Home Blog Page 116

Baisaran Terror Attack: बड़ा खुलासा! PoK का रावलाकोट है आतंक का एक्सपोर्ट हब, पहलगाम हमले के बाद जनरल असीम मुनीर ने किया था दौरा

Baisaran Terror Attack: PoK’s Rawalakot Emerges as Terror Export Hub

Baisaran Terror Attack: पहलगाम आतंकी हमले में पाकिस्तान के शामिल होने के लिंक सबके सामने हैं। यह आतंकी लिंक कितना गहरा और खतरनाक है, इसकी जांच-पड़ताल में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम की बैसरन घाटी में हुए इस हमले में 26 लोग मारे गए थे, जिनमें ज्यादातर पर्यटक थे। जांच में अब सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि इस कश्मीर आतंकी हमला की साजिश पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) के रावलाकोट शहर में रची गई थी। पहलगाम आतंकी हमला के पीछे लश्कर-ए-तैइबा (LeT), जैश-ए-मोहम्मद (JeM), और लश्कर की शाखा ‘द रेसिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) का हाथ है, जिन्हें पाकिस्तानी सेना और ISI का पूरा सपोर्ट था। रावलाकोट में खुलेआम आतंकवादियों के ट्रेनिंग कैंप चल रहे हैं, जिनकी निगरानी पाकिस्तान की सेना करती है।

Baisaran Terror Attack: PoK’s Rawalakot Emerges as Terror Export Hub

Baisaran Terror Attack: आतंक का एक्सपोर्ट हब बना रावलाकोट

पाक अधिकृत कश्मीर के रावलाकोट के निवासी और मानवाधिकार कार्यकर्ता औऱ कश्मीर पीपल्स नेशनल पार्टी के नेता सरदार नासिर अजीज खान ने सनसनीखेज खुलासा किया है। नासिर, जो अब यूरोप में शरण लिए हुए हैं, उन्होंने बताया कि पहलगाम आतंकी हमला (Baisaran Terror Attack) की योजना रावलाकोट में एक गुप्त बैठक में बनाई गई। इस बैठक में लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, और ISI के अधिकारी शामिल थे। नासिर के पास एक वीडियो भी है, जिसमें आतंकी सरगनाओं और ISI के बीच साजिश की बातचीत दर्ज है। वीडियो में लश्कर के उपप्रमुख सैफुल्लाह और कमांडर अबू मूसा की भड़काऊ भाषणबाजी साफ सुनाई देती है।

18 अप्रैल को रावलाकोट के खाई गाला में आयोजित एक रैली में अबू मूसा ने कहा, “भारत ने अनुच्छेद 370 हटाकर कश्मीर की जनसांख्यिकी बदलने की कोशिश की। तुमने 10 लाख सैनिक तैनात किए। तुम पुलवामा, पुंछ, राजौरी में ‘राम राम’ की गूंज चाहते हो। लश्कर-ए-तैयबा तुम्हारी इस चुनौती को स्वीकार करता है। इंशाल्लाह, हम गोलियां बरसाएंगे, तुम्हारी गर्दनें काटेंगे और अपने शहीदों के बलिदान का सम्मान करेंगे।” यह भाषण पहलगाम हमले (Baisaran Terror Attack) से चार दिन पहले दिया गया था।

Baisaran Terror Attack: हमले के बाद गुपचुप PoK पहुंचे थे मुनीर

नासिर ने खुलासा किया कि जनरल असीम मुनीर 24 अप्रैल, 2025 को PoK के गिलगित-बल्तिस्तान क्षेत्र में पहुंचे। यह दौरा भारत द्वारा सिंधु जल संधि को निलंबित करने, अटारी बॉर्डर बंद करने, और पाकिस्तानी नागरिकों को 48 घंटे में देश छोड़ने के अल्टीमेटम के ठीक एक दिन बाद हुआ। मुनीर का यह दौरा गुप्त था, और इसे लेकर आधिकारिक तौर पर पाकिस्तानी सेना या सरकार की ओर से कोई बयान जारी नहीं किया गया। मुनीर ने वहां PoK में उच्च-स्तरीय सैन्य अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन के साथ एक गुप्त बैठक की। इस बैठक का मकसद PoK में चल रहे आतंकी प्रशिक्षण शिविरों की स्थिति का जायजा लेना और भारत के कड़े कदमों के जवाब में रणनीति तैयार करना हो सकता है। वहीं, मुनीर का PoK जाना यह भी बताता है कि पाकिस्तान खुद को अंतरराष्ट्रीय आलोचना से बचाने के लिए ‘सुरक्षित लॉन्चिंग’ और ‘डिनायल नेटवर्क’ की रणनीति पर काम कर रहा है। यानी आतंकियों को सक्रिय तो रखा जाएगा, लेकिन सीधे तौर पर पाकिस्तानी सेना या आईएसआई के जुड़ाव के सबूत छोड़ने से बचने की कोशिश होगी।

नासिर का कहना है कि पूर्व पाकिस्तानी राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने बीबीसी को दिए एक साक्षात्कार में स्वीकार किया था कि वे आतंकियों को प्रशिक्षण देते हैं और कश्मीर भेजते हैं। वर्तमान सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर भी इस नीति को जारी रखे हुए हैं।

बता दें कि जनरल असीम मुनीर हाल के महीनों में अपनी भड़काऊ बयानबाजी के लिए चर्चा में रहे हैं। 15 अप्रैल, 2025 को एक मदरसा छात्र के रूप में उन्होंने कश्मीर को पाकिस्तान की “गले की नस” बताया और दो-राष्ट्र सिद्धांत का समर्थन किया। 16 अप्रैल को दिए एक और भाषण में उन्होंने कहा कि हिंदू और मुसलमान कभी एक साथ नहीं रह सकते। एक पूर्व पाकिस्तानी सेना में अफसर रहे अफसर आदिल रजा ने दावा किया था कि यह हमला मुनीर के व्यक्तिगत आदेश पर हुआ, हालांकि उन्होंने इसे व्यक्तिगत कार्रवाई बताकर पाकिस्तानी सेना को जिम्मेदारी से मुक्त करने की कोशिश की। भारतीय खुफिया सूत्रों ने भी मुनीर को (Baisaran Terror Attack) हमले का मास्टरमाइंड बताया और कहा कि वह कश्मीर मुद्दे को प्राथमिकता देकर पाकिस्तान के आंतरिक संकटों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं।

खुफिया सूत्रों के अनुसार, PoK में वर्तमान में 42 आतंकी लॉन्च पैड सक्रिय हैं, जहां करीब 130 आतंकी मौजूद हैं। मुनीर का दौरा इन शिविरों की गतिविधियों को और तेज करने या उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की कोशिश हो सकता है, खासकर तब जब भारत ने इन शिविरों को निशाना बनाने की बात कही है।

Baisaran Terror Attack: PoK’s Rawalakot Emerges as Terror Export Hub

Baisaran Terror Attack: खुले आम आतंकी निकालते हैं रैलियां

नासिर ने साफ शब्दों में कहा कि रावलाकोट और पीओके के दूसरे इलाकों को ‘लॉन्चिंग पैड’ के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। यहां से आतंकवादियों को ट्रेनिंग देकर भारतीय सीमा में घुसपैठ के लिए भेजा जाता है। उन्होंने बताया कि रावलाकोट और मुजफ्फराबाद में चल रहे आतंकी शिविरों को न केवल ISI बल्कि पाकिस्तानी सेना भी समर्थन देती है। उन्होंने बताया कि ये संगठन खुले तौर पर रैलियां निकालते हैं, हथियार लहराते हैं और भारत के खिलाफ जहर उगलते हैं। उन्होंने कहा, “अगर पाकिस्तानी सरकार नहीं चाहे, तो एक चिड़िया भी पर नहीं मार सकती। लेकिन ये आतंकी संगठन हजारों की संख्या में रैलियां निकालते हैं, हथियारों के साथ। यह साफ है कि उनके पीछे कौन है।”

Baisaran Terror Attack: PoK’s Rawalakot Emerges as Terror Export Hub

Baisaran Terror Attack: बच्चों का अपहरण कर बनाते हैं आतंकी

नासिर ने बताया कि रावलाकोट और मुजफ्फराबाद में आज भी आतंकी प्रशिक्षण शिविर सक्रिय हैं, जिन्हें पाकिस्तानी सेना ऑपरेट करती है। इन शिविरों में गरीब बच्चों को मदरसों से अपहरण कर प्रशिक्षण शिविरों में ले जाकर हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी जाती है और फिदायीन बनाया जाता है। उन्होंने बताया कि दो साल पहले रावलाकोट (Baisaran Terror Attack) के पास रावलाबाग से 22 किशोर बच्चे, जो मदरसों में पढ़ते थे, अचानक गायब हो गए। जब उनके माता-पिता ने विरोध शुरू किया, तो स्थानीय प्रशासन ने कहा कि बच्चे “प्रशिक्षण” के लिए गए हैं और जल्द लौट आएंगे। लेकिन उनमें से कोई भी बच्चा वापस नहीं लौटा। नासिर ने कहा, “ये बच्चे आतंकी बनाए जाते हैं। उनके नाम बदल दिए जाते हैं, और कई बार तो उन्हें प्रशिक्षण के दौरान ही मार दिया जाता है।” नासिर ने कहा, “ये बच्चे निर्दोष हैं। उन्हें ब्रेनवॉश कर फिदायीन बनाया जाता है। यह मानवता के खिलाफ अपराध है।”

Baisaran Terror Attack: PoK में चीनी कंपनियां कर रही हैं खनिजों की लूट

नासिर ने बताया कि PoK में प्राकृतिक संसाधनों की लूट हो रही है। रावलाकोट और गिलगित-बल्तिस्तान (Baisaran Terror Attack) में सोने की खदानें, यूरेनियम और अन्य कीमती खनिज पाए गए हैं। लेकिन इन संसाधनों का दोहन पाकिस्तान की सरकार और सेना चीनी कंपनियों के जरिए कर रही है। नासिर ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव के अनुसार, PoK एक विवादित क्षेत्र है, और पाकिस्तान का इन संसाधनों पर कोई कानूनी अधिकार नहीं है। फिर भी, पाकिस्तान ने चीनी कंपनियों को खनन, बांध निर्माण और बिजली परियोजनाओं के लिए खुली छूट दे रखी है। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति इतनी खराब है कि वह खुद इन परियोजनाओं को नहीं चला सकता। इसलिए उसने चीन को PoK में खुली छूट दी है।” उन्होंने कहा कि चीन की मौजूदगी PoK में न केवल खनन तक सीमित है, बल्कि CPEC परियोजनाओं और बांध निर्माण में भी उसकी भागीदारी है। नासिर ने कहा कि PoK की जनता को इन संसाधनों का कोई लाभ नहीं मिलता।

Baisaran Terror Attack: PoK में गरीबी और बेरोजगारी चरम पर

नासिर ने PoK की सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने बताया कि PoK की कुल आबादी लगभग 50 लाख है, जिसमें से 20 लाख लोग रोजगार की तलाश में खाड़ी देशों और मध्य पूर्व में पलायन कर चुके हैं। वहां न उद्योग हैं, न रोजगार के अवसर। सरकारी नौकरियां केवल उन लोगों को मिलती हैं, जो पाकिस्तान के प्रति वफादारी की शपथ लेते हैं। सरकारी स्कूलों और अस्पतालों की स्थिति बदहाल है। 2005 के भूकंप के बाद यूएई ने रावलाकोट और मुजफ्फराबाद में अस्पताल बनाए थे, लेकिन वहां की आधुनिक मशीनें भी हटा ली गईं, क्योंकि उन्हें चलाने वाला कोई नहीं था। नासिर ने कहा, “जो लोग विदेशों से पैसा कमाते हैं, वे निजी स्कूलों और अस्पतालों का खर्च उठा सकते हैं। लेकिन गरीबों के बच्चे या तो मदरसों में जाते हैं या आतंकी शिविरों में जबरन भेज दिए जाते हैं।”

सरदार नासिर अजीज खान ने भारत और खासकर कश्मीर के मुस्लिमों (Baisaran Terror Attack) की प्रशंसा करते हुए कहा कि भारतीय मुसलमानों ने हमेशा आतंकवाद के खिलाफ और शांति के पक्ष में खड़े होने का उदाहरण पेश किया है। उन्होंने कहा कि कश्मीर घाटी में “हिंदू-मुस्लिम भाईचारे” के नारे लगना इस साजिश का सबसे करारा जवाब है, जो पाकिस्तान रचने की कोशिश कर रहा है।

कोकेरनाग के रास्ते बैसरन पहुंचे थे आतंकी

बता दें कि पहलगाम हमले (Baisaran Terror Attack) में छह आतंकियों ने किश्तवाड़ से होते हुए कोकेरनाग के रास्ते बैसरन पहुंचकर 26 लोगों को गोलियों से भून डाला। ये आतंकी स्थानीय सहयोगियों यानी ओवरग्राउंड वर्कर्स (OGW) की मदद से पर्यटकों के बीच घुसे और इस हमले को अंजाम दिया। जांच में पता चला कि आतंकियों ने अप्रैल के पहले सप्ताह में पहलगाम के पर्यटक स्थलों और होटलों की रेकी की थी। पहलगाम हमले में आतंकियों ने अत्याधुनिक अमेरिकी हथियार M4 राइफल का इस्तेमाल किया, जो आमतौर पर अमेरिकी और नाटो सैनिकों द्वारा उपयोग किया जाता है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, ये हथियार अफगानिस्तान से तस्करी के जरिए PoK पहुंचे। जब अमेरिका ने 2021 में अफगानिस्तान से अपनी सेना वापस बुलाई, तो लगभग 80 बिलियन डॉलर के हथियार वहां छोड़ दिए गए। तालिबान के कब्जे के बाद ये हथियार विभिन्न आतंकी संगठनों के हाथ लगे, जिन्हें ISI के जरिए PoK में सक्रिय आतंकियों तक पहुंचाया गया।

Pahalgam attack: पहलगाम हमले से पहले टीला रेंज में पाकिस्तान की War Rehearsal, क्या ये इत्तेफाक था? इस अफसर ने किया था कमांड! LoC पर बढ़ाया बिल्डअप

‘अल्पाइन क्वेस्ट’ एप हो रही मददगार

जांच एजेंसियों ने खुलासा किया कि पहलगाम हमले (Baisaran Terror Attack) में आतंकियों ने ‘अल्पाइन क्वेस्ट’ नामक एक एन्क्रिप्टेड नेविगेशन ऐप का इस्तेमाल किया। यह एप एडवांस जीपीएस मैपिंग और ऑफलाइन ट्रैकिंग की सुविधा प्रदान करता है, जिसकी मदद से आतंकी घने जंगलों से होकर पहलगाम पहुंचे और भारतीय सुरक्षा बलों की नजरों से बचे रहे। सूत्रों के मुताबिक, इस एप को पाकिस्तानी सेना की देखरेख में बनाया गया था ताकि भारतीय खुफिया एजेंसियों की निगरानी से बचा जा सके। आतंकियों को इस एप के इस्तेमाल की विशेष ट्रेनिंग दी जाती है, ताकि वे मुश्किल इलाकों में आसानी से रास्ता ढूंढ सकें।

Pahalgam Terror Attack: भारत ने दुनिया को दिखाए पाकिस्तान के हाथ होने के सबूत, TRF के इलेक्ट्रॉनिक सिग्नेचर दो जगहों पर किए ट्रेस

Pahalgam Terror Attack: India Traces TRF Electronic Signature to Pakistan

Pahalgam Terror Attack: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने दुनिया के सामने पाकिस्तान के हाथ होने के सबूत रखे हैं। इस हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की जान गई थी। अब भारत ने टेक्निकल इंटेलिजेंस और चश्मदीद गवाहों के भरोसेमंद बयानों के आधार पर यह स्पष्ट कर दिया है कि इस हमले के पीछे पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठनों का हाथ है।

Pahalgam Terror Attack: India Traces TRF Electronic Signature to Pakistan

भारत ने इस हमले के बाद तुरंत कूटनीतिक और रणनीतिक कदम उठाए। पिछले दो दिनों में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 वैश्विक नेताओं से फोन पर बात की, जबकि विदेश सचिव विक्रम मिस्री और विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने दिल्ली में 30 से ज्यादा देशों के राजदूतों के साथ बैठकें कीं। इन बैठकों में भारत ने पाकिस्तानी आतंकी लिंक को साबित करने वाले सबूत पेश किए।

Pahalgam Terror Attack: क्या हैं सबूत?

भारतीय खुफिया एजेंसियों ने पहलगाम आतंकी हमला (Pahalgam Terror Attack) के आतंकियों की पहचान कर ली है। तकनीकी खुफिया जानकारी से पता चला है कि पाकिस्तान के आतंकी समूह लश्कर-ए-तैयबा के शेडो ग्रुप ‘द रेसिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) के इलेक्ट्रॉनिक सिग्नेचर पाकिस्तान के दो जगहों पर ट्रेस किए गए हैं। खुफिया एजेंसियों ने मोबाइल सिग्नल, इलेक्ट्रॉनिक संचार, रेडियो फ्रीक्वेंसी मॉनिटरिंग) के जरिये आतंकियों की लोकेशन को पकड़ा। आतंकी कुछ समय पहले सीमा पार से भारत में दाखिल हुए थे और छिपे हुए थे। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हमलावरों में कम से कम चार आतंकी शामिल थे, जिनमें दो विदेशी (पाकिस्तानी) थे।

खुफिया सूत्रों के अनुसार, इस हमले की योजना बहुत सावधानी से बनाई गई थी। आतंकियों ने पहले बैसरन घाटी की रेकी की और सही समय का इंतजार किया। बता दें कि पाकिस्तान ने हमले से पहले ही सीमा पर तैनाती बढ़ाई और पाकिसानी सेना के जनरल आसिम मुनीर ने सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देने की बात कही थी।

इसके अलावा, चश्मदीद गवाहों और अन्य खुफिया स्रोतों से मिले संकेत भी साफ बताते हैं कि हमलावर पाकिस्तान से आए थे और कुछ समय से जम्मू-कश्मीर में छिपे हुए थे।

Pahalgam Terror Attack: भारत की कूटनीतिक जवाबी कार्रवाई

पहलगाम आतंकी हमला (Pahalgam Terror Attack) के बाद भारत ने भारत-पाकिस्तान सीमा तनाव को देखते हुए कड़े कूटनीतिक कदम उठाए। भारत ने 1960 के सिंधु जल समझौते को निलंबित कर दिया, अटारी सीमा चौकी को बंद कर दिया, और पाकिस्तानी राजनयिकों को ‘पर्सोना नॉन ग्राटा’ घोषित कर सात दिनों में देश छोड़ने का आदेश दिया। इसके अलावा, भारत ने इस्लामाबाद में अपने दूतावास के कर्मचारियों को वापस बुला लिया और SAARC वीजा छूट योजना के तहत पाकिस्तानी नागरिकों को भारत में प्रवेश पर रोक लगा दी।

विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा, “इस कश्मीर आतंकी हमला के सीमा पार संबंध स्पष्ट हैं। हम आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाएंगे।” भारत ने इन कदमों को वैश्विक समुदाय के सामने जायज ठहराया, जिसका मकसद पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करना और उस पर दबाव बढ़ाना है।

Pahalgam Terror Attack: कई देशों के नेताओं ने दिया समर्थन

पहलगाम आतंकी हमले (Pahalgam Terror Attack) के बाद 13 वैश्विक नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बात की और हमले की निंदा की। इनमें अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी, और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर शामिल हैं। स्टार्मर ने इसे “भयावह” और डच प्रधानमंत्री डिक स्कूफ ने इसे “कायराना कृत्य” करार दिया। सभी ने भारत के साथ एकजुटता जताई और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में समर्थन का वादा किया।

पीएम मोदी ने इन नेताओं का आभार जताया और कहा, “भारत आतंकियों और उनके समर्थकों को धरती के किसी भी कोने से ढूंढकर सजा देगा।” विदेश मंत्री एस जयशंकर भी लगातार सक्रिय हैं। उन्होंने सऊदी अरब के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान अल सऊद से बातचीत की। इज़राइल, नेपाल, मिस्र और अर्जेंटीना के राजदूतों से मुलाकात की। फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट से भी फोन पर चर्चा की। इसके अलावा जर्मनी के चांसलर के सलाहकार जेंस प्लॉटनर से भी मुलाकात की।

Pahalgam Terror Attack: पर्यटन को लगा झटका

पहलगाम आतंकी हमले (Pahalgam Terror Attack) ने कश्मीर के पर्यटन उद्योग को गहरा झटका दिया है। 2024 में 35 लाख पर्यटकों ने कश्मीर का दौरा किया था, लेकिन इस हमले के बाद कई बुकिंग रद्द हो गईं। भारत ने वैश्विक समुदाय को आश्वस्त किया कि कश्मीर पर्यटन सुरक्षा बरकरार है और विदेशी पर्यटकों के लिए कोई खतरा नहीं है। हालांकि, अमेरिका और ब्रिटेन ने यात्रा सलाह जारी की है, जिसे भारत ने गैरजरूरी बताया है।

Pahalgam Attack: सीमा पार से घुसपैठ को रोकने के लिए सेना बनाएगी अस्थायी ऑपरेटिंग बेस, ऊंचाई वाले इलाकों में तैनात होंगे सैनिक

वहीं, प्रधानमंत्री मोदी ने बिहार के मधुबनी में एक रैली में कहा, “हम हर आतंकी को ट्रैक करेंगे और सजा देंगे। भारत का हौसला आतंकवाद से कभी नहीं टूटेगा।” आतंकवादी फंडिंग व्यवधान और ड्रोन-रोधी तकनीक कश्मीर जैसे कदमों के जरिए भारत आतंकवाद के इकोसिस्टम को खत्म करने की कोशिश कर रहा है। वहीं, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा, “यह हमला कश्मीरियत के खिलाफ है। हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।”

Pahalgam Attack: सीमा पार से घुसपैठ को रोकने के लिए सेना बनाएगी अस्थायी ऑपरेटिंग बेस, ऊंचाई वाले इलाकों में तैनात होंगे सैनिक

Pahalgam Attack: Army to Set Up Temporary Bases, Deploy Troops in Higher Reaches

Pahalgam Attack: जम्मू-कश्मीर के खूबसूरत पर्यटक स्थल पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए भीषण आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस हमले में बैसरन घाटी में 26 लोग मारे गए, जिनमें ज्यादातर पर्यटक थे। इस घटना के बाद भारतीय सेना ने कश्मीर घाटी के प्रमुख पर्यटक स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था की जांच करने और सैनिकों की दोबारा तैनाती करने का फैसला किया है। इसका मकसद पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और आगामी अमरनाथ यात्रा को निर्बाध रूप से संपन्न कराना है।

Pahalgam Attack: Army to Set Up Temporary Bases, Deploy Troops in Higher Reaches

Pahalgam Attack: क्या हुआ था पहलगाम में?

पहलगाम को अपनी प्राकृतिक सुंदरता के चलते ‘मिनी स्विट्जरलैंड’ भी कहा जाता है। यह पर्यटकों के लिए स्वर्ग जैसा है। लेकिन मंगलवार दोपहर करीब 2:30 बजे, बाइसारन घाटी में उस समय खौफ का माहौल बन गया, जब 3 से 6 आतंकियों ने अचानक वहां मौजूद पर्यटकों पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाईं। पाकिस्तान समर्थित लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी संगठन ‘द रेसिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) ने इस हमले की जिम्मेदारी ली। हमले में 24 भारतीय पर्यटक, दो विदेशी और एक स्थानीय नागरिक की जान चली गई। मरने वालों में हरियाणा के एक नौसेना अधिकारी लेफ्टिनेंट विनय नरवाल और एक खुफिया ब्यूरो (IB) अधिकारी भी शामिल थे।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आतंकियों ने पहले पर्यटकों के नाम और धर्म पूछे। कुछ पुरुष पर्यटकों को कलमा पढ़ने के लिए कहा गया, और कुछ को शारीरिक जांच के बाद गोली मार दी गई। यह हमला करीब 30 मिनट तक चला, जिसके बाद आतंकी घने जंगलों की आड़ लेकर फरार हो गए। यह कश्मीर में 2019 के पुलवामा हमले के बाद सबसे बड़ा आतंकी हमला है, जिसने सुरक्षा व्यवस्थाओं की खामियों को उजागर किया।

Pahalgam Attack: बनाए जाएंगे अस्थायी ऑपरेटिंग बेस

पहलगाम हमले के बाद भारतीय सेना ने तत्काल कार्रवाई शुरू की। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने शुक्रवार को कश्मीर का दौरा किया और सुरक्षा हालात का जायजा लिया। सेना ने घाटी के सभी प्रमुख पर्यटक स्थलों का सुरक्षा ऑडिट करने का फैसला किया है। इसके तहत बैसरन जैसी दूरदराज की घाटियों वाले इलाकों की जांच की जाएगी, जो आतंकी हमलों के लिए संवेदनशील हैं।

सेना अब अपनी मौजूदा टुकड़ियों को कश्मीर के भीतरी इलाकों से उन क्षेत्रों में तैनात करेगी, जहां खतरा ज्यादा है। गर्मियों में ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सैनिकों की गश्त बढ़ाई जाएगी, ताकि सीमा पार से घुसपैठ को रोका जा सके और आतंकियों को छिपने की जगह न मिले। इसके लिए अस्थायी ऑपरेटिंग बेस (Temporary Operating Bases) का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल किया जाएगा। ये बेस सैनिकों को 72 से 96 घंटे तक किसी क्षेत्र में ऑपरेशन चलाने की सुविधा देंगे, जिससे बड़े इलाकों में तलाशी अभियान चलाए जा सकें।

सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “यह हमला आतंकियों की हताशा को दर्शाता है। वे सुरक्षा बलों से सीधे मुकाबला नहीं कर पा रहे, इसलिए निहत्थे नागरिकों को निशाना बना रहे हैं। बैसरन घाटी में हमला इसलिए हुआ, क्योंकि यह इलाका मुख्य सैन्य बेस से 40 मिनट की दूरी पर है और वहां तत्काल जवाबी कार्रवाई मुश्किल थी।” साथ ही, ये सड़क से लगा हुआ नहीं है, और पैदल यहां पहुंचने में एक घंटे से ऊपर का वक्त लग जाता है।

Pahalgam Attack: अमरनाथ यात्रा पर मंडराया खतरा

पहलगाम हमला ऐसे समय हुआ है, जब अमरनाथ यात्रा की तैयारियां जोरों पर हैं। यह यात्रा 3 जुलाई से शुरू होगी और 38 दिनों तक चलेगी। पहलगाम इस यात्रा का एक प्रमुख आधार शिविर है, जहां से हजारों श्रद्धालु अमरनाथ गुफा की ओर रवाना होते हैं। 2024 में इस यात्रा में 5.12 लाख श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया था, जो एक दशक में सबसे ज्यादा था। लेकिन इस हमले के बाद यात्रा पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं।

जम्मू के होटल और लॉज एसोसिएशन के अध्यक्ष इंदजीत खजुरिया ने कहा, “यह हमला पर्यटन उद्योग के लिए बड़ा झटका है। अमरनाथ यात्रा की घोषणा के ठीक बाद यह हुआ, जिससे तीर्थयात्रियों में डर फैल गया है। हम चाहते हैं कि इस यात्रा की सुरक्षा का जिम्मा पूरी तरह सेना को सौंपा जाए।” कई पर्यटकों ने अपनी बुकिंग रद्द कर दी है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को नुकसान हो रहा है।

पहलगाम हमला कश्मीर में शांति की दिशा में एक बड़ा झटका है। 2024 में कश्मीर में 35 लाख पर्यटक आए थे, जिनमें 43,000 विदेशी थे। लेकिन इस हमले ने पर्यटन उद्योग को गहरी चोट पहुंचाई है। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा, “यह हमला कश्मीरियत और भारत के विचार पर हमला है। हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।”

Pahalgam Terrorist Attack: आतंकी खतरे का आकलन

खुफिया सूत्रों के मुताबिक, इस हमले के पीछे लश्कर-ए-ताइबा के कमांडर सैफुल्लाह कसूरी उर्फ खालिद का हाथ है। माना जा रहा है कि आतंकी जम्मू के किश्तवाड़ से कोकेरनाग होते हुए बैसरन घाटी तक पहुंचे। भारत-पाकिस्तान सीमा की 3,323 किलोमीटर लंबी रेखा, जो पहाड़ों और घने जंगलों से घिरी है, को पूरी तरह सुरक्षित करना चुनौतीपूर्ण है। आतंकी स्थानीय नेटवर्क और सुरंगों का इस्तेमाल कर घुसपैठ करते हैं।

पहलगाम हमले के बाद खुफिया एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि सीमा पार से समर्थित आतंकी और स्थानीय असंतोष का फायदा उठाकर और हमले हो सकते हैं। पंजाब और हिमाचल प्रदेश से सटे कठुआ, डोडा और किश्तवाड़ जैसे इलाकों में आतंकी गतिविधियां बढ़ रही हैं। अनुमान है कि जम्मू-कश्मीर में पंजाल रेंज के उत्तर में 75-80 आतंकी सक्रिय हैं, जिनमें 50 से ज्यादा विदेशी हैं। दक्षिण में 45-50 आतंकी हैं, जिनमें 30 से ज्यादा विदेशी शामिल हैं।

भारत का जवाब

इस हमले के बाद भारत ने कड़ा रुख अपनाया है। सरकार ने 1960 के सिंधु जल समझौते को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया और पाकिस्तानी नागरिकों के लिए वीजा सेवाएं बंद कर दीं। अटारी-वाघा सीमा पर एकीकृत जांच चौकी को भी बंद कर दिया गया है। विदेश सचिव विक्रम मिश्री ने कहा, “पाकिस्तान जब तक सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देना बंद नहीं करता, तब तक यह निलंबन जारी रहेगा।”

सुरक्षा सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान ने नियंत्रण रेखा (LoC) पर अपनी सैन्य तैनाती बढ़ा दी है, क्योंकि उसे भारत से जवाबी कार्रवाई की आशंका है। भारत ने साफ कर दिया है कि पाकिस्तान की ओर से किसी भी संघर्ष विराम उल्लंघन का कड़ा जवाब दिया जाएगा। सेना अब ड्रोन-रोधी तकनीक, सुरंग-रोधी उपायों और आतंकी फंडिंग को रोकने पर काम कर रही है।

LoC पर छोटे हथियारों से फायरिंग

गुरुवार और शुक्रवार रात को पाकिस्तानी सेना ने बारामूला-कुपवाड़ा के बीच नौगाम क्षेत्र में LoC पर छोटे हथियारों से फायरिंग शुरू की, जिसका भारतीय सेना ने कड़ा जवाब दिया। पाकिस्तान ने करीब 600 राउंड गोलीबारी की, जबकि भारत ने 1300 राउंड फायर किए। छोटे हथियारों में राइफल, कार्बाइन, लाइट मशीन गन (LMG) और रॉकेट लॉन्चर शामिल थे, हालांकि मोर्टार का इस्तेमाल नहीं हुआ। 778 किलोमीटर लंबी LoC पर कई जगहों से रातभर फायरिंग की आवाजें सुनाई दीं, लेकिन भारतीय सीमा में कोई गोलीबारी नहीं हुई।

Pahalgam attack: पहलगाम हमले से पहले टीला रेंज में पाकिस्तान का War Rehearsal, क्या ये इत्तेफाक था? इस अफसर ने किया था कमांड! LoC पर बढ़ाया बिल्डअप

भारतीय सेना ने पूरे LoC पर हाई अलर्ट घोषित कर दिया है। इसका मतलब है कि सभी महत्वपूर्ण चौकियों पर सैनिक हर समय तैयार रहते हैं। क्विक रिएक्शन टीमें (QRT) तुरंत कार्रवाई के लिए तैनात हैं। राशन का 7 से 15 दिन का रिजर्व स्टॉक, गोला-बारूद और अन्य संसाधन हर यूनिट में सुनिश्चित किए गए हैं। प्रत्येक यूनिट की भौगोलिक स्थिति और कार्य के आधार पर अलर्ट स्तर अलग-अलग है। मोबलाइजेशन स्कीम के तहत यूनिट्स अपनी तैयारियों को पूरा रखती हैं, जिसमें छुट्टियों को रद्द करने जैसे कदम भी शामिल हैं।

Pahalgam attack: पहलगाम हमले से पहले टीला रेंज में पाकिस्तान का ‘War Rehearsal’, क्या ये इत्तेफाक था? इस अफसर ने किया था कमांड! LoC पर बढ़ाया बिल्डअप

Pahalgam Attack Preceded by Pakistan's 'War Drill' at Tilla Range, Coincidence or Calculated Move?

Pahalgam attack: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पाक समर्थित लश्कर के आतंकी हमले में 28 लोगों की जान जाने के बाद भारत-पाकिस्तान संबंध एक बार फिर से तनावपूर्ण हो गए हैं। इस हमले के बाद पाकिस्तानी सेना की ओर से नियंत्रण रेखा (LoC) और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सैन्य गतिविधियों में तेजी देखी गई है। सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तानी सेना ने अपनी आर्टिलरी और बख्तरबंद (आर्मर्ड) इकाइयों का जमावड़ा LoC और अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास बढ़ा दिया है। इसके साथ ही, हमले से ठीक पहले पाकिस्तानी पंजाब के झेलम जिले में टीला रेंज में सैन्य अभ्यास के नाम पर बड़े पैमाने पर सैन्य तैनाती की गई थी। बताया जा रहा है कि इस एक्सरसाइज का नेतृत्व लाहौर स्थित 4 कोर के पूर्व जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल सलमान फैय्याज घनी ने किया था। उनका घर जिन्ना हाउस, मई 2023 में पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) समर्थकों ने जलाया था।

Pahalgam Attack Preceded by Pakistan's 'War Drill' at Tilla Range, Coincidence or Calculated Move?

8 अप्रैल को टीला रेंज में हुई थी मिलिट्री एक्सरसाइज

पाकिस्तानी सेना ने पहलगाम हमले से ठीक पहले झेलम के टीला रेंज में 8 अप्रैल को एक सैन्य अभ्यास शुरू किया था। टीला रेंज भारत-पाकिस्तान सीमा के करीब है, रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाका है। सूत्रों के अनुसार, इस अभ्यास में आर्टिलरी, बख्तरबंद वाहन, और अन्य भारी हथियारों की तैनाती शामिल थी। इस एक्सरसाइज में पाकिस्तान की स्पेशल सर्विसेज ग्रुप (SSG), आर्मी एविएशन, और एयर डिफेंस यूनिट्स ने हिस्सा लिया था। यह पाकिस्तान सेना और वायुसेना का संयुक्त सैन्य अभ्यास था। यहां पर मशहूद टेस्ट फायरिंग रेंज (Mashhood Test Firing Range) भी है।

कहने के लिए यह अभ्यास कथित तौर पर नियमित सैन्य प्रशिक्षण का हिस्सा था, लेकिन इसकी टाइमिंग और जगह पर सवाल खड़े हो रहे हैं। सूत्रों का मानना है कि यह अभ्यास केवल एक दिखावा था, जिसका असली मकसद LoC और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर अपनी सैन्य ताकत को दिखा कर भारत पर दबाव बनाना था। पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तानी सेना की ओर से LoC पर छोटे हथियारों से गोलीबारी की खबरें भी सामने आईं, जिसका भारतीय सेना ने माकूल जवाब दिया।

लेफ्टिनेंट जनरल सलमान फैय्याज घनी  

इस सैन्य अभ्यास का नेतृत्व 4 कोर के पूर्व कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल सलमान फैय्याज घनी ने किया था। घनी का नाम हाल ही में उस समय सुर्खियों में आया था, जब मई 2023 में PTI समर्थकों ने उनके आधिकारिक आवास, जिन्ना हाउस, पर हमला कर उसे आग के हवाले कर दिया था। यह हमला पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद भड़के दंगों के बाद हुआ था। हालांकि इस घटना के बाद घनी समेत तीन अधिकारियों को 9 मई की हिंसा में सैन्य प्रतिष्ठानों की सुरक्षा में विफलता के चलते पद से हटा कर उन्हें जीएचक्यू बुला लिया गया था। हालांकि जीएचक्यू में उन्हें क्या जिम्मेदारी दी गई, यह साफ नहीं हो पाया है।

Pahalgam Attack Preceded by Pakistan's 'War Drill' at Tilla Range, Coincidence or Calculated Move?
Lt Gen salman fayyaz ghani

सलमान फैयाज घनी ने पाकिस्तान मिलिट्री एकेडमी (PMA) के 79वें लॉन्ग कोर्स में ट्रेनिंगली और फ्रंटियर फोर्स रेजिमेंट (10वीं बटालियन) में सेकंड लेफ्टिनेंट के बने। नवंबर 2020 में उन्हें लेफ्टिनेंट जनरल के पद पर पदोन्नत किया गया और जनरल हेडक्वार्टर्स (GHQ) में इंस्पेक्टर जनरल (आर्म्स) नियुक्त किया गया। जिसके बाद अक्टूबर 2022 में उन्हें लाहौर कोर का कोर कमांडर नियुक्त किया गया था।

LoC और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बढ़ाई तैनाती 

पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तानी सेना ने LoC और अंतरराष्ट्रीय सीमा, खासकर सियालकोट डिवीजन में, अपनी सैन्य तैनाती बढ़ा दी है। सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान ने अपने 10 कोर, जो रावलपिंडी में मुख्यालय रखता है, और सियालकोट में तैनात बलों को हाई अलर्ट पर रखा है। भारत की ओर से जवाबी कार्रवाई की आशंका के चलते सैनिकों को बंकरों के अंदर रहने और निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।

पाकिस्तानी वायुसेना ने भी उत्तरी हवाई क्षेत्र में इलेक्ट्रॉनिक खुफिया और हवाई चेतावनी प्रणाली (AEW&C) विमानों को तैनात कर दिया है। भारतीय वायुसेना के डिफेंस स्ट्रक्चर्स और कॉमर्शियल रडार्स ने पाकिस्तानी वायुसेना की हवाई गतिविधियों को दर्ज किया है। इसके अलावा, पाकिस्तानी सेना ने अपनी एयर एसेट्स को दक्षिणी क्षेत्र से उत्तरी क्षेत्र की ओर स्थानांतरित किया है, जो भारत की संभावित जवाबी कार्रवाई को रोकने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

भारतीय खुफिया एजेंसियों का मानना है कि पहलगाम हमले की साजिश लंबे समय से बनाई जा रही थी, जिसके लिए बकायदा इस इलाके की रेकी भी की गई। इस हमले के समय दोनों देशों के प्रधानमंत्री अपने-अपने देशों से बाहर थे। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सऊदी अरब में और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ तुर्की में थे।

वहीं, पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल सईद असीम मुनीर ने हाल ही में कश्मीर को पाकिस्तान की “जुगुलर वेन” (महत्वपूर्ण नस) करार देते हुए भारत के खिलाफ भड़काऊ भाषण दिए थे। सूत्रों का कहना है कि यह बकायदा पाकिस्तानी सेना की रणनीति थी। वह देश के अंदरूनी संकट, खासकर इमरान खान और PTI के साथ चल रहे टकराव से ध्यान हटाने के लिए भारत के खिलाफ तनाव बढ़ाना चाहती थी।

पाकिस्तान में सेना के खिलाफ जनता का गुस्सा बढ़ रहा है, खासकर अप्रैल 2022 में जिस तरह से इमरान खान को प्रधानमंत्री पद से हटाया गया, लोग उससे नाराज हैं। मई 2023 में खान की गिरफ्तारी के बाद हुए दंगों में जिन्ना हाउस पर हमला इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। जनरल मुनीर, जो खुद को “हाफिज-ए-कुरान” कहते हैं, भारत के खिलाफ भावनाओं को भड़काकर जनता का समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं।

वहीं, भारत ने पहलगाम हमले के बाद कड़े कदम उठाए हैं, जिसमें अटारी में इंटीग्रेटेड चेक पॉइंट को बंद करना, पाकिस्तानी नागरिकों के लिए सार्क वीजा छूट योजना को निलंबित करना, और 1960 की सिंधु जल संधि को रद्द करना शामिल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट किया है कि इस हमले के जिम्मेदार आतंकवादियों और उनके समर्थकों को कड़ी सजा दी जाएगी।

Pakistan Defence Minister: पाकिस्तान के रक्षा मंत्री का कबूलनामा– ‘आतंकियों को पाला, अमेरिका के लिए गंदा काम किया’

भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी भी शुक्रवार को श्रीनगर पहुंचे हैं, जहां वे सेना के उच्च अधिकारियों से जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा स्थिति का जायजा लेंगे। भारतीय सेना ने भी LoC पर अपनी निगरानी बढ़ा दी है और आतंकवादियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान शुरू किया है।

Pakistan Defence Minister: पाकिस्तान के रक्षा मंत्री का कबूलनामा– ‘आतंकियों को पाला, अमेरिका के लिए गंदा काम किया’

Pakistan Defence Minister Khawaja Asif Admits: “We Backed Terrorists for the US”

Pakistan Defence Minister: पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक सनसनीखेज खुलासा करते हुए स्वीकार किया है कि पाकिस्तान ने कई दशकों तक आतंकवादी संगठनों को न केवल समर्थन दिया, बल्कि उन्हें फंडिंग, प्रशिक्षण और अन्य सुविधाएं भी प्रदान कीं। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान पर कड़ी कार्रवाई कर रहा है।

Pakistan Defence Minister Khawaja Asif Admits: “We Backed Terrorists for the US”

यह खुलासा तब हुआ, जब स्काई न्यूज की पत्रकार याल्दा हकीम ने उनसे सवाल किया कि क्या पाकिस्तान का आतंकवादी संगठनों को समर्थन देने का लंबा इतिहास रहा है। इस सवाल के जवाब में ख्वाजा आसिफ ने कहा, “हमने लगभग तीन दशक तक संयुक्त राज्य अमेरिका और पश्चिमी देशों के लिए यह गंदा काम किया। यह एक गलती थी, जिसके लिए हमें भारी कीमत चुकानी पड़ी।” ख्वाजा आसिफ ने यह भी कहा कि भारत के साथ “पूर्ण युद्ध” की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

Pakistan Defence Minister: पहलगाम हमले के बाद भारत सरकार ने उठाए कड़े कदम

पिछले दिनों जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए एक भीषण आतंकी हमले में 26 लोगों की जान चली गई थी। इस हमले को लेकर भारत ने स्पष्ट रूप से कहा कि इसके पीछे सीमा पार से आतंकवादी संगठनों का हाथ है। भारत के विदेश सचिव विक्रम मिश्री ने कैबिनेट सुरक्षा समिति की बैठक में इस हमले के पाकिस्तान से जुड़े होने की बात सामने रखी। उन्होंने कहा कि यह हमला उस समय हुआ, जब जम्मू-कश्मीर में सफलतापूर्वक चुनाव हुए और वहां सब कुछ सामान्य हो रहा था।

इस हमले के जवाब में भारत सरकार ने कई कड़े कदम उठाए। सरकार ने अटारी में इंटीग्रेटेड चेकपॉइंट (आईसीपी) को बंद कर दिया, पाकिस्तानी नागरिकों के लिए सार्क वीजा छूट योजना (एसवीईएस) को निलंबित कर दिया और उन्हें 48 घंटे के भीतर देश छोड़ने का आदेश दिया। इसके अलावा, दोनों देशों के उच्चायोगों में अधिकारियों की संख्या को कम करने का फैसला भी लिया गया। वहीं, जब भारत ने 1960 की सिंधु जल संधि को निलंबित करने की घोषणा की तो पाकिस्तान ने इस फैसले को “कायराना” और “अनुचित” करार दिया, लेकिन भारत ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद के खिलाफ उसकी नीति में अब कोई नरमी नहीं बरती जाएगी।

Pakistan Defence Minister: प्रधानमंत्री मोदी का कड़ा संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहलगाम हमले के बाद देश को संबोधित करते हुए कहा कि इस हमले के लिए जिम्मेदार आतंकवादी और उनके साजिशकर्ता “ऐसी सजा पाएंगे, जिसकी वे कल्पना भी नहीं कर सकते।” उन्होंने जोर देकर कहा कि अब समय आ गया है कि आतंकवाद के बचे-खुचे गढ़ों को पूरी तरह खत्म किया जाए। पीएम मोदी ने 140 करोड़ भारतीयों की इच्छाशक्ति की ताकत का जिक्र करते हुए कहा कि यह देश अब आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ेगा।

ख्वाजा आसिफ ने माना- पाकिस्तान ने किया “गंदा काम”

ख्वाजा आसिफ ने कहा, “हमने अमेरिका और पश्चिम के लिए करीब 30 साल तक यह गंदा काम किया।” उन्होंने आगे कहा कि अफगानिस्तान में सोवियत संघ और फिर 9/11 के बाद अमेरिका के युद्ध में शामिल होकर पाकिस्तान ने जो भूमिका निभाई, वह एक भूल थी और उसका खामियाजा पाकिस्तान को भुगतना पड़ा। उनके अनुसार, पाकिस्तान ने 1980 के दशक में सोवियत संघ के खिलाफ और 9/11 के बाद अमेरिका के नेतृत्व वाली अफगानिस्तान युद्ध में आतंकवादी संगठनों का इस्तेमाल किया। आसिफ ने इसे “गलती” करार दिया, लेकिन यह स्वीकार किया कि इस नीति के चलते पाकिस्तान को भारी नुकसान उठाना पड़ा।

उन्होंने दावा किया कि अगर पाकिस्तान ने इन युद्धों में हिस्सा नहीं लिया होता, तो उसका रिकॉर्ड “बेदाग” होता। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय समुदाय और खासकर भारत ने लंबे समय से पाकिस्तान पर आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। पहलगाम हमले जैसे कई आतंकी घटनाओं में पाकिस्तान से जुड़े आतंकवादी संगठनों की भूमिका सामने आई है।

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री का यह खुलासा न केवल भारत के लिए, बल्कि पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए चिंता का विषय है। संयुक्त राज्य अमेरिका और पश्चिमी देशों, जिनके लिए पाकिस्तान ने कथित तौर पर “गंदा काम” किया, ने अभी तक इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

Pahalgam Terror Attack: पहलगाम में हुए आतंकी हमले के पीछे छिपा है टाइमिंग का खेल! गोलियों से कैसे साधी ज्यो-पॉलिटिक्स?

भारत ने संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान के आतंकवाद समर्थन को बार-बार उठाया है। ख्वाजा आसिफ का यह बयान भारत के उन दावों को और मजबूत करता है कि पाकिस्तान आतंकवाद का “प्रायोजक” रहा है।

Explaind: क्या रद्द होगा Shimla Agreement? अगर पाकिस्तान ने की ये हिमाकत तो पड़ेगा भारी, खत्म हो जाएगा बातचीत का आखिरी सूत्र!

Explained: Shimla Agreement- What It Means, Why It Matters, and What Happens If Pakistan Walks Away

इंदिरा गांधी ने शिमला समझौते (Shimla Agreement) के बाद कहा था: “We have taken the first step towards peace and cooperation. It is now up to both nations to build on this foundation for a lasting relationship.” यानी “हमने शांति और सहयोग की दिशा में पहला कदम उठाया है। अब यह दोनों देशों पर निर्भर है कि वे इस नींव पर एक स्थायी रिश्ता बनाएं।” हालांकि भारत ने हमेशा से ही इस समझौते का मान रखा, लेकिन पाकिस्तान अपने वादे पर अडिग नहीं रहा। चाहे 1999 का कारगिल युद्ध, 2008 का 26/11 मुंबई हमला, और पुलवामा हमला। पाकिस्तान ने हमेशा से ही इस समझौते के सम्मान को तार-तार करते हुए इसके कार्यान्वयन में चुनौतियां खड़ी कीं। लेकिन पहलगाम आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया, जिसके बाद भारत को सिंधु जल संधि को निलंबित करने का फैसला करना पड़ा। जिसके जवाब में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी शिमला समझौते को स्थगित करने की धमकी दी है।

Explained: Shimla Agreement- What It Means, Why It Matters, and What Happens If Pakistan Walks Away

Shimla Agreement: भारत-पाकिस्तान संबंधों का एक एतिहासिक दस्तावेज

शिमला समझौता भारत और पाकिस्तान के बीच 1972 में हुआ एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक समझौता है, जो दोनों देशों के संबंधों को परिभाषित करने और क्षेत्रीय शांति को बढ़ावा देने में एक आधारशिला रहा है। यह समझौता न केवल जम्मू-कश्मीर के मुद्दे को द्विपक्षीय बनाए रखता है, बल्कि दोनों देशों के बीच युद्ध और तनाव को कम करने का एक समाधान भी है। जब भी दोनों देशों के बीच तनाव पैदा होता है, तो हमेशा इस समझौते को ही बातचीत का आधार बनाया जाता है।

इतिहासकार और कूटनीतिक विश्लेषक एजी नूरानी ने शिमला समझौते के बारे में लिखा, “The Shimla Agreement was not just a ceasefire pact; it was a bold attempt to redefine India-Pakistan relations through dialogue and mutual respect, anchoring peace in the volatile subcontinent.” यानी “शिमला समझौता केवल एक युद्धविराम संधि नहीं था; यह भारत-पाकिस्तान संबंधों को बातचीत और पारस्परिक सम्मान के माध्यम से पुनर्परिभाषित करने का एक साहसिक प्रयास था, जो अस्थिर उपमहाद्वीप में शांति का आधार बना।”

क्या है Shimla Agreement?

शिमला समझौता 2 जुलाई, 1972 को भारत और पाकिस्तान के बीच हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में हुआ था। इस पर भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति जुल्फिकार अली भुट्टो ने दस्तखत किए थे। यह समझौता 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद हुआ, जिसमें पाकिस्तान की बुरी हार के बाद बांग्लादेश (पूर्वी पाकिस्तान) एक स्वतंत्र राष्ट्र बना। युद्ध के अंत में भारत ने 93,000 पाकिस्तानी सैनिकों को बंदी बना गया था, और यह समझौता युद्ध के बाद की स्थिति को सामान्य करने और दोनों देशों के बीच शांति स्थापित करने का एक प्रयास था। यह समझौता पिछले 50 वर्षों से दोनों देशों के बीच तनाव को कम करने और बातचीत को बढ़ावा देने का आधार रहा है, भले ही कई बार इसका उल्लंघन हुआ हो।

Shimla Agreement की पृष्ठभूमि

1947 में भारत-पाकिस्तान बंटवारे के बाद दोनों देशों के बीच जम्मू-कश्मीर को लेकर तनाव शुरू हो गया। 1947-48 के पहले भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से युद्धविराम रेखा (Line of Ceasefire) बनाई गई। 1965 के युद्ध और उसके बाद कराची समझौता (1966) भी तनाव को पूरी तरह खत्म नहीं कर पाया। लेकिन 1971 की जंग के बाद शिमला समझौते की नींव रखी गई। जब पाकिस्तान ने पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में बंगाली आबादी पर अत्याचार किए, और भारत ने हस्तक्षेप किया, जिसके बाद पाकिस्तान को घुटने टेकने पड़े।

युद्ध के बाद भारत के पास 93,000 पाकिस्तानी सैनिक बंदी थे, और 5,000 वर्ग मील पाकिस्तानी क्षेत्र पर उसका नियंत्रण था। दूसरी ओर, पाकिस्तान कमजोर स्थिति में था, क्योंकि उसने अपना पूर्वी हिस्सा खो दिया था। इस स्थिति में दोनों देशों को एक ऐसे समझौते की जरूरत थी, जो युद्ध के बाद की स्थिति को संभाले और भविष्य में टकराव होने से रोके। शिमला समझौता इसी जरूरत का परिणाम था।

Shimla Agreement के प्रमुख प्रावधान

शिमला समझौता में 12 अनुच्छेद हैं। इसके प्रमुख प्रावधान इस प्रकार हैं:

  • दोनों देश शांति और सहयोग के सिद्धांतों पर आधारित संबंध विकसित करेंगे। वे एक-दूसरे की क्षेत्रीय अखंडता, संप्रभुता, और स्वतंत्रता का सम्मान करेंगे।
  • भारत और पाकिस्तान अपने सभी विवादों, विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर से संबंधित मुद्दों, को बातचीत, मध्यस्थता, या अन्य शांतिपूर्ण तरीकों से हल करेंगे। इसमें तीसरे पक्ष (जैसे संयुक्त राष्ट्र) की मध्यस्थता को शामिल नहीं किया जाएगा।
  • जम्मू-कश्मीर में 17 दिसंबर, 1971 को स्थापित युद्धविराम रेखा को नियंत्रण रेखा (LoC) के रूप में मान्यता दी गई। दोनों देश इसका सम्मान करेंगे और इसे बदलने के लिए बल प्रयोग नहीं करेंगे।
  • दोनों देश एक-दूसरे के खिलाफ आतंकवाद, घुसपैठ, या शत्रुतापूर्ण प्रचार को बढ़ावा नहीं देंगे।
  • समझौते ने दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों, व्यापार, संचार, और सांस्कृतिक आदान-प्रदान की बहाली का रास्ता खोला।
  • भारत ने 93,000 पाकिस्तानी युद्धबंदियों को रिहा करने और कब्जाए गए क्षेत्रों को वापस करने का वादा किया, जबकि पाकिस्तान ने भी भारत के कब्जाए गए क्षेत्रों को लौटाया।
  • समझौते में प्रावधान था कि दोनों देशों के नेता नियमित रूप से मिलेंगे ताकि शांति और सहयोग को बढ़ावा दिया जा सके।
1971 India-Pakistan War: शिमला समझौते में इंदिरा गांधी ने चली थी तुरुप की चाल! कैसे गिड़गिड़ाए थे जुल्फिकार अली भुट्टो

शिमला समझौते का महत्व

शिमला समझौते का सबसे बड़ा फायदा कश्मीर मुद्दे को मिला। इसने कश्मीर मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों से हटाकर भारत और पाकिस्तान के बीच का मामला बनाया। पाकिस्तान ने माना कि कश्मीर विवाद को अंतरराष्ट्रीय नहीं, बल्कि भारत-पाक के बीच आपसी सहमति से ही सुलझाया जाना चाहिए। समझौते ने जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा (LoC) को 17 दिसंबर, 1971 की युद्धविराम रेखा का आधार बनाया, जिसने दोनों देशों के बीच सीमा विवाद को कम करने में मदद की। समझौते ने भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत का एक आधार दिया, जिसके तहत बाद में लाहौर घोषणा पत्र (1999) और आगरा शिखर सम्मेलन (2001) का आयोजन हुआ। साथ ही, इसने आतंकवाद और शत्रुतापूर्ण गतिविधियों को रोकने की प्रतिबद्धता जताई। वहीं, इस समझौते ने कूटनीतिक और व्यापारिक संबंधों को बहाल करने का रास्ता खोला। ये अलग बात है कि पाकिस्तान ने बातचीत का दिखावा करते हुए इस समझौते की हमेशा से ही धज्जियां उड़ाईं।

Indus Waters Treaty: सिंधु जल समझौते के निलंबन को पाकिस्तान ने बताया ‘जल युद्ध’, अफगानिस्तान का साथ मिला तो प्यासे मरेंगे आतंकी

Indus Waters Treaty: Pakistan Cries 'Water War' as India Gains Afghan Leverage
Indus Waters treaty signing Sept. 19, 1960: Jawaharlal Nehru, Prime Minister of India; Mohammed Ayub Khan, President of Pakistan; and William Illiff, World Bank vice president (Credit: The World Bank)

Indus Waters Treaty: हाल ही में भारत की तरफ से सिंधु जल समझौते (Indus Waters Treaty – IWT) को तत्काल प्रभाव से निलंबित किए जाने के फैसले ने पाकिस्तान में खलबली मचा दी है। भारत ने इस फैसले का एलान पहलगाम आतंकी हमले के बाद किया, जिसमें 26 निर्दोष पर्यटकों की जान चली गई थी। इसके बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान को आतंकवाद के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को समर्थन देना बंद नहीं करता, तब तक यह संधि लागू नहीं रहेगी। वहीं, पाकिस्तान में इस कदम ने हड़कंप मचा दिया है, और पाकिस्तानी अखबार ‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ ने इसे दोनों देशों के बीच जल सहयोग के लिए एक बड़ा खतरा बताया। अखबार ने पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था, कृषि और समाज पर इसके गंभीर प्रभावों की चेतावनी दी है।

Indus Waters Treaty: Pakistan Cries 'Water War' as India Gains Afghan Leverage
Indus Waters treaty signing Sept. 19, 1960: Jawaharlal Nehru, Prime Minister of India; Mohammed Ayub Khan, President of Pakistan; and William Illiff, World Bank vice president (Credit: The World Bank)

Indus Waters Treaty: क्या है सिंधु जल समझौता?

सिंधु जल समझौता 19 सितंबर 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुआ था। यह समझौता हिमालय से निकलने वाली सिंधु नदी और इसकी सहायक नदियों रावी, सतलज, ब्यास, झेलम, चिनाब और सिंधु के पानी के बंटवारे को नियंत्रित करता है। 1947 में भारत-पाकिस्तान बंटवारे के बाद पंजाब की एकीकृत सिंचाई प्रणाली टूट गई, जिससे पानी के बंटवारे का विवाद पैदा हुआ। नौ साल की बातचीत के बाद यह समझौता बना, जिसमें पूर्वी नदियों (रावी, सतलज, ब्यास) को भारत को इस्तेमाल करने का अधिकार मिला। जबकि पश्चिमी नदियां (सिंधु, झेलम, चिनाब), इनका लगभग 80% पानी पाकिस्तान को मिलता है। भारत इन पश्चिमी नदियों पर सीमित रूप से “रन-ऑफ-द-रिवर” (यानि जल के बहाव में बिना अवरोध के) पनबिजली परियोजनाएं बना सकता है, लेकिन वह पाकिस्तान के जल प्रवाह को रोक नहीं सकता।

यह समझौता दोनों देशों के बीच तीन युद्धों (1965, 1971, 1999) और कई तनावों के बावजूद 65 साल तक चला। लेकिन पहलगाम हमले के बाद भारत ने इसे निलंबित कर दिया, जिसे पाकिस्तानी अखबार ने “जल सहयोग का अंत” करार दिया।

Indus Waters Treaty: भारत के फैसले पर क्या बोले अखबार

भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “सिंधु जल संधि को तब तक के लिए निलंबित किया जा रहा है, जब तक पाकिस्तान क्रॉस-बॉर्डर आतंकवाद को छोड़ नहीं देता।” भारत के इस फैसले के बाद पाकिस्तान के प्रमुख अखबारों में तीव्र प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।

द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने लिखा- “भारत ने सिंधु जल समझौते को हथियार बना लिया है और अब यह कदम कूटनीतिक दबाव का जरिया बन गया है।” वहीं, डॉन (DAWN) ने इसे “जल संकट की शुरुआत” बताते हुए लिखा- “अगर भारत ने पश्चिमी नदियों का पानी रोकना शुरू कर दिया, तो पाकिस्तान की कृषि व्यवस्था और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा।”

जबकि जंग अखबार ने चिंता जताई कि “भारत की इस घोषणा के पीछे राजनीतिक मकसद है, जिससे पाकिस्तान को पानी के मामले में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अलग-थलग किया जा सकता है।”

Indus Waters Treaty: पाकिस्तान के लिए क्यों अहम है यह संधि?

पाकिस्तान की 80% से अधिक सिंचाई व्यवस्था सिंधु रिवर बेसिन (Indus River Basin) पर निर्भर है। सिंधु, झेलम और चिनाब नदियां वहां की कृषि, बिजली उत्पादन और पीने के पानी का मुख्य स्रोत हैं। इस रिवर बेसिन सिस्टम से लगभग 16.8 करोड़ एकड़ फीट पानी मिलता है, जिसमें से भारत को केवल 3.3 करोड़ एकड़ फीट जल मिलता है। भारत अपने हिस्से का लगभग 90% उपयोग करता है, जबकि पाकिस्तान शेष जल पर पूरी तरह निर्भर रहता है।

पाकिस्तान के मंगला और तरबेला जैसे बड़े डैम की जल भंडारण क्षमता भी काफी सीमित है, जो संधि के तहत उपलब्ध जल का केवल 10% ही संग्रह कर पाते हैं। पानी की कमी या मौसमी बदलाव के समय यह क्षमता अपर्याप्त है, जिससे पाकिस्तान और कमजोर हो जाएगा। इस कारण किसी भी जल संकट की स्थिति में पाकिस्तान की स्थिति बेहद नाजुक हो सकती है।

‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ ने अपने लेख में इस निलंबन को पाकिस्तान के लिए “विनाशकारी” बताया और इसे दोनों देशों के बीच जल सहयोग के इतिहास में एक अभूतपूर्व घटना करार दिया। अखबार ने लिखा कि सिंधु नदी पाकिस्तान की कृषि, पीने के पानी और आर्थिक स्थिरता की रीढ़ है। पाकिस्तान को मिलने वाला पानी देश के 68% ग्रामीण आजीविका और 23% कृषि जरूरतों को पूरा करता है। निलंबन से पानी की कमी हो सकती है, जिससे फसल उत्पादन, खाद्य सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ेगा।

सीमित भंडारण क्षमता: पाकिस्तान के पास मंगला और तरबेला जैसे डैम हैं, जिनकी कुल भंडारण क्षमता केवल 1.44 करोड़ एकड़-फीट है, जो उसके वार्षिक हक का 10% है। पानी की कमी या मौसमी बदलाव के समय यह क्षमता अपर्याप्त है, जिससे पाकिस्तान और कमजोर हो जाएगा। अखबार ने चेतावनी दी कि पानी की कमी से पंजाब और सिंध प्रांतों में फसलें (गेहूं, चावल, कपास) प्रभावित होंगी। इससे खाद्य आयात बढ़ेगा, जो पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए मुश्किल होगा।

वहीं, पानी की कमी से जलविद्युत उत्पादन प्रभावित होगा, जिससे 16 घंटे तक बिजली कटौती हो सकती है। वहीं, खासकर आर्थिक रूप से कमजोर क्षेत्रों में पानी और खाद्य संकट से सामाजिक तनाव और विरोध प्रदर्शन बढ़ सकते हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों ने नदी के कम पानी से पारिस्थितिकी तंत्र और वन्यजीवों पर असर की आशंका जताई है। अखबार ने लिखा कि यह निलंबन भारत-पाकिस्तान संबंधों में एक नया तनाव पैदा करेगा। पाकिस्तानी ऊर्जा मंत्री अवैस लखारी ने कहा, पाकिस्तान इसे “जल युद्ध” मान रहा है।

Indus Waters Treaty: भारत के पास क्या हैं अधिकार?

हालांकि अखबार का यह भी कहना है कि संधि तोड़ने का तत्काल प्रभाव सीमित होगा, क्योंकि भारत के पास अभी पानी रोकने या मोड़ने के लिए बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा (जैसे डैम) नहीं है। लेकिन लंबे समय में, भारत किशनगंगा (330 MW) और रातले (850 MW) जैसी परियोजनाओं को बढ़ाकर पानी के प्रवाह को नियंत्रित कर सकता है, जिससे पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ेंगी।

इस संधि के तहत भारत को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में 13.4 लाख एकड़ भूमि की सिंचाई और 3.6 मिलियन एकड़ फीट जल भंडारण की अनुमति है। लेकिन अभी भारत इस पूरी क्षमता का उपयोग नहीं कर रहा है। यदि भारत अपनी पूरी शक्ति का उपयोग करता है, तो वह पाकिस्तान पर जल के मोर्चे पर रणनीतिक दबाव बना सकता है।

भारत को इन नदियों पर “रन-ऑफ-द-रिवर” परियोजनाएं बनाने की अनुमति है, जिससे वह पनबिजली उत्पादन कर सकता है, लेकिन वह जल प्रवाह में दीर्घकालिक अवरोध नहीं कर सकता। हालांकि, भारत को ये अधिकार तकनीकी रूप से अस्थायी अवरोध (temporary flow control) की इजाजत देते हैं, जो कूटनीतिक टकराव के समय उपयोगी साबित हो सकते हैं।

भारत को क्या करना होगा?

सिंधु नदी का पानी लंबे समय तक रोकने के लिए भारत को दीर्घकालिक कदम उठाने होंगे। इनमें भारत को सिंधु, झेलम, और चिनाब नदियों पर बड़े डैम और जलाशय बनाने होंगे। उदाहरण के लिए, पाकल दुल (1,000 MW) और रातले (850 MW) जैसी परियोजनाओं को तेज करना होगा। जम्मू-कश्मीर और पंजाब में पानी के उपयोग के लिए नहरों और सिंचाई प्रणालियों का विस्तार करना होगा, जैसा कि शाहपुर कंडी बैराज के साथ किया गया। शाहपुर कंडी बैराज ने रावी नदी का पानी रोककर कठुआ और सांबा में 32,000 हेक्टेयर जमीन की सिंचाई शुरू की है।

लेकिन बड़े पैमाने पर पानी रोकने के लिए नए डैम और जलाशय बनाने में समय और धन दोनों को ध्यान रखना होगा। इन परियोजनाओं के लिए भारी निवेश की जरूरत होगी। उदाहरण के लिए, शाहपुर कंडी बैराज को पूरा होने में 45 साल लगे। वहीं, बड़े डैम बनाने से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में पर्यावरणीय असंतुलन, जैसे बाढ़ या भूस्खलन का खतरा बढ़ सकता है। इसके लिए भारत को पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन (EIA) करना होगा।

Pahalgam Attack Fallout: भारत की पहली प्रतिक्रिया से घबराया पाकिस्तान, अरब सागर में जारी किया NOTAM, शुरू किया सैन्य अभ्यास

इसके अलावा भारत अफगानिस्तान के साथ मिलकर काबुल नदी पर डैम बनाकर पाकिस्तान पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है, क्योंकि यह नदी भी सिंधु बेसिन का हिस्सा है। काबुल नदी, अफगानिस्तान से बहकर पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा क्षेत्र में प्रवेश करती है और आगे चलकर सिंधु नदी में मिल जाती है। यह नदी भी सिंधु नदी प्रणाली (Indus River Basin) का हिस्सा है, और पाकिस्तान के लिए एक बड़ा जल स्रोत मानी जाती है। भारत और अफगानिस्तान के बीच यदि काबुल नदी पर डैम निर्माण को लेकर कोई समझौता होता है, तो यह पाकिस्तान की छटपटाहट बढ़ जाएगी और उस पर दबाव और बढ़ेगा। भारत पहले भी अफगानिस्तान में सलमा डैम (हरिरुद नदी पर) जैसे परियोजनाओं में सहयोग कर चुका है। 2016 में हेरात में सलमा डैम (अफगान-भारत मैत्री डैम) के बाद अब भारत काबुल नदी की सहायक नदी मैदान पर शहतूत डैम बनाने में मदद कर रहा है।

Pahalgam Attack Fallout: भारत की पहली प्रतिक्रिया से घबराया पाकिस्तान, अरब सागर में जारी किया NOTAM, शुरू किया सैन्य अभ्यास

Pahalgam Attack Fallout: Pakistan Issues NOTAM, Launches Military Drill in Arabian Sea

Pahalgam Attack Fallout: 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत सरकार की सख्त प्रतिक्रिया से पाकिस्तान में खलबली मच गई है। इस आतंकी हमले में 28 लोगों की जान गई और कई घायल हुए। इस हमले के जवाब में भारत ने कठोर कूटनीतिक कदम उठाए, जिसके बाद पाकिस्तान ने अरब सागर में नोटिस टू एयरमेन/मैरिनर्स (NOTAM) जारी किया और अपनी सेना को हाई अलर्ट पर रखा है। भारत ने सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को निलंबित करने और अन्य कूटनीतिक प्रतिबंधों की घोषणा की है, जिससे पाकिस्तान में बेचैनी साफ दिख रही है।

Pahalgam Attack Fallout: Pakistan Issues NOTAM, Launches Military Drill in Arabian Sea

Pahalgam Attack Fallout: अरब सागर में NOTAM और लाइव फायर एक्सरसाइज

पाकिस्तान ने बुधवार को अरब सागर के लिए एक NOTAM (Notice to Airmen/Mariners) जारी किया है, जिसमें 24 और 25 अप्रैल को नौसैनिक लाइव फायर एक्सरसाइज की जानकारी दी गई है। यह इलाका पाकिस्तान की समुद्री सीमा के पास स्थित है। इस अभ्यास के दौरान मिसाइल टेस्ट भी शामिल है। सुरक्षा विशेषज्ञ इसे भारत की संभावित जवाबी कार्रवाई की आशंका से जोड़कर देख रहे हैं।

रक्षा सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान ने अपने एययर डिफेंस सिस्टम्स को भी हाई अलर्ट पर रखा है और अपने हवाई चेतावनी और नियंत्रण प्रणाली (Airborne Warning and Control System- AWACS) विमानों को नियमित रूप से उड़ान भरने के लिए तैनात किया है ताकि भारतीय विमानों की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके।

बता दें कि जब पहलगाम हमला हुआ तो पाकिस्तान की सेना पहले से ही भारत के साथ पश्चिमी सीमा के पास एक सैन्य अभ्यास कर रही थी। हमले के बाद, नियंत्रण रेखा (LoC) के साथ पाकिस्तानी सैन्य गतिविधियों में तेजी देखी गई है। रक्षा सूत्रों ने बताया कि यह पाकिस्तान की ओर से एक डिफेंसिव स्ट्रेटेजी है, क्योंकि उसे 2016 के उरी हमले और 2019 के पुलवामा हमले के बाद भारत की सर्जिकल स्ट्राइक जैसी कार्रवाइयों का डर है।

Pahalgam Attack Fallout: भारत की तरफ से सैन्य गतिविधियां सामान्य: सूत्र

हालांकि भारत की रक्षा एवं सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों ने पाकिस्तान की इस सक्रियता को लेकर फिलहाल किसी असामान्य मिलिट्री मूवमेंट की पुष्टि नहीं की है। उनका कहना है कि आतंकी हमले के बाद भारतीय सशस्त्र बलों की गतिविधियां ऑपरेशनल प्रकृति की हैं। लेकिन साथ ही, यह भी माना जा रहा है कि पाकिस्तान की तरफ से नियंत्रण रेखा (LoC) पर मिलिट्री मूवमेंट बढ़ गया है।

Pahalgam Attack Fallout: “सभी विकल्प खुले हैं”

भारत सरकार ने साफ शब्दों में कहा है कि पहलगाम हमले के दोषियों को न्याय के कटघरे में लाया जाएगा और उनके समर्थकों को भी सजा मिलेगी। यह बयान ऐसे समय आया है जब 2016 में उरी और 2019 में पुलवामा हमले के बाद भारत ने सर्जिकल स्ट्राइक और एयरस्ट्राइक जैसे जवाबी कदम उठाए थे।

सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने इस विषय पर कई उच्चस्तरीय बैठकें की हैं। भारत की प्रतिक्रिया को लेकर कहा गया है कि “सभी विकल्प खुले हैं”, और यह फैसला केवल ‘नीड टू नो’ आधार पर लिया जाएगा।

पहलगाम हमले के बाद भारत ने अपनी प्रतिक्रिया के तौर पर कड़े कूटनीतिक संदेश दिए हैं। 23 अप्रैल को देर रात कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (सीसीएस) की बैठक के बाद विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने प्रेस ब्रीफिंग में कई बड़े फैसलों की घोषणा की। इनमें सबसे अहम है 1960 की सिंधु जल संधि को तत्काल प्रभाव से निलंबित करना। भारत ने कहा कि यह फैसला तब तक लागू रहेगा, जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद का समर्थन पूरी तरह से बंद नहीं करता।

Pahalgam Attack Fallout: Pakistan Issues NOTAM, Launches Military Drill in Arabian Sea

सिंधु जल संधि के तहत पाकिस्तान को सिंधु, झेलम और चिनाब नदियों का लगभग 80% पानी मिलता है, जो उसकी अर्थव्यवस्था और कृषि की रीढ़ है। रक्षा सूत्रों के अनुसार, इस कदम का तत्काल प्रभाव तो नहीं होगा, लेकिन लंबे समय में पाकिस्तान को पानी की भारी कमी का सामना करना पड़ सकता है, जो उसके लिए एक बड़ा संकट होगा।

इसके अलावा, भारत ने कई दूसरे कूटनीतिक कदम भी उठाए हैं। इनमें भारत-पाकिस्तान के बीच अटारी चेक पोस्ट को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया गया है। साथ ही, पाकिस्तानी नागरिकों को दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC) वीजा छूट योजना के तहत भारत में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। पहले से जारी ऐसे वीजा रद्द कर दिए गए हैं, और भारत में मौजूद पाकिस्तानी नागरिकों को 48 घंटे में देश छोड़ने का आदेश दिया गया है। इसके अलावा नई दिल्ली में पाकिस्तानी उच्चायोग के रक्षा, नौसेना और वायु सलाहकारों को ‘पर्सोना नॉन ग्राटा’ घोषित किया गया और उन्हें एक हफ्ते में भारत छोड़ने का आदेश दिया गया। साथ ही, इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग से भारत अपने रक्षा सलाहकारों को वापस बुलाएगा। इसके साथ ही, दोनों देशों के उच्चायोगों में कर्मचारियों की संख्या को 55 से घटाकर 30 करने का फैसला लिया गया, जो 1 मई से प्रभावी होगा।

भारत ने साफ कर दिया है कि पहलगाम हमले के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और उनके स्पॉन्सर्स को जवाबदेह ठहराया जाएगा। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि सीसीएस की बैठक में हमले के सीमा पार संबंधों पर बात हुई, जिसका इशारा पाकिस्तान की ओर था। भारत ने हाल ही में तहव्वुर राणा के प्रत्यर्पण जैसे कदमों से दिखाया है कि वह आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई में कोई ढील नहीं बरतेगा।

रक्षा सूत्रों ने बताया कि भारत की ओर से अभी कोई सैन्य कार्रवाई शुरू नहीं हुई है। लेकिन यह भी कहा गया कि भारत का जवाब “कब और कहां” आएगा, यह केवल उच्चतम स्तर पर तय होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने कई बैठकें की हैं, जिसमें सभी विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।

वहीं, पाकिस्तान का अरब सागर में एक्सरसाइज करना बताता है कि वह भारत के संभावित जवाब से डरा हुआ है। सिंधु जल संधि पर रोक उसके लिए सबसे बड़ा झटका है, क्योंकि उसकी 65% जमीन और दो-तिहाई आबादी सिंधु नदी बेसिन पर निर्भर है। पानी की कमी से पाकिस्तान में कृषि संकट, खाद्य असुरक्षा और सामाजिक अशांति बढ़ सकती है।

Pahalgam Terror Attack: पहलगाम में हुए आतंकी हमले के पीछे छिपा है टाइमिंग का खेल! गोलियों से कैसे साधी ज्यो-पॉलिटिक्स?

इसके अलावा, अटारी चेक पोस्ट बंद होने और SAARC वीजा नियमों में बदलाव से दोनों देशों के बीच सीमित व्यापार और लोगों का आवागमन पूरी तरह रुक जाएगा। उच्चायोगों के कर्मचारियों की संख्या घटने से कूटनीतिक रिश्ते और कमजोर होंगे। ये कदम पाकिस्तान को आर्थिक और कूटनीतिक रूप से अलग-थलग करने की भारत की रणनीति का हिस्सा हैं।

Pahalgam Massacre: पहलगाम आतंकी हमले के बाद फिर उड़ान पर लौटे ‘ध्रुव’ हेलिकॉप्टर, कश्मीर में सुरक्षा बलों को मिली बड़ी राहत

Pahalgam Massacre: Dhruv Helicopters Back in Action, Boost Security Ops in Kashmir

Pahalgam Massacre: पहलगाम में हुए हालिया आतंकी हमले के बाद, देश की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूती देने के लिए एक अहम फैसला लिया गया है। भारतीय सशस्त्र बलों के स्वदेशी एडवांस लाइट हेलिकॉप्टर (ALH) ‘ध्रुव’ को एक बार फिर से अनंतनाग क्षेत्र में उड़ान की अनुमति मिल गई है। इस फैसले को सुरक्षा बलों की तत्परता और प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। जनवरी 2025 में गुजरात के पोरबंदर में हुए एक हादसे के बाद इन 330 हेलिकॉप्टरों की पूरी फ्लीट को सुरक्षा जांच के लिए रोक दिया गया था। लेकिन अब, पहलगाम हमले के बाद, रक्षा मंत्रालय ने अनंतनाग में इनके इस्तेमाल को मंजूरी दे दी है।

Pahalgam Massacre: Dhruv Helicopters Back in Action, Boost Security Ops in Kashmir

Pahalgam Massacre: जनवरी में हुए हादसे के बाद से बंद थी उड़ान

5 जनवरी 2025 को गुजरात के पोरबंदर में भारतीय तटरक्षक बल के एक ध्रुव ALH-MkIII हेलिकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस हादसे में दो पायलटों समेत तीन कर्मियों की मौत हो गई थी। जिसके बाद पूरे देश में इन हेलिकॉप्टरों की उड़ान पर रोक लगा दी गई थी। इसके बाद तकरीबन 300 से अधिक ALH हेलिकॉप्टरों को सुरक्षा जांच के लिए ग्राउंड कर दिया गया था। इसके चलते सेना, वायुसेना, नौसेना और तटरक्षक बलों की ऑपरेशनल परफॉरमेंस पर बड़ा असर पड़ रहा था।

Pahalgam Massacre: पहलगाम हमले के बाद रक्षा मंत्रालय की अनुमति

22 अप्रैल को अनंतनाग के पहलगाम क्षेत्र में हुए आतंकवादी हमले के बाद, जब हालात नियंत्रण में लाने के लिए तेज कार्रवाई की जरूरत महसूस हुई, तब जमीन पर तैनात ऑपरेशन कमांडर को रक्षा मंत्रालय से विशेष अनुमति दी गई कि जरूरत पड़ने पर ALH हेलिकॉप्टरों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके बाद अनंतनाग क्षेत्र में ALH हेलिकॉप्टरों की उड़ानें फिर से शुरू हो गईं। जम्मू-कश्मीर जैसे पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में ये हेलिकॉप्टर विशेष रूप से उपयोगी हैं, जहां सड़क मार्ग सीमित हैं और तुरंत कार्रवाई की जरूरत होती है।

Pahalgam Massacre: कश्मीर में बढ़ी आतंकी गतिविधियां

रक्षा सूत्रों के मुताबिक, इस वक्त जम्मू-कश्मीर में लगभग 125 से 130 आतंकी सक्रिय हैं, जिनमें से 115 से 120 आतंकी पाकिस्तानी नागरिक हैं। पिछले दो सालों से अमरनाथ यात्रा और घाटी में सामान्य हालात को देखते हुए यह हमला एक सोची-समझी साजिश के तहत किया गया है। हमले का मकसद घाटी में शांति और सामान्य हालात को पटरी से उतारना था। पिछले दो सालों में अमरनाथ यात्रा और पर्यटन में भारी बढ़ोतरी हुई है, जिससे कश्मीर में हालात सामान्य हो रहे थे। लेकिन इस हमले ने साफ कर दिया कि आतंकी हालात बिगाड़ना बनाना चाहते हैं।

Pahalgam Massacre: सूचना तंत्र में चूक बनी चुनौती

इस हमले को लेकर एक बड़ी चूक इंटेलिजेंस सूचना के स्तर पर मानी जा रही है। सूत्रों के अनुसार, करीब दो हफ्ते पहले सामान्य विजिलेंस अलर्ट जारी किया गया था, जो जुलाई से शुरू होने वाली अमरनाथ यात्रा को लेकर था। लेकिन पहलगाम क्षेत्र में हमले की कोई ठोस जानकारी नहीं थी। साथ ही, जहां हमला हुआ, उस क्षेत्र के आस-पास लगभग दस स्थान ऐसे थे जहां पर सुरक्षा बलों की तैनाती नहीं थी और पर्यटक इलाकों में इलेक्ट्रॉनिक निगरानी भी नहीं थी। यह इलाका 3 राष्ट्रीय राइफल्स के तहत आता है और यहां सीआरपीएफ की 169 बटालियन तैयान है, जो यहां से कुछ दूरी पर है।

ALH ‘ध्रुव’ सेनाओं का भरोसेमंद हेलिकॉप्टर

HAL निर्मित ALH ‘ध्रुव’ हेलिकॉप्टर भारतीय सशस्त्र बलों के लिए एक अहम संसाधन है। इसकी तैनाती पर्वतीय इलाकों, समुद्री सीमाओं और आपदा राहत जैसे कई अभियानों में की जाती है। यह हेलिकॉप्टर अब तक कई बार अपनी बहुउद्देशीय क्षमता और विश्वसनीयता साबित कर चुका है। इसके ऑपरेशन में ब्रेक आने से कश्मीर जैसे संवेदनशील इलाकों में विशेष अभियानों में मुश्किल हो रही थी।

अब फिर से तैयार हैं मिशन पर जाने को

अब जबकि पहलगाम जैसे बड़े हमले के बाद ALH हेलिकॉप्टरों की वापसी हो रही है, यह सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ी राहत की बात है। हेलिकॉप्टरों की उपलब्धता से न केवल राहत और बचाव अभियानों में तेजी लाई जा सकती है, बल्कि आतंकवाद रोधी अभियानों में भी बहुत फायदा होगा। ध्रुव हेलिकॉप्टरों की मदद से आतंकी ठिकानों और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। पहाड़ी क्षेत्रों में ये हेलिकॉप्टर तेजी से सूचनाएं इकट्ठा कर सकते हैं। वहीं, हमले के बाद घायलों को अस्पताल पहुंचाने और सैन्य टुकड़ियों को तैनात करने में हेलिकॉप्टरों ने अहम भूमिका निभाई। साथ ही, हेलिकॉप्टरों की मौजूदगी आतंकियों के लिए एक चेतावनी है कि भारतीय सेना हर स्थिति के लिए तैयार है।

Dhruv Helicopter Crisis: जमीन पर फंसे पंख, आसमान में फंसी सेना की ताकत! इमरजेंसी में कैसे पूरे होंगे मिशन?

शांति के दावों के बावजूद आतंक का खतरा बरकरार

पहलगाम हमले से साबित हो गया है घाटी में शांति के दावों के बावजूद आतंक का खतरा अभी भी बना हुआ है। वहीं, सुरक्षा व्यवस्था और खुफिया एजेंसियों की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। खासकर पर्यटन क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार को नए सिरे से रणनीति बनाने की जरूरत है। अनंतनाग और पहलगाम में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) और अन्य अर्धसैनिक बलों की तैनाती बढ़ाई गई है। श्रीनगर और जम्मू में भी सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। इसके अलावा खुफिया एजेंसियों को और सक्रिय करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। साथ ही, पर्यटक स्थलों और भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों में सीसीटीवी और ड्रोन जैसे उपकरणों की तैनाती पर जोर दिया जा रहा है। हमले के बाद 1,500 से अधिक संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है, और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने जांच शुरू कर दी है।

Pahalgam Terror Attack: पहलगाम में हुए आतंकी हमले के पीछे छिपा है “टाइमिंग” का खेल! गोलियों से कैसे साधी ज्यो-पॉलिटिक्स?

Pahalgam Terror Attack A Geopolitical Message in Bullets

Pahalgam Terror Attack: 22 अप्रैल, 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुआ आतंकी हमला न केवल आतंकी इतिहास की सबसे दर्दनाक हिंसक घटना थी, बल्कि यह ग्लोबल और रीजनल ज्यो-पॉलिटिक्स के एक बड़े खेल का हिस्सा भी था। इस हमले में 28 लोगों की जान गई और दर्जनों घायल हुए। यह केवल एक सामान्य आतंकी हमला नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई प्रतीकात्मक संदेश भी छिपे हैं, जिससे पता चलता है कि आतंकियों के मंसूबे क्या हैं, जो कश्मीर की वादियों से आगे की कहानी बयां करते हैं। इस हमले के पीछे की कहानी को समझने के लिए हमें वैश्विक शक्ति संतुलन, रीजनल ज्यो-पॉलिटिक्स और पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद को विदेश नीति के हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की पुरानी रणनीति को गहराई से देखना होगा।

Pahalgam Terror Attack A Geopolitical Message in Bullets

Pahalgam Terror Attack: पाकिस्तान का आतंक प्रेम और सेना प्रमुख की “टाइमिंग”

पहलगाम हमले से एक हफ्ते पहले ही पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिफ मुनिर ने एक भड़काऊ भाषण दिया था। इस भाषण में उन्होंने दो-राष्ट्र सिद्धांत (Two Nation Theory) का जिक्र किया और कश्मीर को पाकिस्तान की “जुगुलर वेन” (जीवन रेखा) करार दिया। यह महज केवल भाषण नहीं था, बल्कि यह उन आतंकी संगठनों के लिए एक स्पष्ट संदेश था, जिन्हें पाकिस्तान लंबे समय से खाद-पानी देता रहा है। हमले की जिम्मेदारी लेने वाले लश्कर-ए-तैयबा के मुखौटे द रेसिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) ने इस संदेश को तुरंत समझ लिया।

पाकिस्तान की आधिकारिक प्रतिक्रिया और भी चौंकाने वाली थी। हमले की निंदा करने के बजाय, इस्लामाबाद ने इसे “स्थानीय लोगों का सरकार के खिलाफ विरोध” बताने की कोशिश की। उन्होंने एक बार फिर आतंक को क्रांति और हिंसा को एक्टिविज़्म की चादर में लपेटने की कोशिश की। लेकिन पाकिस्तान का यह दावा तब और कमजोर पड़ गया, जब यह जानकारी सामने आई कि चार हमलावरों में से तीन विदेशी यानी पाकिस्तानी थे। जनरल आसिफ मुनिर का भाषण और उसके बाद हमला, यह महज संयोग नहीं है।

Pahalgam Terror Attack: सऊदी अरब और भारत की बढ़ती नजदीकियां

जब हमला हुआ तो भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सऊदी अरब की यात्रा पर थे। भारत और सऊदी अरब के बीच रणनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा साझेदारी पिछले कुछ वर्षों में तेजी से मजबूत हुई है। यह नजदीकियां पाकिस्तान को रास नहीं आ रहीं थीं। क्योंकि पाकिस्तान आज भी हर मामले में खाड़ी देशों के नैतिक और वित्तीय समर्थन पर निर्भर है।

पहलगाम हमला ठीक उसी समय हुआ, जब मोदी सऊदी नेतृत्व के साथ अहम बातचीत कर रहे थे। यह हमला भारत की कूटनीतिक पहल को अस्थिर करने और सऊदी अरब के सामने भारत को शर्मसार करने की कोशिश थी। इसके जरिए पाकिस्तान ने सऊदी अरब को यह संदेश देने की कोशिश की कि वह अभी भी दक्षिण एशिया में अस्थिरता पैदा करने की ताकत रखता है। साथ ही, सऊदी अरब को एक अप्रत्यक्ष संदेश देने की कोशिश थी कि “भारत के साथ दोस्ती के नतीजे क्या हो सकते हैं।” लेकिन पाकिस्तान यह भूल गया कि उसकी अर्थव्यवस्था संकट में है, उसकी अंतरराष्ट्रीय साख गिर चुकी है, और वह खाड़ी देशों के रहमोकरम पर है।

Pahalgam Terror Attack: गले नहीं उतर रही अमेरिका-भारत की दोस्ती

जब यह हमला हुआ तो अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भारत की यात्रा पर थे। हालांकि उनकी यह यात्रा व्यापार और रक्षा के क्षेत्र में भारत-अमेरिका संबंधों को और मजबूत करने के लिए थी। पिछले कुछ सालों में दोनों देशों के बीच यह साझेदारी लगातार गहरी हुई है, जो पाकिस्तान और चीन को फूटी आंख नहीं सुहाा रहा है।

यह हमला अमेरिका के लिए भी एक संदेश था। पाकिस्तान ने इस हमले के जरिए अमेरिका को यह बताने की कोशिश की कि “कश्मीर अभी भी एक संवेदनशील मुद्दा है, और भारत जितना अमेरिका के करीब जाएगा, उतना ही अस्थिरता की आशंका बढ़ेगी।” वह चाहता था कि कश्मीर मुद्दा फिर से उछले और भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव पैदा हो। लेकिन इस बार भी पाकिस्तान की रणनीति उलटी पड़ गई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी को पूर्ण समर्थन का भरोसा दिया, और व्हाइट हाउस ने पुष्टि की कि दोनों नेताओं के बीच जल्द ही फोन पर बात होगी।

Pahalgam Terror Attack: फेल हुई ‘राजनीति-ए-आतंक’

पहलगाम हमला इस बात का सबूत है कि पाकिस्तान अभी भी आतंकवाद को अपनी विदेश नीति को एक हथियार के तौर पर जारी रखे हुए है। लेकिन यह रणनीति अब पुरानी पड़ चुकी है। पाकिस्तान को शायद यह समझना होगा कि आतंकवाद अब केवल एक “नॉन-स्टेट एक्टर्स” का मामला नहीं रह गया है। आज की दुनिया इसे एक “रोग्य स्टेटक्राफ्ट” यानी असफल राष्ट्र की नीति के रूप में देखती है। पहलगाम जैसे हमलों को अंजाम देकर या इनका समर्थन करके, पाकिस्तान केवल अपनी कूटनीतिक विश्वसनीयता को और कमजोर कर रहा है।

आज पूरी दुनिया आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रही है। भारत जैसे देश, जो आतंकवाद का दंश लंबे समय से झेल रहे हैं, अब इस खतरे से निपटने के लिए पहले से कहीं ज्यादा तैयार हैं। भारत ने न केवल अपनी सैन्य और खुफिया क्षमताओं को मजबूत किया है, बल्कि वह वैश्विक मंच पर भी आतंकवाद के खिलाफ एक मजबूत आवाज बनकर उभरा है।

Pahalgam terror attack: क्या 30 अप्रैल से पहले होगी आतंक पर कार्रवाई? क्या सर्जिकल स्ट्राइक के लिए तैयार हैं नॉर्दन कमांड के नए कमांडर?

पहलगाम के हमले का मतलब

पहलगाम हमले में न केवल निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाया, बल्कि भारत के एक महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल और अमरनाथ यात्रा के रास्ते को भी निशाना बनाना था। आतंकियों ने यह जगह सोच-समझकर चुनी, ताकि इस हमले के जरिए धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई जाए, पर्यटन पर चोट की जाए और देश के भीतर सांप्रदायिक तनाव को हवा दी जाए।