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Indian Air Force self-reliance: IAF चीफ का बड़ा बयान; चीन के नए स्टील्थ फाइटर जेट्स से सीखे भारत, आत्मनिर्भरता ही है रास्ता

Indian Air Force Self-Reliance: IAF Chief Stresses on Lessons from China Stealth Jets

Indian Air Force self-reliance: भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने आत्मनिर्भरता की आवश्यकता पर जोर देते हुए चीन के हालिया सैन्य आधुनिकीकरण का उदाहरण दिया। उन्होंने चीन के सिक्स्थ जनरेशन दो स्टील्थ फाइटर जेट्स को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि भारत को अपने रक्षा अनुसंधान और विकास (R&D) और उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने के लिए तेज़ी से काम करना चाहिए।

Indian Air Force Self-Reliance: IAF Chief Stresses on Lessons from China Stealth Jets

Indian Air Force self-reliance: चीन की सैन्य ताकत में हो रहा इजाफा

वायुसेना प्रमुख ने ‘सुब्रतो मुखर्जी सेमिनार’ में कहा, “आज की दुनिया संघर्ष और प्रतिस्पर्धा से भरी हुई है। हमारे पास पश्चिमी और उत्तरी सीमाओं पर अपनी सुरक्षा संबंधी चिंताएं हैं, जहां चीन और पाकिस्तान ने सैन्यकरण बढ़ा दिया है।” उन्होंने चीन के वायुसेना में हो रहे भारी निवेश का ज़िक्र करते हुए कहा, “हाल ही में चीन के सिक्स्थ जनरेशन दो स्टील्थ फाइटर जेट्स इसका एक उदाहरण है।”

चीन ने हाल ही में चेंगदू में दो नई पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट्स को पहली बार दुनिया के सामने प्रदर्शित किया, जिससे पूरी दुनिया हैरान रह गई। चीन ने 26 दिसंबर को इन दोनों स्टील्थ फाइटर जेट्स की पहली उड़ान का प्रदर्शन किया। ये विमान अपनी एडवांस टेक्नोलॉजी और कम ऊंचाई पर उड़ने की क्षमता रखते हैं। इन टेललेस, स्टील्थ विमानों के वीडियो ने अमेरिका तक को चौंका दिया। जबकि अमेरिका अभी तक अपने छठी पीढ़ी के फाइटर प्रोजेक्ट को अंतिम रूप नहीं दे पाया है, वहीं, चीन पहले ही इस क्षेत्र में आगे निकल चुका है।

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वहीं, चीन के पास पहले से ही 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स, जैसे चेंगदू J-20, हैं जिन्हें भारत की सीमाओं के पास होटन और शिगात्से जैसे एयरफील्ड्स पर तैनात किया गया है।

भारत के पास नहीं हैं 5वीं पीढ़ी के जेट्स

भारत अभी भी 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स के उत्पादन से बहुत दूर है। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली सुरक्षा पर कैबिनेट समिति ने मार्च 2022 में स्विंग-रोल एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) के विकास को मंजूरी दी थी। इसके लिए 15,000 करोड़ रुपये से अधिक की शुरुआती लागत तय की गई है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, AMCA का पहला प्रोटोटाइप अगले चार से पांच वर्षों में तैयार होगा। उत्पादन और शामिल किए जाने की प्रक्रिया 2035 के बाद ही शुरू हो पाएगी।

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तेजस को नहीं मिल पा रहा इंजन 

वायुसेना प्रमुख ने कहा, “पहला विमान 2001 में उड़ा था – यानी 17 साल पहले। फिर, 15 साल बाद 2016 में इसे शामिल किया गया। आज हम 2024 में हैं, लेकिन मेरे पास अभी तक पहले 40 विमान भी नहीं हैं। यही हमारी उत्पादन क्षमता है। हमें इस पर काम करने की सख्त जरूरत है। मैं पूरी तरह से आश्वस्त हूं कि हमें कुछ प्राइवेट कंपनियों को इसमें शामिल करना होगा। अन्यथा, हालात में कोई बदलाव नहीं आएगा।”

बता दें कि भारत को अपने चौथी पीढ़ी के तेजस मार्क-1ए फाइटर्स का उत्पादन करने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसके पीछे एक बड़ी वजह GE-F404 टर्बोफैन जेट इंजन की आपूर्ति में हो रही देरी है। अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक द्वारा GE-F404 टर्बोफैन जेट इंजन की आपूर्ति में देरी की वजह से भारत की सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ गई हैं। इसकी वजह है कि वायुसेना को चीन और पाकिस्तान के खतरों से निपटने के लिए 42.5 स्क्वाड्रन की जरूरत है, जबकि उसके पास फिलहाल केवल 30 स्क्वाड्रन ही हैं।

वायुसेना प्रमुख ने आरएंडडी में हो रही देरी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा, “यदि तकनीक समय पर नहीं पहुंचती है, तो उसका महत्व खत्म हो जाता है। हमें आरएंडडी में शामिल जोखिमों और विफलताओं को स्वीकार करने की प्रवृत्ति विकसित करनी होगी।” उन्होंने यह भी कहा, “आत्मनिर्भरता की कीमत चुकानी पड़ेगी, और हमें इसे स्वीकार करना चाहिए। भले ही इसके लिए ज्यादा खर्च करना पड़े। लेकिन यह हमारे देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।”

रक्षा क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी पर दिया जोर

वायुसेना प्रमुख ने तेजस फाइटर जेट के धीमे उत्पादन पर भी निराशा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि देरी के चलते भारतीय वायुसेना को कई ऑपरेशनल चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। IAF प्रमुख ने चीन और पाकिस्तान से बढ़ते खतरों का ज़िक्र करते हुए कहा कि वायुसेना को कम से कम 180 तेजस मार्क-1ए और 108 तेजस मार्क-2 विमानों की ज़रूरत है। AMCA के प्रोडक्शन और तैनाती तक ये विमान भारतीय वायुसेना की ताकत को बनाए रखने में मदद करेंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि नई तकनीकों को अपनाने और जोखिम लेने की प्रवृत्ति को बढ़ावा देने की जरूरत है। “तकनीक में देरी का मतलब है तकनीक से इनकार। R&D में विफलताओं और जोखिम को स्वीकार करने का रवैया विकसित करना होगा।”

वायुसेना प्रमुख ने रक्षा क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता से दीर्घकालिक फायदे होंगे, हालांकि शुरुआती चरणों में इसकी लागत अधिक हो सकती है। उन्होंने निजी और सरकारी क्षेत्रों के बीच तालमेल बढ़ाने पर जोर दिया।

ALH Dhruv Crash: जांच पूरी होने तक ध्रुव चॉपर के उड़ान भरने पर लगी रोक! 2023 में भी पूरे बेड़े को कर दिया था ग्राउंड

Dhruv ALH glitch: Army Orders Fleet-Wide Check After Tail Drive Shaft Failure in Dhruv Helicopters
Dhruv Chopper

ALH Dhruv Crash: इंडियन आर्म्ड फोर्सेस ने अपने सभी 330 एडवांस लइट हेलीकॉप्टर (ALH) ‘ध्रुव’ के बेड़े की उड़ान पर अस्थायी तौर पर रोक लगा दी है। सशस्त्र बलों ने यह कदम पोरबंदर में तटरक्षक बल के हेलिकॉप्टर हादसे के बाद उठाया है, जिसमें दो पायलट और एक एयरक्रू गोताखोर की मौत हो गई। हादसे के बाद हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) की एक टीम जांच के लिए घटनास्थल पर भेजी गई है।

ALH Dhruv Crash: Entire Fleet Grounded Pending Investigation!

बता दें कि रविवार को हुए इस हादसे से पहले एएलएच हेलिकॉप्टर अपनी ट्रेनिंग उड़ान पर था। लगभग 90 मिनट की ट्रेनिंग के दौरान 200 फीट की ऊंचाई पर उड़ते समय, हेलिकॉप्टर नाक के बल जमीन पर गिर गया और उसमें आग लग गई। हादसे के तुरंत बाद, हेलिकॉप्टर के फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (FDR) और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) बरामद कर लिए गए। इन उपकरणों को दुर्घटना के कारणों की जांच के लिए भेजा गया है।

ALH Dhruv Crash: एचएएल और कोस्ट गार्ड ने शुरू की जांच

पिछले चार महीनों में एएलएच हेलिकॉप्टरों के साथ यह दूसरी बड़ी दुर्घटना है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और भारतीय तटरक्षक बल ने हादसे की अलग-अलग जांच शुरू कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन घटनाओं के पीछे डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग और मेंटेनेंस से जुड़ी दिक्कतें हो सकती हैं। एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने कहा, “इन दुर्घटनाओं में डिजाइन, क्वॉलिटी कंट्रोल, और पायलटों की ट्रेनिंग से जुड़े मामलों की गहराई से जांच होनी चाहिए।”

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वहीं एचएएल सूत्रों का कहना है कि एएलएच  ने अपने आप को साबित किया है। उन्होंने एएलएच का बचाव करते हुए कहा है कि यह विभिन्न उपयोगिता भूमिकाओं में अच्छा प्रदर्शन कर चुका है। वहीं इन हेलिकॉप्टरों की दुर्घटनाओं की दर अंतरराष्ट्रीय मानकों से कम है। उनके अनुसार, प्रति एक लाख उड़ान घंटों में दुर्घटनाओं की संख्या अंतरराष्ट्रीय मानकों से कम है।

ALH Dhruv Crash: एएलएच हेलिकॉप्टर भारतीय सशस्त्र बलों की रीढ़

देश में निर्मित डबल इंजन वाले 5.5 टन वजनी एएलएच हेलिकॉप्टर भारतीय सशस्त्र बलों की रीढ़ माने जाते हैं। ये हेलिकॉप्टर विभिन्न उपयोगी भूमिकाओं में तैनात हैं, इनका इस्तेमाल बचाव कार्य, निगरानी और लॉजिस्टिक सपोर्ट में किया जाता है। खास बात यह है कि 2002 में शामिल किए जाने के बाद से, इसने लगभग 4 लाख उड़ान घंटे पूरे किए हैं। लेकिन हाल में हुए के हादसों ने उनकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। रविवार को हुई दुर्घटना के बाद विशेषज्ञों ने कहा कि स्वतंत्र और व्यापक जांच के लिए बाहरी विशेषज्ञों को भी शामिल करना चाहिए।

2023 में भी बेड़े को किया था ग्राउंड 

यह पहली बार नहीं है जब ALH ध्रुव किसी बड़े हादसे का शिकार हुआ है। 2022 में अरुणाचल प्रदेश में ALH के आर्मर्ड वर्जन ‘रुद्र’ की दुर्घटना में पांच जवानों ने अपनी जान गंवाई थी। इसके बाद 2023 में चार अलग-अलग हादसे हुए, जिनमें नौसेना, सेना और तटरक्षक बल के ALH हेलिकॉप्टर शामिल थे।

इन लगातार घटनाओं के चलते सशस्त्र बलों ने 250 से अधिक ALH ध्रुव और इसके आर्मर्ड वर्जन ALH रुद्र के पूरे बेड़े को विस्तृत तकनीकी जांच के लिए अस्थाई रूप से ग्राउंडेड कर दिया था। जांच में हेलिकॉप्टर के “कलेक्टिव कंट्रोल” जैसे महत्वपूर्ण हिस्सों में समस्याएं पाई गई थीं। इसके बावजूद, दुर्घटनाएं जारी रहीं।

वहीं, सशस्त्र बल अभी भी लगातार एएलएच हेलिकॉप्टरों के नए वैरिएंट्स की लगातार खरीद कर रहे हैं। पिछले साल मार्च में, सेना के लिए 25 एएलएच मार्क-III और तटरक्षक बल के लिए 9 हेलिकॉप्टरों के निर्माण के लिए एचएएल के साथ 8,073 करोड़ रुपये के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए। इसके अलावा, तटरक्षक बल के लिए 6 नए हेलिकॉप्टरों को मंजूरी दी गई है।

तीन दशकों में 200 से अधिक हेलिकॉप्टर हादसे

भारतीय रक्षा मंत्रालय (MoD) द्वारा संसद में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, पिछले 20 वर्षों में 22 एडवांस्ड लाइट हेलिकॉप्टर (ALH) दुर्घटनाग्रस्त हुए हैं। इन हादसों के अलावा, कई हेलिकॉप्टरों को आपातकालीन लैंडिंग करनी पड़ी है। 2017 से 2021 के बीच, ALH से जुड़ी छह प्रमुख दुर्घटनाओं की रिपोर्ट दी गई थी।

भारतीय सेना को इन हेलिकॉप्टर हादसों के कारण भारी नुकसान झेलना पड़ा है। पिछले तीन दशकों के आंकड़ों पर नजर डालें तो 200 से अधिक हेलिकॉप्टर दुर्घटनाओं में कुल 297 लोगों की जान चली गई है।

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कैसे शुरू हुआ ALH ध्रुव का सफर?

पांच टन वजनी इस डबल इंजन मल्टीरोल हेलीकॉप्टर की शुरुआत 1979 में भारतीय वायुसेना के एक कार्यक्रम के तहत हुई थी। 1984 में एचएएल को इसे विकसित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई, जिसमें जर्मनी की मेसर्सचिट-बी-ल्को-ब्लोहम को तकनीकी सलाहकार के रूप में शामिल किया गया। हालांकि, यह साझेदारी 1995 में समाप्त हो गई।

पहला प्रोटोटाइप 1992 में उड़ाया गया, लेकिन परियोजना को पूरा करने में कई देरी हुई। अंततः, लगभग 55% स्वदेशी सामग्री के साथ, ALH ध्रुव को 2002 में भारतीय सशस्त्र बलों में शामिल किया गया। इसका सशस्त्र संस्करण, एमके-IV रुद्र, 2013 में सेना का हिस्सा बना।

ALH ध्रुव के चार प्रमुख संस्करण

  • Mk-I और Mk-II: पारंपरिक कॉकपिट के साथ ये शुरुआती संस्करण भारतीय सशस्त्र बलों की बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करते हैं।
  • Mk-III: आधुनिक ग्लास कॉकपिट के साथ आता है और तटरक्षक बल में इसका उपयोग खोज और बचाव मिशनों के लिए किया जाता है।
  • Mk-IV रुद्र: यह इसका सशस्त्र संस्करण है, जो उन्नत हथियार प्रणालियों और सटीक हमले की क्षमताओं से लैस है।

मल्टीरोल हेलीकॉप्टर की जरूरत क्यों है?

ALH ध्रुव को बहु-भूमिकाओं के लिए डिजाइन किया गया है। यह ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों में सैनिकों और उपकरणों की सप्लाई करने के साथ-साथ युद्ध और आपदा राहत अभियानों में भी उपयोगी है। यह हेलीकॉप्टर भारतीय सशस्त्र बलों के लिए बेहद अहम है क्योंकि यह दुर्गम और कठिन क्षेत्रों में पहुंचने की क्षमता रखता है।

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हादसों की वजहें

हाल ही में पोरबंदर में हुए हादसे के पीछे तकनीकी खराबी मुख्य वजह मानी जा रही है। इससे पहले भी कई दुर्घटनाओं में ALH ध्रुव के डिजाइन और निर्माण में खामियां सामने आई हैं। इनमें सबसे प्रमुख हैं बूस्टर कंट्रोल रॉड और कलेक्टिव जैसे महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स की समस्याएं। ये हेलीकॉप्टर की स्थिरता बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी हैं। इन हिस्सों में खामी आने से हेलीकॉप्टर उड़ान के दौरान अस्थिर हो सकता है।

इसके अलावा, टेल रोटर वाइब्रेशन वॉर्निंग सिस्टम की विफलता भी हालिया दुर्घटनाओं का कारण रही है। यह सिस्टम पायलट को हेलीकॉप्टर में किसी संभावित समस्या के संकेत देता है, लेकिन इसके सही से काम न करने पर पायलट समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठा पाते।

ध्रुव हेलीकॉप्टर का उपयोग ऊंचाई वाले और दुर्गम क्षेत्रों में सबसे ज्यादा होता है। सियाचिन ग्लेशियर और लद्दाख जैसे इलाकों में इसका व्यापक उपयोग किया जाता है, जहां तापमान -40°C तक गिर सकता है। इन कठिन परिस्थितियों में मशीनों पर अधिक दबाव पड़ता है।

इन क्षेत्रों में हेलीकॉप्टरों को अत्यधिक दक्षता और स्थिरता की जरूरत होती है। हालांकि, ध्रुव जैसे हेलीकॉप्टर सामान्य परिस्थितियों में बेहतरीन प्रदर्शन करते हैं, लेकिन इन चुनौतीपूर्ण इलाकों में इन्हें कठिनाई का सामना करना पड़ता है।

ALH ध्रुव जैसे उन्नत हेलीकॉप्टर को उड़ाने के लिए व्यापक प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है। लेकिन कई मामलों में पायलटों को पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं मिलता। इससे आपातकालीन परिस्थितियों में पायलट सही निर्णय नहीं ले पाते।

विशेषज्ञों का कहना है कि पायलटों को बेहतर प्रशिक्षण और अनुभव प्रदान कर दुर्घटनाओं की संभावना को कम किया जा सकता है।

डिजाइन में सुधार और नए वेरिएंट्स का सुझाव

एयर वाइस मार्शल मनमोहन बहादुर (सेवानिवृत्त) का कहना है, “हम अपने पायलटों और जवानों को खो रहे हैं। अब समय आ गया है कि हम जांच करें कि ALH जैसे उन्नत हेलीकॉप्टर क्यों दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं।”

मेजर जनरल संदीपन हांडा (सेवानिवृत्त) के अनुसार, “ऐसे हेलीकॉप्टर का डिजाइन करना चुनौतीपूर्ण है, जो -40°C की ठंड में ऊंचाई वाले इलाकों में काम कर सके और +50°C की गर्मी में भी। एक ही वेरिएंट के बजाय, ऊंचाई और मैदान के लिए अलग-अलग वेरिएंट पर विचार करना अधिक व्यावहारिक होगा।”

वहीं, लेह स्थित 14 कोर के रसद विभाग के प्रमुख रहे मेजर जनरल ए.पी. सिंह (सेवानिवृत्त) का कहना है कि सेना को चीता और चेतक जैसे हल्के हेलीकॉप्टरों के एक आधुनिक बेड़े की जरूरत है। हालांकि, चीता हेलीकॉप्टर की पेलोड क्षमता सीमित है।

उन्होंने कहा, “हमारे अधिकतर हेलीपैड छोटे हैं, जो 5 टन से अधिक वजन वाले हेलीकॉप्टरों को संभालने में सक्षम नहीं हैं। हमें ऐसे हेलीकॉप्टर की जरूरत है, जो छोटे हेलीपैड पर उतर सके और ज्यादा पेलोड ले जा सके।”

Armed Forces Pension: सरकार पर सख्त सुप्रीम कोर्ट! कहा- देश की रक्षा करने वालों को क्यों लड़नी पड़ रही है कानूनी लड़ाई?

Rehabilitation Of Disabled Officer Cadets Supreme Court

Armed Forces Pension: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि सशस्त्र बलों के कर्मियों और उनके परिवारों को बेवजह के कानूनी झंझटों में न फंसाया जाए। अदालत ने विशेष रूप से पेंशन से जुड़े विवादों को लेकर सरकार द्वारा बार-बार अदालतों में अपील करने की आलोचना भी की।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अभय एस. ओका और जस्टिस उज्ज्वल भुयान की बेंच ने इस मामले पर केंद्र से नीति-निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया। अदालत ने कहा, “जो लोग देश की सेवा करते हैं, उन्हें बार-बार अदालतों में घसीटना सही नहीं है। पहले से ही बहुत कम लोग सशस्त्र बलों में नौकरी करने के इच्छुक हैं। ऐसे में इन लोगों को कानूनी लड़ाइयों में क्यों फंसाया जाए?”

Armed Forces Pension: देश सेवा करने वालों को न घसीटा जाए कानूनी पचड़ों में

अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने केंद्र सरकार की अपील का बचाव करते हुए कहा कि कई मामलों में विकलांगता पेंशन के दावों को चुनौती दी जाती है, क्योंकि वे सर्विस से संबंधित नहीं होते। हालांकि, अदालत ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, “यह अधिकारी कितने वर्षों तक सेवा में रहे? जो लोग देश की सेवा करते हैं, उन्हें ऐसी लड़ाइयों में क्यों घसीटा जाए? यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।”

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की अपील को खारिज करते हुए कहा कि यह मामला न केवल देरी से पेश किया गया, बल्कि इसका कोई ठोस आधार भी नहीं था। यह मामला एक पूर्व भारतीय वायुसेना अधिकारी से जुड़ा था, जो 30 वर्षों की सेवा के बाद टाइप 2 डायबिटीज़ और प्राइमरी हाइपरटेंशन से पीड़ित थे।

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रिलीज़ मेडिकल बोर्ड (आरएमबी) ने शुरू में इन स्थितियों को सेवा से संबंधित नहीं माना था। हालांकि, सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (एएफटी) ने 2023 में दिए गए अपने फैसले में कहा कि वायुसेना की कठोर ट्रेनिंग और उससे जुड़ा तनाव इन बीमारियों का कारण हो सकता है।

एएफटी ने अधिकारी को विकलांगता पेंशन के “राउंडिंग ऑफ” का लाभ देते हुए उनकी पेंशन प्रतिशत को 50 फीसदी तक बढ़ाने का आदेश दिया था। इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया और सरकार की अपील को खारिज कर दिया।

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Armed Forces Pension: क्यों किया था एएफटी का गठन?

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा, “सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (एएफटी) की स्थापना का उद्देश्य क्या था, अगर हर मामले को सुप्रीम कोर्ट तक लाना ही है? ये लोग आपके अपने लोग हैं। उन्होंने देश की सेवा की है।” अदालत ने सरकार को याद दिलाया कि एएफटी का गठन सशस्त्र बलों से संबंधित मामलों के तेजी से निपटारे के लिए किया गया था।

हालांकि यह मामला कोई नया नहीं है। दिसंबर 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने एक सैनिक की विधवा को परिवार पेंशन देने से इनकार करने के लिए सरकार और भारतीय सेना पर 50,000 रुपये का जुर्माना ठोका था। इस मामले में जवान की पत्नी को सालों तक न्याय के लिए संघर्ष करना पड़ा।

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अदालत ने तत्कालीन सरकार के रवैये को “कठोर” और “संवेदनहीन” करार दिया था। अदालत ने कहा था कि सरकार को अपने आंतरिक तंत्र को मजबूत करना चाहिए, ताकि पेंशन विवादों से संबंधित अनावश्यक अपीलों को रोका जा सके।

3,000 से अधिक मामले अदालतों में

जानकारी के अनुसार, सशस्त्र बलों के मृत्यु और विकलांगता लाभ से जुड़े मामलों पर रक्षा मंत्रालय की लगभग 3,000 अपीलें विभिन्न उच्च न्यायालयों और सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। अदालत ने इस समस्या की गंभीरता पर ध्यान देते हुए कहा, “हर मामले को अदालत तक लाने का कोई औचित्य नहीं है। सरकार को ऐसी अपीलों को रोकने के लिए ठोस नीति बनानी चाहिए।”

अदालत ने स्पष्ट किया कि पेंशन और विकलांगता लाभ से संबंधित मामलों में सरकार का दृष्टिकोण मानवीय होना चाहिए। इन मामलों में अनावश्यक कानूनी लड़ाइयों से न केवल प्रभावित व्यक्ति, बल्कि उनके परिवारों को भी मानसिक और आर्थिक नुकसान होता है।

क्या है पेंशन विवाद के पीछे वजह?

कई मामलों में यह देखा गया है कि सरकार तकनीकी मुद्दों का हवाला देकर सैनिकों और उनके परिवारों को लाभ देने से इनकार करती है। अदालत ने इस रवैये की कड़ी आलोचना की और कहा कि पेंशन और विकलांगता लाभ सैनिकों का अधिकार है, न कि कोई विशेषाधिकार।

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Armed Forces Tribunals: SC Suggests Benches in Srinagar, Jammu, Shimla, and Dharamshala

Armed Forces Tribunals: आर्म्ड फोर्सेज से रिटायर कर्मियों और उनके परिवारों के लिए न्यायिक प्रक्रिया को आसान बनाने के उद्देश्य से, सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सशस्त्र बल न्यायाधिकरणों Armed Forces Tribunal (एएफटी) की अधिक रीजनल बेंच बनाने की बात कही है। न्यायालय ने सुझाव दिया कि सर्किट बेंचों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर न्याय उपलब्ध कराया जा सकता है, ताकि आर्म्ड फोर्स  के सदस्यों और उनके परिवारों को लंबी यात्रा और भारी खर्च से बचाया जा सके।

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चंडीगढ़ में Armed Forces Tribunal की केवल एक बेंच

जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन.के. सिंह की बेंच ने चंडीगढ़ के बारे में कहा कि यह क्षेत्र सशस्त्र बलों में योगदान के लिए जाना जाता है। यहां आर्म्ड फोर्स ट्रिब्यूनल की केवल एक बेंच होने के कारण, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर के मामलों को निपटाने में दिक्कत होती है।

Armed Forces Tribunals: श्रीनगर, जम्मू, शिमला और धर्मशाला में बनाएं बेंच

बेंच ने सुझाव दिया कि सर्किट बेंचों को श्रीनगर, जम्मू, शिमला और धर्मशाला जैसे स्थानों पर स्थापित किया जा सकता है, जहां बुनियादी सुविधाएं पहले से उपलब्ध हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया कि हिमाचल के मामले शिमला और धर्मशाला में सुने जा सकते हैं। जबकि जम्मू और श्रीनगर में भी सर्किट बेंच स्थापित की जा सकती हैं। इससे न केवल मुकदमेबाजी की लागत कम होगी, बल्कि सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों और उनके परिवारों को लंबी दूरी तय करने की आवश्यकता भी नहीं पड़ेगी।

OROP Supreme Court: सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया- इन रिटायर्ड कर्मियों को OROP के तहत नहीं मिलेगी बढ़ी हुई पेंशन!

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, “यदि रीजनल बेंच स्थापित की जाए और स्थानीय बार को इसमें शामिल किया जाए, तो न्यायिक प्रक्रिया को तेज़ और किफायती बनाया जा सकता है।”

मद्रास बार एसोसिएशन की याचिका पर सुनवाई के दौरान, वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने बताया कि एएफटी में अभी भी कई पद रिक्त हैं। उन्होंने कहा, “चंडीगढ़ में केवल एक बेंच है और एक सदस्य का तबादला हो चुका है, लेकिन उनके स्थान पर किसी की नियुक्ति नहीं हुई है। केंद्र सरकार ने कई बार नियुक्तियों का आश्वासन दिया है, लेकिन प्रगति न के बराबर है।”

भारत के अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने अदालत को बताया कि एएफटी के अध्यक्ष आंतरिक प्रशासनिक मुद्दों से अवगत हैं और चयन प्रक्रिया पूरे साल चलती रहती है। हालांकि, उन्होंने रिक्त पदों को समय पर भरने की प्राथमिकता पर जोर दिया।

एडवांस सिलेक्शन प्रोसेस पर विचार करे सरकार

बेंच ने सुझाव दिया कि भविष्य में ऐसी स्थितियों से बचने के लिए एडवांस सिलेक्शन प्रोसेस पर विचार किया जाना चाहिए। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, “किसी सदस्य के पद छोड़ने की तारीख की पहले से जानकारी होती है। अगर समय पर नियुक्तियां हो जाएं तो न्याय प्रक्रिया में देरी से बचा जा सकता है।”

सुप्रीम कोर्ट ने सर्किट बेंच के माध्यम से आर्म्ड फोर्स के सदस्यों को जस्टिस मिलने में आसानी होगी। हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में शिमला और धर्मशाला में सर्किट बेंच स्थापित की जा सकती हैं। इस पहल से सैनिकों और पूर्व सैनिकों को चंडीगढ़ तक यात्रा करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से सभी आर्म्ड फोर्स ट्रिब्यूनल में रिक्तियों की स्थिति और चयन प्रक्रिया की जानकारी देने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि सशस्त्र बलों के न्याय से जुड़े मामलों को त्वरित और प्रभावी बनाने के लिए यह बेहद जरूरी है।

Pak airstrikes on Afghanistan: भारत ने की अफगानिस्तान पर पाकिस्तानी हवाई हमलों की निंदा, कहा- पड़ोसी देशों को दोष देने की पुरानी परंपरा

Pak Airstrikes on Afghanistan: India Strongly Condemns Attacks in Paktika Province

Pak airstrikes on Afghanistan: अफगानिस्तान के कुछ इलाकों में पाकिस्तानी हवाई हमलों में कई नागरिकों, जिनमें महिलाएं और बच्चे की मौत हुई है। भारत ने सोमवार को इन हमलों की कड़ी निंदा करते हुए पाकिस्तान पर अपने पड़ोसियों को दोषी ठहराने की पुरानी आदत का आरोप लगाया है। इस्लामाबाद का दावा है कि ये ठिकाने अफगानिस्तान की सीमा के अंदर स्थित थे, जहां से कथित तौर पर उसके खिलाफ हमले की योजना बनाई जा रही थी। हालांकि, अफगान अधिकारियों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स ने इन दावों पर सवाल उठाए हैं, और कहा है कि इन हमलों में निर्दोष नागरिक हताहत हुए हैं।

Pak Airstrikes on Afghanistan: India Strongly Condemns Attacks in Paktika Province

पाकिस्तान ने इन हमलों के जरिए अफगानिस्तान में मौजूद टीटीपी के आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाने की बात कही है। इस्लामाबाद का दावा है कि ये ठिकाने अफगानिस्तान की सीमा के अंदर स्थित थे, जहां से कथित तौर पर उसके खिलाफ हमले की योजना बनाई जा रही थी।

वहीं, भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा, “हमने महिलाओं और बच्चों सहित अफगान नागरिकों पर हुए हवाई हमलों की रिपोर्टों पर ध्यान दिया है। यह हिंसा न केवल निंदनीय है, बल्कि इससे क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को गंभीर खतरा है।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि निर्दोष नागरिकों को किसी भी कीमत पर निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने पाकिस्तान पर अपने आंतरिक मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए झूठे आरोप लगाने का भी आरोप लगाया। जायसवाल ने कहा, “अपनी आंतरिक विफलताओं के लिए अपने पड़ोसियों को दोष देना पाकिस्तान की पुरानी आदत है।”  उन्होंने पाकिस्तान के इन कृत्यों को दक्षिण एशिया में अस्थिरता बढ़ाने वाला बताया।

वहीं, इस मामले में अफगानिस्तान की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। अफगान प्रवक्ता ने पाकिस्तान के दावों को खारिज करते हुए कहा, “यह हमला निर्दोष नागरिकों पर किया गया है। इसका आतंकवाद से कोई लेना-देना नहीं है।” अफगानिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस मामले में हस्तक्षेप करने और पाकिस्तान की जिम्मेदारी तय करने की अपील की है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय पर सामने आया है, जब दक्षिण एशिया में राजनीतिक और सुरक्षा स्थितियां लगातार खराब हो रही हैं। पाकिस्तान पहले ही आर्थिक संकट, बढ़ती महंगाई, और आतंरिक अस्थिरता का सामना कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान इन समस्याओं से ध्यान हटाने के लिए ऐसे कदम उठा रहा है।  वहीं, अफगानिस्तान भी, तालिबान के नियंत्रण में आने के बाद से, गहरे राजनीतिक और आर्थिक संकट से जूझ रहा है। ऐसे में इन हवाई हमलों ने दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है।

वहीं, भारत ने हमेशा से क्षेत्रीय शांति और स्थिरता पर जोर दिया है। अफगानिस्तान में शांति प्रक्रिया के दौरान भारत ने मानवीय सहायता के रूप में दवाओं, खाद्यान्न और अन्य आपातकालीन सामग्रियों की आपूर्ति की है। इस नाते, भारत ने अफगान लोगों के साथ अपनी एकजुटता व्यक्त की है।

रणधीर जायसवाल ने कहा, “हम सभी पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के माध्यम से तनाव को हल करने की अपील करते हैं। यह समय है कि क्षेत्रीय सहयोग को प्राथमिकता दी जाए और निर्दोष लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।”

विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना ने दक्षिण एशिया में स्थिरता के लिए एक बड़ा खतरा पैदा कर दिया है। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बिगड़ते रिश्तों के मद्देनजर, अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए यह जरूरी हो जाता है कि वह हस्तक्षेप करे और दोनों देशों को शांतिपूर्ण संवाद के लिए प्रोत्साहित करे।

Aero India 2025: बेंगलुरु में जुटेंगी दुनियाभर की डिफेंस कंपनियां, ‘मेक इन इंडिया’ को मिलेंगे पंख

Aero India 2025: Global Defence Giants to Gather in Bengaluru, Boost for 'Make in India'

Aero India 2025: रक्षा मंत्रालय ने सोमवार को घोषणा की कि द्विवार्षिक एयरो इंडिया 2025 (Aero India 2025) का 15वां संस्करण 10 फरवरी से बेंगलुरु के येलहंका स्थित एयरफोर्स स्टेशन पर आयोजित किया जाएगा। इस बार की थीम है ‘रनवे टू ए बिलियन ऑपर्च्युनिटीज’। यह आयोजन भारत की रक्षा और एयरोस्पेस क्षमताओं को प्रदर्शित करने के साथ-साथ स्वदेशीकरण और नई साझेदारियों को बढ़ावा देने का अवसर प्रदान करेगा।

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रक्षा मंत्रालय ने बताया कि 2023 में आयोजित एयरो इंडिया ने सात लाख से ज्यादा विजिटर, 98 देशों के प्रतिनिधियों और 809 एग्जीबिटर्स पहुंचे थे। 250 से अधिक साझेदारियों के साथ, 201 सहमति पत्र (MoUs), प्रोडक्ट लॉन्च और 75,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर दस्तखत हुए थे। इस बार का लक्ष्य इन उपलब्धियों को पार करना है और आयोजन को और भी बड़ा और भव्य बनाने का वादा किया गया है।

Explainer ALH Dhurv Crash: क्यों बार-बार क्रेश हो रहा है ध्रुव एडवांस लाइट हेलीकॉप्टर? आखिर हादसों को क्यों नहीं रोक पा रहा है HAL?

मंत्रालय ने कहा कि यह आयोजन (Aero India 2025) भारतीय और विदेशी कंपनियों के बीच साझेदारी को प्रोत्साहन देगा और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में नई संभावनाओं की खोज करेगा। मेक इन इंडिया पहल के तहत, स्वदेशी विनिर्माण क्षमताओं और अत्याधुनिक तकनीकों को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित किया जाएगा।

एयरो इंडिया 2025 में रक्षा मंत्रियों का सम्मेलन और सीईओ गोलमेज सम्मेलन काा भी आयोजन होगा। सम्मेलन का उद्देश्य मित्र देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी को मजबूती देना है। इस दौरान, रक्षा मंत्री, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) और रक्षा सचिव कई द्विपक्षीय बैठकों में भाग लेंगे।

सीईओ सम्मेलन विदेशी कंपनियों को भारत में निवेश और निर्माण के लिए प्रोत्साहित करने का मंच प्रदान करेगा। इसमें वैश्विक सीईओ, भारत के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के प्रमुख और निजी रक्षा और एयरोस्पेस कंपनियों के प्रतिनिधि भाग लेंगे।

इस आयोजन में स्टार्ट-अप इंडिया को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष कार्यक्रम रखा गया है। यह युवा उद्यमियों को अपनी क्षमताओं को प्रदर्शित करने और रक्षा क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करने का अवसर देगा। स्वदेशी निर्माण क्षमताओं को प्रदर्शित करने के लिए विशेष प्रदर्शनियों की भी योजना बनाई गई है।

एयरो इंडिया के पहले तीन दिन (10, 11 और 12 फरवरी) बिजनेस डे के तौर पर निर्धारित किए गए हैं, जबकि अंतिम दो दिन (13 और 14 फरवरी) जनता के लिए खुले रहेंगे। यह आयोजन न केवल व्यावसायिक उद्देश्यों को पूरा करेगा, बल्कि आम जनता को भारतीय रक्षा क्षमताओं का प्रदर्शन देखने का अवसर भी देगा।

एयरो इंडिया में हवाई प्रदर्शन भी शामिल होंगे। यह आयोजन एयरोस्पेस क्षेत्र से सैन्य प्लेटफार्मों की एक विस्तृत श्रृंखला को प्रदर्शित करेगा। भारत का इंडिया पैवेलियन स्वदेशी रक्षा उत्पादों, अत्याधुनिक तकनीकों और भविष्य की संभावनाओं को प्रस्तुत करेगा।

यह आयोजन केवल भारत की तकनीकी और सैन्य क्षमताओं का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह भारत की वैश्विक उपस्थिति को मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को प्रोत्साहन देने का भी प्रयास है। भारतीय रक्षा और एयरोस्पेस उद्योगों को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान दिलाने की दिशा में यह आयोजन मील का पत्थर साबित हो सकता है।

एयरो इंडिया 2025 आत्मनिर्भर भारत अभियान का हिस्सा है, जो देश को रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इस आयोजन में दिखाए जाने वाले उत्पाद और तकनीकें न केवल भारतीय सशस्त्र बलों की जरूरतों को पूरा करेंगी, बल्कि वैश्विक निर्यात बाजार में भी अपनी जगह बनाएंगी।

Explainer ALH Dhurv Crash: क्यों बार-बार क्रैश हो रहा है ध्रुव एडवांस लाइट हेलीकॉप्टर? आखिर हादसों को क्यों नहीं रोक पा रहा है HAL?

Explainer ALH Dhurv Crash: Why Do Crashes Keep Happening?

Explainer ALH Dhurv Crash: गुजरात के पोरबंदर में भारतीय तटरक्षक बल का एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (ALH) ध्रुव क्रैश होने से दो पायलट और एक अन्य क्रू मेंबर की मौत हो गई। यह दुर्घटना उस वक्त हुई जब नियमित ट्रेनिंग के दौरान हेलीकॉप्टर में तकनीकी खराबी आ गई। यह पहली बार नहीं है जब HAL (हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड) का बनाया यह हेलीकॉप्टर हादसे का शिकार हुआ है।

Explainer ALH Dhurv Crash: Why Do Crashes Keep Happening?

पिछले कुछ वर्षों में ALH ध्रुव और इसके दूसरे वर्जन के कई हादसे हुए हैं। इन दुर्घटनाओं ने एएलएच के सुरक्षा मानकों और डिजाइन खामियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ALH ध्रुव का इस्तेमाल भारतीय सशस्त्र बल खोज और बचाव अभियान, रेकी, ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सामान और हथियार पहुंचाने जैसे कार्यों के लिए इस्तेमाल करते हैं।

Explainer ALH Dhurv Crash: तीन दशक में 200 से अधिक हेलिकॉप्टर हादसे

केंद्रीय रक्षा मंत्रालय (MoD) द्वारा संसद को दिए गए आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक पिछले 20 सालों में, 22 ALH दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं और कई को आपातकालीन लैंडिंग करनी पड़ी। MoD के आंकड़ों के अनुसार, 2017 और 2021 के बीच ALH से जुड़ी छह दुर्घटनाओं की सूचना दी गई। कुल मिलाकर, भारतीय सेना को इन हेलीकॉप्टर हादसों से बड़ा नुकसान हुआ है। पिछले तीन दशकों में, 200 से अधिक हेलिकॉप्टर दुर्घटनाओं में 297 लोगों की जान चली गई है। पिछले पांच वर्षों में, भारतीय सेना ने देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत सहित 40 कर्मियों को हेलिकॉप्टर दुर्घटनाओं में खो दिया है।

2023 में पूरे बेड़े को कर दिया था ग्राउंड

गुजरात के पोरबंदर में हाल ही में हुए हादसे में भारतीय तटरक्षक बल का एक ALH ध्रुव हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें दो पायलट और एक क्रू मेंबर की मौत हो गई। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, उड़ान के दौरान तकनीकी खराबी के कारण यह हादसा हुआ। हालांकि यह पहली बार नहीं है जब ALH ध्रुव किसी दुर्घटना का शिकार हुआ है। 2022 में अरुणाचल प्रदेश में एक एएलएच का आर्मर्ड वर्जन ‘रूद्र’ दुर्घटनाग्रस्त हुआ था, जिसमें पांच जवान मारे गए थे। इसके बाद 2023 में तीन अलग-अलग हादसे हुए, जिनमें नौसेना, सेना और तटरक्षक बल के ALH शामिल थे। इन घटनाओं के बाद 250 से अधिक ALH ध्रुव और इसके आर्मर्ड वर्जन ALH रुद्र के पूरे बेड़े को विस्तृत जांच के लिए अस्थाई तौर पर ग्राउंडेड कर दिया गया।

ALH ध्रुव: क्या है इसकी खासियत?

ALH ध्रुव का निर्माण हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने किया है। ध्रुव एक मल्टीरोल हेलीकॉप्टर है, जिसे भारतीय सशस्त्र बलों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। इसका उपयोग सैनिकों और रसद की आपूर्ति, चिकित्सा निकासी, और राहत कार्यों के लिए किया जाता है। पांच टन वजनी डबल इंजन मल्टीरोल हेलीकॉप्टर का कार्यक्रम भारतीय वायुसेना द्वारा 1979 में शुरू किया गया था।  एचएएल को 1984 में इसे डेवलप करने के लिए कहा गया था, और जर्मनी के मेसर्सचिट-बी-ल्को-ब्लोहम को एडवइजर बनाया गयाा। लेकिन यह व्यवस्था 1995 तक समाप्त हो गई। पहले प्रोटोटाइप ने 1992 में उड़ान भरी। हालांकि, इस परियोजना में कई देरी हुई। अंत में, लगभग 55 फीसदी स्वदेशी सामग्री के साथ, एएलएच ध्रुव को 2002 में सशस्त्र बलों में शामिल किया गया; इसके सशस्त्र संस्करण एमके-IV रुद्र को 2013 में शामिल किया गया था। इसके चार वैरिएंट हैं। जिनमें Mk-I और Mk-II पारंपरिक कॉकपिट के साथ आते हैं। जबकि Mk-III और Mk-IV इसका मिलिट्री वर्जन रूद्र है, जो आधुनिक ग्लास कॉकपिट और विपन सिस्टम के साथ आता है।

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हालांकि, इनकी खूबियों के बावजूद, ALH ध्रुव बार-बार हादसों का शिकार हो रहा है, जिससे इसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं।

Explainer ALH Dhurv Crash: Why Do Crashes Keep Happening?

Explainer ALH Dhurv Crash: हादसों की मुख्य वजहें

हाल ही में पोरबंदर में हुए हेलीकॉप्टर क्रेश में जो शुरुआती वजह सामने आई है उसमें तकनीकी गड़बड़ी को बताया गया है। इससे पहले भी हुए हादसों में ध्रुव हेलीकॉप्टर के डिजाइन और निर्माण में कई तकनीकी खामियां सामने आई हैं। इनमें सबसे प्रमुख है ‘बूस्टर कंट्रोल रॉड’ और ‘कलेक्टिव’ जैसे महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स में खामियां पाई गई हैं। ये हिस्से हेलीकॉप्टर की स्थिरता को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। यदि इनमें कोई समस्या हो, तो उड़ान के दौरान हेलीकॉप्टर अस्थिर हो सकता है।

इसके अलावा, हालिया हादसों में ‘टेल रोटर वाइब्रेशन वॉर्निंग सिस्टम’ के सही तरीके से काम न करने की शिकायतें भी सामने आई हैं। यह सिस्टम हेलीकॉप्टर के पायलट को किसी भी संभावित समस्या के संकेत देता है। लेकिन, इसकी विफलता के कारण कई बार पायलट समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठा पाते।

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4 मई को जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में हुए एएलएच. हादसे में टेल रोटर वाइब्रेशन वॉर्निंग सिस्टम ने पायलट को सचेत नहीं किया था। नौसेना का एएलएच., जो 8 मार्च को अरब सागर में गिरा था, माना जाता है कि बूस्टर कंट्रोल रॉड में तकनीकी खराबी के कारण ऐसा हुआ था।

रखरखाव की कमी

हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा निर्मित ध्रुव हेलीकॉप्टरों के रखरखाव को लेकर भी गंभीर चिंताएं हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, पुराने पुर्जों का उपयोग और खराब गुणवत्ता वाले स्पेयर पार्ट्स दुर्घटनाओं का मुख्य कारण बनते हैं।

सेना और अन्य बलों ने HAL पर बार-बार हेलीकॉप्टरों के नियमित रखरखाव में कोताही बरतने का आरोप लगाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर रखरखाव के मानकों का सही तरीके से पालन किया जाए, तो इन हादसों को रोका जा सकता है।

कठिन भौगोलिक परिस्थितियां

भारत के ऊंचाई वाले और दुर्गम क्षेत्रों में ध्रुव हेलीकॉप्टर का व्यापक उपयोग होता है। विशेष रूप से, सियाचिन ग्लेशियर और लद्दाख जैसे इलाकों में, जहां अत्यधिक ठंड और कम ऑक्सीजन के कारण मशीनों पर अधिक दबाव पड़ता है।

इन कठिन परिस्थितियों में हेलीकॉप्टरों को अधिक दक्षता और स्थिरता की जरूरत होती है। हालांकि, ध्रुव जैसी मशीनें, जो सामान्य परिस्थितियों में बेहतरीन प्रदर्शन करती हैं, इन चुनौतीपूर्ण इलाकों में अक्सर दबाव का सामना नहीं कर पातीं।

पायलट प्रशिक्षण की कमी

ALH जैसे एडवांस हेलीकॉप्टर को ऑपरेट करने के लिए विशेष और व्यापक प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है। लेकिन, कई मामलों में पायलटों को पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं मिलता। इससे आपात स्थितियों में सही निर्णय लेने की उनकी क्षमता प्रभावित होती है।

मैदान और पहाड़ के लिए बनाएं अलग-अलग वैरिएंट

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पायलटों को उचित प्रशिक्षण और अनुभव प्रदान किया जाए, तो दुर्घटनाओं की संभावना को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

एयर वाइस मार्शल मनमोहन बहादुर (सेवानिवृत्त) कहते हैं, “हम अपने लोगों को खो रहे हैं। अब समय आ गया है कि हम जांच करें कि भारत के सबसे उन्नत हेलीकॉप्टर माने जाने वाले एएलएच क्यों दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं।”

वहीं, आर्मी एविएशन के पूर्व अतिरिक्त महानिदेशक और अनुभवी हेलीकॉप्टर पायलट मेजर जनरल संदीपन हांडा (सेवानिवृत्त) का कहना है, “ऐसे हेलीकॉप्टर को डिजाइन करना बेहद चुनौतीपूर्ण है, जो एक तरफ -40 डिग्री सेल्सियस की कड़क ठंड में ऊंचाई वाले इलाकों में काम कर सके और दूसरी तरफ +50 डिग्री सेल्सियस की तपती गर्मी वाले रेगिस्तानी इलाकों में भी। हर तरह की परिस्थितियों के लिए एक ही प्रकार का हेलीकॉप्टर बनाने की बजाय, दो अलग-अलग वैरिएंट पर विचार करना अधिक समझदारी होगी, एक ऊंचाई वाले इलाकों के लिए और दूसरा मैदानी इलाकों के लिए।”

लेह स्थित 14 कोर के रसद विभाग के प्रमुख रहे मेजर जनरल ए.पी. सिंह (सेवानिवृत्त) का कहना है, “सेना को चीता और चेतक जैसे हल्के हेलीकॉप्टरों के एक आधुनिक बेड़े की जरूरत है, लेकिन उनकी रफ्तार में सुधार होना चाहिए।” हालांकि, चीता हेलीकॉप्टर बहुत अधिक ऊंचाई पर केवल 20 किलोग्राम का पेलोड ले जा सकता है। इसका मतलब है कि सेना को सिर्फ 20 किलोग्राम सामान ले जाने के लिए प्रति उड़ान 60,000 रुपये का खर्च करना पड़ता है।

मेजर जनरल सिंह आगे कहते हैं, “हमारे अधिकांश हेलीपैड छोटे हैं, जो 5 टन से अधिक वजन वाले बड़े हेलीकॉप्टरों को नहीं संभाल सकते। ऐसे में हमें ऐसे हेलीकॉप्टर की जरूरत है, जो छोटे हेलीपैड पर उतरने में सक्षम हो और साथ ही ज्यादा पेलोड ले जा सके।”

ALH के निर्यात पर पड़ सकता है असर

हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने ALH को भारतीय सशस्त्र बलों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया था। यह हेलीकॉप्टर ‘मेक इन इंडिया’ अभियान का एक प्रमुख उदाहरण है। HAL का दावा है कि हर दुर्घटना के बाद व्यापक जांच और सुधार किए जाते हैं।

भारत ALH ध्रुव का निर्यात बढ़ाने की योजना बना रहा है। फिलीपींस जैसे देशों के साथ बातचीत चल रही है, लेकिन इक्वाडोर का अनुभव इस परियोजना के लिए एक सबक है। इक्वाडोर ने 2009-2012 के बीच सात ALH खरीदे थे, लेकिन चार दुर्घटनाओं के बाद उसने 2015 में कॉन्ट्रैक्ट खत्म कर दिया। अगर भारत को इस हेलीकॉप्टर को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सफल बनाना है, तो सुरक्षा और गुणवत्ता में सुधार करना बेहद जरूरी है।

INS Tushil: भारतीय नौसेना का INS तुशिल पहुंचा सेनेगल, भारत के भारत के ‘सागर’ अभियान का प्रमुख हिस्सा

INS Tushil: Indian Navy's Stealth Frigate Reaches Senegal, Strengthening 'SAGAR' Vision

INS Tushil: भारतीय नौसेना का लेटेस्ट स्टील्थ फ्रिगेट INS तुशील 3 जनवरी 2025 को सेनेगल के डकार पोर्ट पर पहुंचा। यह दौरा भारत और सेनेगल के बीच पहले से मजबूत संबंधों को और मजबूती देगा और दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच संवाद और सहयोग को बढ़ाएगा। INS तुशील का नेतृत्व कैप्टन पीटर वर्गीस कर रहे हैं। सेनेगल की इस यात्रा के दौरान वे वहां के सैन्य और सरकारी अधिकारियों के साथ कई महत्वपूर्ण मुलाकातें करेंगे। इसके अलावा, जहाज पर भारत में निर्मित उन्नत हथियार, सेंसर और उपकरण प्रदर्शित किए जाएंगे।

INS Tushil: Indian Navy's Stealth Frigate Reaches Senegal, Strengthening 'SAGAR' Vision

भारतीय नौसेना की तरफ से जारी विज्ञप्ति के मुताबिक INS Tushil की यह यात्रा सिर्फ सैन्य उद्देश्यों तक सीमित नहीं है। इसमें विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी शामिल हैं। सेनेगल के नौसेना विशेषज्ञों और भारतीय नौसेना के विशेषज्ञों के बीच विचार-विमर्श और प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएंगे। सेनेगल के योग उत्साहियों के लिए विशेष योग सत्र की योजना बनाई गई है। इसके अलावा भारतीय संस्कृति को प्रदर्शित करने के लिए जहाज पर सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। यह दौरा भारत के ‘सागर’ (Security and Growth for All in the Region) विजन का एक प्रमुख हिस्सा है, जो भारत के समुद्री पड़ोसियों और वैश्विक भागीदारों के साथ समुद्री सहयोग को बढ़ाने की प्रतिबद्धता को भी जताता है।

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डकार पोर्ट से रवाना होने के बाद, INS Tushil सेनेगल की नौसेना के साथ एक पैसेज एक्सरसाइज (PASSEX) और जॉइंट पेट्रोलिंग में भी हिस्सा लेगा। यह अभ्यास दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच समुद्री सुरक्षा और इंटरऑपरेबिलिटी को बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण कदम है।

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इस दौरे का उद्देश्य न केवल सेनेगल और भारत के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत करना है, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा को बढ़ावा देना भी है। पश्चिम अफ्रीकी तट के जल क्षेत्र में INS तुशील की उपस्थिति इस बात को दर्शाती है कि भारत क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा के लिए अपनी भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है।

INS तुशील का यह दौरा दोनों नौसेनाओं को एक-दूसरे से सीखने और नई संभावनाओं को तलाशने का अवसर प्रदान करेगा। सेनेगल और भारत के बीच मजबूत रक्षा संबंध और बढ़ती दोस्ती इस यात्रा का प्रमुख आकर्षण है। यह दौरा न केवल दोनों देशों के लिए फायदेमंद है, बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक शांति और स्थिरता को भी बढ़ावा देने में सहायक होगा।

क्या है INS Tushil और उसकी खूबियां

भारतीय नौसेना के गौरव में हाल ही में शामिल हुआ INS तुशिल, भारत की समुद्री ताकत का एक नया प्रतीक है। यह स्टेल्थ फ्रिगेट न केवल अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग करता है, बल्कि स्वदेशी निर्माण का भी अद्भुत उदाहरण है। INS तुशिल को इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि यह दुश्मन के रडार की नजर से बच सके और गुपचुप अपने मिशन को अंजाम दे सके।

INS तुशिल अत्याधुनिक हथियारों और सेंसर से लैस है। इसका ऑनबोर्ड हथियार प्रणाली और रडार आधुनिक युद्ध की हर चुनौती का सामना करने में सक्षम है। इसकी स्टेल्थ तकनीक इसे अदृश्य बना देती है, जिससे यह दुश्मन के इलाके में बिना पहचान के प्रवेश कर सकता है।

इस फ्रिगेट की एक और खासियत है इसकी लंबी दूरी तक निगरानी और आक्रमण करने की क्षमता। यह समुद्री गश्त के साथ-साथ रणनीतिक मिशन को अंजाम देने के लिए भी तैयार है। INS तुशिल भारतीय नौसेना की आत्मनिर्भरता और आधुनिकता का प्रतीक है, जो आने वाले समय में भारत की समुद्री ताकत को और मजबूत करेगा।

Explainer Indian Army Promotion Policy: भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट जनरल बनने के लिए क्या है नई प्रमोशन पॉलिसी, क्यों हो रहा हैं इस पर विवाद? जानें

Explainer Indian Army Promotion Policy: Merit-Based Changes for Lieutenant Generals, Why the Controversy?
Credit: Indian Army

Explainer Indian Army Promotion Policy: भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट जनरल रैंक के अधिकारियों की प्रमोशन प्रक्रिया में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। नई प्रमोशन नीति के तहत भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट जनरल बनने के लिए अब केवल वरिष्ठता ही नहीं, बल्कि ग्रेडिंग भी अहम होगी। 31 मार्च 2025 से लागू होने वाली इस नई नीति के तहत लेफ्टिनेंट जनरल रैंक के अधिकारियों को उनके प्रदर्शन के आधार पर 1 से 9 तक की स्केल में मापा जाएगा। इससे सेना में मेरिट-आधारित चयन प्रक्रिया को बढ़ावा मिलेगा। यह प्रणाली सेना के शीर्ष अधिकारियों की जिम्मेदारियों को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए तैयार की गई है। इससे पहले यह नीति भारतीय वायुसेना और नौसेना में पहले से ही लागू है।

Explainer Indian Army Promotion Policy: Merit-Based Changes for Lieutenant Generals, Why the Controversy?
Credit: Indian Army

Explainer Indian Army Promotion Policy: क्या है नई प्रणाली में खास?

भारतीय सेना इस समय बदलाव के दौर से गुजर रही है। भारतीय सेना में मॉर्डेनाइजेशन के साथ स्ट्रक्चर में जरूरी बदलाव भी किए जा रहे हैं। सेना की प्रमोशन पॉलिसी में लगातार बदलाव देखे जा रहे हैं। वहीं अब नया बदलाव सेना में वरिष्ठ अधिकारियों के प्रमोशन लेकर हुआ है।

अब तक भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट जनरल रैंक तक प्रमोशन वरिष्ठता के आधार पर होता था। लेकिन नई प्रणाली में प्रदर्शन को प्राथमिकता दी जाएगी। अधिकारियों को उनकी वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) में 1 से 9 के स्केल पर ग्रेडिंग दी जाएगी। इस ग्रेडिंग का सीधा असर उनकी प्रमोशन और भविष्य की जिम्मेदारियों पर पड़ेगा। भारतीय वायुसेना और नौसेना में पहले से ही यह प्रणाली लागू है और अब सेना ने इसे अपनाने का फैसला किया है।

सेना में 90 लेफ्टिनेंट जनरल, 300 मेजर जनरल और 1,200 ब्रिगेडियर

सूत्रों का कहना है  कि इस बदलाव का उद्देश्य है सेना के शीर्ष अधिकारियों की नियुक्ति में पारदर्शिता और योग्यता को प्राथमिकता देना। यह नई पॉलिसी थियेटर कमांड्स और ट्राई-सर्विस (सेना, नौसेना, और वायुसेना) के वरिष्ठ पदों पर अधिकारियों की नियुक्ति में मदद करेगी।

लेफ्टिनेंट जनरल रैंक भारतीय सेना में थ्री-स्टार रैंक का पद होता है। भारतीय सेना के 11 लाख जवानों में लगभग 90 लेफ्टिनेंट जनरल, 300 मेजर जनरल और 1,200 ब्रिगेडियर हैं। लेफ्टिनेंट जनरल बनने के बाद अधिकारी को कोर कमांडर या आर्मी कमांडर जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलती हैं। अब नई प्रणाली के तहत यह सुनिश्चित किया जाएगा कि केवल योग्य और बेहतर प्रदर्शन करने वाले अधिकारी ही इन पदों पर पहुंचें। क्योंकि अभी तक इन पदों पर सीनियरिटी के आधार पर ही पहुंच पाते थे।

थिएटर कमांड पर है फोकस

भारतीय सेना में थिएटर कमांड्स की योजना के मद्देनजर यह नई प्रणाली लागू की जा रही है। यह कमांड्स भारत की तीन प्रमुख सीमाओं- चीन, पाकिस्तान और हिंद महासागर क्षेत्र पर केंद्रित होंगी। चीन-विशेष थिएटर कमांड लखनऊ में, पाकिस्तान-विशेष थिएटर कमांड जयपुर में और समुद्री थिएटर कमांड तिरुवनंतपुरम में बनाया जाएगा। उम्मीद जताई जा रही है कि इस साल के मध्य तक थिएटर कमांड्स बनाने का काम पूरा हो जाएगा। इन थिएटर कमांड्स का उद्देश्य भारतीय सेना को एकीकृत और अधिक प्रभावी युद्धक क्षमता प्रदान करना है।

नई प्रमोशन नीति से सेना में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ने की उम्मीद है। अब तक वरिष्ठता के आधार पर अधिकारियों को जिम्मेदारियां दी जाती थीं। लेकिन नई प्रणाली में ग्रेडिंग के जरिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सही अधिकारी को सही पद पर नियुक्त किया जाए। इससे न केवल सेना की कार्यकुशलता में सुधार होगा, बल्कि भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए सेना को बेहतर तरीके से तैयार किया जा सकेगा।

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नई नीति की क्यों हो रही आलोचना

हालांकि सेना के इस कदम को सुधारवादी बताया जा रहा है, लेकिन इसने विवाद भी खड़े कर दिए हैं। वर्तमान में, लेफ्टिनेंट जनरल रैंक तक प्रमोशन के लिए वरिष्ठता का आधार जन्मतिथि और नियुक्ति की तिथि होती है। लेकिन नई पॉलिसी में मेरिट को प्राथमिकता देने से संभावित राजनीतिक हस्तक्षेप बढ़ सकता है।

नई नीति के लागू होने के साथ ही विवाद भी शुरू हो गए हैं। नई प्रणाली में प्रदर्शन को प्राथमिकता देने से प्रतिस्पर्धा और दबाव बढ़ सकता है। कुछ अधिकारियों को यह भी डर है कि ग्रेडिंग प्रणाली में भेदभाव या पक्षपात हो सकता है।

कई अधिकारियों ने इस पॉलिसी पर चिंता जताई है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “थ्री-स्टार जनरल बनने के लिए पहले ही कई स्तरों पर मेरिट के आधार पर प्रमोशन मिलता है। इस नई प्रणाली से गैरजरूरी हस्तक्षेप की संभावना बढ़ जाएगी।”

रिटायर्ड मेजर जनरल राजू चौहान का कहना है कि नई नीति से अधिकारियों के प्रदर्शन को सम्मान मिलेगा। हालांकि, इससे संभावित पक्षपात और विवाद का खतरा भी है।

वहीं, पूर्व रक्षा विशेषज्ञ मन अमन सिंह छिन्ना का मानना है कि सेना को ब्रिगेडियर से लेकर लेफ्टिनेंट जनरल तक प्रो-राटा सिस्टम को खत्म कर देना चाहिए और पूरी तरह से मेरिट-आधारित चयन करना चाहिए।

जबकि रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लों उसके पक्ष में हैं, उनके अनुसार, “यह नीति उन अधिकारियों का सम्मान करेगी जो वर्तमान में अपनी रैंक पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। पहले प्रमोशन की प्रक्रिया किसी की जन्म तिथि या 38 साल पहले की अकादमी की रैंकिंग पर निर्भर करती थी।”

सेना में लेफ्टिनेंट जनरल बनने के बाद अधिकारी को आर्मी कमांडर या वाइस चीफ बनने के लिए वरिष्ठता और रेसिड्यूल सर्विस के आधार पर चुना जाता है। लेकिन ग्रेडिंग प्रणाली यह सुनिश्चित करेगी कि सही व्यक्ति को जिम्मेदारी मिले।

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सैनिक कमांडर और वाइस चीफ पर लागू नहीं होगी यह नीति

सेना के उप-प्रमुख और सात कमांडर-इन-चीफ (C-in-C) इस नई नीति के दायरे में नहीं आएंगे। इन पदों पर नियुक्ति अभी भी वरिष्ठता के आधार पर होगी। लेफ्टिनेंट जनरल के पद पर पहुंचने के बाद, अधिकारी को कोर कमांडर बनाने के लिए उनकी ग्रेडिंग और प्रदर्शन देखा जाएगा। आर्मी कमांडर का पद भी लेफ्टिनेंट जनरल को मिलता है। ग्रेडिंग प्रणाली से यह तय किया जाएगा कि कौन-से अधिकारी आर्मी कमांडर बनने के योग्य हैं।

ग्रेडिंग प्रणाली और थिएटर कमांड्स की योजना सेना को आधुनिक और प्रभावी बनाने की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि, इस नीति की सफलता इसके निष्पक्ष और कुशल कार्यान्वयन पर निर्भर करेगी। नई प्रणाली का उद्देश्य सेना को पारदर्शिता, योग्यता और आधुनिकता की ओर ले जाना है, जो इसे भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करेगी।

हालांकि, इस प्रणाली को लागू करने में कई चुनौतियां भी हैं। ग्रेडिंग प्रणाली में भेदभाव की संभावना को नकारा नहीं जा सकता। अधिकारियों पर प्रदर्शन करने का अतिरिक्त दबाव भी होगा। इसके अलावा, राजनीतिक हस्तक्षेप और पक्षपात की संभावनाएं भी मौजूद हैं।

Fighter Jet Mystery: सैटेलाइट तस्वीरों में बरेली एयरफोर्स स्टेशन पर दिखा रहस्यमयी फाइटर जेट! लोग बोले- राफेल है या तेजस MkII?

Fighter Jet Mystery: Rafale or Tejas MkII Mockup Spotted at Bareilly Airbase
Credit: Reddit

Fighter Jet Mystery: उत्तर प्रदेश के बरेली एयरफोर्स स्टेशन पर एक फाइटर जेट मॉकअप की सैटेलाइट इमेज ने हलचल मचा दी है। इन तस्वीरों में एक फाइटर जेट का सिल्हूट देखा गया। जिससे रक्षा विशेषज्ञों के बीच बहस छिड़ गई कि यह मॉकअप डसॉल्ट राफेल का है या स्वदेशी रूप से विकसित HAL तेजस MkII का।

Fighter Jet Mystery: Rafale or Tejas MkII Mockup Spotted at Bareilly Airbase
Credit: Reddit

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Reddit पर इन तस्वीरों को लेकर बहस छिड़ी है। एक यूजर ने लिखा, “बरेली में राफेल मॉकअप क्यों है? यह जगह राफेल स्क्वाड्रन के लिए नहीं जानी जाती।” वहीं, दूसरे यूजर ने लिखा, “राफेल के विंगटिप्स पर हमेशा MICA मिसाइल के लिए रेल होते हैं, जो यहां नहीं दिखाई दे रहे हैं। इससे उनका यह अनुमान है कि यह तेजस MkII हो सकता है।

Fighter Jet Mystery: क्यों इस्तेमाल किया जाता है मॉकअप?

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, मॉकअप का उपयोग ग्राउंड क्रू को ट्रेनिंग देने के लिए किया जाता है। इस ट्रेनिंग से उन्हें असली विमान को संभालने, उसे पार्क करने और विमान ऑपरेट की प्रक्रियाओं को समझने में मदद मिलती है।  इस तरह की ट्रेनिंग असली विमान को कोई नुकसान पहुंचाए बिना की जाती है। इसके लिए मॉकअप का इस्तेमाल किया जाता है।

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वहीं, सूत्रों का कहना है कि अगर यह राफेल का मॉकअप है, तो यह संभावित भविष्य की तैनाती के लिए ट्रेनिंग का हिस्सा हो सकता है। वहीं, अगर यह तेजस MkII का मॉकअप है, तो यह संकेत हो सकता है कि भारतीय वायु सेना पहले से ही इस स्वदेश में ही बने फाइटर जेट को अपने बेड़े में शामिल करने की तैयारी कर रही है।

Fighter Jet Mystery: राफेल है या तेजस MkII

मॉकअप की पहचान को लेकर काफी अटकलें लगाई जा रही हैं। यूजर्स का कहना है कि MICA मिसाइल रेल की इस पर दिखाई नहीं दे रही है। जबकि राफेल जेट के विंगटिप्स पर ये रेल हमेशा मौजूद रहती हैं। हालांकि, सैटेलाइट इमेजरी की क्वॉलिटी और एंगल के चलते ये जानकारी सही से नहीं पा रही है।

बरेली एयरफोर्स स्टेशन सेंट्रल एयर कमांड के तहत आता है। यहां मुख्यतौर पर सुखोई Su-30MKI फाइटरजेट तैनात हैं। यहां राफेल स्क्वाड्रन की गैर-मौजूदगी इस मॉकअप की पहचान को लेकर सवाल खड़े कर रही है। यूजर्स का कहना है कि क्या यहां एय़रफोर्स राफेल तैनात करने की योजना बना रही है?

क्या है रणनीति?

वहीं, कई विशेषज्ञ यह मानते हैं कि मॉकअप एक रणनीतिक योजना का हिस्सा हो सकता है, जिसमें भविष्य की तैनाती, विरोधियों को गुमराह करना, ऑपरेशनल तैयारियों की जांच करना शामिल हो सकता है। इससे भारत अपनी सामरिक क्षमताओं के बारे में भ्रम पैदा कर सकता है।

अगर यह मॉकअप तेजस MkII का है, तो इसकी तैनाती भारतीय वायु सेना के बेड़े को मजबूत करेगी और स्वदेशी रक्षा उद्योग को बढ़ावा देगी।

बरेली एयरफोर्स स्टेशन पर इस फाइटर जेट मॉकअप की मौजूदगी ने कई अटकलों को जन्म दे दिया है। यह मॉकअप चाहे ट्रेनिंग का हिस्सा हो, रणनीतिक तैनाती की तैयारी या एक कन्फ्यूज करने की एक चाल, यह भारतीय वायु सेना की एडवांस सोच और क्षमताओं को प्रदर्शित करता है।