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Aero India 2025: भारत के सबसे बड़े एरो शो में हिस्सा नहीं लेंगे अमेरिकी वायुसेना के F-35 और F-16 फाइटर जेट, ये है बड़ी वजह

Aero India 2025: U.S. Air Force F-35 and F-16 Jets to Skip India’s Biggest Airshow – Here’s Why

Aero India 2025: एरो इंडिया 2025 में अमेरिकी वायुसेना (USAF) के एफ-35 और एफ-16 लड़ाकू विमानों की डेमो फ्लाइट नहीं होगी। यह चौंकाने वाला एलान आधिकारिक तौर पर अमेरिकी वायुसेना की वेबसाइट पर किया गया है। यह शो 10 फरवरी से 14 फरवरी 2025 के बीच बेंगलुरु के येलाहांका एयर बेस में आयोजित होने वाला है। वहीं इस फैसले से एशिया के सबसे बड़े एयरोस्पेस शो में आने वाली कंपनियों और एविएशन लवर्स को निराशा हो सकती है। क्योंकि कई एविएशन प्रेमी और रक्षा विशेषज्ञ दूर-दूर से एफ-35 और एफ-16 जैसे अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों की उड़ानें देखने के लिए एय़र शो में पहुंचते हैं।

Aero India 2025: U.S. Air Force F-35 and F-16 Jets to Skip India’s Biggest Airshow – Here’s Why

एक्सपर्ट्स और एविएशन लवर्स को निराशा

एरो इंडिया एशिया के सबसे बड़े एयरोस्पेस आयोजनों में से एक है, जो हर साल दुनियाभर से रक्षा विशेषज्ञों, एविएशन इंड्स्ट्री के एक्सपर्ट्स और एविएशन लवर्स को आकर्षित करता है। इस शो का उद्देश्य न केवल मिलिट्री और सिविल एविएशन टेक्नोलॉजी का प्रदर्शन करना है, बल्कि डिफेंस सेक्टर में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना भी है।

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हालांकि, अमेरिकी वायुसेना यानी U.S. Air Force (USAF) ने एफ-35 और एफ-16 की डेमो फ्लाइट करने की वजह का खुलासा नहीं किया है। वहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला संभवतः टेक्निकल औऱ डिप्लोमेटिक वजहों या फिर लॉजिस्टिक चुनौतियों के चलते लिया गया होगा। वहीं अगर ये विमान एरो शो में आते तो इसे डिफेंस कोऑपरेशन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को भी बढ़ावा मिलता। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे एय़र शो में अमेरिकी वायुसेना के विमानों की मौजूदगी से लोगों में दिलचस्पी बढ़ती है।

Aero India 2025: U.S. Air Force F-35 and F-16 Jets to Skip India’s Biggest Airshow – Here’s Why

सूत्रों का कहना है कि अमेरिकी विमानों की गैरमौजूदगी एय़र शो (Aero India 2025) में जरूर खलेगी, लेकिन एरो इंडिया 2025 में अन्य रोमांचक हवाई प्रदर्शन और तकनीकी प्रदर्शन दर्शकों को आकर्षित करने में कोई कमीं नहीं छोड़ेंगे। उनका कहना है कि अमेरिकी विमानों की अनुपस्थिति से शो की प्रासंगिकता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। भारतीय वायुसेना के विमानों की तकनीकी क्षमता और प्रदर्शन इस शो का मुख्य आकर्षण रहेगा। आयोजक अब इस कमी को पूरा करने के लिए अन्य डोमेस्टिक या इंटरनेशनल पर्फॉर्मन्सेस जोड़ने की कोशिश की जा सकती है।

वहीं, अमेरिकी विमानों की गैरमौजूदगी के बीच, भारत को अपनी स्वदेशी तकनीकों और रक्षा उपकरणों को प्रदर्शित करने का एक बड़ा मौका मिल सकता है। यह आयोजन ‘मेक इन इंडिया’ पहल को बढ़ावा देने और डोमेस्टिक एविएशन इंडस्ट्री को वैश्विक मंच पर मजबूत करने का अवसर प्रदान करेगा।

एरो इंडिया अब तक न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया की डिफेंस और एविएशन इंडस्ट्री के लिए एक प्रमुख आकर्षण का केंद्र रहा है। हर दो साल पर आयोजित होने वाला यह शो दुनियाभर से सरकारों, उद्योग जगत और तकनीकी विशेषज्ञों को एक साथ लाता है। इस बार भी, आयोजन स्थल पर अत्याधुनिक विमानों की प्रदर्शनी, ड्रोन शो, और लाइव हवाई प्रदर्शन दर्शकों के लिए रोमांचक अनुभव होंगे।

Su-57 Felon बन सकता है एरो इंडिया शो का हिस्सा

भारत में अमेरिकी दूतावास में रक्षा अताशे रियर एडमिरल माइकल एल. बेकर का कहना है कि नई दिल्ली एफ-35 पर निर्णय लेने के “बहुत शुरुआती चरण” में है। लेकिन कहानी कुछ और है। सूत्रों ने बताया कि इसकी असल वजह है रूस का Su-57 Felon, जो इस बार एरो इंडिया शो (Aero India 2025) का हिस्सा हो सकता है। रूसी राष्ट्रपति फरवरी में भारत पर होंगे और वे Su-57 स्टेल्थ फाइटर भारत को देने की पेशकश कर सकते हैं। Su-57 भारत में आएगा। इससे पहले नवंबर 2024 में, इसने चीन में झुहाई एयर शो में भाग लिया था, जो किसी विदेशी देश में इसका पहला एयर शो था।

रूस को उम्मीद है कि उसका अत्याधुनिक Su-57 लड़ाकू विमान, अमेरिकी F-35 और चीनी J-20 माइटी ड्रैगन का जवाब है, और भारतीय वायुसेना की स्टील्थ विमान की जरूरत पूरी कर सकता है। वहीं, एरो इंडिया शो में एफ-35,  एफ-16 के साथ Su-57 लड़ाकू विमान की मौजूदगी से दोनों में क्लैश हो सकता है। हो सकता है कि इसी वजह से अमेरिका ने एफ-35,  एफ-16 को न भेजने का फैसला लिया हो।

पांचवी पीढ़ी का Su-57 फाइटर जेट का प्रोडक्शन काफी सीमित रहा है। 2010 में इसकी पहली उड़ान के बाद से 14 साल हो चुके हैं, और 40 से भी कम विमान अभी तक डिलीवर किए गए हैं। यह मुख्य रूप से डिजाइन और डेवलपमेंट में देरी और पश्चिमी प्रतिबंधों के चलते इसके उत्पादन पर असर पड़ा है। वहीं रूस-युक्रेन वार के चलते इसका उत्पादन 2019 तक भी शुरू भी नहीं हो पाया था।

ISI in Bangladesh: बांग्लादेश आर्मी चीफ को हटाकर ULFA के जरिए ‘चिकन नेक’ पर कब्जा करना चाहती है ISI, रंगपुर में रची ये बड़ी साजिश

ISI in Bangladesh: Plot to Use ULFA for 'Chicken Neck' Control, Conspires to Remove Bangladesh Army Chief

ISI in Bangladesh: भारत और बांग्लादेश के बीच बढ़ते तनाव के बीच ऐसी खबरें आ रही हैं कि हाल ही में पाकिस्तानी सैन्य अधिकारियों ने  बांग्लादेश के सीमावर्ती इलाकों का दौरा किया था। ये अधिकारी भारत के “चिकन नेक” क्षेत्र के पास देखे गए थे, जो पूर्वोत्तर भारत को शेष देश से जोड़ता है। वहीं, इस दौरे के बाद भारत सर्तक हो गया है। खुफिया सूत्रों का कहना है कि खासकर ऐसे समय में जब बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच सैन्य और खुफिया सहयोग की खबरें सामने आ रही हैं, ऐसे में पाकिस्तानी खुफिया अधिकारियों का वहां जाना किसी बड़ी साजिश की तरफ इशारा करता है।

ISI in Bangladesh: Plot to Use ULFA for 'Chicken Neck' Control, Conspires to Remove Bangladesh Army Chief

ISI in Bangladesh: एमिरात की फ्लाइट से ढाका पहुंचे थे आईएसआई चीफ

21 जनवरी 2025 को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के चीफ लेफ्टिनेंट जनरल असीम मलिक ने ढाका का दौरा किया था। वे ढाका के रैडिसन ब्लू होटल में रुके थे। जहां उनके साथ पाकिस्तान के दो वरिष्ठ अधिकारी भी थे—इनमें मेजर जनरल शाहिद अमीर अफसर, डीजी ए; और मेजर जनरल आलम अमीर अवान, डीजी एसएंडए। ये अधिकारी एमिरात की फ्लाइट (EK-586) से आए थे और चुपचाप होटल की तीसरी मंजिल पर रुके थे। वहीं, पाकिस्तान के खुफिया अफसरों की अगुवानी बांग्लादेश सेना के क्वार्टर मास्टर जनरल लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद फैज-उर-रहमान ने की थी। पाकिस्तानी ISI के अधिकारियों ने बांग्लादेश की खुफिया एजेंसी DGFI के प्रमुख मेजर जनरल जाहांगीर आलम से भी मुलाकात की थी। रहमान को कट्टरपंथी इस्लामी विचारधारा का समर्थक माना जाता है।

ISI in Bangladesh: बांग्लादेश सेना प्रमुख के खिलाफ विद्रोह की तैयारी

सूत्रों का कहना है कि लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद फैज-उर-रहमान, वही शख्स हैं, जो मौजूदा बांग्लादेश आर्मी चीफ जनरल वकार-उज-जमां को हटाने की योजना बना रहे हैं। और उसमें उन्हें पाकिस्तान की आईएसआई का मजबूत समर्थन मिल रहा है। वकार-उज-जमां को भारत के साथ सहयोगी नीति अपनाने वाला नेता माना जाता है। वहीं, पिछले हफ्ते पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के चीफ असीम मलिक के ढाका दौरे ने इस साजिश को और हवा दी। कहा जा रहा है कि इस मुलाकात का उद्देश्य बांग्लादेशी सेना को भारत विरोधी नीतियों की ओर मोड़ना और खुफिया नेटवर्क को मजबूत करना था। सूत्रों ने बताया कि अब वकार-उज-जमां की स्थिति कमजोर होती जा रही है। रहमान ने सेना के भीतर कट्टरपंथी धड़ा मजबूत कर लिया है और डीजीएफआई (बांग्लादेश की खुफिया एजेंसी) का समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। भले ही रहमान के पास कोई ट्रूप्स कमांड नहीं है, लेकिन वे डीजीएफआई का समर्थन पाने की पूरी कोशिशों में जुटे हुए हैं।

भारत के “चिकन नेक” इलाके का दौरा किया आईएसआई चीफ ने

पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के चीफ लेफ्टिनेंट जनरल असीम मलिक और बांग्लादेश सेना के क्वार्टर मास्टर जनरल लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद फैज-उर-रहमान से मुलाकात के दौरान बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच खुफिया नेटवर्क को मजबूत करने और सामरिक सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। आईएसआई के अधिकारियों ने बांग्लादेश की सीमा से सटे भारत के “चिकन नेक” इलाके का दौरा भी किया। यह इलाका भारत के लिए सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पूर्वोत्तर को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है।

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सूत्रों के मुताबिक, आईएसआई के अधिकारियों ने बांग्लादेश के रंगपुर जिले का दौरा किया, जो भारत के चिकन नेक क्षेत्र से महज 130 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसके अलावा, पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल को चटगांव हिल ट्रैक्ट्स जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में भी ले जाया गया। यह इलाका रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है और भारत-बांग्लादेश सीमा पर बढ़ते तनाव के बीच इस दौरे के बाद भारत पूरी तरह से सचेत हो गया है।ॉ

आठ पूर्वोत्तर राज्यों का संपर्क है चिकन नेक से

वहीं, चिकन नेक की बात करें, तो इस क्षेत्र से भारत के आठ पूर्वोत्तर राज्यों का संपर्क शेष देश से जुड़ा हुआ है। पूर्वोत्तर भारत के आठ राज्यों में से चार – असम, त्रिपुरा, मिजोरम और मेघालय – बांग्लादेश के साथ सीमा साझा करते हैं। इन राज्यों के भारत के बाकी हिस्सों से जुड़ने का एकमात्र मार्ग सिलिगुड़ी कॉरिडोर या “चिकन नेक” है, जो महज 22 किलोमीटर चौड़ा है। पाकिस्तानी अधिकारियों का सीमावर्ती इलाकों का दौरा करना, और वह भी ऐसे समय में जब भारत और बांग्लादेश के संबंध तनावपूर्ण हैं, भारत की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की ISI लंबे समय से भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में अशांति फैलाने की कोशिश कर रही है। इस क्षेत्र में सक्रिय उग्रवादी संगठनों को पाकिस्तान के समर्थन के सबूत पहले भी मिल चुके हैं। अब, बांग्लादेश के माध्यम से भारत को घेरने की रणनीति पर काम किया जा रहा है। यह इलाका रणनीतिक दृष्टि से इतना महत्वपूर्ण है कि यहां पर किसी भी प्रकार की अस्थिरता या अवैध गतिविधि भारत के लिए बड़ी समस्या बन सकती है। बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच बढ़ती नजदीकी के कारण इस क्षेत्र में आतंकवाद और तस्करी जैसी गतिविधियां बढ़ने की आशंका है।

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आईएसआई चीफ के साथ दिखा जसीमुद्दीन रहमानी 

सूत्रों ने बताया कि बांग्लादेश के रंगपुर डिवीजन में स्थानीय निवासियों ने आतंकी संगठन अंसार-उल-बांग्ला टीम (जो अल कायदा से जुड़ा हुआ है) के नेता जसीमुद्दीन रहमानी को पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई और बांग्लादेशी सेना के अधिकारियों के साथ देखा है। जसीमुद्दीन रहमानी, जो कई आतंकवादी गतिविधियों के लिए कुख्यात है, पहले से ही बांग्लादेशी और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर रहा है। रंगपुर डिवीजन भारत की उत्तर-पूर्व सीमा के करीब है।

पाकिस्तान के साथ गलबहियां कर रहा है बांग्लादेश

बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच हाल के वर्षों में रिश्तों में नया मोड़ आया है। 2024 में शेख हसीना सरकार के हटने के बाद से, बांग्लादेश में कट्टरपंथी ताकतों का प्रभाव बढ़ा है। वर्तमान अंतरिम सरकार, जिसमें मोहम्मद यूनुस प्रमुख भूमिका में हैं, भारत के प्रति सख्त और पाकिस्तान के प्रति नरम रुख अपना रही है। हाल ही में, बांग्लादेश ने पाकिस्तान के साथ वीजा नियमों में ढील दी थी और दोनों देशों के बीच पहली बार कार्गो शिप का संचालन शुरू हुआ। इसके अलावा, बांग्लादेशी सेना के जवान अब पाकिस्तानी सेना से ट्रेनिग लेंगे, और बांग्लादेश “अमन 2025” नौसैनिक अभ्यास में भी भाग लेगा। यह एक्सरसाइज कराची में आयोजित किया जाएगा। इसके अलावा बांग्लादेश के वायुसेना पायलट अब चीन और पाकिस्तान द्वारा विकसित लड़ाकू विमान JF-17 की ट्रेनिंग ले रहे हैं।

उल्फा चीफ परेश बुरुआ से मिले आईएसआई अफसर

सूत्रों ने बताया कि आईएसआई चीफ ने उल्फा चीफ परेश बुरुआ से भी मुलाकात की थी। शेख हसीना ने भारत और बांग्लादेश के बीच सुरक्षा और व्यापार के क्षेत्र में अहम समझौते किए थे। उनके कार्यकाल में बांग्लादेश ने भारत विरोधी गतिविधियों पर लगाम लगाई थी। 2009 से 2015 के बीच बांग्लादेश ने भारत के पूर्वोत्तर में सक्रिय आतंकवादी संगठनों जैसे उल्फा (ULFA) के कई नेताओं को भारत के सुपुर्द किया था। उल्फा को भारत के खिलाफ साजिश रचने के लिए पाकिस्तान और बांग्लादेश दोनों का समर्थन मिलता रहा है। उल्फा  नेता परेश बरुआ ने कई बार पाकिस्तान और अफगानिस्तान में आतंकवादी प्रशिक्षण शिविरों में हिस्सा लिया है।

एक रिटायर्ड बांग्लादेशी जनरल ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, “बांग्लादेशी और पाकिस्तानी सैन्य अधिकारियों की यात्राएं वाकई चौंकाने वाली हैं। यह संकेत देती हैं कि किसी सैन्य-सुरक्षा उद्देश्य को बहुत कम समय में पूरा करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, यह कहना मुश्किल है कि इन लगातार बैठकों और बांग्लादेश में इनके संभावित उद्देश्यों पर भारत की प्रतिक्रिया आने वाले हफ्तों और महीनों में क्या होगी।”

बांग्लादेश ने 2009 से 2015 के बीच भारत को ULFA नेताओं को सौंपा

सूत्रों ने बताया कि 2009 से 2015 के बीच, बांग्लादेश ने यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (ULFA) के आधा दर्जन से अधिक वरिष्ठ नेताओं को भारत को सौंपा। इन नेताओं में संगठन के महासचिव अनूप चेतिया, अध्यक्ष अरबिंद राजखोवा, विदेश सचिव सशधर चौधरी, वित्त सचिव चित्रबान हजारिका और सैन्य अभियानों के उप प्रमुख राजू बरुआ शामिल थे।
2023 में जब ULFA और भारत सरकार के बीच शांति समझौता हुआ, तो विद्रोही नेताओं ने स्वीकार किया कि बांग्लादेश की ‘प्रो-इंडिया’ अवामी लीग सरकार द्वारा भारतीय उग्रवादी समूहों पर कड़ी कार्रवाई ने उन्हें 2011 में सरकार के साथ शांति वार्ता में शामिल होने के लिए मजबूर किया।

ISI और अफगान मुजाहिदीन के साथ ULFA के संबंध

साउथ एशिया टेररिज्म पोर्टल (SATP) के अनुसार, ULFA के विद्रोहियों ने पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) और अफगान मुजाहिदीन के साथ संबंध बनाए थे। अनुमान है कि लगभग 200 ULFA कार्यकर्ताओं ने पाकिस्तान और अफगानिस्तान में प्रशिक्षण लिया था। गिरफ्तार कार्यकर्ताओं से पूछताछ और जब्त दस्तावेजों से यह खुलासा हुआ कि बांग्लादेश की डिफेंस फोर्सेस इंटेलिजेंस (DFI) ने सिलहट जिले में ULFA कैडरों को प्रशिक्षण दिया था।

करगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तान का समर्थन भी किया था ULFA ने

ISI ने ULFA नेताओं, विशेष रूप से परेश बरुआ, को कई पासपोर्ट प्राप्त करने में मदद की। इसके अलावा, कई ULFA कैडरों को पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमा के पास विभिन्न प्रशिक्षण केंद्रों में हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी गई। इसमें रॉकेट लॉन्चर्स, विस्फोटक और असॉल्ट हथियारों के इस्तेमाल का प्रशिक्षण शामिल था। यहां तक कि ULFA के शीर्ष नेतृत्व ने पाकिस्तान के उच्चायोग की मदद से कराची की यात्रा की, जहां उन्हें ISI संचालित आतंकवादी प्रशिक्षण केंद्रों में ले जाया गया। बता दें कि ULFA ने 1999 के करगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तान का समर्थन भी किया था।

बांग्लादेश द्वारा ULFA के खिलाफ उठाए गए कदमों ने पूर्वोत्तर भारत में सुरक्षा को मजबूत किया और विद्रोही नेताओं को शांति वार्ता के लिए मजबूर किया। बांग्लादेश की अवामी लीग सरकार की यह नीति भारत-बांग्लादेश संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुई थी।

चीन से गतिविधियां चला सकता है परेश बरुआ

वहीं, बांग्लादेश में मौजूदा राजनीतिक हालात परेश बरुआ के नेतृत्व वाले ULFA (यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम) गुट के लिए एक नया सहारा बन सकते हैं। यह गुट शांति वार्ता का विरोध करता रहा है और भारत-म्यांमार सीमा के जंगलों में सक्रिय है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, परेश बरुआ अब चीन में रहकर अपनी गतिविधियां चला सकता है। 2004 के चटगांव हथियार बरामदगी मामले में बांग्लादेश की एक हाईकोर्ट बेंच ने परेश बरुआ की फांसी की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया है। यह घटना भारत के पड़ोस में सबसे बड़ी अवैध हथियारों की जब्ती में से एक थी। चटगांव बंदरगाह पर पकड़े गए 10 ट्रक अवैध हथियारों और गोला-बारूद में शामिल थे: इनमें 4,930 फायर आर्म्स, 27,020 ग्रेनेड, 840 रॉकेट लॉन्चर, 300 रॉकेट, 2,000 ग्रेनेड लॉन्चिंग ट्यूब, 6,392 मैगजीन और 11 लाख से ज्यादा गोलियां शामिल थीं। इन हथियारों को चीन से तस्करी कर भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में सक्रिय उग्रवादी समूहों को पहुंचाने की योजना थी।

मणिपुर में हिंसा बढ़ने की आशंका

सूत्रों का कहना है कि उल्फा का आईएसआई से मिलना बड़ी कहानी बयां कर रहा है। आशंका जताई जा रही है कि मणिपुर में विद्रोही गतिविधियों में फिर से तेजी आ सकती है। म्यांमार के गृहयुद्ध प्रभावित इलाकों में सुरक्षित ठिकानों के खत्म होने के चलते 2023 में मणिपुर के मैतेई-प्रभुत्व वाले यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट (UNLF) ने सरकार के साथ संघर्ष विराम समझौता किया था। सैकड़ों विद्रोही आत्मसमर्पण कर चुके थे। वहीं, UNLF के वार्ता-विरोधी गुट और असंतुष्ट सदस्य अब बांग्लादेश में नया ठिकाना तलाश सकते हैं। यह स्थिति भारत के लिए गंभीर चिंता का विषय बन सकती हैं।

Indo-Bangladesh border: भारत-बांग्लादेश सीमा पर नागरिकों को हथियार चलाना सिखा रही BGB, BSF को निशाना बनाने की है बड़ी तैयारी!

Indo-Bangladesh Border: BGB Training Civilians in Weapons Use, Targeting BSF Alleged!

Indo-Bangladesh border: बांग्लादेश ने भारत-बांग्लादेश सीमा के पास रह रहे नागरिकों को हथियारों की ट्रेनिंग देना शुरू कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक बांग्लादेश ने सीमा से सटे क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को हथियार चलाने की ट्रेनिंग देना शुरू कर दिया है, जिससे सीमा पर तैनात सुरक्षा बलों के लिए खतरा पैदा हो गया है। वहीं, बांग्लादेश के इस कदम के बाद सुरक्षा विशेषज्ञों ने गैर-घातक संधि (Non-Lethal Treaty) की समीक्षा की मांग उठाई है। विशेषज्ञों का कहना है कि सीमा सुरक्षा बल (BSF) को अधिक स्वतंत्रता देकर सीमा पर बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।

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Indo-Bangladesh border: बड़े टकराव की तैयारी

सूत्रों के अनुसार, बांग्लादेश ने सीमा पर रहने वाले नागरिकों को छोटे हथियारों के इस्तेमाल की ट्रेनिंग देना शुरू कर दिया है। यह आशंका जताई जा रही है कि इन नागरिकों को सीमा पर टकराव या भारत के सीमा बलों के खिलाफ इस्तेमाल किया जा सकता है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम सीमा क्षेत्र में बांग्लादेश का दबदबा स्थापित करने और बांग्लादेश की तरफ से चलाई जा रहीं अवैध गतिविधियों जैसे तस्करी पर भारतीय जवानों की कार्रवाई को रोकने के लिए उठाया गया हो सकता है।

BSF को जवाबी कार्रवाई में हो सकती है दिक्कत

सूत्रों के मुताबिक भारत-बांग्लादेश सीमा बेहद संवेदनशील है और यहां तस्करी, मानव तस्करी और अन्य गैर-कानूनी गतिविधियों बेहद आम हैं। वहीं, नागरिकों को हथियार चलाने की ट्रेनिंग देने से बड़ी समस्या पैदा हो सकती है। क्योंकि दोनों देशों के बीच पहले से एक गैर-घातक संधि (Non-Lethal Treaty) लागू है, जिसके तहत सीमा पर हथियारों का इस्तेमाल कम करने, सीमा पर शांति बनाए रखने और वहां रहने वाले लोगों की जानमाल की हानि न हो, इसलिए लागू की गई थी। हालांकि, बांग्लादेश के इस कथित कदम के बाद सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि इस संधि से BSF को आगे जवाबी कार्रवाई करने में दिक्कत हो सकती है, जिससे बीएसएफ कर्मियों और नागरिकों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।

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Indo-Bangladesh border: BSF को मिलें ज्यादा अधिकार

सुरक्षा विशेषज्ञों और पूर्व सैन्य अधिकारी अब गैर-घातक संधि की समीक्षा की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि मौजूदा हालात में BSF को अधिक अधिकार मिलने चाहिए। यदि बांग्लादेश हथियारबंद नागरिकों को सीमा के पास तैनात कर रहा है, तो भारतीय सुरक्षा बलों को प्रभावी तरीके से जवाब देने के लिए पर्याप्त संसाधन और अधिकार मिलने चाहिए।

बता दें कि पिछले साल अगस्त में शेख हसीना सरकार के सत्ता से बाहर होने के बाद बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ी है। अंतरिम सरकार द्वारा लगातार भारत विरोधी बयान दिए जा रहे हैं, जिससे दोनों देशों के रिश्तों में खटास बढ़ी है।

बांग्लादेशी सैनिक बना रहे बंकर

इससे पहले पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के सुखदेवपुर गांव के पास भारत-बांग्लादेश सीमा पर तनाव बढ़ने की खबरें सामने आईं थीं। भारतीय किसानों ने बांग्लादेश पर आरोप लगाया है कि उसने सीमा पर बंकर बनाया है, जिसमें बांग्लादेशी सैनिक हथियारों के साथ तैनात हैं।

सुखदेवपुर के किसानों का दावा है कि बांग्लादेशी सैनिक न केवल सीमा पर बंकर बना रहे हैं, बल्कि भारतीय जमीन पर घुसपैठ करने वालों को प्रोत्साहित कर रहे हैं। किसानों ने आरोप लगाया कि बांग्लादेशी सैनिक सीमा पर बाड़ लगाने के काम में भी बाधा डालते हैं और भारतीय किसानों को गोली मारने की धमकी देते हैं।

भारत और बांग्लादेश के बीच 4096 किलोमीटर की सीमा है, जिसमें पश्चिम बंगाल का बड़ा हिस्सा शामिल है। हाल ही में बांग्लादेश ने इस बात पर आपत्ति जताई कि भारत सीमा पर बाड़ या कटीले तार लगा रहा है।

बांग्लादेशी सीमा रक्षक (BGB) द्वारा भारतीय किसानों को धमकाने और बाड़ लगाने के काम को रोकने की कोशिशों ने दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है।

गैर-घातक हथियारों का इस्तेमाल

इस बीच, बांग्लादेश सरकार ने अपने सीमा रक्षकों को साउंड ग्रेनेड और आंसू गैस जैसे गैर-घातक हथियार देने का फैसला किया है। बांग्लादेश के गृह मंत्रालय के सलाहकार लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) जहांगीर आलम चौधरी ने एक प्रेस ब्रीफिंग में इस फैसले की पुष्टि की।

चौधरी ने कहा, “हमने बांग्लादेश सीमा रक्षक बल (BGB) के लिए साउंड ग्रेनेड और आंसू गैस के गोले खरीदने की मंजूरी दे दी है।” उन्होंने यह भी कहा कि भारत को इस कदम पर नकारात्मक प्रतिक्रिया देने की जरूरत नहीं है, क्योंकि भारत पहले से ही अपनी सीमा पर इसी तरह के गैर-घातक हथियारों का इस्तेमाल करता है।

हाल ही में बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने भारत के उच्चायुक्त प्रणय वर्मा को सीमा विवाद पर तलब किया। बांग्लादेश ने आरोप लगाया कि भारत पांच स्थानों पर सीमा पर बाड़ लगाने की कोशिश कर रहा है, जो एक द्विपक्षीय समझौते का उल्लंघन है। इसके जवाब में, भारत के विदेश मंत्रालय ने भी बांग्लादेश के उप उच्चायुक्त नुरल इस्लाम को तलब किया और सीमा पर बढ़ते तनाव पर चर्चा की।

BSF का ‘ऑप्स अलर्ट’ अभियान शुरू

वहीं, भारत ने 76वें गणतंत्र दिवस समारोह को देखते हुए बांग्लादेश सीमा पर चौकसी बढ़ा दी है और सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने 10 दिन का ‘ऑप्स अलर्ट’ अभियान शुरू किया है। यह अभियान 22 जनवरी से 31 जनवरी, 2025 तक चलेगा।  BSF ने जानकारी दी है कि यह अभियान भारत-बांग्लादेश सीमा के सभी फील्ड फॉर्मेशनों में चलाया जा रहा है। संवेदनशील इलाकों, विशेष रूप से नदी किनारे और बिना बाड़ वाले क्षेत्रों में गश्त और निगरानी बढ़ा दी गई है। इस ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य सीमा की सुरक्षा को पुख्ता करना और किसी भी संभावित चुनौती का सामना करने के लिए तत्पर रहना है।

Made in India स्मार्टफोन से क्यों घबराया पाकिस्तान? पाकिस्तान की कैबिनेट ने नागरिकों को जारी की ये बड़ी चेतावनी

Why Is Pakistan Worried About Made in India Smartphones? Cabinet Issues Warning

Made in India: इस्लामाबाद: पाकिस्तान ने मेड इन इंडिया इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और स्मार्टफोन, जिनमें iPhones भी शामिल हैं, उन्हें देश की साइबर सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा घोषित किया है। पाकिस्तान के कैबिनेट डिवीजन ने सभी संघीय मंत्रालयों, डिवीजनों और प्रांतीय मुख्य सचिवों को एक पत्र जारी कर इस संबंध में सावधानी बरतने की सलाह दी है।

Why Is Pakistan Worried About Made in India Smartphones? Cabinet Issues Warning

 

पाकिस्तानी सरकार के सूत्रों का कहना है कि भारत और पाकिस्तान के बीच भू-राजनीतिक तनाव के चलते भारतीय उत्पादों से पाकिस्तान के महत्वपूर्ण इनफॉमेशन सिस्टम पर साइबर हमले की आशंका बढ़ गई है। इसमें डेटा चोरी, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से संवेदनशील जानकारी तक पहुंच और एप्पल-पोर्टल जैसी दिखने वाली फर्जी सेवाओं का उपयोग शामिल है।

Made in India: डेटा चोरी और साइबर हमले की आशंका

सूत्रों ने चेतावनी दी है कि मेड इन इंडिया उपकरणों और स्मार्टफोन्स के जरिए पाकिस्तानी उपभोक्ताओं के डेटा की चोरी का खतरा बढ़ गया है। इन उत्पादों में हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर स्तर पर छेड़छाड़, वायरस या स्पायवेयर के मौजूद होने का भी जोखिम है।

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साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक, भारतीय उत्पादों के माध्यम से डेटा इंटरसेप्शन और टारगेटेड साइबर गतिविधियों को अंजाम दिया जा सकता है। इसके अलावा, हैकर्स भारतीय टेक्निकल सपोर्ट एजेंट या सर्विस सेंटर्स का भेष बनाकर ग्राहकों को धोखा दे सकते हैं।

सावधानी बरतने की सलाह

कैबिनेट डिवीजन द्वारा जारी पत्र में पाकिस्तानी उपभोक्ताओं को सलाह दी गई है कि वे एपल के उत्पादों को केवल ऑथराइज्ड रीसेलर्स से खरीदें और डिवाइस की सील और पैकेजिंग को अच्छी तरह जांच लें। इसके अलावा, उपकरणों को समय-समय पर एपल के आधिकारिक ऑपरेटिंग सिस्टम से अपडेट करने का सुझाव दिया गया है।

पत्र में यह भी कहा गया है कि उपभोक्ता अपनी संचार सेवाओं को सुरक्षित रखने के लिए एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड सेवाओं का उपयोग करें। साथ ही, फोन में मजबूत पासवर्ड लगाएं और एंटीवायरस एप्लिकेशन इंस्टॉल करें।

पाकिस्तानी सरकार का मानना है कि भारत में बने उपकरणों के जरिए न केवल व्यक्तिगत डेटा बल्कि देश के संवेदनशील जानकारी को भी खतरा हो सकता है। इसके चलते सरकारी अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

हालांकि, इस मुद्दे पर भारतीय विदेश मंत्रालय कीकोई प्रतिक्रिया अभी तक सामने नहीं आई है।  ।

Explained: What does Indian law says about Illegal Indian Immigrants, will they prosecute in India after return?

Explained: What Indian Law Says About Illegal Indian Immigrants and Prosecution After Return
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Illegal Indian Immigrants: With the Donald Trump taking over as the President of US, one of his first announcement over illegal immigrants has raised concerns over millions of illegal undocumented residents and their future.

According to an estimate, US has around 11.7 million illegal residents without proper documentation.

Trump, who had made illegal immigration one of his key campaign issues, has taken this up as a priority.

A significant number of Indians have been repatriated from the US, with around 1,100 individuals returning between October 2023 and September 2024 through charter and commercial flights. This development comes amidst a substantial increase in deportations of Indians from the US, with numbers rising five-fold in four years, from 292 in 2021 to 1,529 last year, as per ICE’s 2024 Annual Report.

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The Indian government is keen on maintaining friendly relations with the US, particularly under the new administration. A key area of concern is the protection of student visas and the H-1B program, which is crucial for skilled Indian workers. Interestingly, Indians accounted for nearly 75% of all 386,000 H-1B visas granted in 2023.

US has been deporting individuals to various countries, including India, as part of its efforts to enforce immigration laws.

INDIA’S STAND ON ILLEGAL INDIAN IMMIGRANTS

Ministry of External Affairs spokesperson Randhir Jaiswal on Friday had said India is against illegal immigration as it is connected to organised crime.

“For Indian nationals, whether in the United States or elsewhere, if they are overstaying or residing in a country without proper documentation, we will bring them back, provided the necessary documents to verify their nationality are shared with us,” Jaiswal said.

WHAT DOES INDIAN LAW SAY ABOUT ILLEGAL MIGRANTS

First and foremost requirement under the Indian law is to analyse various factors of an Indian illegal migrants – circumstances of migration, conduct abroad and whether they have violated any indian or international law.

Explained: What Indian Law Says About Illegal Indian Immigrants and Prosecution After Return
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VIOLATION UNDER THE PASSPORT ACT

  • Section 12 of the Act states that leaving India without a valid passport or travel document may lead to penalties, including imprisonment of up to 2 years and a fine.
  • If an Indian citizen traveled abroad using fraudulent documents, they might face additional charges for forgery under the Indian Penal Code (IPC).

OFFENCE COMMITTED ON FOREIGN LAND

  • If the individual committed criminal offenses in another country (e.g., working illegally, overstaying visas), they might face prosecution there before being deported.
  • Indian authorities could investigate their activities to ensure no national security concerns or international violations are involved.

WHAT ACTION INDIA CAN TAKE ON RETURN

  • Re-entry Verification: Authorities may verify the individual’s identity, travel history, and documents upon return.
  • Deportation Record: If the migrant was deported, Indian authorities might scrutinize their record for potential violations of Indian laws.
  • Interrogation: Returnees might be questioned by Indian immigration and intelligence agencies about their activities abroad, particularly if they come from sensitive regions.
  • Charges that can be imposed: Offenses like using false documents, human trafficking involvement, or working abroad without authorization could result in prosecution.
  • Use of Forged Documents: If forged documents were used, the individual could face charges under the IPC for forgery and cheating.

India-France Deal: अगले हफ्ते मिल सकती है 26 राफेल-M और तीन स्कॉर्पीन पनडुब्बी डील को CCS की मंजूरी, फरवरी में पेरिस जाएंगे पीएम मोदी

India-France Deal: CCS Approval Likely Next Week for 26 Rafale-M Jets and 3 Scorpene Submarines, PM Modi to Visit Paris in February
Source @macaskeel

India-France Deal: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फरवरी में फ्रांस की यात्रा पर जा सकते हैं, जहां वे फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों द्वारा आयोजित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक्शन समिट में भाग लेंगे। इस यात्रा के दौरान, भारत और फ्रांस के बीच दो बड़े रक्षा समझौतों को अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है। ये समझौते राफेल-M लड़ाकू विमानों और स्कॉर्पीन पनडुब्बियों की खरीद को लेकर हैं।

India-France Deal: CCS Approval Likely Next Week for 26 Rafale-M Jets and 3 Scorpene Submarines, PM Modi to Visit Paris in February
Source @macaskeel

सूत्रों के अनुसार, इन रक्षा सौदों की कुल लागत 10 अरब डॉलर (83,000 करोड़ रुपये) से अधिक होगी। इनमें भारतीय नौसेना के विमानवाहक पोतों के लिए 26 राफेल-M लड़ाकू विमानों की खरीद और तीन अतिरिक्त स्कॉर्पीन पनडुब्बियों का निर्माण शामिल है। अगले हफ्ते कैबिनेट सुरक्षा समिति (CCS) इन समझौतों की अपनी मंजूरी दे सकती है।

India-France Deal: 10-11 फरवरी को पेरिस में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस समिट

फ्रांसीसी राष्ट्रपति कार्यालय ने पहले ही पुष्टि कर दी है कि प्रधानमंत्री मोदी को 10-11 फरवरी को आयोजित होने वाले आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस समिट के लिए आमंत्रित किया गया है। यह समिट वैश्विक AI क्षेत्र को सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ प्रदान करने के लिए ठोस कदम उठाने पर केंद्रित होगी। इस दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय वार्ता भी होगी। उम्मीद की जा रही है कि इन दौरान इन रक्षा सौदों पर अंतिम मुहर लगाई जा सकती है।

भारतीय नौसेना को चाहिए राफेल-M जैसे फाइटर जेट

भारतीय नौसेना को राफेल-M जैसे अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों की सख्त जरूरत है। ये विमान नौसेना के दो विमान वाहक पोतों आईएनएस विक्रमादित्य और आईएनएस विक्रांत पर तैनात किए जाएंगे। इस डील में 22 सिंगल-सीटर और 4 ट्विन-सीटर ट्रेनर राफेल-M जेट्स शामिल होंगे।

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पनडुब्बियों की बात करें, तो तीन अतिरिक्त स्कॉर्पीन पनडुब्बियां भारतीय नौसेना के बेड़े को मजबूत करेंगी। मौजूदा स्कॉर्पीन पनडुब्बियों का निर्माण मुंबई के मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड और फ्रांस की नेवल ग्रुप के सहयोग से हो रहा है। पहले हुए अनुबंध में शामिल छह स्कॉर्पीन पनडुब्बियों में से पांच पहले ही नौसेना में शामिल हो चुकी हैं। वहीं, छठी पनडुब्बी, आईएनएस वागशीर  को इसी महीने 15 जनवरी को भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था।

इन सौदों के अलावा, भारत रक्षा उपकरणों के स्वदेशीकरण की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। हाल ही में, रक्षा मंत्रालय ने दो स्कॉर्पीन पनडुब्बियों के लिए 2,867 करोड़ रुपये के कॉन्ट्रैक्ट्स पर हस्ताक्षर किए, जिनमें एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन मॉड्यूल और भारी टॉरपीडो जैसे स्वदेशी उपकरण शामिल हैं।

राफेल-M और स्कॉर्पीन पनडुब्बियों का सौदा भारत की समुद्री क्षमताओं को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। यह न केवल भारतीय नौसेना को और सक्षम बनाएगा, बल्कि भारत-फ्रांस रक्षा साझेदारी को भी नई दिशा देगा। इन सौदों से भारतीय नौसेना अपने मिशनों को प्रभावी ढंग से अंजाम देने में सक्षम होगी और बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों के बीच देश की समुद्री सीमाओं की रक्षा करेगी।

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इससे पहले पिछले साल दो दिसंबर को नेवी डे के मौके नौसेना प्रमुख एडमिरल एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने अपने सालाना प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि दोनों डील अंतिम चरण में हैं और अगले महीने तक पूरी हो सकती हैं। उन्होंने बताया, “यह केवल औपचारिकताओं को पूरा करने का मामला है। हमें उम्मीद है कि स्कॉर्पीन पनडुब्बी और राफेल-M डील पर जल्द ही दस्तखत हो जाएंगे।

उन्होंने कहा राफेल-M डील के बारे में कहा था कि यह CCS की मंजूरी से एक कदम दूर है। मंजूरी मिलते ही समझौता साइन कर लिया जाएगा, और क्योंकि यह सरकार-से-सरकार का सौदा है, इसे तेजी से लागू किया जाएगा। राफेल-M डील में 22 सिंगल-सीटर लड़ाकू विमान और चार ट्विन-सीटर ट्रेनर शामिल हैं। यह सौदा नौसेना की तत्कालिक जरूरतों को पूरा करने के लिए है, जब तक कि स्वदेशी ट्विन-इंजन डेक आधारित फाइटर तैयार नहीं हो जाता।

नौसेना के पास दो विमानवाहक पोत 

भारतीय नौसेना वर्तमान में दो विमानवाहक पोत संचालित करती है आईएनएस विक्रमादित्य और आईएनएस विक्रांत। इन पर राफेल-M जैसे आधुनिक लड़ाकू विमानों की तैनाती बेहद जरूरी है। साथ ही, aging fleet और प्रोजेक्ट-75I के तहत छह एडवांस पनडुब्बियों की देरी को देखते हुए, तीन अतिरिक्त स्कॉर्पीन पनडुब्बियां नौसेना की युद्ध क्षमता को बढ़ाने में मदद करेंगी।

चीप, पाकिस्तान पर कही थी ये बात

एडमिरल त्रिपाठी ने पाकिस्तानी नौसेना को लेकर कहा था, “हम जानते हैं कि पाकिस्तान 50 जहाजों वाली नौसेना बनाने की कोशिश कर रहा है। उनकी आर्थिक स्थिति को देखते हुए यह आश्चर्यजनक है कि वे इस विस्तार के लिए फंड कहां से ला रहे हैं। वहीं, एडमिरल ने भारतीय महासागरीय क्षेत्र (Indian Ocean Region) में चीन की गतिविधियों पर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि नौसेना ने पिछले 12 महीनों में पीएलए नेवी (PLA Navy) के जहाजों और अनुसंधान पोतों की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी है। उन्होंने कहा, “महासागर सभी के लिए खुले हैं, जब तक वे हमारी सुरक्षा को प्रभावित नहीं करते।”

एडमिरल त्रिपाठी ने यह भी बताया था कि भारतीय शिपयार्डों में फिलहाल 62 जहाज और एक पनडुब्बी निर्माणाधीन हैं। इसके अलावा, 31 नए जहाजों और पनडुब्बियों के निर्माण के लिए मंजूरी मिल चुकी है। इनमें से सभी को भारत में ही बनाया जाएगा। उन्होंने कहा, “2025 में हर महीने एक नया जहाज नौसेना में शामिल किया जाएगा।”

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Indian Navy Tests Air-Drop Container, MiG-29 Gets Supersonic Rampage Missiles

Indian Navy: भारत की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा में तैनात भारतीय नौसेना ने हाल ही में दो बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। गोवा के तट पर एयर ड्रॉपेबल कंटेनर का सफल परीक्षण और सुपरसोनिक रैंपेज मिसाइल को मिग-29 लड़ाकू विमानों में शामिल करना, नौसेना की बढ़ती क्षमताओं का प्रतीक है।

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Indian Navy: एयर ड्रॉपेबल कंटेनर का सफल परीक्षण

24 जनवरी को गोवा के तट पर एयर ड्रॉपेबल कंटेनर (एडीसी-150) का सफल परीक्षण किया गया। इस तकनीक की मदद से युद्धपोतों को तटीय इलाकों पर लौटे बिना ही जरूरी रसद, उपकरण और दवाइयां उपलब्ध कराई जा सकेंगी। भारतीय नौसेना के पी8आई टोही विमान के जरिए इस कंटेनर को समुद्री मोर्चे पर गिराया गया।

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यह कंटेनर 150 किलोग्राम तक वजन उठा सकता है और इसे युद्ध और शांति दोनों समय में उपयोग किया जा सकता है। डीआरडीओ की तीन प्रयोगशालाओं—विशाखापट्टनम की नेवल साइंस एंड टेक्नोलॉजी लैबोरेटरी, आगरा की एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट इस्टैब्लिशमेंट और बेंगलुरु की एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट इस्टैब्लिशमेंट—ने इसे विकसित किया है।

डीआरडीओ ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर इस उपलब्धि की जानकारी साझा की। डीआरडीओ ने बताया कि यह ‘एयर ड्रॉपेबल कंटेनर’ समुद्र में शांति और युद्धकालीन दोनों परिस्थितियों में तैनात नौसेना के जहाजों तक रसद और जरूरी उपकरण पहुंचाने में सक्षम है। इस परीक्षण के दौरान कंटेनर को समुद्र में निर्धारित स्थान पर गिराया गया।

डीआरडीओ द्वारा विकसित यह कंटेनर पूरी तरह से स्वदेशी है। इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय नौसेना को तटीय इलाकों पर वापस आए बिना लंबे समय तक समुद्र में तैनात रहने में मदद करना है। यह क्षमता भारत की रक्षा तैयारियों को और मजबूत बनाएगी।

समुद्री ऑपरेशंस में होगा फायदा

भारतीय नौसेना का क्षेत्रीय ऑपरेशन इंडियन ओशन, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी तक फैला है। ऐसे में तट से 2000 किमी या उससे अधिक दूरी पर तैनात जहाजों को तत्काल रसद पहुंचाना एक चुनौती भरा कार्य होता है। एयर ड्रॉपेबल कंटेनर के विकसित होने से युद्धपोत लंबे समय तक समुद्र में तैनात रह सकेंगे और उनकी आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।

मिग-29 लड़ाकू विमानों के लिए रैंपेज मिसाइल

वहीं, भारतीय नौसेना ने अपनी हवाई क्षमताओं को और मजबूत करने के लिए सुपरसोनिक रैंपेज मिसाइल को मिग-29 लड़ाकू विमानों में शामिल किया है। यह मिसाइल दुश्मन के रडार, एयरस्ट्रिप और अन्य सामरिक ठिकानों पर सटीक निशाना साध सकती है।

रैंपेज मिसाइल को इजराइल ने डेवलप किया है। यह मिसाइल 2019 के बालाकोट हवाई हमले में इस्तेमाल की गई स्पाइस 2000 से अधिक दूरी तक मार कर सकती है। इसे हाल ही में आईएनएस विक्रांत पर भी ट्रायल के दौरान इस्तेमाल किया गया।

नौसेना की बढ़ती ताकत

भारत की समुद्री सीमाओं पर बढ़ते खतरे और चीन के साथ सीमा विवाद के बीच, भारतीय नौसेना अपनी क्षमताओं को लगातार उन्नत कर रही है। लंबी दूरी तक निगरानी के लिए पी8आई विमान और नई तकनीकों को शामिल करने से नौसेना की तैयारियों में बड़ा बदलाव आया है।

रैंपेज मिसाइल और एयर ड्रॉपेबल कंटेनर जैसी तकनीकों का उपयोग यह साबित करता है कि भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। यह न केवल देश की सुरक्षा को सुदृढ़ करता है बल्कि मित्र देशों के साथ साझेदारी और सहयोग को भी बढ़ावा देता है।

Robotic Mules: भारतीय सेना के वेटरंस बोले- जब खच्चर बन जाते थे दोस्त! क्या भावनात्मक जुड़ाव दे पाएंगे रोबोटिक म्यूल्स?

Robotic Mules: Can They Replace the Emotional Bond Veterans Shared with Army Mules?

Robotic Mules: पुणे में सेना दिवस परेड के दौरान जब भारतीय सेना ने अपने नए रोबोटिक म्यूल्स यानी खच्चरों को पहली बार आम जनता के सामने पेश किया, तो नजारा देखने लायक था। दशकों तक भारतीय सेना के पहाड़ी इलाकों और दुर्गम रास्तों पर रसद पहुंचाने वाले खच्चरों ने अपना फर्ज निभाया। लेकिन अब भारतीय सेना ने लेटेस्ट टेक्नोलॉजी को अपनाते हुए अपनी ऐतिहासिक ‘म्यूल कॉर्प्स’ को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस रोबोटिक खच्चरों से बदलने का फैसला किया है।

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Robotic Mules: खच्चरों ने हर चुनौती में दिया साथ

भारतीय सेना के लिए खच्चरों का योगदान असाधारण रहा है। बर्फीली ऊंचाइयों से लेकर घने जंगलों तक, खच्चरों ने अपनी पीठ पर राशन, गोला-बारूद, और दवाइयों का भार उठाया। चाहे वह कारगिल का युद्ध हो या सियाचिन की ठंडी बर्फीली हवाएं, खच्चरों ने हर चुनौती में सैनिकों का साथ दिया।

करीब दो शताब्दियों तक खच्चर भारतीय सेना के अहम सहयोगी रहे हैं। उन्होंने हिमालय की ऊंचाईयों से लेकर बर्मा के घने जंगलों और कठिन युद्धक्षेत्रों तक, रसद और हथियारों की आपूर्ति सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आज भी लगभग 4,000 खच्चरों की ताकत वाली म्यूल कॉर्प्स सेना की लॉजिस्टिक जरूरतों का अहम हिस्सा है।

सेना के एक पूर्व अधिकारी, कर्नल विक्रम सिंह, ने याद करते हुए कहा, “जब रास्ते बर्फ से ढके होते थे, तब खच्चरों की मदद के बिना सामान पहुंचाना असंभव था। ये जानवर हमारे साथी थे, जो कभी थकते नहीं थे। उनकी मेहनत और निष्ठा ने हमें कई बार युद्ध में जीत दिलाई।”

Mountain Artillery Retires: Mules Make Way for Drones, ATVs & Robotic Mules in Indian Armyएडवाांस नेविगेशन सिस्टम से लैस हैं Robotic Mules

वहीं, अब सेना ने खच्चरों की जगह ‘मल्टी-यूटिलिटी लेग्ड इक्विपमेंट’ (MULE) नामक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस रोबोट को अपनाया है। 51 किलो वजनी ये रोबोट एडवाांस नेविगेशन सिस्टम से लैस हैं, जो दुर्गम इलाकों में भी आसानी से काम कर सकते हैं। इन्हें राशन, दवाइयां, गोला-बारूद, और अन्य सामग्रियों को सैनिकों तक पहुंचाने के लिए डिजाइन किया गया है।

ये रोबोटिक म्यूल आम खच्चरों की तुलना में अधिक एफिशिएंसी एंड स्टेबिलिटी प्रदान करते हैं। इनकी ऑटोनोमी एंड एक्यूरेसी दुर्गम इलाकों में रसद आपूर्ति को सुरक्षित और प्रभावी बनाती है। जहां पारंपरिक खच्चर की रफ्तार औऱ क्षमता सीमित होती है, वहीं ये रोबोटिक इक्विपमेंट्स अधिक भार उठाने और तेजी से काम करने में सक्षम हैं।

जब खच्चर बन जाते थे दोस्त

लेकिन सेना के इस बदलाव कई पूर्व सैन्य अधिकारी भी भावुक हैं। सियाचिन में तैनात रहे हवलदार मोहन सिंह ने कहा, “खच्चर केवल सामान ढोने वाले जानवर नहीं थे। वे हमारी टीम का हिस्सा थे। जब रास्ता मुश्किल होता था और मौसम खराब होता था, तो वे हमारी आखिरी उम्मीद बनते थे।”

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उनका कहना था कि खच्चरों के साथ बिताए गए पल कभी भुलाए नहीं जा सकते। जब एक सैनिक खच्चर के साथ ऊंचाई पर चढ़ता था, तो दोनों के बीच एक अनकहा दोस्ताना संबंध बन जाता था।

रोबोटिक खच्चरों की एंट्री ने सेना में एक नई शुरुआत की है, लेकिन यह बदलाव परंपराओं के अंत का भी संकेत है। खच्चरों से जुड़ी कहानियां और उनकी वीरता अब इतिहास का हिस्सा बन जाएंगी। उनके साहस और निष्ठा की कहानियां पीढ़ियों तक सैनिकों की प्रेरणा रही हैं।

क्या भावनात्मक जुड़ाव दे पाएंगे रोबोट?

हालांकि, यह सवाल भी उठता है कि क्या रोबोट वही भावनात्मक जुड़ाव दे पाएंगे जो खच्चर देते थे? सैनिकों के लिए खच्चर केवल काम करने वाले साथी नहीं थे, बल्कि वे कठिन समय में उनके मानसिक सहारे के तौर पर भी काम करते थे।

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जैसे-जैसे तकनीक आगे बढ़ रही है, युद्ध के मैदान में जानवरों की भूमिका कम होती जा रही है। रोबोटिक खच्चरों का इस्तेमाल न केवल रसद पहुंचाने में किया जाएगा, बल्कि भविष्य में यह निगरानी और अन्य सामरिक उद्देश्यों में भी सहायक हो सकते हैं।

INS Tushil: नामीबिया के वाल्विस बे में पहुंचा INS तुशील, भारतीय नौसेना ने लिखा समुद्री दोस्ती का नया अध्याय

INS Tushil Visits Namibia's Walvis Bay, Strengthens Maritime Ties

INS Tushil: भारतीय नौसेना के स्टील्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट INS तुशील ने हाल ही में नामीबिया के वाल्विस बे का दौरे पर पहुंचा था। भारतीय नौसेना के लिए यह दौरा इसलिए भी एतिहासिक रहा, क्योंकि तुशील ने पहली बार अफ्रीका के पश्चिमी तट पर पेट्रोलिंग करते हुए खाड़ी ऑफ गिनी को सफलतापूर्वक पार किया। इस यात्रा का उद्देश्य भारत और नामीबिया के बीच समुद्री सहयोग को मजबूत करना और साझा खतरों से निपटने के लिए आपसी समझ को बढ़ाना था।

INS Tushil Visits Namibia's Walvis Bay, Strengthens Maritime Ties

INS तुशील (INS Tushil) की इस यात्रा के दौरान भारतीय और नामीबियाई नौसेना के बीच कई आधिकारिक, पेशेवर और खेल संबंधी गतिविधियां आयोजित की गईं। जहाज के कमांडिंग ऑफिसर, कैप्टन पीटर वर्गीस ने वाल्विस बे की उप-मेयर सारा न्डापेवोशाली म्यूटोंडोका और नामीबियाई नौसेना के कमांडर रियर एडमिरल एरेटस लाजरुस से मुलाकात की। इ

इस यात्रा के दौरान दोनों नौसेनाओं ने ऑपरेशनल प्लानिंग, क्रॉस-विज़िट्स, और विशेषज्ञों के बीच विचारों के आदान-प्रदान जैसे कई प्रोफेशनल कार्यक्रमों में भाग लिया। इसके साथ ही, INS तुशील के क्रू और नामीबियाई नौसेना के सदस्यों के बीच एक फ्रेंडली वॉलीबॉल मैच और एक जॉइंट योगा सेशन भी आयोजित किया गया।

INS Tushil Visits Namibia's Walvis Bay, Strengthens Maritime Ties

INS Tushil ने अपने आउटरीच कार्यक्रम के तहत वाल्विस बे के निवासियों के लिए अपने दरवाजे खोले। स्थानीय समुदाय को भारतीय नौसेना के इस आधुनिक युद्धपोत की क्षमताओं को देखने और समझने का अनूठा मौका मिला। इस पहल ने भारतीय नौसेना के बारे में जागरूकता बढ़ाने और द्विपक्षीय संबंधों को प्रोत्साहित करने में मदद की।

INS तुशील की यह यात्रा के जरिए भारतीय नौसेना ने यह संदेश दिया कि वह वैश्विक शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। अफ्रीका के पश्चिमी तट पर गश्त और नामीबियाई नौसेना के साथ साझा अभ्यास ने दोनों देशों के बीच सहयोग को नई ऊंचाई दी।

INS Tushil: भारतीय नौसेना का INS तुशिल पहुंचा सेनेगल, भारत के सागर अभियान का प्रमुख हिस्सा

INS तुशील की इस यात्रा ने भारत और नामीबिया के संबंधों को मजबूत किया है और भविष्य में दोनों देशों के बीच और भी गहरे समुद्री सहयोग की नींव रखी है। इस ऐतिहासिक यात्रा के जरिए भारत ने यह साबित किया है कि वह अपने मित्र देशों के साथ सहयोग बढ़ाने और वैश्विक स्थिरता में योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध है।

Pralay Ballistic Missile: विदेशी की बजाय स्वदेशी लॉन्चर पर नजर आई प्रलय मिसाइल, 2026 तक BEML-TATRA व्हीकल्स की होगी छुट्टी

Pralay Ballistic Missile Indigenous Launcher Replaces Foreign Tatra Vehicles by 2026

Pralay Ballistic Missile: गणतंत्र दिवस 2025 की रिहर्सल परेड के अभ्यास के दौरान एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत कदमों की झलक पेश की। दशकों से भारतीय सेना चेक गणराज्य में बने टैट्रा ट्रांसपोर्टर इरेक्टर लॉन्चर्स (Tatra Transporter Erector Launchers) पर निर्भर रही है, लेकिन अब इनकी जगह स्वदेशी विकल्प ले रहे हैं। रिहर्सल परेड के दौरान अशोक लीलैंड के 12×12 हेवी-ड्यूटी व्हीकल पर “प्रलय” टैक्टिकल बैलिस्टिक मिसाइल को ले जाते देखा गया।

Pralay Ballistic Missile Indigenous Launcher Replaces Foreign Tatra Vehicles by 2026

टैट्रा ट्रकों की भारतीय सेना में अहम भूमिका रही है। ये वाहन अपनी मजबूती और दुर्गम इलाकों में बेहतर प्रदर्शन के लिए जाने जाते हैं। हिमालय जैसे कठिन पहाड़ी इलाकों से लेकर राजस्थान के रेगिस्तान तक, टैट्रा ट्रकों ने हमेशा अपनी उपयोगिता साबित की है। इनका इस्तेमाल पिनाका, ब्रह्मोस और पृथ्वी जैसी मिसाइलों को ले जाने और तैनात करने के लिए भी किया जाता है। लेकिन “आत्मनिर्भर भारत” अभियान के तहत, भारत अब विदेशी उपकरणों पर निर्भरता को कम करने और स्वदेशी विकल्पों को प्राथमिकता देने की कोशिशों में जुटा है।

Pralay Ballistic Missile: अशोक लीलैंड ले रहा जगह

“आत्मनिर्भर भारत” पहल में अशोक लीलैंड ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कंपनी ने भारतीय सेना के लिए 12×12 कॉन्फिगरेशन वाला हेवी-ड्यूटी व्हीकल तैयार किया है, जो न केवल तकनीकी दृष्टि से एडवांस है बल्कि पूरी तरह से भारत में निर्मित है। इस वाहन की झलक गणतंत्र दिवस परेड के अभ्यास के दौरान देखने को मिली, जहां यह “प्रलय” मिसाइल को ले जाते हुए यह ट्र्क नजर आया। वहीं, प्रलय जैसी मिसाइल को स्वदेशी व्हीकल पर ले जाकर भारत ने यह साबित किया है कि अब वह भारी वाहनों के निर्माण में भी वैश्विक मानकों को पूरा करने में सक्षम है।

टैट्रा से स्वदेशी वाहनों तक का सफर

सूत्रों का कहना है कि भारतीय सेना ने अपने BEML-TATRA 12×12 हाई-मोबिलिटी स्पेशल मिलिट्री वाहनों (HMSMV) को स्वदेशी रूप से विकसित नए वाहनों से बदलने की योजना बनाई है। यह बदलाव 2026 के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है।

BEML-TATRA 12×12 वाहन सेना की लॉजिस्टिक बेड़े का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। टैट्रा ट्रकों का उपयोग भारतीय सेना में दशकों से हो रहा है। चाहे वह हिमालय की बर्फीली चोटियां हों या राजस्थान के रेतीले रास्ते, टैट्रा ट्रक हमेशा सेना की प्राथमिकता रहे हैं।  ये विशेष वाहन भारी वजन को चुनौतीपूर्ण इलाकों में ले जाने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। इनकी 42 टन की पेलोड क्षमता और 13 मीटर लंबा प्लेटफॉर्म उन्हें बड़े और भारी सैन्य उपकरणों को ले जाने के लिए उपयुक्त बनाता है। स्वचालित ट्रांसमिशन और उत्कृष्ट ऑफ-रोड क्षमताओं के कारण ये वाहन कठिन परिस्थितियों में भी कुशलता से काम करते हैं।

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नए स्वदेशी वाहनों को BEML-TATRA 12×12 के प्रदर्शन मानकों के बराबर या उससे बेहतर होना होगा। इनमें 42 टन की पेलोड क्षमता, लंबा प्लेटफॉर्म, ऑफ-रोड गतिशीलता और एडवांस ऑटौमिटक ट्रांसमिशन जैसी खूबियों को शामिल करना होगा।

यह पहल सरकार के “मेक इन इंडिया” अभियान के तहत की जा रही है, जिसका उद्देश्य देश में रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देना और आयात पर निर्भरता को कम करना है। स्वदेशी हाई-मोबिलिटी वाहनों को शामिल करके भारतीय सेना न केवल अपनी लॉजिस्टिक क्षमताओं को मजबूत करेगी, बल्कि देश की रक्षा निर्माण क्षमता को भी प्रोत्साहित करेगी।

Pralay Ballistic Missile की विशेषताएं

प्रलय एक टैक्टिकल क्वासी-बैलिस्टिक सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल है, जिसकी रेंज 150 से 500 किलोमीटर है। प्रलय मिसाइल 350 से 700 किलोग्राम तक का पेलोड ले जाने में सक्षम है और इसे सॉलिड-फ्यूल रॉकेट मोटर से पावर मिलती है। इसका गाइडेंस सिस्टम इसे 10 मीटर से कम सर्कुलर एरर प्रॉबेबल (CEP) प्रदान करता है। इसमें हाई-एक्सप्लोसिव फ्रैगमेंटेशन, पेनिट्रेशन-कम-ब्लास्ट (PCB), और रनवे डिनायल सबम्यूनिशन (RDPS) जैसे वॉरहेड ऑप्शन हैं।

इंटीग्रेटेड रॉकेट फोर्स का हिस्सा है प्रलय

चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों ने अपनी सीमाओं पर मिसाइल सिस्टम को उन्नत किया है। पाकिस्तान ने चीनी HQ-9 सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम और चीन ने समान सिस्टम तैनात किए हैं। इसके जवाब में, भारत ने प्रलय मिसाइलों की तैनाती को मंजूरी दी है।

भारतीय वायुसेना ने 2022 में 120 प्रलय मिसाइलों का ऑर्डर दिया था, जबकि 2023 में भारतीय सेना ने 250 और मिसाइलें मंगवाईं। इन मिसाइलों का उद्देश्य चीन और पाकिस्तान के साथ लगने वाली सीमाओं पर भारत की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करना है। प्रलय को इंटीग्रेटेड रॉकेट फोर्स (IRF) का हिस्सा बनाया गया है, जिसमें ब्रह्मोस, निर्भय और पिनाका जैसे सिस्टम भी शामिल हैं।

प्रलय में कई देशों की दिलचस्पी

प्रलय मिसाइल की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मांग बढ़ रही है। भारत के रक्षा मंत्रालय ने इस मिसाइल के निर्यात को मंजूरी दी है। खबरों के मुताबिक, आर्मेनिया के साथ इसके निर्यात पर बातचीत चल रही है। अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार, निर्यात वेरिएंट की रेंज को 300 किलोमीटर और पेलोड को 500 किलोग्राम तक सीमित किया जाएगा।