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Veer Gatha 5.0 ने तोड़ा रिकॉर्ड, गणतंत्र दिवस 2026 से पहले 1.90 लाख स्कूली छात्र हुए शामिल

Veer Gatha 5.0- Record 1.92 Crore Students Participate Ahead of Republic Day 2026

Veer Gatha 5.0: इस साल गणतंत्र दिवस समारोह में “वीर गाथा 5.0” एक नया रिकॉर्ड बना दिया है। इस बार वीर गाथा में देश-विदेश के करीब 1.92 करोड़ छात्रों ने भाग लिया। यह अब तक की सबसे बड़ी भागीदारी है, जिससे यह साफ होता है कि छात्रों के बीच देशभक्ति, शौर्य और सैन्य परंपराओं को जानने की रुचि लगातार बढ़ रही है।

Veer Gatha 5.0: 18 देशों के 91 स्कूलों से 28,005 छात्रों ने भेजी प्रविष्टियां

रक्षा मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय की संयुक्त पहल के तहत यह प्रोजेक्ट 8 सितंबर 2025 को शुरू किया गया था और इसमें करीब 1.90 लाख स्कूलों के छात्रों ने हिस्सा लिया। पहली बार विदेशों में स्थित सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों ने भी इसमें भाग लिया। कुल 18 देशों के 91 स्कूलों से 28,005 छात्रों ने अपनी प्रविष्टियां भेजीं थीं। (Veer Gatha 5.0)

वीर गाथा 5.0 की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि इसमें इस बार शॉर्ट वीडियो फॉर्मेट को शामिल किया गया। छात्रों को वीडियोग्राफी, एंकरिंग, रिपोर्टिंग और स्टोरीटेलिंग के जरिए भारत की सामरिक परंपरा, सैन्य इतिहास और वीरता की कहानियों को प्रस्तुत करने के लिए प्रेरित किया गया। (Veer Gatha 5.0)

इस प्रोजेक्ट के तहत छात्रों को भारत के महान योद्धाओं और ऐतिहासिक संघर्षों पर काम करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। इनमें कलिंग के राजा खारवेल, पृथ्वीराज चौहान, छत्रपति शिवाजी महाराज, 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के योद्धा और आदिवासी आंदोलनों के नायक जैसे विषय शामिल रहे। इन विषयों के जरिए छात्रों ने देश के इतिहास और संस्कृति को करीब से समझा। (Veer Gatha 5.0)

स्कूल स्तर पर गतिविधियां 10 नवंबर 2025 तक पूरी की गईं। इसके बाद जिला और राज्य स्तर पर मूल्यांकन हुआ। अंत में 4,020 प्रविष्टियों को राष्ट्रीय स्तर पर भेजा गया, जिनमें से 100 छात्रों का चयन सुपर-100 विजेता के रूप में किया गया। इनमें कक्षा 3 से 5 के 25 छात्र, कक्षा 6 से 8 के 25 छात्र और कक्षा 9 से 12 के 50 छात्र शामिल हैं। (Veer Gatha 5.0)

इन 100 सुपर-विनर्स को नई दिल्ली में रक्षा मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय द्वारा सम्मानित किया जाएगा। हर विजेता को 10,000 रुपये की नकद राशि दी जाएगी। इसके साथ ही इन छात्रों को कर्तव्य पथ पर आयोजित गणतंत्र दिवस परेड 2026 देखने का विशेष आमंत्रण मिलेगा, जहां वे विशेष अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे। (Veer Gatha 5.0)

इसके अलावा राज्य और केंद्र शासित प्रदेश स्तर पर भी विजेताओं का चयन किया जाएगा। हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश से अलग-अलग श्रेणियों में विजेताओं को स्थानीय स्तर पर सम्मानित किया जाएगा, जिससे इस पहल का दायरा और व्यापक हो सके। (Veer Gatha 5.0)

वीर गाथा प्रोजेक्ट की शुरुआत 2021 में आजादी का अमृत महोत्सव के तहत हुई थी। तब से लेकर अब तक यह एक ऐसे अभियान के रूप में विकसित हुआ है, जो छात्रों को देश के वीर सपूतों की कहानियों से जोड़ता है और उनमें नागरिक जिम्मेदारी तथा राष्ट्रप्रेम की भावना को मजबूत करता है। (Veer Gatha 5.0)

एनसीसी कैडेट्स से बोले वायुसेना प्रमुख, वर्दी से आगे भी रखें देश सेवा का जज्बा

Air Chief Marshal Visits NCC Republic Day Camp 2026
Air Chief Marshal Visits NCC Republic Day Camp 2026

NCC Republic Day Camp 2026: वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने गुरुवार को दिल्ली कैंट में आयोजित नेशनल कैडेट कॉर्प्स रिपब्लिक डे कैंप 2026 का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने सेना, नौसेना और वायुसेना तीनों विंग्स के एनसीसी कैडेट्स द्वारा प्रस्तुत गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण किया। कार्यक्रम की शुरुआत गर्ल कैडेट्स के बैंड डिस्प्ले से हुई।

Air Chief Marshal Visits NCC Republic Day Camp 2026
Air Chief Marshal Visits NCC Republic Day Camp 2026

एयर चीफ मार्शल ने इसके बाद कैडेट्स द्वारा तैयार किए गए फ्लैग एरिया का भी दौरा किया। यह फ्लैग एरिया देश के 17 एनसीसी डायरेक्टोरेट्स के कैडेट्स ने सामाजिक जागरूकता से जुड़े अलग-अलग विषयों पर तैयार किया था। इसके बाद उन्होंने एनसीसी हॉल ऑफ फेम का अवलोकन किया, जहां संगठन के गौरवशाली इतिहास और उपलब्धियों को प्रदर्शित किया गया है। (NCC Republic Day Camp 2026)

कैडेट्स को संबोधित करते हुए वायुसेना प्रमुख ने देश के युवाओं पर पूरा भरोसा जताया और राष्ट्र निर्माण में एनसीसी की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि एनसीसी देश का सबसे बड़ा यूनिफॉर्मधारी संगठन है, जिसमें 20 लाख से ज्यादा कैडेट्स जुड़े हैं। इनमें करीब 40 प्रतिशत कैडेट्स लड़कियां हैं। (NCC Republic Day Camp 2026)

Air Chief Marshal Visits NCC Republic Day Camp 2026
Air Chief Marshal Visits NCC Republic Day Camp 2026

एयर चीफ मार्शल सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान एनसीसी कैडेट्स की सक्रिय भागीदारी और सरकार की विभिन्न पहलों में उनके योगदान की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि कैडेट्स एनसीसी के मूल्यों को हमेशा बनाए रखें और वर्दी से आगे भी देश सेवा का जज़्बा रखें। उन्होंने कहा कि वे वर्दी में ही नहीं, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में राष्ट्रभाव को बनाए रखें और “नेवर से डाई” रवैये के साथ आगे बढ़ें। उन्होंने रिपब्लिक डे कैंप 2026 में चयनित सभी कैडेट्स को बधाई दी और कहा कि यहां पहुंचना उनके अनुशासन और मेहनत का परिणाम है। (NCC Republic Day Camp 2026)

“एट होम” में एयर फोर्स चीफ से मिले कैडेट्स

वहीं शाम को भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह और एएफएफडब्ल्यूए की अध्यक्ष सरिता सिंह ने अपने निवास एयर हाउस पर एक खास “एट होम” कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में देश भर के 17 एनसीसी निदेशालयों से आए 500 से ज्यादा एनसीसी कैडेट्स शामिल हुए।

इस मौके पर कैडेट्स को वायुसेना प्रमुख और उनकी पत्नी से सीधे मिलने और बातचीत करने का अवसर मिला। यह बातचीत पूरी तरह अनौपचारिक माहौल में हुई, जिससे कैडेट्स खुलकर सवाल पूछ सके। एयर चीफ मार्शल ने कैडेट्स को भारतीय वायुसेना के जीवन, उसके मूल्यों, अनुशासन और कार्य संस्कृति के बारे में बताया। उन्होंने यह भी समझाया कि देश की सेवा सिर्फ वर्दी पहनकर ही नहीं, बल्कि अलग-अलग क्षेत्रों में ईमानदारी और समर्पण के साथ काम करके भी की जा सकती है।

देश के अलग-अलग हिस्सों से आए कैडेट्स के लिए यह अनुभव बेहद खास रहा। कई कैडेट्स ने कहा कि इस मुलाकात से उन्हें सशस्त्र बलों में करियर बनाने की प्रेरणा मिली है। कार्यक्रम के अंत में सभी कैडेट्स ने मिलकर राष्ट्रगान गाया। (NCC Republic Day Camp 2026)

टाटा और एलएंडटी मिल कर पिनाका रॉकेट लॉन्चर को करेंगी अपग्रेड, भारतीय सेना ने दिया बड़ा ऑर्डर

Indian Army Pinaka Upgrade

Indian Army Pinaka Upgrade: भारतीय सेना ने पिनाका सिस्टम को आधुनिक बनाए रखने के लिए निजी क्षेत्र की प्रमुख रक्षा कंपनी लार्सन एंड टूब्रो को बड़ा ऑर्डर दिया है। भारतीय सेना की कॉर्प्स ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड मेकैनिकल इंजीनियर्स ने एल एंड टी को पिनाका मल्टी-रॉकेट लॉन्चर सिस्टम के ओवरहॉल, अपग्रेड और ऑब्सोलीसेंस मैनेजमेंट का सप्लाई ऑर्डर दिया है। इस कड़ी में लार्सन एंड टुब्रो के अलावा टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स को भी भारतीय सेना से अहम सप्लाई ऑर्डर मिले हैं।

Indian Army Pinaka Upgrade: पहली बार बड़े स्तर पर पीपीपी मॉडल को अपनाया

सेना और घरेलू निजी कंपनियों के बीच यह साझेदारी इसलिए खास मानी जा रही है क्योंकि पहली बार इतने बड़े पैमाने पर इन-सर्विस आर्टिलरी सिस्टम्स के पूरे लाइफ साइकिल सपोर्ट के लिए पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल को अपनाया गया है। सेना के अधिकारियों का कहना है कि इससे ‘मेक इन इंडिया’ के तहत बने हथियार सिस्टम्स की उम्र और ऑपरेशनल क्षमता दोनों बढ़ेंगी। (Indian Army Pinaka Upgrade)

स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी में एलएंडटी ने बताया कि उसे भारतीय सेना के कॉर्प्स ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड मैकेनिकल इंजीनियर्स यानी ईएमई की ओर से पिनाका मल्टी रॉकेट लॉन्चर सिस्टम के अपग्रेडेशन और ओवरहॉल का ऑर्डर मिला है। यह काम सिर्फ मरम्मत तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें पुराने हो चुके इलेक्ट्रॉनिक और मैकेनिकल पार्ट्स को बदलना, अहम सब-सिस्टम्स को अपग्रेड करना और लंबे समय तक तकनीकी सपोर्ट देना भी शामिल है। (Indian Army Pinaka Upgrade)

इसके तहत पिनाका रॉकेट लॉन्चर सिस्टम में लगे पुराने और आउटडेटेड कंपोनेंट्स को बदला जाएगा। साथ ही जरूरी सब-सिस्टम्स को अपग्रेड किया जाएगा और सेना के बेस वर्कशॉप्स को लगातार तकनीकी मदद दी जाएगी। इसके जरिए पारंपरिक मेंटेनेंस मॉडल से हटकर एक स्ट्रक्चर्ड और लाइफ-साइकल आधारित मेंटेनेंस व अपग्रेड फ्रेमवर्क अपनाया जाएगा। (Indian Army Pinaka Upgrade)

भारतीय सेना की ओर से इस प्रोग्राम को 510 आर्मी बेस वर्कशॉप (एबीडब्ल्यू), ईएमई के माध्यम से लागू किया जाएगा। 510 एबीडब्ल्यू को आर्टिलरी सिस्टम्स के रखरखाव और तकनीकी विशेषज्ञता के लिए जाना जाता है। इस प्रोजेक्ट के तहत आर्मी बेस वर्कशॉप पिनाका लॉन्चर और उससे जुड़े अहम इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम्स का ओवरहॉल और अपग्रेड करेगी। वहीं, एलएंडटी ओईएम के रूप में जरूरी स्पेयर्स उपलब्ध कराएगी और सब-सिस्टम्स के मॉडर्नाइजेशन में तकनीकी मदद देगी। (Indian Army Pinaka Upgrade)

शुरुआती चरण में एलएंडटी और 510 एबीडब्ल्यू मिलकर पिनाका लॉन्चर और बैटरी कमांड पोस्ट का एक पायलट ओवरहॉल करेंगे। इस पायलट फेज के सफलतापूर्वक पूरा होने के बाद, बाकी पिनाका सिस्टम्स का ओवरहॉल 510 एबीडब्ल्यू द्वारा किया जाएगा। एलएंडटी इस दौरान भी क्रिटिकल स्पेयर्स, टेक्निकल सपोर्ट और क्वालिटी ओवरसाइट देती रहेगी। (Indian Army Pinaka Upgrade)

इसी तरह टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स को भी भारतीय सेना से पिनाका सिस्टम्स के अपग्रेड और ओवरहॉल के लिए बड़ा ऑर्डर मिला है। कंपनी ने बताया कि 510 आर्मी बेस वर्कशॉप के साथ मिलकर वह पिनाका मल्टी लॉन्च रॉकेट सिस्टम और बैटरी कमांड पोस्ट के चुनिंदा सिस्टम्स का पायलट ओवरहॉल करेगी। इस सहयोग को कंपनी ने एक “लैंडमार्क पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप” बताया है। (Indian Army Pinaka Upgrade)

टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स पिनाका मल्टी-लॉन्च रॉकेट सिस्टम के डिजाइन और डेवलपमेंट से जुड़ी रही है, इस कार्यक्रम में सर्टिफाइड स्पेयर्स, तकनीकी विशेषज्ञता और क्वालिटी एश्योरेंस उपलब्ध कराएगी। कंपनी के अनुसार पिनाका एक ऑल-वेदर, इनडायरेक्ट फायर आर्टिलरी वेपन सिस्टम है, जो किसी खास टारगेट एरिया पर भारी मात्रा में फायरपावर देने में सक्षम है। पिनाका सिस्टम में लगभग 80 फीसदी स्वदेशी कंटेंट होने का दावा किया गया है। (Indian Army Pinaka Upgrade)

यह साझेदारी ऐसे समय में सामने आई है, जब हाल ही में डीआरडीओ ने पिनाका का लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट यानी एलआरजीआर 120 का सफल फ्लाइट टेस्ट किया है। 29 दिसंबर को ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से इस रॉकेट का परीक्षण किया गया, जिसमें इसने करीब 120 किलोमीटर की अधिकतम रेंज हासिल की। इससे पिनाका सिस्टम की मारक क्षमता और ज्यादा बढ़ने की उम्मीद है। (Indian Army Pinaka Upgrade)

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पिनाका जैसे इन-सर्विस सिस्टम्स का समय पर अपग्रेड और ओवरहॉल बेहद जरूरी है, ताकि बदलते युद्ध के हालात में सेना की तैयारियों में कोई कमी न रहे। निजी कंपनियों की भागीदारी से न सिर्फ तकनीकी सुधार तेजी से होंगे, बल्कि सेना को लंबे समय तक भरोसेमंद सपोर्ट भी मिलेगा। (Indian Army Pinaka Upgrade)

एलएंडटी और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स को मिले ये ऑर्डर भारतीय सेना की आर्टिलरी क्षमता को मजबूत बनाए रखने की दिशा में एक अहम कदम हैं। इससे पिनाका जैसे स्वदेशी हथियार सिस्टम्स की ऑपरेशनल रेडीनेस बनी रहेगी और देश के भीतर ही इनके रखरखाव और अपग्रेडेशन का मजबूत इकोसिस्टम तैयार होगा। (Indian Army Pinaka Upgrade)

Opinion: US Special Forces Capture Venezuela’s President; A Wake-Up Call for India’s Security Doctrine

US operation against Venezuelan President

On January 3, 2026, US special forces conducted a covert military operation in Caracas, capturing Venezuelan President Nicolás Maduro and his wife, Cilia Flores, from the presidential palace, Miraflores. This action, authorized by President Donald Trump, mirrored a domestic police arrest of a criminal, involving extraction from sovereign territory without Venezuelan consent. Maduro and Flores were flown to New York, where they pleaded not guilty to charges of drug trafficking, narco-terrorism, and offences related to weapons in a US federal court on January 5.

The operation has been criticised as a blatant violation of Venezuela’s national sovereignty, infringing on international norms under the UN Charter, which prohibits interference in domestic affairs. After all, Venezuela is a sovereign country, and the act of violating/destroying its sovereignty was done by a nation that always advocates for ethics regarding international matters.

This intervention represents an extreme, uncivil, and inhuman exercise of extraterritorial power by the US, treating a sitting head of state as a common fugitive. Despite the gravity—effectively an act of state-sponsored abduction-it has elicited muted global condemnation. Major powers, including those in the UN Security Council, have issued restrained statements, prioritising geopolitical alliances over principles of sovereignty.

This silence underscores a double standard in international relations, where powerful nations like the US can act with impunity, framing such operations as justice against “narco-terrorism” while ignoring humanitarian implications, such as potential destabilisation in Venezuela.

For India, this event serves as a stark lesson in assertive foreign policy. Adversaries in neighbouring Pakistan and Bangladesh, including state-backed terrorist leaders or politicians harboring anti-India elements, pose ongoing threats to national security. If charges such as drug trafficking, narco-terrorism, producing and distributing fake Indian currency, and offenses related to weapons are concerned, Pakistan has been committing all these crimes with us and is doing so for the last seven decades.

But what is more disturbing, which has damaged India a lot, is exporting terror to our country as part of its ‘1000 cuts’ theory developed by earlier dictators after they realised that they won’t be able to counter us on the war front.

India has used similar tactics against terror camps based in Pakistan-occupied Jammu & Kashmir (POJK) in response to attacks on Uri and Pahalgam. By Op Sindoor, India has shown its prowess not only to Pakistan but to the whole world. Similar prowess was shown when we crossed over to Myanmar to destroy terror camps. Drawing from the US precedent, India could consider similar targeted operations to neutralise such figures, bypassing diplomatic hurdles.

For instance, extracting key operatives from Pakistani soil, akin to past surgical strikes but escalated, or intervening in Bangladesh to address border incursions and radical elements. This approach, while risking escalation, could deter aggression and project strength, much like the US operation has reshaped Latin American dynamics. However, it demands robust intelligence, legal framing (e.g., under anti-terrorism laws), and international alliances to mitigate backlash.

The Maduro capture highlights the erosion of sovereignty in pursuit of national interests, a wrong unaddressed by the global community. India should internalise this as empowerment for decisive action against regional foes, ensuring preparedness through enhanced Special Forces and diplomatic maneuvering. Ultimately, such precedents redefine power balances, urging nations like India to adapt or risk vulnerability

(Writer is a senior journalist & Defence Expert)

श्रीलंका की टॉप डिफेंस लीडरशिप से मिले सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, IPKF शहीदों को दी श्रद्धांजलि

COAS Sri Lanka Visit
General Upendra Dwivedi, COAS, laid a wreath at the Indian Peace Keeping Force (IPKF) Memorial in Sri Lanka, paying solemn homage to the brave soldiers who made the supreme sacrifice in the service of peace, stability and regional harmony during Operation PAWAN.

COAS Sri Lanka Visit: भारतीय थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने श्रीलंका की टॉप डिफेंस लीडरशिप से मुलाकात कर दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग और सैन्य-से-सैन्य संबंधों को आगे बढ़ाने के तरीकों पर विस्तार से चर्चा की। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है, जब हिंद महासागर क्षेत्र और दक्षिण एशिया में सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां लगातार बदल रही हैं और भारत-श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों के बीच आपसी तालमेल को और मजबूत करने की जरूरत महसूस की जा रही है।

आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने श्रीलंका के उप रक्षा मंत्री मेजर जनरल अरुणा जयसेकरा और रक्षा सचिव एयर वाइस मार्शल संपत थुयाकोंथा से मुलाकात की। बातचीत का फोकस द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को और बढ़ाने, जॉइंट मिलिट्री ट्रेनिंग बढ़ाने और क्षेत्र के मौजूदा भू-रणनीतिक हालात पर विचार-विमर्श करने पर रहा। (COAS Sri Lanka Visit)

भारतीय सेना ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि भारत और श्रीलंका के बीच रक्षा संबंध केवल औपचारिक नहीं, बल्कि भरोसे, साझा हितों और लंबे समय से चले आ रहे सहयोग पर आधारित हैं। बातचीत में इस बात पर जोर दिया गया कि बदलते सुरक्षा माहौल में दोनों देशों की सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय और नियमित संवाद बेहद जरूरी है। (COAS Sri Lanka Visit)

COAS Sri Lanka Visit
The COAS interacted with Lieutenant General BKGM Lasantha Rodrigo, Commander of the Sri Lanka Army.

COAS Sri Lanka Visit: मिलिट्री ट्रेनिंग और आपसी तालमेल पर खास जोर

बैठक के दौरान जॉइंट मिलिट्री ट्रेनिंग को और विस्तार देने पर भी चर्चा हुई। दोनों देशों के अधिकारी इस बात पर सहमत दिखे कि साझा अभ्यास और ट्रेनिंग एक्सचेंज से न केवल प्रोफेशनल स्किल्स में सुधार होता है, बल्कि एक-दूसरे की कार्यशैली को समझने में भी मदद मिलती है। इससे किसी भी आपात स्थिति में मिलकर काम करना आसान हो जाता है।

इसके साथ ही, ह्यूमैनिटेरियन असिस्टेंस एंड डिजास्टर रिलीफ यानी मानवीय सहायता और आपदा राहत के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी बात हुई। श्रीलंका और भारत दोनों ही देश प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित होते रहे हैं। ऐसे में सेनाओं की भूमिका राहत और बचाव कार्यों में अहम होती है। दोनों पक्षों ने माना कि इस क्षेत्र में साझा योजना और अभ्यास से आम लोगों तक तेजी से मदद पहुँचाई जा सकती है। (COAS Sri Lanka Visit)

COAS Sri Lanka Visit
General Upendra Dwivedi, COAS held discussions with Major General Aruna Jayasekara (Retd), Deputy Minister of Defence & Air Vice Marshal Sampath Thuyacontha (Retd), Secretary of Defence, Sri Lanka.

आर्मी-टू-आर्मी स्टाफ वार्ता का असर

यह उच्चस्तरीय मुलाकात भारत-श्रीलंका आर्मी-टू-आर्मी स्टाफ वार्ता के ठीक बाद हुई, जो 8 जनवरी को नई दिल्ली स्थित इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ मुख्यालय में आयोजित की गई थी। इस वार्ता में भी दोनों सेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी यानी आपसी तालमेल बढ़ाने, रक्षा संबंधों को मजबूत करने और दीर्घकालिक साझेदारी पर चर्चा हुई थी।

इन बैठकों से साफ संकेत मिलता है कि भारत और श्रीलंका अपनी सेनाओं के बीच सहयोग को केवल वर्तमान जरूरतों तक सीमित नहीं रखना चाहते, बल्कि भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए एक मजबूत ढांचा तैयार कर रहे हैं। (COAS Sri Lanka Visit)

COAS Sri Lanka Visit

आईपीकेएफ के शहीदों को श्रद्धांजलि

श्रीलंका दौरे के दौरान जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कोलंबो स्थित आईपीकेएफ वॉर मेमोरियल पर जाकर श्रद्धांजलि अर्पित की। यह स्मारक उन भारतीय सैनिकों की याद में बनाया गया है, जिन्होंने 1987 से 1990 के बीच ऑपरेशन पवन के दौरान श्रीलंका में शांति स्थापना के प्रयासों में अपने प्राण न्योछावर किए थे।

भारतीय सेना के अतिरिक्त महानिदेशालय जनसंपर्क (एडीजीपीआई) के अनुसार, यह समारोह शांति, स्थिरता और क्षेत्रीय सद्भाव के लिए बलिदान देने वाले जवानों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता प्रकट करने का अवसर था। आईपीकेएफ वॉर मेमोरियल आज भी भारतीय सेना के साहस, अनुशासन और पेशेवर प्रतिबद्धता की याद दिलाता है। (COAS Sri Lanka Visit)

COAS Sri Lanka Visit

क्षेत्रीय शांति और स्थिरता पर दिया जोर

बैठक में दोनों पक्षों ने इस बात को दोहराया कि भारत और श्रीलंका क्षेत्रीय शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए मिलकर काम करते रहेंगे। हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियों और बदलते सुरक्षा समीकरणों के बीच यह साझेदारी और भी अहम हो जाती है।

रक्षा सहयोग, मिलिट्री ट्रेनिंग, आपदा राहत और रणनीतिक संवाद जैसे क्षेत्रों में लगातार संपर्क बनाए रखने से दोनों देशों को न केवल आपसी लाभ मिलेगा, बल्कि पूरे क्षेत्र में स्थिरता को भी बल मिलेगा। (COAS Sri Lanka Visit)

Defence Budget 2026: डिफेंस सेक्टर पर मेहरबान सरकार! बजट से पहले ये 5 स्टॉक्स दे सकते हैं दमदार रिटर्न

Defence Budget 2026

Defence Budget 2026: भारत में रक्षा क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों पर निवेशकों की नजर लगातार बनी हुई है। खासतौर पर बजट 2026 से पहले डिफेंस सेक्टर को लेकर बाजार में सकारात्मक माहौल देखने को मिल रहा है। ब्रोकरेज फर्म चॉइस इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज का मानना है कि अब भारतीय रक्षा उद्योग एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है, जहां नीतियों से आगे बढ़कर एक्जीक्यूशन यानी जमीन पर काम के नतीजे दिखने लगे हैं। इसी बदलाव के बीच चॉइस ने निवेश के लिहाज से कुछ डिफेंस शेयरों को बेहतर बताया है, जिनमें भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) और भारत डायनामिक्स लिमिटेड (बीडीएल) को अपनी टॉप पसंद बताया गया है। (Defence Budget 2026)

चॉइस के मुताबिक, भारतीय रक्षा सेक्टर अब उस दौर से बाहर निकल रहा है, जहां सिर्फ नई नीतियां और योजनाएं बनाई जा रही थीं। अब फोकस बड़े पैमाने पर ऑर्डर के एक्जीक्यूशन, समय पर सप्लाई और रिपीट बिजनेस पर आ गया है। इसका सीधा फायदा उन कंपनियों को मिल रहा है, जिनकी ऑर्डर बुक मजबूत है और जो पहले से ही सेना की जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभा रही हैं। (Defence Budget 2026)

ब्रोकरेज का कहना है कि डिफेंस प्रोग्राम अब डेवलपमेंट स्टेज से निकलकर स्केल्ड एक्जीक्यूशन के चरण में पहुंच रहे हैं। इसका मतलब यह है कि हथियार, सिस्टम, स्पेयर्स, अपग्रेड, गोला-बारूद और सब-सिस्टम्स की मांग अब ज्यादा नियमित हो रही है। इससे कंपनियों की आमदनी में उतार-चढ़ाव कम होगा और रेवन्यू प्रोफाइल ज्यादा स्मूद बनेगी। (Defence Budget 2026)

Defence Budget 2026: बीईएल और बीडीएल क्यों हैं पसंदीदा

बीईएल और बीडीएल दोनों ही कंपनियां डिफेंस सिस्टम के बेहद अहम सेगमेंट में काम करती हैं। बीईएल इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम्स, रडार, कम्युनिकेशन सिस्टम, एयर डिफेंस और सर्विलांस से जुड़े उत्पादों में मजबूत पकड़ रखती है। वहीं बीडीएल मिसाइल सिस्टम्स और हथियारों की सप्लाई में एक बड़ी सरकारी कंपनी है। चॉइस का मानना है कि इन दोनों कंपनियों को आने वाले समय में लगातार ऑर्डर मिलने की अच्छी संभावना दिख रही है।

ब्रोकरेज यह भी मानता है कि डिफेंस शेयरों में बीच-बीच में जो उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है, उसे लंबी अवधि के नजरिए से देखना चाहिए। क्योंकि सेक्टर का स्ट्रक्चरल ग्रोथ स्टोरी अभी भी मजबूत बनी हुई है। (Defence Budget 2026)

Defence Budget 2026: डिफेंस एक्सपोर्ट से मिल रहा है सपोर्ट

डिफेंस सेक्टर को मजबूती देने वाला एक और बड़ा फैक्टर है डिफेंस एक्सपोर्ट। सरकार का लक्ष्य है कि वित्त वर्ष 2029 तक भारत का रक्षा निर्यात 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंच जाए। इसके पीछे वजह है भारतीय प्लेटफॉर्म्स को वैश्विक स्तर पर मिल रही स्वीकार्यता और भारत का ग्लोबल सप्लाई चेन में मजबूत होना।

चॉइस का कहना है कि जैसे-जैसे भारतीय कंपनियां इंटरनेशनल मार्केट में अपनी जगह बना रही हैं, वैसे-वैसे ऑर्डर विजिबिलिटी और रिपीट बिजनेस के मौके भी बढ़ते जाएंगे। इसका सीधा असर शेयरों की लंबी अवधि की परफॉर्मेंस पर पड़ सकता है। (Defence Budget 2026)

Defence Budget 2026: बजट से पहले डिफेंस शेयरों में तेजी

2026 की शुरुआत में ही डिफेंस शेयरों में अच्छी तेजी देखी गई है। बाजार को उम्मीद है कि आने वाले बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए आवंटन बढ़ाया जा सकता है। इसी उम्मीद के चलते बीईएल, हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल), गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई), एमटार टेक्नोलॉजीज और बीडीएल जैसे शेयरों में खरीदारी देखी गई है। (Defence Budget 2026)

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तेजी के पीछे मजबूत ऑर्डर बुक, बेहतर एक्जीक्यूशन और सरकार की ओर से आत्मनिर्भर भारत पर लगातार जोर अहम वजहें हैं। जनवरी की शुरुआत में निफ्टी डिफेंस इंडेक्स ने भी निफ्टी 50 से बेहतर प्रदर्शन किया है। (Defence Budget 2026)

Defence Budget 2026: सरकार के बड़े कॉन्ट्रैक्ट्स से बढ़ा भरोसा

वित्त वर्ष 2026 में अब तक सरकार रक्षा उपकरणों की खरीद के लिए करीब 1.82 ट्रिलियन रुपये के कॉन्ट्रैक्ट साइन कर चुकी है। इससे रक्षा मंत्रालय उस स्तर के करीब पहुंच गया है, जहां पिछले साल रिकॉर्ड 2.1 ट्रिलियन रुपये के सौदे हुए थे। इससे यह संकेत मिलता है कि आने वाले बजट में भी रक्षा खर्च को प्राथमिकता दी जा सकती है।

चॉइस इक्विटी ब्रोकिंग के मुताबिक, टेक्निकल एनालिसिस के आधार पर बीईएल, एचएएल, बीडीएल, जीआरएसई और एमटार टेक्नोलॉजीज जैसे शेयरों में आगे चलकर करीब 12 फीसदी तक का अपसाइड देखने को मिल सकता है। (Defence Budget 2026)

Defence Budget 2026: निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है यह ट्रेंड

डिफेंस सेक्टर में बढ़ती गतिविधि यह दिखाती है कि सरकार और सेनाएं दोनों ही आधुनिकीकरण पर लगातार ध्यान दे रही हैं। मिसाइल सिस्टम, एयर डिफेंस, सर्विलांस और काउंटर ड्रोन जैसी क्षमताओं की जरूरत आने वाले समय में और बढ़ने वाली है। ऐसे में जिन कंपनियों की तकनीकी पकड़ मजबूत है और जिनका ट्रैक रिकॉर्ड भरोसेमंद है, वे निवेशकों के लिए बेहतर रिटर्न देने की स्थिति में नजर आ रही हैं। (Defence Budget 2026)

बजट से पहले बने इस माहौल में बीईएल, बीडीएल, एचएएल, जीआरएसई और एमटार टेक्नोलॉजीज जैसे शेयरों को लेकर बाजार में सकारात्मक सोच बनी हुई है। रक्षा क्षेत्र में लंबे समय के नजरिए से निवेश करने वाले निवेशकों के लिए यह सेक्टर एक मजबूत विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। (Defence Budget 2026)

लोकेश मशींस को मिला 22 करोड़ रुपये का ऑर्डर, 9mm मशीन पिस्टल पार्ट्स की करेगी सप्लाई

Lokesh Machines Defence Contract

Defence Contract: हैदराबाद की इंजीनियरिंग कंपनी लोकेश मशींस लिमिटेड को रक्षा मंत्रालय से एक अहम ऑर्डर मिला है। कंपनी को यह ऑर्डर सरकारी डिफेंस कंपनी एडवांस्ड वेपन्स एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड से मिला है। इस ऑर्डर की कुल कीमत करीब 22 करोड़ रुपये बताई गई है।

Defence Contract: सुरक्षा बलों में खूब इस्तेमाल होती है 9 एमएम पिस्टल

कंपनी की ओर से दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह कॉन्ट्रैक्ट 9×19 एमएम कैलिबर मशीन पिस्टल के लिए इस्तेमाल होने वाले सब-असेंबली और कंपोनेंट्स की सप्लाई से जुड़ा है। यह वही कैलिबर है, जो भारतीय सुरक्षा बलों में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने वाले हथियारों में शामिल है। इस ऑर्डर के तहत लोकेश मशींस को तय समयसीमा के भीतर सभी पार्ट्स की सप्लाई करनी होगी। (Defence Contract)

स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी में बताया गया है कि इस कॉन्ट्रैक्ट की कुल वैल्यू 22,00,46,400 रुपये है। कंपनी को यह सप्लाई 19 मार्च 2026 तक या उससे पहले पूरी करनी है। हालांकि, फाइलिंग में यह साफ नहीं किया गया है कि कितने यूनिट्स की सप्लाई की जाएगी या प्रति यूनिट कीमत क्या होगी। इसके अलावा, स्टेज-वाइज डिलीवरी शेड्यूल, इंस्पेक्शन प्रोसेस, वारंटी या देरी होने पर पेनल्टी जैसी शर्तों का भी खुलासा नहीं किया गया है। (Defence Contract)

एडवांस्ड वेपंस एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड एक सरकारी कंपनी है, जिसका गठन ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड के कॉरपोरेटाइजेशन के बाद किया गया था। यह कंपनी 14 अगस्त 2021 को कंपनीज एक्ट 2013 के तहत बनी और 1 अक्टूबर 2021 से इसका व्यावसायिक कामकाज शुरू हुआ। इसका रजिस्टर्ड ऑफिस कानपुर में ऑर्डनेंस फैक्ट्री परिसर, कल्पी रोड पर स्थित है। देशभर में इसके कई प्रोडक्शन और नॉन-प्रोडक्शन यूनिट्स हैं, जो भारतीय सशस्त्र बलों के लिए हथियार और उपकरण तैयार करते हैं। (Defence Contract)

वहीं लोकेश मशींस की बात करें तो यह कंपनी मुख्य रूप से मशीन टूल मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में काम करती है। कंपनी सीएनसी मशीनें, स्पेशल पर्पज मशीनें और ऑटो कंपोनेंट्स बनाती है। हर साल लोकेश मशींस करीब 800 से ज्यादा सीएनसी मशीनें तैयार करती है। कंपनी का इंजीनियरिंग बेस हैदराबाद में है, जिसकी स्थापना 17 दिसंबर 1983 को हुई थी और 1985 से कंपनी ने अपना व्यावसायिक उत्पादन शुरू किया। (Defence Contract)

वित्तीय आंकड़ों की बात करें तो सितंबर 2025 को समाप्त तिमाही में कंपनी की नेट सेल्स करीब 50.43 करोड़ रुपये रही थी, जबकि उसी अवधि में नेट प्रॉफिट 0.63 करोड़ रुपये दर्ज किया गया था।

आज 8 जनवरी को सुबह करीब 11:30 बजे के आसपास लोकेश मशींस लिमिटेड के शेयर में हल्की कमजोरी देखने को मिली। एनएसई पर यह शेयर अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स के मुताबिक करीब 175 से 178 रुपये के दायरे में ट्रेड करता दिखा। कुछ जगहों पर कीमत लगभग 175.60 रुपये दर्ज की गई, तो कहीं यह 178 रुपये के आसपास नजर आई। (Defence Contract)

अगर बीते एक साल के प्रदर्शन पर नजर डालें तो लोकेश मशींस का 52 हफ्ते का हाई करीब 329 से 340 रुपये के आसपास रहा है, जबकि 52 हफ्ते का लो लगभग 128 रुपये के पास दर्ज किया गया था। यानी ऊपरी स्तर से यह शेयर अभी काफी नीचे ट्रेड कर रहा है, लेकिन निचले स्तर से इसमें अच्छी रिकवरी भी देखने को मिल चुकी है। आंकड़ों के मुताबिक, बीते एक महीने में यह शेयर करीब 24 फीसदी से ज्यादा ऊपर गया है। (Defence Contract)

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के ऑर्डर यह दिखाते हैं कि अब छोटे और मझोले स्तर की भारतीय कंपनियां भी रक्षा उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। निजी क्षेत्र की भागीदारी से न केवल सप्लाई चेन मजबूत हो रही है, बल्कि घरेलू स्तर पर हथियार और उपकरण बनाने की क्षमता भी बढ़ रही है। (Defence Contract)

ड्रोन वॉरफेयर को लेकर भारतीय सेना कर रही बड़ी तैयारी, बना रही 25 शक्तिबाण रेजिमेंट

Indian Army Drone Warfare Shaktibaan Regiments

Indian Army Drone Warfare: आधुनिक युद्ध की जरूरतों को देखते हुए भारतीय सेना अपनी ड्रोन युद्ध क्षमता को तेजी से मजबूत कर रही है। सेना ने बड़ा फैसला लेते हुए 25 शक्तिबाण रेजिमेंट खड़ी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। ये नई रेजिमेंट पूरी तरह अनमैन्ड वॉरफेयर यानी ड्रोन आधारित युद्ध के लिए तैयार की जा रही हैं। रक्षा अधिकारियों के मुताबिक, ये रेजिमेंट 5 किलोमीटर से लेकर 500 किलोमीटर तक की दूरी पर मौजूद टारगेट्स पर हमला कर सकेंगी।

यह बड़ा फोर्स रिस्ट्रक्चरिंग प्लान भारतीय सेना के मॉडर्नाइजेशन प्लान का हिस्सा है, जो थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी का विजन है। इसका मकसद भविष्य की लड़ाइयों के लिए सेना को तकनीक आधारित, तेज और ज्यादा अचूक बनाना है। रक्षा सूत्रों के अनुसार, शक्तिबाण रेजिमेंट आर्टिलरी रेजिमेंट का हिस्सा होंगी और इनकी शुरुआती यूनिट्स को ऑपरेशनल भी किया जा चुका है। (Indian Army Drone Warfare)

Indian Army Drone Warfare: शामिल होंगे लंबी दूरी वाले कामिकाजे ड्रोन

भारतीय सेना लंबे समय से यह महसूस कर रही थी कि 50 से 500 किलोमीटर की रेंज में स्ट्राइक की उसकी क्षमता में एक बड़ा गैप है। पारंपरिक आर्टिलरी सिस्टम और मिसाइलों के बीच यह दूरी ड्रोन और लॉइटरिंग म्यूनिशन के जरिए भरी जा सकती है। शक्तिबाण रेजिमेंट इसी जरूरत को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही हैं। इन रेजिमेंट्स में स्वार्म ड्रोन, लॉइटरिंग म्यूनिशन यानी कामिकाजे ड्रोन और लंबी दूरी तक मार करने वाले यूएवी शामिल होंगे। (Indian Army Drone Warfare)

रक्षा अधिकारियों के मुताबिक, 400 से 500 किलोमीटर से ज्यादा दूरी के टारगेट्स के लिए सेना के पास पहले से ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल जैसी ताकत मौजूद है। वहीं आर्टिलरी रेजिमेंट को 120 किलोमीटर रेंज वाले पिनाका रॉकेट सिस्टम भी मिल रहे हैं। लेकिन 50 से 500 किलोमीटर के बीच की दूरी में ड्रोन आधारित सिस्टम से सेना को कम समय में हमला करने की क्षमता मिलेगी। स्वार्म ड्रोन्स के जरिए एक साथ कई लक्ष्यों पर दबाव बनाया जा सकेगा, जबकि लॉइटरिंग म्यूनिशन्स दुश्मन के इलाके में मंडराते हुए सही समय पर हमला कर सकेंगे। (Indian Army Drone Warfare)

शक्तिबाण रेजिमेंट को तैयार करने के लिए भारतीय सेना जल्द ही फास्ट-ट्रैक प्रोसीजर के तहत एक बड़ा टेंडर जारी करने जा रही है। इस टेंडर के जरिए करीब 850 लॉइटरिंग म्यूनिशन और उनसे जुड़े लॉन्चर खरीदे जाएंगे। इस प्रोजेक्ट की कुल लागत करीब 2,000 करोड़ रुपये बताई जा रही है। खास बात यह है कि इन ड्रोन सिस्टम्स की सप्लाई भारतीय कंपनियों से ही की जाएगी। (Indian Army Drone Warfare)

रक्षा सूत्रों के अनुसार, भारतीय इंडस्ट्री इन ड्रोन सिस्टम्स की आपूर्ति अगले दो वर्षों के भीतर करने की स्थिति में है। सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस, अदाणी डिफेंस और राफेएम जैसी भारतीय कंपनियों के इस परियोजना में भाग लेने की संभावना जताई जा रही है। सेना पहले ही एक लाख से अधिक ड्रोन ऑपरेटर्स का पूल तैयार कर चुकी है और अब इन्हें आधुनिक हथियारों और प्लेटफॉर्म्स से लैस किया जा रहा है। शक्तिबाण रेजिमेंट इसी बड़े ड्रोन इकोसिस्टम का अहम हिस्सा होंगी। (Indian Army Drone Warfare)

बनाई जा रहीं दिव्यास्त्र बैटरियां

सिर्फ शक्तिबाण रेजिमेंट ही नहीं, बल्कि आर्टिलरी रेजिमेंट के तहत करीब 35 से 40 दिव्यास्त्र बैटरियां भी बनाई जा रही हैं। इन बैटरियों में अलग-अलग तरह के ड्रोन शामिल होंगे, जिनमें घातक स्ट्राइक करने की क्षमता होगी। ये बैटरियां आर्टिलरी डिवीजनों का हिस्सा बनेंगी और युद्ध के दौरान ड्रोन से सटीक हमला करने में मदद करेंगी।

इन्फैंट्री यानी पैदल सेना में भी बदलाव किए जा रहे हैं। हर इन्फैंट्री बटालियन में अश्नि प्लाटून बनाए जा रही हैं, ताकि फ्रंटलाइन पर तैनात जवान भी ड्रोन का इस्तेमाल कर निगरानी और हमले कर सकें। इसके अलावा कोर मुख्यालय स्तर पर नई भैरव स्पेशल कमांडो फोर्स बनाई गई है। इस फोर्स का हर ऑपरेटर ड्रोन लॉन्च कर दुश्मन के ठिकानों पर हमला कर सकता है। (Indian Army Drone Warfare)

ड्रोन युद्ध की यह तैयारी हाल ही में हुए ऑपरेशन सिंदूर के अनुभवों पर भी आधारित है। इस ऑपरेशन के दौरान भारतीय बलों ने नागास्त्र, स्काई स्ट्राइकर, हार्पी और हारोप जैसे लॉइटरिंग म्यूनिशन्स का इस्तेमाल कर दुश्मन के ठिकानों को निशाना बनाया था। इन अभियानों से मिले अनुभवों ने सेना को ड्रोन आधारित युद्ध क्षमता को और तेज़ी से विकसित करने के लिए प्रेरित किया है। (Indian Army Drone Warfare)

रक्षा अधिकारियों का कहना है कि आज की लड़ाई सिर्फ बंदूक और टैंक की नहीं रह गई है। ड्रोन, सेंसर, रियल टाइम डेटा और सटीक स्ट्राइक अब युद्ध का अहम हिस्सा बन चुके हैं। शक्तिबाण रेजिमेंट इसी बदले हुए युद्ध के स्वरूप को ध्यान में रखकर बनाई जा रही हैं, ताकि भारतीय सेना हर मोर्चे पर तकनीक के साथ आगे रह सके। (Indian Army Drone Warfare)

देशभर में भारतीय सेना के मिलिट्री बैंड देंगे परफॉरमेंस, 19 से 26 जनवरी तक होंगे कार्यक्रम

Vande Mataram 150 Years- Military Band
Vande Mataram 150 Years- Military Band

Vande Mataram 150 Years: भारत के राष्ट्रगीत “वंदे मातरम” के 150 साल पूरे होने के अवसर पर भारतीय सेना देशभर में विशेष मिलिट्री बैंड कार्यक्रम आयोजित करने जा रही है। यह आयोजन राष्ट्रव्यापी समारोहों के दूसरे चरण का हिस्सा है, जिसमें सेना 19 जनवरी से 26 जनवरी तक देश के प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर गरिमामय बैंड परफॉर्मेंस प्रस्तुत करेगी। इस पहल का उद्देश्य वंदे मातरम के ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्व को सम्मान देना और आम नागरिकों के बीच देशभक्ति और एकता की भावना को मजबूत करना है।

सेना के मुताबिक, इन कार्यक्रमों के जरिए स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े उस गीत को नई पीढ़ी तक पहुंचाया जाएगा, जिसने देश की आजादी की लड़ाई में लोगों को एकजुट किया था। वंदे मातरम की रचना 1875 में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी और यह गीत लंबे समय तक आजादी के आंदोलन की पहचान बना रहा। संविधान सभा ने 1950 में इसे राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया था। (Vande Mataram 150 Years)

Vande Mataram 150 Years: 18 शहरों में परफॉरमेंस

दूसरे चरण के इस आयोजन के तहत सेना के विभिन्न कमांड्स के मिलिट्री बैंड बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल, लद्दाख और राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली सहित कई राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों में प्रस्तुति देंगे। पटना, गया, रांची, लखनऊ, प्रयागराज, देहरादून, रायपुर, गोपालपुर, बेंगलुरु, जबलपुर, मुंबई, पुणे, हैदराबाद, जयपुर और शिमला जैसे शहरों के साथ कारगिल और नईहाटी जैसे ऐतिहासिक महत्व वाले स्थान भी इस कार्यक्रम का हिस्सा होंगे। (Vande Mataram 150 Years)

नई दिल्ली स्थित इंडिया गेट पर 18 जनवरी को सेना के आर्मी सिम्फनी बैंड द्वारा एक विशेष प्रस्तुति निर्धारित की गई है। यह कार्यक्रम वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में होने वाले आयोजनों का प्रमुख आकर्षण माना जा रहा है। इसके बाद 19 से 26 जनवरी तक अलग-अलग स्थानों पर नियमित बैंड परफॉर्मेंस होंगी।

सेना के अधिकारियों के अनुसार, हर बैंड परफॉर्मेंस की अवधि लगभग 45 मिनट होगी और ये कार्यक्रम दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे के बीच आयोजित किए जाएंगे, ताकि आम लोग बड़ी संख्या में इसमें शामिल हो सकें। इन प्रस्तुतियों में वंदे मातरम के साथ अन्य देशभक्ति धुनें भी बजाई जाएंगी, जिन्हें सेना के अनुभवी म्यूजिशियन प्रस्तुत करेंगे। (Vande Mataram 150 Years)

यह आयोजन गणतंत्र दिवस सप्ताह के दौरान रखा गया है, जिससे इसका राष्ट्रीय महत्व और भी बढ़ जाता है। सेना का मानना है कि इस तरह के खुले सार्वजनिक कार्यक्रम न केवल सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देते हैं, बल्कि सशस्त्र बलों और नागरिकों के बीच भावनात्मक जुड़ाव को भी मजबूत करते हैं। वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने पर यह पहल देशभर में एक साझा राष्ट्रीय भावना को जीवंत रूप देने का प्रयास है। (Vande Mataram 150 Years)

दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए रवाना हुई भारतीय नौसेना की पहली ट्रेनिंग स्क्वाड्रन

Indian Navy Training Deployment

Indian Navy Training Deployment: भारतीय नौसेना की पहली ट्रेनिंग स्क्वाड्रन (1TS) दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए लॉन्ग रेंज ट्रेनिंग डिप्लॉयमेंट पर रवाना हो रही है। यह डिप्लॉयमेंट 110वें इंटीग्रेटेड ऑफिसर्स ट्रेनिंग कोर्स (IOTC) का अहम हिस्सा है, जिसका उद्देश्य नौसेना के ऑफिसर ट्रेनीज को समुद्र में वास्तविक परिस्थितियों का व्यावहारिक अनुभव देना है। इस अभियान में भारतीय नौसेना के तीन जहाज और भारतीय तटरक्षक बल का एक जहाज शामिल हैं।

इस लॉन्ग रेंज ट्रेनिंग डिप्लॉयमेंट में आईएनएस तीर, आईएनएस शार्दुल, आईएनएस सुजाता और भारतीय तटरक्षक बल का आईसीजीएस सारथी शामिल हैं। ये सभी जहाज मिलकर ऑफिसर्स ट्रेनीज को मैरीटाइम नेविगेशन, ऑपरेशनल प्लानिंग, लॉजिस्टिक्स और इंटरनेशनल मैरीटाइम कोआपरेशन से जुड़ा अनुभव प्रदान करेंगे। यह यात्रा केवल ट्रेनिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य भारत और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के बीच समुद्री संबंधों को और मजबूत करना भी है।

Indian Navy Training Deployment

Indian Navy Training Deployment: सिंगापुर, इंडोनेशिया और थाईलैंड में पोर्ट कॉल

स्क्वाड्रन की इस यात्रा के दौरान सिंगापुर, इंडोनेशिया और थाईलैंड में पोर्ट कॉल किए जाएंगे। इन देशों के बंदरगाहों पर रुकने के दौरान मेजबान नौसेनाओं और समुद्री एजेंसियों के साथ प्रोफेशनल बातचीत, ट्रेनिंग इंगेजमेंट और सहयोगी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इन कार्यक्रमों के जरिए दोनों पक्षों के बीच आपसी समझ, भरोसा और समुद्र में साथ काम करने की क्षमता को बढ़ाया जाएगा।

पोर्ट विजिट्स के दौरान ऑफिसर्स ट्रेनीज स्ट्रक्चर्ड ट्रेनिंग एक्सचेंज में हिस्सा लेंगे, जहां नेविगेशन, कम्युनिकेशन, सेफ्टी प्रोसीजर्स और ऑपरेशनल बेस्ट प्रैक्टिसेज पर अनुभव साझा किया जाएगा। इसके साथ ही क्रॉस-डेक विजिट्स के माध्यम से ट्रेनीज को अन्य देशों के जहाजों की कार्यप्रणाली को नजदीक से देखने और समझने का अवसर मिलेगा। विषय विशेषज्ञों के साथ संवाद के जरिए समुद्री सुरक्षा, सर्च एंड रेस्क्यू और मानवीय सहायता जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की जाएगी।

इस लॉन्ग रेंज ट्रेनिंग डिप्लॉयमेंट का एक अहम पहलू जॉइंट मैरीटाइम पार्टनरशिप एक्सरसाइज हैं। इन अभ्यासों के जरिए समुद्र में सामूहिक संचालन, तालमेल और इंटरऑपरेबिलिटी को बेहतर बनाने पर जोर दिया जाएगा। ऐसे अभ्यास भविष्य में किसी भी साझा समुद्री चुनौती से निपटने में उपयोगी साबित होते हैं।

Indian Navy Training Deployment

110वें इंटीग्रेटेड ऑफिसर्स ट्रेनिंग कोर्स में इस बार छह अंतरराष्ट्रीय ऑफिसर ट्रेनीज भी शामिल हैं। यह भारत की उस नीति को दर्शाता है, जिसके तहत मित्र देशों के मिलिट्री पर्सनल को ट्रेनिंग देकर उनकी क्षमता बढ़ाने में सहयोग किया जाता है। इंटरनेशनल ट्रेनीज की मौजूदगी से इस डिप्लॉयमेंट को मल्टीनेशनल डाइमेंशन्स भी मिलता है और ट्रेनीज को अलग-अलग संस्कृतियों और कार्यशैलियों को समझने का अवसर मिलता है।

इस यात्रा में भारतीय सेना और भारतीय वायु सेना के कुछ कर्मियों को भी जहाजों पर तैनात किया गया है। इससे तीनों सेनाओं के बीच जॉइंटनेस और आपसी कॉर्डिनेशन को बढ़ावा मिलेगा। समुद्री अभियानों में थल और वायु की भूमिका को समझना आधुनिक सैन्य प्रशिक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

Indian Navy Training Deployment

यह लॉन्ग रेंज ट्रेनिंग डिप्लॉयमेंट भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी का हिस्सा है, जिसके तहत दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के साथ रणनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा सहयोग को मजबूत किया जा रहा है। समुद्री क्षेत्र में यह सहयोग एक मुक्त, खुले और समावेशी इंडियन ओशन रीजन की भारत की सोच को भी दर्शाता है।

भारतीय नौसेना के लिए इस तरह की ट्रेनिंग डिप्लॉयमेंट नई नहीं है, लेकिन हर बार इसका स्वरूप और दायरा और अधिक व्यापक होता जा रहा है। ऑफिसर ट्रनीज के लिए यह यात्रा समुद्र में लंबे समय तक ऑपरेशन, बदलते मौसम, अंतरराष्ट्रीय नियमों और विदेशी नौसेनाओं के साथ कॉर्डिनेशन जैसे पहलुओं को समझने का अवसर देती है।