी बरतनी चाहिए। निवेश करने से पहले कृपया अपने निवेश सलाहकार से सलाह लें।