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Indian Army Job Alert: इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स के लिए सेना में निकली बंपर वैकेंसी, सैलरी मिलेगी 2,50,000 रुपये तक, जानें क्या है योग्यता

Indian Army Job Alert: Engineering Graduates Can Earn Up to Rs 2.5 Lakh, Apply Now!

Indian Army Job Alert: भारतीय सेना ने अविवाहित पुरुष और महिला इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स (Unmarried Engineering Graduates) के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की है। इस भर्ती के तहत शॉर्ट सर्विस कमीशन (Short Service Commission) के 381 पदों पर आवेदन मांगे गए हैं। इच्छुक उम्मीदवार 5 फरवरी 2025 तक आवेदन कर सकते हैं।

Indian Army Job Alert: Engineering Graduates Can Earn Up to Rs 2.5 Lakh, Apply Now!
File Photo

Indian Army Job Alert: आयु सीमा 20 से 27 वर्ष

एसएससी इंजीनियरिंग के लिए उम्मीदवारों की आयु सीमा 20 से 27 वर्ष निर्धारित की गई है। साथ ही, जो उम्मीदवार इंजीनियरिंग डिग्री पूरी कर चुके हैं या अंतिम वर्ष में हैं, वे आवेदन करने के पात्र हैं। आवेदन करने वालों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि वे भारत के नागरिक हों। इसके अलावा, वीर नारियां भी भर्ती के लिए आवेदन कर सकती हैं।

Indian Army Job Alert: इंजीनियरिंग के इन क्षेत्रों में वैकेंसी

भारतीय सेना ने इस भर्ती में पुरुष और महिला दोनों के लिए अलग-अलग पद तय किए हैं। इंजीनियरिंग के विभिन्न क्षेत्रों जैसे सिविल, कंप्यूटर साइंस, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, मैकेनिकल, और अन्य क्षेत्रों में कुल 381 पद उपलब्ध हैं। पुरुषों के लिए 350 पदों की व्यवस्था की गई है, जिनमें सिविल इंजीनियरिंग में 75, कंप्यूटर साइंस में 60, इलेक्ट्रिकल में 33, इलेक्ट्रॉनिक्स में 64, और मैकेनिकल में 101 पद शामिल हैं। वहीं, महिलाओं के लिए कुल 29 पद हैं, जिनमें सिविल के 7, कंप्यूटर साइंस के 4, इलेक्ट्रिकल के 3, और मैकेनिकल के 9 पद शामिल हैं।

वीर नारियों के लिए भी इस भर्ती में दो विशेष पद हैं। तकनीकी क्षेत्र में एक और गैर-तकनीकी क्षेत्र में एक पद शामिल है। वीर नारियों के लिए अधिकतम आयु सीमा 35 वर्ष तय की गई है।

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इस भर्ती प्रक्रिया में चयन का आधार उम्मीदवारों की शैक्षणिक योग्यता और मेरिट पर होगा। चयनित उम्मीदवारों को प्रशिक्षण केंद्रों में भेजा जाएगा, जहां उन्हें जरूरी आर्मी ट्रेनिंग दी जाएगी। फाइनल चयन से पहले उम्मीदवारों का मेडिकल परीक्षण भी किया जाएगा।

‘ऑफिसर एंट्री अप्लिकेशन/लॉगिन’ पर क्लिक करें

भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन रखा गया है। आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों को भारतीय सेना की आधिकारिक वेबसाइट joinindianarmy.nic.in पर जाना होगा। यहां उन्हें ‘ऑफिसर एंट्री अप्लिकेशन/लॉगिन’ पर क्लिक करना होगा और रजिस्ट्रेशन फॉर्म भरना होगा। रजिस्ट्रेशन के बाद, उम्मीदवार ‘अप्लाई ऑनलाइन’ के माध्यम से आवेदन फॉर्म भर सकते हैं। फॉर्म भरते समय हर सेक्शन को सेव करते हुए आगे बढ़ना होगा। सभी जानकारियों की पुष्टि के बाद, उम्मीदवार फॉर्म सबमिट कर सकते हैं।

Indian Army Job Alert: 56,100 से 2,50,000 रुपये तक का वेतन

इस भर्ती में चयनित होने वाले उम्मीदवारों को 56,100 से 2,50,000 रुपये तक का वेतन मिलेगा। लेफ्टिनेंट रैंक पर नियुक्त होने वाले उम्मीदवारों को 56,100 से 1,77,500 रुपये तक का मासिक वेतन मिलेगा। वहीं, सेना प्रमुख (COAS) के पद पर वेतन 2,50,000 रुपये तक पहुंच सकता है। इसके साथ ही, विभिन्न रैंकों पर अन्य भत्ते और सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी।

सेना के सैलरी स्ट्रक्चर में हर रैंक के अधिकारियों के लिए अलग-अलग ग्रेड और स्तर निर्धारित किए गए हैं। उदाहरण के तौर पर, कैप्टन का वेतन 61,300 से 1,93,900 रुपये तक है, जबकि मेजर का वेतन 69,400 से 2,07,200 रुपये तक हो सकता है। इसके अलावा, लेफ्टिनेंट कर्नल और कर्नल रैंक के अधिकारियों को क्रमशः 1,21,200 से 2,12,400 रुपये और 1,30,600 से 2,15,900 रुपये तक का वेतन मिलता है। ब्रिगेडियर और मेजर जनरल जैसे वरिष्ठ पदों पर वेतन 1,39,600 से 2,18,200 रुपये तक हो सकता है। सेना प्रमुख जैसे उच्चतम रैंक पर वेतन 2,50,000 रुपये तक होता है, जो फिक्स्ड होता है।

भारतीय सेना का यह कदम न केवल युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करता है, बल्कि उन्हें अपने देश की सेवा का अनूठा अवसर भी देता है। यह भर्ती विशेष रूप से उन युवाओं के लिए है, जो देशभक्ति और अपने करियर को एक साथ आगे बढ़ाना चाहते हैं। भारतीय सेना में शामिल होने का यह मौका न केवल वित्तीय सुरक्षा बल्कि एक सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर भी देता है।

सेना में शामिल होकर उम्मीदवारों को सिर्फ वेतन ही नहीं मिलता, बल्कि आवास, परिवहन, चिकित्सा, और अन्य भत्ते जैसी कई सुविधाएं भी मिलती हैं। सेना में करियर न केवल व्यक्तिगत विकास के लिए अनुकूल है, बल्कि यह अपने परिवार और देश के लिए गर्व का विषय भी बनता है।

Pakistan Army: कंगाल पाकिस्तान की सेना के जवानों और अफसरों की कितनी है सैलरी? जान कर चौंक जाएंगे

Pakistan Army: Shocking Salaries of Soldiers and Officers in Cash-Strapped Pakistan

Pakistan Army: 12 लाख से ज्यादा जवानों वाली भारतीय सेना दुनिया की सबसे बड़ी सेनाओं में शुमार है। वहीं भारतीय सेना के मुकाबले पाकिस्तान की सेना आधी है। पाकिस्तान की सेना में लगभग 6,54,000 सक्रिय सैनिक हैं। लेकिन यह सवाल अक्सर उठता है कि कंगाली के हाल में जी रहा पाकिस्तान अपने जवानों को कितनी सेलरी देता है। पाकिस्तानी सेना के  जनरलों-अफसरों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगने की खबरें अक्सर आती हैं। खुद पाकिस्तानी भी सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी सेना के हुक्मरानों को भ्रष्टाचार के लिए कोसते रहते हैं, जिन्होंने पाकिस्तान को भुखमरी के कगार पर ला कर खड़ दिया। आइए जानते हैं कि पाकिस्तानी सेना में काम करने वाले सैनिकों और अधिकारियों को कितनी सैलरी मिलती है?

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Pakistan Army का सेलरी स्ट्रक्चर

पाकिस्तानी सेना के सेलरी स्ट्रक्चर की बात करें, तो वहां की सरकार के अन्य विभागों की तरह बेसिक पे स्केल (BPS) सिस्टम के तहत तय किया जाता है। सेना के हर रैंक के लिए अलग-अलग बीपीएस ग्रेड निर्धारित किए गए हैं, जिनके आधार पर वेतन तय होता है। इसके अलावा, सेना के अधिकारियों और कर्मचारियों को अन्य भत्ते और सुविधाएं भी मिलती हैं, जो उनकी आय में इजाफा करती हैं।

जेसीओ की सैलरी

पाकिस्तानी सेना में शुरुआती स्तर के अधिकारियों, जैसे जूनियर कमीशन ऑफिसर्स (JCOs), की मासिक सैलरी उनके अनुभव और जिम्मेदारियों के आधार पर तय होती है। जेसीओ की सैलरी बीपीएस 7 श्रेणी में आती है, और वे 20,000 से 40,000 पाकिस्तानी रुपये (भारतीय रुपयों में 6,000 से 12,000 रुपये) तक प्रति माह कमाते हैं।

इसके अलावा, नॉन-कमीशन ऑफिसर्स (NCOs) जैसे लांस नायक और नायक रैंक वाले अधिकारियों की सैलरी बीपीएस 5 और बीपीएस 6 श्रेणियों में आती है। इनकी मासिक सैलरी 18,000 से 30,000 पाकिस्तानी रुपये (भारतीय रुपये में 450 से 7500 रुपये) के बीच होती है।

मेजर-कैप्टन की सेलरी

मध्य स्तर के अधिकारियों, जैसे कि सेना के कैप्टन और मेजर रैंक के अधिकारी, की सैलरी बीपीएस 17 और बीपीएस 18 श्रेणियों में आती है। एक कैप्टन का मासिक वेतन 50,000 से 90,000 पाकिस्तानी रुपये (14000 से 25200 भारतीय रुपये) के बीच होता है, जबकि मेजर रैंक के अधिकारी की सैलरी 60,000 से 100,000 पाकिस्तानी रुपये (17400 से 29000 भारतीय रुपये) तक होती है।

इसके अलावा मध्य स्तर के अधिकारियों को बेसिक सैलरी के अलावा आवास, परिवहन, और उपयोगिताओं जैसे अतिरिक्त भत्ते भी दिए जाते हैं।

कर्नल और ब्रिगेडियर की सैलरी

जैसे-जैसे रैंक बढ़ता है, सैलरी भी बढ़ती है। पाकिस्तानी सेना के कर्नल और ब्रिगेडियर रैंक के अधिकारियों की सैलरी बीपीएस 19 और बीपीएस 20 श्रेणियों में आती है। कर्नल रैंक के अधिकारी 80,000 से 150,000 पाकिस्तानी रुपये (20,000 से 37,500 भारतीय रुपये) प्रति माह कमाते हैं। ब्रिगेडियर का मासिक वेतन इसी रेंज में होता है, लेकिन इसमें अन्य भत्ते और लाभ भी शामिल होते हैं।

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इन वरिष्ठ अधिकारियों को सैलरी के अलावा फर्निश्ड आवास, परिवहन की सुविधा, और उनके परिवारों के लिए उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधाएं भी प्रदान की जाती हैं। उनके बच्चे प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ाई करते हैं और अधिकारियों को विशेष सामाजिक क्लबों में प्रवेश का भी अधिकार मिलता है।

कितनी होती है जनरलों की सैलरी 

पाकिस्तानी सेना के जनरल्स, जो सेना के सबसे ऊंचे पदों पर होते हैं, अन्य रैंकों की तुलना में सबसे अधिक सैलरी और सुविधाएं प्राप्त करते हैं। जनरल रैंक के अधिकारी बीपीएस 21 और उससे ऊपर की श्रेणियों में आते हैं। इनकी मासिक सैलरी 200,000 पाकिस्तानी रुपये (57,999 भारतीय रुपये) से शुरू होती है और अनुभव और सेवा के वर्षों के आधार पर बढ़ती जाती है।

जनरल्स को आलीशान आवास, उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधाएं, और विशेष आर्मी क्लबों में प्रवेश जैसी अनन्य सुविधाएं भी मिलती हैं। इसके अलावा, उन्हें सेना के भीतर कई अन्य विशेषाधिकार प्राप्त होते हैं, जो निचले रैंकों के अधिकारियों को नहीं मिलते।

विशेषज्ञों और अन्य कर्मियों की सैलरी

पाकिस्तानी सेना में केवल लड़ाकू सैनिक ही नहीं, बल्कि विशेषज्ञ, जैसे कि चिकित्सा अधिकारी और इंजीनियर भी शामिल होते हैं। इनकी सैलरी आमतौर पर बीपीएस 18 से 19 श्रेणियों में होती है। ये अधिकारी 60,000 से 120,000 पाकिस्तानी रुपये (17,400 से 34,800 भारतीय रुपये) प्रति माह कमाते हैं। इनके अलावा, आईटी विशेषज्ञ, तकनीकी स्टाफ, और अन्य सहायक कर्मी को भी उनकी विशेषज्ञता के आधार पर तनख्वाह मिलती है।

सैलरी के अलावा, पाकिस्तानी सेना के जवानों और अधिकारियों को कई भत्ते और सुविधाएं दी जाती हैं। इनमें बच्चों की शिक्षा भत्ता, आवासीय भत्ता, स्वास्थ्य भत्ता, और यात्रा भत्ता शामिल हैं। उच्च रैंक के अधिकारियों को वाहन और ड्राइवर जैसी सुविधाएं भी मिलती हैं।

पाकिस्तानी सेना के सैलरी स्ट्रक्चर से यह स्पष्ट है कि हर रैंक के अनुसार वेतन और सुविधाओं में अंतर होता है। सेना के वरिष्ठ अधिकारियों को न केवल ऊंची सैलरी मिलती है, बल्कि उनके पास कई विशेष सुविधाएं भी होती हैं। दूसरी ओर, निचले स्तर के अधिकारियों और सैनिकों को सीमित वेतन के साथ कठिन परिस्थितियों में काम करना पड़ता है।

Disability Pension: Over 3000 appeals by MoD pending in Supreme Court and High Court against death and disability benefits

Rehabilitation Of Disabled Officer Cadets Supreme Court

Disability Pension: Strange it may sound but over 3000 appeals by Ministry of Defence alone is pending in Supreme Court of India and High Courts across the country against the death and disability benefits to armed forces personnels.

Disability Pension: Over 3000 appeals by Ministry of Defence pending in Supreme Court and High Court against death and disability benefits

SUCH CASES IMPACT MORALE OF ARMED FORCES

A bench of Justices A S Oka and Ujjal Bhuyan while criticising the Union government for dragging armed forces personnel and their families to the top court over disputes related to pensions highlighted the adverse impact of such litigation on morale within the armed forces.

CENTRE SHOULD COME OUT WITH POLICY

Asking the Centre to come out with a policy to avoid such litigation stressed that personnel who have served the nation should not be subjected to unnecessary legal battles and said, “As it is, there are only a few people willing to serve in the armed forces.”

“Why should the Union drag such people to this court? They have served the Union after all. Day in and day out, these matters are brought here,” the bench observed.

WHY APPROACH SUPREME COURT WHEN AFT IS THERE

The top court was hearing an appeal by Centre against the Armed Forces Tribunal (AFT) order which had granted disability pension to a retired Indian Air Force officer diagnosed with hypertension and diabetes.

“What was the purpose of setting up the AFT if all matters were to be brought here? These are your own people. They have served the Union after all,” the bench said while dismissing the appeal by Centre

WHAT WAS THE CASE

The officer, who served for over three decades, was diagnosed with Type 2 Diabetes Mellitus and Primary Hypertension after 30 years of service. While the Release Medical Board (RMB) initially denied attributing these conditions to his service, AFT found that the rigorous Air Force training and associated stress and strain likely contributed to their development.

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AFT granted the officer the benefit of rounding off his disability pension percentage to 50%, citing a prior Supreme Court judgment that extended this benefit to retired personnel.

TOP COURT SLAPPED FINE ON CENTRE FOR UNNECESSARY LITIGATION

Last month, top court had also slapped penalty of Rs 50,000 on the Union government and the Indian Army for forcing a soldier’s widow into unnecessary litigation. She had to fight for years to secure a family pension after her husband, Naik Inderjeet Singh, died during a counter terrorism patrol in Jammu and Kashmir.

NEED FOR MORE BENCHES OF AFT

Earlier this month, the top court had mooted to have more regional benches of AFT and had said, “Can we have the regional bench in Chandigarh, and then like we have done in Family Courts, they can hold circuit bench in Jammu, Srinagar, that will give opportunity to local Bar to assist them. It will also lead to cost-effectivity, access to justice for Himachal matters, they can go to Shimla and Dharamshala basic infrastructure is available. High Courts can also provide some that kind of system can help expedite hearings and reduce cost of litigation also. A retired army official coming all the way to Chandigarh, that also can be avoided.”

Republic Day 2025: इस बार गणतंत्र दिवस परेड में पहली बार दिखेगी परमाणु हथियार ले जाने वाली यह खास मिसाइल, पाकिस्तान-चीन के छूटेंगे पसीने

Republic Day 2025: Pralay Missile Makes Its Grand Debut

Republic Day 2025: गणतंत्र दिवस परेड 2025 इस बार कई मायनों में खास होने जा रही है। इस ऐतिहासिक मौके पर स्वदेशी रूप से विकसित ‘प्रलय’ मिसाइल (Pralay Missile) को पहली बार कर्तव्यपथ पर प्रदर्शित किया जाएगा। रक्षा सचिव आर.एस. सिंह ने सोमवार को मीडिया से बातचीत के दौरान इसकी पुष्टि की।

Republic Day 2025: Pralay Missile Makes Its Grand Debut

Republic Day 2025: प्रलय मिसाइल की रेंज 150 से 500 किलोमीटर 

‘प्रलय’ मिसाइल (Pralay Missile) भारतीय रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित एक शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल (एसआरबीएम) है। यह सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल है, जिसकी रेंज 150 से 500 किलोमीटर तक है। अग्नि-V की तरह इसकी ‘बड़ी बहन’ 5,500 किलोमीटर की लंबी दूरी को निशाना बनाती है। कैनिस्टराइज्ड डिज़ाइन और सॉलिड प्रोपेलेंट मोटर और से लैस यह मिसाइल तेज़ी से लॉन्च होने की क्षमता रखती है।

प्रलय मिसाइल को आधुनिक युद्धक्षेत्र की ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए डिज़ाइन किया गया है। इसके अलावा, ‘प्रलय’ में दुश्मन के पारंपरिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम को चकमा देने की क्षमता है। यह मिसाइल अपनी उड़ान के दौरान दिशा बदल सकती है, जिससे इसे रोक पाना बेहद मुश्किल हो जाता है।

Republic Day 2025: गणतंत्र दिवस परेड में क्या होगा खास

इस बार परेड में ब्रह्मोस मिसाइल, बहु-बैरल रॉकेट लॉन्चर, टी-90 टैंक, और नाग मिसाइल जैसे अन्य प्रमुख हथियार भी प्रदर्शित किए जाएंगे। हालाँकि, ‘तेजस’ लड़ाकू विमान और ‘ध्रुव’ हेलीकॉप्टर परेड में शामिल नहीं होंगे। अधिकारियों के अनुसार, हाल ही में हुई एक दुर्घटना के बाद ‘ध्रुव’ हेलीकॉप्टर की जांच चल रही है, जिस कारण इन्हें शामिल करना संभव नहीं हो पाया।

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परेड सुबह 10:30 बजे शुरू होगी, जिसमें एक लाख से ज़्यादा लोग शामिल होंगे, जिनमें 77,000 आमंत्रित और 32,000 टिकट धारक शामिल होंगे। पूरे भारत से 10,000 ख़ास मेहमान भी इस समारोह के साक्षी बनेंगे। 90 मिनट की परेड में 31 झांकियां शामिल होंगी, जिनमें 16 राज्यों की और 15 केंद्रीय मंत्रालयों की होंगी। परेड में भाग लेने के लिए पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और चंडीगढ़ की झांकियां चुनी गई हैं। देश के संविधान की 75वीं वर्षगांठ और सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में विशेष झांकियां भी प्रदर्शित की जाएंगी। इसके अलावा, परेड के दौरान 300 सांस्कृतिक कलाकारों का एक समूह भी अपनी कला का प्रदर्शन करेगा।

गणतंत्र दिवस परेड में तीनों सेनाओं की टुकड़ी शामिल होगी, जो सेना, नौसेना और वायु सेना के बीच एकता का प्रतीक होगी। नौसेना भी अपनी समर्पित झांकी पेश करेगी।

इंडोनेशियाई बैंड होगा शामिल

इस वर्ष परेड में इंडोनेशिया से आए 160 मार्चर्स और 190 बैंड सदस्यों का दल भी शामिल होगा। इसके अलावा, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो इस समारोह के मुख्य अतिथि होंगे। यह साझेदारी भारत और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के बीच मज़बूत होते संबंधों की झलक दिखाती है।

ALH Dhruv: रक्षा सचिव बोले- ध्रुव हेलीकॉप्टर के बेड़े का ग्राउंड होना आर्म्ड फोर्सेस के लिए ‘बड़ा झटका’, ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर पड़ रहा असर

ALH Dhruv Grounding a 'Major Setback' for Armed Forces: Defence Secretary

ALH Dhruv: भारतीय सेना, नौसेना, वायुसेना और तटरक्षक बल के लिए अहम भूमिका निभाने वाले एडवांस लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर (ALH) ध्रुव की 330 हेलिकॉप्टरों वाला फ्लीट पिछले 15 दिनों से ग्राउंडेड है। वहीं, ध्रुव के ग्राउंड होने फैसले से आर्म्ड फोर्सेस की ऑपरेशनल क्षमताओं पर भी गहरा असर पड़ा है। देश के रक्षा सचिव आरके सिंह ने इसे ‘आर्म्ड फोर्सेस के लिए एक बड़ा झटका’ करार दिया है।

ALH Dhruv Grounding a 'Major Setback' for Armed Forces: Defence Secretary
Defence Secretary Rajesh Kumar Singh

सोमवार को मीडिया को संबोधित करते हुए रक्षा सचिव ने बताया कि 15 दिनों से जारी सुरक्षा जांच के कारण ध्रुव हेलिकॉप्टर इस साल गणतंत्र दिवस परेड में शामिल नहीं हो पाएगा। यह फैसला 5 जनवरी को गुजरात के पोरबंदर हवाई अड्डे पर तटरक्षक बल के एक ध्रुव एमके III हेलिकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद लिया गया, जिसमें तीन कर्मियों की मौत हो गई थी। इस बार एएलएच बेड़ा गणतंत्र दिवस परेड के फ्लाईपास्ट का हिस्सा बनने वाला था।

आरके सिंह ने कहा, “ध्रुव हेलिकॉप्टर बेड़े की ग्राउंडिंग से ऑपरेशन्स में कुछ दिक्कतें आई हैं। हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) फिलहाल उसकी सुरक्षा जांच में जुटा है। उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि जल्द ही इस समस्या का समाधान हो जाएगा। हालांकि, यह तय है कि यह बेड़ा गणतंत्र दिवस परेड तक संचालन में वापस नहीं आएगा।”

साथ ही, रक्षा सचिव ने यह भी बताया कि इस बार परेड में 39 विमान हिस्सा लेंगे और 12 फॉर्मेशंस बनाई जाएंगे। उन्होंने बताया कि कुल 77,000 लोग इस बार रिपब्लिक डे की परेड को देखेंगे, जिनमें 32,000 लोग टिकट खरीद चुके हैं।

वहीं, ध्रुव हेलिकॉप्टर (ALH Dhruv) के ग्राउंड होने आर्म्ड फोर्सेज की चुनौतियां बढ़ गई हैं। सेना, नौसेना, वायुसेना और तटरक्षक बल इस हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल बड़े स्तर पर अपने ऑपरेशंस के लिए करते रहे हैं। लेकिन इसके ग्राउंड होने के बाद उन्हें दूसरे  हेलिकॉप्टरों पर निर्भर होना पड़ रहा है।

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सेना के एक अधिकारी ने इसे “गंभीर स्थिति” बताते हुए कहा कि ध्रुव हेलिकॉप्टर की गैरमौजूदगी ने लॉजिस्टिक्स, सैनिकों की आवाजाही और नियमित अभियानों को सीधे तौर पर प्रभावित किया है। उन्होंने कहा, “हमने अन्य हेलिकॉप्टरों का सहारा लिया है, लेकिन ध्रुव हेलिकॉप्टर के न होने से ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर सीधा असर पड़ रहा है।”

वहीं, नौसेना और तटरक्षक बल भी ध्रुव री ग्राउंडिंग से प्रभावित हुए हैं। समुद्री खोज और बचाव अभियानों तथा गश्ती संचालन में रुकावट आई है। ध्रुव हेलिकॉप्टर का उपयोग निगरानी से लेकर मानवीय सहायता तक, कई तरह के मिशनों के लिए किया जाता है।

हालांकि यह पहली बार नहीं है जब ध्रुव हेलिकॉप्टर बेड़े को इस तरह से ग्राउंड करना पड़ा हो। 2023 में भी नौसेना के एक दुर्घटना के बाद बेड़े को अस्थायी रूप से ग्राउंड किया गया था। तब दिक्कतों का समाधान करने के बाद हेलिकॉप्टरों को फिर से ऑपरेशन में लाया गया था।

Dhruv choppers: सेना दिवस परेड में स्वदेशी ALH ध्रुव और रूद्र ने नहीं भरी उड़ान, रिपब्लिक डे पर भी फ्लाईपास्ट से हो सकते हैं बाहर

हालांकि, इस बार सुरक्षा जांच अभी पूरी नहीं हुई है और HAL ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि यह प्रक्रिया कब तक पूरी होगी। इस बार की ग्राउंडिंग ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ध्रुव जैसे महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म की मेंटेनेंस प्रोटोकॉल को और मजबूत करने और सुरक्षा जांच के लिए समय सीमा तय करने की आवश्यकता है।

सेना के के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “हमारे लिए यह सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है कि हमारी क्षमता और ऑपरेशन किसी भी तकनीकी कमी के चलते प्रभावित न हो। इससे सीख लेकर हमें अपने प्रोटोकॉल और प्रणालियों को बेहतर बनाने की दिशा में काम करना होगा।”

Republic Day 2025 पर नहीं दिखेंगे LCA और ALH Dhruv

इस साल गणतंत्र दिवस परेड में भारतीय वायुसेना के स्वदेशी लड़ाकू विमान LCA तेजस और एडवांस लाइट हेलीकॉप्टर (ALH) ध्रुव और रुद्र शामिल नहीं होंगे। तेजस को परेड में शामिल न करने का निर्णय भारतीय वायुसेना की नई नीति के तहत लिया गया है, जिसमें सिंगल-इंजन जेट्स को परेड के फ्लाईपास्ट से दूर रखने का प्रावधान है।

इसके साथ ही, एडवांस लाइट हेलीकॉप्टर (ALH) का पूरा बेड़ा हाल ही में हुई दुर्घटनाओं के बाद फ्लाइट सेफ्टी जांच के कारण ग्राउंड कर दिया गया है। गौरतलब है कि ALH ध्रुव और रुद्र ने इसी महीने 15 जनवरी को आयोजित सेना दिवस परेड में भी हिस्सा नहीं लिया था। परेड में इनकी जगह चीता और चेतक हेलीकॉप्टरों ने हिस्सा लिया था।

सेना प्रमुख ने कही थी ये बात

जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने पुणे में आयोजित 77वें सेना दिवस परेड के दौरान ALH ध्रुव हेलीकॉप्टर को लेकर कहा था, “ध्रुव हेलीकॉप्टर ने 2023-24 में 40,000 घंटे से अधिक की उड़ान भरी है, और इस दौरान केवल एक बार तकनीकी गड़बड़ी हुई। यह हेलीकॉप्टर 15,000 फीट से अधिक की ऊंचाई वाले कठिन इलाकों में सफलतापूर्वक कार्य कर रहा है। हमें इस प्लेटफॉर्म पर 100% भरोसा है।”

Daredevils: भारतीय सेना के डेयरडेविल्स ने बनाया नया वर्ल्ड रिकॉर्ड, कर्तव्य पथ पर दिखाए अद्भुत करतब

Daredevils: Indian Army Sets New World Record with Stunning Feat at Kartavya Path

Daredevils: भारतीय सेना की मोटरसाइकिल राइडर डिस्प्ले टीम “डेयरडेविल्स” ने 20 जनवरी 2025 को कर्तव्य पथ, नई दिल्ली पर अद्वितीय प्रदर्शन करते हुए चलती मोटरसाइकिलों पर सबसे ऊंचे मानव पिरामिड का विश्व रिकॉर्ड बनाया। यह पिरामिड 20.4 फीट ऊंचा था और इसमें 7 मोटरसाइकिलों पर 40 सैनिकों ने हिस्सा लिया। इस अद्वितीय प्रदर्शन ने विजय चौक से इंडिया गेट तक 2 किलोमीटर की दूरी तय की।

Daredevils: Indian Army Sets New World Record with Stunning Feat at Kartavya Path

डेयरडेविल्स, जो भारतीय सेना के कोर ऑफ सिग्नल्स से संबंधित है, ने अपने शानदार प्रदर्शनों से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। इस नई उपलब्धि के साथ, टीम के नाम अब तक के 33 विश्व रिकॉर्ड हो चुके हैं। इनमें गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स, एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज उपलब्धियां शामिल हैं।

कार्यक्रम के समापन पर सिग्नल्स फ्रेटरनिटी और कोर ऑफ सिग्नल्स के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल केवी कुमार ने इंडिया गेट पर टीम को झंडी दिखाकर सम्मानित किया। इस मौके पर भारी उत्साह और जोश के साथ टीम की सराहना की गई। यह प्रदर्शन केवल एक रिकॉर्ड नहीं था, बल्कि भारतीय सेना की दक्षता, आत्मविश्वास और अद्वितीय कौशल का प्रतीक था।

डेयरडेविल्स टीम की शुरुआत 1935 में हुई थी। तब से लेकर अब तक टीम ने भारत भर में 1,600 से अधिक मोटरसाइकिल प्रदर्शन किए हैं। इनमें गणतंत्र दिवस परेड, सेना दिवस परेड और कई सैन्य कार्यक्रम शामिल हैं। हर प्रदर्शन के साथ, टीम ने दर्शकों को रोमांचित किया और भारतीय सेना की बहादुरी और तकनीकी कौशल को प्रदर्शित किया।

Tashi Namgyal: करगिल जंग के हीरो ताशी नामग्याल को मरणोपरांत सेना ने दिया बड़ा सम्मान, वॉर मेमोरियल में इस तरह दी खास जगह

Tashi Namgyal: Kargil Hero Honoured with Special Place at War Memorial

Tashi Namgyal: 15 जनवरी 2025 को भारतीय सेना ने 77वें सेना दिवस के अवसर पर ताशी नामग्याल को श्रद्धांजलि अर्पित की। लद्दाख के आर्यन घाटी के गार्कोन गांव के निवासी ताशी नामग्याल ने 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान दुश्मन की घुसपैठ की जानकारी देकर भारतीय सेना को एक निर्णायक बढ़त दिलाई थी। सेना ने इस वीर नायक की स्मृति को अमर बनाने के लिए बियामाह वॉर मेमोरियल पर एक स्मृति पट्टिका स्थापित की। रक्षा समाचार.कॉम ने उनके निधन की खबर सबसे पहले छापी थी। साथ ही, इस साल सेना दिवस के मौके पर सेना प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी से एक स्मारक बनवाने की अपील की थी, तो उन्होंने भरोसा दिलाया था कि जल्द ही इस पर कार्रवाई होगी।

Tashi Namgyal: Kargil Hero Honoured with Special Place at War Memorial

17 दिसंबर 2024 को, ताशी नामग्याल का निधन उनके पैतृक गांव गार्कोन में हो गया। उनके परिवार में उनकी पत्नी, एक बेटी और दो बेटे हैं। भारतीय सेना ने उनके परिवार को हरसंभव समर्थन देने का वादा किया है और इसे उनकी देशभक्ति के प्रति श्रद्धांजलि के रूप में देखा जा रहा है।

1999 के मई महीने में ताशी नामग्याल ने अपने गांव के आसपास चरते हुए अपने याक को खोजते समय जुबेर रिज पर कुछ लोगों को देखा, जो काले पठानी सूट में बंकर बना रहे थे। अपनी गहरी समझ और सतर्कता के चलते उन्होंने हालात की गंभीरता को पहचाना और तुरंत भारतीय सेना को इस घुसपैठ की जानकारी दी। उनकी इस जानकारी ने सेना को तेजी से जवाबी कार्रवाई करने में मदद की, जिसने अंततः कारगिल विजय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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कारगिल युद्ध के बाद भी, ताशी नामग्याल अपने गांव और समुदाय के लिए प्रेरणा बने रहे। उन्होंने अक्सर भारतीय सेना के कार्यों और कारगिल युद्ध की कहानियां सुनाकर लोगों को प्रेरित किया। वे 2024 में कारगिल विजय दिवस की 25वीं वर्षगांठ समारोह में भी शामिल हुए थे।

Tashi Namgyal: सेना ने दी श्रद्धांजलि

सेना दिवस के मौके पर भारतीय सेना ने बियामाह वॉर मेमोरियल पर ताशी नामग्याल की स्मृति में एक पट्टिका स्थापित की। इस समारोह में उनके परिवार, स्थानीय नागरिकों और सैन्य अधिकारियों ने भाग लिया। यह न केवल उनके साहस को सम्मानित करने का अवसर था, बल्कि उनके योगदान को देश के सामने लाने का भी एक प्रयास था।

इसके अलावा, भारतीय सेना ने उनके पैतृक गांव गारकोन में उनकी एक प्रतिमा स्थापित करने की योजना बनाई है। यह प्रतिमा उनके बलिदान और देशभक्ति की स्थायी यादगार होगी, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगी।

भारतीय सेना ने इस अवसर पर कहा, “ताशी नामग्याल की निष्ठा और देशभक्ति का सम्मान करना हमारा कर्तव्य है। उनका योगदान हमें यह याद दिलाता है कि देश की सुरक्षा के लिए प्रत्येक नागरिक की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है।”

कैसे बने Tashi Namgyal कारगिल युद्ध के नायक?

2024 में करगिल युद्ध की 25वीं वर्षगांठ पर ताशी नामग्याल से मुलाकात के दौरान उन्होंने अपनी खिन्नता जाहिर की। उनका कहना था कि सरकार ने उनके योगदान को न तो सराहा और न ही उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए कोई कदम उठाया। उन्होंने बताया, “हमने देश के लिए बहुत कुछ किया, लेकिन हमें आज भी गुमनामी का जीवन जीना पड़ रहा है। हमारी गरीबी का किसी ने ध्यान नहीं दिया।”

ताशी नामग्याल ने बताया था कि मई 1999 में, जब उनकी उम्र 35 साल थी, वे अपने याक ढूंढने गरखुन नाला की ओर गए। वहां उन्होंने बर्फ पर कुछ अजीब निशान देखे। यह असामान्य था, क्योंकि वह क्षेत्र आमतौर पर निर्जन रहता था। उन्होंने अपने भाई मोरुप त्सेरिंग के साथ दूरबीन से देखा तो कुछ लोग काले पठानी कपड़ों में बंकर बनाते हुए दिखाई दिए।

यह संदिग्ध गतिविधि देखकर वे तुरंत निकटतम सेना चौकी पर गए और वहां तैनात बारा साहब को इसकी सूचना दी। शुरुआती संदेह के बावजूद, सेना ने उनकी बात को गंभीरता से लिया। एक दिन बाद, सेना के अधिकारी उनके साथ इलाके में गए।

सेना को घुसपैठ का सबूत कैसे मिला?

जब सेना ताशी और उनके भाई के साथ 5 किलोमीटर दूर गरखुन नाला पहुंची, तो उन्होंने घुसपैठियों को अपनी आंखों से देखा। इसके बाद ताशी ने सेना को इलाके के दुर्गम रास्तों की सटीक जानकारी दी और यह भी बताया कि घुसपैठिए कहां-कहां बंकर बना रहे हैं।

उन्होंने दाह नाले का भी रास्ता दिखाया, जहां घुसपैठियों ने भारी मात्रा में गोला-बारूद और हथियार जमा कर रखे थे। उनकी सतर्कता और मार्गदर्शन के कारण सेना ने न केवल दुश्मन की गतिविधियों का खुलासा किया, बल्कि समय रहते रणनीतिक कदम उठाने में सक्षम हुई।

करगिल युद्ध में बने पोर्टर

युद्ध के दौरान, ताशी ने भारतीय सेना के लिए कुली यानी पोर्टर के तौर पर भी काम किया। उन्होंने रसद और हथियार पहुंचाने में मदद की। उनकी बहादुरी ने भारतीय सेना को न केवल रणनीतिक बढ़त दी, बल्कि दुश्मन की साजिशों को विफल करने में भी मदद की।

अपने इतने बड़े योगदान के बावजूद, ताशी नामग्याल ने हमेशा सादगी से जीवन बिताया। वे भेड़ और याक चराने के साथ-साथ अन्य छोटे-मोटे काम करके अपनी आजीविका चलाते रहे। उनके कपड़े और हाथों पर मिट्टी के निशान उनकी कठिनाइयों की कहानी बयां करते थे। ताशी ने कभी अपने योगदान को लेकर बड़ा दावा नहीं किया। उनके लिए देशभक्ति ही सबसे बड़ी पहचान थी।

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Explainer Bhargavastra: भारत ने हाल ही में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। महाभारत के प्रसिद्ध दिव्यास्त्रों से प्रेरणा लेते हुए भारत ने अत्याधुनिक काउंटर-ड्रोन सिस्टम विकसित किया है, जिसे भार्गवास्त्र नाम दिया गया है। भार्गवास्त्र का नाम महर्षि परशुराम द्वारा उपयोग किए गए शक्तिशाली दिव्यास्त्र से लिया गया है। महाभारत में वर्णित दिव्यास्त्रों में से एक, भार्गवास्त्र, अपनी अद्वितीय शक्ति और विनाशकारी क्षमताओं के लिए प्रसिद्ध है। यह नया भार्गवास्त्र न केवल देश के डिफेंस सिस्टम को मजबूत करेगा, बल्कि फ्यूचर वारफेयर में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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भार्गवास्त्र को सोलर ग्रुप और इकोनॉमिक एक्सप्लोसिव्स लिमिटेड (EEL) ने मिल कर डेवलप किया है। यह एक माइक्रो-मिसाइल आधारित काउंटर-ड्रोन सिस्टम है, जिसे दुश्मन के ड्रोन्स और स्वार्म ड्रोन्स (झुंड में उड़ने वाले ड्रोन्स) को पहचानने और नष्ट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। हाल के युद्धों में स्वार्म ड्रोन्स बड़े खतरे के रूप में उभरे हैं।

Explainer Bhargavastra: कैसा है भार्गवास्त्र?

भार्गवास्त्र एक मल्टी-लेयर काउंटर-ड्रोन सिस्टम है, जो माइक्रो-मिसाइल तकनीक पर बेस्ड है। यह सिस्टम दुश्मन के छोटे और स्वार्म ड्रोन्स को पहचानने और नष्ट करने में सक्षम है। इसकी खासियत यह है कि यह 6 किलोमीटर की दूरी तक ड्रोन का पता लगा सकता है और 64 माइक्रो-मिसाइलों को एक साथ फायर करने की क्षमता रखता है। इसकी सॉफ्ट-किल तकनीक ड्रोन के नेविगेशन और कम्यूनिकेशन सिस्टम को जाम कर देती है, जबकि हार्ड-किल सिस्टम ड्रोन को पूरी तरह से बरबाद कर देता है।

यह सिस्टम 5,000 मीटर तक की ऊंचाई पर भी तैनात किया जा सकता है, जिससे यह दुर्गम इलाकों में भी ऑपरेशन को अंजाम दे सकता है। यह मोबाइल प्लेटफॉर्म पर आधारित है, जिससे इसे आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिस्टम भारत के लिए एक बड़े रणनीतिक सुरक्षा उपाय के रूप में उभरेगा।

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Explainer Bhargavastra: कैसे काम करता है भार्गवास्त्र?

भार्गवास्त्र को दुश्मन के ड्रोन और अन्य हवाई खतरों को पहचानने और नष्ट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह पूरी तरह से ऑटोमैटिक सिस्टम है, यानी कि इसे किसी मनुष्य द्वारा कंट्रोल नहीं किया जाता है। जब कोई ड्रोन इसकी रडार सीमा में आता है, तो यह तुरंत उसे पहचान लेता है। इसके बाद, यह तय करता है कि हार्ड-किल या सॉफ्ट-किल तकनीक का उपयोग करना है।

इसकी C4I कमांड और कंट्रोल प्रणाली रडार के माध्यम से 10 किलोमीटर तक बड़े UAVs और 6 किलोमीटर तक छोटे ड्रोन्स का पता लगा सकती है। इसके EO/IR सिस्टम (इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल और इंफ्रारेड) कम रडार क्रॉस सेक्शन वाले लक्ष्यों को भी ट्रैक करने में सक्षम हैं। यह प्रणाली खासतौर पर स्वार्म ड्रोन का सामना करने के लिए तैयार की गई है, जो सामान्य जामिंग तकनीकों से बच सकते हैं। भार्गवास्त्र का मोबाइल लॉन्च प्लेटफॉर्म एक समय में 16 मिसाइलों को कैरी कर सकता है, जिससे ऑपरेशनल फ्लेक्सिबिलिटी में बढ़ोतरी होती है।

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भार्गवास्त्र का नाम महाभारत के महर्षि परशुराम के भार्गवास्त्र से लिया गया है। यह नाम इसके उद्देश्य को दर्शाता है, शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करना। इस आधुनिक प्रणाली ने 12 और 13 जनवरी, 2025 को अपने पहले ट्रायल्स में शानदार प्रदर्शन किया। गंजम, ओडिशा के गोपालपुर सीवर्ड फायरिंग रेंज में इसे ट्रायल के लिए तैनात किया गया था। पहले परीक्षण में, 2,500 मीटर दूर और 400 मीटर की ऊंचाई पर एक इलेक्ट्रॉनिक टारगेट पर मिसाइल ने सटीक निशाना लगाया। दूसरे परीक्षण में, एक चलते हुए इलेक्ट्रॉनिक UAV मिमिक को सफलतापूर्वक नष्ट किया।

क्या यह भारत का आयरन डोम है?  

भार्गवास्त्र को कई विशेषज्ञ भारत का आयरन डोम बता ररहे हैं। आयरन डोम इजरायल का प्रसिद्ध रक्षा प्रणाली है, जो मिसाइल और ड्रोन हमलों को रोकने में सक्षम है। भार्गवास्त्र भी इसी प्रकार की सुरक्षा प्रदान करता है और इसे स्वदेशी तकनीक का उपयोग करके बनाया गया है।

आधुनिक युद्ध में भार्गवास्त्र है जरूरी

आधुनिक युद्धक्षेत्र में ड्रोन का उपयोग तेजी से बढ़ा है। हाल के वर्षों में अजरबैजान-आर्मेनिया और यूक्रेन-रूस जैसे युद्धों में ड्रोन तकनीक ने निर्णायक भूमिका निभाई है। स्वार्म ड्रोन का उपयोग करते हुए दुश्मन बड़ी संख्या में हमले कर सकते हैं, जिन्हें रोकने के लिए पारंपरिक डिफेंस सिस्टम काफी नहीं हैं। हर साल 100,000 से ज़्यादा ड्रोन तैनात किए जाते हैं, जिनका मुकाबला अक्सर महंगी सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों से किया जाता है। भार्गवस्त्र दुश्मन के यूएवी को बेअसर करने के लिए एक किफायती और प्रभावी विकल्प प्रदान करता है।

भार्गवास्त्र इस चुनौती का समाधान प्रदान करता है। यह तकनीक दुश्मन के ड्रोन्स को कम लागत और उच्च दक्षता के साथ नष्ट कर सकती है। इसकी मोबाइल और स्वचालित क्षमताएं इसे किसी भी युद्धक्षेत्र के लिए उपयुक्त बनाती हैं। क्योंकि ड्रोन्स का बढ़ता इस्तेमाल भविष्य के युद्धक्षेत्र की वास्तविकता है। ऐसे में भार्गवास्त्र जैसे सिस्टम भारत की सुरक्षा को न केवल मजबूत बनाएंगे, बल्कि यह भारतीय सेनाओं को आधुनिक युद्ध के लिए तैयार करेंगे।

Republic Day 2025: गणतंत्र दिवस पर दर्शक इस बार हो सकते हैं मायूस, फ्लाईपास्ट में नहीं सुनाई देगी LCA तेजस और ALH की गड़गड़ाहट

Republic Day 2025: LCA Tejas, ALH to Miss Flypast, May Disappoint Spectators

Republic Day 2025: 26 जनवरी 2025 को भारत अपना 76वां गणतंत्र दिवस (Republic Day 2025) मनाने जा रहा है। हर साल की तरह इस बार भी राजपथ, जिसे अब कर्तव्य पथ कहा जाता है, पर भव्य परेड का आयोजन होगा। परेड में भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना की ताकत और संस्कृति की झलक दिखाई जाएगी। हालांकि, इस बार कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं, जो चर्चा का विषय बने हुए हैं।

Republic Day 2025: LCA Tejas, ALH to Miss Flypast, May Disappoint Spectators

इस साल की परेड में भारतीय वायुसेना और तीनों सेनाओं के कुल 40 विमान हिस्सा लेंगे। इनमें 22 फाइटर जेट्स, 11 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और 7 हेलीकॉप्टर्स शामिल होंगे। इसके अलावा, भारतीय तटरक्षक बल के तीन डोर्नियर एयरक्राफ्ट भी हिस्सा लेंगे, जो “रक्षक” फॉर्मेशन का प्रदर्शन करेंगे। यह फ्लाईपास्ट देश की ताकत और तकनीकी क्षमता को दिखाता है, जिसे हर साल लाखों लोग टीवी और सोशल मीडिया पर देखते हैं।

Republic Day 2025: क्या दिखेगा, क्या नहीं

इस बार की परेड में भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमान LCA तेजस और एडवांस लाइट हेलीकॉप्टर (ALH) ध्रुव और रुद्र नजर नहीं आएंगे। तेजस को शामिल न करने का फैसला भारतीय वायुसेना की नीतियों के तहत लिया गया है, जिसमें सिंगल-इंजन जेट्स को गणतंत्र दिवस की परेड में उड़ान भरने से रोका गया है। इसके साथ ही, एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (ALH) का पूरा बेड़ा हालिया दुर्घटनाओं के बाद फ्लाइट सेफ्टी जांच के लिए ग्राउंड किया गया है। एएलएच ध्रुव और रूद्र ने 15 दिसंबर को हुई सेना दिवस परेड में भी हिस्सा नहीं लिया था।

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Republic Day 2025: भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना की कोई अलग झांकी नहीं

इस बार भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना की कोई अलग झांकी नहीं होगी। इसके बजाय, एक त्रि-सेवा झांकी (Tri-Service Tableau) प्रस्तुत की जाएगी, जिसमें तीनों सेनाओं के संयुक्त शक्ति और समन्वय को दर्शाया जाएगा। इससे पहले हर साल तीनों सेनाओं की अलग-अलग झांकियां परेड का हिस्सा होती थीं, जो उनके स्पेशल ऑपरेशंस और तकनीकी क्षमताओं की झलक देती थीं।

हालांकि, परेड में अलग-अलग सेनाओं की झांकियां न होने से कुछ लोगों को कमी महसूस हो सकती है। पिछले सालों में, इन झांकियों ने भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना के विशेष अभियानों और उपलब्धियों को दर्शाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

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भारतीय वायुसेना ने इस बार गणतंत्र दिवस परेड में अपनी नीति में बदलाव करते हुए सिंगल इंजन वाले विमानों को फ्लाईपास्ट से अलग रखने का फैसला किया है। तेजस जैसे अत्याधुनिक विमान की अनुपस्थिति का कारण भी यही है। ALH हेलीकॉप्टरों की अनुपस्थिति उनके हालिया सुरक्षा निरीक्षण और ग्राउंडिंग के कारण है, जो उनकी तकनीकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किया गया है।

Republic Day 2025: कर्तव्य पथ पर हवाई ताकत का प्रदर्शन

इस बार परेड में कुल 40 विमानों का फ्लाईपास्ट किया जाएगा। इनमें फाइटर जेट्स, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टर्स शामिल हैं। राजपथ के ऊपर आसमान में भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान जैसे राफेल, सुखोई-30MKI और जगुआर जैसे विमान अपनी ताकत का प्रदर्शन करेंगे। यह फ्लाईपास्ट भारतीय वायुसेना की ताकत और क्षमता को प्रदर्शित करेगा।

फ्लाईपास्ट में इस बार भारतीय तटरक्षक बल के तीन डोर्नियर विमान भी हिस्सा लेंगे। ये विमान “रक्षक” फॉर्मेशन में उड़ान भरेंगे, जो समुद्री सुरक्षा में तटरक्षक बल की भूमिका को दर्शाएंगे।