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1971 India-pakistan War: 1971 भारत-पाक युद्ध के ऐतिहासिक समझौते के गवाह वीर विंग कमांडर महा बिर ओझा का निधन, भारतीय सेना की जीत के थे साक्षी

1971 India-Pakistan War- Heroic Wing Commander Maha Bir Ojha, Witness to Historic Surrender Agreement, Passes Away

1971 India-Pakistan War: भारत के गौरवमयी सैन्य इतिहास में एक और धरोहर सदा के लिए शांत हो गई है। 1971 के भारत-पाक युद्ध के वीर योद्धा और पाकिस्तान के आत्मसमर्पण दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर करने के गवाह, विंग कमांडर महा बिर ओझा का 11 नवंबर 2024 को 89 वर्ष की आयु में निधन हो गया।

1971 India-Pakistan War- Heroic Wing Commander Maha Bir Ojha, Witness to Historic Surrender Agreement, Passes Away

वह उस ऐतिहासिक दिन के प्रत्यक्षदर्शी थे जब पाकिस्तान ने भारतीय सेना के समक्ष आत्मसमर्पण किया था, और यह उनके जीवन का एक अविस्मरणीय क्षण था। अपने योगदान और वीरता के लिए देश ने उन्हें हमेशा सम्मान दिया।

उनका अंतिम संस्कार छत्तीसगढ़ के रायपुर में HQ छत्तीसगढ़ और उड़ीसा सब-एरिया द्वारा आयोजित एक भावुक कार्यक्रम में किया गया, जहां उनके योगदान और वीरता को याद करते हुए सभी ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

भारतीय सेना ने इस अवसर पर शोक संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और कहा, “हम एक नायक को अंतिम विदाई दे रहे हैं, और हम उनके उत्साह और देश के प्रति समर्पण को आगे बढ़ाएंगे।”

विंग कमांडर ओझा का निधन देश के लिए एक बड़ी क्षति है, लेकिन उनकी वीरता, त्याग और राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा भारतीय सेना और जनमानस में सदा जीवित रहेगी। उनके अद्वितीय साहस और समर्पण ने न केवल युद्ध के मैदान में, बल्कि भारत के हर नागरिक के दिल में अपनी जगह बनाई है।

विंग कमांडर महा बिर ओझा, भारतीय वायु सेना के एक वीर और प्रेरणास्त्रोत अधिकारी थे, जिनका जीवन देश के प्रति समर्पण और वीरता की मिसाल था। 1971 के भारत-पाक युद्ध में उनकी भूमिका अद्वितीय थी, और वह इस युद्ध के एक महत्वपूर्ण क्षण के गवाह बने, जब पाकिस्तान ने भारतीय सेना के समक्ष आत्मसमर्पण किया था।

1971 India-Pakistan War- Heroic Wing Commander Maha Bir Ojha, Witness to Historic Surrender Agreement, Passes Away

भारत-पाक युद्ध 1971 और Instrument of Surrender पर हस्ताक्षर

विंग कमांडर ओझा को युद्ध के दौरान पाकिस्तान द्वारा आत्मसमर्पण दस्तावेज़ (Instrument of Surrender) पर हस्ताक्षर करते हुए देखा गया। यह दस्तावेज़ 16 दिसंबर 1971 को ढाका में हस्ताक्षरित हुआ था, जो भारतीय सेना और मुक्ति वाहिनी द्वारा पाकिस्तान को हराने के बाद बंगाल की मुक्ति का प्रतीक बना। उस ऐतिहासिक दिन की गवाहता ने महा बिर ओझा को एक महत्वपूर्ण स्थान दिलाया, क्योंकि उन्होंने युद्ध के अंतिम पल देखे और भारतीय सेना की जीत के साक्षी बने।

LCA Tejas MK1: तेजस फाइटर जेट को इंजन सप्लाई में हो रही देरी को देखते हुए HAL चलाएगा ‘जुगाड़’ से काम, बनाया ये खास प्लान

HAL Tejas Mk1A Engine Delivery: HAL receives fourth GE-F404-IN20 engine, moves closer to IAF handover
File Photo

LCA Tejas MK1: भारत के स्वदेशी हल्के फाइटर एयरक्राफट एलसीए तेजस को अमेरिकी कंपनी जीई की तरफ से इंजन सप्लाई में हो रही देरी को देखते हुए इसे बनाने वाली कंपनी हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड ने बड़ा फैसला किया है। हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने अपने तेजस Mk1A फाइटर एयरक्राफ्ट के उत्पादन में GE F-404 इंजन की आपूर्ति में और देरी को देखते हुए खास इमरजेंसी प्लान बनाया है। पहले इस इंजन की डिलीवरी अप्रैल 2024 से शुरू होनी थी, लेकिन अब इसकी आपूर्ति में और देरी के कारण HAL को एक आपातकालीन योजना लागू करनी पड़ी है, जिसके तहत तेजस Mk1A के शुरुआती प्रोडक्शन मॉडल के लिए Category B F-404 इंजन का उपयोग किया जाएगा।

LCA Tejas Mk1A Project- HAL Adopts Contingency Plan Amid Engine Delays to Ensure Timely Production
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तेजस Mk1A भारतीय वायु सेना (IAF) के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, जिसमें एडवांस एवियोनिक्स और रडार सिस्टम शामिल हैं, जो इसकी फ्लोट क्षमता को और बढ़ाते हैं। हालांकि, इन इंजन की आपूर्ति में हो रही देरी से IAF के भीतर इसकी ऑपरेशनल रेडीनेस को लेकर चिंता बढ़ गई है।

हालांकि, प्रोडक्शन को बनाए रखने के लिए HAL ने Category B इंजन का सिलेक्शन किया है, जो प्री डिलीवरी फ्लाइट टेस्ट और गुणवत्ता जांच के लिए काफी हैं। यह इंजन परीक्षणों के दौरान विमान को उड़ान योग्य बनाए रखेंगे, जब तक कि GE F-404 इंजन नहीं मिल जाते।

HAL के एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, “हमारा उद्देश्य उत्पादन या रेडीनेस में कोई कमी नहीं होने देना है। Category B इंजन का उपयोग हमें आवश्यक उड़ान परीक्षण करने की अनुमति देता है और हम अपने उत्पादन लक्ष्यों को पूरा कर सकते हैं। जैसे ही GE इंजन उपलब्ध होंगे, हम उन्हें विमान में पूरी तरह से समाहित कर लेंगे।”

इंजन की आपूर्ति में देरी को आपूर्ति श्रृंखला में हो रही अड़चनों के साथ जोड़ा जा रहा है। हालांकि, HAL का यह रणनीतिक निर्णय इसके उत्पादन शेड्यूल को बनाए रखने और यह सुनिश्चित करने के लिए है कि तेजस Mk1A IAF को समय पर सौंपा जा सके।

एक बार GE F-404 इंजन उपलब्ध हो जाने के बाद, HAL IAF के साथ मिलकर 2-3 प्री-डिलीवरी फलाइट टेस्ट करेगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि विमान सभी प्रदर्शन मानकों को पूरा करता है।

एचएएल के इस कदम तेजस Mk1A के रोलआउट में हो रहे वर्तमान बाधाओं को हल करने के लिए एक व्यावहारिक समाधान के रूप में देखा जा रहा है, ताकि इस विमान की समय पर डिलीवरी हो सके। यह परियोजना भारत की वायु सेना को स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकियों के साथ आधुनिक बनाने के प्रयासों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

Indian Army: लद्दाख की कड़ी सर्दी में भारतीय सेना की चुनौती; LAC पर हर परिस्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार

Indian Army: Facing Tough Winter in Ladakh, Fully Prepared to Tackle Challenges Along LAC

Indian Army: लद्दाख की ऊँचाई पर स्थित, जो दुनिया के सबसे कठिन सैन्य तैनाती क्षेत्रों में से एक है, भारतीय सेना एक और चुनौतीपूर्ण सर्दी का सामना करने के लिए तैयार हो रही है। यह क्षेत्र समुद्रतल से 17,800 फीट की ऊँचाई पर स्थित है, और चीन के साथ गश्ती समझौते के बावजूद यहाँ स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।

Indian Army: Facing Tough Winter in Ladakh, Fully Prepared to Tackle Challenges Along LAC

हाल ही में, भारतीय सेना के लेह स्थित चौदहवीं कोर द्वारा साझा किए गए एक वीडियो में, सैनिकों को 1,200 किलोग्राम वजनी एक उन्नत वायु रक्षा तोप को ऊँची चोटी तक ले जाते हुए देखा गया। यह वीडियो भारतीय सेना की तैयारियों को दर्शाता है, जो किसी भी आकस्मिक स्थिति का सामना करने के लिए पूरी तरह से सुसज्जित है।

यह भारतीय सेना की लद्दाख में पाँचवीं सर्दी तैनाती है, जो LAC की सुरक्षा में उसके रणनीतिक ध्यान को और मजबूत करती है।

यह क्षेत्र कठिन और खतरनाक भौगोलिक स्थितियों से भरा हुआ है, और यहाँ की सर्दी -40 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकती है। ऐसे में सैनिकों को न केवल शारीरिक रूप से बल्कि मानसिक रूप से भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

भारतीय सेना ने अपने सैनिकों को अत्यधिक ऊँचाई वाले युद्ध के लिए विशेष उपकरण दिए हैं, जिसमें इंसुलेटेड जैकेट, जूते और स्लीपिंग बैग शामिल हैं। इसके अलावा, सेना ने बर्फ पर चलने वाले वाहन जैसे स्नोमोबाइल्स, स्नो ट्रैक्टर और मोबाइल शेल्टर भी तैनात किए हैं ताकि सैनिक इन कठोर परिस्थितियों में सुरक्षित रहें।

इन उपकरणों के अलावा, सैनिकों को ऊँचाई पर युद्ध की विशेष ट्रेनिंग दी जाती है। इसमें उन्नत युद्धकला, पहाड़ी क्षेत्रों में त्वरित गति से मूवमेंट और -40 डिग्री सेल्सियस जैसे तापमान में जीवित रहने की ट्रेनिंग शामिल होती है।

आधुनिक हथियार और तकनीक भी भारतीय सेना की रक्षा रणनीति का अहम हिस्सा है। हाल की फुटेज में सैनिकों को एंटी-एयरक्राफ्ट गन के साथ दिखाया गया है, जो भारतीय सेना की हवाई हमलों, खासकर ड्रोन हमलों के खिलाफ तत्परता को दर्शाता है।

इसके साथ ही, सेना ड्रोन, थर्मल इमेजिंग सिस्टम और सैटेलाइट इमेजरी जैसी निगरानी उपकरणों का उपयोग करती है ताकि LAC पर वास्तविक समय में खुफिया जानकारी हासिल की जा सके।

भले ही यह क्षेत्र कठिन हो, और यहाँ की सर्दी अत्यंत चुनौतीपूर्ण हो, भारतीय सेना की उपस्थिति लद्दाख में भारत के रणनीतिक हितों की रक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है।

लद्दाख के बर्फ से ढके पहाड़ और चट्टानी चूने न केवल पारंपरिक युद्ध के लिए चुनौतीपूर्ण हैं, बल्कि यह चीन के साथ सीमा पर महत्वपूर्ण स्थानों को नियंत्रित करने के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण हैं।

हालांकि, पूर्वी लद्दाख के कुछ क्षेत्रों में सेनाओं के डिसएंगेजमेंट (वापसी) की प्रक्रिया में प्रगति हुई है, फिर भी कुछ क्षेत्र संवेदनशील बने हुए हैं, जहाँ सैनिकों की तैनाती अभी भी महत्वपूर्ण है।

Army Help Line 155306: वेटरन और सैनिकों के लिए भारतीय सेना ने शुरू की नई इमरजेंसी हेल्पलाइन सुविधा; इस्तेमाल करने से पहले पढ़ लें ये शर्तें

Army Help Line 1536: Indian Army Launches New Emergency Helpline for Veterans and Soldiers – Important Terms to Know Before Use
Army Help Line 1536: Indian Army Launches New Emergency Helpline for Veterans and Soldiers – Important Terms to Know Before Use

Army Help Line 155306: भारतीय सेना ने अपने जवानों और वेटरन (पूर्व सैनिकों) के लिए एक नई और महत्वपूर्ण हेल्पलाइन सेवा शुरू की है। यह कदम उन सैनिकों और वेटरन के लिए राहत का कारण बनेगा जो किसी आपात स्थिति में सहायता के लिए दर-दर की ठोकरें खाते हैं। यह हेल्पलाइन नंबर, 155306, एक “न्यूमेनिक सर्विस” की तरह काम करेगा, जो पूरी तरह से इमरजेंसी के लिए डिज़ाइन किया गया है।

Army Help Line 1536: Indian Army Launches New Emergency Helpline for Veterans and Soldiers – Important Terms to Know Before Use
(File Photo)

क्या है यह हेल्पलाइन?

यह हेल्पलाइन सेवा किसी भी समय और किसी भी जगह से उपयोग की जा सकती है। सेना की यह हेल्पलाइन सेवा 155306- अब 24/7 सक्रिय होगी और इसमें कॉलर की पहचान के लिए कॉल रिकॉर्डिंग सुविधा भी होगी। कॉल करने पर, कॉलर से उसका नाम, स्थान और जरूरत की जानकारी ली जाएगी, ताकि सही सहायता भेजी जा सके। यह सेवा सिर्फ सैन्य कर्मियों और वेटरन के लिए है, जो किसी भी प्रकार की आपात स्थिति में फंसे हुए हैं, चाहे वह शारीरिक हमला हो, प्राकृतिक आपदा हो या अन्य कोई आपातकालीन स्थिति हो।

साथ ही, इस हेल्पलाइन को ऐसे महत्वपूर्ण संस्थानों से जोड़ा जाएगा जैसे कि स्थानीय पुलिस स्टेशन, सीएमपी यूनिट, और अन्य सरकारी विभागों। इस सुविधा के माध्यम से कॉलर को उनके पास के सैनिकों और पुलिस से जोड़ा जाएगा, जो तुरंत स्थिति की गंभीरता का आकलन करेंगे और मौके पर पहुंचने के लिए तैयार होंगे।

Army Help Line 1536: Indian Army Launches New Emergency Helpline for Veterans and Soldiers – Important Terms to Know Before Use

कैसे काम करेगा हेल्पलाइन नंबर?

जब कोई सैनिक या वेटरन इस नंबर पर कॉल करेगा, तो उस कॉल का जवाब मिलिट्री पुलिस द्वारा दिया जाएगा। इसके बाद, संबंधित यूनिट को सूचना भेजी जाएगी ताकि तुरंत मदद पहुंचाई जा सके। खास बात यह है कि यह हेल्पलाइन हर इलाके में फैली हुई आर्मी यूनिट्स और सिविल नेटवर्क से जुड़ी होगी, जिससे कि सहायता देने में कोई देरी न हो।

क्या नहीं करना होगा?

यह हेल्पलाइन केवल इमरजेंसी मामलों के लिए है, इसलिए इसके माध्यम से व्यक्तिगत मामलों या छोटे विवादों की शिकायत नहीं की जा सकती। जैसे कि भूमि विवाद, पारिवारिक समस्याएं, या किसी सामान्य सूचना का आदान-प्रदान इस हेल्पलाइन का हिस्सा नहीं होगा। इसका उद्देश्य केवल सेना के जवानों और उनके परिवारों को मुसीबत के समय त्वरित सहायता प्रदान करना है।

कैसे पहुंचेगी मदद?

यदि किसी सैनिक या वेटरन को आपात स्थिति में मदद की आवश्यकता होती है, तो वह सीधे इस हेल्पलाइन पर कॉल करेगा। इसके बाद, संबंधित अधिकारी और यूनिट्स को सूचित किया जाएगा और वे तुरंत सक्रिय होकर संबंधित स्थान पर मदद भेजेंगे। इस प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता और ट्रैकिंग होगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सहायता सही समय पर पहुंच रही है।

सैन्य और समाज का जुड़ाव बढ़ेगा

इस हेल्पलाइन सेवा से यह भी सुनिश्चित होगा कि हमारे सैनिकों और वेटरन के बीच एक मजबूत नेटवर्क बने, जो उन्हें हर संकट में एक दूसरे का सहारा देने के लिए तैयार रहे। यह पहल सेना के भीतर एक मजबूत समुदाय और विश्वास का निर्माण करेगी, जो देश के प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा के लिए तत्पर रहता है।

भारतीय सेना द्वारा शुरू की गई यह हेल्पलाइन सेवा वेटरन और सैनिकों के लिए एक अमूल्य सुविधा साबित होगी। इससे न सिर्फ सैन्य परिवारों को सुरक्षा का अहसास होगा, बल्कि उनके लिए एक मजबूत समर्थन प्रणाली भी बनेगी, जो कभी भी और कहीं भी उनकी मदद के लिए तैयार रहेगी। इस पहल से सेना और समाज के बीच का संबंध और मजबूत होगा, और सैनिकों के प्रति समाज का सम्मान और स्नेह और भी बढ़ेगा।

आपात स्थिति में मदद पाने के लिए यह हेल्पलाइन नंबर – 155306 – अब आपके मोबाइल में सेव करना जरूरी है।

OROP: वन रैंक वन पेंशन को लेकर अब जवानों के ‘मन’ की बात सुनेगी सरकार; भेजा बुलावा, लेकिन ये है शर्त

Commutation of Pension: How the 15-year restoration period is under scrutiny, veterans seek reduction to 12 years
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OROP: देश के जवानों की कुर्बानी और सेवा का मान रखते हुए, सरकार अब सीधा संवाद स्थापित करने का प्रयास कर रही है। हाल ही में, रक्षा मंत्रालय द्वारा एक पत्र जारी किया गया है जिसमें केवल गैर-अधिकारी (एनसीओ) और जवानों से बातचीत करने की मंशा जाहिर की गई है। इस पत्र में स्पष्ट निर्देश हैं कि इस संवाद प्रक्रिया में कोई अधिकारी या जेसीओ (जूनियर कमीशंड ऑफिसर) शामिल नहीं होंगे। इस पहल के पीछे सरकार का उद्देश्य जवानों की ज़मीनी समस्याओं और अनुभवों को सीधे सुनना है, जो वन रैंक वन पेंशन (OROP) से लाभान्वित हुए हैं।

OROP: Government to Hear Soldiers' Concerns Directly, but with Conditions

वन रैंक वन पेंशन: लाभान्वित जवानों से संवाद का प्रयास

पत्र में इस बात पर जोर दिया गया है कि उन जवानों को शामिल किया जाए जिन्हें वन रैंक वन पेंशन (OROP) योजना का सबसे अधिक लाभ मिला है। रक्षा मंत्रालय को चाहिए कि एक हवलदार, एक नायक और तीन सिपाहियों के नाम भेजे जाएं, जिनकी पहचान ऐसे लाभार्थियों के रूप में की गई हो जिन्हें OROP से आर्थिक राहत मिली हो। यह एक दुर्लभ अवसर है जब जवानों के अनुभवों को सरकारी नीति निर्माण के एक हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।

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ओआरओपी (OROP) योजना के लाभ और समस्याएँ

OROP योजना ने जवानों के लिए निश्चित रूप से फायदेमंद कदम उठाए हैं, लेकिन यह भी सच है कि कुछ जवानों और अधिकारियों को इससे अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया। कई रैंक और ट्रेड के जवान, जिनमें सीनियर सिपाही, ऑनरेरी लेफ्टिनेंट और कैप्टन शामिल हैं, आज भी आर्थिक असमानताओं का सामना कर रहे हैं। इन मुद्दों पर पहले भी रक्षा मंत्री से कई बार संवाद हुए हैं, लेकिन अधिकतर समय जवानों को निराशा ही हाथ लगी है। सरकार द्वारा एक तरफ OROP के सबसे लाभान्वित लोगों को सामने लाने की कोशिश की जा रही है, वहीं दूसरी ओर उन जवानों के सवाल अब भी अनसुलझे हैं, जिन्हें OROP के तहत कम लाभ मिला या नुकसान हुआ।

OROP: Government to Hear Soldiers' Concerns Directly, but with Conditions

जवानों की मांग: सभी के लिए बराबरी का लाभ

जवानों के दिल में यह सवाल उठता है कि क्या सरकार जवानों के फायदे और नुकसान को बराबरी से देख रही है। क्या यह संवाद सिर्फ कुछ लाभान्वित जवानों की आवाज़ सुनने तक सीमित रहेगा, या उन सभी की पीड़ा को भी समझा जाएगा जिनकी आर्थिक स्थिति अब भी बेहतर नहीं हुई है? यह एक महत्वपूर्ण सवाल है जो जवानों की आकांक्षाओं और उनकी मेहनत को सीधे छूता है।

सरकार के कदम और जवानों की उम्मीदें

सरकार ने वन मैन ज्यूडिशल कमेटी का गठन तो किया, लेकिन उसकी रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया है। ऐसे में जवानों में यह उम्मीद है कि सरकार इस रिपोर्ट को सामने लाएगी और सिफारिशों को लागू करेगी ताकि सभी को बराबरी का हक मिले। ये जवान हर समय देश की सेवा में तत्पर रहते हैं और अब वे भी सरकार से समानता और न्याय की उम्मीद कर रहे हैं।

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यह पहल एक अच्छा कदम है, लेकिन यह तब ही सफल होगी जब सभी जवानों की आवाज़ को बराबर सम्मान मिलेगा। क्योंकि OROP (वन रैंक वन पेंशन) के हालिया संशोधन के तहत बहुत से पूर्व सैनिकों ने निराशा जताई है, क्योंकि उनकी पेंशन में मामूली या बिल्कुल भी वृद्धि नहीं हुई है। केंद्र सरकार ने जुलाई 2024 से OROP का तीसरा संस्करण (OROP-3) लागू किया और रक्षा मंत्रालय ने 4 सितंबर 2024 को इसकी संशोधित पेंशन दरों के साथ एक अधिसूचना जारी की थी।

कई पूर्व सैनिक, विशेषकर जेसीओ रैंक के नीचे के जवानों की पेंशन में मामूली बढ़ोतरी के कारण असंतोष व्यक्त कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, असम के ऑनरी कैप्टन लक्षी नाथ सैकिया ने बताया कि 33 साल की सेवा के बावजूद उनकी पेंशन में कोई वृद्धि नहीं हुई। इसी तरह, पूर्व सैनिक समित्तर सिंह ने बताया कि उनकी पेंशन केवल 1 रुपये बढ़ी और दो महीने का एरियर केवल 2 रुपये रहा, जिससे उनका परिवार अत्यधिक निराश हुआ।

OROP-Pension

 

नौसेना के रिटायर्ड जवान अखिल राय और वायुसेना से रिटायर्ड तोमर ने भी इस मुद्दे पर अपने विचार साझा किए। उनका मानना है कि ओआरओपी-3 संशोधन के दौरान MACP को ध्यान में नहीं रखा गया, जिससे एयर वेटरंस की पेंशन निचले स्तर पर संशोधित हुई। वहीं, वीर नारियों की फैमिली पेंशन में भी बढ़ोतरी न होने से परिवारजनों ने निराशा जताई है। त्रिपुरा की वीर नारी रंजना शर्मा के पुत्र ने इस पर सरकार से सवाल किए।

भूतपूर्व सैनिकों का मानना है कि OROP का यह नया संशोधन सरकार के पेंशन खर्च को कम करने की योजना का हिस्सा है। रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल गुरप्रकाश सिंह विर्क और अन्य सैनिकों का कहना है कि सरकार अग्निवीर योजना को लागू करके पेंशन खर्च बचाने की कोशिश कर रही है, जबकि इस कदम से सेना की ऑपरेशनल तैयारियों पर भी असर पड़ सकता है।

पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह और लेफ्टिनेंट जनरल एचएस पनाग जैसे वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने भी पेंशन और भर्ती के मसले पर अपने विचार व्यक्त किए हैं, जिससे यह मुद्दा और गहराई से सामने आया है।

Exercise GARUD SHAKTI 24: भारतीय सेना के विशेष बलों का दल इंडोनेशिया के लिए रवाना, ‘गरुड़ शक्ति’ संयुक्त अभ्यास में लेगा हिस्सा

Indian Army Special Forces Head to Indonesia for Joint Exercise 'Garud Shakti 24

Exercise GARUD SHAKTI 24: भारतीय सेना के विशेष बलों का एक दल, जिसमें 25 सैनिक शामिल हैं, इंडोनेशिया के जकार्ता के सिजांतुंग के लिए रवाना हो गया है। यहां भारतीय और इंडोनेशियाई सेनाओं के बीच 9वां संयुक्त विशेष बल अभ्यास ‘गरुड़ शक्ति 24’ (GARUD SHAKTI 24) आयोजित किया जा रहा है, जो 1 से 12 नवंबर 2024 तक चलेगा।

Indian Army Special Forces Head to Indonesia for Joint Exercise 'Garud Shakti 24

इस सैन्य अभ्यास में भारतीय दल का प्रतिनिधित्व पैराशूट रेजिमेंट (स्पेशल फोर्सेज) के जवान कर रहे हैं, जबकि इंडोनेशियाई सेना की ओर से 40 सैनिकों का दल कोपासस (Kopassus इंडोनेशियाई विशेष बल) का हिस्सा बनेगा। दोनों देशों के विशेष बलों के बीच आपसी समझ, सहयोग और सामंजस्य को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस अभ्यास का आयोजन किया जा रहा है।

सैन्य सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को मिलेगा बढ़ावा

अभ्यास ‘गरुड़ शक्ति 24’ का मुख्य उद्देश्य दोनों सेनाओं के विशेष बलों को एक-दूसरे की संचालन प्रक्रियाओं से परिचित कराना और रणनीतिक रूप से उनकी क्षमताओं को और मजबूत करना है। इस अभ्यास के तहत विशेष सैन्य अभियानों की योजना और उनके क्रियान्वयन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। दोनों देशों के सैनिक जंगल क्षेत्र में विशेष अभियानों, आतंकवादी शिविरों पर हमला करने, और विभिन्न सामरिक युद्धक कौशलों का अभ्यास करेंगे।

Indian Army Special Forces Head to Indonesia for Joint Exercise 'Garud Shakti 24

तकनीकी ज्ञान और संस्कृति का आदान-प्रदान

यह अभ्यास सिर्फ सैन्य रणनीतियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें हथियारों, उपकरणों, नवाचारों, रणनीतियों और प्रक्रियाओं पर जानकारी का आदान-प्रदान भी होगा। इसके अलावा, दोनों देशों के सैनिक एक-दूसरे की जीवनशैली और सांस्कृतिक पहलुओं को भी समझने का प्रयास करेंगे, जिससे न सिर्फ सैन्य सहयोग बढ़ेगा, बल्कि दोनों देशों के बीच मित्रता भी गहरी होगी।

संयुक्त सुरक्षा लक्ष्यों की ओर एक कदम

इस संयुक्त सैन्य अभ्यास से दोनों देशों के सैनिकों को एक-दूसरे की बेहतरीन कार्य प्रणालियों को समझने का अवसर मिलेगा। यह भारत और इंडोनेशिया के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के साथ-साथ साझा सुरक्षा उद्देश्यों की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। दोनों देशों के लिए यह मंच है जहां वे न केवल अपने सैन्य कौशल का विकास करेंगे, बल्कि आपसी विश्वास और सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में भी सहायक साबित होंगे।

Indian Navy Day 2024: भारतीय नौसेना का ऑपरेशनल डेमोंस्ट्रेशन 2024; नौसेना दिवस पर देखने को मिलेगी समुद्री शक्ति की बेहतरीन झलक

Indian Navy Day 2024- Indian Navy Operational Demonstration 2024, Showcasing Maritime Strength on Navy Day at Puri, Odisha

Indian Navy Day 2024: भारत की समुद्री शक्ति को प्रदर्शित करने के लिए भारतीय नौसेना 4 दिसंबर 2024 को ओडिशा के पुरी स्थित ब्लू फ्लैग बीच पर अपना प्रतिष्ठित ‘ऑपरेशनल डेमोंस्ट्रेशन’ (ऑप डेमो) आयोजित करने जा रही है। इस कार्यक्रम में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगी। यह इवेंट भारतीय नौसेना की विविध कार्यक्षमताओं को प्रदर्शित करेगा, नागरिकों में समुद्री जागरूकता को बढ़ावा देगा और भारत की समृद्ध समुद्री धरोहर को सम्मानित करेगा।

Indian Navy Day 2024- Indian Navy Operational Demonstration 2024, Showcasing Maritime Strength on Navy Day at Puri, Odisha
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2024 का ऑप डेमो ओडिशा के ऐतिहासिक और साफ-सुथरे ब्लू फ्लैग बीच के पार्श्वभूमि में आयोजित होगा, जो भारतीय नौसेना और ओडिशा राज्य की समुद्री धरोहर के बीच के जुड़ाव को दर्शाता है। इस आयोजन के जरिए भारतीय नौसेना अपनी शक्ति, कौशल और समर्पण को उजागर करेगी।

भारतीय नौसेना ओडिशा राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर इस आयोजन को सफलतापूर्वक आयोजित करने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां कर रही है। कार्यक्रम के दौरान स्थानीय दर्शकों और पर्यटकों के लिए बैठने की व्यवस्था की जाएगी, ताकि वे इस लाइव डेमोंस्ट्रेशन का अनुभव कर सकें। साथ ही, इस कार्यक्रम का प्रसारण राष्ट्रीय टेलीविजन चैनलों पर और भारतीय नौसेना के यूट्यूब चैनल के माध्यम से भी किया जाएगा, ताकि यह कार्यक्रम व्यापक दर्शकों तक पहुँच सके।

Indian Navy Day 2024- Indian Navy Operational Demonstration 2024, Showcasing Maritime Strength on Navy Day at Puri, Odisha
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भारतीय नौसेना का ऑप डेमो न केवल भारत के समुद्री सामर्थ्य को प्रदर्शित करेगा, बल्कि यह समुद्री सुरक्षा और रक्षा के महत्वपूर्ण पहलुओं को भी उजागर करेगा, जो भारतीय समृद्धि और आत्मनिर्भरता की दिशा में अहम योगदान करते हैं। यह आयोजन भारत के समुद्र तटों के समृद्ध इतिहास और भविष्य की सुरक्षा संरचनाओं को भी जन-जन तक पहुँचाने का एक सशक्त माध्यम बनेगा।

नौसेना दिवस के इस विशेष मौके पर, भारतीय नौसेना की शक्ति और समर्पण को देखना निश्चित रूप से भारतवासियों के लिए गर्व का क्षण होगा।

Defence: लद्दाख में भारतीय सेना बनाना चाहती है गोला-बारूद के लिए स्टोरेज फैसिलिटी, पर्यावरण मंजूरी का है इंतजार

Defence Forces Await Green Clearance for Strategic Ammo Storage in Ladakh

Defence: भारतीय रक्षा मंत्रालय ने लद्दाख में अतिरिक्त गोला-बारूद के स्टोरेज के निर्माण के लिए पर्यावरणीय मंजूरी की मांग की है। सेना के इस कदम से सीमावर्ती इलाकों में तैनाती के दौरान जरूरी युद्ध सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। इस योजना के तहत मुख्य रूप से पूर्वी लद्दाख के फॉर्वर्ड इलाकों में स्टोरेज कैपेसिटी बढ़ाने पर जोर दिया गया है, जो चीन सीमा के नजदीक है। ये वही क्षेत्र हैं, जहां 2020 में गलवां में हुई हिंसा के बाद भारत और चीनी सेना के बीच गतिरोध शुरू हुआ था।

इसके साथ ही सेना ने पैंगोंग त्सो झील के किनारे स्थित एक गांव लुकुंग और डुर्बुक इलाके में उपस्थिति मजबूत करने के प्रस्ताव भी पेश किए हैं। इन प्रस्तावों को इस साल अप्रैल से जुलाई के बीच रक्षा मंत्रालय ने पर्यावरण मंत्रालय के पास भेजा था और ये अभी तक इन्हें मंजूरी का इंतजार है। सेना का कहना है कि लद्दाख में प्रारंभिक चरण में युद्ध के लिए आगे के क्षेत्रों में गोला-बारूद उपलब्धता सुनिश्चित करना आवश्यक है।

Defence Forces Await Green Clearance for Strategic Ammo Storage in Ladakh

प्रस्तावों में हानले और फोटी ला के निकट सामरिक गोला-बारूद भंडारण सुविधा (Formation Ammunition Storage Facility) बनाने के साथ ही अन्य स्थानों पर अंडरग्राउंड कैवर्न बनाने का प्रावधान शामिल है। ये सुविधाएं उन महत्वपूर्ण स्थलों में बनाई जानी हैं, जहां सेना पहले से ही तैनात है। इसमें हानले, फोटी ला, पुंगुक और कोयूल जैसे क्षेत्रों में सैन्य बलों की स्थायी उपस्थिति बढ़ाने का भी प्रस्ताव है। फोटी ला, जो दुनिया की सबसे ऊंची मोटरेबल पास में से एक है, हानले से केवल 30 किमी की दूरी पर स्थित है और यह डेमचोक तक जाने का मार्ग भी है।

वर्तमान में, गोला-बारूद का अधिकांश भंडारण अस्थायी ढंग से किया जा रहा है और यह हनले से लगभग 250 किमी तथा फोटी ला से 300 किमी दूर है। ऐसे में सैन्य सामग्री की आपूर्ति में रुकावटें आ रही हैं, जो ऑपरेशनल तैयारियों को प्रभावित कर रही हैं। उचित भंडारण सुविधा बनने से इस समस्या का समाधान होगा, जिससे जरूरत पड़ने पर यूनिट्स को तेजी से तैनात किया जा सकेगा।

इसके अलावा, अंडरग्राउंड कैवर्न बनाने का प्रस्ताव भी ऑपरेशनल तैयारियों को मजबूती देने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, विशेष रूप से पूर्वी लद्दाख और वास्तविक नियंत्रण रेखा के आस-पास के इलाकों में। इन कैवर्न सुविधाओं को क्षेत्र में सैन्य क्षमताओं को बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भारतीय सेना के पास पहले से ही कई अस्थायी सुविधाएं हैं, लेकिन 2020 में चीनी बलों के साथ हुई झड़पों के बाद से इन सुविधाओं को स्थायी रूप देने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। चांगथांग वन्यजीव अभयारण्य के तहत आने वाले इन क्षेत्रों में नई गोला-बारूद भंडारण सुविधाओं के निर्माण के लिए पर्यावरणीय मंजूरी की आवश्यकता है।

इस प्रकार, सेना की इस पहल का उद्देश्य न केवल भंडारण की सुविधा को पुख्ता करना है, बल्कि युद्ध की स्थिति में आवश्यक सामग्री की तेज़ आपूर्ति को भी सुनिश्चित करना है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से एक महत्वपूर्ण कदम है।

Pinaka MBRL: भारत के पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम खरीदने का इच्छुक है फ्रांस! रक्षा निर्यात में होगा जबरदस्त इजाफा

Pinaka MBRL- Pinaka multi-barrel rocket launcher system

Pinaka MBRL: भारतीय रक्षा क्षेत्र में ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत एक बड़ी सफलता की ओर इशारा करते हुए, फ्रांसीसी सेना के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा है कि वे भारतीय पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम की समीक्षा कर रहे हैं। फ्रांस के एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, ब्रिगेडियर जनरल स्टीफन रिचू ने कहा, “हम पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम का मूल्यांकन कर रहे हैं क्योंकि हमें ऐसे सिस्टम की जरूरत है। भारत उन अग्रणी देशों में से एक है जो ऐसे हथियारों का निर्माण कर रहे हैं।”

Pinaka MBRL- Pinaka multi-barrel rocket launcher system

जनरल रिचू इस समय भारत दौरे पर हैं, जहां वे दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से बातचीत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत और फ्रांस का संबंध केवल एक व्यापार साझेदारी से कहीं अधिक है। “यह केवल एक व्यापारिक साझेदारी नहीं है, बल्कि एक ऐसा सहयोग है जो दोनों देशों के साझा भविष्य का हिस्सा है,” उन्होंने कहा।

पिनाका MBRL सिस्टम, जिसे भारत के रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित किया गया है, का उत्पादन सोलर इंडस्ट्रीज, लार्सन एंड टुब्रो, टाटा और ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड जैसी एजेंसियों द्वारा किया जा रहा है। यह रॉकेट लॉन्चर सिस्टम 75 किलोमीटर से अधिक की दूरी तक अपने लक्ष्यों पर सटीक हमला कर सकता है और इसके विभिन्न संस्करण भी मौजूद हैं। पिनाका की पहले ही आर्मेनिया जैसे देशों में निर्यात के रूप में सफलता मिल चुकी है, और अब अन्य कई देश भी इस प्रणाली में रुचि दिखा रहे हैं।

इस साल की शुरुआत में, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान की एक उच्च-स्तरीय फ्रांसीसी यात्रा के दौरान, फ्रांसीसी अधिकारियों के साथ पिनाका प्रणाली पर भी चर्चा की गई थी।

भारत ने घरेलू रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए निर्यात बाजारों में जोर दिया है और नरेंद्र मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान 2014 से लेकर अब तक रक्षा निर्यात को तीन गुना बढ़ाने में सफलता प्राप्त की है। फ्रांसीसी अधिकारी ने यह भी बताया कि दोनों देशों के बीच उच्च-स्तरीय तकनीकी साझेदारी है, जिसमें स्कॉर्पीन जैसी पनडुब्बियों का संयुक्त निर्माण भी शामिल है।

फ्रांसीसी ब्रिगेडियर जनरल ने कहा कि दोनों देशों ने शक्ति नामक सैन्य अभ्यास श्रृंखला को आयोजित किया है और एक-दूसरे के राष्ट्रीय दिवस समारोहों में भी भागीदारी की है। इस साझेदारी के प्रतीक के रूप में, अगले शक्ति युद्धाभ्यास के 25वें संस्करण में फ्रांस भारतीय सेना की एक मजबूत टुकड़ी को अपने देश में आमंत्रित करेगा।

भारत के रक्षा उपकरणों का दूसरा सबसे बड़ा आयातक फ्रांस है, जो अमेरिका के बाद आता है। कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का निर्यात फ्रांस को किया जा रहा है, जो दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग और विश्वास को दर्शाता है।

भारत और फ्रांस के बीच यह बढ़ता सहयोग न केवल दोनों देशों की सुरक्षा के लिए बल्कि वैश्विक स्तर पर स्थिरता और शांति के लिए भी महत्वपूर्ण है। पिनाका सिस्टम का फ्रांस द्वारा मूल्यांकन, भारत की ‘मेक इन इंडिया’ पहल की सफलता की दिशा में एक और कदम साबित हो सकता है।

क्या हैं पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर (Pinaka MBRL) की खूबियां

  1. लंबी मारक क्षमता: पिनाका रॉकेट लॉन्चर 75 किलोमीटर तक की दूरी पर लक्ष्य को सटीकता से भेद सकता है। इसके विभिन्न संस्करणों के साथ, इसकी क्षमता को और भी बढ़ाया जा रहा है।
  2. तेज़ फायरिंग स्पीड: पिनाका प्रणाली में 12 रॉकेट के लांचर होते हैं जो केवल 44 सेकंड में एक साथ दाग सकते हैं। यह इसे युद्ध के मैदान में बेहद कारगर बनाता है, क्योंकि यह कम समय में अधिक लक्ष्य को नष्ट कर सकता है।
  3. सटीक निशाना: पिनाका में आधुनिक गाइडेंस और नेविगेशन प्रणाली लगी है, जिससे यह अपने लक्ष्य को बेहद सटीकता से हिट कर सकता है। यह प्रणाली युद्ध के दौरान किसी भी प्रकार के चुनौतीपूर्ण वातावरण में भी सही परिणाम देती है।
  4. मोबिलिटी और फ्लेक्सिबिलिटी: पिनाका एक स्वदेशी मोबाइल प्रणाली है जिसे तेज़ी से तैनात किया जा सकता है। इसकी मोबाइल यूनिट्स को आसानी से स्थानांतरित किया जा सकता है, जिससे इसे किसी भी ऑपरेशन के हिसाब से उपयोग किया जा सकता है।
  5. स्वदेशी निर्माण: पिनाका पूरी तरह से ‘मेक इन इंडिया’ पहल का हिस्सा है, जो भारत के रक्षा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देता है। इसे DRDO ने लार्सन एंड टुब्रो (L&T), टाटा और ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड जैसे भारतीय कंपनियों के सहयोग से विकसित किया है।
  6. किफायती और प्रभावी: पिनाका प्रणाली न केवल प्रभावी है, बल्कि इसके निर्माण और रखरखाव की लागत भी कम है। इसे भारत के पहाड़ी, रेगिस्तानी और अन्य कठिन क्षेत्रों में इस्तेमाल के लिए डिजाइन किया गया है।
  7. ऑपरेशनल वेरिएंट्स: पिनाका के कई ऑपरेशनल वेरिएंट्स उपलब्ध हैं, जिसमें Mk-I, Mk-II और Mk-III जैसे उन्नत संस्करण शामिल हैं। Mk-II और Mk-III में और अधिक मारक दूरी और उन्नत फीचर्स जोड़े गए हैं।
  8. सफल निर्यात: पिनाका का उपयोग न केवल भारतीय सेना कर रही है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी लोकप्रिय हो रहा है। आर्मेनिया ने भी इसे ऑर्डर किया है, और अन्य कई देश इस प्रणाली में रुचि दिखा रहे हैं।

 

Pantsir air defence missile-gun system: भारत आ रहा है यह खास एयर डिफेंस सिस्टम, भारत डायनामिक्स लिमिटेड और रूस की Rosoboronexport के बीच हुआ समझौता

India to Welcome Advanced Pantsir Air Defence Missile-Gun System: MoU Signed Between Bharat Dynamics Limited and Russia's Rosoboronexport

Pantsir air defence missile-gun system: गोवा। भारत की रक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भारत डायनामिक्स लिमिटेड (BDL) ने रूस की सरकारी कंपनी रोसोबोरोनएक्सपोर्ट (ROE) के साथ पैंट्सिर वेरिएंट्स और एयर डिफेंस मिसाइल-गन सिस्टम के क्षेत्र में सहयोग के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के तहत दोनों देशों के बीच सामरिक रक्षा सहयोग को और मजबूत करने का लक्ष्य है।

यह MoU गोवा में आयोजित पांचवें IRIGC उपसमूह की बैठक के दौरान BDL के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर, कमोडोर ए. माधवराव (सेवानिवृत्त) और रूस के डिप्टी डायरेक्टर जनरल (नेवल डिपार्टमेंट), कोवालेन्को जर्मन के बीच संपन्न हुआ। यह साझेदारी भारतीय रक्षा उद्योग को नई ऊँचाइयों पर ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

Bharat Dynamics Limited and Rosoboronexport(ROE),Russia entered into MoU for cooperation on Pantsir variants,air defence missile-gun system
Bharat Dynamics Limited and Rosoboronexport(ROE),Russia entered into MoU for cooperation on Pantsir variants,air defence missile-gun system.

 

भारत-रूस रक्षा सहयोग का एक नया अध्याय

इस MoU पर हस्ताक्षर के बाद, कमोडोर माधवराव ने कहा, “यह साझेदारी भारत और रूस के बीच रक्षा क्षेत्र में ऐतिहासिक संबंधों को एक नई दिशा देने का कार्य करेगी। पैंट्सिर एयर डिफेंस सिस्टम का विकास दोनों देशों के साझा रक्षा उद्देश्यों की पूर्ति में महत्वपूर्ण साबित होगा।”

रोसोबोरोनएक्सपोर्ट के उपमहानिदेशक कोवालेन्को जर्मन ने भी इस समझौते पर खुशी जताते हुए कहा कि “भारत के साथ यह सहयोग हमारी रक्षा साझेदारी को और गहरा बनाएगा और हमें भारतीय रक्षा जरूरतों को बेहतर ढंग से समझने और पूरा करने में मदद करेगा।”

India to Welcome Advanced Pantsir Air Defence Missile-Gun System: MoU Signed Between Bharat Dynamics Limited and Russia's Rosoboronexport

क्या पैंट्सिर एयर डिफेंस सिस्टम

पैंटसिर एक अत्याधुनिक मिसाइल और गन प्रणाली है जो हवा से होने वाले खतरों को रोकने के लिए बनाई गई है। यह प्रणाली ड्रोन, हेलिकॉप्टर, लड़ाकू विमान और क्रूज मिसाइल जैसे खतरों का मुकाबला करने में सक्षम है। पैंटसिर की विशेषता है कि इसमें मिसाइल और गन दोनों शामिल हैं, जो इसे बेहद प्रभावी बनाती हैं।

भारत के लिए क्यों है महत्वपूर्ण?

देश की सीमा सुरक्षा को मजबूत करने और भविष्य के खतरों से निपटने के लिए पैंटसिर जैसे एयर डिफेंस सिस्टम का होना जरूरी है। यह करार भारत को न सिर्फ अपने रक्षा तंत्र को मजबूती देने में मदद करेगा बल्कि देश की स्वदेशी उत्पादन क्षमता को भी बढ़ावा देगा।

रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को मिलेगा बल

यह साझेदारी भारत में मेक इन इंडिया पहल के अंतर्गत रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने में सहायक होगी। भारत डायनामिक्स लिमिटेड इस समझौते के जरिए देश में अत्याधुनिक रक्षा प्रौद्योगिकियों को स्थापित करने और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए एक मजबूत नींव तैयार करेगा।

भारत-रूस के दीर्घकालिक संबंधों में एक और कदम

यह करार भारत और रूस के बीच लंबे समय से चले आ रहे रक्षा सहयोग का हिस्सा है। इस MoU के तहत भारत डायनामिक्स लिमिटेड को रूस से तकनीकी सहायता मिलेगी जिससे वह इस उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम के कुछ हिस्सों को भारत में ही विकसित कर सकेगा। यह “मेक इन इंडिया” पहल को भी बढ़ावा देगा और भारत की आत्मनिर्भरता में अहम भूमिका निभाएगा।

आगे की राह

यह समझौता भारत की रक्षा क्षमताओं को और मजबूती देगा और भारतीय सेना को अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम से सुसज्जित करने के दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा। दोनों देशों के बीच इस साझेदारी से न केवल रक्षा में तकनीकी उन्नति होगी, बल्कि भविष्य में नए अवसरों और क्षेत्रों में भी सहयोग के रास्ते खुलेंगे।