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Veterans Achievers Award: लखनऊ में वेटरंस अचीवर्स अवार्ड से सम्मानित हुए रिटायर्ड कर्नल सिद्दीकी और सूबेदार उदय राज सिंह

Veterans Achievers Award: General Upendra Dwivedi Honors Colonel MZU Siddiquie and Subedar Uday Raj Singh for Their Remarkable Social Contributions

Veterans Achievers Award: हाल ही में लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम में भारतीय सेना के प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने दो सेवानिवृत्त सैनिकों को ‘वेटरन्स अचीवर्स अवार्ड’ से सम्मानित किया। यह पुरस्कार कर्नल एमजेडयू सिद्दीकी (सेवानिवृत्त) और सूबेदार (मानद कैप्टन) उदय राज सिंह (सेवानिवृत्त) को दिया गया। इस पुरस्कार ‘कैपेबिलिटी डेवलपमेंट कॉन्फ्रेंस’ के दौरान दिए गए थे। दोनों वेटरन्स ने अपने पूरे करियर में न केवल सेना में सेवा दी, बल्कि समाज की भलाई के लिए भी काफी काम किया।

Veterans Achievers Award: General Upendra Dwivedi Honors Colonel MZU Siddiquie and Subedar Uday Raj Singh for Their Remarkable Social Contributions

कर्नल सिद्दीकी का योगदान

कर्नल एमजेडयू सिद्दीकी का नाम आज समाज में उनके अद्वितीय सामाजिक कार्यों के लिए जाना जाता है। उन्होंने 2009 में ‘हुसना महिला और बाल विकास एवं शिक्षा समाज’ (Husna Women and Child Development and Education Society) नामक एक गैर-सरकारी संस्था की स्थापना की थी। यह संस्था मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं और बच्चों के लिए काम करती है। कर्नल सिद्दीकी की संस्था ने हजारों महिलाओं और बच्चों को शिक्षा, स्वास्थ्य, और रोजगार के अवसर प्रदान किए हैं। उनका मानना ​​है कि समाज के सबसे कमजोर वर्ग की मदद करने से ही असल बदलाव आता है।

कर्नल सिद्दीकी न केवल एक समाजसेवी हैं, बल्कि एक लेखक, मीडिया योगदानकर्ता और यूट्यूब होस्ट भी हैं। उन्होंने कई किताबें लिखी हैं और समाज को जागरूक करने के लिए कई मीडिया प्लेटफार्मों पर योगदान दिया है। कर्नल सिद्दीकी न केवल अपनी पूरी पेंशन दान में दे देते हैं, बल्कि इस राशि का उपयोग जरूरतमंदों को कंबल देने में भी करते हैं। यह उनकी निस्वार्थ सेवा भावना का प्रतीक है। उनका यह प्रयास विशेष रूप से उत्तर प्रदेश राज्य में काफी सराहा गया है, जहां उनकी संस्था ने कई लोगों की ज़िंदगी को बेहतर किया है।

Veterans Achievers Award: General Upendra Dwivedi Honors Colonel MZU Siddiquie and Subedar Uday Raj Singh for Their Remarkable Social Contributions

सूबेदार उदय राज सिंह का योगदान

वहीं, सूबेदार (मानद कैप्टन) उदय राज सिंह ने भी समाज सेवा में अपने योगदान से एक नया मानक स्थापित किया है। वे वेटरन्स और उनके परिवारों की सहायता के लिए निरंतर काम करते रहते हैं। सूबेदार सिंह जिला सैनिक कल्याण बोर्ड के साथ मिलकर काम करते हैं, जिससे वे वीर नारियों (जिनके पति युद्ध में शहीद हो गए) और विधवाओं को वित्तीय सहायता और रोजगार के अवसर दिलवाते हैं।

सूबेदार सिंह की एक और महत्वपूर्ण भूमिका यह है कि वे वरिष्ठ वेटरन्स को उनके पेंशन और बकाए के मामलों में मदद करते हैं। बहुत से वेटरन्स को पेंशन और अन्य लाभों में देरी होती है, और सूबेदार सिंह इस समस्या को हल करने में उनकी मदद करते हैं। इसके अलावा, सूबेदार सिंह अस्योर डीसेंट लास्ट राइट्स स्कीम (ADLRS) के तहत शहीद सैनिकों के अंतिम संस्कार में भी सहायता प्रदान करते हैं, ताकि उन सैनिकों को एक सम्मानजनक विदाई मिल सके।

सेवा का संदेश

कर्नल सिद्दीकी और सूबेदार सिंह दोनों ने अपनी पूरी जिंदगी समाज सेवा और वेटरन्स की मदद करने में बिताई है। उनका यह योगदान न केवल उनके साथियों के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणादायक है। वे दोनों ही यह मानते हैं कि सेना में सेवा करने का कार्य सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि एक जीवनभर की जिम्मेदारी है। सेवा का यह सफर एक मजबूत और एकजुट भारत के निर्माण में योगदान करता है।

संस्कार और सम्मान

इन दोनों वीरों ने यह साबित किया है कि सेवा का कोई अंत नहीं होता। भले ही वे सेना से सेवानिवृत्त हो गए हैं, लेकिन उनका समाज के प्रति योगदान अभी भी जारी है। उनका उद्देश्य केवल अपने साथियों की मदद करना नहीं है, बल्कि समाज के हर वर्ग तक मदद पहुंचाना है। उनका यह अवार्ड न केवल उनके द्वारा किए गए कार्यों की सराहना है, बल्कि यह हम सभी को प्रेरित करता है कि हम भी अपने देश और समाज के लिए कुछ अच्छा करें।

समाज में बदलाव लाने का काम

कर्नल सिद्दीकी और सूबेदार सिंह की तरह हर एक व्यक्ति को अपने स्तर पर समाज के लिए कुछ करने का प्रयास करना चाहिए। उनके जैसे वेटरन्स हमारे समाज के असली नायक हैं, जो बिना किसी दिखावे के अपनी सेवा करते हैं। उनके कार्यों से यह सीख मिलती है कि सेवा और सम्मान का रास्ता सबसे कठिन होता है, लेकिन वही रास्ता समाज में सच्चा बदलाव ला सकता है।

कर्नल सिद्दीकी और सूबेदार सिंह के योगदान को देखते हुए हमें यह समझना चाहिए कि सच्ची सेवा कभी थमती नहीं है, और यह हमारे देश को एक मजबूत और बेहतर राष्ट्र बनाने की दिशा में एक कदम और बढ़ाती है।

“Flowers on a Kargil Cliff”: युद्ध, प्रेम और मानवीय संवेदनाओं की अद्भुत दास्तान

Flowers on a Kargil Cliff: Untold Stories of War, Love, and Humanity in the Himalayas

“Flowers on a Kargil Cliff” कोई साधारण किताब नहीं है। यह उन कहानियों का संग्रह है, जो हिमालय की ऊँचाइयों में दफऩ हैं, युद्ध के बारूद और बर्फ के बीच पनपते जीवन की गवाही देती हैं। इस किताब में न केवल गोलियों और खून की कहानी है, बल्कि प्रेम, साहस, और मानवीय भावनाओं का गहरा ताना-बाना है।

Flowers on a Kargil Cliff: Untold Stories of War, Love, and Humanity in the Himalayas

यह किताब उस साहसी पत्रकार की दास्तान है, जिसने 15,000 से 16,000 फीट की ऊंचाइयों पर अपनी जान की परवाह किए बिना कारगिल युद्ध की सच्चाइयों को सामने लाए। वहीं, उन्होंने उन बर्फीले मैदानों से नाजुक फूल तोड़े और उन्हें प्रेम पत्रों में समेटकर अपनी मंगेतर को भेजा। ये फूल सिर्फ प्रेम का प्रतीक नहीं थे, बल्कि उन वीर जवानों की निशानी भी थे, जिन्होंने उन कठिन परिस्थितियों में उन्हें लेखक के साथ साझा किया।

युद्ध के परे वीरता की कहानियां

“Flowers on a Kargil Cliff” के लेखक और प्रसिद्ध डिफेंस रिपोर्टर विक्रमजीत सिंह ने उन ऊंचाइयों पर जो देखा, वह महज गोलियों और बारूद का मंज़र नहीं था। उन श्वेत हिमाच्छादित पर्वतों पर बिखरे खून के दाग़ थे, उन वीरों की असीम वीरता की निशानी के, जो वहां अपने परिवार और जीवन से दूर, हर पल मौत का सामना कर रहे थे। किताब में उन रातों का ज़िक्र है जब लेखक ने 12 जम्मू एंड कश्मीर लाइट इन्फैंट्री के जवानों के साथ 15,700 फीट पर छोटे-से तंबू में रात गुज़ारी, गोलियों की बौछार के बीच छिपते-छिपाते रिपोर्टिंग की और दुनिया को युद्ध की पहली-पहली झलक दिखाई। उस वक्त भारतीय सेना ने लेखक को यह खास अनुमति उसकी साहसिक पत्रकारिता की वजह से दी, जिसे उसने श्रीनगर में रहते हुए कश्मीर में कई ऑपरेशंस को कवर कर साबित किया था।

किताब में न केवल भारतीय बल्कि पाकिस्तानी सेना के वीरों की भी कहानियां हैं, जैसे कि कैप्टन रॉमल अकरम, जो अकेले लड़ते हुए बुरी तरह घायल हो गए थे। उसके चेहरे पर लगी गोली के ज़ख्म से बहता खून शायद यह चीख-चीख कर कह रहा था कि साहस न तो किसी सरहद में बंधा है और न ही किसी धर्म से बंधा।

किताब उन 244 पाकिस्तानी सैनिकों की भी बात करती है जो हिंदुस्तान की सरज़मीं में 25 सालों से दफ़्न हैं, जिनकी कब्रों पर उनकी माताओं ने अब तक कभी सिर नहीं झुकाया, लेकिन हर गर्मी में खिलने वाले जंगली फूल उनके लिए श्रद्धांजलि का गुलदस्ता बन जाते हैं।

Flowers on a Kargil Cliff: Untold Stories of War, Love, and Humanity in the Himalayas

प्रेम और बलिदान की छू लेने वाली कहानियां

इस किताब में युद्ध की कठोर सच्चाइयों के साथ-साथ प्रेम और बलिदान की कोमल कहानियां भी हैं। जैसे लांस नायक डुन नारायण श्रेष्ठ की पत्नी, टेक कुमारी, जो अपने पति के मारे जाने की खबर सुनने के बाद भी हर रोज़ सिंदूर लगाती थी और उसकी चूड़ियां अब भी उसे अपने सुहाग का एहसास दिलाती थीं, भले ही उसका पति कारगिल की गुफाओं में दो साल तक लापता और मृत पड़ा रहा।

फिर कैप्टन जिन्टू गोगोई और ऑल इंडिया रेडियो की अनजना पराशर की प्रेम कहानी, जो मौत को पार कर अमर हो गई, जब सालों बाद जन्मी अनजना की बेटी का जन्मदिन कैप्टन जिन्टू के जन्मदिन के दिन ही आया। यह महज एक संयोग नहीं, बल्कि शायद एक दिव्य संकेत था।

किताब के एक गोरखा सैनिक का भी फोटो है, जिसमें उसने अपने प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तानी सैनिक के सिर के चारों ओर अपना सफेद रुमाल बांध दिया था, ताकि उसकी आत्मा को शांति मिले। यह वह मानवीयता है, जो युद्ध की भयावहता में भी जीवित रहती है।फोटो सेक्शन में ही, ‘काला पत्थर’ की पहाड़ी पर, एक भारतीय अधिकारी की अस्थियों को उड़ाते समय का फोटो भी है, जिसने युद्ध में अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे।

युद्ध और जीवन का संगम

“Flowers on a Kargil Cliff” उन छोटे-छोटे फूलों की तरह है जो बर्फ के बीच खिले रहते हैं, उन वीर जवानों की यादों की तरह जो अपनी कहानियाँ बर्फ के सफेद पर्दे के नीचे छोड़ गए हैं। यह किताब न केवल उनके अदम्य साहस की, बल्कि उन सैनिकों के असली संघर्षों, प्रेम और दर्द की भी एक झलक देती है। लेखक ने इन कहानियों को इस तरह पेश किया है कि जिससे पाठक का दिल और दिमाग दोनों छू जाए।

“Flowers on a Kargil Cliff” उन छोटे-छोटे हिमालयी फूलों की तरह है, जो कठोर बर्फ के बीच भी खिलते हैं। यह किताब युद्ध के शौर्य, मानवीयता, और प्रेम की अनकही कहानियों की एक अद्भुत यात्रा है। इसमें वे यादें जीवित हैं, जो न केवल इतिहास की धरोहर हैं, बल्कि हमारी आत्मा को भी छू जाती हैं।

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Exercise AUSTRAHIND: पुणे में चल रहा है भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास, लिखी जा रही है दोनों देशों के बीच रिश्तों की नई इबारत

Exercise AUSTRAHIND: India-Australia Joint Military Drill Underway in Pune, Strengthening Ties Between the Two Nations

Exercise AUSTRAHIND: भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच मजबूत होते रिश्तों का नया अध्याय इन दिनों पुणे के औंध में लिखा जा रहा है। औंध में दोनों देशों की सेनाओं के बीच ऑस्ट्राहिंड 2024 संयुक्त सैन्य अभ्यास चल रहा है, जहां दोनों सेनाएं एक-दूसरे के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही हैं। 8 नवंबर को शुरू हुए इस अभ्यास का उद्देश्य सिर्फ युद्ध कौशल सिखाना नहीं, बल्कि दोनों देशों के सैनिकों के बीच दोस्ती और समझ का पुल बनाना है।

Exercise AUSTRAHIND: India-Australia Joint Military Drill Underway in Pune, Strengthening Ties Between the Two Nations

इस अभ्यास का पहला चरण बहुत खास रहा है। भारतीय और ऑस्ट्रेलियाई सैनिकों ने मिलकर शारीरिक फिटनेस, मार्शल आर्ट्स, और विशेष हथियारों का उपयोग सीखा है। इन सबके साथ, दुश्मन के ठिकाने पर हमला करना, घायल साथियों को तत्काल सहायता पहुंचाना जैसी चुनौतीपूर्ण स्थितियों में एक-दूसरे के साथ खड़े रहना भी सिखाया गया है। ये प्रशिक्षण न केवल युद्ध के मैदान में बल्कि मुश्किल हालात में भी दोनों सेनाओं के बीच भरोसा बढ़ा रहे हैं।

अभ्यास के बीच, भारतीय संस्कृति से परिचय के लिए दोनों देशों के सैनिकों को पुणे के ऐतिहासिक सिंहगढ़ किले की सैर कराई गई। सिंहगढ़ की ऊंचाई पर जाकर उन्होंने हमारे इतिहास को समझा और वो गौरव महसूस किया, जो इस किले की दीवारों में दर्ज है। इसके बाद, 12 नवंबर को ऑस्ट्रेलियाई दल ने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) का दौरा किया, जहां उन्होंने भारतीय सेना के अनुशासन और कड़ी मेहनत की झलक देखी। यह अनुभव उनके लिए अनमोल था, जिससे भारतीय सेनाओं के प्रति उनके मन में आदर और बढ़ा।

Exercise AUSTRAHIND: India-Australia Joint Military Drill Underway in Pune, Strengthening Ties Between the Two Nations

अगले चरण में, दोनों सेनाओं के सैनिक संयुक्त युद्ध अभ्यास और रणनीतियों पर काम करेंगे। इसका समापन 19-20 नवंबर को 48 घंटे के फाइनल परीक्षण के साथ होगा। इस दौरान वे अपनी सीखी हुई सभी तकनीकों को मिलकर आजमाएंगे।

Exercise AUSTRAHIND: India-Australia Joint Military Drill Underway in Pune, Strengthening Ties Between the Two Nations

इस अभ्यास का नाम भले ही ऑस्ट्राहिंड हो, लेकिन इसका मतलब है भरोसे की डोर और दोस्ती का नया अध्याय। ऑस्ट्राहिंड 2024 सिर्फ एक अभ्यास नहीं, बल्कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के रिश्तों की नई ऊंचाइयों की ओर एक कदम है, जो दोनों देशों को एक दूसरे के और करीब लाएगा।

Guided Pinaka Weapon System: डीआरडीओ ने सफलतापूर्वक पूरा किया गाइडेड पिनाका वेपन सिस्टम का फ्लाइट टेस्ट

Guided Pinaka Weapon System: DRDO Successfully Completes Flight Test, Boosting India’s Indigenous Defense Capability

SPARSH Fake WhatsApp Messages: स्पर्श ने वेटरन पेंशनरों के लिए जारी की चेतावनी, व्हाट्सएप पर फर्जी संदेशों से रहें सतर्क, नहीं तो हो सकता है बड़ा नुकसान

Commutation of Pension: How the 15-year restoration period is under scrutiny, veterans seek reduction to 12 years
File Photo

SPARSH Fake WhatsApp Messages: हाल ही में सोशल मीडिया पर एक फर्जी संदेश फैल रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि SPARSH (सशस्त्र बलों के पेंशनर्स के लिए सेवा पोर्टल) से संबंधित समस्याओं का समाधान अब व्हाट्सएप के जरिए किया जा सकता है। यह संदेश पेंशनर्स को गुमराह कर रहा है और उनसे व्यक्तिगत जानकारी जैसे पेंशन, OROP (वन रैंक, वन पेंशन) या अन्य संवेदनशील जानकारी प्राप्त करने की कोशिश कर रहा है।

SPARSH Issues Important Warning: Beware of Fake WhatsApp Messages, Do Not Share Personal Information

इस संदर्भ में SPARSH ने एक स्पष्ट चेतावनी जारी की है कि व्हाट्सएप पर कोई भी आधिकारिक पेंशन सेवा नहीं दी जाती है और न ही SPARSH के किसी भी मामले को हल करने के लिए कोई व्हाट्सएप नंबर अधिकृत किया गया है। इस फर्जी मैसेज का मुख्य उद्देश्य पेंशनर्स की निजी जानकारी चुराना और उन्हें धोखा देना है।

SPARSH की चेतावनी

SPARSH ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि कुछ अपरिचित और धोखेबाज लोग व्हाट्सएप पर फर्जी संदेश भेजकर पेंशनर्स से उनकी व्यक्तिगत जानकारी मांग रहे हैं। यह जानकारी लेकर वे पेंशनर्स के खातों से पैसे निकाल सकते हैं। SPARSH ने सभी पेंशनर्स से अपील की है कि वे किसी भी अनधिकृत व्हाट्सएप नंबर से संदेशों पर भरोसा न करें और अपनी संवेदनशील जानकारी जैसे बैंक अकाउंट विवरण, पेंशन विवरण या अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज़ न भेजें।

SPARSH Fake WhatsApp Messages

 

फर्जी संदेशों से सतर्क रहें

इस फर्जी संदेश में यह दावा किया जाता है कि SPARSH द्वारा अब व्हाट्सएप के जरिए पेंशनर्स की समस्याओं का समाधान किया जा रहा है। संदेश में कहा गया है कि पेंशनर्स अपने मुद्दों को जल्द हल करने के लिए व्हाट्सएप पर एक विशेष नंबर पर संपर्क करें। इसके बाद पेंशनर्स से उनकी पेंशन संबंधी जानकारी, बैंक डिटेल्स और अन्य निजी जानकारी मांगी जाती है।

SPARSH ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वह व्हाट्सएप या किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए पेंशन से संबंधित कोई सेवा प्रदान नहीं करता। इसके साथ ही, इसने एक बार फिर यह दोहराया कि पेंशनर्स को अपनी व्यक्तिगत जानकारी केवल SPARSH के अधिकृत सेवा केंद्रों और आधिकारिक पोर्टल पर ही साझा करनी चाहिए।

SPARSH Fake WhatsApp Messages

क्यों हो सकती है धोखाधड़ी?

इस तरह की धोखाधड़ी से पेंशनर्स को न सिर्फ आर्थिक नुकसान हो सकता है, बल्कि उनके व्यक्तिगत विवरण भी गलत हाथों में जा सकते हैं। अपराधी इस जानकारी का इस्तेमाल करके पेंशनर्स के खातों से पैसे निकाल सकते हैं या अन्य धोखाधड़ी कर सकते हैं। इसके अलावा, फर्जी संदेशों का मुख्य उद्देश्य पेंशनर्स की जानकारी चुराना और उनकी सुरक्षा को खतरे में डालना है।

SPARSH ने पेंशनर्स से अपील की है कि वे ऐसे फर्जी संदेशों का तुरंत खंडन करें और इनका जवाब न दें। इसके अलावा, यदि कोई पेंशनर इस प्रकार के फर्जी संदेशों का सामना करता है, तो वह तत्काल SPARSH के आधिकारिक संपर्क नंबरों पर सूचना दे सकता है।

सुरक्षा के उपाय

SPARSH ने पेंशनर्स को सलाह दी है कि वे केवल अधिकृत वेबसाइट या अधिकृत सेवा केंद्रों के माध्यम से ही अपनी पेंशन संबंधी जानकारी प्राप्त करें। किसी भी अनजान नंबर से संपर्क करने से बचें और फर्जी संदेशों का तुरंत खंडन करें।

यदि आपको किसी भी संदिग्ध संदेश या कॉल का सामना होता है, तो तुरंत अपने नजदीकी SPARSH सेवा केंद्र से संपर्क करें।

SPARSH का उद्देश्य है कि सभी पेंशनर्स को सुरक्षित और सहज सेवाएं प्रदान की जाएं, और ऐसी किसी भी धोखाधड़ी से बचने के लिए सभी पेंशनर्स को जागरूक किया जाए।

आधिकारिक संपर्क सूत्र

SPARSH ने पेंशनर्स से अपील की है कि वे हमेशा आधिकारिक SPARSH पोर्टल पर जाकर अपनी समस्याओं का समाधान प्राप्त करें। इसके लिए SPARSH के अधिकृत हेल्पलाइन नंबर और वेबसाइट का उपयोग करें। SPARSH का अधिकृत पोर्टल (https://www.sparsh.in) है, जहां पेंशनर्स अपनी समस्याओं को दर्ज कर सकते हैं और सहायता प्राप्त कर सकते हैं।

SPARSH ने इस बात की पुष्टि की है कि भविष्य में व्हाट्सएप या किसी अन्य अनधिकृत प्लेटफॉर्म पर पेंशन से संबंधित कोई जानकारी साझा नहीं की जाएगी। इसलिए सभी पेंशनर्स को अपनी जानकारी की सुरक्षा के लिए सतर्क रहना चाहिए और किसी भी संदिग्ध गतिविधि से बचना चाहिए।

फर्जी संदेशों से बचने और अपनी सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि हम हमेशा आधिकारिक चैनल का ही उपयोग करें। किसी भी अनधिकृत और संदिग्ध लिंक या व्हाट्सएप नंबर से दूरी बनाकर रखें। SPARSH और अन्य सरकारी सेवा केंद्रों द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं के बारे में सही जानकारी के लिए हमेशा आधिकारिक पोर्टल पर ही जाएं।

Shifali Jamwal: सेना के सेवानिवृत्त अधिकारी की बेटी बनीं ‘Mrs Universe America 2024’, जम्मू से है गहरा नाता

Shifali Jamwal: Daughter of Retired Army Officer Crowned 'Mrs Universe America 2024', Deeply Connected to Jammu.

Shifali Jamwal: शिफाली जमवाल, जो एक सेवानिवृत्त सेना अधिकारी की बेटी हैं, को हाल ही में ‘Mrs Universe America 2024’ का ताज पहनाया गया। यह समारोह अमपावरिंग डॉट ऑर्ग द्वारा रेंटन, अमेरिका में आयोजित किया गया।

Shifali Jamwal: Daughter of Retired Army Officer Crowned 'Mrs Universe America 2024', Deeply Connected to Jammu.

शिफाली का जन्म और पालन-पोषण जम्मू में हुआ। उनके परिवार का सैन्य पृष्ठभूमि होने के कारण, उन्होंने बचपन से ही संघर्ष और दृढ़ संकल्प देखे। शिफाली कहती हैं, “सैन्य परिवेश में बड़े होते हुए मैंने हमेशा अपने माता-पिता को चुनौतियों का डटकर सामना करते देखा।”

वर्तमान में सिएटल में रहने वाली शिफाली, Esper.io में सीनियर प्रोडक्ट मार्केटिंग मैनेजर के रूप में काम कर रही हैं और साथ ही पर्यावरण संरक्षण और समाज सेवा में अपनी रुचि को आगे बढ़ा रही हैं। वह खुद को “पृथ्वी का बच्चा” मानती हैं और हमेशा यह कहती हैं, “हम पृथ्वी को अपने पूर्वजों से नहीं, बल्कि अपने बच्चों से उधार लेते हैं।”

चार साल के बेटे की मां शिफाली का लक्ष्य है कि आने वाली पीढ़ियां एक स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण में जी सकें। इसी उद्देश्य के साथ उन्होंने ‘Live2Serve’ नामक एक संस्था की शुरुआत की है, जो पर्यावरण संरक्षण और समाज के कमजोर वर्गों, खासकर बच्चों और जानवरों के लिए काम करती है।

पेजेंट में शिफाली ने एक खूबसूरत हरे रंग के लहंगे में हिस्सा लिया, जिस पर तितलियों, फूलों और मोरों के डिज़ाइन थे, जो प्रकृति की सुंदरता का प्रतीक थे। उनके पर्यावरण के प्रति समर्पण ने सभी को प्रभावित किया।

अब जब शिफाली के पास ‘Mrs Universe America 2024’ का खिताब है, वह अगले साल फिलीपींस में होने वाले ‘Mrs Universe’ पेजेंट में अमेरिका का प्रतिनिधित्व करने के लिए तैयार हैं। शिफाली का मानना है कि इस मंच के जरिए वह पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और दूसरों को भी इस दिशा में कदम उठाने के लिए प्रेरित कर सकती हैं।

शिफाली कहती हैं, “इस खिताब से मुझे पर्यावरणीय चेतना बढ़ाने का एक बड़ा मौका मिलेगा। हम सब मिलकर एक बड़ा बदलाव ला सकते हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहतर दुनिया छोड़ सकते हैं।”

Airbus C-295: भारतीय नौसेना को मिलेगी नई ताकत, समुद्री निगरानी के लिए जल्द मिलेगा एयरबस C-295 विमान का नेवल वर्जन

Airbus C-295: Indian Navy to Strengthen Maritime Surveillance with Naval Version of C-295 Aircraft

Airbus C-295: समुद्री निगरानी क्षमता बढ़ाने के लिए भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल को जल्द ही एयरबस C-295 विमान का नेवल वर्जन मिल सकता है। रक्षा मंत्रालय जल्द ही 15 मरीन वेरिएंट C-295 विमानों की खरीद के लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) जारी कर सकता है। इस योजना को रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने पहले ही मंजूरी दे दी है, जिसके तहत भारतीय नौसेना को नौ और तटरक्षक बल को छह C-295 विमान दिए जाएंगे।

Airbus C-295: Indian Navy to Strengthen Maritime Surveillance with Naval Version of C-295 Aircraft

ये C-295 विमान समुद्री गश्ती और निगरानी के लिए खास तौर पर तैयार किए जा रहे हैं। नौसेना के लिए आने वाले इन विमानों में सोनार ब्वॉय, पनडुब्बी रोधी हथियारों के लिए टॉरपीडो और सतह युद्ध के लिए मिसाइल सिस्टम लगाया जाएगा। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, “ये विमान नौसेना की समुद्री निगरानी आवश्यकताओं को पूरा करेंगे और विभिन्न मिशन के अनुरूप इनका उपयोग किया जा सकेगा।”

विमान के निर्माण के लिए फ्रांसीसी कंपनी एयरबस और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड के संयुक्त उद्यम के तहत इन्हें भारत में निर्मित किया जाएगा। भारतीय वायुसेना ने पहले ही 56 C-295 ट्रांसपोर्ट विमान का कॉन्ट्रैक्ट साइन किया है, जिसमें से शुरुआती 16 विमान स्पेन में बन रहे हैं और बाकी विमान वडोदरा, गुजरात में टाटा की फाइनल असेंबली लाइन पर तैयार होंगे।

इस एडवांस C-295 वेरिएंट से भारतीय नौसेना की समुद्री गश्ती और निगरानी क्षमताओं में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी होगी। यह नौसेना के लिए मीडियम रेंज मैरिटाइम रिकोनिसेंस (MRMR) और तटरक्षक बल के लिए मल्टी-मिशन मैरिटाइम एयरक्राफ्ट (MMMA) के रूप में काम करेगा। इस C-295 के नए वर्जन में निगरानी, गश्ती और हमला करने की  क्षमता भी होगी।

भारतीय नौसेना फिलहाल लंबी दूरी की समुद्री निगरानी के लिए बोइंग P-8I विमान और छोटी दूरी के गश्ती के लिए डोर्नियर DO-228 विमान का उपयोग करती है। लेकिन मध्यम दूरी की निगरानी के लिए इस श्रेणी के विमान की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। C-295 विमान इस कमी को पूरा करेगा और इसमें पनडुब्बी रोधी ऑपरेशन के लिए हल्के टॉरपीडो, सोनार और DRDO के NASM-SR और NASM-MR एंटी-शिप मिसाइल जैसे आधुनिक हथियार लगाए जाएंगे।

नौसेना के सूत्रों के मुताबिक भारतीय नौसेना की निगरानी क्षमताओं में सबसे बड़ी दिक्कत यह थी कि मध्यम दूरी के विमान की कमी थी, जो विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) और समुद्री व्यापारिक मार्गों (SLOC) पर बेहतर निगरानी कर सके।” उन्होंने कहा कि यह नया विमान न केवल हमारी समुद्री स्थिति जागरूकता को मजबूत करेगा, बल्कि हमारे लंबी दूरी के विमानों के इंजन घंटों को भी बचाएगा।

भारत की समुद्री सीमाओं में तेजी से बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए, यह C-295 विमान का नेवल वर्जन नौसेना और तटरक्षक बल के लिए बेहद कारगर साबित होंगे। ये विमान रीयलटाइम में खुफिया और टारगेटिंग डेटा उपलब्ध कराएंगे, जिससे भारतीय नौसेना की समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

India-China Relations: सीमा विवाद के बाद पहली बार मिलेंगे राजनाथ सिंह और उनके चीनी समकक्ष

India-China Border Dispute: Rajnath Singh to Hold Key Talks with Chinese Defence Minister

India-China Relations: भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह अगले हफ्ते अपने चीनी समकक्ष डोंग जुन से मुलाकात करेंगे, जो पूर्वी लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर हाल ही में हुई सेना की वापसी के बाद दोनों देशों के बीच पहली उच्च-स्तरीय बैठक होगी। यह मुलाकात ASEAN रक्षा मंत्रियों के सम्मेलन (ADMM-Plus) के दौरान लाओस में होगी।

India-China Relations: Rajnath Singh Set to Meet Chinese Counterpart in First High-Level Dialogue Post LAC Truce

पिछले महीने, भारत और चीन की सेनाओं ने पूर्वी लद्दाख के डेमचोक और देपसांग इलाकों में साझा गश्त की थी। यह गश्त उस समय हुई जब दोनों देशों ने इन क्षेत्रों से सेनाओं के हटने के बाद शांति बनाए रखने के लिए साप्ताहिक समन्वित गश्त पर सहमति व्यक्त की। यह कदम 2020 में गलवान घाटी में हुए टकराव के बाद बढ़ते तनाव को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रहा है।

21 अक्टूबर को भारत ने चीन के साथ एक समझौता किया, जिसके तहत दोनों देशों की सेनाएं LAC पर सीमित गश्त करेंगी। यह समझौता चार साल से चल रहे सीमा विवाद को समाप्त करने के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, जिसे 2020 के गलवान संघर्ष के बाद शुरू हुए सैन्य गतिरोध के रूप में देखा गया था।

ADMM-Plus एक वार्षिक बैठक है जिसमें ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, न्यूजीलैंड, दक्षिण कोरिया, रूस और अमेरिका सहित आठ देशों के रक्षा मंत्री भाग लेते हैं। इस साल की बैठक में भारत और चीन के बीच सीमा विवाद और क्षेत्रीय स्थिरता पर चर्चा की संभावना है।

अप्रैल 2023 में भारत में हुई शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक के दौरान राजनाथ सिंह ने चीनी रक्षा मंत्री ली शांगफू से मुलाकात की थी। इस बैठक में भी सीमा मुद्दे पर व्यापक चर्चा हुई थी। इससे पहले 2020 में मास्को में हुई SCO बैठक के दौरान राजनाथ सिंह ने चीनी रक्षा मंत्री जनरल वेई फेंघे से मुलाकात की थी, जो गलवान संघर्ष के कुछ महीनों बाद हुई थी।

हाल ही में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस में आयोजित BRICS सम्मेलन के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी मुलाकात की। यह मुलाकात LAC समझौते पर हस्ताक्षर के बाद हुई, जिससे दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली की दिशा में एक और कदम बढ़ा।

लाओस में होने वाली आगामी बैठक दोनों देशों के बीच जटिल संबंधों में संवाद बनाए रखने और एक-दूसरे के प्रति समझ को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

81MM Mortar Simulator: अब मोर्टार सिम्युलेटर पर ट्रेनिंग कर रही है भारतीय सेना, कम हुआ जान का जोखिम, सटीक निशाना लगाने में हो रही आसानी

81mm Mortar Integrated Simulator: Indian Army Enhances Training with Mortar Simulators, Reduces Risk and Improves Accuracy

81MM Mortar Simulator: भारतीय सेना को जल्द ही और 81 एमएम मोर्टार सिम्युलेटर मिल सकते हैं, जिसका उद्देश्य सैनिकों की ट्रेनिंग को और अधिक प्रभावी बनाना है। इन सिमुलेटरों का उपयोग सेना के जवानों को वास्तविक युद्ध परिस्थितियों में बिना जोखिम के मोर्टार संचालन की ट्रेनिंग देने के लिए किया जा रहा है। इन कंप्यूटर-सहायता प्राप्त सिमुलेटरों के परिणाम अब तक बहुत ही प्रभावशाली रहे हैं, जिससे जवानों की सटीकता और दक्षता में जबरदस्त सुधार हुआ है।

81mm Mortar Integrated Simulator: Indian Army Enhances Training with Mortar Simulators, Reduces Risk and Improves Accuracy

साथ ही, जिस कंपनी का लोगो इस मोर्टार सिमुलेटर पर नजर आ रहा है, वह जेन टेक्नोलॉजी का है, जो इस उपकरण की आपूर्ति कर रही है। Zen 81mm Mortar Integrated Simulator (MIS) को विशेष रूप से सैनिकों को 81 एमएम मोर्टार का संचालन करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह सिमुलेटर एक से अधिक मोर्टार पलटूनों के द्वारा लक्ष्यों पर गोलीबारी करने में मदद करता है, जिनमें 4/6 मोर्टार प्रति पलटून होते हैं। इसमें एक इन्स्ट्रक्टर स्टेशन, मोर्टार फायर कंट्रोलर स्टेशन और मोर्टार पोजीशन कंट्रोलर स्टेशन के साथ 4/6 ‘टू-स्केल’ मोर्टार शामिल होते हैं, जो सभी एक साथ एप्लिकेशन सॉफ़्टवेयर से जुड़े होते हैं।

यह सिमुलेटर अलग-अलग प्रकार की ज़मीन, गतिशील और स्थिर लक्ष्यों, विस्फोट, धुएं, रौशनी, आंधी जैसी पर्यावरणीय प्रभावों को 3D दृश्यों के माध्यम से दिखाता है। इससे सच्ची रेंज परिस्थितियों को वास्तविक रूप से महसूस किया जा सकता है। इसके अलावा, यह सिमुलेटर प्रशिक्षण समय, गोला-बारूद और लॉजिस्टिक्स पर होने वाले खर्च को काफी हद तक कम करता है, जिससे 100% प्रशिक्षण उद्देश्य हासिल किए जा सकते हैं।

Zen 81mm MIS की प्रमुख विशेषताएँ:

  • पूरे वर्ष में, दिन/रात के समय में इनडोर प्रशिक्षण की सुविधा
  • मोर्टार फायर कंट्रोलर, मोर्टार पोजीशन कमांडर और मोर्टार डिटैचमेंट को प्रशिक्षित करता है
  • ‘टू-स्केल’ मोर्टार के साथ विभिन्न प्रकार के स्थिर और गतिशील लक्ष्य प्रदान करता है
  • सटीक गोलीबारी के लिए दृष्टि सुधार के लिए संशोधित बाइनोक्युलर की सुविधा
  • कई इकाइयों द्वारा लक्ष्य पर हमला करने की सुविधा
  • ज़मीन की विभिन्न प्रकार की मैप्स और पर्यावरणीय प्रभावों का चुनाव
  • रिकार्डिंग, पुनरावलोकन और सेशन को स्टोर करने की सुविधा
  • व्यक्तिगत प्रदर्शन का मूल्यांकन और विश्लेषण की क्षमता

81 एमएम मोर्टार सिमुलेटर को सेना द्वारा सैनिकों को बेहतर प्रशिक्षण देने के लिए शामिल किया गया है, जिससे वे युद्ध की स्थितियों का सामना करते हुए अपनी स्किल्स को और भी निखार सकते हैं। यह सिमुलेटर सैनिकों को वास्तविक युद्ध के माहौल में मोर्टार का संचालन करने की कला सिखाता है, बिना किसी जोखिम के। इस सिमुलेटर के परिणामस्वरूप सेना को उच्च गुणवत्ता वाले प्रशिक्षण के लिए अधिक कुशल सैनिक मिलेंगे, जो युद्ध की वास्तविक परिस्थितियों का बेहतर तरीके से सामना कर सकेंगे।

प्रशिक्षण में इस तकनीक के उपयोग से अब तक बहुत ही अच्छे परिणाम सामने आए हैं। यह सिमुलेटर सेना के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में एक नया आयाम जोड़ते हुए जवानों को युद्ध की जटिल परिस्थितियों में त्वरित निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करता है। सेना के अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की तकनीकी उन्नति से भारतीय सेना की युद्ध क्षमता में और अधिक सुधार होगा, और सैनिकों को उच्चतम स्तर का प्रशिक्षण प्राप्त होगा। इस तकनीकी सुधार से भारतीय सेना की युद्ध क्षमता और भी मजबूत होगी, क्योंकि जवानों को अब अधिक सटीक और प्रभावी तरीके से प्रशिक्षण दिया जा रहा है।वहीं, इस सुधार से न केवल सेना के जवानों का प्रशिक्षण प्रभावी होगा, बल्कि यह भी सुनिश्चित करेगा कि भारतीय सेना किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।

India Strengthens Defence Ties: भारत ऐसे साध रहा है अमेरिका और रूस को, अमेरिकी ‘प्रेडेटर’ ड्रोन के बाद रूस से खरीद रहे पैंट्सिर एयर डिफेंस सिस्टम और स्टेल्थ फ्रिगेट्स

India Strengthens Defence Ties with US and Russia: After US Predator Drones, India Acquires Pantsir Air Defence System and Stealth Frigates from Russia

India Strengthens Defence Ties: भारत ने हाल ही में 34,500 करोड़ रुपये के सौदे के तहत अमेरिका से 31 ‘प्रेडेटर’ ड्रोन खरीदने की घोषणा की थी, अब देश लंबे समय से चले आ रहे रूस के साथ रक्षा संबंधों को फिर से संतुलित करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।

India Strengthens Defence Ties with US and Russia: After US Predator Drones, India Acquires Pantsir Air Defence System and Stealth Frigates from Russia

इंडिया टुडे के डिफेंस एडिटर प्रदीप सागर इंडिया टुडे मैगजीन में लिखते हैं कि रक्षा क्षेत्र में इस संतुलन की प्रक्रिया को और मजबूत करने के लिए, भारत में रूस के उप प्रधानमंत्री डेनिस मंटूरोव दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे हैं। इस दौरान, दोनों देशों के बीच चल रही रणनीतिक सहयोग की समीक्षा की जाएगी। इसके बाद, भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह अगले कुछ दिनों में मास्को का दौरा करेंगे, जहां वह इंडो-रूसी अंतर सरकारी सैन्य तकनीकी सहयोग आयोग (IRIGC-M&MTC) की बैठक में भाग लेंगे। यह आयोग भारत और रूस के बीच सैन्य और तकनीकी सहयोग की निगरानी करता है।

यह घटनाक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अक्टूबर में कज़ान में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन में भाग लेने के बाद सामने आया है, जब रूस ने इस सम्मेलन की अध्यक्षता की थी। इसके अलावा, 8 नवंबर को भारतीय राज्य-निर्मित रक्षा कंपनी भारत डायनामिक्स लिमिटेड (BDL) और रूस की प्रमुख हथियार निर्यातक संस्था रोसोबोरोनएक्सपोर्ट के बीच पैंटसिर एयर डिफेंस सिस्टम के विभिन्न संस्करणों के संयुक्त विकास के लिए एक समझौता हुआ।

इस बीच, मंटूरोव की भारत यात्रा के दौरान, उन्होंने 12 नवंबर को विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ मिलकर रूस-भारत व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग पर 25वीं द्विपक्षीय बैठक की सहअध्यक्षता की।

वैश्विक गठबंधनों में बदलाव और पश्चिमी प्रभाव के बावजूद, रूस से रक्षा खरीदारी भारत की सैन्य आधुनिकीकरण योजना का अहम हिस्सा बनी हुई है। रूस के साथ भारत का सामरिक संबंध दशकों पुराना है, और इन खरीदारी से भारत को अपनी रक्षा क्षमता को बढ़ाने और क्षेत्रीय खतरों से निपटने में मदद मिलती है।

रूस ने पिछले दो दशकों में भारत को 60 बिलियन डॉलर (करीब 5.06 लाख करोड़ रुपये) से ज्यादा की रक्षा आपूर्ति की है, जिसमें लगभग 65 प्रतिशत भारतीय रक्षा खरीदारी शामिल है। हालांकि, यूक्रेन युद्ध और रूस पर पश्चिमी प्रतिबंधों के खतरे को देखते हुए, भारत अब अपनी रक्षा आपूर्तिकर्ताओं की विविधता पर भी जोर दे रहा है।

अब, अमेरिका से ड्रोन सौदे के बाद, भारत रूस से दो स्टेल्थ फ्रिगेट्स प्राप्त करने के लिए तैयार है। ये फ्रिगेट्स 2018 में 2.5 बिलियन डॉलर (21,100 करोड़ रुपये) के सौदे के तहत रूस के यंतर शिपयार्ड में बनाए गए हैं। पहले फ्रिगेट को INS तुषिल के रूप में भारतीय नौसेना में शामिल किया जाएगा।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह अपने रूस दौरे के दौरान केवल अपने समकक्ष के साथ बातचीत नहीं करेंगे, बल्कि INS तुषिल का कमीशन भी करेंगे। दूसरा फ्रिगेट, INS तमल, अगले साल की शुरुआत में भारत को सौंपे जाने की उम्मीद है।

नौसैनिक सूत्रों के अनुसार, ये फ्रिगेट्स ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल और उन्नत रडार प्रणालियों से लैस होंगे, जो भारतीय नौसेना की सतही मुकाबला क्षमताओं को मजबूती देंगे। यह अधिग्रहण 2016 में भारत और रूस के बीच चार अतिरिक्त स्टेल्थ फ्रिगेट्स के लिए किए गए इंटर-गवर्नमेंटल समझौते का हिस्सा है।

इन फ्रिगेट्स के अलावा, भारत 2025 तक रूस से एक और परमाणु पनडुब्बी लीज पर लेने की योजना बना रहा है, हालांकि इसकी डिलीवरी 2028 तक हो सकती है। रूस एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली की बाकी दो स्क्वाड्रन भी तेजी से भारत को सौंपने की तैयारी कर रहा है।

सर्द युद्ध युग से ही भारत ने रूस (पूर्व सोवियत संघ) को अपनी प्रमुख रक्षा आपूर्तिकर्ता के रूप में अपनाया है। रूस के लड़ाकू विमानों, टैंक और पनडुब्बियों से लेकर भारत की सैन्य क्षमता का आधार बन चुके हैं। इन उपकरणों की लागत-कुशलता, परिचितता और विश्वसनीयता के कारण भारत का रक्षा संबंध रूस से काफी मजबूत रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का अमेरिका और रूस दोनों के साथ संतुलित संबंध बनाना, उसे जरूरी सैन्य क्षमताओं को सुरक्षित रखते हुए वैश्विक राजनीति में अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखने में मदद करेगा।