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HAL on Dhruv ALH glitch: ध्रुव हेलिकॉप्टर में तकनीकी गड़बड़ी पर एचएएल ने दी सफाई, कहा- सेना को अभी भी इस प्लेटफॉर्म पर पूरा भरोसा

HAL on Dhruv ALH glitch Issued Statement army fleet check

HAL on Dhruv ALH glitch: भारतीय सेना के ध्रुव एडवांस्ड लाइट हेलिकॉप्टर (ALH Dhruv) में एक बार फिर तकनीकी खामी सामने आने पर हेलिकॉप्टर निर्माता कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने सफाई दी है। एचएएल का कहना है कि वन-टाइम चेक (ओटीसी) एक नियमित मेंटेनेंस प्रक्रिया है, जो टेल ड्राइव शाफ्ट (टीडीएस) में किसी खराबी के बाद जारी की जाती है। बता दें कि एक उड़ान के दौरान भारतीय सेना के एक हेलिकॉप्टर के टेल ड्राइव शाफ्ट (TDS) को नुकसान पहुंचा था, जिसके बाद सेना ने पूरे एएलएच बेड़े की जांच का आदेश दिया है।

Dhruv ALH glitch: भारतीय सेना का ध्रुव हेलिकॉप्टर फिर हुआ गड़बड़ी का शिकार, पूरे बेड़े की जांच का आदेश, नेवी और कोस्टगार्ड का बढ़ा इंतजार!

HAL on Dhruv ALH glitch: रिपोर्ट को बताया एकतरफा

हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने अपना बयान जारी करते हुए उस रिपोर्ट पर सवाल उठाए हैं, जिसमें एएलएच ध्रुव हेलीकॉप्टर में एक उड़ान के दौरान हेलिकॉप्टर के टेल ड्राइव शाफ्ट (TDS) को नुकसान पहुंचा था। यह घटना हाल ही में 4 सितंबर को आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन के हेलिकॉप्टर IA-1134 के साथ हुई थी। इस घटना ने एक बार फिर एडवांस्ड लाइट हेलिकॉप्टर ध्रुव की सेफ्टी को लेकर सवाल खड़े हो गए थे। एचएएल ने इस रिपोर्ट को एकतरफा बताया है।

HAL on Dhruv ALH glitch: वन-टाइम चेक सामान्य मेंटेनेंस प्रक्रिया

एचएएल की तरफ से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया, “वन-टाइम चेक (OTC) एक सामान्य मेंटेनेंस प्रक्रिया है, जिसे किसी भी समस्या के सामने आने पर किया जाता है। इस बार टेल ड्राइव शाफ्ट में समस्या आने पर यह आदेश जारी किया गया। एचएएल भारतीय सेना के साथ मिलकर काम कर रहा है और विशेषज्ञों की टीम को जांच के लिए भेजा गया है।”

एचएएल ने यह भी दोहराया कि ध्रुव ALH बेड़े ने अब तक 4.5 लाख से ज्यादा घंटे उड़ान भरी है और पिछले दो दशक से अधिक समय से इसे सेना, वायुसेना, नौसेना, कोस्ट गार्ड और सिविल ऑपरेटर इस्तेमाल कर रहे हैं। यह हेलिकॉप्टर हिमालय के ऊंचाई वाले इलाकों से लेकर समुद्री इलाकों तक कठिन परिस्थितियों में उड़ान भरता रहा है।

HAL on Dhruv ALH glitch: अभी भी प्लेटफॉर्म पर पूरा भरोसा

एचएएल का कहना है कि हेलीकॉप्टरों की निरंतर उड़ान योग्यता के लिए रखरखाव पहलू महत्वपूर्ण हैं और वह इस बात पर ज़ोर देता है कि सभी रखरखाव निर्देशों का कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए। एचएएल ने कहा कि हाल ही में बाढ़ के चलते कई इलाकों में चल रहे राहत और आपातकालीन बचाव अभियानों में, भारतीय सेना ने फंसे हुए नागरिकों और सीआरपीएफ कर्मियों को निकालने के लिए एएलएच ध्रुव का इस्तेमाल किया। यहां कि बेहद जोखिम वाले हेलीकॉप्टर बचाव अभियान भी चलाए, जो एएलएच ध्रुव की वजह से ही संभव हो पाए। एचएएल का कहना है कि यह बताता है कि सेना को अभी भी इस प्लेटफॉर्म पर पूरा भरोसा है।

सेना ने जारी किया पत्र

हेलिकॉप्टर के टेल ड्राइव शाफ्ट में गड़बड़ी सामने आने के बाद सेना की ओर से एक पत्र जारी किया गया था, जिसमें कहा गया है कि उड़ान के दौरान IA-1134 हेलिकॉप्टर में स्टेशन #9A पर TDS बेयरिंग माउंट टूटने की घटना दर्ज की गई। पत्र में लिखा गया कि फ्लाइट सेफ्टी सुनिश्चित करने के लिए सभी ध्रुव हेलिकॉप्टरों में वन-टाइम चेक अनिवार्य रूप से किया जाए।

इस जांच में वायुसेना और नौसेना के ध्रुव हेलिकॉप्टर भी शामिल किए गए हैं। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि सभी ALH की जांच टीडीएस बेयरिंग, इलास्टोमेरिक बुश, टेल बूम टॉप फेस शीट और TDS ब्रैकेट की विजुअल जांच के साथ की जाए। इसके लिए 10X मैग्निफाइंग ग्लास के इस्तेमाल का निर्देश भी दिया गया है।

एचएएल का कहना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों और सही डेटा को देखा जाना चाहिए। कंपनी ने मीडिया से अपील की है कि ध्रुव ALH जैसे स्वदेशी प्लेटफॉर्म पर रिपोर्टिंग करते समय गलत और भ्रामक जानकारियों से बचें।
एचएएल का मानना है कि ALH ध्रुव भारतीय सशस्त्र बलों का भरोसेमंद प्लेटफॉर्म है और इसकी तकनीकी जांच और सुधार लगातार जारी है।

पोरबंदर हादसे के बाद किया था ग्राउंड

इस साल जनवरी में गुजरात के पोरबंदर में कोस्ट गार्ड का एक एएलएच ध्रुव क्रैश हुआ था, जिसमें दो पायलट और एक एयरक्रू डाइवर की मौत हो गई थी। इसके बाद नौसेना और कोस्ट गार्ड के ध्रुव हेलिकॉप्टरों को ग्राउंडेड कर दिया गया था। पोरबंदर हादसे के बाद बनी हाई-लेवल कमिटी ने पाया था कि स्वाशप्लेट फ्रैक्चर दुर्घटना का कारण था। यह हेलिकॉप्टर के कंट्रोल सिस्टम का अहम हिस्सा है। हालांकि, इसके टूटने की असली वजह का पता नहीं चल सका। इसके बाद एचएएल ने जांच के दायरे को बढ़ाया और बेंगलुरु स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc) को फैटीग टेस्ट करने की जिम्मेदारी दी।

एचएएल ने नौसेना और कोस्ट गार्ड के दो एएलएच हेलिकॉप्टरों पर विशेष उपकरण लगाए हैं ताकि ट्रांसमिशन सिस्टम, गियरबॉक्स और रोटर हब जैसी अहम यूनिट्स का डेटा जुटाया जा सके। माना जा रहा है कि समुद्री माहौल में लंबे समय तक ऑपरेशन करने से एएलएच में तकनीकी दिक्कतें बढ़ रही हैं।

मई 2025 में गहन जांच के बाद सेना और वायुसेना के लगभग 300 ALH को फिर से उड़ान की अनुमति मिली थी। यह फैसला डिफेक्ट इन्वेस्टिगेशन कमिटी की सिफारिश पर हुआ था। इस कमेटी में CEMILAC (सेंटर फॉर मिलिट्री एयरवर्दीनेस एंड सर्टिफिकेशन), DG-AQA (डायरेक्टरेट जनरल ऑफ एरोनॉटिकल क्वालिटी एश्योरेंस) और एचएएल के अधिकारी शामिल थे। वहीं, नौसेना और कोस्ट गार्ड के ALH अब भी ग्राउंडेड हैं और उन्हें उड़ान की अनुमति नहीं मिली है।

रक्षा समाचार डॉट कॉम को जानकारी देते हुए एचएएल के सीनियर सूत्रों ने बताया था कि जल्द ही नौसेना और कोस्टगार्ड के ध्रुव हेलीकॉप्टरों को उड़ान की अनुमति दी जाएगी। उन्होंने बताया था कि अगले महीने तक कुछ ध्रुव उड़ान भरने लगेंगे। उन्हें पहले कुछ परीक्षणों से गुजरना होगा, और उसके बाद चरणबद्ध तरीके से उड़ान भरने की अनुमति मिलेगी।

पिछले पांच सालों में ध्रुव एएलएच हेलिकॉप्टरों के करीब 15 हादसे हो चुके हैं। 2023-24 में ही हेलिकॉप्टर का डिजाइन रिव्यू किया गया और इसके कंट्रोल सिस्टम में बदलाव किए गए। बावजूद इसके, कई बार तकनीकी खामियों के चलते एएलएच को ग्राउंड करना पड़ा।

एएलएच ध्रुव सेना, वायुसेना, नौसेना और कोस्ट गार्ड के लिए बेहद अहम भूमिका निभाता है। यह न केवल लॉजिस्टिक सपोर्ट बल्कि रेस्क्यू ऑपरेशन और कॉम्बैट मिशनों के लिए भी इस्तेमाल होता है।

Passing Out Parade: भारतीय सेना में कमीशन हुए 362 नए अफसर, ओटीए गया और ओटीए चेन्नई में हुई पासिंग आउट परेड

Passing Out Parade 2025: Indian Army Gets 362 New Officers from OTA Gaya and OTA Chennai
Air Chief Marshal AP Singh

Passing Out Parade: ओटीए गया और ओटीए चेन्नई में शनिवार को पासिंग आउट परेड आयोजित की गई। 6 सितंबर 2025 को आयोजित इस ऐतिहासिक समारोह में कुल 362 अफसरों को कमीशन मिला और उन्होंने अपने मिलिट्री करियर की शुरुआत की।

गया स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (ओटीए) से शॉर्ट सर्विस कमीशन (टेक्निकल) एंट्री के 207 कैडेट्स अफसर बने। इनमें 184 पुरुष कैडेट्स और 23 महिला कैडेट्स शामिल थीं। सभी कैडेट्स ने “अंतिम पग” मार्च करते हुए भारतीय सेना का अंग बनने की शपथ ली।

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वहीं, परेड के रिव्यूइंग ऑफिसर लेफ्टिनेंट सेंट्रल कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता रहे। कैडेट्स की सधी हुई और तालमेल भरी ड्रिल ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

Passing Out Parade 2025: Indian Army Gets 362 New Officers from OTA Gaya and OTA Chennai
Lt. Gen. Sukriti Singh Dahiya, Commandant OTA Gaya standing behind ​Lieutenant General Anindya Sengupta, PVSM, UYSM, AVSM, YSM, General Officer Commanding-in-Chief, Central Command

समारोह में कई कैडेट्स को सम्मानित किया गया। बटालियन अंडर ऑफिसर कुलथे ध्रुव को सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडर घोषित किया गया और उन्हें प्रतिष्ठित स्वॉर्ड ऑफ ऑनर प्रदान की गई। अकादमी कैडेट एडजुटेंट मोनू कुमार को गोल्ड मेडल, अकादमी अंडर ऑफिसर पीयूष डिमरी को सिल्वर मेडल और बटालियन अंडर ऑफिसर मुकता सिंह को ब्रॉन्ज मेडल दिया गया। इसके अलावा कालिधर कंपनी को चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ बैनर से नवाजा गया।

अपने संबोधन में रिव्यूइंग ऑफिसर ने युवा कैडेट्स को इनोवेशन अपनाने, उभरती तकनीकों को सीखने और हर परिस्थिति में तैयार रहने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि परंपरा और आधुनिक नेतृत्व का मिश्रण ही भारतीय सेना को और मजबूत बनाएगा।

इससे पहले ओटीए गया में शहीद स्मारक पर रिव्यूइंग ऑफिसर और वरिष्ठ अधिकारियों ने शोक शस्त्र की परंपरा निभाते हुए देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले शहीदों को भी याद किया।

वहीं, ओटीए गया का सबसे भावुक दृश्य पिपिंग सेरेमनी के दौरान देखने को मिला। जब कैडेट्स के कंधों पर स्टार्स लगाए गए और वे भारतीय सेना के अफसर बन गए। परिवारों की मौजूदगी में यह क्षण गर्व और भावनाओं से सराबोर रहा। लेफ्टिनेंट कर्नल प्रखर धगत ने सभी कैडेट्स को शपथ दिलाई।

Passing Out Parade: ओटीए चेन्नई में भी पासिंग आउट परेड

इसी दिन चेन्नई स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी में भी पासिंग आउट परेड आयोजित हुई। परमेश्वरन ड्रिल स्क्वेयर पर हुई इस परेड में शॉर्ट सर्विस कमीशन एसएससी से 120 और एसएससी (महिला)-34 कोर्स के कैडेट्स शामिल हुए।

यहां कुल 155 कैडेट्स भारतीय सेना में अफसर बने, जिनमें 130 पुरुष और 25 महिला कैडेट्स शामिल थीं। इसके अलावा नौ मित्र देशों से आए 21 विदेशी कैडेट्स (9 पुरुष और 12 महिला) ने भी ट्रेनिंग पूरी की।

इस परेड के रिव्यूइंग ऑफिसर वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह रहे। अपने संबोधन में रिव्यूइंग ऑफिसर ने ऑफिसर कैडेट्स और ओटीए स्टाफ की उपलब्धियों की सराहना की और नए अफसरों से आह्वान किया कि वे सेना के मूल मूल्यों, राष्ट्र की निस्वार्थ सेवा और हर कार्य में उत्कृष्टता हासिल करने के संकल्प को हमेशा बनाए रखें। उन्होंने कैडेट्स को संबोधित करते हुए कहा कि सेना का मूल मूल्य निस्वार्थ सेवा और उत्कृष्टता की भावना है, जिसे हमेशा जीवित रखना होगा।

Passing Out Parade 2025: Indian Army Gets 362 New Officers from OTA Gaya and OTA Chennai
Passing Out Parade 2025: Indian Army Gets 362 New Officers from OTA Gaya and OTA Chennai

समारोह में एसीए राज बिस्वास को स्वॉर्ड ऑफ ऑनर और सिल्वर मेडल, एयूओ पारुल धडवाल को गोल्ड मेडल और बीयूओ प्रांजल दीक्षित को ब्रॉन्ज मेडल से सम्मानित किया गया।

ओटीए चेन्नई में पिपिंग सेरेमनी में उनके परिजनों ने कैडेट्स की वर्दी पर स्टार्स लगाए औऱ भारत के संविधान और देश की सुरक्षा के लिए शपथ ली। उत्साह और गर्व से भरे इन युवा अफसरों ने “सर्व विद ऑनर” की भावना के साथ आगे कदम बढ़ाया।

OTA Chennai POP: पांचवीं पीढ़ी की महिला अफसर बनीं लेफ्टिनेंट पारुल धडवाल, 129 साल पुरानी सैन्य विरासत को बढ़ाया आगे, पिता-भाई भी सेना में

OTA Chennai POP: 5th Generation Woman Officer Joins Indian Army

OTA Chennai POP: भारतीय सेना में सेवा और शौर्य की विरासत को आगे बढ़ाते हुए पंजाब के धडवाल परिवार ने एक नया इतिहास रच दिया है। इस परिवार की पांचवीं पीढ़ी ने वर्दी पहनकर देश की सेवा की राह चुनी है। लेफ्टिनेंट पारुल धडवाल को शनिवार को चेन्नई स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (ओटीए) से पास आउट होने के बाद भारतीय सेना की ऑर्डनेंस कोर में कमीशन मिला।

पारुल धडवाल की उपलब्धि और भी खास इसलिए है, क्योंकि उन्हें अपने कोर्स में पहला स्थान हासिल करने पर प्रेसिडेंट्स गोल्ड मेडल से भी सम्मानित किया गया।

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OTA Chennai POP: सेना में परंपरा और आधुनिकता दोनों

पंजाब के होशियारपुर जिले के जनौरी गांव की रहने वाली लेफ्टिनेंट पारुल धडवाल अपने परिवार की पहली महिला अधिकारी बनी हैं। उनकी कमीशनिंग न सिर्फ एक पारिवारिक उपलब्धि है, बल्कि यह भी बताती है कि कैसे भारतीय सेना में महिलाओं की भागीदारी तेजी सेा बढ़ रही है। वहीं पारुल ने सेना ज्वॉइन करके बता दिया है कि कैसे परंपरा और आधुनिकता का संगम आज भी भारतीय सेना में कायम है।

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OTA Chennai POP: 129 साल पुरानी सैन्य विरासत

धडवाल परिवार की सैन्य परंपरा बेहद गौरवशाली रही है। इस विरासत की शुरुआत सूबेदार हरनाम सिंह से हुई, जिन्होंने 74 पंजाब रेजिमेंट में 1 जनवरी 1896 से लेकर 16 जुलाई 1924 तक सेवा दी। उनके बाद दूसरी पीढ़ी में मेजर एलएस धडवाल (3 जाट) ने देश की सेवा की।

तीसरी पीढ़ी में यह परंपरा कर्नल दलजीत सिंह धडवाल (7 जम्मू कश्मीर राइफल्स) और ब्रिगेडियर जगत जमवाल (3 कुमाऊं) ने आगे बढ़ाई। चौथी पीढ़ी में पारुल के पिता मेजर जनरल केएसधडवाल, एसएम, वीएसएम और उनके भाई कैप्टन धनंजय धडवाल (20 सिख) वर्तमान में सेवा दे रहे हैं।

OTA Chennai POP: एक ही परिवार से तीन अफसर

आज की तारीख में यह परिवार उन गिने-चुने परिवारों में शामिल है, जिनकी दो पीढ़ियों से तीन अधिकारी एक साथ सेवा में हैं। पारुल के पिता मेजर जनरल केएस धडवाल सेना मेडल और विशिष्ट सेना मेडल से सम्मानित हैं और भाई कैप्टन धनंजय धडवाल पहले से ही सेना की 20 सिख रेजीमेंट में देश की सेवा कर रहे हैं। वहीं अब कमीशन होने के बाद पारुल ने भी परिवार की इस परंपरा को आगे बढ़ाया है।

OTA Chennai POP: महिला अधिकारियों की बढ़ती भागीदारी

पारुल धडवाल की कमीशनिंग इस बात की भी गवाही है कि भारतीय सेना में महिलाओं की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है। हाल के वर्षों में महिलाओं को परमानेंट कमीशन, कॉम्बैट रोल और लीडरशिप रोल में जगह मिलने लगी है। पारुल की यह उपलब्धि देश की उन तमाम बेटियों के लिए प्रेरणा है जो सेना में करियर बनाने का सपना देखती हैं।

मिला प्रेसिडेंट्स गोल्ड मेडल

चेन्नई स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी से पास आउट होना अपने आप में गौरव की बात है, लेकिन पारुल ने इससे आगे बढ़कर अपने कोर्स में प्रथम स्थान हासिल कर इतिहास भी रचा है। उन्हें इस शानदार उपलब्धि के लिए प्रेसिडेंट्स गोल्ड मेडल से भी सम्मानित किया गया।

Dhruv ALH glitch: भारतीय सेना का ध्रुव हेलिकॉप्टर फिर हुआ गड़बड़ी का शिकार, पूरे बेड़े की जांच का आदेश, नेवी और कोस्टगार्ड का बढ़ा इंतजार!

Dhruv ALH glitch: Army Orders Fleet-Wide Check After Tail Drive Shaft Failure in Dhruv Helicopters
Dhruv Chopper

Dhruv ALH glitch: भारतीय सेना के ध्रुव एडवांस्ड लाइट हेलिकॉप्टर (ALH) में एक बार फिर गंभीर तकनीकी गड़बड़ी सामने आई है। उड़ान के दौरान एक हेलिकॉप्टर के टेल ड्राइव शाफ्ट (TDS) को नुकसान पहुंचा, जिसके बाद सेना ने सुरक्षा कारणों से पूरे ध्रुव बेड़े की तत्काल जांच के आदेश दिए हैं। यह मामला 4 सितंबर का है। जिसके बाद एक बार फिर इन हेलिकॉप्टरों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

HAL ALH Crash: ध्रुव हेलीकॉप्टर हादसे पर HAL की सफाई, सोशल मीडिया पर फैली झूठी खबरों को बताया भ्रामक और एकतरफा

टेल ड्राइव शाफ्ट हेलिकॉप्टर (Dhruv ALH glitch) के लिए बेहद अहम हिस्सा होता है। यह इंजन से पावर को टेल रोटर तक पहुंचाता है, ताकि मेन रोटर के टॉर्क को बैलेंस किया जा सके। इसकी मजबूती सीधे तौर पर हेलिकॉप्टर की डायरेक्शन और स्टेबिलिटी से जुड़ी होती है। सेना की डायरेक्टरेट जनरल ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड मैकेनिकल इंजीनियर्स (एविएशन) ने तुरंत सभी ध्रुव यूनिट्स को आदेश जारी कर जांच शुरू करने को कहा है। इस जांच में वायुसेना और नौसेना के ध्रुव भी शामिल हैं।

Dhruv ALH glitch: वन-टाइम चेक अनिवार्य

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन के IA-1134 (टेल नंबर) हेलिकॉप्टर के साथ हुई। घटना के तुरंत बाद हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को भी जानकारी दी गई और उनसे इस खराबी की जड़ तक पहुंचने के लिए मदद मांगी गई। बता दें कि एचएएल ने ही ध्रुव को डिजाइन और डेवलप किया है और फिलहाल वे सेना को जांच में सहयोग कर रहे हैं।

सेना की ओर से जारी पत्र में लिखा गया है, “उड़ान के दौरान IA-1134 हेलिकॉप्टर (Dhruv ALH glitch) के स्टेशन #9A पर टीडीएस बेयरिंग माउंट टूटने की घटना सामने आई है। फ्लाइट सेफ्टी सुनिश्चित करने के लिए सभी ध्रुव हेलिकॉप्टरों में वन-टाइम चेक अनिवार्य रूप से किया जाए।” इस पत्र में टूटे हुए हिस्सों की तस्वीरें भी लगाई गई हैं।

यह आदेश ऐसे समय में आया है जब मई 2025 में ही सेना और वायुसेना के ध्रुव हेलीकॉप्टरों को गहन जांच के बाद उड़ान योग्य घोषित किया गया था। उससे पहले जनवरी 2025 में गुजरात के पोरबंदर में कोस्ट गार्ड के ध्रुव के क्रैश होने के बाद इन हेलिकॉप्टरों को महीनों तक ग्राउंडेड रखा गया था। उस हादसे में दो पायलट और एक एयरक्रू डाइवर की मौत हो गई थी।

पोरबंदर क्रैश के बाद नौसेना और कोस्ट गार्ड के ध्रुव हेलीकॉप्टर (Dhruv ALH glitch) अभी ग्राउंडेड हैं और उन्हें अब भी उड़ान भरने की अनुमति नहीं पाए हैं। वहीं, ऑपरेशन सिंदूर से पहले सेना और वायुसेना के लगभग 300 ध्रुव एएलएच को मई में डिफेक्ट इन्वेस्टिगेशन कमिटी की सिफारिश पर अनुमति मिली थी। इस कमेटी में CEMILAC (सेंटर फॉर मिलिट्री एयरवर्दीनेस एंड सर्टिफिकेशन), DG-AQA (डायरेक्टरेट जनरल ऑफ एरोनॉटिकल क्वालिटी एश्योरेंस) और एचएएल के अधिकारी शामिल थे।

यह हादसा ऐसे वक्त में जब हुआ है जब एचएएल नौसेना और कोस्ट गार्ड के हेलीकॉप्टरों (Dhruv ALH glitch) को अनुमति देने की योजना बना रहा था। रक्षा समाचार डॉट कॉम को जानकारी देते हुए एचएएल के सीनियर सूत्रों ने बताया था कि जल्द ही नौसेना और कोस्टगार्ड के ध्रुव हेलीकॉप्टरों को उड़ान की अनुमति दी जाएगी। उन्होंने बताया था कि अगले महीने तक कुछ ध्रुव उड़ान भरने लगेंगे। उन्हें पहले कुछ परीक्षणों से गुजरना होगा, और उसके बाद चरणबद्ध तरीके से उड़ान भरने की अनुमति मिलेगी।

वहीं, इस मामले में सेना ने जांच के लिए स्पष्ट निर्देश दिए हैं, जिनमें टीडीएस बेयरिंग और इलास्टोमेरिक बुश की जांच, टेल बूम टॉप फेस शीट पर तीन अलग-अलग स्टेशनों पर क्रैक की जांच और टीडीएस ब्रैकेट की विस्तृत विजुअल जांच शामिल है। इसके लिए 10X मैग्निफाइंग ग्लास के इस्तेमाल की सिफारिश भी की गई है।

एचएएल पहले ही नौसेना और कोस्ट गार्ड के दो ध्रुव हेलीकॉप्टरों (Dhruv ALH glitch) को इंस्ट्रूमेंट कर चुका है, ताकि ट्रांसमिशन सिस्टम, गियरबॉक्स और रोटर हब जैसी अहम यूनिट्स के परफॉरमेंस का डेटा जुटाया जा सके। माना जा रहा है कि समुद्र में लंबे समय तक ऑपरेशन करने से इन हेलिकॉप्टरों में तकनीकी दिक्कतें बढ़ रही हैं।

पोरबंदर हादसे के बाद बनी उच्चस्तरीय कमिटी ने पाया था कि स्वाशप्लेट फ्रैक्चर इस दुर्घटना का कारण बनी। यह हेलिकॉप्टर के कंट्रोल सिस्टम का अहम हिस्सा है। हालांकि, यह साफ नहीं हो सका कि यह हिस्सा क्यों टूटा। इसके बाद इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंसको भी जांच में शामिल किया गया और उन्होंने ट्रांसमिशन सिस्टम के अहम पुर्जों पर फैटीग टेस्ट किए।

पिछले पांच वर्षों में एडवांस लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (Dhruv ALH glitch) ध्रुव के 15 हादस हो चुके हैं, जिसके बाद इसके सुरक्षा रिकॉर्ड पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। 2023-24 में ही हेलिकॉप्टर का डिजाइन रिव्यू किया गया था और इसके कंट्रोल सिस्टम में बदलाव किए गए थे। लेकिन उसके बावजूद, कई घटनाओं के चलते इसे बार-बार ग्राउंडेड करना पड़ा।

रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि एएलएच की तकनीकी गड़बड़ियों को दूर करना बेहद जरूरी है, क्योंकि सेना, वायुसेना, नौसेना और कोस्ट गार्ड के पास यह हेलिकॉप्टर बड़ी संख्या में मौजूद हैं। यह न केवल लॉजिस्टिक सपोर्ट बल्कि रेस्क्यू और कॉम्बैट मिशनों के लिए भी अहम भूमिका निभाते हैं।

भारतीय सेना ने एचएएल से इस घटना की जांच के लिए “रूट कॉज एनालिसिस” को टॉप प्रायरिटी पर लेने को कहा है। आने वाले समय में इस जांच से यह पता चल पाएगा कि टीडीएस फेल्योर की वास्तविक वजह क्या थी और क्या इसे व्यापक स्तर पर ठीक किया जा सकता है।

 

Army Chief on Op Sindoor: आर्मी चीफ बोले- 10 मई को खत्म नहीं हुई थी पाकिस्तान से जंग, थिएटराइजेशन “आज नहीं तो कल जरूर आएगा”

Army Chief on Op Sindoor: War with Pakistan Didn’t End on May 10
General Upendra Dwivedi, COAS, today unveiled the book “Operation SINDOOR: The Untold Story of India's Deep Strikes Inside Pakistan” by Lieutenant General KJS 'Tiny' Dhillon (Retd).

Army Chief on Op Sindoor: भारतीय थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने शुक्रवार को साफ किया कि पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर 10 मई को खत्म नहीं हुआ था। उन्होंने कहा कि यह सैन्य अभियान लंबे समय तक चला और इसमें कई महत्वपूर्ण फैसले लेने पड़े।

Indian Army Restructuring: पाकिस्तान और चीन ने किया कोई दुस्साहस तो काल बनेंगे भैरव कमांडोज! 23 बटालियन खड़ी करने की तैयारी, ऑपरेशन सिंदूर के बाद सेना ने शुरू की री-स्ट्रक्चरिंग

दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में एक किताब के विमोचन कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा, “आप सोच रहे होंगे कि जंग 10 मई को खत्म हो गई थी, लेकिन ऐसा नहीं था। यह और लंबे समय तक चला क्योंकि बहुत से अहम फैसले लेने थे। उससे आगे की बात करना मेरे लिए मुश्किल होगा।”

Army Chief on Op Sindoor: जारी रहा ऑपरेशन

सेना प्रमुख ने रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लन की नई किताब “ऑपरेशन सिंदूर: द अनटोल्ड स्टोरीज ऑफ इंडियाज डीप स्ट्राइक्स इनसाइड पाकिस्तान” की लॉन्चिंग के मौके पर बोलते हुए कहा, 6-7 मई 2025 को पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। तीन दिन बाद यानी 10 मई तक इसे खत्म माना गया, लेकिन सेना प्रमुख ने पहली बार स्वीकार किया कि यह ऑपरेशन आगे भी जारी रहा। उन्होंने कहा, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अप्रैल 23 से लेकर 16 मई तक कई कठिन फैसले लेने पड़े। लोग सोचते हैं कि जंग 10 मई को खत्म हुई, लेकिन सच यह है कि कई अहम फैसले उसके बाद भी लिए गए। हमें यह तय करना था कि कब शुरू करें, कब रोकें, कितना समय, कितना संसाधन और किस तरह उपयोग करना है। कोई पहले से उदाहरण नहीं था, इसलिए हर फैसला अनुभव और चर्चा के आधार पर लेना पड़ा।

उन्होंने यह भी कहा कि लाइन ऑफ कंट्रोल पर इसका असर अभी आंकना जल्दबाजी होगी, क्योंकि पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

उन्होंने कहा, “क्या पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद खत्म हो गया? मुझे नहीं लगता, क्योंकि अब भी घुसपैठ की कोशिशें हो रही हैं। कितने आतंकियों को हमने मार गिराया और कितने भाग निकले, यह सब मीडिया में भी सामने आ चुका है।”

Army Chief on Op Sindoor: तालमेल और सिंक्रोनाइजेशन पर फोकस

जनरल द्विवेदी ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तीनों सेनाओं के बीच तालमेल को “रिदमिक वेव” यानी लयबद्ध तरंग की तरह बताया। उनके अनुसार, हर जवान और हर अफसर आदेशों से पूरी तरह अवगत था और एकजुट होकर काम कर रहा था।

उन्होंने कहा कि युद्ध में केवल हथियार ही काम नहीं आते, बल्कि कमांड और कंट्रोल का बेहतर स्ट्रक्चर भी उतना ही अहम होता है। इस दौरान सेंटर ऑफ ग्रेविटी पर लगातार फोकस रखा गया और यह सुनिश्चित किया गया कि हर कदम योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़े।

Army Chief on Op Sindoor: थिएटराइजेशन पर बोली यह अहम बाात

वहीं थिएटराइजेशन पर जनरल द्विवेदी ने अपनी राय रखते हुए कहा, “थिएटराइजेशन आज हो या कल, होना ही है। सवाल सिर्फ यह है कि इसमें कितना वक्त लगेगा। जब हम लड़ते हैं, तो केवल सेना नहीं लड़ती। हमारे पास बीएसएफ, आईटीबीपी, साइबर एजेंसी, स्पेस एजेंसी, कोऑपरेटिव वॉरफेयर एजेंसी, आईएसआरओ, सिविल डिफेंस, रेलवे और स्टेट एडमिनिस्ट्रेशन जैसी कई संस्थाओं से तालमेल बैठाना होता है। इतने सारे एजेंसियों के बीच तालमेल की स्थिति में थिएटराइजेशन ही जवाब है। हमें एक ही कमांडर चाहिए और यूनिटी ऑफ कमांड सबसे ज्यादा जरूरी है।”

Army Chief on Op Sindoor: War with Pakistan Didn’t End on May 10
COAS General Upendra Dwivedi

बता दें कि हाल के दिनों में थिएटराइजेशन (Theaterisation) पर बहस छिड़ी हुई है। रणसंवाद 2025 में एयरफोर्स चीफ, नेवी चीफ और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ ने भी इस पर अपने-अपने विचार रखे थे।

एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने थिएटर कमांड को लेकर कहा था कि अभी थिएटर कमांड लागू करने का समय नहीं है। इस तरह की जल्दबाजी से तीनों सेनाओं की कोर स्ट्रेंथ को नुकसान हो सकता है। उनका कहना था मिलिट्री कॉर्डिनेशन का स्ट्रक्चर ऐसा होना चाहिए जिसे सीधे तीनों सेनाओं के प्रमुख मिलकर ऑपरेट करें। उन्होंने कहा कि इस स्तर पर जॉइंट प्लानिंग और फैसले अधिक व्यावहारिक होंगे और इससे अनावश्यक नई परतें जोड़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

उन्होंने आगे बोलते हुए कहा था कि हमें अभी किसी नए स्ट्रक्चर की जरूरत नहीं है। जो सिस्टम मौजूद है, उसी में बेहतर काम हो सकता है। हमें दिल्ली में एक जॉइंट प्लानिंग और कॉर्डिनेशन सेंटर बनाना चाहिए, जहां से योजनाएं तैयार हों और फिर उनका क्रियान्वयन अलग-अलग स्तरों पर किया जाए।

वहीं, नेवी चीफ एडमिरल दिनेश त्रिपाठी ने कहा था कि समुद्री मोर्चे पर मल्टी-डोमेन ऑपरेशन की जरूरत है और इसके लिए इंटीग्रेटेड कमांड ही समाधान है। वहीं सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने इस प्रक्रिया को “अनिवार्य” बताया था।

Army Chief on Op Sindoor: जीएसटी सुधारों की तारीफ

सेना प्रमुख ने हाल ही में घोषित जीएसटी सुधारों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि डिफेंस कॉरिडोर को इसका सीधा फायदा मिलेगा और छोटे उद्योगों तथा स्टार्टअप्स को भी राहत मिलेगी।

उन्होंने बताया कि भारतीय सेना में तीन चीजें सबसे अहम हैं, रिसर्च एंड डेवलपमेंट, ट्रेनिंग और मॉडर्नाइजेशन। रिसर्च एंड डेवलपमेंट में आईडीईएक्स (IDEX) प्रोजेक्ट्स को जीएसटी छूट से सीधा फायदा होगा। ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले सिम्युलेटर अब जीरो जीएसटी पर मिलेंगे, जिससे बड़ी संख्या में इन्हें खरीदा जा सकेगा।

मॉडर्नाइजेशन की बात करते हुए उन्होंने कहा कि भारी और हल्के उपकरणों की खरीद में अब बाधाएं कम होंगी। मिलिट्री ड्रोन (UAVs) पर जीएसटी जीरो कर दिया गया है, जिससे आने वाले युद्धों में उनकी अहमियत और बढ़ जाएगी। उन्होंने कहा, “ड्रोन, यूएवी और काउंटर-यूएवी आने वाले समय में युद्ध का चेहरा तय करेंगे। इस सुधार से हमें काफी फायदा होगा।”

Army Chief on Op Sindoor: एलओसी को लेकर बोले आर्मी चीफ

जनरल द्विवेदी ने लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) केजेएस ढिल्लन की नई किताब की तारीफ की। उन्होंने कहा कि इसमें कई ऐसी बातें सामने आई हैं जिन्हें अब तक वर्दीधारी अफसर नहीं बता सकते थे।

उन्होंने कहा, यह किताब सिर्फ मिलिट्री ऑपरेशंस की कहानी नहीं है, बल्कि भारतीय सेना की हिम्मत, प्रोफेशनलिज्म और अटूट जज्बे को भी सलाम है। उन्होंने कहा कि लाइन ऑफ कंट्रोल की लड़ाई और उससे जुड़े मुद्दों पर हम इतने अभ्यस्त हो गए थे कि उसकी अहमियत, जज्बात, नुकसान, उपलब्धियां और चुनौतियों को हम महसूस ही नहीं कर पाए। लेकिन ऑपरेशन सिंदूर में यही अनकही कहानी सामने आती है। आप जानते हैं कि गलती से जब पाकिस्तान की तरफ से पुरस्कार देने की सूची बाहर आई, तो उसमें साफ दिखा कि सबसे बड़ा श्रेय लाइन ऑफ कंट्रोल को ही जाता है। यहां तक कि उसमें लिखा गया था ‘बहुत हुआ, फाइल छोड़ो और जल्दी से मुजफ्फराबाद भागो’। यह उस जबरदस्त फायर असॉल्ट की गवाही देता है।

उन्होंने कहा कि इस किताब में तीन अहम मुद्दों पर भी चर्चा है, फोर्स विजुअलाइजेशन, फोर्स प्रोटेक्शन और फोर्स एप्लिकेशन। साथ ही इसमें सेंट्रलाइज्ड प्लानिंग और डीसेंट्रलाइज्ड एक्जीक्यूशन पर भी बात की गई है।

उन्होंने कहा, “इस किताब ने वह सब कह दिया जो अब तक अनकहा था। इसने ऑपरेशन सिंदूर की चुनौतियों, भावनाओं, नुकसान और उपलब्धियों को सामने रखा। यह किताब सिर्फ सैन्य ऑपरेशन का ब्यौरा नहीं बल्कि भारतीय सेना के साहस और प्रोफेशनलिज्म को श्रद्धांजलि भी है।”

Army Chief on Op Sindoor: एनसीईआरटी में शामिल

सेना प्रमुख ने यह भी बताया कि अब ऑपरेशन सिंदूर को एनसीईआरटी (NCERT) की किताबों में शामिल किया गया है। एक हिस्सा कक्षा 1 से 5 और दूसरा कक्षा 6 से 12 तक के बच्चों को पढ़ाया जाएगा। यह किताब न सिर्फ़ नींव है बल्कि भविष्य की पढ़ाई और शोध के लिए भी रेफरेंस मटेरियल बनेगी। मिलिट्री स्ट्रैटेजिस्ट भी इसे कोट करेंगे। और आने वाले युद्धों के लिए इससे कई सबक सीखे जाएंगे।”

ले. जन. (रि.) केजेएस ढिल्लन ने कही ये बात

लेफ्टिनेंट जनरल (रि.) केजेएस ढिल्लन ने अपनी नई किताब बोलते हुए कहा, यह किताब केवल एक मिलिट्री ऑपरेशन का ब्यौरा नहीं है, बल्कि उस राष्ट्रीय ऊर्जा, राजनीतिक इच्छाशक्ति और सैन्य समन्वय का दस्तावेज है जिसने पाकिस्तान के खिलाफ निर्णायक जीत सुनिश्चित की।

ढिल्लन ने बताया कि किताब की रूपरेखा 22 अप्रैल से लेकर 6 मई की रात तक की घटनाओं, इंटेलिजेंस इनपुट्स, कूटनीतिक पहल और सैन्य फैसलों पर आधारित है। इसमें टारगेट चुनने से लेकर सही हथियारों के इस्तेमाल और तेजी से किए गए हमलों तक का ब्यौरा है। उन्होंने खास तौर पर लाइन ऑफ कंट्रोल की जंग और नैरेटिव की जंग पर लिखे गए अध्यायों का जिक्र किया, जिन्हें अक्सर मीडिया कवरेज में नजरअंदाज कर दिया गया था। उनके अनुसार, यह वही मोर्चे थे जहां भारतीय सैनिकों का असली जिगरा सामने आया।

Military Hardware IGST Cut: मिलिट्री हार्डवेयर हुए सस्ते, 18 फीसदी IGST खत्म, ड्रोन और मिसाइल पर पड़ेगा असर

Military Hardware IGST Cut Cheaper After 18 Percent in India

Military Hardware IGST Cut: भारत सरकार ने डिफेंस सेक्टर के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। अब से मिलिट्री हार्डवेयर यानी सैन्य साजोसामान पर लगने वाला 18 फीसदी इंटीग्रेटेड गुड्स एंड सर्विस टैक्स (IGST) पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है। इसका सीधा असर यह होगा कि जहाज से लॉन्च होने वाली मिसाइलें, डीप सबमर्जेंस रेस्क्यू वेसल, फ्लाइट मोशन सिम्युलेटर, इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस वेपन सिस्टम, मानव रहित जलपोत यानी अनमैन्ड अंडरवॉटर व्हीकल और कई तरह के इक्विपमेंट्स अब पहले से कम कीमत पर मिलेंगे।

Emergency Defence Procurement Rules: आपातकालीन हथियार सौदों पर नई सख्ती, एक साल में डिलीवरी नहीं तो रद्द होगा कॉन्ट्रैक्ट

यह फैसला वित्त मंत्रालय की ओर से 56वीं जीएसटी काउंसिल बैठक की सिफारिशों पर लिया गया। रक्षा मंत्रालय और तीनों सेनाओं का कहना है कि यह सुधार न केवल ऑपरेशनल रेडीनेस बढ़ाएगा, बल्कि भविष्य के सैन्य अभियानों के लिए भी तैयारी को मजबूत करेगा।

Military Hardware IGST Cut: इंपोर्ट पर टैक्स का असर खत्म

इंटीग्रेटेड गुड्स एंड सर्विस टैक्स दरअसल राज्यों के बीच होने वाली सप्लाई और इंपोर्ट पर लगाया जाता है। जब भी विदेश से कोई मिलिट्री इक्पिमेंट खरीदा जाता था तो उस पर कस्टम ड्यूटी के साथ इंटीग्रेटेड गुड्स एंड सर्विस टैक्स भी देना पड़ता था। अब नए सुधार के बाद यह टैक्स हटा दिया गया है। यानी, जहाज से लॉन्च होने वाली मिसाइल, रॉकेट, ड्रोन, अंडरवॉटर वेसल और आर्टिलरी वेंपस के लिए आने वाले स्पेयर पार्ट्स भारत में सस्ते हो जाएंगे।

Military Hardware IGST Cut: ड्रोन सेक्टर को मिली बड़ी राहत

ड्रोन इंडस्ट्री के लिए यह सुधार किसी वरदान से कम नहीं माना जा रहा। ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष स्मित शाह ने कहा कि पहले कैमरे वाले ड्रोन पर 5 फीसदी, 18 फीसदी और यहां तक कि 28 फीसदी तक जीएसटी लगने को लेकर भ्रम बना रहता था। इसकी वजह से कई बार कंपनियों को विवाद और कंप्लायंस जोखिम झेलने पड़ते थे।

अब सरकार ने नियम साफ कर दिया है। सैन्य ड्रोन पर टैक्स जीरो कर दिया गया है, जबकि कमर्शियल ड्रोन पर केवल 5 फीसदी जीएसटी लगेगा। इससे न केवल लागत कम होगी बल्कि ऑपरेटरों और ग्राहकों को सीधा फायदा मिलेगा।

गरुड़ा एयरोस्पेस के सीईओ अग्निश्वर जयप्रकाश ने कहा कि कृषि क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले ड्रोन की सबसे बड़ी लागत उनकी बैटरी होती है। अब बैटरी को जीएसटी से मुक्त कर दिया गया है। इससे ग्राहकों को लागत में राहत मिलेगी और कंपनियों की मुनाफा भी बढ़ेगा।

भारतीय ड्रोन कंपनी आइडियाफोर्ज के सीईओ अंकित मेहता ने कहा कि इस सुधार से भारतीय UAV यानी मानव रहित हवाई वाहन क्षमता में तेजी आएगी। इसका फायदा न केवल सीमा पर निगरानी में होगा बल्कि मैपिंग, निरीक्षण, आपदा प्रबंधन और कृषि जैसे क्षेत्रों में भी देखने को मिलेगा।

उन्होंने कहा कि 0% टैक्स से भारतीय निर्माता अपने ऑपरेशन्स को और बड़े पैमाने पर चला पाएंगे। साथ ही डिफेंस सेक्टर में ज्यादा कॉन्टैक्ट अधिक अनुबंध हासिल कर पाएंगे और बेहतर क्षमता वाले किफायती ड्रोन बना पाएंगे।

Military Hardware IGST Cut: किन पर खत्म हुआ टैक्स

सूत्रों के अनुसार, अब जिन वस्तुओं पर IGST नहीं लगेगा, उनमें शामिल हैं जहाज से लॉन्च होने वाली मिसाइलें, जो नौसेना की ताकत बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसके साथ ही, डीप सबमर्जेंस रेस्क्यू वेसल यानी गहरे समुद्र में बचाव कार्य करने वाले जहाज भी इस दायरे में आएंगे।

फ्लाइट मोशन सिम्युलेटर, जो पायलटों के प्रशिक्षण में अहम होते हैं, उन पर भी अब अतिरिक्त कर का बोझ नहीं रहेगा। इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस वेपन सिस्टम, जो देश की हवाई सुरक्षा को मजबूत करने के लिए जरूरी है, वह भी इस सूची में शामिल है।

इसके अलावा, अनमैन्ड अंडरवॉटर वेसल यानी बिना पायलट के पानी के भीतर चलने वाले सिस्टम को भी छूट दी गई है। नौसेना के लिए सोनाबॉय, जिनका इस्तेमाल पनडुब्बियों का पता लगाने और ट्रैकिंग के लिए किया जाता है, अब कम लागत पर उपलब्ध होंगे।

100 मिलीमीटर से बड़े कैलिबर वाले रॉकेट भी इस श्रेणी में आते हैं, जो आर्टिलरी की क्षमता को बढ़ाने में उपयोगी हैं। साथ ही, हाई-परफॉर्मेंस बैटरियां, जो ड्रोन और अन्य आधुनिक रक्षा प्रणालियों के लिए जरूरी हैं, उन्हें भी इस कर छूट का फायदा मिलेगा।

इसके अलावा आर्टिलरी हथियार, राइफल, एयरक्राफ्ट, रॉकेट लॉन्चर, AK-630 नेवल गन और लाइट मशीन गन से जुड़े स्पेयर पार्ट्स, सब-असेंबली, टूल्स और टेस्टिंग इक्विपमेंट को भी IGST से छूट दी गई है।

यह फैसला ऐसे समय आया है जब भारतीय सेना तेज गति से आधुनिकीकरण की ओर बढ़ रही है। 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। इसके बाद रक्षा मंत्रालय ने आपातकालीन शक्तियों के तहत हथियार और उपकरणों की खरीद को बढ़ावा दिया।

24 जून को रक्षा मंत्रालय ने इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट की पांचवीं किश्त के तहत 1,981.90 करोड़ रुपये के 13 अनुबंध किए थे। इसमें ड्रोन, काउंटर-ड्रोन सिस्टम, लोइटरिंग म्यूनिशन, रडार और शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम शामिल थे।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम न केवल लागत घटाएगा बल्कि भारत के मेक इन इंडिया कार्यक्रम को भी रफ्तार देगा। जब विदेशी आयात पर टैक्स कम होगा तो भारतीय कंपनियों के लिए अपने प्रोडक्ट्स को डिफेंस कॉन्ट्रैक्ट में शामिल करना आसान होगा।

डीआरडीओ और एचएएल जैसी सरकारी संस्थाओं के साथ-साथ लार्सन एंड टुब्रो, डायनामेटिक टेक्नोलॉजीज और VEM टेक्नोलॉजीज जैसी निजी कंपनियां पहले से ही इस क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब टैक्स छूट से इनके लिए वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करना आसान होगा।

नए टैक्स स्ट्रक्चर का असर केवल सेना पर ही नहीं बल्कि नागरिक क्षेत्रों में भी दिखाई देगा। कृषि ड्रोन, लॉजिस्टिक ड्रोन और सर्विलांस ड्रोन अब कम लागत पर उपलब्ध होंगे। इससे किसानों को सस्ती सेवाएं मिलेंगी और आपदा प्रबंधन जैसे कामों में भी मदद मिलेगी।

Emergency Defence Procurement Rules: आपातकालीन हथियार सौदों पर नई सख्ती, एक साल में डिलीवरी नहीं तो रद्द होगा कॉन्ट्रैक्ट

Emergency Defence Procurement Rules Tightened: No Delivery, No Deal

Emergency Defence Procurement Rules: भारत के रक्षा मंत्रालय ने रक्षा खरीद की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। अब आपातकालीन खरीद यानी इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट (Emergency Procurement) के तहत किए गए किसी भी सौदे को एक साल के भीतर पूरा करना जरूरी होगा। अगर तय समयसीमा में हथियार या इक्विपमेंट्स नहीं मिलते हैं तो कॉन्ट्रैक्ट रद्द कर दिया जाएगा। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि भारतीय सेना की जरूरी जरूरतें समय पर पूरी हो सकें और ऑपरेशनल तैयारियों में कोई कमी न रहे।

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Emergency Defence Procurement Rules: क्यों होती है आपातकालीन खरीद

आपातकालीन रक्षा खरीद का इस्तेमाल तब किया जाता है जब तुरंत हथियार, गोला-बारूद या सिस्टम की जरूरत होती है। सामान्य रक्षा खरीद प्रक्रिया में कई चरण होते हैं और यह पांच से छह साल तक खिंच सकती है। लेकिन आपातकालीन खरीद के जरिए सेना को जल्दी हथियार उपलब्ध कराए जा सकते हैं।

लद्दाख में चीन के साथ तनाव और पाकिस्तान से लगातार मिल रही चुनौतियों के बाद भारत ने कई बार इस रूट का इस्तेमाल किया है। 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक और 2019 के बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद भी सेना को आपातकालीन खरीद की अनुमति दी गई थी।

Emergency Defence Procurement Rules: ऑपरेशन सिंदूर के बाद बदलाव

मई 2025 में हुए ऑपरेशन सिंदूर के बाद सरकार ने तीनों सेनाओं को पूंजीगत बजट का 15 फीसदी तक आपातकालीन खरीद पर खर्च करने की छूट दी थी। इसके बाद 24 जून को रक्षा मंत्रालय ने 1,981.90 करोड़ रुपये के 13 नए कॉन्ट्रैक्ट साइन किए। इनमें ड्रोन, लॉयटरिंग म्यूनिशन, काउंटर-ड्रोन सिस्टम, वी-शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (VSHORADS) और रडार शामिल थे।

रक्षा मंत्रालय द्वारा हाल ही में किए गए सौदों में उन हथियारों और उपकरणों पर जोर दिया गया है जिनकी जरूरत मॉडर्न वॉरफेयर में होती है। इसमें दुश्मन के ड्रोन और मिसाइलों से निपटने के लिए कई सिस्टम शामिल किए गए हैं।

सबसे पहले, रिमोटली पायलटेड एरियल व्हीकल (RPAV) और लुटरिंग म्यूनिशन का ऑर्डर दिया गया। ये ऐसे ड्रोन हैं जो निगरानी के साथ-साथ टारगेट पर सीधा हमला करने में सक्षम होते हैं। इनके इस्तेमाल से सेना दुश्मन की पोजिशन पर तुरंत कार्रवाई कर सकेगी।

दूसरा, काउंटर-ड्रोन सिस्टम्स का कॉन्ट्रैक्ट किया गया है। हाल के वर्षों में पाकिस्तान और चीन की तरफ से ड्रोन के जरिए घुसपैठ और हथियारों की तस्करी बढ़ी है। ऐसे में सेना को ऐसे सिस्टम चाहिए जो हवा में ही दुश्मन के ड्रोन को मार गिरा सकें।

तीसरा, VSHORADS (Very Short Range Air Defence System) को शामिल किया गया है। यह मिसाइल सिस्टम नजदीक से आने वाले हेलिकॉप्टरों, ड्रोन और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले विमानों को निशाना बना सकता है। इससे सेना की एयर डिफेंस क्षमता मजबूत होगी।

इसके अलावा, आधुनिक रडार सिस्टम भी खरीदे गए हैं, जो दुश्मन की हलचल को दूर से पकड़ सकें। यह रडार नेटवर्क युद्ध के दौरान सेना को शुरुआती चेतावनी (अर्ली वार्निंग) देगा और सही समय पर कार्रवाई में मदद करेगा।

Emergency Defence Procurement Rules: सख्ती से लागू होगा नियम

लेकिन कई बार देखा गया कि इन खरीदों की सप्लाई तय समय पर नहीं हो पाई। ऐसे में यह सवाल उठा कि अगर हथियार समय पर सेना तक पहुंचे ही नहीं, तो आपातकालीन खरीद का मकसद ही क्या रह जाएगा। इसी वजह से अब मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि केवल वही हथियार और उपकरण खरीदे जाएंगे, जो बाजार में तुरंत उपलब्ध हों और एक साल के भीतर दिए जा सकें।

अधिकारियों ने बताया कि अब यह नियम सख्ती से लागू होगा कि हर आपातकालीन सौदा एक साल के भीतर डिलीवर होना चाहिए। अगर कंपनियां समयसीमा में हथियार देने में नाकाम रहती हैं तो उनका कॉन्ट्रैक्ट सीधे रद्द कर दिया जाएगा।

रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने हाल ही में कहा था कि सामान्य रक्षा खरीद प्रक्रिया को पांच-छह साल से घटाकर दो साल के भीतर पूरा करने पर काम चल रहा है। इसके लिए हर स्टेप की समयसीमा घटाई जा रही है।

ट्रायल्स और टेस्टिंग में बदलाव

मंत्रालय अब कोशिश कर रहा है कि फील्ड इवैल्यूएशन ट्रायल्स (FET) एक साल के भीतर ही पूरे कर लिए जाएं, जबकि अभी इसमें दो से तीन साल लग जाते हैं। इसके अलावा, अगर कोई प्लेटफॉर्म पहले से किसी मित्र देश की सेना में इस्तेमाल हो रहा है तो भारत में उसका पूरा ट्रायल दोहराने की जरूरत नहीं होगी।

अन्य चरण जैसे रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP), कॉस्ट नेगोशिएशन आदि को भी तीन से छह महीने की समयसीमा में पूरा करने की कोशिश होगी, ताकि लंबी देरी से बचा जा सके।

पहले भी हुई है आपातकालीन खरीद

गलवान झड़प (जून 2020) के बाद भारत ने पहली बार 300 करोड़ रुपये तक की कैपिटल प्रोक्योरमेंट की अनुमति दी थी। इससे सेना ने मिसाइल, ड्रोन और गोला-बारूद खरीदा था।

इससे पहले 2016 की उरी सर्जिकल स्ट्राइक और 2019 के बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद भी सेना को इमरजेंसी रेवेन्यू प्रोक्योरमेंट की अनुमति दी गई थी, ताकि तुरंत गोला-बारूद और स्पेयर पार्ट्स खरीदे जा सकें।

रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया में सुधार

इसके अलावा सरकार रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया 2020 (Defence Acquisition Procedure – DAP 2020) को भी आसान बनाने की दिशा में काम कर रही है। इसके लिए एक उच्चस्तरीय पैनल बनाया गया है, जिसका नेतृत्व डायरेक्टर जनरल, एक्वीजिशन कर रहे हैं।

यह पैनल कैटेगराइजेशन, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, ट्रायल्स, कॉन्ट्रैक्ट मैनेजमेंट और नई तकनीकों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को अपनाने पर सिफारिशें देगा। मई 2025 में रक्षा सचिव ने बताया था कि कई चरणों में समय पहले ही कम किया गया है और इससे कुल 69 हफ्तों की कटौती हुई है।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आपातकालीन खरीद के तहत डिलीवरी की सख्त समयसीमा जरूरी थी। अब कंपनियां तभी बोली लगाएंगी जब उनके पास तैयार माल मौजूद होगा। इससे सेना को हथियार समय पर मिलेंगे और तैयारियों में कोई रुकावट नहीं आएगी। वहीं, रक्षा मंत्रालय का यह फैसला भारतीय सशस्त्र बलों की ऑपरेशनल रेडीनेस को और मजबूत करेगा।

Spear Corps Indian Army: अरुणाचल की बेटी की कहानी; कैसे दूरदराज के गांव से सैनिक स्कूल तक पहुंची मिली याबी, भारतीय सेना ने दिखाई राह

Spear Corps Indian Army support to Milli Yabi to Sainik School – Inspiring Journey
Source: Indian Army

Spear Corps Indian Army: ईटानगर से करीब 350 किलोमीटर दूर स्थित अरुणाचल प्रदेश का सरली गांव अब सुर्खियों में है। यहां की 12 वर्षीय बच्ची मिली याबी ने सैनिक स्कूल सियांग में दाखिला लेकर इतिहास रच दिया है। एक किसान परिवार से आने वाली मिली की इस सफलता के पीछे उसकी मेहनत के साथ-साथ भारतीय सेना की स्पीयर कॉर्प्स का भी सहयोग रहा है।

Indian Army Rudra Brigades: पूर्वी लद्दाख और सिक्किम में तैनात होंगी भारतीय सेना की नई ‘रुद्र’ ब्रिगेड्स

सरली एक छोटा सा सीमावर्ती गांव है, जिसकी आबादी करीब 1500 है। यहां शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं की कमी हमेशा बच्चों के सामने एक बड़ी चुनौती रही है। इसके बावजूद यहां के बच्चे सेना में शामिल होकर देश की सेवा करने का सपना देखते हैं। इसी उत्साह को देखते हुए भारतीय सेना ने एक विशेष मेंटरशिप प्रोग्राम शुरू किया, जिसने इन सपनों को हकीकत में बदलने का रास्ता दिखाया।

Spear Corps Indian Army: सेना का मेंटरशिप प्रोग्राम

भारतीय सेना की स्पीयर कॉर्प्स ने मई 2024 में सरली और आसपास के गांवों के बच्चों के लिए एक मेंटरशिप पहल शुरू की। इसका उद्देश्य बच्चों को सैनिक स्कूल में दाखिले की परीक्षा के लिए तैयार करना था।

इस कार्यक्रम में बच्चों को परामर्श, नियमित क्लास, मॉक टेस्ट और मनोबल बढ़ाने वाली गतिविधियां कराई गईं। कुल 33 बच्चों का चयन किया गया और उन्हें विशेष ट्रेनिंग दी गई। इनमें 88 क्लास, 18 मॉक टेस्ट और लगातार काउंसलिंग शामिल थी।

सेना ने केवल पढ़ाई पर ही नहीं, बल्कि बच्चों और अभिभावकों को सैनिक स्कूल की भूमिका और महत्व के बारे में भी जागरूक किया। इसके अलावा सेना ने बच्चों को डॉक्यूमेंटेशन, रजिस्ट्रेशन और परीक्षा की तैयारी से लेकर इटानगर में आयोजित एनटीए द्वारा कराई गई प्रवेश परीक्षा तक हर स्तर पर मदद की।

Spear Corps Indian Army: बच्चों के लिए नई उम्मीद

इस पहल के नतीजे चौंकाने वाले रहे। 33 बच्चों में से 32 ने राष्ट्रीय स्तर पर क्वालीफाई किया और आठ बच्चों ने एक से अधिक प्रवेश परीक्षाएं भी पास कीं। इस बीच, मिली याबी पहली बच्ची बनी जिसका सैनिक स्कूल ईस्ट सियांग में 18 अगस्त 2025 को सिलेक्शन हुआ। सेना को उम्मीद है कि आने वाले काउंसलिंग राउंड्स में 4–6 और बच्चे भी चयनित होंगे।

Spear Corps Indian Army support to Milli Yabi to Sainik School – Inspiring Journey
Source: Indian Army

Spear Corps Indian Army: मिली याबी की सफलता

मिली याबी की कहानी पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा बन गई है। एक किसान पिता और गृहिणी मां की बेटी ने सीमित संसाधनों के बावजूद बड़ा मुकाम हासिल किया। सेना के अधिकारियों ने उसकी लगन को देखते हुए उसे विशेष मार्गदर्शन दिया।

यह सफलता सिर्फ उसकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है बल्कि पूरे समुदाय की उम्मीदों और सपनों का प्रतीक है। यह दिखाता है कि अगर सही दिशा और मार्गदर्शन मिले तो दूरदराज के गांवों के बच्चे भी राष्ट्रीय स्तर पर चमक सकते हैं।

भारतीय सेना का यह कार्यक्रम केवल शिक्षा तक सीमित नहीं रहा। बच्चों में अनुशासन, आत्मविश्वास और राष्ट्रीय गर्व की भावना भी जागृत हुई। सरली जैसे गांवों में जहां पहले बच्चों के लिए बड़े सपने देखना मुश्किल माना जाता था, अब अभिभावक भी अपनी बेटियों और बेटों को सैनिक स्कूल और आगे एनडीए खड़कवासला जैसे संस्थानों में देखते हैं।

इसमें सबसे बड़ा योगदान सेना की उस सोच का है जो सीमावर्ती इलाकों के लोगों को केवल सुरक्षा का हिस्सा ही नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण में साझेदार मानती है।

भारतीय सेना हमेशा से सीमावर्ती इलाकों में शिक्षा, स्वास्थ्य और जागरूकता से जुड़े कार्यक्रम चलाती रही है। यह पहल उसी परंपरा का हिस्सा है। सेना का मानना है कि राष्ट्र निर्माण केवल सीमाओं की रक्षा से नहीं बल्कि सीमावर्ती गांवों को विकास और अवसरों से जोड़ने से भी होता है।

मिली याबी की कहानी इस बात का प्रमाण है कि भारतीय सेना का नेशन फर्स्ट अप्रोच केवल नारे तक सीमित नहीं है बल्कि यह जमीनी स्तर पर बच्चों और परिवारों की जिंदगी बदलने का माध्यम बन रहा है।

Tejas Mk-2 Rollout: तेजस मार्क-2 का रोलआउट अब 2027 तक टला, HAL ने बताई बार-बार टलने की ये बड़ी वजह?

Tejas Mk-2 Rollout Delayed to 2027
LCA Tejas Mk-2

Tejas Mk-2 Rollout: तेजस मार्क-2 (LCA Tejas Mk-2) को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड सूत्रों के मुताबिक यह अब 2027 में रोलआउट होगा। पहले इसकी समयसीमा 2025 के आखिर तक तय की गई थी, जिसे बाद में 2026 की पहली तिमाही तक बढ़ाया गया। लेकिन अब हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने आधिकारिक तौर पर जानकारी दी है कि इस विमान का पहला प्रोटोटाइप 2027 में ही तैयार होगा।

Tejas Mk-1A Price Hike: अब 97 नए तेजस मार्क-1ए को महंगे दामों पर बेचेगी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड! जानें HAL ने क्यों बढ़ाईं कीमतें?

यह बदलाव भारतीय वायुसेना के लिए अहम है क्योंकि तेजस मार्क-2 को पुराने मिग-21, मिराज-2000, मिग-29 और जगुआर जैसे विमानों को रिप्लेस करने के लिए डिजाइन किया गया है। वायुसेना की स्क्वाड्रन स्ट्रेंथ बनाए रखने और मॉडर्न वॉरफेयर में यह प्रोजेक्ट निर्णायक भूमिका निभाने वाला है।

Tejas Mk-2 Rollout: बार-बार टल रही समयसीमा

तेजस मार्क-2 के शेड्यूल में यह तीसरा बड़ा बदलाव है। 2025 में इसके रोलआउट का दावा किया गया था, फिर इसे 2026 तक बढ़ा दिया गया। लेकिन तकनीकी सुधारों की वजह से अब 2027 तय किया गया है। एचएएल सूत्रों ने बताया कि उनके पास फिलहाल 10 GE-414 इंजन हैं, जो तेजस मार्क-2 में लगाए जाने हैं। ये इंजन एडवांस में मंगवा कर रख लिए गए थे।

यह इंजन तेजस मार्क-1 और मार्क-1ए में इस्तेमाल होने वाले जीई एफ-404 इंजन से कहीं अधिक ताकतवर है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड और अमेरिकी कंपनी जीई एयरोस्पेस इस इंजन को भारत में बनाने के लिए साझेदारी कर रहे हैं। इसके साथ ही, इस इंजन और विमान के सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया भी चल रही है। जिसके चलते देरी हो रही है।

Tejas Mk-2 Rollout: भारत में बनाया जाना है GE-414 इंजन

इस इंजन का निर्माण भारत में होगा, जो मेक इन इंडिया पहल का हिस्सा है। जून 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिका दौरे के दौरान एचएएल और जीई एयरोस्पेस के बीच एक समझौता हुआ था। इस समझौते के तहत जीई एफ-414 इंजन का 80 पीसदी ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी भारत को मिलेगा। पहले यह तकनीकी हस्तांतरण 58 फीसदी तक सीमित था, लेकिन लंबी बातचीत के बाद इसे बढ़ाकर 80 फीसदी किया गया। यह इंजन बेंगलुरु में एचएएल की फैसिलिटी में बनाया जाएगा।

सूत्रों ने बताया कि अमेरिका से सभी जरूरी मंजूरियां मिल चुकी हैं, और जल्द ही भारत में इस इंजन का उत्पादन शुरू होगा। अगले तीन महीने में इस समझौते को अंतिम रूप दे दिया जाएगा। इस प्रक्रिया में जीई एयरोस्पेस और एचएएल मिलकर काम करेंगे, जिसमें स्थानीय इंजीनियरों और तकनीशियनों की भागीदारी होगी।

Tejas Mk-2 Rollout: AMCA में भी इस्तेमाल होगा ये इंजन

जीई एफ-414 इंजन के निर्माण के लिए एचएएल ने बेंगलुरु में एक नई प्रोडक्शन लाइन तैयार की है। यह सुविधा तेजस मार्क-1ए और मार्क-2 दोनों के लिए इंजनों और विमानों के प्रोडक्शन में मदद करेगी। सूत्रों के अनुसार, अगले तीन महीनों में इस समझौते को अंतिम रूप दिया जाएगा, जिसके बाद 2026 तक पहला प्रोटोटाइप इंजन तैयार हो सकता है। यह इंजन न केवल तेजस मार्क-2 के लिए, बल्कि भविष्य में अन्य स्वदेशी विमानों, जैसे एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA), के लिए भी उपयोगी हो सकता है।

Tejas Mk-2 Rollout: सर्टिफिकेशन है जरूरी

तेजस मार्क-2 और इसके जीई एफ-414 इंजन के सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण है। सर्टिफिकेशन का काम सेंटर फॉर मिलिट्री एयरवर्दिनेस एंड सर्टिफिकेशन (सीईएमआईएलएसी) और एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (एडीए) द्वारा किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में इंजन और विमान की सुरक्षा, प्रदर्शन, और युद्धक क्षमताओं का कड़ाई से परीक्षण होता है। तेजस मार्क-2 का पहला प्रोटोटाइप 2027 के मध्य तक रोलआउट होने की उम्मीद है, और इसके बाद इसके टैक्सी ट्रायल होंगे। इस दौरान इंजन के ग्राउंड टेस्ट, फ्लाइट टेस्ट, और सिस्टम इंटीग्रेशन की जांच की जाएगी। सर्टिफिकेशन प्रक्रिया में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि इंजन और विमान भारतीय वायुसेना की जरूरतों, जैसे वेपन इंटीग्रेशन और एडवांस एवियॉनिक्स को पूरा करते हैं।

सर्टिफिकेशन प्रक्रिया में कई चरण शामिल हैं। पहले चरण में इंजन का ग्राउंड टेस्ट होगा, जिसमें इसकी थ्रस्ट, फ्यूल एफिशिएंसी की जांच होगी। इसके बाद, विमान के साथ इंजन का इंटीग्रेशन और फ्लाइट टेस्ट होंगे। इन टेस्टों में विमान की रफ्तार, मैन्यूवरेबिलिटी, और हथियार प्रणालियों की सटीकता की जांच होगी। सीईएमआईएलएसी यह सुनिश्चित करेगा कि इंजन और विमान अंतरराष्ट्रीय मानकों, जैसे मिलिट्री स्टैंडर्ड (MIL-STD), को पूरा करते हैं। इस प्रक्रिया में एक-दो साल का समय लग सकता है, जिसके बाद तेजस मार्क-2 का बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू होगा।

Tejas Mk-2 Rollout: जानें कितना ताकतवर है जीई एफ-414 इंजन

तेजस मार्क-2 में लगने वाला जीई एफ-414 इंजन एक ट्विन-स्पूल, लो-बायपास टर्बोफैन इंजन है। यह इंजन 98 किलोन्यूटन का थ्रस्ट पैदा करता है, जो तेजस मार्क-1 के जीई एफ-404 इंजन (84 किलोन्यूटन) की तुलना में अधिक शक्तिशाली है। यह इंजन विमान को 2,385 किलोमीटर प्रति घंटा (मैक 1.8) की अधिकतम रफ्तार देता है। इसकी मदद से तेजस मार्क-2 2,500 किलोमीटर की रेंज और 1,500 किलोमीटर की कॉम्बैट रेंज हासिल कर सकता है। यह इंजन विमान को 56,758 फीट की ऊंचाई तक ले जाने में सक्षम है। जीई एफ-414 को कम रखरखाव लागत, और आधुनिक युद्ध की जरूरतों के लिए डिजाइन किया गया है। यह इंजन पहले से ही अमेरिकी नौसेना के एफ/ए-18ई/एफ सुपर हॉर्नेट और स्वीडन के साब जेएएस 39 ग्रिपेन जैसे विमानों में इस्तेमाल हो रहा है।

Tejas Mk-2 Rollout: तेजस मार्क-2 की खूबियां

तेजस मार्क-2, तेजस मार्क-1 और मार्क-1ए का एडवांस और ज्यादा ताकतवर वर्जन है। इसे 4.5 पीढ़ी का मल्टी-रोल सुपरसोनिक लड़ाकू विमान कहा जा रहा है। यह हवा से हवा और हवा से जमीन दोनों तरह के मिशन अंजाम देने में सक्षम होगा। इस विमान का आकार मार्क-1ए से बड़ा है। इसकी लंबाई करीब 47 फीट, विंगस्पैन 27 फीट और ऊंचाई 15 फीट रखी गई है। इसका अधिकतम टेकऑफ वजन 17,500 किलोग्राम तक होगा। तेजस मार्क-2 लगभग 6,500 किलोग्राम का पेलोड लेकर उड़ान भर सकेगा। इसमें 13 हार्ड पॉइंट होंगे जिन पर मिसाइल, बम और ईंधन टैंक लगाए जा सकते हैं।

Tejas Mk-2 Rollout: एडवांस रडार और एवियोनिक्स

तेजस मार्क-2 में स्वदेश में बना उत्तम AESA रडार लगाया जाएगा। यह रडार 150-160 किलोमीटर की दूरी से दुश्मन के विमानों और जमीनी लक्ष्यों का पता लगाने में सक्षम होगा। इसके साथ ही, इसमें आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम, डिजिटल फ्लाई-बाय-वायर सिस्टम और ग्लास कॉकपिट दिया जाएगा। कॉकपिट नाइट विजन गॉगल्स के अनुरूप होगा, जिससे पायलट रात में भी ऑपरेशन को अंजाम दे सकेगा। एवियोनिक्स पैकेज को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि विमान किसी भी इलेक्ट्रॉनिक जामिंग या साइबर हमले के दौरान भी सुरक्षित तरीके से काम कर सके।

लगा सकेंगे ये हथियार

तेजस मार्क-2 की हथियार क्षमता इसे और भी घातक बनाती है। इसमें हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलें जैसे मेटियोर, असराम, मिका और स्वदेशी एस्ट्रा मिसाइल लगाई जा सकेंगी। इसके अलावा, हवा से जमीन पर मार करने वाली मिसाइलों में ब्रह्मोस-एनजी, स्टॉर्म शैडो और DRDO की लंबी दूरी की क्रूज मिसाइल शामिल होगी।

इसमें एंटी-रेडिएशन मिसाइल रुद्रम 1, 2 और 3 भी इंटीग्रेट की जाएंगी, जो दुश्मन के राडार और एयर डिफेंस सिस्टम को नष्ट करने में सक्षम होंगी। इसके अलावा, विमान स्मार्ट प्रिसिजन गाइडेड बम जैसे स्पाइस और डीआरडीओ के ग्लाइड बम भी ले जा सकेगा।

Tejas Mk-1A Price Hike: अब 97 नए तेजस मार्क-1ए को महंगे दामों पर बेचेगी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड! जानें HAL ने क्यों बढ़ाईं कीमतें?

New 97 Tejas Mk-1A Price Hike by Rs 102 Crore by HAL

Tejas Mk-1A Price Hike: भारतीय वायुसेना को मिलने वाले स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस तेजस मार्क-1ए फाइटर जेट अब पहले से महंगे हो गए हैं। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के वरिष्ठ सूत्रों ने पुष्टि की है कि नए करार में तेजस की कीमत में लगभग 17.6 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। 2021 में हुए पिछले सौदे में एक विमान की औसत कीमत करीब 578 करोड़ रुपये थी, जबकि अब यह बढ़कर लगभग 680 करोड़ रुपये प्रति एयरक्राफ्ट हो गई है। तेजस की कीमतों में हुई बढ़ोतरी के पीछे कई वजहें बताई जा रही हैं।

LCA Tejas Mk-1A Delay: तेजस की डिलीवरी में देरी पर एक्टिव हुई सरकार, क्या प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए अपनाया जाएगा पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल?

Tejas Mk-1A Price Hike: वायुसेना को मिलेगा 97 नए तेजस तेजस मार्क-1ए का बेड़ा

हाल ही में 19 अगस्त को सरकार ने भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ाने के लिए 97 नए तेजस मार्क-1A (मार्क वन अल्फा) फाइटर जेट्स का ऑर्डर दिया था। यह डील करीब 62,000 करोड़ रुपये की है और इसे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड तैयार करेगी। इस सौदे की पुष्टि 21 अगस्त 2025 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी की।

इससे पहले 2021 में वायुसेना ने 83 तेजस Mk-1A का ऑर्डर दिया था जिसकी कीमत करीब 48,000 करोड़ रुपये थी। यानी अब तक कुल 180 तेजस Mk-1A का ऑर्डर हो चुका है। ये विमान धीरे-धीरे भारतीय वायुसेना के पुराने मिग-21 जेट्स की जगह लेंगे।

Tejas Mk-1A Price Hike: एचएएल सूत्रों ने की बढ़ी हुईं कीमतों की पुष्टि

एचएएल के वरिष्ठ सूत्रों ने रक्षा समाचार को इस बात की पुष्टि की है कि नए करार में तेजस Mk-1A की प्रति विमान लागत पहले के मुकाबले बढ़ गई है। 2021 में हुए करार के मुताबिक एक विमान की औसत कीमत करीब 578 करोड़ रुपये थी। अब नए करार में यह बढ़कर लगभग 680 करोड़ रुपये प्रति एयरक्राफ्ट हो गई है।

इस तरह हर विमान की कीमत में करीब 102 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है। आंकड़ों के अनुसार, यह बढ़ोतरी लगभग 17.6 फीसदी है।

Tejas Mk-1A Price Hike: क्यों बढ़ी कीमतें

हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के सूत्रों ने बताया कि कीमतें बढ़ने के पीछे कई कारण गिनाए हैं। उन्होंने कहा कि कीमतों में यह इजाफा न केवल महंगाई और ग्लोबल सप्लाई चेन की दिक्कतों का नतीजा है, बल्कि नए तकनीकी अपग्रेड और आधुनिक रडार सिस्टम के शामिल होने की वजह से भी हुआ है।

उन्होंने पहला कारण गिनाते हुए कहा कि ग्लोबल महंगाई और सप्लाई चेन में बाधा बड़ी वजह रही है। 2021 के बाद से कच्चे माल, एवियोनिक्स और इलेक्ट्रॉनिक चिप्स की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। वहीं, कीमतों में बढ़ोतरी की वजह टेक्निकल अपग्रेड भी है। सूत्रों ने बताया कि नए तेजस Mk-1A विमानों में कई अत्याधुनिक फीचर्स जोड़े जाएंगे। इनमें ‘उत्तम’ AESA रडार, एडवांस इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट, और आधुनिक हथियारों को इंटीग्रेट करने की क्षमता शामिल है।

वहीं तीसरा कारण उन्होंने सपोर्ट पैकेज को बताया। इसमें ग्राउंड सपोर्ट उपकरण, पायलट और तकनीकी स्टाफ की ट्रेनिंग और स्पेयर पार्ट्स शामिल हैं। ये सभी चीजों के चलते करार की कुल लागत में बढ़ोतरी हुई है।

Tejas Mk-1A Price Hike: अतिरिक्त इंजन खरीदने पर बातचीत

97 तेजस Mk-1A को उड़ाने के लिए अतिरिक्त GE-404 इंजनों की जरूरत होगी। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड और अमेरिकी कंपनी जीई एरोस्पेस के बीच 113 अतिरिक्त इंजन खरीदने की डील पर भी बातचीत चल रही है। इस इंजन डील की कीमत करीब 1 बिलियन डॉलर (लगभग 8,300 करोड़) बताई जा रही है। जल्द ही इस डील को अंतिम स्वरूप दे दिया जाएगा।

इससे पहले 2021 में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने 99 इंजन का ऑर्डर दिया था। मार्च 2025 तक जीई ने पहला इंजन डिलीवर भी कर दिया है। अनुमान है कि हर साल लगभग 20 इंजन भारत को दिए जाएंगे।

इसके साथ ही, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड और जीई के बीच GE-414 इंजन की जॉइंट प्रोडक्शन पर भी बातचीत हो रही है। ये इंजन तेजस Mk-2 के लिए होंगे और इसमें 80 फीसदी टेक्नोलॉजी ट्रांसफर होगा।

अक्टूबर में दो तेजस एमके1ए की डिलीवरी

हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के सूत्रों ने बताया कि दो साल की देरी के बाद अगले महीने अक्टूबर में दो तेजस Mk-1A वायुसेना को डिलीवर कर दिए जाएंगे। सूत्रों के मुताबिक, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड इस महीने तेजस मार्क-1A का फाइनल फायरिंग टेस्ट पूरा करेगा। इन परीक्षणों में देश में विकसित बियॉन्ड विजुअल रेंज (BVR) मिसाइल अस्त्र, शॉर्ट रेंज मिसाइल ASRAAM, ब्रह्मोस एनजी और लेजर-गाइडेड बम का फायरिंग टेस्ट किया जाएगा। परीक्षण सफल रहने पर ही विमान वायुसेना को सौंपे जाएंगे।

उन्होंने बताया कि जीई अगले साल मार्च 2026 तक 10 इंजन और फिर दिसंबर 2026 तक 20 और इंजन हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को डिलीवर करेगी।

इससे पहले रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने 30 अगस्त 2025 को एक डिफेंस कॉन्क्लेव में तेजस मार्क-1ए की डिलीवरी को लेकर कहा था कि लगभग 38 तेजस विमान पहले से ही सेवा में हैं, और 80 से अधिक का निर्माण चल रहा है। इनमें से 10 विमान तैयार हैं, और दो इंजन अब तक डिलीवर किए जा चुके हैं। उम्मीद है कि इनमें से पहले दो विमान सितंबर 2025 के आखिर तक डिलीवर कर दिए जाएंगे।

उन्होंने कहा था कि हम अगले महीने 97 अतिरिक्त तेजस मार्क-1ए विमानों के लिए कॉन्ट्रैक्ट पर दस्तखत करेंगे, जिसकी कीमत 67,000 करोड़ रुपये से अधिक होगी।

वायुसेना की स्क्वॉड्रन स्ट्रेंथ

भारतीय वायुसेना चीफ एयर चीफ मार्शल एपी सिंह पहले ही कह चुके हैं कि वायुसेना को हर साल कम से कम 35-40 नए फाइटर जेट्स की जरूरत है। इस समय वायुसेना के पास केवल 31 स्क्वॉड्रन हैं।

26 सितंबर को मिग-21 के दो स्क्वॉड्रन रिटायर होने के बाद यह संख्या घटकर 29 स्क्वॉड्रन रह जाएगी। जबकि टू-फ्रंट वॉर की संभावना (पाकिस्तान और चीन) को देखते हुए वायुसेना के पास 42 स्क्वॉड्रन होना जरूरी माना गया है।

60 फीसदी स्वदेशी कंपोनेंट

तेजस मार्क-1ए कार्यक्रम में 60 फीसदी से अधिक कंपोनेंट भारत में बने हैं। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के साथ-साथ कई निजी कंपनियां भी इसमें जुड़ी हैं। लार्सन एंड टुब्रो, डायनामेटिक टेक्नोलॉजीज और VEM टेक्नोलॉजीज जैसी कंपनियां इसमें अहम योगदान दे रही हैं।

तेजस मार्क-1ए की रफ्तार और रेंज

तेजस मार्क-1ए एक सुपरसोनिक फाइटर जेट है, जिसकी अधिकतम गति मैक 1.6 यानी करीब 2,200 किलोमीटर प्रति घंटा है। यह जेट हवा में तेजी से ऊंचाई पकड़ सकता है और दुश्मन के विमान या मिसाइल को बहुत कम समय में चुनौती देने में सक्षम है। इसकी कॉम्बैट रेंज लगभग 500 किलोमीटर तक है, जबकि फेरी रेंज यानी बिना हथियार के लंबी दूरी की उड़ान क्षमता 1,700 किलोमीटर से अधिक है।

तेजस मार्क-1ए आधुनिक हथियारों से लैस है। इसमें बियॉन्ड विजुअल रेंज (BVR) मिसाइल एस्ट्रा, ASRAAM जैसी शॉर्ट-रेंज एयर-टू-एयर मिसाइलें, लेजर-गाइडेड बम और प्रिसिजन-गाइडेड म्यूनिशन (PGM) लगाए जा सकते हैं। साथ ही, इसमें ब्रह्मोस-NG (नेक्स्ट जनरेशन) जैसी सुपरसोनिक मिसाइलें भी लगाई जा सकती हैं। तेजस पर 3,500 किलोग्राम तक का हथियार लोड किया जा सकता है, जिसमें एयर-टू-एयर, एयर-टू-ग्राउंड और एंटी-शिप मिसाइलें शामिल हैं।

रडार सिस्टम की बात करें, तेजस मार्क-1ए को उत्तम AESA रडार से लैस किया गया है, जिसे डीआरडीओ ने बनाया है। यह गैलियम नाइट्राइड (GaN) तकनीक पर आधारित है, जिससे यह दुश्मन के विमानों को लंबी दूरी से ट्रैक और टारगेट करने में सक्षम है। AESA रडार एक साथ कई लक्ष्यों पर नज़र रख सकता है और इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग से भी बचाता है। इसके अलावा, विमान में एडवांस इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट है, जो दुश्मन के रडार और मिसाइल गाइडेंस को चकमा दे सकता है।

तेजस मार्क-1ए का डिजाइन हल्का और एयरोडायनामिक है, जिससे इसे एजिलिटी मिलती है। इसका फ्लाई-बाय-वायर सिस्टम इसे बेहद स्थिर और सुरक्षित बनाता है। इसके साथ ही इसमें नाइट विजन कंपैटिबल ग्लास कॉकपिट, हेलमेट-माउंटेड डिस्प्ले (HMD) और मल्टी-फंक्शनल डिस्प्ले (MFDs) लगे हैं, जिससे पायलट को मिशन के दौरान तुरंत जानकारी मिलती है।