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Army chief General Upendra Dwivedi: भारत-नेपाल सैन्य संबंधों को और मजबूत करेगा सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी का नेपाल दौरा, संयुक्त सैन्य अभ्यास “सूर्य किरण” की करेंगे समीक्षा

Army chief General Upendra Dwivedi Nepal Visit: Strengthening India-Nepal Military Ties and Reviewing Joint Exercise "Surya Kiran"

Army chief General Upendra Dwivedi Nepal Visit: अगले हफ्ते भारतीय थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी नेपाल के आधिकारिक दौरे पर जाएंगे। यह दौरा भारत और नेपाल के बीच मजबूत सैन्य कूटनीति को और गहराई देगा। दशकों पुरानी साझेदारी, सांस्कृतिक जुड़ाव और भौगोलिक निकटता के कारण दोनों देशों के बीच विशेष संबंध हैं, जो क्षेत्रीय सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

Army chief General Upendra Dwivedi Nepal Visit: Strengthening India-Nepal Military Ties and Reviewing Joint Exercise "Surya Kiran"

भारत-नेपाल सैन्य संबंधों की गहराई

भारत और नेपाल के बीच सैन्य सहयोग की एक लंबी और गौरवशाली परंपरा रही है। नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम, सैन्य उपकरणों की आपूर्ति और संयुक्त अभ्यास ने इस संबंध को मजबूती दी है। जनरल द्विवेदी का यह दौरा इन साझेदारियों को और गहराई देने का अवसर होगा।

सैन्य प्रशिक्षण और सहयोग

नेपाल और भारत के बीच सैन्य प्रशिक्षण का आदान-प्रदान एक महत्वपूर्ण पहलू है। इस साल अब तक 300 से अधिक नेपाली सैनिकों ने भारत में काउंटर-इंसर्जेंसी, नेतृत्व विकास और शांति मिशन जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण लिया है। इसी तरह भारतीय सैनिक भी नेपाल में विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों में हिस्सा लेते हैं।

संयुक्त सैन्य अभ्यास “सूर्य किरण”

दोनों देशों के बीच “सूर्य किरण” नामक वार्षिक संयुक्त सैन्य अभ्यास, आपसी सहयोग को बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। इस साल दिसंबर में इसका 18वां संस्करण नेपाल में आयोजित होगा। यह अभ्यास आतंकवाद-रोधी अभियानों, आपदा प्रबंधन और मानवीय सहायता पर केंद्रित होता है।

सैन्य आधुनिकीकरण में सहयोग

भारत ने नेपाल को छोटे हथियारों, वाहनों और आधुनिक प्रशिक्षण सिमुलेटर सहित सैन्य उपकरणों की आपूर्ति की है। दोनों देशों ने “नेपाल-भारत द्विपक्षीय परामर्श समूह” के माध्यम से सैन्य जरूरतों और आपदा प्रबंधन को बेहतर बनाने पर चर्चा की है। जनरल द्विवेदी का दौरा इन मुद्दों पर चर्चा को और गति देगा।

सम्मानजनक सैन्य रैंक और जनसंपर्क

भारत और नेपाल के बीच सैन्य संबंधों में एक खास परंपरा है—दोनों देशों के सेना प्रमुखों को मानद जनरल का पद दिया जाता है। जनरल द्विवेदी का यह दौरा इस प्रतीकात्मक बंधन को और मजबूत करेगा।

नेपाल में लगभग 88,000 भारतीय सेना के पूर्व सैनिक रहते हैं, जो शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास के क्षेत्रों में योगदान देकर दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और सामाजिक संबंधों को गहरा करते हैं।

मुक्तिनाथ मंदिर की यात्रा

अपने दौरे के दौरान जनरल द्विवेदी श्री मुक्तिनाथ मंदिर भी जा सकते हैं। भारत के पहले सीडीएस, जनरल बिपिन रावत का भी यहां जाने का सपना था। उनकी स्मृति में मंदिर में ‘बिपिन बेल’ स्थापित की गई थी।

क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए साझेदारी

जनरल उपेंद्र द्विवेदी का यह दौरा भारत-नेपाल सैन्य कूटनीति में एक और महत्वपूर्ण कदम है। यह दोनों देशों के बीच साझा सुरक्षा, स्थिरता और आतंकवाद जैसे खतरों से निपटने के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह यात्रा न केवल द्विपक्षीय सैन्य संबंधों को मजबूत करेगी, बल्कि दक्षिण एशिया में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने में भी योगदान देगी।

Tear Smoke Shell 2.0: भीड़ पर काबू पाने के लिए BSF इस्तेमाल करेगी नई पीढ़ी के आंसू गोले

BSF to Introduce Advanced Tear Smoke Shell 2.0 for Safer and More Effective Crowd Control

Tear Smoke Shell 2.0: सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने भीड़ पर काबू पाने के लिए अधिक प्रभावी और सुरक्षित तरीक अपनाने जा रही है। बीएसएफ अब मौजूदा Tear Smoke Shell (TSS) की जगह नई पीढ़ी की “Tear Smoke Shell 2.0” का इस्तेमाल करेगी, जो भीड़ नियंत्रण के दौरान कम हानिकारक और अधिक प्रभावी होगा।

Tear Smoke Shell 2.0: BSF Introduces New Generation Tear Gas Shells for Safer and More Effective Crowd Control

इस नए संस्करण में, पहले के मुकाबले कम जहरीले आंसू गैस के गोला-बारूद का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे लोगों  को कम से कम नुकसान पहुंचेगा। BSF के Tear and Smoke Unit (TSU) की तरफ से बनए गए इस नए गोला-बारूद का उद्देश्य भीड़ को नियंत्रित करते वक्त उनकी सेहत पर पड़ने वाले घतक असर को कम करना है।

पुरानी तकनीकों के मुकाबले सुरक्षित

पारंपरिक आंसू गैस के गोला-बारूद का उपयोग करते वक्त स्वास्थ्य संबंधी कई जोखिम होते हैं, जैसे कि सांस लेने में दिक्कत और आंखों में गंभीर चोटें। इस नए संस्करण में इन जोखिमों को कम करने का प्रयास किया गया है, जबकि भीड़ पर इसके प्रभाव में कोई कमी नहीं आएगी।

नई दिल्ली स्थित BSF मुख्यालय में आयोजित 44वीं वार्षिक बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा की गई। बैठक की अध्यक्षता सीमा सुरक्षा बल के महानिदेशक दलजीत सिंह चौधरी ने की।

TSU की नई खोजें

Tear and Smoke Unit (TSU) ने भीड़ नियंत्रण के लिए गैर-घातक गोला-बारूद के विकास में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं, जिसमें शामिल हैं:

  • लैक्रिमेटरी म्यूनिशन्स: ये गोला-बारूद भीड़ को बिना स्थायी नुकसान पहुंचाए नियंत्रित करने के लिए बनाए गए हैं।
  • फ्लैश-बैंग म्यूनिशन्स: ये उपकरण भीड़ को अस्थायी रूप से भ्रमित और विचलित करते हैं, बिना स्थायी नुकसान के।
  • इंपैक्ट म्यूनिशन्स: ये कम हानिकारक विकल्प हैं, जो भीड़ नियंत्रण में मदद करते हैं।
  • कस्टमाइज्ड म्यूनिशन्स: विशेष संचालन जरूरतों के लिए तैयार किए गए गोला-बारूद।

ड्रोन आधारित Tear Smoke Launcher (DTSL) की सफलता

ड्रोन Tear Smoke Launcher (DTSL) तकनीक ने भीड़ नियंत्रण के तरीकों को नया रूप दिया है। इस तकनीक के माध्यम से आंसू गैस के गोले बिना किसी खतरे के सटीक तरीके से ड्रोन द्वारा दागे जा सकते हैं। पारंपरिक तरीके से आंसू गैस को मैन्युअली फायर करने की तुलना में यह अधिक सुरक्षित और प्रभावी है।

कानून और व्यवस्था बनाए रखने में होगा कारगर

बीएसएफ का यह कदम भारत में कानून और व्यवस्था बनाए रखने के तरीकों में बदलाव लाएगा। सुरक्षा और प्रभावशीलता पर जोर देते हुए, TSU द्वारा विकसित यह नया गोला-बारूद निश्चित रूप से सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने में सहायक साबित होगा, जबकि नागरिकों की भलाई की रक्षा भी करेगा।

Pinaka MBRL: पिनाका रॉकेट सिस्टम हुआ और भी ताकतवर, पहले आर्मेनिया ने खरीदा, अब फ्रांस भी दिखा रहा रूचि

Guided Pinaka Weapon System: DRDO Successfully Completes Flight Test, Boosting India’s Indigenous Defense Capability

भारत का स्वदेशी पिनाका मल्टी-बैरेल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम अब और भी अधिक ताकतवर हो गया है। पहले आर्मेनिया ने इसे खरीदा था, वहीं अब इस प्रणाली की स्टडी फ्रांस भी कर रहा है। खास बात यह है कि यह पिनाका सिस्टम अब एक नए गाइडेड वर्जन में उपलब्ध है, जो पहले से अधिक प्रभावी और सटीक हमला करने में सक्षम है।

Guided Pinaka Weapon System: DRDO Successfully Completes Flight Test, Boosting India’s Indigenous Defense Capability

रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने गुरुवार को बताया कि उसने गाइडेड पिनाका हथियार प्रणाली का उड़ान परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। ये परीक्षण प्रोविज़नल स्टाफ क्वालिटेटिव रिक्वायरमेंट्स (PSQR) वेलिडेशन ट्रायल्स का हिस्सा थे।

गाइडेड पिनाका रॉकेट सिस्टम के बारे में खास बात यह है कि अब इसमें ‘सीकर’ (seeker) लगाए गए हैं, जिससे यह सटीक लक्ष्य पर हमला कर सकता है। पहले वर्जन में यह प्रणाली बिना गाइडेंस के होती थी, जिससे यह छोटे लक्ष्य को भी बड़े क्षेत्र में कई रॉकेट फेंककर नष्ट करती थी। अब गाइडेड सिस्टम में यह समस्या नहीं है और यह अधिक सटीकता से लक्ष्यों को भेदने में सक्षम है।

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रक्षा क्षेत्र से जुड़े सूत्रों ने बताया कि इस गाइडेड सिस्टम की रेंज पहले वाले संस्करण से अधिक है। वहीं, पिनाका के एक और एडवांस वर्जन पर भी काम चल रहा है, जिसकी रेंज 120 किमी, 150 किमी और 200 किमी तक की होगी, ताकि चीन के लंबी दूरी वाले गाइडेड रॉकेट सिस्टम का मुकाबला किया जा सके। वर्तमान में पिनाका की रेंज लगभग 37 किमी है, जबकि एडवांस रेंज के रॉकेट्स की रेंज करीब 45 किमी तक है।

Pinaka MBRL- Pinaka multi-barrel rocket launcher system

पिनाका रॉकेट सिस्टम को भारतीय सेना ने पसंद किया है और इसे निर्यात के लिए अच्छा माना जा रहा है। आर्मेनिया ने पहले ही इन रॉकेट्स को खरीदा है और इस महीने पिनाका का पहला रेजिमेंट आर्मेनिया भेजा गया है।

दिलचस्प बात यह है कि फ्रांस भी पिनाका प्रणाली का अध्ययन कर रहा है, और सूत्रों के अनुसार, वे गाइडेड वर्जन में रुचि दिखा रहे हैं।

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परीक्षण के बारे में
DRDO ने बताया कि इस प्रणाली के उड़ान परीक्षण तीन चरणों में विभिन्न फील्ड फायरिंग रेंजों पर किए गए। इन परीक्षणों के दौरान, PSQR के पैरामीटर्स—जैसे रेंज, सटीकता, निरंतरता और सल्वो मोड में मल्टीपल लक्ष्यों के लिए फायर रेट—का आकलन किया गया।

इन परीक्षणों में दो सेवा में मौजूद पिनाका लॉन्चरों से प्रत्येक उत्पादन एजेंसी द्वारा 12-12 रॉकेट्स का परीक्षण किया गया।

यह प्रणाली भारतीय सेना के लिए एक अहम और घातक हथियार बन चुकी है, जिसे भारतीय रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन के कई प्रमुख केंद्रों द्वारा विकसित किया गया है। इसके निर्माण में मुनिशन इंडिया लिमिटेड, टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड और लार्सन एंड टुब्रो जैसी कंपनियों का भी योगदान है।

यह उन्नत पिनाका सिस्टम भारतीय सेना के लिए ताकत का एक प्रतीक बन चुका है और उम्मीद जताई जा रही है कि यह वैश्विक स्तर पर भी एक महत्वपूर्ण रक्षा प्रणाली के रूप में स्थापित होगा।

Veterans Achievers Award: लखनऊ में वेटरंस अचीवर्स अवार्ड से सम्मानित हुए रिटायर्ड कर्नल सिद्दीकी और सूबेदार उदय राज सिंह

Veterans Achievers Award: General Upendra Dwivedi Honors Colonel MZU Siddiquie and Subedar Uday Raj Singh for Their Remarkable Social Contributions

Veterans Achievers Award: हाल ही में लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम में भारतीय सेना के प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने दो सेवानिवृत्त सैनिकों को ‘वेटरन्स अचीवर्स अवार्ड’ से सम्मानित किया। यह पुरस्कार कर्नल एमजेडयू सिद्दीकी (सेवानिवृत्त) और सूबेदार (मानद कैप्टन) उदय राज सिंह (सेवानिवृत्त) को दिया गया। इस पुरस्कार ‘कैपेबिलिटी डेवलपमेंट कॉन्फ्रेंस’ के दौरान दिए गए थे। दोनों वेटरन्स ने अपने पूरे करियर में न केवल सेना में सेवा दी, बल्कि समाज की भलाई के लिए भी काफी काम किया।

Veterans Achievers Award: General Upendra Dwivedi Honors Colonel MZU Siddiquie and Subedar Uday Raj Singh for Their Remarkable Social Contributions

कर्नल सिद्दीकी का योगदान

कर्नल एमजेडयू सिद्दीकी का नाम आज समाज में उनके अद्वितीय सामाजिक कार्यों के लिए जाना जाता है। उन्होंने 2009 में ‘हुसना महिला और बाल विकास एवं शिक्षा समाज’ (Husna Women and Child Development and Education Society) नामक एक गैर-सरकारी संस्था की स्थापना की थी। यह संस्था मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं और बच्चों के लिए काम करती है। कर्नल सिद्दीकी की संस्था ने हजारों महिलाओं और बच्चों को शिक्षा, स्वास्थ्य, और रोजगार के अवसर प्रदान किए हैं। उनका मानना ​​है कि समाज के सबसे कमजोर वर्ग की मदद करने से ही असल बदलाव आता है।

कर्नल सिद्दीकी न केवल एक समाजसेवी हैं, बल्कि एक लेखक, मीडिया योगदानकर्ता और यूट्यूब होस्ट भी हैं। उन्होंने कई किताबें लिखी हैं और समाज को जागरूक करने के लिए कई मीडिया प्लेटफार्मों पर योगदान दिया है। कर्नल सिद्दीकी न केवल अपनी पूरी पेंशन दान में दे देते हैं, बल्कि इस राशि का उपयोग जरूरतमंदों को कंबल देने में भी करते हैं। यह उनकी निस्वार्थ सेवा भावना का प्रतीक है। उनका यह प्रयास विशेष रूप से उत्तर प्रदेश राज्य में काफी सराहा गया है, जहां उनकी संस्था ने कई लोगों की ज़िंदगी को बेहतर किया है।

Veterans Achievers Award: General Upendra Dwivedi Honors Colonel MZU Siddiquie and Subedar Uday Raj Singh for Their Remarkable Social Contributions

सूबेदार उदय राज सिंह का योगदान

वहीं, सूबेदार (मानद कैप्टन) उदय राज सिंह ने भी समाज सेवा में अपने योगदान से एक नया मानक स्थापित किया है। वे वेटरन्स और उनके परिवारों की सहायता के लिए निरंतर काम करते रहते हैं। सूबेदार सिंह जिला सैनिक कल्याण बोर्ड के साथ मिलकर काम करते हैं, जिससे वे वीर नारियों (जिनके पति युद्ध में शहीद हो गए) और विधवाओं को वित्तीय सहायता और रोजगार के अवसर दिलवाते हैं।

सूबेदार सिंह की एक और महत्वपूर्ण भूमिका यह है कि वे वरिष्ठ वेटरन्स को उनके पेंशन और बकाए के मामलों में मदद करते हैं। बहुत से वेटरन्स को पेंशन और अन्य लाभों में देरी होती है, और सूबेदार सिंह इस समस्या को हल करने में उनकी मदद करते हैं। इसके अलावा, सूबेदार सिंह अस्योर डीसेंट लास्ट राइट्स स्कीम (ADLRS) के तहत शहीद सैनिकों के अंतिम संस्कार में भी सहायता प्रदान करते हैं, ताकि उन सैनिकों को एक सम्मानजनक विदाई मिल सके।

सेवा का संदेश

कर्नल सिद्दीकी और सूबेदार सिंह दोनों ने अपनी पूरी जिंदगी समाज सेवा और वेटरन्स की मदद करने में बिताई है। उनका यह योगदान न केवल उनके साथियों के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणादायक है। वे दोनों ही यह मानते हैं कि सेना में सेवा करने का कार्य सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि एक जीवनभर की जिम्मेदारी है। सेवा का यह सफर एक मजबूत और एकजुट भारत के निर्माण में योगदान करता है।

संस्कार और सम्मान

इन दोनों वीरों ने यह साबित किया है कि सेवा का कोई अंत नहीं होता। भले ही वे सेना से सेवानिवृत्त हो गए हैं, लेकिन उनका समाज के प्रति योगदान अभी भी जारी है। उनका उद्देश्य केवल अपने साथियों की मदद करना नहीं है, बल्कि समाज के हर वर्ग तक मदद पहुंचाना है। उनका यह अवार्ड न केवल उनके द्वारा किए गए कार्यों की सराहना है, बल्कि यह हम सभी को प्रेरित करता है कि हम भी अपने देश और समाज के लिए कुछ अच्छा करें।

समाज में बदलाव लाने का काम

कर्नल सिद्दीकी और सूबेदार सिंह की तरह हर एक व्यक्ति को अपने स्तर पर समाज के लिए कुछ करने का प्रयास करना चाहिए। उनके जैसे वेटरन्स हमारे समाज के असली नायक हैं, जो बिना किसी दिखावे के अपनी सेवा करते हैं। उनके कार्यों से यह सीख मिलती है कि सेवा और सम्मान का रास्ता सबसे कठिन होता है, लेकिन वही रास्ता समाज में सच्चा बदलाव ला सकता है।

कर्नल सिद्दीकी और सूबेदार सिंह के योगदान को देखते हुए हमें यह समझना चाहिए कि सच्ची सेवा कभी थमती नहीं है, और यह हमारे देश को एक मजबूत और बेहतर राष्ट्र बनाने की दिशा में एक कदम और बढ़ाती है।

“Flowers on a Kargil Cliff”: युद्ध, प्रेम और मानवीय संवेदनाओं की अद्भुत दास्तान

Flowers on a Kargil Cliff: Untold Stories of War, Love, and Humanity in the Himalayas

“Flowers on a Kargil Cliff” कोई साधारण किताब नहीं है। यह उन कहानियों का संग्रह है, जो हिमालय की ऊँचाइयों में दफऩ हैं, युद्ध के बारूद और बर्फ के बीच पनपते जीवन की गवाही देती हैं। इस किताब में न केवल गोलियों और खून की कहानी है, बल्कि प्रेम, साहस, और मानवीय भावनाओं का गहरा ताना-बाना है।

Flowers on a Kargil Cliff: Untold Stories of War, Love, and Humanity in the Himalayas

यह किताब उस साहसी पत्रकार की दास्तान है, जिसने 15,000 से 16,000 फीट की ऊंचाइयों पर अपनी जान की परवाह किए बिना कारगिल युद्ध की सच्चाइयों को सामने लाए। वहीं, उन्होंने उन बर्फीले मैदानों से नाजुक फूल तोड़े और उन्हें प्रेम पत्रों में समेटकर अपनी मंगेतर को भेजा। ये फूल सिर्फ प्रेम का प्रतीक नहीं थे, बल्कि उन वीर जवानों की निशानी भी थे, जिन्होंने उन कठिन परिस्थितियों में उन्हें लेखक के साथ साझा किया।

युद्ध के परे वीरता की कहानियां

“Flowers on a Kargil Cliff” के लेखक और प्रसिद्ध डिफेंस रिपोर्टर विक्रमजीत सिंह ने उन ऊंचाइयों पर जो देखा, वह महज गोलियों और बारूद का मंज़र नहीं था। उन श्वेत हिमाच्छादित पर्वतों पर बिखरे खून के दाग़ थे, उन वीरों की असीम वीरता की निशानी के, जो वहां अपने परिवार और जीवन से दूर, हर पल मौत का सामना कर रहे थे। किताब में उन रातों का ज़िक्र है जब लेखक ने 12 जम्मू एंड कश्मीर लाइट इन्फैंट्री के जवानों के साथ 15,700 फीट पर छोटे-से तंबू में रात गुज़ारी, गोलियों की बौछार के बीच छिपते-छिपाते रिपोर्टिंग की और दुनिया को युद्ध की पहली-पहली झलक दिखाई। उस वक्त भारतीय सेना ने लेखक को यह खास अनुमति उसकी साहसिक पत्रकारिता की वजह से दी, जिसे उसने श्रीनगर में रहते हुए कश्मीर में कई ऑपरेशंस को कवर कर साबित किया था।

किताब में न केवल भारतीय बल्कि पाकिस्तानी सेना के वीरों की भी कहानियां हैं, जैसे कि कैप्टन रॉमल अकरम, जो अकेले लड़ते हुए बुरी तरह घायल हो गए थे। उसके चेहरे पर लगी गोली के ज़ख्म से बहता खून शायद यह चीख-चीख कर कह रहा था कि साहस न तो किसी सरहद में बंधा है और न ही किसी धर्म से बंधा।

किताब उन 244 पाकिस्तानी सैनिकों की भी बात करती है जो हिंदुस्तान की सरज़मीं में 25 सालों से दफ़्न हैं, जिनकी कब्रों पर उनकी माताओं ने अब तक कभी सिर नहीं झुकाया, लेकिन हर गर्मी में खिलने वाले जंगली फूल उनके लिए श्रद्धांजलि का गुलदस्ता बन जाते हैं।

Flowers on a Kargil Cliff: Untold Stories of War, Love, and Humanity in the Himalayas

प्रेम और बलिदान की छू लेने वाली कहानियां

इस किताब में युद्ध की कठोर सच्चाइयों के साथ-साथ प्रेम और बलिदान की कोमल कहानियां भी हैं। जैसे लांस नायक डुन नारायण श्रेष्ठ की पत्नी, टेक कुमारी, जो अपने पति के मारे जाने की खबर सुनने के बाद भी हर रोज़ सिंदूर लगाती थी और उसकी चूड़ियां अब भी उसे अपने सुहाग का एहसास दिलाती थीं, भले ही उसका पति कारगिल की गुफाओं में दो साल तक लापता और मृत पड़ा रहा।

फिर कैप्टन जिन्टू गोगोई और ऑल इंडिया रेडियो की अनजना पराशर की प्रेम कहानी, जो मौत को पार कर अमर हो गई, जब सालों बाद जन्मी अनजना की बेटी का जन्मदिन कैप्टन जिन्टू के जन्मदिन के दिन ही आया। यह महज एक संयोग नहीं, बल्कि शायद एक दिव्य संकेत था।

किताब के एक गोरखा सैनिक का भी फोटो है, जिसमें उसने अपने प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तानी सैनिक के सिर के चारों ओर अपना सफेद रुमाल बांध दिया था, ताकि उसकी आत्मा को शांति मिले। यह वह मानवीयता है, जो युद्ध की भयावहता में भी जीवित रहती है।फोटो सेक्शन में ही, ‘काला पत्थर’ की पहाड़ी पर, एक भारतीय अधिकारी की अस्थियों को उड़ाते समय का फोटो भी है, जिसने युद्ध में अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे।

युद्ध और जीवन का संगम

“Flowers on a Kargil Cliff” उन छोटे-छोटे फूलों की तरह है जो बर्फ के बीच खिले रहते हैं, उन वीर जवानों की यादों की तरह जो अपनी कहानियाँ बर्फ के सफेद पर्दे के नीचे छोड़ गए हैं। यह किताब न केवल उनके अदम्य साहस की, बल्कि उन सैनिकों के असली संघर्षों, प्रेम और दर्द की भी एक झलक देती है। लेखक ने इन कहानियों को इस तरह पेश किया है कि जिससे पाठक का दिल और दिमाग दोनों छू जाए।

“Flowers on a Kargil Cliff” उन छोटे-छोटे हिमालयी फूलों की तरह है, जो कठोर बर्फ के बीच भी खिलते हैं। यह किताब युद्ध के शौर्य, मानवीयता, और प्रेम की अनकही कहानियों की एक अद्भुत यात्रा है। इसमें वे यादें जीवित हैं, जो न केवल इतिहास की धरोहर हैं, बल्कि हमारी आत्मा को भी छू जाती हैं।

Click her to Buy unsigned copy: Flowers on a Kargil Cliff

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Exercise AUSTRAHIND: पुणे में चल रहा है भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास, लिखी जा रही है दोनों देशों के बीच रिश्तों की नई इबारत

Exercise AUSTRAHIND: India-Australia Joint Military Drill Underway in Pune, Strengthening Ties Between the Two Nations

Exercise AUSTRAHIND: भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच मजबूत होते रिश्तों का नया अध्याय इन दिनों पुणे के औंध में लिखा जा रहा है। औंध में दोनों देशों की सेनाओं के बीच ऑस्ट्राहिंड 2024 संयुक्त सैन्य अभ्यास चल रहा है, जहां दोनों सेनाएं एक-दूसरे के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही हैं। 8 नवंबर को शुरू हुए इस अभ्यास का उद्देश्य सिर्फ युद्ध कौशल सिखाना नहीं, बल्कि दोनों देशों के सैनिकों के बीच दोस्ती और समझ का पुल बनाना है।

Exercise AUSTRAHIND: India-Australia Joint Military Drill Underway in Pune, Strengthening Ties Between the Two Nations

इस अभ्यास का पहला चरण बहुत खास रहा है। भारतीय और ऑस्ट्रेलियाई सैनिकों ने मिलकर शारीरिक फिटनेस, मार्शल आर्ट्स, और विशेष हथियारों का उपयोग सीखा है। इन सबके साथ, दुश्मन के ठिकाने पर हमला करना, घायल साथियों को तत्काल सहायता पहुंचाना जैसी चुनौतीपूर्ण स्थितियों में एक-दूसरे के साथ खड़े रहना भी सिखाया गया है। ये प्रशिक्षण न केवल युद्ध के मैदान में बल्कि मुश्किल हालात में भी दोनों सेनाओं के बीच भरोसा बढ़ा रहे हैं।

अभ्यास के बीच, भारतीय संस्कृति से परिचय के लिए दोनों देशों के सैनिकों को पुणे के ऐतिहासिक सिंहगढ़ किले की सैर कराई गई। सिंहगढ़ की ऊंचाई पर जाकर उन्होंने हमारे इतिहास को समझा और वो गौरव महसूस किया, जो इस किले की दीवारों में दर्ज है। इसके बाद, 12 नवंबर को ऑस्ट्रेलियाई दल ने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) का दौरा किया, जहां उन्होंने भारतीय सेना के अनुशासन और कड़ी मेहनत की झलक देखी। यह अनुभव उनके लिए अनमोल था, जिससे भारतीय सेनाओं के प्रति उनके मन में आदर और बढ़ा।

Exercise AUSTRAHIND: India-Australia Joint Military Drill Underway in Pune, Strengthening Ties Between the Two Nations

अगले चरण में, दोनों सेनाओं के सैनिक संयुक्त युद्ध अभ्यास और रणनीतियों पर काम करेंगे। इसका समापन 19-20 नवंबर को 48 घंटे के फाइनल परीक्षण के साथ होगा। इस दौरान वे अपनी सीखी हुई सभी तकनीकों को मिलकर आजमाएंगे।

Exercise AUSTRAHIND: India-Australia Joint Military Drill Underway in Pune, Strengthening Ties Between the Two Nations

इस अभ्यास का नाम भले ही ऑस्ट्राहिंड हो, लेकिन इसका मतलब है भरोसे की डोर और दोस्ती का नया अध्याय। ऑस्ट्राहिंड 2024 सिर्फ एक अभ्यास नहीं, बल्कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के रिश्तों की नई ऊंचाइयों की ओर एक कदम है, जो दोनों देशों को एक दूसरे के और करीब लाएगा।

Guided Pinaka Weapon System: डीआरडीओ ने सफलतापूर्वक पूरा किया गाइडेड पिनाका वेपन सिस्टम का फ्लाइट टेस्ट

Guided Pinaka Weapon System: DRDO Successfully Completes Flight Test, Boosting India’s Indigenous Defense Capability

SPARSH Fake WhatsApp Messages: स्पर्श ने वेटरन पेंशनरों के लिए जारी की चेतावनी, व्हाट्सएप पर फर्जी संदेशों से रहें सतर्क, नहीं तो हो सकता है बड़ा नुकसान

Commutation of Pension: How the 15-year restoration period is under scrutiny, veterans seek reduction to 12 years
File Photo

SPARSH Fake WhatsApp Messages: हाल ही में सोशल मीडिया पर एक फर्जी संदेश फैल रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि SPARSH (सशस्त्र बलों के पेंशनर्स के लिए सेवा पोर्टल) से संबंधित समस्याओं का समाधान अब व्हाट्सएप के जरिए किया जा सकता है। यह संदेश पेंशनर्स को गुमराह कर रहा है और उनसे व्यक्तिगत जानकारी जैसे पेंशन, OROP (वन रैंक, वन पेंशन) या अन्य संवेदनशील जानकारी प्राप्त करने की कोशिश कर रहा है।

SPARSH Issues Important Warning: Beware of Fake WhatsApp Messages, Do Not Share Personal Information

इस संदर्भ में SPARSH ने एक स्पष्ट चेतावनी जारी की है कि व्हाट्सएप पर कोई भी आधिकारिक पेंशन सेवा नहीं दी जाती है और न ही SPARSH के किसी भी मामले को हल करने के लिए कोई व्हाट्सएप नंबर अधिकृत किया गया है। इस फर्जी मैसेज का मुख्य उद्देश्य पेंशनर्स की निजी जानकारी चुराना और उन्हें धोखा देना है।

SPARSH की चेतावनी

SPARSH ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि कुछ अपरिचित और धोखेबाज लोग व्हाट्सएप पर फर्जी संदेश भेजकर पेंशनर्स से उनकी व्यक्तिगत जानकारी मांग रहे हैं। यह जानकारी लेकर वे पेंशनर्स के खातों से पैसे निकाल सकते हैं। SPARSH ने सभी पेंशनर्स से अपील की है कि वे किसी भी अनधिकृत व्हाट्सएप नंबर से संदेशों पर भरोसा न करें और अपनी संवेदनशील जानकारी जैसे बैंक अकाउंट विवरण, पेंशन विवरण या अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज़ न भेजें।

SPARSH Fake WhatsApp Messages

 

फर्जी संदेशों से सतर्क रहें

इस फर्जी संदेश में यह दावा किया जाता है कि SPARSH द्वारा अब व्हाट्सएप के जरिए पेंशनर्स की समस्याओं का समाधान किया जा रहा है। संदेश में कहा गया है कि पेंशनर्स अपने मुद्दों को जल्द हल करने के लिए व्हाट्सएप पर एक विशेष नंबर पर संपर्क करें। इसके बाद पेंशनर्स से उनकी पेंशन संबंधी जानकारी, बैंक डिटेल्स और अन्य निजी जानकारी मांगी जाती है।

SPARSH ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वह व्हाट्सएप या किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए पेंशन से संबंधित कोई सेवा प्रदान नहीं करता। इसके साथ ही, इसने एक बार फिर यह दोहराया कि पेंशनर्स को अपनी व्यक्तिगत जानकारी केवल SPARSH के अधिकृत सेवा केंद्रों और आधिकारिक पोर्टल पर ही साझा करनी चाहिए।

SPARSH Fake WhatsApp Messages

क्यों हो सकती है धोखाधड़ी?

इस तरह की धोखाधड़ी से पेंशनर्स को न सिर्फ आर्थिक नुकसान हो सकता है, बल्कि उनके व्यक्तिगत विवरण भी गलत हाथों में जा सकते हैं। अपराधी इस जानकारी का इस्तेमाल करके पेंशनर्स के खातों से पैसे निकाल सकते हैं या अन्य धोखाधड़ी कर सकते हैं। इसके अलावा, फर्जी संदेशों का मुख्य उद्देश्य पेंशनर्स की जानकारी चुराना और उनकी सुरक्षा को खतरे में डालना है।

SPARSH ने पेंशनर्स से अपील की है कि वे ऐसे फर्जी संदेशों का तुरंत खंडन करें और इनका जवाब न दें। इसके अलावा, यदि कोई पेंशनर इस प्रकार के फर्जी संदेशों का सामना करता है, तो वह तत्काल SPARSH के आधिकारिक संपर्क नंबरों पर सूचना दे सकता है।

सुरक्षा के उपाय

SPARSH ने पेंशनर्स को सलाह दी है कि वे केवल अधिकृत वेबसाइट या अधिकृत सेवा केंद्रों के माध्यम से ही अपनी पेंशन संबंधी जानकारी प्राप्त करें। किसी भी अनजान नंबर से संपर्क करने से बचें और फर्जी संदेशों का तुरंत खंडन करें।

यदि आपको किसी भी संदिग्ध संदेश या कॉल का सामना होता है, तो तुरंत अपने नजदीकी SPARSH सेवा केंद्र से संपर्क करें।

SPARSH का उद्देश्य है कि सभी पेंशनर्स को सुरक्षित और सहज सेवाएं प्रदान की जाएं, और ऐसी किसी भी धोखाधड़ी से बचने के लिए सभी पेंशनर्स को जागरूक किया जाए।

आधिकारिक संपर्क सूत्र

SPARSH ने पेंशनर्स से अपील की है कि वे हमेशा आधिकारिक SPARSH पोर्टल पर जाकर अपनी समस्याओं का समाधान प्राप्त करें। इसके लिए SPARSH के अधिकृत हेल्पलाइन नंबर और वेबसाइट का उपयोग करें। SPARSH का अधिकृत पोर्टल (https://www.sparsh.in) है, जहां पेंशनर्स अपनी समस्याओं को दर्ज कर सकते हैं और सहायता प्राप्त कर सकते हैं।

SPARSH ने इस बात की पुष्टि की है कि भविष्य में व्हाट्सएप या किसी अन्य अनधिकृत प्लेटफॉर्म पर पेंशन से संबंधित कोई जानकारी साझा नहीं की जाएगी। इसलिए सभी पेंशनर्स को अपनी जानकारी की सुरक्षा के लिए सतर्क रहना चाहिए और किसी भी संदिग्ध गतिविधि से बचना चाहिए।

फर्जी संदेशों से बचने और अपनी सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि हम हमेशा आधिकारिक चैनल का ही उपयोग करें। किसी भी अनधिकृत और संदिग्ध लिंक या व्हाट्सएप नंबर से दूरी बनाकर रखें। SPARSH और अन्य सरकारी सेवा केंद्रों द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं के बारे में सही जानकारी के लिए हमेशा आधिकारिक पोर्टल पर ही जाएं।

Shifali Jamwal: सेना के सेवानिवृत्त अधिकारी की बेटी बनीं ‘Mrs Universe America 2024’, जम्मू से है गहरा नाता

Shifali Jamwal: Daughter of Retired Army Officer Crowned 'Mrs Universe America 2024', Deeply Connected to Jammu.

Shifali Jamwal: शिफाली जमवाल, जो एक सेवानिवृत्त सेना अधिकारी की बेटी हैं, को हाल ही में ‘Mrs Universe America 2024’ का ताज पहनाया गया। यह समारोह अमपावरिंग डॉट ऑर्ग द्वारा रेंटन, अमेरिका में आयोजित किया गया।

Shifali Jamwal: Daughter of Retired Army Officer Crowned 'Mrs Universe America 2024', Deeply Connected to Jammu.

शिफाली का जन्म और पालन-पोषण जम्मू में हुआ। उनके परिवार का सैन्य पृष्ठभूमि होने के कारण, उन्होंने बचपन से ही संघर्ष और दृढ़ संकल्प देखे। शिफाली कहती हैं, “सैन्य परिवेश में बड़े होते हुए मैंने हमेशा अपने माता-पिता को चुनौतियों का डटकर सामना करते देखा।”

वर्तमान में सिएटल में रहने वाली शिफाली, Esper.io में सीनियर प्रोडक्ट मार्केटिंग मैनेजर के रूप में काम कर रही हैं और साथ ही पर्यावरण संरक्षण और समाज सेवा में अपनी रुचि को आगे बढ़ा रही हैं। वह खुद को “पृथ्वी का बच्चा” मानती हैं और हमेशा यह कहती हैं, “हम पृथ्वी को अपने पूर्वजों से नहीं, बल्कि अपने बच्चों से उधार लेते हैं।”

चार साल के बेटे की मां शिफाली का लक्ष्य है कि आने वाली पीढ़ियां एक स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण में जी सकें। इसी उद्देश्य के साथ उन्होंने ‘Live2Serve’ नामक एक संस्था की शुरुआत की है, जो पर्यावरण संरक्षण और समाज के कमजोर वर्गों, खासकर बच्चों और जानवरों के लिए काम करती है।

पेजेंट में शिफाली ने एक खूबसूरत हरे रंग के लहंगे में हिस्सा लिया, जिस पर तितलियों, फूलों और मोरों के डिज़ाइन थे, जो प्रकृति की सुंदरता का प्रतीक थे। उनके पर्यावरण के प्रति समर्पण ने सभी को प्रभावित किया।

अब जब शिफाली के पास ‘Mrs Universe America 2024’ का खिताब है, वह अगले साल फिलीपींस में होने वाले ‘Mrs Universe’ पेजेंट में अमेरिका का प्रतिनिधित्व करने के लिए तैयार हैं। शिफाली का मानना है कि इस मंच के जरिए वह पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और दूसरों को भी इस दिशा में कदम उठाने के लिए प्रेरित कर सकती हैं।

शिफाली कहती हैं, “इस खिताब से मुझे पर्यावरणीय चेतना बढ़ाने का एक बड़ा मौका मिलेगा। हम सब मिलकर एक बड़ा बदलाव ला सकते हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहतर दुनिया छोड़ सकते हैं।”

Airbus C-295: भारतीय नौसेना को मिलेगी नई ताकत, समुद्री निगरानी के लिए जल्द मिलेगा एयरबस C-295 विमान का नेवल वर्जन

Airbus C-295: Indian Navy to Strengthen Maritime Surveillance with Naval Version of C-295 Aircraft

Airbus C-295: समुद्री निगरानी क्षमता बढ़ाने के लिए भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल को जल्द ही एयरबस C-295 विमान का नेवल वर्जन मिल सकता है। रक्षा मंत्रालय जल्द ही 15 मरीन वेरिएंट C-295 विमानों की खरीद के लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) जारी कर सकता है। इस योजना को रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने पहले ही मंजूरी दे दी है, जिसके तहत भारतीय नौसेना को नौ और तटरक्षक बल को छह C-295 विमान दिए जाएंगे।

Airbus C-295: Indian Navy to Strengthen Maritime Surveillance with Naval Version of C-295 Aircraft

ये C-295 विमान समुद्री गश्ती और निगरानी के लिए खास तौर पर तैयार किए जा रहे हैं। नौसेना के लिए आने वाले इन विमानों में सोनार ब्वॉय, पनडुब्बी रोधी हथियारों के लिए टॉरपीडो और सतह युद्ध के लिए मिसाइल सिस्टम लगाया जाएगा। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, “ये विमान नौसेना की समुद्री निगरानी आवश्यकताओं को पूरा करेंगे और विभिन्न मिशन के अनुरूप इनका उपयोग किया जा सकेगा।”

विमान के निर्माण के लिए फ्रांसीसी कंपनी एयरबस और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड के संयुक्त उद्यम के तहत इन्हें भारत में निर्मित किया जाएगा। भारतीय वायुसेना ने पहले ही 56 C-295 ट्रांसपोर्ट विमान का कॉन्ट्रैक्ट साइन किया है, जिसमें से शुरुआती 16 विमान स्पेन में बन रहे हैं और बाकी विमान वडोदरा, गुजरात में टाटा की फाइनल असेंबली लाइन पर तैयार होंगे।

इस एडवांस C-295 वेरिएंट से भारतीय नौसेना की समुद्री गश्ती और निगरानी क्षमताओं में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी होगी। यह नौसेना के लिए मीडियम रेंज मैरिटाइम रिकोनिसेंस (MRMR) और तटरक्षक बल के लिए मल्टी-मिशन मैरिटाइम एयरक्राफ्ट (MMMA) के रूप में काम करेगा। इस C-295 के नए वर्जन में निगरानी, गश्ती और हमला करने की  क्षमता भी होगी।

भारतीय नौसेना फिलहाल लंबी दूरी की समुद्री निगरानी के लिए बोइंग P-8I विमान और छोटी दूरी के गश्ती के लिए डोर्नियर DO-228 विमान का उपयोग करती है। लेकिन मध्यम दूरी की निगरानी के लिए इस श्रेणी के विमान की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। C-295 विमान इस कमी को पूरा करेगा और इसमें पनडुब्बी रोधी ऑपरेशन के लिए हल्के टॉरपीडो, सोनार और DRDO के NASM-SR और NASM-MR एंटी-शिप मिसाइल जैसे आधुनिक हथियार लगाए जाएंगे।

नौसेना के सूत्रों के मुताबिक भारतीय नौसेना की निगरानी क्षमताओं में सबसे बड़ी दिक्कत यह थी कि मध्यम दूरी के विमान की कमी थी, जो विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) और समुद्री व्यापारिक मार्गों (SLOC) पर बेहतर निगरानी कर सके।” उन्होंने कहा कि यह नया विमान न केवल हमारी समुद्री स्थिति जागरूकता को मजबूत करेगा, बल्कि हमारे लंबी दूरी के विमानों के इंजन घंटों को भी बचाएगा।

भारत की समुद्री सीमाओं में तेजी से बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए, यह C-295 विमान का नेवल वर्जन नौसेना और तटरक्षक बल के लिए बेहद कारगर साबित होंगे। ये विमान रीयलटाइम में खुफिया और टारगेटिंग डेटा उपलब्ध कराएंगे, जिससे भारतीय नौसेना की समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित होगी।