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MQ-9B SeaGuardian: भारतीय नौसेना को मिला नया अमेरिकी ड्रोन, सी गार्डियन के क्रैश होने के बाद General Atomics ने दी रिप्लेसमेंट

Indian Navy Receives New MQ-9B SeaGuardian Drone After Crash Replacement by General Atomics

MQ-9B SeaGuardian: भारतीय नौसेना को अमेरिकी रक्षा कंपनी General Atomics ने MQ-9B SeaGuardian ड्रोन का नया वर्जन सौंप दिया है। यह ड्रोन सितंबर 2023 में बंगाल की खाड़ी में दुर्घटनाग्रस्त हुए MQ-9B के बदले में मिला है। भारतीय नौसेना ने इस एडवांस ड्रोन को लीज एग्रीमेंट के तहत शामिल किया था, जो प्रमुख रूप से हिंद महासागर क्षेत्र में इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस (ISR) मिशनों में तैनात किया जाता है।

Indian Navy Receives New MQ-9B SeaGuardian Drone After Crash Replacement by General AtomicsMQ-9B SeaGuardian: ड्रोन क्रैश की वजह

पिछले साल सितंबर में हुए हादसे की वजह पावर फेलियर बताई गई थी, जिसके कारण हाई-एल्टीट्यूड, लॉन्ग-एंड्योरेंस ड्रोन पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके बाद, जनरल एटॉमिक्स ने नए ड्रोन की सप्लाई की, जो अब इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस (ISR) ऑपरेशन के लिए भारतीय नौसेना में शामिल हो चुका है। इस ड्रोन को तमिलनाडु के नेवल एयर स्टेशन राजाली में तैनात किया गया है, जहां से यह भारतीय महासागर क्षेत्र (IOR) में चीन की बढ़ती गतिविधियों पर नजर रखेगा।

नौसेना ने 2020 में General Atomics से दो MQ-9B SeaGuardian ड्रोन लीज पर लिए थे, जिन्हें INS राजाली, तमिलनाडु स्थित नौसेना एयरबेस से ऑपरेट किया जाता है। ये रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट ड्रोन्स भारतीय नौसेना के लिए बेहद अहम साबित हो रहे हैं और अब तक 18,000 घंटे से अधिक उड़ान समय पूरा कर चुके हैं।

MQ-9B SeaGuardian: भारत को मिलेंगे 31 एडवांस्ड ड्रोन

पिछले साल भारत ने अमेरिका के साथ एक $3.5 बिलियन ((28,900 करोड़ रुपये) का सौदा किया है, जिसके तहत उसे 31 MQ-9B Sea/SkyGuardian ड्रोन मिलेंगे। जिसमें नौसेना को 15, सेना को 8 और वायुसेना को 8 ड्रोन मिलेंगे। इनकी डिलीवरी 2029 से शुरू होने की संभावना है। ये ड्रोन्स हाई एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस (HALE) UAVs हैं, जो हेलफायर मिसाइल और GBU-39B बमों जैसे सटीक-मारक हथियारों से लैस होंगे। इनकी तैनाती से भारत की समुद्री सुरक्षा और दुश्मनों की गतिविधियों पर निगरानी करने की क्षमता में इजाफा होगा।

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स्वदेशी Drishti 10 Starliner ड्रोन भी जल्द नौसेना को मिलेगा

इसके अलावा Adani Defence & Aerospace के बनाए Drishti 10 Starliner ड्रोन भी जल्द ही भारतीय नौसेना में शामिल होने वाला है। इस ड्रोन को इजरायली रक्षा कंपनी Elbit Systems के सहयोग से भारत में डेवलप किया गया है। Drishti 10 Starliner ड्रोन 70 फीसदी स्वदेशी तकनीक से बना है। सेना को यह ड्रोन पहले डिलीवर किया जाना था, लेकिन जनवरी 2025 में गुजरात के पोरबंदर तट पर हुए परीक्षण के दौरान यह दुर्घटनाग्रस्त हो गया। यह मध्यम ऊंचाई, लंबी अवधि (Medium Altitude, Long Endurance – MALE) श्रेणी का ड्रोन है, जो 36 घंटे तक उड़ान भर सकता है और 450 किलोग्राम तक भार उठा सकता है।

INS विक्रमादित्य के स्थान पर नया स्वदेशी विमानवाहक पोत

भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ाने के लिए INS विक्रमादित्य के रिप्लेसमेंट के तौर पर एक नया स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर (IAC-2) बनाने की योजना भी बनाई जा रही है। वर्तमान में नौसेना INS विक्रमादित्य और INS विक्रांत को ऑपरेट कर रही है। INS विक्रमादित्य को रूस से खरीदा गया था, जबकि INS विक्रांत को कोचीन शिपयार्ड में 20,000 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया था। अब नौसेना अपने तीसरे विमानवाहक पोत IAC-2 के निर्माण की योजना बना रही है, जिससे भारत की समुद्री सुरक्षा और मजबूत होगी।

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राफेल एम फाइटर जेट और नई पनडुब्बियों का सौदा जल्द

भारतीय नौसेना की युद्ध क्षमता को और अधिक धारदार बनाने के लिए फ्रांस के साथ एक बड़ी डील जल्द ही फाइनल होने वाली है। इस डील के तहत INS विक्रांत के लिए 26 नए राफेल-M लड़ाकू विमान और 3 अतिरिक्त स्कॉर्पीन पनडुब्बियां खरीदी जाएंगी। इस सौदे की अनुमानित लागत 50,000 करोड़ रुपये बताई जा रही है। राफेल-M ट्विन-इंजन डेक-बेस्ड फाइटर जेट हैं, जो मेरीटाइम वारफेयर ऑपरेशन्स के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए हैं। हालांकि, ये जेट भारतीय नौसेना की अंतरिम जरूरतों को पूरा करेंगे, जब तक कि स्वदेशी ट्विन-इंजन डेक बेस्ड फाइटर (TEDBF) डेवलप नहीं हो जाता। इसका पहला प्रोटोटाइप 2026 तक उड़ान भरेगा और 2031 तक नौसेना में शामिल हो सकता है।

नई पनडुब्बियों के निर्माण में जर्मनी का साथ

इसके अलावा, भारत 3 नई स्कॉर्पीन-क्लास पनडुब्बियां भी शामिल करने जा रहा है, जिन्हें मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL), मुंबई में बनाया जाएगा। इन पनडुब्बियों के आने से भारतीय नौसेना की अंडरवाटर कॉम्बैट कैपेबिलिटीज में बढ़ोतरी होगी। साथ ही, भारत ने 70,000 करोड़ रुपय़े की P-75I परियोजना शुरू की है, जिसके तहत 6 नई अत्याधुनिक पनडुब्बियां बनाई जाएंगी। इसके लिए MDL और जर्मन कंपनी thyssenkrupp Marine Systems (tkMS) को प्रमुख दावेदार माना जा रहा है।

लंबे समय तक पानी के अंदर रह सकेंगी पनडुब्बियां

ये HDW Class 214 पनडुब्बियों का मॉडर्न वर्जन होंगी, इन पनडुब्बियों में एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) सिस्टम होगा, जिससे वे लंबे समय तक पानी के अंदर रह सकेंगी और दुश्मन के रडार से बचने में मदद मिलेगी। AIP सिस्टम पनडुब्बी की पानी के अंदर रहने की क्षमता को बढ़ाता है और इसे दुश्मन के रडार से बचने में मदद करता है। इससे भारतीय नौसेना की पनडुब्बी युद्ध क्षमता चीन और पाकिस्तान की चुनौतियों का बेहतर तरीके से सामना करने में सक्षम होगी।

भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी समुद्री रक्षा क्षमताओं को जबरदस्त तरीके से मजबूत किया है। MQ-9B SeaGuardian और Drishti 10 Starliner जैसे एडवांस ड्रोन्स से भारतीय नौसेना की निगरानी क्षमताएं कई गुना बढ़ जाएंगी। वहीं, INS विक्रांत, राफेल-M, स्कॉर्पीन पनडुब्बियां और P-75I परियोजना भारतीय नौसेना को आने वाले दशकों में समुद्री क्षेत्र में और अधिक शक्तिशाली बनाएंगे। इन सभी परियोजनाओं से भारतीय नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में अपनी प्रभुत्वशाली स्थिति को और मजबूत करेगी और चीन तथा पाकिस्तान जैसी चुनौतियों का बेहतर तरीके से सामना कर सकेगी।

Indian Army drones: भारतीय सेना में शामिल होंगे घातक ड्रोन! चीन-पाकिस्तान की हर हरकत पर रहेगी पैनी नजर

Indian Army Drones: Lethal UAVs to Boost Surveillance on China-Pakistan Borders!
MQ-9 Reaper

Indian Army drones: भारतीय सेना अब मॉडर्न वारफेयर सिस्टम में एक बड़ा बदलाव करने जा रही है। सेना ने भारी-भरकम ड्रोन (Heavy-Duty Drones) को अपने बेड़े में शामिल करने की योजना बनाई है, जो न केवल इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकोनिसेंस (ISR) मिशनों के लिए इस्तेमाल होंगे, बल्कि दुश्मन के ठिकानों पर सटीक हमले (Precision Strikes) करने में भी अहम भूमिका निभाएंगे।

Indian Army Drones: Lethal UAVs to Boost Surveillance on China-Pakistan Borders!
MQ-9 Reaper

रूस-यूक्रेन और अर्मेनिया-अजरबैजान युद्ध ने यह साफ कर दिया है कि युद्ध का भविष्य अनमैंड टेक्नोलॉजी की ओर बढ़ रहा है। इसी को देखते हुए भारतीय सेना भी अपनी सैन्य क्षमताओं को अपग्रेड कर रही है और एडवांस ड्रोन सिस्टम को शामिल करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।

Indian Army drones: भारतीय सेना को चाहिए लंबी दूरी तक मार करने वाले ड्रोन

सूत्रों के अनुसार, सेना ऐसे मानव रहित हवाई वाहनों (UAV) और रिमोटली-पायलटेड एयरक्राफ्ट (RPA) सिस्टम की तलाश में है, जो 1,000 किलोमीटर से अधिक की रेंज तक काम कर सकें, 30,000 फीट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकें, जिससे दुश्मन के रडार पर पकड़ में आने से बचा जा सके और 24 घंटे से अधिक समय तक लगातार ऑपरेशन को अंजाम दे सकें।

Indian Army drones: चीन और पाकिस्तान के पास कितने ड्रोन?

चीन के पास फिलहाल 2,000 से अधिक अत्याधुनिक ड्रोन हैं, जिनमें Cai Hong-4, CH-5, CH-7, Wing Loong-II और स्टील्थी Hongdu GJ-11 ‘Sharp Sword’ शामिल हैं। चीन न केवल इनका इस्तेमाल कर रहा है, बल्कि वह दुनिया का सबसे बड़ा मिलिट्री ड्रोन एक्सपोर्टर भी है।

पाकिस्तान को भी चीन ने CH-4 और Wing Loong-II जैसे खतरनाक ड्रोन की आपूर्ति की है। इसके अलावा, पाकिस्तान के पास तुर्की निर्मित Bayraktar TB2 और Akinci ड्रोन भी हैं, जिससे उसकी निगरानी और हमले की क्षमता बढ़ गई है। पाकिस्तान के पास 150-200 ड्रोन होने का अनुमान है, जो भारत के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकते हैं।

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इसके विपरीत, भारतीय सेना के पास अभी केवल 50 इजरायली मूल के Heron Mark-I, Mark-II और Searcher-II मध्यम ऊंचाई वाले, लंबी दूरी तक काम करने वाले (MALE) ड्रोन हैं। चीन के साथ चल रहे सैन्य गतिरोध को देखते हुए, भारतीय सेना ने हाल ही में चार नए सैटेलाइट-एनेबल्ड Heron Mark-II ड्रोन शामिल किए हैं, जो वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर निगरानी के लिए शामिल किए गए हैं।

Indian Army drones: भारतीय सेना में ड्रोन के मौजूदा इस्तेमाल

सेना का एविएशन कॉर्प्स इन फाइटर-साइज UAVs का उपयोग निगरानी और टारगेट पर हमले के लिए करता है, जबकि इन्फैंट्री बटालियन छोटी दूरी के ड्रोन्स का उपयोग टैक्टिकल रेकनाइसेन्स, लॉजिस्टिक्स और अन्य कार्यों के लिए करती है।

हालांकि, वायुसेना और नौसेना के पास भी अपने UAV बेड़े हैं, लेकिन सभी तीन सेनाओं के लिए कम से कम 150 नए MALE ड्रोन की जरूरत है। इसी के चलते भारतीय सेना अब स्वदेशी विकास और निजी क्षेत्र की भागीदारी के तहत अधिक संख्या में MALE ड्रोन खरीदने की योजना बना रही है।

स्वदेशी ड्रोन बनाने पर जोर

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने Rustom सीरीज के UAVs डेवलप किए हैं, जिसमें Tapas-BH-201 ड्रोन भी शामिल है। हालांकि, यह पूरी तरह से मिलिट्री जरूरतों को पूरा नहीं कर सका। अब इसकी क्षमताओं को बेहतर बनाने के लिए काम चल रहा है।

DRDO द्वारा विकसित Archer-NG (नेक्स्ट जनरेशन) ड्रोन का पहला ट्रायल जल्द ही होने की उम्मीद है। यह एक आर्म्ड MALE ड्रोन होगा, जो 30,000 फीट की अधिकतम ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है और 300 किलोग्राम के हथियारों का वजन उठा सकता है। इसमें एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलें और स्मार्ट एंटी-एयरफील्ड वेपन (SAAW) जैसे हथियार लगाए जा सकते हैं। वहीं, इसकी रेंज 1,000 किलोमीटर की होगी।

HALE ड्रोन: MQ-9B प्रीडेटर्स की होगी भारतीय सेना में एंट्री

ज्यादा क्षमता वाले हाई-एल्टीट्यूड, लॉन्ग एंड्योरेंस (HALE) ड्रोन के क्षेत्र में भारतीय सेना को अमेरिकी MQ-9B प्रीडेटर्स मिलेंगे। पिछले साल अक्टूबर 2024 में भारत ने अमेरिका के साथ 32,350 करोड़ रुपये के इस सौदे पर हस्ताक्षर किए थे। इन ड्रोन की डिलीवरी 2029 में शुरू होगी। ये ड्रोन Hellfire मिसाइल, GBU-39B प्रिसिजन-गाइडेड ग्लाइड बम और दूसरे एडवांस हथियारों से लैस होंगे।

सीमा पर सुरक्षा के लिए ड्रोन होंगे गेम-चेंजर

भारतीय सेना को चीन और पाकिस्तान दोनों के साथ सक्रिय सीमाओं की सुरक्षा के लिए एडवांस MALE ड्रोन की जरूरत है। ड्रोन की तैनाती से सीमाओं की रियल टाइम निगरानी में आसानी होगी और दुश्मन की किसी भी गतिविधि को तुरंत ट्रैक किया जा सकेगा।

इसके अलावा, ड्रोन से सीमा पार आतंकवादी गतिविधियों की निगरानी और आतंकी ठिकानों पर हमले करने में भी मदद मिलेगी। ये अनमैंड एरियल व्हीकल (UAV) न केवल सैनिकों को खतरे से बचाते हैं, बल्कि यह लंबे समय तक ऑपरेशन को अंजाम देने और सटीक हमले करने में भी सक्षम हैं।

निजी कंपनियों के साथ सेना की साझेदारी

भारतीय सेना अब निजी कंपनियों और विदेशी साझेदारों के साथ मिलकर नई ड्रोन तकनीक विकसित करने पर जोर दे रही है। इसके तहत Make in India अभियान के तहत स्वदेशी रूप से विकसित किए गए MALE और HALE ड्रोन को प्राथमिकता दी जा रही है। सरकार निजी कंपनियों को प्रोत्साहित करने के लिए टैक्स छूट और प्रोत्साहन पैकेज देगी। ड्रोन प्रोडक्शन के लिए “पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP)” मॉडल को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही, डिफेंस स्टार्टअप्स को सपोर्ट देकर अत्याधुनिक ड्रोन डेवलप करने पर जोर दिया जाएगा।

VSHORADS: DRDO का यह नया एयर डिफेंस सिस्टम कम ऊंचाई पर उड़ने वाले टारगेट को पलक झपकते ही कर देगा तबाह, ये हैं खूबियां

VSHORADS: DRDO's New Air Defense System Can Eliminate Low-Flying Threats Instantly – Key Features Revealed

भारत ने अपने रक्षा क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (DRDO) ने शनिवार को ओडिशा के चांदीपुर तट से वेरी शॉर्ट-रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (VSHORADS) के तीन सफल परीक्षण किए। इस अत्याधुनिक मिसाइल सिस्टम को खासतौर पर कम ऊंचाई पर तेज़ी से उड़ने वाले टारगेट्स को नष्ट करने के लिए तैयार किया गया है। VSHORADS का मुख्य उद्देश्य कम ऊंचाई पर उड़ने वाले हाई-स्पीड टारगेट्स को बेअसर करना है, खासतौर पर ड्रोन और दुश्मन के एयरक्राफ्ट को।

VSHORADS: DRDO's New Air Defense System Can Eliminate Low-Flying Threats Instantly – Key Features Revealed

इस परीक्षण में मिसाइल को विभिन्न ऊंचाइयों और परिस्थितियों में तेज़ गति से उड़ रहे लक्ष्यों पर दागा गया, और हर बार यह अपने टारगेट को पूरी तरह से ध्वस्त करने में सफल रही। यह भारत के वायु रक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है और इससे भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दी बधाई

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO और भारतीय सशस्त्र बलों को इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा, “VSHORADS मिसाइल प्रणाली भारत की रक्षा क्षमताओं को और मजबूत करेगी और हमें आत्मनिर्भर बनने में मदद करेगी।” वहीं, रक्षा अनुसंधान सचिव और DRDO के चेयरमैन डॉ. समीर वी. कामत ने भी इस सफलता पर DRDO वैज्ञानिकों, सेना के अधिकारियों और इंडस्ट्री पार्टनर्स को बधाई दी।

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तीन उड़ान परीक्षणों में साबित हुई मिसाइल की ताकत

DRDO द्वारा विकसित इस मिसाइल प्रणाली का ट्रायल तेज रफ्तार से कम ऊंचाई पर उड़ने वाले ड्रोनों पर किया गया। DRDO अधिकारियों ने बताया कि 100% सटीकता के साथ तीनों फ्लाइट-टेस्ट्स में मिसाइल ने अपने टारगेट को पूरी तरह से नष्ट कर दिया। खास बात यह है कि इस मिसाइल को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह कम ऊंचाई पर उड़ रहे ड्रोन और अन्य हवाई खतरों को प्रभावी तरीके से बेअसर कर सके।

एक रक्षा अधिकारी के मुताबिक, “इन परीक्षणों के दौरान मिसाइल ने कम ऊंचाई पर उड़ रहे हाई-स्पीड टारगेट्स को नष्ट कर दिया, जिनके थर्मल सिग्नेचर काफी कम थे।” यह क्षमता इसे ड्रोन और अन्य एरियल थ्रेट्स को बेअसर करने में बेहद कारगर बनाती है।

इस ट्रायल के दौरान दो फील्ड ऑपरेटर्स ने मिसाइल सिस्टम ऑपरेट किया, जिसमें उन्होंने टारगेट की पहचान, ट्रैकिंग और मिसाइल लॉन्चिंग की प्रक्रिया को अंजाम दिया।

VSHORADS सिस्टम की विशेषताएं:

  • यह मैन-पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम (MANPADS) है, जिसे सैनिक अपने साथ आसानी से ले जा सकते हैं।
  • यह दोहरे-चरण वाले ठोस ईंधन इंजन (Dual-Thrust Solid Motor) से संचालित होता है, जिससे यह अधिकतम 6 किलोमीटर की दूरी तक लक्ष्य भेद सकता है।
  • इसे भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के लिए खासतौर पर डिजाइन किया गया है, ताकि यह कम ऊंचाई पर उड़ने वाले हवाई खतरों को नष्ट कर सके।
  • यह हिमालयी इलाकों जैसे पूर्वी लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश में तैनाती के लिए पूरी तरह उपयुक्त है, जहां चीन के बढ़ते हवाई खतरों का मुकाबला करना जरूरी है।
  • यह सिस्टम एडवांस इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल ट्रैकिंग सिस्टम, रडार और टेलीमेट्री उपकरणों से लैस है, जिससे यह हवा में उड़ रहे छोटे से छोटे लक्ष्य का भी सटीकता से पीछा कर उसे नष्ट कर सकता है।

भारतीय सेना को मिलेगा बड़ा फायदा

भारतीय सेना पिछले कुछ सालों से रूसी मूल के इगला (Igla) एयर डिफेंस सिस्टम को बदलने के लिए एक नए वेरी शॉर्ट-रेंज एयर डिफेंस सिस्टम की तलाश में थी। इगला सिस्टम के पुराने हो जाने और सीमित स्टॉक के चलते, सेना को हाल के वर्षों में इगला-S मिसाइलें इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट के तहत खरीदनी पड़ीं।

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अब VSHORADS के सफल परीक्षण के बाद भारतीय सेना को एक मजबूत स्वदेशी विकल्प मिल गया है, जो न केवल तकनीकी रूप से एडवांस है, बल्कि रणनीतिक रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण है। खास तौर पर लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश जैसे पर्वतीय इलाकों में, जहां चीन की ओर से ड्रोन और फाइटर जेट्स का खतरा लगातार बना रहता है, वहां इस मिसाइल की तैनाती से भारतीय सेना की ताकत कई गुना बढ़ जाएगी।

पहले भी हो चुके हैं सफल परीक्षण

यह पहली बार नहीं है जब VSHORADS मिसाइल को सफलतापूर्वक टेस्ट किया गया हो। इससे पहले अक्टूबर 2024 में राजस्थान के पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में भी इसके तीन सफल परीक्षण किए गए थे। इसके बाद DRDO ने इस मिसाइल का डेवलपमेंट वर्क पूरा कर लिया। इस नई मिसाइल प्रणाली का उत्पादन भारत में ही किया जाएगा। DRDO ने इसके लिए Development cum Production Partner (DcPP) मॉडल के तहत दो प्रमुख भारतीय कंपनियों को प्रोडक्शन के लिए चुना है।

भारत ने पिछले कुछ सालों में अपने एयर डिफेंस सिस्टम को लगातार मजबूत किया है। हाल ही में भारतीय वायु सेना और नौसेना को मीडियम रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल (MRSAM) सिस्टम भी मिला था, जिसे इजरायली तकनीक के साथ मिलकर विकसित किया गया था। अब, VSHORADS मिसाइल प्रणाली के जुड़ने से भारत की छोटी दूरी की वायु रक्षा प्रणाली और अधिक मजबूत हो जाएगी।

Rafale Marine Jets: राफेल-M को लेकर क्यों टेंशन में भारतीय नौसेना? INS विक्रांत और INS विक्रमादित्य पर ऑपरेट करने हो सकती हैं ये दिक्कतें!

Rafale M India Navy

Rafale Marine Jets: भारतीय नौसेना ने अपने विमानवाहक पोतों INS विक्रमादित्य और INS विक्रांत के लिए राफेल M (Rafale Marine) फाइटर जेट को चुना है। अभी सीसीएस यानी कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी की मंजूरी बाकी है। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पेरिस दौरे के दौरान इनके खरीदने को लेकर फैसला हो सकता है। वहीं अब इन विमानों को चुनने के बाद इसकी ऑपरेशनल चुनौतियों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। एक वरिष्ठ नौसेना अधिकारी ने आशंका जताई है कि इस फाइटर जेट को उन्हीं दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है, जिनसे पहले मिग-29K जूझ चुका है।

Rafale Marine Jets: Challenges for Indian Navy in Operating Rafale-M on INS Vikrant & INS Vikramaditya!

Rafale Marine Jets: राफेल-M में लगे हैं नॉन-फोल्डेबल विंग्स

भारतीय नौसेना की सबसे बड़ी चिंता राफेल M के बिना-मुड़ने वाले पंख (Non-Foldable Wings) को लेकर है। यह डिज़ाइन INS विक्रमादित्य और INS विक्रांत जैसे सीमित डेक स्पेस वाले एयरक्राफ्ट कैरियर्स के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है। क्योंकि जब लड़ाकू विमानों के फोल्डेबल नहीं होते हैं, तो वे डेक और हैंगर में ज्यादा जगह घेरते हैं, जिससे कैरियर पर तैनात किए जाने वाले विमानों की संख्या में कमी हो सकती है। इससे भारतीय नौसेना की ऑपरेशनल फ्लेक्सिबिलिटी पर असर पड़ सकता है और युद्ध जैसी हालात में यह एक बड़ी परेशानी बन सकता है।

 

नेवी सूत्रों ने बताया कि यह दिक्कत पहले मिग-29K के साथ भी देखी गई थी, जहां विमान को एयरक्राफ्ट कैरियर्स पर तैनात करने और ऑपरेशन के दौरान दिक्कतें आती थीं। ऐसे में राफेल M को भारतीय नौसेना के मौजूदा एयरक्राफ्ट कैरियर्स के लिए पूरी तरह अनुकूल बनाना एक बड़ी चुनौती हो सकती है।

Rafale Marine Jets: राफेल M की ट्रेनिंग में होगी दिक्कत

इसके अलावा, राफेल M का ट्विन-सीटर ट्रेनर वेरिएंट भी एयरक्राफ्ट कैरियर्स के लिए एक बड़ी समस्या बन सकता है। भारतीय नौसेना के लिए कैरियर ऑपरेशन में एफिशिएंसी बढ़ाने के लिए कैटापल्ट और अरेस्टेड रिकवरी टेक्नोलॉजी (CATOBAR) के तहत ट्रेनिंग जरूरी होती है, जिससे नौसेना के पायलटों को असली परिस्थितियों में ट्रेनिंग करने का मौका मिलता है। राफेल M का ट्रेनर वेरिएंट कैरियर-ऑपरेशनल नहीं है, जिससे नौसेना के पायलटों को पूरी तरह जमीन पर (Land-Based Training) ट्रेनिंग लेनी होगी। हालांकि, जमीन पर दी गई ट्रेनिंग और सिमुलेशन पायलटों को मदद तो दे सकती है, लेकिन वे समुद्र में वास्तविक टेकऑफ और लैंडिंग की स्थितियों को पूरी तरह से दोहरा नहीं सकते।

Rafale Marine Jets: INS विक्रांत और INS विक्रमादित्य में स्की-जंप टेकऑफ सिस्टम

भारतीय नौसेना के एयरक्राफ्ट कैरियर INS विक्रांत और INS विक्रमादित्य स्की-जंप टेकऑफ सिस्टम (Ski-Jump Takeoff System) का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, राफेल M को कैटापल्ट असिस्टेड टेकऑफ (Catapult-Assisted Takeoff) और अरेस्टेड लैंडिंग (CATOBAR) सिस्टम के लिए डिज़ाइन किया गया है। सूत्रों का कहना है कि राफेल M को भारतीय एयरक्राफ्ट कैरियर्स के हिसाब से पूरी तरह से ऑप्टिमाइज़ नहीं किया गया है, जिससे उसके परफॉमेंस और एफिशिएंसी पर असर पड़ सकता है।

पूरी तरह कैरीयर-कम्पेटिबल था मिग-29KUB ट्रेनर वेरिएंट

सूत्रों के मुताबिक मिग-29KUB ट्रेनर वेरिएंट पूरी तरह कैरीयर-कम्पेटिबल था, जिससे नौसेना के पायलटों को सीधे कैरियर पर ट्रेनिंग मिलती थी। लेकिन मिग-29K के लगातार हादसों और मेंटेनेंस चुनौतियों के चलते नौसेना को नए विकल्पों की तलाश करने पर मजबूर कर दिया। अब राफेल M के बिना ट्रेनर वेरिएंट के, नौसेना को या तो सिमुलेटर टेक्नोलॉजी पर भरोसा करना होगा या फिर अन्य ट्रेनिंग ऑप्शंस को चुनना होगा।

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पहली डिलीवरी 2030 तक

भारतीय नौसेना के एक अधिकारी नाम न बताने की शर्त पर बताया कि राफेल M की खरीद का फैसला लॉजिस्टिक्स और फाइनेंसियल वजहों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। भारतीय वायुसेना पहले से ही राफेल जेट्स ऑपरेट कर रही है, जिससे दोनों सेनाओं में कॉमन सप्लाई चैन और मेंटेनेंस में कोई दिक्कत नहीं आएगी। इस वजह से भारतीय नौसेना और वायुसेना के लिए कॉमन वेपन सिस्टम्स और इंजन मेंटेनेंस करना आसान होगा, जिससे लॉजिस्टिक खर्च कम किया जा सकेगा।

सूत्रों ने बताया कि राफेल-M डील अगर 2025 की शुरुआत में साइन हो जाती है, तब भी इसकी पहली डिलीवरी 2030 तक शुरू होने की उम्मीद है।

सरकार-से-सरकार (G2G) डील

पिछले साल 2 दिसंबर को नेवी डे के मौके पर नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने अपनी सालाना प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि यह डील अंतिम चरण में है और जल्द ही इसे औपचारिक रूप से पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा,
_”यह सिर्फ औपचारिकताओं को पूरा करने का मामला है। हमें उम्मीद है कि राफेल-M डील पर जल्द ही दस्तखत हो जाएंगे।” एडमिरल त्रिपाठी ने यह भी स्पष्ट किया कि कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की मंजूरी के बाद समझौते पर हस्ताक्षर कर लिए जाएंगे, और क्योंकि यह सरकार-से-सरकार (G2G) डील है, इसे तेजी से लागू किया जाएगा।

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भारतीय नौसेना को आधुनिक और शक्तिशाली लड़ाकू विमानों की सख्त जरूरत है, और इसी रणनीति के तहत राफेल-M को नौसेना के INS विक्रमादित्य और INS विक्रांत पर तैनात करने की योजना बनाई गई है। इस 60,000 करोड़ रुपये (USD 7.2 बिलियन) की डील के तहत भारतीय नौसेना को 22 सिंगल-सीटर और 4 ट्विन-सीटर ट्रेनर राफेल-M जेट्स मिलेंगे, जिससे नौसेना की युद्धक क्षमता में इजाफा होगा।

अत्याधुनिक हथियारों और एडवांस फीचर्स से लैस है राफेल-M

राफेल-M को Short Take-Off But Arrested Recovery (STOBAR) ऑपरेशंस के लिए डिजाइन किया गया है। यह जेट कई आधुनिक हथियारों और तकनीकों से लैस है, जो इसे एक घातक फाइटर जेट बनाते हैं। इसमें हवा से हवा में मार करने वाली मेटेओर (Meteor) मिसाइल, एंटी-शिप मिशन के लिए एक्ज़ोसेट (Exocet) मिसाइल, सटीक जमीनी हमलों के लिए स्कैल्प (SCALP) मिसाइल, टार्गेट की पहचान और ट्रैकिंग के लिए AESA रडार और स्टील्थ और सर्वाइवल क्षमता को बढ़ाने के लिए स्पेक्टरा इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम से लैस है।

राफेल-M की अधिकतम रफ्तार 2,222 किमी/घंटा

राफेल-M की अधिकतम रफ्तार Mach 1.8 (लगभग 2,222 किमी/घंटा) है और यह 1,850 किमी से अधिक की कॉम्बैट रेंज प्रदान करता है। इसके अलावा, मिड-एयर रीफ्यूलिंग क्षमता इसकी ऑपरेशनल रीच को और बढ़ा देती है, जिससे यह सुदूर स्थित मैरीटाइम ऑपरेसंस के लिए बेहद कारगर है।

UK New Spying Laws: ब्रिटेन के नए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून में चीनी जासूसों को छूट, रूस और ईरान पर रहेगा कड़ा पहरा, पढ़ें भारत पर क्या होगा असर?

UK Spying Laws: China Gets Exemption, Strict Rules for Russia & Iran – Impact on India?
File Photo: President Xi Jinping met with UK Prime Minister Keir Starmer

UK New Spying Laws: ब्रिटेन की सरकार अपने नए जासूसी कानून में चीन को सख्त प्रतिबंधों से छूट देने जा रही है। इस फैसले से संसद में विवाद खड़ा हो गया है, क्योंकि विपक्षी सांसद और राष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ इसे देश की सुरक्षा के लिए खतरा बता रहे हैं। ब्रिटिश सरकार की योजना के अनुसार, रूस और ईरान जैसे देशों पर कड़े प्रतिबंध लागू किए जाएंगे, लेकिन चीनी जासूसों को इस सूची से बाहर रखा जाएगा।

UK Spying Laws: China Gets Exemption, Strict Rules for Russia & Iran – Impact on India?
File Photo: President Xi Jinping met with UK Prime Minister Keir Starmer.

UK New Spying Laws: क्या है FIRS और क्यों है यह महत्वपूर्ण?

ब्रिटेन की सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए Foreign Influence Registration Scheme (FIRS) की योजना बनाई है, जिसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी विदेशी ताकत ब्रिटेन की राजनीति, सुरक्षा या अर्थव्यवस्था को प्रभावित न कर सके। यह योजना दो स्तरों पर लागू की जाएगी। इनमें पहला है, राजनीतिक प्रभाव (Political Influence Tier)। यह विदेशी लॉबिंग को कंट्रोल करेगा और विदेश से जुड़े लोगों को ब्रिटेन के सांसदों, सरकारी अधिकारियों और चुनावी उम्मीदवारों से संवाद करने से पहले खुद को रजिस्टर्ड कराना होगा। वहीं दूसरा स्तर यानी एन्हांस्ड (Enhanced Tier), यह उन देशों पर लागू होगा, जो ब्रिटेन के लिए सीधा सुरक्षा खतरा हैं। इसमें रूस और ईरान को शामिल किया जाएगा, लेकिन चीन को फिलहाल इस सूची में नहीं रखा गया है।

हालांकि, सरकार का कहना है कि यह फैसला स्थायी नहीं है और भविष्य में चीन को भी इस सूची में जोड़ा जा सकता है।

UK New Spying Laws: चीन को क्यों दी गई छूट?

ब्रिटिश सरकार के इस फैसले के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। चीन के साथ ब्रिटेन की आर्थिक साझेदारी को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। हाल ही में ब्रिटेन की वित्त मंत्री रेचेल रीव्स (Rachel Reeves) ने चीन का दौरा किया था, जहां उन्होंने निवेश और व्यापार को बढ़ावा देने की बात कही थी। इसके अलावा, ब्रिटेन की विदेश मंत्री कैथरीन वेस्ट (Catherine West) ने कहा था कि ब्रिटेन को अपने आर्थिक हितों और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखना होगा। जानकारों का कहना है कि ब्रिटेन के लिए चीन एक महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार है। ब्रिटेन की कंपनियां चीन के बड़े बाजार पर निर्भर हैं, और सरकार नहीं चाहती कि इस कानून से उनके व्यापारिक हितों को नुकसान पहुंचे। वहीं, ब्रिटेन के चीन के साथ संबंध जटिल हैं, और ब्रिटेन नहीं चाहता कि वह अचानक कूटनीतिक संकट में फंस जाए। हालांकि सरकार का कहना है कि चीन को अभी छूट दी जा रही है, लेकिन भविष्य में इसे हटाया भी जा सकता है।

UK New Spying Laws: सुरक्षा एजेंसियों ने भी जताई चिंता

ब्रिटिश सुरक्षा एजेंसी MI5 के प्रमुख केन मैककॉलम (Ken McCallum) ने 2022 में ही आगाह किया था कि चीन, रूस और ईरान ब्रिटेन के लोकतंत्र, राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक हितों के लिए सबसे बड़े खतरे हैं। उन्होंने कहा था कि रूस और चीन जैसे देश ब्रिटेन की राष्ट्रीय सुरक्षा को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं, इसलिए ब्रिटेन को आधुनिक दौर के खतरों से निपटने के लिए नए, सख्त और प्रभावी कानूनों की जरूरत है। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन रणनीतिक रूप से उन देशों के निशाने पर है, जो हमारी लोकतांत्रिक संस्थाओं और राष्ट्रीय सुरक्षा को कमजोर करना चाहते हैं। इस नई योजना के जरिए विदेशी प्रभाव को नियंत्रित किया जाएगा और जासूसी गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी।

सरकार के इस फैसले पर क्यों मचा विवाद?

सरकार के इस रुख से विपक्ष और कई सांसद नाराज हैं। लेबर पार्टी के सांसदों ने कहा है कि ब्रिटेन को चीन को लेकर नरम रुख नहीं अपनाना चाहिए। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की जासूसी गतिविधियां, साइबर हमले और ब्रिटेन की राजनीति में हस्तक्षेप के मामले बढ़ रहे हैं, ऐसे में चीन को सख्त निगरानी सूची में शामिल करना जरूरी है।

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ब्रिटेन की संसद में इस फैसले को लेकर भारी विरोध हो रहा है। लेबर पार्टी के सांसद और सुरक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि चीन लगातार ब्रिटिश राजनीति और संस्थानों में घुसपैठ कर रहा है। कई मामलों में यह भी सामने आया है कि चीनी कंपनियां ब्रिटेन की सरकारी गोपनीय सूचनाओं तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं।

ब्रिटेन की कंजर्वेटिव पार्टी के वरिष्ठ सांसद और पूर्व मंत्री नील ओ’ब्रायन ने कहा कि मुझे भरोसा नहीं हो पा रहा है। बीजिंग हमारे सांसदों की जासूसी कर रहा है, और फिर भी सरकार उनके खिलाफ कार्रवाई करने से पीछे हट रही है।

वहीं, लेबर पार्टी की सांसद सारा चैंपियन ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, यह पागलपन है! मुझे खुद अपने संसदीय कंप्यूटर में चीनी स्पाइवेयर मिला था, और अब सरकार चीन को इस कानून से छूट दे रही है?

पूर्व गृह मंत्री प्रीति पटेल ने कहा, यह एक बेहद गैर-जिम्मेदाराना और खतरनाक फैसला है। चीन लगातार हमारी सुरक्षा और हितों को नुकसान पहुंचा रहा है।

रूस और ईरान पर सख्त कार्रवाई, लेकिन चीन पर नरमी क्यों?

ब्रिटेन सरकार ने FIRS के तहत रूस और ईरान को खतरनाक देशों की सूची में रखा है, लेकिन चीन को बाहर रखा गया है। सवाल यह उठ रहा है कि अगर रूस और ईरान ब्रिटेन के लिए खतरा हैं, तो चीन क्यों नहीं? कुछ सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ब्रिटेन अमेरिका से अलग रुख अपनाकर चीन के साथ व्यापारिक संबंध बनाए रखना चाहता है। हालांकि, यह फैसला ब्रिटेन और अमेरिका के बीच रिश्तों में तनाव भी पैदा कर सकता है, क्योंकि अमेरिकी सरकार चीन के खिलाफ सख्त कदम उठा रही है।

चीन की सुपर एंबेसी पर बढ़ी चिंता

ब्रिटेन में पहले ही चीन की बढ़ती गतिविधियों को लेकर चिंता जताई जा रही है। हाल ही में, चीनी व्यवसायी यांग तेंगबो के खिलाफ जासूसी के आरोप लगे थे, जिसके कथित संबंध प्रिंस एंड्रयू से भी बताए जा रहे हैं। इसके अलावा, चीन लंदन में एक सुपर एम्बेसी बनाने की योजना बना रहा है, जिसे लेकर ब्रिटिश खुफिया एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। लंदन के बीच में बनाए जा रहे इस बड़े चीनी दूतावास को ब्रिटेन की खुफिया एजेंसियां एक सुरक्षा खतरा मान रही हैं। यह इलाका ब्रिटेन की संवेदनशील कम्यूनिकेशन सिस्टम के काफी करीब है, जिससे जासूसी की आशंका और बढ़ जाती है।

ब्रिटेन के कुछ मंत्री एंजेला रेयनेर (Angela Rayner) और यवेट कूपर (Yvette Cooper) इस प्रोजेक्ट के समर्थन में हैं, जबकि कई सांसदों और सुरक्षा अधिकारियों ने इसे रोकने की मांग की है।

भारत पर क्या पड़ेगा असर?

ब्रिटेन का यह फैसला भारत के लिए चिंता का विषय बन सकता है। भारत पहले से ही चीन की आक्रामक नीतियों और सीमा विवाद से निपटने की कोशिश कर रहा है। ब्रिटेन ने अगर चीन पर सख्ती नहीं दिखाई, तो इससे चीन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक तरह से अप्रत्यक्ष समर्थन मिल सकता है।

वहीं, भारत अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के साथ क्वाड (Quad) के तहत इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने की कोशिश कर रहा है। यदि ब्रिटेन चीन के प्रति नरम रवैया अपनाता है, तो इससे क्वाड देशों के साथ ब्रिटेन के सहयोग पर असर पड़ सकता है और भारत को चीन के खिलाफ अपनी रणनीति को और मजबूत करना पड़ सकता है।
ब्रिटेन भी इंडो-पैसिफिक में अपनी भूमिका बढ़ा रहा है, तो वहीं, चीन भी लगातार इंडो-पैसिफिक में अपनी नौसेना और सैन्य ताकत बढ़ा रहा है। अगर ब्रिटेन चीन के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं करता, तो इससे चीन को इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने का मौका मिल सकता है।

डाटा चोरी होने का डर

ब्रिटेन ने चीन पर साइबर सुरक्षा और आर्थिक जासूसी के मामलों में नरमी दिखाई है। लेकिन चीन पर कई देशों ने साइबर जासूसी और डेटा चोरी के आरोप लगाए हैं। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और भारत कई बार चीन के साइबर हमलों से प्रभावित हुए हैं। यह फैसला भारतीय टेक्नोलॉजी कंपनियों के लिए घातक हो सकता है। भारतीय आईटी और स्टार्टअप सेक्टर ब्रिटेन के साथ मिलकर काम करता है, लेकिन अगर ब्रिटेन ने चीन को प्राथमिकता दी, तो भारतीय कंपनियों के लिए व्यापार करना मुश्किल हो सकता है।

क्या करेगा अमेरिका?

वहीं, अमेरिका की बात करें, तो वह लंबे समय से चीन के खिलाफ सख्त नीति अपनाए हुए है और वह चाहता है कि उसके सहयोगी देश भी इसी दिशा में कदम उठाएं। हुआवेई पर बैन, चीनी कंपनियों पर प्रतिबंध और दक्षिण चीन सागर में सैन्य मौजूदगी बढ़ाकर अमेरिका ने चीन को कड़ा संदेश दिया है।

यदि ब्रिटेन चीन को सख्त निगरानी सूची में नहीं रखता, तो इससे अमेरिका और ब्रिटेन के संबंधों में तनाव बढ़ सकता है। अमेरिका पहले ही चीन के खिलाफ सख्त आर्थिक और सुरक्षा प्रतिबंध लागू कर चुका है। ऐसे में ब्रिटेन का यह फैसला अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों के लिए चिंता का विषय बन सकता है।

ब्रिटेन यूरोप का एक प्रमुख देश है, और उसकी नीतियों का असर यूरोपीय संघ (EU) के अन्य देशों पर भी पड़ता है। यदि ब्रिटेन चीन के प्रति नरम रहता है, तो यह संभव है कि अन्य यूरोपीय देश भी इसी राह पर चलें। इससे चीन को यूरोप में अधिक व्यापारिक और राजनीतिक लाभ मिल सकता है, जिससे पश्चिमी देशों की सुरक्षा और व्यापार नीति प्रभावित हो सकती है।

Defence Budget 2025-26: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह बोले– 2025 के बजट में रक्षा क्षेत्र को मिली बड़ी प्राथमिकता, 9.5 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 6.81 लाख करोड़ रुपये का आवंटन

Defence Budget 2025-26- Rs 6.81 Lakh Crore Allocated, 9.5% Increase, Says defence minister Rajnath Singh

Defence Budget 2025-26: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत केंद्रीय बजट 2025 में भारत के रक्षा बजट को 6.21 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ाया गया है, जो पिछले वित्तीय वर्ष के 5.94 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। इस बजट में आत्मनिर्भर भारत अभियान, सैन्य आधुनिकीकरण और निजी क्षेत्र की भागीदारी पर विशेष जोर दिया गया है। बजट में रक्षा क्षेत्र को अधिक वित्तीय संसाधन आवंटित किए गए हैं, जिससे स्वदेशी रक्षा उत्पादन और अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा। वहीं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 2025 के केंद्रीय बजट को भारत की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने वाला बजट बताया है।

Defence Budget 2025-26- Rs 6.81 Lakh Crore Allocated, 9.5% Increase, Says defence minister Rajnath Singh

इस साल रक्षा क्षेत्र के लिए 6.21 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, जो पिछले वित्तीय वर्ष के 5.94 लाख करोड़ रुपये की तुलना में अधिक है। यह भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 1.89% है। इस रक्षा बजट का बड़ा हिस्सा पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) के लिए निर्धारित किया गया है, जो नए हथियारों की खरीद, मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर के अपग्रेडेशन और डिफेंस टेक्नोलॉजी में निवेश के लिए जरूरी होता है।

वहीं, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने प्रतिक्रिया देते हुए 2025 के केंद्रीय बजट को भारत की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने वाला बजट बताया है। उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्रालय के लिए 6,81,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 9.5% अधिक है। यह केंद्रीय बजट का 13.4% हिस्सा है।

Defence Budget 2025-26: रक्षा बलों के आधुनिकीकरण पर विशेष जोर

रक्षा मंत्री ने कहा कि डिफेंस फोर्सेस के मॉर्डेनाइजेशन को हमारी सरकार की टॉप प्राथमिकताओं में रखा गया है, और इसके लिए 1,80,000 करोड़ रुपये की पूंजीगत राशि आवंटित की गई है। यह धनराशि भारतीय सशस्त्र बलों के टेक्नोलॉजिकल एडवांसमेंट, अत्याधुनिक हथियारों और सैन्य उपकरणों की खरीद और बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में खर्च की जाएगी, जिससे भारत की रक्षा तैयारियों को और मजबूती मिलेगी।

Defence Budget 2025-26: रक्षा सुधारों और स्वदेशी उद्योग को बढ़ावा

रक्षा मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता (Aatmanirbhar Bharat) को प्राथमिकता दे रही है और रक्षा आधुनिकीकरण बजट का 75% हिस्सा भारतीय रक्षा उद्योग से खरीद पर खर्च किया जाएगा। इससे देश के स्वदेशी रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को मजबूती मिलेगी और रक्षा क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

Union Budget 2025-26: Increased Focus on Defence Modernization, Indigenous Procurement; Military R&D Expected

उन्होंने बताया कि रक्षा बलों के आधुनिकीकरण के लिए 3,11,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, जो पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में दस गुना अधिक है। यह राशि नई तकनीकों के विकास, साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष रक्षा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसी अत्याधुनिक क्षमताओं के विकास में खर्च की जाएगी।

Defence Budget 2025-26: पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं

पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के उद्देश्य से Comprehensive Pension Contingency Health Scheme (CPHS) के लिए 8,300 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। यह राशि पिछले वर्ष के बराबर है और सरकार द्वारा पूर्व सैनिकों की भलाई के लिए दी जा रही प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

सीमा सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए बड़ी योजना

इस वर्ष के बजट में सीमा बुनियादी ढांचे (Border Infrastructure) को मजबूत करने के लिए भी महत्वपूर्ण राशि आवंटित की गई है। पूंजीगत बजट (Capital Head) के तहत सीमा सुरक्षा को बढ़ाने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क, पुल और सुरंगों के निर्माण में तेजी आएगी।

रक्षा बजट से आत्मनिर्भर भारत को मजबूती

रक्षा मंत्री ने कहा कि यह बजट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत रक्षा क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। सरकार का लक्ष्य रक्षा आयात को कम कर देश में निर्मित रक्षा उत्पादों का उपयोग बढ़ाना है। यह केवल भारत की रक्षा तैयारियों को मजबूत करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारतीय रक्षा उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएगा।

रक्षा मंत्री ने भरोसा जताया कि यह बजट भारतीय सेना, वायु सेना और नौसेना को आधुनिक तकनीक से लैस करने के साथ-साथ भारतीय रक्षा उद्योग को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।

बता दें कि 2025 की शुरुआत में, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने घोषणा की थी कि 2025 सुधारों का वर्ष होगा। आने वाले महीनों में, संयुक्त थिएटर कमांड (Integrated Theatre Commands), साइबर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसे नए क्षेत्रों, आसान और समयबद्ध अधिग्रहण (Simpler and Time-bound Acquisitions), तकनीक हस्तांतरण (Tech Transfer) को सरल बनाने और रक्षा निर्यात को बढ़ावा देने से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुधारों को लागू किए जाने की संभावना है।

कुल रक्षा बजट – 6.21 लाख करोड़ रुपये

  • 2024-25 (Revised Estimates) – 5.94 लाख करोड़ रुपये
  • 2024-25 (Budget Estimates) – 5.72 लाख करोड़ रुपये
  • वृद्धि – सिर्फ 35,000 करोड़ रुपये (लगभग 5%)

आत्मनिर्भर भारत: स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा

सरकार ने रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता को बढ़ाने के लिए ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियानों को और गति दी है। इस वर्ष के बजट में निम्नलिखित क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है:

  • स्वदेशी लड़ाकू विमान निर्माण: हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) जैसी कंपनियों को अधिक वित्तीय सहायता मिलेगी।
  • डोमेस्टिक मिसाइल सिस्टम और रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स: भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) जैसी कंपनियों को फायदा होगा।
  • निजी क्षेत्र की भागीदारी: रक्षा क्षेत्र में स्टार्टअप और प्रमुख उद्योगों को अधिक अवसर दिए जाएंगे, जिससे अत्याधुनिक रक्षा उपकरणों और सैन्य बुनियादी ढांचे का विकास होगा।

सैन्य आधुनिकीकरण और बुनियादी ढांचे का विकास

बजट में सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण के लिए अधिक पूंजीगत व्यय आवंटित किया गया है, जिससे उन्नत सैन्य उपकरण, लड़ाकू विमान, पनडुब्बियां और ड्रोन की खरीद में तेजी आएगी।

  • विशेष रूप से सीमा सुरक्षा बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए वित्तीय सहायता बढ़ाई गई है, खासकर उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर।
  • एआई-आधारित रक्षा तकनीक, साइबर युद्ध क्षमताओं और सैटेलाइट-आधारित निगरानी प्रणाली के विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है, जिससे भारत की रणनीतिक तैयारियों को मजबूती मिलेगी।

रक्षा अनुसंधान और विकास (R&D) को बढ़ावा

भारत में रक्षा अनुसंधान और इनोवेशन को बढ़ाने के लिए, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के बजट में वृद्धि की गई है। इस बजट में मुख्य रूप से निम्नलिखित क्षेत्रों पर जोर दिया गया है:

  • नई पीढ़ी के युद्धक वाहनों और हथियार प्रणालियों का विकास
  • साइबर सुरक्षा और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली को मजबूत करना
  • निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी को बढ़ावा देना, जिससे डिफेंस इनोवेशन में तेजी आए

सरकार का लक्ष्य है कि रक्षा R&D के लिए अधिक निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स को जोड़ा जाए, ताकि स्वदेशी सैन्य तकनीक विकसित हो और विदेशी हथियारों पर निर्भरता कम हो।

निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा

भारत सरकार ने रक्षा आयात पर निर्भरता कम करने और स्वदेशी रक्षा निर्माण को बढ़ावा देने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए हैं:

  • निजी रक्षा निर्माताओं के लिए कर प्रोत्साहन ताकि वे उत्पादन क्षमता का विस्तार कर सकें।
  • रक्षा बुनियादी ढांचे के विकास के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) को प्रोत्साहित करना।
  • रक्षा स्टार्टअप्स के लिए वित्तीय सहायता, जिससे नए रक्षा नवाचारों को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

Explainer: क्या है IIT हैदराबाद और DRDO का बनाया एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग सिस्टम? भारत के डिफेंस सेक्टर के लिए क्यों है यह बड़ी उपलब्धि

Explainer: How IIT Hyderabad & DRDO's Additive Manufacturing System is a Game-Changer for India's Defence Sector
Secretary, Department of Defence R&D and Chairman DRDO Dr Samir V Kamat

भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO), उद्योग जगत और शैक्षणिक संस्थानों के संयुक्त प्रयास से आईआईटी हैदराबाद (IIT Hyderabad) में लार्ज एरिया एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग (LAAM) सिस्टम का सफल प्रदर्शन किया गया है। यह उपलब्धि भारत में एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग (Additive Manufacturing) यानी थ्री-डी प्रिंटिंग तकनीक के विकास की दिशा में एक बड़ी छलांग मानी जा रही है।

Explainer: How IIT Hyderabad & DRDO's Additive Manufacturing System is a Game-Changer for India's Defence Sector
Secretary, Department of Defence R&D and Chairman DRDO Dr Samir V Kamat

इस प्रोजेक्ट को आईआईटी हैदराबाद, डीआरडीओ के डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेटरी (DRDL), हैदराबाद और इंडस्ट्री पार्टनर्स ने मिलकर डेवलप किया है। इस तकनीक का उपयोग रॉकेट और अन्य डिफेंस इक्विपमेंट्स के निर्माण में किया जाएगा। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि से भारत में डिफेंस और एयरोस्पेस सेक्टर में स्वदेशी उत्पादन क्षमता को बढ़ावा मिलेगा।

क्या है लार्ज एरिया एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग (LAAM) सिस्टम?

यह सिस्टम पाउडर बेस्ड डायरेक्टेड एनर्जी डिपोजिशन (DED) तकनीक पर आधारित है, जिसमें लेजर और ब्लोन-पाउडर का उपयोग करके मेटल के जटिल और बड़े आकार के हिस्सों को 3D प्रिंट किया जाता है। यह भारत में अब तक की सबसे बड़ी मेटल एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग मशीनों में से एक है।

यह मशीन भारत में बनी सबसे बड़ी मेटल एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग मशीनों में से एक है, जिसकी बिल्ड वॉल्यूम 1 मीटर x 1 मीटर x 3 मीटर है। यह पाउडर आधारित डायरेक्ट एनर्जी डिपोजिशन (DED) तकनीक पर काम करती है, जिसमें लेजर और ब्लोन-पाउडर सिस्टम का उपयोग किया जाता है। इस प्रक्रिया में दोहरे हेड्स का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे थर्मल बैलेंसिंग और निर्माण की गति में सुधार किया जा सकता है।

हाल ही में इस तकनीक का उपयोग करके 1 मीटर ऊंचा मेटलिक कंपोनेंट बनाया गया है, जो इस क्षेत्र में एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है।

Explainer: How IIT Hyderabad & DRDO's Additive Manufacturing System is a Game-Changer for India's Defence Sector

क्या होंगे फायदे?

इस एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग सिस्टम का इस्तेमाल रॉकेट और अन्य रक्षा उपकरणों के मुश्किल कंपोनेंट्स के निर्माण में किया जाएगा। पारंपरिक निर्माण तकनीकों की तुलना में यह तकनीक तेजी से उत्पादन करने, लागत घटाने और निर्माण की सटीकता बढ़ाने में मदद करेगी।

रक्षा क्षेत्र में योगदान:

  • लाइटर और अधिक मजबूत हथियार प्रणालियां विकसित की जा सकती हैं।
  • ड्रोन और मिसाइल सिस्टम के लिए हल्के लेकिन मजबूत घटकों का निर्माण किया जा सकता है।
  • आधुनिक टैंक और तोपों के लिए जटिल मेटल कंपोनेंट्स बनाए जा सकते हैं।

अंतरिक्ष अनुसंधान में योगदान:

  • कम वज़न वाले और जटिल डिजाइन के सैटेलाइट घटक बनाए जा सकते हैं।
  • रॉकेट इंजनों के लिए एडवांस्ड पार्ट्स कम लागत में विकसित किए जा सकते हैं।

इस तकनीक के जरिए डिफेंस इंडस्ट्री को कई फायदे मिलेंगे। इससे बड़े और जटिल डिजाइन के कंपोनेंट्स को कम लागत में विकसित किया जा सकेगा। कम मटेरियल वेस्टेज और कम उत्पादन लागत की वजह से लागत में कमी आएगी। यह तकनीक बेहतर फिनिश और हाई-प्रिसीजन के साथ कंपोनेंट्स का निर्माण कर सकती है। मिसाइल, रॉकेट इंजन, उपग्रहों और अन्य रक्षा उपकरणों के निर्माण में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी। इससे निर्माण प्रक्रिया तेज होगी, जिससे रक्षा उपकरणों की उपलब्धता जल्दी सुनिश्चित की जा सकेगी। साथ ही, इससे स्वदेशी रक्षा उत्पादन को मजबूती मिलेगी, जिससे आत्मनिर्भर भारत (Aatmanirbhar Bharat) अभियान को बल मिलेगा।

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डीआरडीओ प्रमुख ने दी बधाई

रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग (Department of Defence R&D) के सचिव और डीआरडीओ के चेयरमैन डॉ. समीर वी. कामत (Dr. Samir V Kamat) ने इस सफलता के लिए डीआईए-सीओई (DIA-CoE) और आईआईटी हैदराबाद की टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि “यह उपलब्धि भारत में बड़े पैमाने पर धातु के पुर्जों के निर्माण के नए रास्ते खोलेगी, जिससे एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में इनोवेशन और डेवलपमेंट को बढ़ावा मिलेगा।”

एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग क्या है और यह क्यों जरूरी है?

एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग को आमतौर पर थ्री-डी प्रिंटिंग (3D Printing) भी कहा जाता है। इसमें परत-दर-परत सामग्री जोड़कर किसी भी वस्तु का निर्माण किया जाता है। यह पारंपरिक काटने-छांटने वाली मशीनिंग प्रक्रियाओं के बजाय अधिक सटीक और कम वेस्टेज वाली प्रक्रिया है।

एयरोस्पेस, रक्षा, चिकित्सा उपकरण और ऑटोमोबाइल उद्योग में यह तकनीक तेजी से अपनाई जा रही है। अमेरिका, यूरोप और चीन पहले से ही बड़े पैमाने पर एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग का उपयोग कर रहे हैं, और अब भारत भी इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

वहीं, IIT हैदराबाद और DRDO के इस संयुक्त प्रयास से न केवल रक्षा क्षेत्र को मजबूती मिलेगी, बल्कि यह तकनीक ऑटोमोबाइल, एयरोस्पेस और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में भी क्रांति ला सकती है। आने वाले समय में, यह तकनीक बड़े पैमाने पर उत्पादन, रिसर्च और डेवलपमेंट में भारत को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

Aero India 2025: एयरो इंडिया शो में दिल लूट लेने वाले करतब नहीं दिखाएगा यह हेलीकॉप्टर! मायूस होंगे दर्शक, यह है वजह

Aero India 2025: Sarang Team's Participation in Jeopardy as Dhruv Helicopters Remain Grounded

Aero India 2025: बेंगलुरु में 10 से 14 फरवरी 2025 तक होने वाले Aero India 2025 में इस बार भारतीय वायुसेना (IAF) की प्रमुख एरोबेटिक डिस्प्ले सारंग टीम के शामिल होने को लेकर संदेह बना हुआ है। इसकी मुख्य वजह है HAL ध्रुव (ALH Dhruv) हेलिकॉप्टरों का ग्राउंडेड होना, जिसके चलते टीम को अब तक इवेंट में भाग लेने की मंजूरी नहीं मिली है।

Aero India 2025: Sarang Team's Participation in Jeopardy as Dhruv Helicopters Remain Grounded

भारतीय वायुसेना की सारंग एरोबेटिक डिस्प्ले टीम अपने शानदार हवाई करतबों के लिए जानी जाती है। यह टीम नियमित रूप से एयरो इंडिया शो का हिस्सा बनती आई है और दुनिया भर के दर्शकों को अपने करतबों से रिझाती रही है। लेकिन इस बार, Aero India 2025 में सारंग की गैरमौजूदगी से दर्शक मायूस हो सकते हैं।

सारंग और सूर्यकिरण दोनों टीमों ने हमेशा Aero India जैसे अंतरराष्ट्रीय इवेंट्स में भारत की हवाई ताकत का प्रदर्शन किया है। हालांकि, इस बार सूर्यकिरण टीम के शामिल होने को लेकर हरी झंडी मिल चुकी है, लेकिन सारंग टीम को अभी तक ग्रीन सिग्नल नहीं मिला है।

Aero India 2025 में सारंग के शामिल होने पर संदेह क्यों?

सूत्रों के अनुसार, भारतीय वायुसेना के लिए Aero India 2025 में सारंग टीम की भागीदारी को लेकर कोई आधिकारिक सूचना नहीं आई है। वायुसेना के एक अधिकारी ने कहा, “जब तक सुरक्षा जांच पूरी नहीं होती और अंतिम रिपोर्ट नहीं आती, तब तक ALH ध्रुव हेलिकॉप्टरों को उड़ाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। हालांकि, अगर आखिरी पलों में हमें मंजूरी मिलती है, तो सारंग टीम Aero India 2025 में भाग लेने के लिए तैयार है।”

ध्रुव हेलिकॉप्टरों के ग्राउंडेड होने की वजह

भारतीय वायुसेना और Hindustan Aeronautics Limited (HAL) ने हाल ही में ALH ध्रुव हेलिकॉप्टरों को सुरक्षा वजहों से अस्थायी तौर पर ग्राउंडेड कर दिया था। इसका प्रमुख कारण गुजरात के पोरबंदर में 5 जनवरी 2025 को भारतीय तटरक्षक बल (Coast Guard) का एक ALH ध्रुव MK III हेलिकॉप्टर क्रैश होना है, जिसमें तीन क्रू मेंबर्स की जान चली गई थी। इस हादसे के बाद, HAL ने सुरक्षा की दृष्टि से सभी 330 ध्रुव हेलिकॉप्टरों की गहन जांच करने का फैसला लिया और अस्थायी रूप से इनकी उड़ान पर रोक लगा दी।

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आर्मी डे परेड और गणतंत्र दिवस परेड में भी नहीं उड़ा था ध्रुव

इस बार की गणतंत्र दिवस परेड में हल्के लड़ाकू विमान LCA तेजस और एडवांस लाइट हेलीकॉप्टर (ALH) ध्रुव और रुद्र इस परेड का हिस्सा नहीं बने थे। LCA तेजस को शामिल न करने का फैसला भारतीय वायुसेना की मौजूदा नीति के तहत लिया गया था, जिसके अनुसार सिंगल-इंजन जेट्स को गणतंत्र दिवस परेड में उड़ान भरने की अनुमति नहीं दी गई थी। जबकि, ALH ध्रुव और रुद्र हेलीकॉप्टरों का पूरा बेड़ा हाल ही में हुई दुर्घटनाओं के बाद सुरक्षा जांच के कारण ग्राउंड किया गया था। इसी वजह से ये हेलीकॉप्टर 15 दिसंबर को आयोजित सेना दिवस परेड में भी शामिल नहीं हो पाए थे।

ध्रुव हेलिकॉप्टरों से जुड़े हालिया हादसे

ALH ध्रुव हेलिकॉप्टरों की सुरक्षा को लेकर पहले भी कई सवाल उठ चुके हैं। पिछले कुछ महीनों में इनसे जुड़ी कई घटनाएं सामने आई हैं:

  • अक्टूबर 2024 – बिहार में बाढ़ राहत अभियान के दौरान ALH ध्रुव हेलिकॉप्टर का इंजन फेल हुआ और उसे इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी।
  • सितंबर 2024 – भारतीय तटरक्षक बल का ALH ध्रुव MK III हेलिकॉप्टर अरब सागर में गिर गया, जिसमें दो अधिकारियों की मौत हो गई।
  • जनवरी 2025 – पोरबंदर हादसे में तीन क्रू मेंबर्स की जान चली गई, जिसके बाद सभी ध्रुव हेलिकॉप्टरों को ग्राउंडेड कर दिया गया।

इन घटनाओं के चलते HAL ने एक उच्च-स्तरीय जांच कमेटी का गठन किया है, जिसका नेतृत्व भारतीय वायुसेना के पूर्व एयर मार्शल विभास पांडे कर रहे हैं। यह कमेटी हेलिकॉप्टरों की सुरक्षा समीक्षा और मेंटेनेंस सुधारों पर सुझाव देगी।

Aero India 2025: सारंग की गैरमौजूदगी क्यों महत्वपूर्ण है?

सारंग टीम के हवाई करतब हमेशा से एयर शो की जान रहे हैं। 2003 में बनी यह टीम 2004 में Asian Aerospace Show, सिंगापुर में अपने अंतरराष्ट्रीय डेब्यू के बाद से 1,200 से अधिक एयर शो में प्रदर्शन कर चुकी है। टीम का पांच-हेलिकॉप्टर फॉर्मेशन, खासतौर पर इसके मोर-थीम वाली पेंट स्कीम, इसे अन्य एरोबेटिक टीमों से अलग बनाती है।

HAL ध्रुव: भारतीय सेनाओं का वर्क हॉर्स

HAL ध्रुव को भारत में डेवलप किया गया है और यह एक ऑल-वेदर, मल्टी-मिशन हेलिकॉप्टर है। इसके हिंगलेस, कठोर रोटर डिजाइन इसे अत्यधिक मेन्युवरेबल बनाते हैं। यह हेलिकॉप्टर भारतीय सेना, वायुसेना, नौसेना और तटरक्षक बल में अत्यधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके कई वर्जन भी हैं, जिनका इस्तेमाल युद्ध, राहत अभियान, मेडिकल इवैक्युएशन, समुद्री निगरानी और खोज एवं बचाव अभियानों में किया जाता है।

भारतीय सेना प्रमख जनरल उपेंद्र द्विवेदी भी ध्रुव की तारीफ करते हैं। पुणे में आयोजित 77वें सेना दिवस परेड के दौरान ALH ध्रुव हेलीकॉप्टर को लेकर कहा था, “ध्रुव हेलीकॉप्टर ने 2023-24 में 40,000 घंटे से अधिक की उड़ान भरी है, और इस दौरान केवल एक बार तकनीकी गड़बड़ी हुई। यह हेलीकॉप्टर 15,000 फीट से अधिक की ऊंचाई वाले कठिन इलाकों में सफलतापूर्वक कार्य कर रहा है। हमें इस प्लेटफॉर्म पर 100% भरोसा है।”

क्या Aero India 2025 में उड़ान भर पाएंगे ध्रुव हेलिकॉप्टर?

अभी तक की स्थिति को देखते हुए, यह कहना मुश्किल है कि HAL ध्रुव हेलिकॉप्टरों को Aero India 2025 में उड़ान भरने की अनुमति मिलेगी या नहीं। हालांकि, भारतीय वायुसेना और HAL इस कोशिश में हैं कि सुरक्षा समीक्षा जल्द पूरी हो और हेलिकॉप्टरों को हरी झंडी मिल जाए।

अगर अंतिम क्षणों में ध्रुव हेलिकॉप्टरों को मंजूरी मिलती है, तो सारंग टीम को शायद सीमित प्रदर्शन का मौका मिल सकता है। लेकिन अगर यह हेलिकॉप्टर उड़ान नहीं भरते, तो यह पहली बार होगा जब Aero India में सारंग टीम गैरमौजूद रहेगी।

Union Budget 2025-26: Increased Focus on Defence Modernization, Indigenous Procurement & Military R&D Expected

Union Budget 2025-26: Increased Focus on Defence Modernization, Indigenous Procurement & Military R&D Expected
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Union Budget 2025-26: Although tensions have palpably reduced on the Line of Actual Control (LAC), but the forces of India and China have not demobilised and a major chunk still remains deployed on the frigid heights of Eastern Ladakh. The stand-off with China has put a spotlight on the slow pace of modernisation of the Indian Armed Forces. Although strong efforts are being made to increase the pace of modernisation of the armed forces to take on any challenge in the future.

Union Budget 2025-26: Increased Focus on Defence Modernization, Indigenous Procurement & Military R&D Expected
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The conflicts in Ukraine, West Asia and the growing pace of defence technology has underscored the importance of improving domestic defence industry. The government and the armed forces are committed to Aatmanirbharta in defence. Last year’s defence budget had put a special emphasis on promoting the Indian defence ecosystem. The government had taken a two-pronged approach as was demonstrated by the budget, the first of these was the large share of the financial resources for the acquisition from domestic industry and the second approach was to provide more resources for Research and Development.

Last year, the government allocated Rs 6,21,940.85 crore (US $75 billion) to the Defence Ministry. Of the total amount allocated 27.66% was earmarked for acquisitions, 14.82% for revenue expenditure (sustenance and operational preparedness), 30.66% for salaries and allowances, 22.70% for pensions and 4.17% for civil organisations under the defence ministry.

Supreme Court to Centre: Form Litigation Policy, Criticizes Indian Army for Filing Frivolous Appeals Against Veterans

Off the capital outlay of Rs 1.72 lakh crore, the lion’s share of the budget at Rs 1.05 lakh crore was earmarked for procurements from India firms. This allocation is in line with the government’s goal of self-reliance in the defence sector. As India is in it ‘Amrit Kaal’ – the lead up to the centenary of our independence the focus of the government is to make India a prosperous nation by 2047. Focus on Aatmanirbharta will be an important consideration when allocating resources.

It is expected that the growth in the defence budget will be driven by the Capital Expenditure (CapEx). The government is expected to increase this head of the budget by approximately 11% – 15%. This would see the figure rise from Rs 1.90 lakh crore to Rs 1.99 lakh crore. If the government maintains the 75% of CapEx budget for domestic procurement. In this scenario as much as Rs 1.50 lakh crore worth of defence equipment could be procured from within India.

The Border Roads Organisation (BRO) is also expected to see an increase in its budget. Last year the government had increased the budget of the BRO by 30% to Rs 6,500 crore. The organisation is looking after the construction of 10,023 kms of road under the India China Border Roads program. Around 31 tunnels are also at various stages of completion on our frontier roads, including the Zojila Tunnel as well as some other tunnels that will open a perennial road link from Himachal Pradesh to Ladakh.

In FY 2024-25 the government had allocated Rs 23,855 crore for defence R&D. Recently DRDO chief had said that nearly $10 billion are required for R&D. It is expected that the highest increase in terms of percentage growth could be expected under this head. The requirement as per the DRDO chief is thrice that of the requirement. Funds for iDEX and Technology Development Fund are also expected to see a major increase.

Pension funds and salaries are also expected to increase. More changes could be expected under this head dependent upon when the government plans to roll out the 8th Pay Commission.

Supreme Court to Centre: Form Litigation Policy, Criticizes Indian Army for Filing Frivolous Appeals Against Veterans

Rehabilitation Of Disabled Officer Cadets Supreme Court

Indian Army Litigation Policy: Indian Army continues to face the wrath from the Supreme Court for filing frivolous appeals against the veterans and asked government to come out with a litigation policy soon else heavy costs would be imposed on them.

Supreme Court to Centre: Form Litigation Policy, Criticizes Indian Army for Filing Frivolous Appeals Against Veterans

This is the second time in a month’s time, when the top court had pulled up the Ministry of Defence (MoD) for filing frivolous appeals against the veterans before the top court.

The top court warned Centre government stating that if it failed to take corrective action, the court would start imposing fines on frivolous appeals.

The court was hearing an appeal filed by the Union of India against an Armed Forces Tribunal order in 2021 granting disability pension to a retired radio fitter.

SUPREME COURT DIRECTS MoD TO FINALISE LITIGATION POLICY

A bench headed by Justice A S Oka asked Centre to come out with a litigation policy and said, “When government has policy for tax matters, where the government has a structured litigation policy to limit unnecessary appeals, Centre must evolve a similar policy for armed forces cases.”

The bench directed the government to inform the court whether such a policy decision would be taken before the next hearing.

“Why should these persons be dragged to the Supreme Court?There should be some discretion. There should be some policy on who is taken to this court. Maybe in cases where there are high salaries and higher financial implications, the government can decide to appeal. But not in every case,”the bench remarked.

NOT EVERY ORDER FROM TRIBUNAL NEEDS TO BE CHALLENGED

“Each and every member of the armed forces who gets relief from the tribunal need not be dragged to this court,” the short order from the bench stated.

Disability Pension: Over 3000 appeals by MoD pending in Supreme Court and High Court against death and disability benefits

The bench further remarked, “Members of the armed forces notice that their services are taken, and when they develop disabilities, they are first made to go to the Tribunal. Even when they succeed there, they are dragged to this court. What effect does this have on their morale?”

TOP COURT SLAPPED FINE ON CENTRE FOR UNNECESSARY LITIGATION

Last month, top court had also slapped penalty of Rs 50,000 on the Union government and the Indian Army for forcing a soldier’s widow into unnecessary litigation. She had to fight for years to secure a family pension after her husband, Naik Inderjeet Singh, died during a counter terrorism patrol in Jammu and Kashmir.

NEED FOR MORE BENCHES OF AFT

Earlier this month, the top court had mooted to have more regional benches of AFT and had said, “Can we have the regional bench in Chandigarh, and then like we have done in Family Courts, they can hold circuit bench in Jammu, Srinagar, that will give opportunity to local Bar to assist them. It will also lead to cost-effectivity, access to justice for Himachal matters, they can go to Shimla and Dharamshala basic infrastructure is available. High Courts can also provide some that kind of system can help expedite hearings and reduce cost of litigation also. A retired army official coming all the way to Chandigarh, that also can be avoided.”

PENDING APPEALS

There are around 3,000 pending appeals by the defence ministry in several high courts and the apex court regarding death and disability benefits awarded by different tribunals