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Operation Sindoor: भारत ने क्यों चुनीं पाकिस्तान में ये नौ खास साइटें? स्कैल्प क्रूज मिसाइलों और हैमर बमों ने मचाया कहर

Operation Sindoor: Why India Chose These 9 Specific Sites in Pakistan

Operation Sindoor: भारत ने “ऑपरेशन सिंदूर” के तहत 7 मई 2025 को पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओके) में नौ आतंकी ठिकानों पर सटीक मिसाइल हमले किए। ये हमले 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में थे, जिसमें 26 लोग मारे गए थे। साथ ही, यह कार्रवाई 2001 के संसद हमले, 2008 के मुंबई हमले, 2016 के उरी हमले, और 2019 के पुलवामा हमले जैसे पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादी कृत्यों के खिलाफ थी। भारतीय सेना और वायुसेना ने इन हमलों को 25 मिनट के भीतर अंजाम दिया। भारत ने इन नौ ठिकानों को सावधानीपूर्वक चुना, जो आतंकी संगठनों के प्रमुख केंद्र थे। आइए, समझते हैं कि इन ठिकानों का चयन क्यों हुआ और यह ऑपरेशन भारत की आतंकवाद विरोधी रणनीति का हिस्सा कैसे बना।

Operation Sindoor: स्कैल्प क्रूज मिसाइलों और हैमर बमों ने मचाया कहर

ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय वायुसेना ने राफेल लड़ाकू विमानों और स्कैल्प क्रूज मिसाइलों का इस्तेमाल किया। 24 मिसाइलें 25 मिनट (1:05 बजे से 1:30 बजे) के भीतर नौ ठिकानों पर गिरीं। इनमें चार ठिकाने पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में (बहावलपुर, मुरीदके, सियालकोट, और रावलपिंडी) और पांच पीओके में (मुजफ्फराबाद, कोटली, बाघ, भिंबर, और चकस्वारी) थे। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि इन हमलों में 70 से अधिक आतंकी मारे गए और 60 से ज्यादा घायल हुए। भारत ने तुरंत सैटेलाइट तस्वीरें, ड्रोन फुटेज, और एक 1 मिनट 40 सेकंड का वीडियो भी जाारी किया, जिसमें इन ठिकानों की गतिविधियां और हमलों का असर दिखाया गया।

स्कैल्प (SCALP) क्रूज मिसाइलों की बात करें, तो इन्हें स्टॉर्म शैडो के नाम से भी जाना जाता है। इसकी रेंज 250 किलोमीटर से अधिक है, और यह रात में और किसी भी मौसम में सटीक हमले करने में सक्षम है। इसका इस्तेमाल बहावलपुर और मुरीदके जैसे आतंकी ठिकानों को नष्ट करने के लिए किया गया।

वहीं, हैमर (HAMMER) प्रेसिजन-गाइडेड स्मार्ट बम है, जिसकी रेंज 50-70 किलोमीटर है। हैमर (Highly Agile Modular Munition Extended Range) का इस्तेमाल आतंकी प्रशिक्षण केंद्रों और बहुमंजिला इमारतों को निशाना बनाने के लिए किया गया, जहां जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के नेता मौजूद थे।

मरकज सुब्हान अल्लाह, बहावलपुर (पंजाब, पाकिस्तान)

भारत ने इन आतंकी ठिकानों को उनकी आतंकी गतिविधियों, खुफिया जानकारी, और रणनीतिक महत्व के आधार पर चुना। प्रत्येक ठिकाना आतंकवाद के नेटवर्क में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा था। मरकज सुब्हान अल्लाह की बात करें, तो यह जैश-ए-मोहम्मद (JeM) का मुख्यालय है, जो 2000 में मौलाना मसूद अजहर ने बनाया था। यह अंतरराष्ट्रीय सीमा से 100 किलोमीटर दूर है। यह 10 एकड़ में फैला एक मजबूत परिसर है, जिसमें प्रशिक्षण सुविधाएं, हथियार डिपो, और आवासीय क्षेत्र शामिल हैं। 2019 के पुलवामा हमले (40 सीआरपीएफ जवान शहीद) और 2016 के उरी हमले (19 जवान शहीद) की योजना यहीं बनी थी। खुफिया जानकारी के अनुसार, पहलगाम हमले के लिए आतंकियों को यहीं से निर्देश और हथियार मिले थे। यह जैश का सबसे बड़ा प्रशिक्षण और कमांड सेंटर है। इसे नष्ट करने से संगठन की भर्ती और हमले की योजना बनाने की क्षमता को गहरा नुकसान पहुंचेगा। यहां पर हमला रात 01:12 बजे किया गया।

मरकज तैबा, मुरीदके (पंजाब, पाकिस्तान)

लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का यह प्रमुख केंद्र 200 एकड़ में फैला है, जिसमें स्कूल, मस्जिद, और प्रशिक्षण शिविर शामिल हैं। यह लाहौर से 30 किलोमीटर दूर है। 2008 के मुंबई हमले (166 मारे गए) के आतंकी यहीं प्रशिक्षित हुए थे। यह केंद्र आत्मघाती हमलावरों को प्रशिक्षण, हथियार निर्माण, और भारत में घुसपैठ की योजना बनाता है। पहलगाम हमले में इसकी भूमिका की जांच चल रही थी। यह लश्कर का सबसे महत्वपूर्ण ठिकाना है, जो भारत के खिलाफ लंबे समय से आतंकी गतिविधियों का केंद्र रहा है। यहां पर हमला रात 01:06 से 01:10 के बीच किया गया।

महमूना जोया कैंप, सियालकोट (पंजाब, पाकिस्तान)

हिजबुल मुजाहिदीन का यह कैंप अंतरराष्ट्रीय सीमा से केवल 12 किलोमीटर दूर है। यह छोटा लेकिन सक्रिय प्रशिक्षण केंद्र है, जो जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को बढ़ावा देता है। 2016 के पठानकोट एयरबेस हमले और मार्च 2025 में चार सैनिकों की हत्या की योजना यहीं बनी थी। यह घुसपैठ और हमलों के लिए लॉजिस्टिक सपोर्ट देता है। इसकी सीमा से निकटता और जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को फिर से आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने के चलते इसे निशाना बनाना जरूरी समझा गया। यहां पर हमला रात 01:15 बजे बजे किया गया।

सय्यदना बिलाल कैंप, मुजफ्फराबाद (पीओके)

जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ा यह कैंप नियंत्रण रेखा (एलओसी) से 10 किलोमीटर की दूरी पर है। यह आत्मघाती हमलावरों और स्नाइपर्स को प्रशिक्षण देता है। पहलगाम हमले के लिए आतंकियों को यहीं प्रशिक्षित किया गया था। यह भारत के खिलाफ सशस्त्र हमलों की योजना बनाता है। इसकी रणनीतिक स्थिति और पहलगाम हमले में प्रत्यक्ष भूमिका ने इसे प्राथमिक लक्ष्य बनाया। यहां पर हमला रात 01:17 बजे किया गया।

अब्बास आतंकी कैंप, कोटली (पीओके)

लश्कर-ए-तैयबा का यह प्रशिक्षण केंद्र 50 से अधिक आतंकियों को प्रशिक्षण देता है। यह पहाड़ी इलाके में स्थित है, जिसके चलते आतंकियों को यहां छिपने की जगह मिलती है। यह आत्मघाती हमलावरों और बम विशेषज्ञों को प्रशिक्षित करता है। पहलगाम हमले के बाद इसकी गतिविधियां बढ़ी थीं। इसकी आतंकी प्रशिक्षण क्षमता और एलओसी से 13 किलोमीटर की निकटता ने इसे खतरा बनाया। यहां पर हमला रात 01:04 बजे किया गया।

बाघ (पीओके)

हिजबुल मुजाहिदीन और लश्कर का संयुक्त केंद्र, जो घुसपैठ और हथियार तस्करी का अड्डा है। यह एक गुप्त परिसर है, जिसमें भूमिगत बंकर हैं। यह भारत में आतंकी हमलों के लिए लॉजिस्टिक और हथियार सप्लाई करता है। पहलगाम हमले से पहले इसकी गतिविधियां नोट की गई थीं। इसकी भूमिगत सुविधाएं और घुसपैठ में भूमिका के चलते इसे निशाना बनाना जरूरी समझा गया।

भिंबर (पीओके)

जैश और लश्कर का यह संयुक्त केंद्र साइबर युद्ध और प्रचार अभियान चलाता है। यह प्रशिक्षण और कमांड सेंटर के रूप में काम करता है। पहलगाम हमले से पहले यहां से सोशल मीडिया के जरिए प्रचार और निर्देश दिए गए थे। इसकी साइबर युद्ध क्षमता और आतंकी गतिविधियों को समन्वय करने की भूमिका के चलते यह भारतीय मिसाइलों का का निशाना बना। यहां पर हमला रात 01:19 बजे किया गया।

चकस्वारी (पीओके)

यह आतंकियों के लिए हथियार डिपो और लॉजिस्टिक हब है, जो पहाड़ी इलाके में छिपा है। पहलगाम हमले के लिए विस्फोटक और हथियार यहीं से सप्लाई हुए थे। यह भारत में हमलों के लिए सप्लाई चेन का हिस्सा था। भारत में भविष्य में आतंकी हमले न हों, इसके लिए सप्लाई चेन को तोड़ना आतंकी नेटवर्क को कमजोर करने के लिए यहां हमला करना जरूरी था। यहां पर हमला रात 01:22 बजे हुआ।

Operation Sindoor vs Balakot Strike: बालाकोट से क्या सीखा भारत ने, ऑपरेशन सिंदूर में इन बातों का रखा ध्यान, मिला फायदा

गुलपुर (पीओके)

लश्कर-ए-तैयबा का यह कमांड सेंटर भारत में हमलों की योजना बनाता है। यह एक गुप्त सुविधा है, जिसमें संचार और प्रशिक्षण केंद्र हैं। पहलगाम हमले में इसकी संभावित भूमिका की जांच चल रही थी। यह भारत के खिलाफ दीर्घकालिक योजनाओं का हिस्सा था। इसकी कमांड और नियंत्रण क्षमता ने इसे भारत के लिए खतरा बनाया। यहां पर हमला रात 01:25 बजे किया गया।

Operation Sindoor vs Balakot Strike: बालाकोट से क्या सीखा भारत ने, ऑपरेशन सिंदूर में इन बातों का रखा ध्यान, मिला फायदा

Operation Sindoor vs Balakot Strike: Lessons Learned, Precision Delivered

Operation Sindoor vs Balakot Strike: भारत ने बुधवार को “ऑपरेशन सिंदूर” के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओके) में 9 आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए। यह ऑपरेशन 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जवाब था, जिसमें 26 लोग मारे गए थे। साथ ही, यह पिछले दो दशकों के पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद, जैसे संसद हमला (2001), मुंबई हमला (2008), उरी (2016), और पुलवामा (2019) के खिलाफ भारत की निर्णायक कार्रवाई थी। लेकिन यह ऑपरेशन 2019 की बालाकोट एयर स्ट्राइक से कई मायनों में अलग है। बालाकोट से मिली सीख ने ऑपरेशन सिंदूर को और प्रभावी और सटीक बनाया। आइए, जानते हैं कि दोनों में क्या अंतर है और भारत ने बालाकोट से क्या सबक लिया?

Operation Sindoor vs Balakot Strike: बालाकोट स्ट्राइक

14 फरवरी 2019 को पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर आत्मघाती हमला हुआ था, जिसमें 40 जवान शहीद हुए थे। इसके जवाब में 26 फरवरी 2019 को भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में बालाकोट के जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के आतंकी प्रशिक्षण शिविर पर हवाई हमला किया। इस ऑपरेशन में मिराज-2000 लड़ाकू विमानों ने 1000 किलोग्राम के स्पाइस-2000 बमों का इस्तेमाल किया, जिससे जैश का शिविर तबाह हो गया। भारत ने दावा किया कि 300 से अधिक आतंकी मारे गए, हालांकि पाकिस्तान ने इसे खारिज किया।

बालाकोट स्ट्राइक ने दिखाया कि आतंकवाद के खिलाफ भारत जीरो टॉलरेंस नीति रखता है। यह पहली बार था जब भारतीय वायुसेना ने एलओसी को पार करके पाकिस्तान में घुसकर हमला किया। लेकिन इस ऑपरेशन में कुछ चुनौतियां भी सामने आईं, जिन्हें भारत ने ऑपरेशन सिंदूर में सुधारा।

ऑपरेशन सिंदूर

ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय वायुसेना ने राफेल, मिराज, मिग-29 औऱ जैगुआर लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल किया गया। इस हमले में स्कैल्प क्रूज मिसाइलों औऱ हैमर बमों का इस्तेमाल किया। बुधवार तड़के 1:44 बजे नौ आतंकी ठिकानों पर हमले किए गए, जिनमें बहावलपुर (जैश-ए-मोहम्मद का मुख्यालय) और मुरीदके (लश्कर-ए-तैयबा का आधार) शामिल थे। बहावलपुर को राफेल ने निशाना बनाया, तो बाकी आतंकी अड्डों को नेस्तानाबूद करने में मिराज, मिग-29 औऱ जैगुआर लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल किया गया।

Operation Sindoor vs Balakot Strike: Lessons Learned, Precision Delivered

विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बताया कि इन हमलों में 90 से अधिक आतंकी मारे गए और 60 से ज्यादा घायल हुए। हालांकि बालाकोट की तरह इस हमले में भी किसी भी पाकिस्तानी सैन्य ठिकाने को निशाना नहीं बनाया गया।

बालाकोट और ऑपरेशन सिंदूर में क्या है अंतर

बालाकोट में मिराज-2000 विमानों ने एक बड़े आतंकी शिविर को निशाना बनाया, लेकिन हमले के बाद पाकिस्तान ने नुकसान को कम करके दिखाया। जबकि ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने 9 ठिकानों को निशाना बनाया। स्कैल्प मिसाइलों ने छोटे-छोटे ठिकानों को भी सटीकता से नष्ट किया। इसके अलावा भारत ने इस बार ड्रोन और सैटेलाइट इमेजरी का भी बेहतर इस्तेमाल किया, जिससे खुफिया जानकारी अधिक विश्वसनीय थी।

बालाकोट स्ट्राइक के बाद भारत ने अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस जैसे देशों को जानकारी दी, लेकिन कुछ देशों ने इसकी आलोचना की थी। लेकिन ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने पहले से ही वैश्विक समुदाय को भरोसे में लिया। हमले के तुरंत बाद अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, चीन और सऊदी अरब को कार्रवाई की जानकारी दी गई। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के 25 अप्रैल के बयान, जिसमें आतंकवादियों को जवाबदेह ठहराने की बात थी, को भारत ने अपने पक्ष में इस्तेमाल किया।

इसके अलावा सबसे बड़ी बात यह कि बालाकोट स्ट्राइक का उद्देश्य आतंकियों को चेतावनी देना था, लेकिन इसका दायरा सीमित था। ऑपरेशन सिंदूर ने न केवल पहलगाम हमले का जवाब दिया, बल्कि दो दशकों के आतंकवाद का हिसाब भी लिया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखाए गए 1 मिनट 40 सेकंड के वीडियो ने 2001 से 2025 तक के हमलों को सबसे सामने रखा, जिससे भारत ने वैश्विक स्तर पर पाकिस्तान को बेनकाब किया।

इस बार तुरंत सामने रखे सबूत

बालाकोट के बाद सबूतों की मांग ने सरकार को बैकफुट पर ला दिया था। विपक्ष ने सवाल उठाए, और पाकिस्तान ने प्रचार किया कि कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ। लेकिन ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने पहले ही सबूत तैयार रखे। हमले के कुछ घंटों बाद ही प्रेस विज्ञप्ति और सुबह प्रेस कॉन्फ्रेंस में सैटेलाइट तस्वीरें और वीडियो पेश किए गए। इससे न केवल विपक्ष के सवालों को ऑपरेशन की सफलता पर सवाल उठाने का मौका ही नहीं मिला, साथ ही वीडियो और फोटोग्राफ के जरिए पाकिस्तान के झूठ को भी बेनकाब किया गया।

सटीक खुफिया जानकारी

बालाकोट में खुफिया जानकारी पर कुछ सवाल उठे थे, क्योंकि पाकिस्तान ने नुकसान को कम करके दिखाया था। साथ ही उस समय हमारे पास सीधे विजुअल्स नहीं थे। जिससे पाकिस्तान स्ट्राइक की सफलता पर सवाल उठा रहा था। लेकिन ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने राष्ट्रीय तकनीकी अनुसंधान संगठन (एनटीआरओ), रॉ, और सैन्य खुफिया एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय किया। सैटेलाइट इमेज और ड्रोन ने ठिकानों की सटीक जानकारी दी, जिससे हमले अधिक प्रभावी हुए।

मीडिया और जनता को विश्वास में लिया

बालाकोट में सबूतों की देरी ने विपक्ष और पाकिस्तान को सवाल उठाने का मौका दिया। बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद भारत सरकार की ओर से आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस 26 फरवरी 2019 को दोपहर में हुई थी। प्रेस कॉन्फ्रेंस में विदेश सचिव विजय गोखले ने स्ट्राइक के बारे में जानकारी दी थी, लेकिन सार्वजनिक रूप से कोई ठोस सबूत, जैसे सैटेलाइट तस्वीरें, ड्रोन फुटेज, या वीडियो, नहीं दिखाए थे। गोखले ने बताया था कि भारतीय वायुसेना ने खैबर पख्तूनख्वा के बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी शिविर पर सटीक हमला किया, जिसमें “बड़ी संख्या में आतंकी, प्रशिक्षक, और कमांडर” मारे गए। उन्होंने यह भी कहा कि यह कार्रवाई खुफिया जानकारी के आधार पर की गई थी, जिसके अनुसार जैश भारत में और हमले की योजना बना रहा था। हालांकि, प्रेस कॉन्फ्रेंस में केवल मौखिक बयान दिए गए, और कोई दृश्य सबूत (जैसे तस्वीरें या वीडियो) साझा नहीं किए गए। इसकी वजह से पाकिस्तान और भारत के कुछ विपक्षी दलों ने सबूतों की मांग की थी।

वहीं, ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने तथ्यों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की। वीडियो और खुफिया जानकारी साझा करके सरकार ने जनता का भरोसा जीता।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ने बालाकोट की कमियों को सुधारकर ऑपरेशन सिंदूर को एक मॉडल ऑपरेशन बनाया। रक्षा विशेषज्ञ राहुल बेदी ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर भारत की सैन्य और कूटनीतिक परिपक्वता को दर्शाता है। यह दिखाता है कि भारत अब पहले से ज्यादा तैयार और आत्मविश्वास से भरा है।”

Operation Sindoor: 20 साल के जख्मों का एक जवाब, आतंक की जड़ें हिलाकर रख दीं!

ऑपरेशन सिंदूर को देश भर में समर्थन मिला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “हमारे सैनिकों ने आतंकियों को उनके घर में घुसकर सजा दी। यह भारत की नई ताकत है।” कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने भी सेना की कार्रवाई की सराहना की। खड़गे ने कहा, “आतंकवाद के खिलाफ भारत एकजुट है।”

Operation Sindoor: 20 साल के जख्मों का एक जवाब, आतंक की जड़ें हिलाकर रख दीं!

Operation Sindoor: A Reckoning for 20 Years of Pain, Striking Terror at Its Roots!

Operation Sindoor: भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच भारतीय सशस्त्र बलों ने बुधवार को “ऑपरेशन सिंदूर” के तहत न केवल पहलगाम आतंकी हमले का बदला लिया, बल्कि पिछले दो दशकों से पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ भी निर्णायक कार्रवाई की।

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भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच भारतीय सशस्त्र बलों ने बुधवार को “ऑपरेशन सिंदूर” के तहत न केवल पहलगाम आतंकी हमले का बदला लिया, बल्कि पिछले दो दशकों से पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ भी निर्णायक कार्रवाई की। भारत ने वर्षों तक संयम बरता, लेकिन 22 अप्रैल 2025 को हुए पहलगाम नरसंहार के बाद देश की सहनशक्ति जवाब दे गई।

Operation Sindoor: दो दशकों का इंतजार, एक जवाब

इस ऑपरेशन में 2001 के संसद हमले, 2002 के अक्षरधाम हमले, 2008 के मुंबई हमले, 2016 के उरी हमले, 2019 के पुलवामा हमले और हाल ही में 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जवाब दिया गया। यह अभियान भारत की आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति का प्रतीक है और पाकिस्तान को कड़ा संदेश देता है कि भारत अब और बर्दाश्त नहीं करेगा।

22 अप्रैल को लश्कर-ए-तैयबा की शाखा The Resistance Force (TRF) ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में श्रद्धालुओं पर हमला किया, जिसमें 26 निर्दोष लोगों की जान गई। पहले TRF ने इस हमले की जिम्मेदारी ली, फिर सोशल मीडिया अकाउंट ‘हैक’ होने का बहाना बनाकर बयान वापस ले लिया।

विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने नेशनल मीडिया सेंटर में आयोजित प्रेस वार्ता में स्पष्ट शब्दों में कहा, “भारत ने अपने आत्मरक्षा के अधिकार का प्रयोग करते हुए यह कार्रवाई की। ये स्ट्राइक न केवल जवाबी कार्रवाई थी, बल्कि आतंक के नेटवर्क को नष्ट करने और भविष्य के हमलों को रोकने की भी आवश्यकता थी।” उन्होंने बताया कि खुफिया इनपुट से संकेत मिला था कि पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन भारत पर और हमले की योजना बना रहे थे।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारतीय सेना ने 1 मिनट 40 सेकंड का एक वीडियो दिखाया, जिसमें 2001 से अब तक के प्रमुख आतंकी हमलों को दर्शाया गया।

  • 2001 संसद हमला: जैश-ए-मोहम्मद ने भारत की संसद पर हमला किया, जिसमें 9 लोग मारे गए।
  • 2002 अक्षरधाम हमला: आतंकियों ने गुजरात के मंदिर पर हमला किया, जिसमें 30 से अधिक लोग मारे गए।
  • 2008 मुंबई हमला: लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों ने 60 घंटे तक मुंबई को बंधक बनाए रखा, जिसमें 166 लोग मारे गए।
  • 2016 उरी हमला: जैश-ए-मोहम्मद ने उरी में सेना के शिविर पर हमला किया, जिसमें 19 जवान शहीद हुए
  • 2019 पुलवामा हमला: जैश के आत्मघाती हमलावर ने सीआरपीएफ के काफिले पर हमला किया, जिसमें 40 जवान शहीद हुए।

इन हमलों ने भारत को गहरे जख्म दिए, और हर बार जांच में पाकिस्तान का हाथ सामने आया। मिस्री ने कहा, “पाकिस्तान ने हमेशा आतंकवाद को बढ़ावा दिया है, और पहलगाम हमला इसका ताजा उदाहरण है।”

नौ आतंकी ठिकाने तबाह

ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारतीय सशस्त्र बलों ने बुधवार तड़के 1:44 बजे पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओके) में नौ आतंकी ठिकानों पर सटीक मिसाइल हमले किए। इनमें बहावलपुर, मुरीदके, सियालकोट, कोटली और मुज़फ़्फराबाद के लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े ट्रेनिंग सेंटर और लॉन्‍च पैड शामिल थे। रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि यह हमला “केंद्रित, संयमित और उकसाने वाले नहीं थे, जिसमें किसी भी पाकिस्तानी सैन्य ठिकाने को निशाना नहीं बनाया गया।

भारतीय वायुसेना के राफेल और SCALP स्टील्थ मिसाइल का इस्तेमाल करते हुए बहावलपुर में मौजूद जैश के मुख्यालय मरकज सुभान अल्लाह को 560 किलोमीटर दूर से ध्वस्त किया। यह मिसाइल जीपीएस जैमिंग को मात देकर 100 फीट से भी कम ऊंचाई पर सटीक निशाना लगाने में सक्षम है।

वहीं भारतीय सेना ने ड्रोन, स्मार्ट म्यूनिशन और सतह से सतह पर मार करने वाले हथियारों की मदद से सात ठिकानों को निशाना बनाया।

पाकिस्तानी सेना की चुप्पी

ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय वायुसेना ने राफेल और मिराज लड़ाकू विमानों और स्कैल्प क्रूज मिसाइलों का इस्तेमाल किया। इन हमलों में 70 से अधिक आतंकवादी मारे गए और 60 से ज्यादा घायल हुए। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार बहावलपुर में हुए हमले में जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अज़हर के कई परिजनों की मौत हुई है। पाकिस्तानी मीडिया ने 14 मौतों की पुष्टि की है, जबकि मसूद अज़हर ने खुद 10 परिजनों के मारे जाने की बात मानी है।

पाकिस्तानी सरकार ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है, न ही आतंकियों के खिलाफ कोई कार्रवाई की है। विदेश सचिव मिस्री ने कहा, “पाकिस्तान की ज़मीन से आतंकवाद को प्रायोजित करने और कार्रवाई न करने की उसकी नीति अब उजागर हो चुकी है।”

Operation Zafran: बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद भारत ने शुरू किया था ये टॉप-सीक्रेट मिलिट्री ऑपरेशन, पाकिस्तान को कर दिया था नजरबंद 

महिला अधिकारी फ्रंटफुट पर

इस ऑपरेशन की जानकारी प्रेस को देने के लिए भारतीय सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी और वायुसेना की विंग कमांडर व्योमिका सिंह को आगे लाया गया। यह पहली बार है जब इतनी बड़ी सैन्य कार्रवाई पर महिला अधिकारियों ने प्रेस ब्रीफिंग की और दुनिया को बताया कि भारत आतंकवाद के खिलाफ कितना गंभीर है।

India-Pak Tensions: पाकिस्तान को अपनी ताकत दिखाएगी भारतीय वायुसेना, सीमा पर तनाव के बीच राजस्थान में होगी मेगा एयर ड्रिल

India-Pak Tensions: IAF to Showcase Strength in Rajasthan Air Drill

India-Pak Tensions: उत्तर प्रदेश में गंगा एक्सप्रेस-वे पर अपनी ताकत दिखाने के बाद भारतीय वायुसेना (आईएएफ) बुधवार को राजस्थान में पाकिस्तान के साथ लगने वाली अंतरराष्ट्रीय सीमा पर एक बड़े पैमाने पर सैन्य अभ्यास करने जा रही है। मंगलवार शाम को जारी नोटिस टू एयरमेन (NOTAM- Notice to Airmen) के अनुसार, यह अभ्यास बुधवार रात 9:30 बजे शुरू होगा और गुरुवार तड़के 3 बजे तक चलेगा। यह कवायद ऐसे समय में हो रही है, जब पिछले महीने पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर है। इस हमले में 26 लोग मारे गए थे, जिनमें ज्यादातर पर्यटक थे।

India-Pak Tensions: भारत का कड़ा रुख

पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के बाद भारत (India-Pak Tensions) ने कड़ा रुख अपनाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमले के दोषियों और इसके पीछे के षड्यंत्रकारियों को “धरती के किसी भी कोने में ढूंढकर सजा देने” की कसम खाई है। उन्होंने मंगलवार को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल के साथ बैठक की, जिसमें सीमा पर सुरक्षा और संभावित जवाबी कार्रवाई पर चर्चा हुई। सूत्रों का कहना है कि यह सैन्य अभ्यास भारत की युद्धक तैयारियों को परखने और पाकिस्तान को साफ संदेश देने का हिस्सा है।

इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय (India-Pak Tensions) ने सभी राज्यों को बुधवार को सिविल डिफेंस ड्रिल करने के निर्देश दिए हैं। मंत्रालय ने “नए और जटिल खतरों” का हवाला देते हुए कहा कि देश को किसी भी आपात स्थिति के लिए तैयार रहना होगा। इस ड्रिल में हवाई हमले की चेतावनी, ब्लैकआउट उपाय, बंकरों की जांच, निकासी अभ्यास, संचार ड्रिल और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को छिपाने जैसे कई गतिविधियां शामिल होंगी।

क्या है यह सैन्य अभ्यास?

न्यूज एजेंसी एएनआई के हवाले से वायुसेना (India-Pak Tensions) के अधिकारियों ने बताया कि यह अभ्यास राजस्थान में अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास होगा। इसमें वायुसेना के सभी टॉप फाइटर जेट जैसे राफेल, मिराज 2000 और सुखोई-30 शामिल होंगे। NOTAM के अनुसार, यह कवायद 7 मई को दोपहर 3:30 बजे शुरू होगी और 8 मई को रात 9:30 बजे तक चलेगी। इस दौरान प्रभावित क्षेत्रों में हवाई क्षेत्र को प्रतिबंधित किया जाएगा।

अधिकारियों ने कहा कि यह अभ्यास नियमित ऑपरेशनल (India-Pak Tensions) तैयारियों का हिस्सा है, लेकिन मौजूदा तनाव के बीच इसका महत्व और बढ़ गया है। इस ड्रिल का उद्देश्य वायुसेना की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता, सामरिक युद्ध कौशल और सीमा पर किसी भी स्थिति से निपटने की तैयारी को परखना है। अभ्यास में कम ऊंचाई पर उड़ान, हवाई युद्धाभ्यास और लक्ष्य पर सटीक हमले जैसे कई ऑपरेशन शामिल होंगे।

भारत हर जवाब के लिए तैयार

यह अभ्यास भारत की सैन्य ताकत और उसकी रणनीतिक तैयारियों (India-Pak Tensions) का प्रदर्शन है। राजस्थान की सीमा पर होने वाला यह ड्रिल न केवल वायुसेना की ताकत को दर्शाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि भारत किसी भी आक्रामकता का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।

सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह अभ्यास पाकिस्तान (India-Pak Tensions) को यह संदेश देता है कि भारत न केवल अपनी सीमाओं की रक्षा करने में सक्षम है, बल्कि जरूरत पड़ने पर त्वरित और निर्णायक कार्रवाई भी कर सकता है। इसके अलावा, यह ड्रिल वायुसेना के पायलटों और ग्राउंड क्रू की दक्षता को और निखारने का अवसर प्रदान करेगी।

उत्तर प्रदेश में गंगा एक्सप्रेसवे पर वायुसेना की कवायद

हाल ही में, 2 मई 2025 को भारतीय वायुसेना ने उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में निर्माणाधीन गंगा एक्सप्रेसवे (India-Pak Tensions) पर एक और महत्वपूर्ण अभ्यास किया था। इस अभ्यास में वायुसेना ने 3.5 किलोमीटर लंबे हवाई पट्टी पर टेक-ऑफ और लैंडिंग का प्रदर्शन किया। इस ड्रिल का उद्देश्य युद्ध या राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान वैकल्पिक रनवे के रूप में इस एक्सप्रेसवे की क्षमता को परखना था।

इस अभ्यास में राफेल, जगुआर और मिराज जैसे एडंवास लड़ाकू और परिवहन विमानों (India-Pak Tensions) ने हिस्सा लिया था। यह भारत का पहला रोड रनवे है, जो दिन और रात दोनों समय लड़ाकू विमानों की लैंडिंग के लिए उपयुक्त है। इसके लिए उन्नत प्रकाश व्यवस्था और नेविगेशन सिस्टम लगाए गए थे। हवाई पट्टी के दोनों ओर 250 सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए थे।

गंगा एक्सप्रेसवे, जो मेरठ को प्रयागराज से जोड़ता है, 594 किलोमीटर लंबा है। इस अभ्यास के लिए वायुसेना ने हवाई पट्टी का ऑपरेशनल कंट्रोल अपने हाथ में लिया था, जिसमें उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (यूपीईआईडीए) के अधिकारियों ने सहयोग किया। यह हवाई पट्टी उत्तर प्रदेश के आगरा-लखनऊ, पूर्वांचल और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के बाद चौथा एक्सप्रेस-वे है, जिसे वायुसेना के ऑपरेशनल जरूरतों को देखते हुए डिजाइन किया गया है।

राष्ट्रीय स्तर पर सिविल डिफेंस ड्रिल

सैन्य अभ्यास के साथ-साथ, भारत बुधवार को राष्ट्रव्यापी सिविल डिफेंस ड्रिल (India-Pak Tensions) भी आयोजित करेगा। यह ड्रिल देश की शत्रुतापूर्ण हमलों से निपटने की तैयारियों का मूल्यांकन करेगी। इसमें गांव स्तर तक विभिन्न गतिविधियां शामिल होंगी, जैसे हवाई हमले की सायरन, ब्लैकआउट उपाय, बंकरों की जांच, निकासी अभ्यास और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को छिपाने की प्रक्रिया। यह ड्रिल नागरिकों और प्रशासन को आपात स्थिति में समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया के लिए तैयार करने में मदद करेगी।

India-Pakistan Tension: कराची में तुर्की वॉरशिप TCG Büyükada की एंट्री, भारत-पाक तनाव के बीच क्या है इस खास दौरे का मतलब?

सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के अभ्यास न केवल सैन्य बलों की दक्षता बढ़ाते हैं, बल्कि आम नागरिकों में भी सुरक्षा और विश्वास का भाव पैदा करते हैं। यह अभ्यास भारत की रक्षा नीति का हिस्सा है, जो न केवल रक्षात्मक, बल्कि जरूरत पड़ने पर आक्रामक रुख अपनाने की क्षमता को भी दर्शाता है।

Pinaka MBRL: पोखरण में गरजा ‘शिव का धनुष’, भारतीय सेना ने किया सफल परीक्षण, जानिए पाकिस्तान के लिए क्यों है खतरे की घंटी?

Indian Army Year Ender 2025
Pinaka MBRL

Pinaka MBRL: भारतीय सेना ने हाल ही में राजस्थान के पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में अपने स्वदेशी पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर (MBRL) सिस्टम का सफल फायरिंग टेस्ट किया। सूत्रों का कहना है कि आने वाले हफ्तों में एक और फायरिंग टेस्ट की योजना है। आइए जानते हैं कि आखिर क्या है पिनाका मिसाइल सिस्टम, इसकी ताकत क्या है, और पाकिस्तान क्यों इससे इतना डरा हुआ है?

Pinaka MBRL: क्या है पिनाका मिसाइल सिस्टम?

पिनाका (Pinaka MBRL) नाम भगवान शिव के पौराणिक धनुष से प्रेरित है। पिनाका भारतीय सेना के तोपखाने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। पिनाका को भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने विकसित किया है। यह एक मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम है जो 44 सेकंड में 72 रॉकेट दाग सकता है। हर एक रॉकेट करीब 100 किलो विस्फोटक ले जाने में सक्षम होता है। यह रॉकेट 60 किलोमीटर तक दुश्मन के ठिकानों को ध्वस्त कर सकता है। पिनाका का एडवांस वर्जन Mk-II ER अब 90 किलोमीटर तक मार कर सकता है, और आने वाले समय में इसके 120, 150, और 200 किलोमीटर रेंज वाले मॉडल विकसित किए जा रहे हैं।

120 किमी रेंज (Pinaka MBRL) का वेरिएंट मौजूदा 214 मिमी कैलिबर का होगा, जिसे पुराने लॉन्चरों से भी दागा जा सकता है। इसका डेवलपमेंट 2024 में शुरू हुआ, और पहला टेस्ट अक्टूबर 2025 में है। जबकि इसके 300 किमी रेंज वाला वेरिएंट काफी एडवांस है। जिसके लिए प्रारंभिक आवश्यकताएं तय की जा रही हैं। इसमें रैमजेट प्रोपल्सन टेक्नोलॉजी का उपयोग होगा, जिसे आईआईटी मद्रास के शोधकर्ता और डीजी आर्टिलरी रह चुके रिटायरर्ड लेफ्टिनेंट जनरल पी.आर. शंकर की टीम तैयार कर रही है।

इसमें लगा है जीसीएस सिस्टम

वहीं, पिनाका (Pinaka MBRL) बिल्कुल सटीक मार करता है। इसमें जीपीएस और इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम लगा हुआ है, जो इसे दुश्मन के ठिकानों को सटीक निशाना बनाने में मदद करता है। साथ ही आसपास के क्षेत्रों को नुकसान से बचाता है। यह सिस्टम भारत के डिजिटल बैटलफील्ड फ्रेमवर्क के साथ पूरी तरह से इंटीग्रेटेड है। यह ड्रोन, सैटेलाइट, रडार और दूसरे टोही उपकरणों के साथ मिलकर काम करता है, जिससे दुश्मन के अहम ठिकानों को फौरन नष्ट किया जा सकता है। इसमें इजरायल मिलिट्री इंडस्ट्रीज के साथ मिलकर DRDO ने पिनाका में ट्रैजेक्ट्री करेक्शन सिस्टम (TCS) जोड़ा है, जिससे इसकी सटीकता और बेहतर हुई है।

पिनाका को “शूट-एंड-स्कूट” के लिए डिज़ाइन किया गया है, यानी यह तेजी से हमला करके अपनी जगह बदल सकता है, जिससे दुश्मन के जवाबी हमले से बचा जा सकता है। पिनाका (Pinaka MBRL) चार मोड में काम करता है – ऑटोनॉमस, स्टैंडअलोन, रिमोट (200 मीटर की दूरी से नियंत्रण), और मैनुअल। यह इसे हर स्थिति में उपयोगी बनाता है।

पोखरण टेस्ट का मतलब

हालांकि पोखरण में पिनाका (Pinaka MBRL) का टेस्ट 30 मार्च 2025 को हुआ था। आगामी जून में एक और टेस्ट होगा, जो इसकी नई खूबियों को और दिखाएगा। इससे पहले DRDO ने नवंबर 2024 में गाइडेड पिनाका (Pinaka MBRL) रॉकेट के उड़ान परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए, जिसकी रेंज 75 किमी से अधिक है। इन परीक्षणों ने सटीकता, स्थिरता और एक साथ कई लक्ष्यों को निशाना बनाने की क्षमता को सत्यापित किया। यह सिस्टम अब भारतीय सेना में शामिल होने के लिए तैयार है।

बहुत कम लोगों को पता है कि पिनाका (Pinaka MBRL) का उपयोग कारगिल युद्ध (1999) में हुआ था। कारगिल युद्ध के दौरान पिनाका का विकास अंतिम चरण में था, और केवल दो लॉन्चरों का उपयोग 121 रॉकेट रेजिमेंट के तहत जून 1999 में परीक्षण के लिए किया गया था।

पाकिस्तान के लिए क्यों है पिनाका खतरनाक?

पिनाका (Pinaka MBRL) की ताकत और इसकी बढ़ती रेंज पाकिस्तान के लिए बड़ा खतरा है। भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा पर तनाव का पुराना इतिहास है। हाल ही में 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद सीमा पर टेंशन है। बता दें कि इस हमले में 26 लोग मारे गए थे। ऐसे में पिनाका जैसे हथियार भारत की रक्षा रणनीति को और मजबूत करते हैं।

युद्ध की स्थिति में भारतीय सेना पिनाका (Pinaka MBRL) से सीमा पार आतंकी लॉन्च पैड्स, गोला-बारूद के ठिकानों, कमांड पोस्ट और एयर डिफेंस यूनिट्स को मिनटों में नेस्तनाबूद कर सकती है। यही नहीं, इसमें जीपीएस-नेविगेशन बेस्ड सिस्टम होने की वजह से यह बेहद सटीक निशाना लगाता है, जिससे आम नागरिकों की क्षति से भी बचा जा सकता है। इसकी तेजी और सटीकता दुश्मन को जवाब देने का मौका ही नहीं देती। पिनाका का डिजाइन ऐसा है कि यह पहाड़ों, रेगिस्तान और मैदानी इलाकों में आसानी से काम कर सकता है। इसका तेज हमला और “शूट-एंड-स्कूट” क्षमता दुश्मन को जवाबी कार्रवाई का मौका नहीं देती।

वहीं, पाकिस्तान के पास इस तरह का कोई एडवांस मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर MBRL सिस्टम नहीं है। उनके हथियार पिनाका की तुलना में रेंज और सटीकता में कमजोर हैं। पिनाका (Pinaka MBRL) की ड्रोन और टोही उपकरणों के साथ मिलकर काम करने की खूबी इसे और भी घातक बनाती है, क्योंकि यह दुश्मन के ठिकानों को ढूंढकर उन्हें नष्ट कर सकता है।

मॉडर्न वॉरफेयर में पिनाका की ताकत

पिनाका (Pinaka MBRL) को आज के युद्ध की जरूरतों के हिसाब से बनाया गया है। यह ऐसा हथियार है, जो तेजी से काम करता है। इसका कमांड और कंट्रोल सिस्टम अलग-अलग सैन्य उपकरणों, जैसे ड्रोन, तोपें और मिसाइलों, के साथ कॉर्डिनेट करता है। पिनाका का फायर कंट्रोल सिस्टम बहुत स्मार्ट है। यह अपने आप दुश्मन के खतरों को पहचान लेता है, सही निशाना लगा सकता है। अगर हालात बदल जाएं, तो तुरंत नया प्लान बना लेता है। यह होवित्जर तोपों, मिसाइल बैटरी और ड्रोन के साथ मिलकर काम करता है।

कमांडरों को यह सुविधा मिलती है कि वे जरूरत पड़ने पर अलग-अलग पिनाका बैटरी को फौरन नए मिशन दे सकते हैं। इसका सॉफ्टवेयर-बेस्ड डिजाइन इसे और भी खास बनाता है, क्योंकि भविष्य में इसमें आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) और नए स्वार्मिंग रॉकेट सिस्टम को जोड़ा जा सकता है। सीधे शब्दों में कहें तो पिनाका आधुनिक युद्ध में भारत के लिए एक ऐसा हथियार है, जो तेज, सटीक और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार है।

Pinaka MBRL: फ्रांस को चाहिए शिवजी का धनुष! मैक्रों हुए राजी तो डिफेंस एक्सपोर्ट में भारत का बढ़ जाएगा दबदबा

पूरी तरह से स्वदेशी

इसके अलावा पिनाका सिस्टम (Pinaka MBRL) पूरी तरह से स्वदेशी है। सोलर इंडस्ट्रीज, टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स, लार्सन एंड टूब्रो, और म्यूनिशन्स इंडिया लिमिटेड जैसे निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां इसका उत्पादन करती हैं। पिनाका की लागत प्रति सिस्टम लगभग 2.3 करोड़ रुपये है, जो अमेरिकी M270 सिस्टम (19.5 करोड़ रुपये) की तुलना में बहुत कम है। वहीं पूरी तरह से स्वदेशी होने से भारत को इसके लिए किसी विदेशी मदद की जरूरत नहीं है। भारत हर साल 5,000 से ज्यादा रॉकेट बना सकता है, जिससे सेना की जरूरतें पूरी होती हैं और निर्यात की भी काफी संभावनाएं हैं। पिनाका की मांग दुनियाभर में बढ़ रही है। आर्मेनिया ने इसे खरीदा है, और फ्रांस जैसे देश भी इसमें दिलचस्पी दिखा रहे हैं। 2023 में आर्मेनिया ने 245 मिलियन डॉलर के सौदे में पिनाका खरीदा, जो इसका पहला विदेशी ग्राहक बना। वहीं, फ्रांस की सेना पिनाका को अपने पुराने M270 MLRS की जगह लेने के लिए सोचविचार कर रही है। ब्रिगेडियर जनरल स्टीफन रिचौ ने नवंबर 2024 में कहा था कि फ्रांस पिनाका की मैनुवेरिएबिलिटी और एक्यूरेसी से प्रभावित हैं। हालांकि, फ्रांस 2026 में अपने स्वदेशी रॉकेट सिस्टम का टेस्ट भी कर रहा है। इसके अलावा इंडोनेशिया, नाइजीरिया, और कुछ दक्षिण अमेरिकी, दक्षिण-पूर्व एशियाई, और यूरोपीय देशों ने भी पिनाका में रुचि दिखाई है।

Cyber Attack: अपनी हरकतों से नहीं बाज आ रहा पाकिस्तान, पाक हैकर ग्रुप ने डिफेंस वेबसाइट्स पर किया साइबर अटैक, एजेंसियां अलर्ट

Cyber Attack: Pakistan Hackers Target Indian Defense Websites, Agencies on Alert

Cyber Attack: भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक नया मोर्चा अब साइबर स्पेस में भी खुल गया है। ट्विटर पर सक्रिय एक हैंडल ‘Pakistan Cyber Force’ ने दावा किया है कि उसने भारत की दो प्रमुख रक्षा संस्थाओं Indian Military Engineering Service (MES) और Manohar Parrikar Institute of Defence Studies and Analysis (MP-IDSA) के डाटा सिस्टम को हैक कर लिया है। इस डाटा में रक्षा कर्मियों की व्यक्तिगत जानकारी और लॉगइन क्रेडेंशियल्स शामिल होने की आशंका जताई जा रही है।

हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यह दावा भारत की साइबर सुरक्षा व्यवस्था पर सीधा हमला माना जा रहा है। खासकर उस वक्त जब भारत और पाकिस्तान के बीच पहलगाम आतंकी हमले के बाद तनाव पहले से ही चरम पर है।

Cyber Attack: क्या हुआ हैक?

‘Pakistan Cyber Force’ का दावा है कि उसने भारतीय रक्षा संस्थानों के संवेदनशील डाटा (Cyber Attack) को एक्सेस कर लिया है, जिसमें सैन्य कर्मियों की व्यक्तिगत जानकारी और लॉगिन क्रेडेंशियल्स जैसी जानकारियां शामिल हैं। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों ने इसे गंभीरता से लिया है।

‘Pakistan Cyber Force’ के मुताबिक, उन्होंने MP-IDSA और MES की कुछ आंतरिक फाइलों, ईमेल्स और पासवर्ड्स तक पहुंच बनाई है। बता दें कि MES मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर का मैनेजमेंट करता है, जबकि MP-IDSA रक्षा नीतियों और रणनीति पर शोध करता है। हालांकि MP-IDSA के वरिष्ठ अधिकारियों ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि उनकी वेबसाइट पर ऐसा कोई साइबर हमला (Cyber Attack) नहीं हुआ है। लेकिन साइबर सुरक्षा एजेंसियां फिलहाल इसकी गहन जांच कर रही हैं।

Cyber Attack: डिफेंस पीएसयू की वेबसाइट पर हमला

इतना ही नहीं, पाकिस्तान समर्थित इसी ग्रुप ने Armoured Vehicle Nigam Limited (AVNL), जो रक्षा मंत्रालय के तहत एक सार्वजनिक उपक्रम (PSU) है, उसकी आधिकारिक वेबसाइट को भी डिफेस करने की कोशिश की। वेबसाइट पर पाकिस्तान का झंडा और पाकिस्तानी युद्धक टैंक ‘अल खालिद’ की तस्वीरें दिखाकर भारत को उकसाने की कोशिश की गई। इस घटना के बाद AVNL की वेबसाइट (Cyber Attack) को अस्थायी रूप से ऑफलाइन कर दिया गया है और उसकी पूरी तरह से फॉरेंसिक ऑडिट की जा रही है। AVNL रक्षा मंत्रालय के तहत एक कंपनी है, जो अर्जुन टैंक, T-90 भवानी, और अन्य बख्तरबंद वाहनों का निर्माण करती है।

क्या कह रही हैं एजेंसियां?

MP-IDSA की वरिष्ठ प्रबंधन टीम ने सार्वजनिक रूप से इस बात से इनकार किया है कि उनकी वेबसाइट हैक (Cyber Attack) हुई है। लेकिन सूत्रों के अनुसार, एक उच्च स्तरीय साइबर सुरक्षा समीक्षा की जा रही है और सभी लॉग्स तथा बैकअप को जांचा जा रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं कोई सेंध तो नहीं लगी।

इस बीच, भारत की रक्षा साइबर एजेंसियां (Cyber Attack) और CERT-In (Computer Emergency Response Team-India) जैसे साइबर सुरक्षा प्राधिकरण मामले की निगरानी कर रहे हैं। इनका उद्देश्य है किसी भी तरह की अतिरिक्त घुसपैठ या भविष्य में संभावित हमलों को समय रहते पहचानना और रोकना।

इस संभावित साइबर अटैक (Cyber Attack) के बाद भारत की सभी प्रमुख साइबर एजेंसियों और रक्षा मंत्रालय की साइबर विंग को अलर्ट मोड पर रखा गया है। संभावित पाकिस्तानी लिंक वाले थ्रेट एक्टर्स की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है ताकि भविष्य में होने वाले किसी बड़े हमले को समय रहते रोका जा सके।

भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश की साइबर सीमाओं की रक्षा उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी भौगोलिक सीमाओं की। इसलिए रियल टाइम मॉनिटरिंग, थ्रेट इंटेलिजेंस और AI आधारित साइबर सुरक्षा समाधान लागू किए जा रहे हैं।

साइबर वॉरफेयर का नया चेहरा

इस पूरे घटनाक्रम को हाइब्रिड वॉरफेयर (Cyber Attack) के नए रूप के तौर पर देखा जा रहा है। पाकिस्तान, सीधे सैन्य टकराव से बचते हुए अब डिजिटल माध्यमों से भारत को नुकसान पहुंचाने की रणनीति पर काम कर रहा है। ‘हाइब्रिड वॉरफेयर’, जिसमें साइबर हमला, फर्जी खबरें और डेटा मैनिपुलेशन शामिल हैं, का चलन बढ़ गया है। यह घटना उसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है, जहां दुश्मन देश न केवल फिजिकल बॉर्डर पर बल्कि डिजिटल फ्रंट पर भी भारत को निशाना बना रहे हैं।

भारत की जवाबी तैयारी

सरकारी सूत्रों ने बताया कि भारत सरकार (Cyber Attack) इस पूरे मामले को बहुत गंभीरता से ले रही है। सभी रक्षा मंत्रालय से जुड़ी वेबसाइट्स और सर्वर की सुरक्षा समीक्षा की जा रही है। इसके साथ ही कई साइबर सुरक्षा एक्सपर्ट्स को तैनात किया गया है जो यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि आगे कोई और सेंध न लग सके।

इसके अलावा, भविष्य में ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए डेटा एन्क्रिप्शन, 2FA (Two-Factor Authentication), AI-संचालित नेटवर्क निगरानी और साइबर-रिस्पॉन्स टीमें तैयार की जा रही हैं।

India-Pakistan Tension: कराची में तुर्की वॉरशिप TCG Büyükada की एंट्री, भारत-पाक तनाव के बीच क्या है इस खास दौरे का मतलब?

क्या है ‘Pakistan Cyber Force’?

‘Pakistan Cyber Force’ खुद को एक राष्ट्रीय हैकर समूह (Cyber Attack) बताता है जो भारत के खिलाफ सूचना युद्ध छेड़ने का दावा करता है। इससे पहले भी यह समूह कई बार भारत की एजेंसियों को साइबर धमकी दे चुका है, लेकिन इस बार उसने रक्षा संस्थानों को निशाना बनाकर एक खतरनाक संकेत दिया है।

India-Pakistan Tension: कराची में तुर्की वॉरशिप TCG Büyükada की एंट्री, भारत-पाक तनाव के बीच क्या है इस ‘खास’ दौरे का मतलब?

India-Pakistan Tension: Turkish Warship TCG Büyükada in Karachi

India-Pakistan Tension: पहलगाम हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच, तुर्की नौसेना का युद्धपोत TCG Büyükada 4 मई 2025 को कराची बंदरगाह पर पहुंचा। यह तुर्की के Ada-class पनडुब्बी-रोधी कोरवेट का दूसरा जहाज है, जो 7 मई तक कराची में रहेगा। इससे पहले तुर्की वायुसेना का C-130 हरक्यूलिस विमान कराची में उतरा था, जिसके बाद अटकलें लगाई गई थीं कि क्या तुर्की पाकिस्तान को सैन्य सहायता पहुंचा रहा है? वहीं, TCG Büyükada की इस यात्रा से पहले तुर्की के राजदूत डॉ. इरफान नेजिरोग्लू ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात की थी, जिसमें उन्होंने पाकिस्तान के साथ तुर्की की एकजुटता का संदेश दिया था।

India-Pakistan Tension: क्या कहा पाकिस्तानी नौसेना ने?

पाकिस्तानी नौसेना (India-Pakistan Tension) ने इस यात्रा को “सद्भावना यात्रा” बताया है, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच समुद्री सहयोग को मजबूत करना और नौसेनाओं के बीच आपसी समझ बढ़ाना है। तुर्की ने भी इसे नियमित समुद्री दौरे का हिस्सा करार दिया। लेकिन इसकी टाइमिंग और बैकग्राउंड कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। तो क्या यह दौरा सिर्फ ‘नौसैनिक कूटनीति’ तक सीमित है या इसके पीछे कोई छिपा एजेंडा है? कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह भारत को अप्रत्यक्ष रूप से संदेश देने की कोशिश हो सकती है, क्योंकि तुर्की ने आर्टिकल 370 हटाने के वक्त कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का समर्थन किया है।

कौन है TCG Büyükada?

TCG Büyükada तुर्की नौसेना (India-Pakistan Tension) का एक एडवांस्ड एंटी-सबमरीन वॉरफेयर (ASW) कॉर्वेट है। यह तुर्की के MİLGEM युद्धपोत कार्यक्रम के तहत बनाया गया दूसरा जहाज है, जिसे 2013 में सेवा में शामिल किया गया था। यह युद्धपोत सतह और पानी के नीचे के खतरों से निपटने में सक्षम है। इसमें अत्याधुनिक रडार सिस्टम, 76 मिमी नौसैनिक तोप, एंटी-शिप मिसाइलें, टॉरपीडो लांचर और हेलीकॉप्टर संचालन की सुविधा भी है। यानी यह एक मिनी-युद्धपोत की तरह काम करता है। इसमें हेलिकॉप्टर लैंडिंग पैड और हैंगर है। यह जहाज खुले समुद्र में लंबी दूरी के ऑपरेशन कर सकता है और क्षेत्रीय मिशनों के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह जहाज कराची पहुंचने से पहले मलेशिया और ओमान (29 अप्रैल-1 मई) का दौरा कर चुका था।

कराची क्यों आया है यह युद्धपोत?

तुर्की और पाकिस्तान (India-Pakistan Tension) के बीच हाल के वर्षों में सैन्य सहयोग काफी बढ़ा है। 2022 में दोनों देशों ने मिलकर चार MİLGEM क्लास कॉर्वेट बनाने का समझौता किया था, जिनमें से दो जहाज तुर्की में और दो कराची शिपयार्ड में बनेंगे। इन जहाजों में पहला, PNS बाबर, अब बनकर तैयार है। पाकिस्तान नौसेना के अनुसार, TCG Büyükada का यह दौरा दोनों देशों के बीच नौसैनिक सहयोग को बढ़ाने और आपसी समझ को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया है। लेकिन यह दौरा ऐसे समय हुआ है जब भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया पहलगाम आतंकी हमले के बाद तनाव चरम पर है।

तुर्की का ‘साइलेंट’ सपोर्ट?

TCG Büyükada की मौजूदगी से एक दिन पहले तुर्की के राजदूत डॉ. इरफान नजीरओग्लू ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज़ शरीफ से मुलाकात कर “तुर्की की एकजुटता” का संदेश दिया। इस मुलाकात के बाद TCG Büyükada की मौजूदगी को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

कई पाकिस्तानी मीडिया चैनलों (India-Pakistan Tension) ने इस दौरे को ‘रणनीतिक समर्थन’ बताया है। हाल ही में जब तुर्की का सैन्य कार्गो विमान कराची में उतरा था, तब भी यह कहा गया था कि शायद इसमें हथियार या उपकरण लाए गए हैं। हालांकि, बाद में तुर्की ने बयान जारी कर इन अटकलों को खारिज कर दिया था।

हालांकि तुर्की और पाकिस्तान (India-Pakistan Tension) के बीच सैन्य सहयोग का लंबा इतिहास रहा है। दोनों देश न केवल सैन्य उपकरणों और तकनीक के क्षेत्र में बल्कि संयुक्त अभ्यासों और राजनयिक समर्थन में भी एक-दूसरे के करीब हैं। पाकिस्तान और तुर्की दोनों इस्लामिक देशों के रूप में खुद को ‘भाई’ कहते रहे हैं, लेकिन अब यह भाईचारा रणनीतिक गठजोड़ में बदल रहा है।

हाल ही में दोनों देशों ने अतातुर्क-XIII नामक संयुक्त सैन्य अभ्यास किया था। इसमें दोनों देशों के विशेष बलों ने एक-दूसरे के साथ समन्वय और युद्ध तकनीकों का अभ्यास किया। यह अभ्यास दोनों नौसेनाओं और सेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी (एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करने की क्षमता) को बढ़ाने के लिए था।

कमजोर है पाकिस्तानी नौसेना

पाकिस्तानी नौसेना (India-Pakistan Tension) भारतीय नौसेना की तुलना में कमजोर है, खासकर युद्धपोतों, पनडुब्बियों, और समुद्री निगरानी क्षमता के मामले में। हालांकि पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तानी नौसेना ने अपनी ताकत दिखाने के लिए अरब सागर में सैन्य अभ्यास शुरू किया था, जो 30 अप्रैल से 2 मई 2025 तक चला, जिसमें लाइव फायरिंग और नेविगेशन एरिया वॉर्निंग जारी की गई। पाकिस्तानी नौसेना प्रमुख एडमिरल नावेद अशरफ ने अपने जवानों को युद्ध के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया, इसे “खुद को साबित करने का मौका” बताया। पाक नौसेना ने यह कदम भारत की नौसेना के गुजरात तट (30 अप्रैल-3 मई 2025) के पास किए अभ्यास के जवाब में किया था।

दरअसल पाकिस्तानी नौसेना को डर है कि कहीं भारतीय नौसेना 1971 के ऑपरेशन ट्राइडेंट की हमला न कर दे, जिसमें कराची पोर्ट को भारी नुकसान पहुंचा था। पाकिस्तान ने कराची और ग्वादर पोर्ट की सुरक्षा भी कड़ी की, जिसमें 25 चीनी जे-10सी और जेएफ-17 फाइटर जेट्स तैनात किए गए।

India-Pakistan war: पाकिस्तानी सेना की सीक्रेट बातचीत हुई इंटरसेप्ट, घबराहट में है पाक आर्मी, Zoe और Markhor का है सहारा

भारतीय नौसेना ने की अरब सागर में नाकेबंदी

भारतीय नौसेना (India-Pakistan Tension) ने पहलगाम हमले के बाद अरब सागर में नाकेबंदी शुरू की है, जिसमें पाकिस्तानी जहाजों और नावों पर प्रतिबंध लगाया गया है। इस समुद्री नाकेबंदी ने कराची बंदरगाह के व्यापार को प्रभावित किया है, जिससे पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा है। इसके अलावा भारत ने आईएनएस सूरत (विध्वंसक श्रेणी) को हजीरा पोर्ट पर तैनात किया है, जो आधुनिक मिसाइलों, रडार, और हेलिकॉप्टरों से लैस है। इसके अलावा भारतीय नौसेना ने (30 अप्रैल-3 मई 2025) अरब सागर में चुपचाप कई लाइव फायर ड्रिल्स और मिसाइल परीक्षण किए। इसमें ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों का परीक्षण भी शामिल था। इन सभी गतिविधियों के लिए NAVAREA वार्निंग जारी की गई थी ताकि कॉमर्शियल जहाजों को सुरक्षा अलर्ट मिल सके। यहां तक कि भारत ने अरब सागर में आईएनएस सूरत और आईएनएस विक्रांत जैसे शक्तिशाली युद्धपोत तैनात किए। इसके बाद 3 मई को नौसेना ने एक इमेज जारी की जिसमें INS कोलकाता, एक ध्रुव हेलिकॉप्टर और एक कलवरी क्लास पनडुब्बी दिख रही थी – संदेश था साफ: “Above, Below and Across Waves”।

India-Pakistan war: पाकिस्तानी सेना की सीक्रेट बातचीत हुई इंटरसेप्ट, घबराहट में है पाक आर्मी, Zoe और Markhor का है सहारा

India-Pakistan War: Pak Army's Secret Talks Intercepted, Zoe and Markhor Units on Alert

India-Pakistan war: पहलगाम हमले के बाद से नियंत्रण रेखा (LoC) पर लगातार पाकिस्तान की तरफ से सीजफायर तोड़ा जा रहा है। लगातार 11वें दिन पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा, बारामूला, पुंछ, राजौरी, मेंढर, नौशेरा, सुंदरबनी और अखनूर में सीजफायर तोड़ा और छोटे हथियारों से गोले दागे, जिसका भारतीय सेना की तरफ से मुंहतोड़ जवाब दिया गया। वहीं भारतीय अधिकारियों ने LoC पर पाकिस्तानी सेना की कुछ गोपनीय बातचीत को इंटरसेप्ट किया है, जिसमें साफ तौर पर नजर आ रहा है कि पाकिस्तानी सेना में इन दिनों जबरदस्त घबराहट है। इन इंटरसेप्ट्स से भारतीय सेना को पाकिस्तान की रणनीति की अहम जानकारी मिली है, जिससे यह साफ हो रहा है कि पाकिस्तानी सेना इस समय काफी दबाव में है और उसे लग रहा है कि भारतीय सेना कभी भी बड़ा हमला कर सकती है।

India-Pakistan war: पहलगाम हमले के बाद बढ़ा तनाव

22 अप्रैल 2025 को कश्मीर के पहलगाम (India-Pakistan war) में एक आतंकी हमला हुआ, जिसमें 26 नागरिक मारे गए थे। भारत ने इस हमले के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि यह हमला पाकिस्तान समर्थित आतंकियों ने किया। इस हमले के बाद दोनों देशों के बीच बचे खुचे रिश्ते और खराब हो गए। भारत ने पाकिस्तानी विमानों के लिए अपनी हवाई सीमा बंद कर दी, और सीमा पर गोलीबारी की घटनाएं भी बढ़ गईं। ऐसे में पाकिस्तानी सेना को डर है कि भारत जल्द ही कोई बड़ा सैन्य कदम उठा सकता है।

भारतीय सैन्य सूत्रों के मुताबिक, पहलगाम हमले के तुरंत बाद पाकिस्तानी सेना (India-Pakistan war) ने अपनी तैयारियां तेज कर दीं। उनकी सेना, वायुसेना और नौसेना को हाई अलर्ट पर रखा गया है। सैनिकों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं, और उन्हें सीमा पर तैनात कर दिया गया है। जमीन, हवा और पानी पर गश्त भी बढ़ा दी गई है।

पाकिस्तानी सेना की बातचीत इंटरसेप्ट: कोडनेम जो

भारतीय अधिकारियों ने LoC पर पाकिस्तानी सेना (India-Pakistan war) की दो अहम बातचीत को इंटरसेप्ट किया है। पहला इंटरसेप्ट पिछले हफ्ते सुबह 9:45 बजे कश्मीर के एक गुप्त स्थान पर रिकॉर्ड किया गया। यह बातचीत एक फॉरवर्ड पोस्ट पर तैनात अधिकारियों और उनके कमांडरों के बीच हुई थी। यह संदेश उर्दू में VHF चैनल के जरिए भेजा गया था। इसमें साफ तौर पर कहा गया कि हालात “बहुत खराब” हैं। पाक सेना के जवानों को 24 घंटे हाई अलर्ट पर रहने और हथियारों को दुश्मन की तरफ तानकर तैयार रहने का आदेश दिया गया।

इसके अलावा, जवानों को तोपों को सीधे फायर करने के लिए तैयार करने, गोला-बारूद का पर्याप्त स्टॉक रखने और एक यूनिट जिसे कोडनेम ‘जो’ (Zoe) दिया गया है, उसके साथ तालमेल बिठाने का निर्देश दिया गया। इस बातचीत का लहजा और उसकी जल्दबाजी से साफ है कि पाकिस्तानी सेना (India-Pakistan war) भारतीय जवाबी कार्रवाई से डर रही है और उसे अंदाजा नहीं है कि भारत कब और कैसे हमला कर सकता है।

दूसरा इंटरसेप्ट: कोडनेम ‘मारखोर’

उसी दिन रात 8:10 बजे एक और बातचीत (India-Pakistan war) इंटरसेप्ट की गई। इसमें हालात को “पहले से कहीं ज्यादा खराब” बताया गया। इस संदेश में साफ झलक रहा था कि पाकिस्तानी सैनिक थकान और दबाव में हैं। उनकी डिफेंस लाइन कमजोर पड़ रही हैं, और उन्हें लगातार भारतीय सेना के हमले का डर सता रहा है।

इस बातचीत में एक और यूनिट का जिक्र हुआ, जिसे कोडनेम ‘मारखोर’ (Markhor) दिया गया है। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह यूनिट एक माउंटेन आर्टिलरी (पहाड़ी तोपखाना) डिवीजन हो सकती है, जो लंबी दूरी की 155mm हॉवित्जर तोपों से लैस है। यह यूनिट LoC के कठिन पहाड़ी इलाकों में पाकिस्तानी सेना की अहम सहारा है। इसका मतलब है कि पाकिस्तान अपनी फ्रंट लाइन की कमजोरियों को छुपाने के लिए तोपों पर ज्यादा भरोसा कर रहा है।

पाकिस्तानी सेना की फ्रंट लाइन कमजोर

इन इंटरसेप्ट्स से भारतीय सेना (India-Pakistan war) को पाकिस्तान की डिफेंस स्ट्रेटेजी की गहरी जानकारी मिली है। इससे पता चलता है कि पाकिस्तानी सेना इस समय काफी दबाव में है और उसे किसी बड़े हमले की आशंका है। विशेषज्ञों का कहना है कि LoC पर रणनीतिक असंतुलन साफ दिख रहा है। पाकिस्तानी सेना की फ्रंट लाइन कमजोर है, और वे अपनी रक्षा के लिए तोपों पर निर्भर हैं। वहीं, भारत के तोपखाने की ताकत LoC के पहाड़ी इलाकों में पाकिस्तान से कहीं ज्यादा है, जिससे पाकिस्तान डरा हुआ है।

पाकिस्तान की ओर से बयानबाजी

पाकिस्तान (India-Pakistan war) की तरफ से भी बयानबाजी तेज हो गई है। पिछले हफ्ते पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने देर रात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में दावा किया था कि उनके पास पक्की खुफिया जानकारी है कि भारत अगले 24-36 घंटों में पाकिस्तान पर सैन्य हमला करने की योजना बना रहा है। भारतीय सूत्रों का मानना है कि यह बयान जानबूझकर सार्वजनिक किया गया, ताकि भारत को हमले से रोका जा सके और वैश्विक समुदाय में पाकिस्तान के पक्ष में माहौल बनाया जा सके।

लेकिन यह बयान भी पाकिस्तानी सेना की घबराहट को ही दिखाता है। वे हर हाल में भारत के हमले को रोकना चाहते हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि अगर भारत ने जवाबी कार्रवाई की, तो उनकी सेना को भारी नुकसान हो सकता है।

पहलगाम हमले का असर

पाकिस्तानी सेना (India-Pakistan war) को डर है कि भारत इस हमले का बदला लेने के लिए कोई बड़ा सैन्य कदम उठा सकता है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमले के बाद कहा था कि इस हमले के जिम्मेदार लोगों को “धरती के किसी भी कोने में छुपने नहीं दिया जाएगा”। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी सेना को पूरी छूट दे दी कि वह हमले का जवाब देने के लिए समय, निशाना और तरीका खुद तय करे।

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पाकिस्तान की तैयारियां

पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तानी सेना (India-Pakistan war) ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। उनकी सेना, वायुसेना और नौसेना को हाई अलर्ट पर रखा गया है। सैनिकों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं, और उन्हें सीमा पर भेजा गया है। जमीन, हवा और पानी पर गश्त बढ़ा दी गई है। लेकिन पाकिस्तानी सेना की इंटरसेप्ट हुई बातचीत से पता लगता है कि इतनी तैयारियों के बावजूद उनकी तैयारियां अधूरी हैं, और वे दबाव में हैं। सैनिक थके हुए हैं, और उनका फॉरवर्ड डिफेंस कमजोर है। जिसका फायदा भारतीय सेना को मिल सकता है।

Air Defence System: भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच भारतीय सेना का बड़ा फैसला, खरीदेगी 48 VSHORADS लॉन्चर और 85 मिसाइलें

Air Defence System: Indian Army to be equipped with VSHORADS missiles

Air Defence System: भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेना को और मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। मंत्रालय ने शनिवार को वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (नेक्स्ट जनरेशन) यानी VSHORADS (NG) की खरीद के लिए रिक़्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) जारी किया है। इसके तहत सेना को 48 लॉन्चर, 48 नाइट विजन साइट्स, 85 मिसाइलें और 1 मिसाइल टेस्ट स्टेशन मिलेगा। यह खरीद DAP-2020 के तहत बाय (इंडियन) कैटेगरी में होगी, यानी इसमें मेक इन इंडिया को बढ़ावा दिया जाएगा। यह खबर ऐसे समय में आई है, जब 22 अप्रैल को कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद दोनों देशों के रिश्तों में तनाव चरम पर है।

Air Defence System: क्या होता है VSHORADS?

VSHORADS को आम भाषा में मैनपैड्स (मैन-पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम – Air Defence System) भी कहते हैं, एक ऐसा हथियार है जो कम दूरी पर दुश्मन के हवाई हमलों को नाकाम कर सकता है। यह हथियार खास तौर पर उन विमानों और ड्रोन्स को निशाना बनाता है जो नीची उड़ान भरते हैं, जैसे हेलिकॉप्टर, छोटे लड़ाकू विमान और मानव रहित हवाई वाहन (UAV)। इसे “फायर एंड फॉरगेट” हथियार कहा जाता है, यानी एक बार मिसाइल दागने के बाद यह अपने आप निशाने को ढूंढ लेती है और उसे तबाह कर देती है।

रक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “यह मिसाइल (Air Defence System) इन्फ्रारेड होमिंग तकनीक पर काम करती है। यह तकनीक विमान के इंजन से निकलने वाली गर्मी को ट्रैक करती है। एक बार फायर होने के बाद इसकी मारक क्षमता 95% तक होती है। यह हथियार नीची उड़ान भरने वाले विमानों के खिलाफ सबसे ज्यादा प्रभावी है।”

क्यों पड़ी VSHORADS की जरूरत?

22 अप्रैल को कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा पर तनाव चल रहा है। इस हमले में कई पर्यटकों की जान चली गई थी। भारत ने इस हमले के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया, जिसके बाद दोनों देशों की सीमा पर तनाव बढ़ गया। सीजफायर (Air Defence System)  उल्लंघन की घटनाएं भी बढ़ी हैं, और दोनों तरफ से छोटे हथियारों से गोलीबारी की खबरें आ रही हैं। ऐसे में भारतीय सेना को अपनी हवाई सुरक्षा को मजबूत करने की जरूरत महसूस हुई।

सूत्रों का कहना है, “पाकिस्तान की तरफ से ड्रोन हमले और नीची उड़ान भरने वाले विमानों (Air Defence System) का खतरा बढ़ रहा है। VSHORADS जैसे हथियार हमें इन खतरों से निपटने में मदद करेंगे। यह हथियार बेहद हल्का और मोबाइल है। इसे एक सैनिक आसानी से कंधे पर ले जा सकता है और पहाड़ी इलाकों, वाहनों या किसी भी जगह से इस्तेमाल कर सकता है।”

VSHORADS की खासियतें

VSHORADS हथियार (Air Defence System) की कई खासियतें हैं, जो इसे भारतीय सेना के लिए खास बनाती हैं। अगर दो मिसाइलें एक साथ दागी जाएं, तो यह 85% से ज्यादा की मारक क्षमता रखती है, खासकर तेज रफ्तार से उड़ने वाले लड़ाकू विमानों के खिलाफ। वहीं, इसकी न्यूनतम रेंज 500 मीटर और अधिकतम रेंज 6 किलोमीटर है। यानी यह 6 किमी के दायरे में आने वाले किसी भी हवाई खतरे को खत्म कर सकता है। हर मिसाइल की लंबाई 1.85 मीटर से ज्यादा नहीं होगी, जिससे इसे ले जाना आसान हो। खास बात यह है कि इसे एक सैनिक अकेले इस्तेमाल कर सकता है। लॉन्चर को कंधे पर रखा जाता है, और सैनिक अपने पीठ पर दो मिसाइलें ले जा सकता है। VSHORADS सिस्टम इन्फ्रारेड होमिंग तकनीक पर काम करती है, जो विमान के इंजन की गर्मी को ट्रैक करती है। वहीं अगर एक बार मिसाइल फायर हो जाए, तो यह अपने आप निशाने को ढूंढ लेती है।

VSHORADS सिस्टम में तीन मुख्य हिस्से होते हैं। इसके मिसाइल (Air Defence System) वाले हिस्से में विस्फोटक होता है जो निशाने को तबाह करता है। इसकी लॉन्च ट्यूब में मिसाइल को फायर करने का सिस्टम होता है। वहीं इसकी बैटरी यूनिट बिजली पैदा करती है, ताकि मिसाइल सही तरीके से काम कर सके।

105 देशों की सेनाओं के पास यह हथियार

मैनपैड्स (Air Defence System) का इस्तेमाल दुनिया भर में पिछले कई दशकों से हो रहा है। करीब 105 देशों की सेनाओं के पास यह हथियार है, लेकिन इसे बनाने वाले देशों की संख्या सिर्फ 12 है, जिनमें भारत भी शामिल है। सबसे मशहूर मैनपैड्स में अमेरिका का स्टिंगर, रूस का 9K32 स्ट्रेला-2 (SA-7) और हाल ही में चीन का FN-16 शामिल है।

मैनपैड्स का सबसे ज्यादा इस्तेमाल 1980 के दशक में अफगानिस्तान में मुजाहिदीनों (Air Defence System) ने किया था। उन्हें अमेरिका ने स्टिंगर मिसाइलें दी थीं। इन मिसाइलों ने सोवियत हेलिकॉप्टरों और नीची उड़ान भरने वाले विमानों को भारी नुकसान पहुंचाया था। बाद में तालिबान ने भी इन हथियारों का इस्तेमाल अमेरिकी सेना के खिलाफ किया और उनके हेलिकॉप्टरों को निशाना बनाया।

डीआरडीओ ने बनाया स्वदेशी VSHORADS

हालांकि भारत अभी VSHORADS (Air Defence System) की खरीद कर रहा है, लेकिन देश में इस तरह के हथियार को बनाने की कोशिश भी हो रही है। डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) ने हाल ही में स्वदेशी VSHORADS सिस्टम को विकसित किया है। इसकी टेस्टिंग पिछले कुछ सालों से चल रही है, और अक्टूबर 2024 में इसके आखिरी टेस्ट सफल रहे। DRDO का दावा है कि यह मिसाइल ड्रोन, हेलिकॉप्टर और लड़ाकू विमानों को आसानी से निशाना बना सकती है।

लेकिन स्वदेशी VSHORADS अभी पूरी तरह तैयार नहीं है। इसे ऊंचे इलाकों जैसे लद्दाख में टेस्ट करना बाकी है। साथ ही, सेना के इस्तेमाल के लिए बड़े पैमाने पर इसका उत्पादन शुरू होने में अभी समय लगेगा। इसलिए रक्षा मंत्रालय ने तुरंत जरूरत को पूरा करने के लिए RFP जारी किया है।

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RFP की शर्तें और मेक इन इंडिया

रक्षा मंत्रालय ने RFP में साफ कहा है कि यह खरीद DAP-2020 के तहत होगी, जिसमें मेक इन इंडिया (Air Defence System) को प्राथमिकता दी जाती है। इसका मतलब है कि जो भी कंपनी इस हथियार को सप्लाई करेगी, उसे भारत में ही इसका कुछ हिस्सा बनाना होगा। मंत्रालय ने यह भी कहा है कि कॉन्ट्रैक्ट साइन होने के एक साल के अंदर सारी डिलीवरी पूरी करनी होगी। इसका मतलब है कि सेना को जल्द से जल्द यह हथियार चाहिए, ताकि सीमा पर बढ़ते खतरे से निपटा जा सके।

Kashmir Tourism Halt: पहलगाम आतंकी हमले के बाद 10 लाख बुकिंग्स रद्द, जम्मू-कश्मीर के पर्यटन को 2 हफ्तों में 1000 करोड़ का घाटा

Kashmir Tourism Halt: Pahalgam Terror Attack Triggers 10 Lakh Cancellations, Rs 1000 Cr Loss

Kashmir Tourism Halt: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले ने न केवल 26 पर्यटकों की जान ली, बल्कि यहां की अर्थव्यवस्था और पर्यटन इंडस्ट्री को भी बड़ा झटका दिया। इस हमले के बाद पिछले दो हफ्तों में जम्मू-कश्मीर के पर्यटन क्षेत्र को 1000 करोड़ रुपये (लगभग 120 मिलियन डॉलर) से ज्यादा का नुकसान हुआ है। अप्रैल से जून तक का समय यहां पर्यटकों का सबसे बड़ा सीजन होता है, लेकिन हमले के बाद 10 लाख से ज्यादा बुकिंग्स रद्द हो चुकी हैं। यह हमला कश्मीर की तरक्की और निवेश की उम्मीदों पर भी भारी पड़ रहा है।

Kashmir Tourism Halt: Pahalgam Terror Attack Triggers 10 Lakh Cancellations, Rs 1000 Cr Loss

Kashmir Tourism Halt: 48 रिसॉर्ट्स बंद

पहलगाम की बैसरन घाटी में हुए इस आतंकी हमले ने जम्मू-कश्मीर की पर्यटन इंडस्ट्री (Kashmir Tourism Halt) को हिलाकर रख दिया। सुरक्षा कारणों से सरकार ने यहां के 87 सरकारी पर्यटक रिसॉर्ट्स में से 48 को बंद कर दिया है। पहलगाम जैसे इलाके अपनी खूबसूरत वादियों और शांति के लिए जाने जाते हैं, जहां हर साल लाखों पर्यटक आते हैं। लेकिन इस हमले के बाद पर्यटकों में डर का माहौल बन गया है।

अप्रैल से जून तक का समय कश्मीर में सबसे ज्यादा पर्यटकों का होता है। इस दौरान लोग यहां की ठंडी हवा, बर्फीले पहाड़, और शिकारा की सैर का मज़ा लेने आते हैं। लेकिन हमले के बाद हालात ऐसे हो गए कि 10 लाख से ज्यादा बुकिंग्स रद्द हो गईं। दो हफ्तों में ही पर्यटन इंडस्ट्री को 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हो गया। एक टूर ऑपरेटर मुजफ्फर अहमद ने बताया, “हमारा पूरा सीजन बर्बाद हो गया। पर्यटक डर गए हैं और कोई भी बुकिंग नहीं कर रहा।”

स्थानीय लोगों की आजीविका पर संकट

इस हमले का सबसे बड़ा असर कश्मीर (Kashmir Tourism Halt) के स्थानीय लोगों पर पड़ा है, खासकर अनंतनाग और बारामूला जैसे जिलों में। यहां 70% से ज्यादा लोग पर्यटन पर निर्भर हैं। होटल मालिक, होटल कर्मचारी, टट्टू मालिक, शिकारा चलाने वाले, और हस्तशिल्प के कारीगर अब बेरोजगार हो गए हैं।

श्रीनगर और पहलगाम के बड़े होटल, जो इस सीजन में हाउसफुल रहते थे, अब खाली पड़े हैं। एक होटल मालिक गुलाम रसूल ने कहा, “हमले के बाद से एक भी गेस्ट नहीं आया। हमारे कर्मचारी बेरोजगार हो गए हैं।”

वहीं टट्टू मालिक और शिकारा वाले भी इससे अछूते नहीं हैं। पहलगाम में टट्टू मालिक पर्यटकों को घाटी की सैर कराते हैं, लेकिन अब उनकी कमाई बंद हो गई। डल झील में शिकारा चलाने वाले भी खाली बैठे हैं। एक शिकारा वाले बशीर अहमद ने बताया, “पहले दिन में 10-12 सैर करवाते थे, लेकिन अब कोई सवारी ही नहीं है।”

वहीं, कश्मीरी शॉल, कालीन, और दूसरी हस्तशिल्प की चीजें बेचने वाले कारीगरों का धंधा भी ठप हो गया।

निवेश और तरक्की पर असर

पहलगाम हमले ने न केवल पर्यटन (Kashmir Tourism Halt) को नुकसान पहुंचाया, बल्कि कश्मीर में निवेश और तरक्की की उम्मीदों को भी झटका दिया। जम्मू-कश्मीर में इस समय 25,000 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं। सरकार ने 1,767 प्रस्तावों को मंजूरी दी है, जिनमें स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचा, और उद्योग से जुड़े प्रोजेक्ट्स शामिल हैं। लेकिन हमले के बाद इन प्रोजेक्ट्स पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं।

यूएई की कंपनी ईमार ग्रुप ने श्रीनगर में ‘मॉल ऑफ श्रीनगर’ और दूसरी बड़ी परियोजनाओं के लिए 500 करोड़ रुपये का निवेश करने की योजना बनाई थी। इससे 10,000 से ज्यादा नौकरियां मिलने वाली थीं। लेकिन अब यह प्रोजेक्ट रुकने की कगार पर है। नून.कॉम, अल माया ग्रुप, जीएल एम्प्लॉयमेंट, और माटू इनवेस्टमेंट्स जैसी विदेशी कंपनियों ने भी निवेश के प्रस्ताव दिए थे, लेकिन अब वे पीछे हट सकती हैं।

जम्मू-कश्मीर (Kashmir Tourism Halt) सरकार को 8,500 से ज्यादा आवेदन मिले हैं, जिनमें 1.69 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव हैं। इनसे 6 लाख लोगों को नौकरी मिलने की उम्मीद थी। लेकिन हमले के बाद निवेशकों का भरोसा डगमगा गया है, और ये प्रोजेक्ट्स भी देरी का शिकार हो सकते हैं।

डर का माहौल: निवेशकों का भरोसा टूटा

इस हमले ने कश्मीर (Kashmir Tourism Halt) में डर का माहौल बना दिया है। जो निवेशक यहां पैसा लगाने की सोच रहे थे, वे अब डर रहे हैं। एक निवेशक ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, “कश्मीर में बहुत संभावनाएं हैं, लेकिन इस तरह के हमले हमें डराते हैं। हमें लगता है कि यहां पैसा लगाना जोखिम भरा हो सकता है।”

पहलगाम हमले (Kashmir Tourism Halt) ने कश्मीर की छवि को भी नुकसान पहुंचाया है। पहले यहां पर्यटक और निवेशक शांति और खूबसूरती की वजह से आकर्षित होते थे, लेकिन अब डर का माहौल बन गया है। इससे न केवल मौजूदा प्रोजेक्ट्स पर असर पड़ेगा, बल्कि भविष्य में नए निवेश को लाना भी मुश्किल हो सकता है।

रोजगार और अर्थव्यवस्था पर खतरा

जम्मू-कश्मीर (Kashmir Tourism Halt) में चल रहे प्रोजेक्ट्स और भविष्य की योजनाओं से 6 लाख से ज्यादा लोगों को नौकरी मिलने की उम्मीद थी। लेकिन हमले के बाद ये नौकरियां अब अनिश्चित हो गई हैं। पर्यटन और निवेश में कमी से यहां की अर्थव्यवस्था को बड़ा नुकसान हो सकता है। अगर पर्यटन और निवेश रुक गया, तो कश्मीर की अर्थव्यवस्था में मंदी आ सकती है। इससे स्थानीय लोगों की जिंदगी और मुश्किल हो जाएगी। साथ ही, जो लोग पहले से ही पर्यटन पर निर्भर थे, उनकी कमाई बंद हो चुकी है। अगर नए प्रोजेक्ट्स रुक गए, तो भविष्य में भी रोजगार के मौके कम हो जाएंगे।

पाकिस्तान नहीं चाहता कश्मीर में शांति

भारत का मानना है कि पहलगाम हमला (Kashmir Tourism Halt) पाकिस्तान की साजिश का हिस्सा है। भारत सरकार का कहना है कि पाकिस्तान नहीं चाहता कि कश्मीर में शांति और तरक्की हो। अगर कश्मीर में निवेश बढ़ा और लोग समृद्ध हुए, तो पाकिस्तान का कश्मीर पर दावा कमजोर हो जाएगा। इसलिए वह आतंकवाद को बढ़ावा देता है, ताकि यहां अशांति बनी रहे।

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वहीं पहलगाम हमले के बाद अगर जम्मू-कश्मीर (Kashmir Tourism Halt) की अर्थव्यवस्था और पर्यटन को फिर से पटरी पर लाना है, तो सरकार को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि यहां सुरक्षा व्यवस्था मजबूत हो, ताकि पर्यटकों और निवेशकों का भरोसा वापस जीता जा सके। साथ ही, आतंकवाद के खिलाफ सख्त कदम उठाने होंगे, ताकि भविष्य में ऐसे हमले न हों। साथ ही, स्थानीय लोगों को भी मदद की जरूरत है। सरकार को उनके लिए वैकल्पिक रोजगार के मौके ढूंढने होंगे, ताकि उनकी आजीविका फिर से शुरू हो सके। अगर कश्मीर में शांति और तरक्की आई, तो यहां के लोग न केवल आर्थिक रूप से मजबूत होंगे, बल्कि देश की मुख्यधारा में भी शामिल हो सकेंगे।