HomeDRDOSwayam Raksha Kavach: DRDO ने शुरू किया तेजस Mk1A के लिए ‘स्वयं...

Swayam Raksha Kavach: DRDO ने शुरू किया तेजस Mk1A के लिए ‘स्वयं रक्षा कवच’ का फ्लाइट ट्रायल, नए 97 जेट्स में होगा इंटीग्रेट

‘स्वयं रक्षा कवच’ सिस्टम तेजस विमान को दुश्मन के रडार, मिसाइल और इलेक्ट्रॉनिक हमलों से बचाने में मदद करेगा। इस सिस्टम में रडार वार्निंग रिसीवर, चाफ और फ्लेयर डिस्पेंसर सिस्टम और जैमर पॉड लगे हैं, जो दुश्मन के रडार सिग्नल को पहचान कर उन्हें जाम कर सकते हैं...

रक्षा समाचार WhatsApp Channel Follow US

📍नई दिल्ली | 5 Nov, 2025, 12:24 PM

Swayam Raksha Kavach: स्वदेशी तेजस एमके-1ए फाइटर जेट के लिए नए एयरबोर्न इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम का सफल उड़ान परीक्षण शुरू कर दिया है। इस सिस्टम को ‘स्वयं रक्षा कवच’ नाम दिया गया है, जिसे डीआरडीओ ने डेवलप किया है। यह सिस्टम भारतीय वायुसेना के आने वाले तेजस एमके-1ए विमानों में लगाया जाएगा, जो आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

Tejas MK1A Delivery Delay: बिना तेजस की डिलीवरी के सूनी रही IAF की दीपावली, HAL ने फिर तोड़ा वादा, ये है वजह

डीआरडीओ ने ‘समन्वय 2025’ इंडस्ट्री समिट के दौरान जानकारी दी कि ‘स्वयं रक्षा कवच’ का डेवलपमेंट 2021 में शुरू हुआ था और फिलहाल इसका परीक्षण एक तेजस एमके-1ए विमान पर किया जा रहा है। परीक्षणों को 2026 के मध्य तक पूरा किया जााना है और इसे वर्ष 2026 के आखिर तक वायुसेना में शामिल किया जाएगा। डीआरडीओ के सेंटर फॉर एयरबोर्न सिस्टम्स (सीएबीएस) द्वारा विकसित यह सूट आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर की चुनौतियों का सामना करने के लिए डिजाइन किया गया है।

‘स्वयं रक्षा कवच’ सिस्टम तेजस विमान को दुश्मन के रडार, मिसाइल और इलेक्ट्रॉनिक हमलों से बचाने में मदद करेगा। इस सिस्टम में रडार वार्निंग रिसीवर, चाफ और फ्लेयर डिस्पेंसर सिस्टम और जैमर पॉड लगे हैं, जो दुश्मन के रडार सिग्नल को पहचान कर उन्हें जाम कर सकते हैं। यह नया सूट इस साल सितंबर में दिए गए 97 तेजस एमके1ए में लगाया जाएगा।

डीआरडीओ के अधिकारी ने बताया कि यह सिस्टम पहले से मौजूद डी-29 ईडब्ल्यू सूट का एडवांस वर्जन है, जिसे पहले मिग-29 विमानों के लिए बनाया गया था। यह सूट तेजस एमके-1ए के मौजूदा इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम को अपग्रेड करेगा, जिसमें पहले से ही डिफेंस एवियोनिक्स रिसर्च एस्टेब्लिशमेंट (डेयर) द्वारा डेवलप यूनिफाइड इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट (यूईडब्ल्यूएस) शामिल है। यूईडब्ल्यूएस में इलेक्ट्रॉनिक काउंटरमेजर्स (ईसीएम) और इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-काउंटरमेजर्स (ईसीसीएम) क्षमताएं पहले से मौजूद हैं, लेकिन एसआरके इनकी क्षमताओं को डिजिटल रेडियो फ्रीक्वेंसी मेमोरी आधारित जामिंग और डिसेप्शन तकनीकों से मजबूत बनाएगा।

यह भी पढ़ें:  MiG-21 Retirement on Sept 26: मिग-21 के साथ खत्म हुई एक परंपरा, पिता ने टेस्ट किया तो बेटे ने दुश्मन का जहाज गिराया

नया एसआरके सिस्टम ज्यादा ताकतवर और तेज है। इसमें डिजिटल रेडियो फ्रीक्वेंसी मेमोरी जैसी एडवांस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है, जो दुश्मन के सिग्नल ट्रैकिंग सिस्टम को कन्फ्यूज कर सकती है।

हालांकि स्वयं रक्षा कवच को अभी तक फुल सर्टिफिकेशन (फुल प्रोडक्शन क्लियरेंस) नहीं मिला है। यह सूट अभी फ्लाइट ट्रायल्स की स्टेज में है, जो नवंबर 2025 से शुरू हुए हैं। सेंटर फॉर मिलिट्री एयरवर्थिनेस एंड सर्टिफिकेशन (सेमीलैक) अभी इनकी क्वालिफिकेशन टेस्टिंग कर रही है, और प्रोडक्शन क्लियरेंस की अगले साल जून तक मिलने की उम्मीद है। सूत्रों का कहना है कि स्वयं रक्षा कवच के प्रमुख कंपोनेंट लाइन रिप्लेसेबल यूनिट्स (एलआरयू) की क्वालिफिकेशन टेस्टिंग पूरी होने के बाद ही प्रोडक्शन क्लियरेंस का रास्ता खुलेगा।

सूत्रों का कहना है कि सर्टिफिकेशन में देरी के चलते एचएएल पहले बैच के तेजस एमके-1ए में ‘स्वयं रक्षा कवच’ को इंटीग्रेट नहीं कर पाया। जिसके चलते एचएएल को इजरायली एल्टा-2052 रडार और स्कॉर्पियस ईडब्ल्यू पॉड को चुनना पड़ा। सर्टिफेकशन न होने की वजह से तेजस की डिलीवरी में देरी हुई।

एचएएल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण यह था कि वायुसेना को तय समय पर विमान मिले। जब तक स्वदेशी सिस्टम पूरी तरह प्रमाणित नहीं होते, हम डिलीवरी नहीं कर सकते थे।” वहीं, डीआरडीओ सूत्रों का कहना है कि डीआरडीओ को पुराने तेजस विमानों तक सीमित पहुंच थी, जबकि विदेशी मैन्युफैक्चरर्स को एमके1ए के प्रोटोटाइप्स मिले थे। जिसके चलते वे टेस्टिंग नहीं कर पाए। उनका कहना है कि एचएएल ने “प्रूवन टेक्नोलॉजी” को प्राथमिकता दी।

यह भी पढ़ें:  S-400 Air Defence System: भारत खरीद सकता है पांच और एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम, चीनी पीएल-15 मिसाइलों का भी तोड़ निकालने की तैयारी

Author

  • News Desk

    रक्षा समाचार न्यूज डेस्क भारत की अग्रणी हिंदी रक्षा समाचार टीम है, जो Indian Army, Navy, Air Force, DRDO, रक्षा उपकरण, युद्ध रणनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक खबरें पेश करती है। हम लाते हैं सटीक, सरल और अपडेटेड Defence News in Hindi। हमारा उद्देश्य है – "हर खबर, देश की रक्षा से जुड़ी।"

रक्षा समाचार WhatsApp Channel Follow US
News Desk
News Desk
रक्षा समाचार न्यूज डेस्क भारत की अग्रणी हिंदी रक्षा समाचार टीम है, जो Indian Army, Navy, Air Force, DRDO, रक्षा उपकरण, युद्ध रणनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक खबरें पेश करती है। हम लाते हैं सटीक, सरल और अपडेटेड Defence News in Hindi। हमारा उद्देश्य है – "हर खबर, देश की रक्षा से जुड़ी।"

Most Popular