HomeLegal Policy NewsRehabilitation Of Disabled Officer Cadets: ट्रेनिंग के दौरान घायल कैडेट्स के भविष्य...

Rehabilitation Of Disabled Officer Cadets: ट्रेनिंग के दौरान घायल कैडेट्स के भविष्य पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र सरकार को दिया छह हफ्ते का वक्त

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी कहा कि अब फैसला लेने में और देरी नहीं होनी चाहिए। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि उम्मीद है कि अगली तारीख तक सिफारिशों पर विचार और मंजूरी की प्रक्रिया में तेजी आएगी...

रक्षा समाचार WhatsApp Channel Follow US

📍नई दिल्ली | 16 Dec, 2025, 5:51 PM

Rehabilitation Of Disabled Officer Cadets: सुप्रीम कोर्ट ने मिलिट्री ट्रेनिंग के दौरान दिव्यांग हुए ऑफिसर कैडेट्स के पुनर्वास (रिहैबिलिटेशन) से जुड़ी योजना को अंतिम रूप देने के लिए केंद्र सरकार को छह हफ्ते का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 28 जनवरी को होगी।

यह मामला उन ऑफिसर कैडेट्स से जुड़ा है, जिन्हें सेना, नौसेना या वायुसेना की ट्रेनिंग के दौरान गंभीर चोट लगने या दिव्यांगता होने के चलते नौकरी से बाहर कर दिया जाता है। कोर्ट ने माना कि ऐसे कैडेट्स को बिना किसी पहचान, दर्जा या पुनर्वास सुविधा के बाहर किया जाना एक गंभीर समस्या है।

Finally justice to 1965 War Veteran: Punjab and Haryana High court comes to his rescue, pulls up Indian Army for Unnecessary litigation

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने जस्टिस बीवी नागरथना और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच को बताया कि तीनों सेनाओं भारतीय सेना, भारतीय नौसेना और भारतीय वायुसेना ने इस विषय पर सकारात्मक सिफारिशें दी हैं। इन सिफारिशों के आधार पर अब रक्षा मंत्रालय और वित्त मंत्रालय को मिलकर एक योजना तैयार करनी है। सरकार ने कोर्ट से इस पूरी प्रक्रिया को पूरा करने के लिए छह हफ्ते का समय मांगा था, जिसे स्वीकार कर लिया गया।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी कहा कि अब फैसला लेने में और देरी नहीं होनी चाहिए। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि उम्मीद है कि अगली तारीख तक सिफारिशों पर विचार और मंजूरी की प्रक्रिया में तेजी आएगी।

इस मामले में एमिकस क्यूरी वरिष्ठ अधिवक्ता रेखा पल्ली ने देरी पर चिंता जताई। उन्होंने अदालत को बताया कि बीते दस सालों में कई समितियां इस तरह की सिफारिशें कर चुकी हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस नीति लागू नहीं हो सकी है। उन्होंने सुझाव दिया कि कोर्ट सरकार से अपने फैसले को सील कवर में पेश करने को भी कह सकता है।

यह भी पढ़ें:  Indian Army: सेना प्रमुख के दफ्तर की दीवार से 'गायब' हुई यह एतिहासिक फोटो, पूर्व अफसर बोले- क्या भारतीय सेना की गौरवमयी जीत की अनदेखी कर रही सरकार?

सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले यह भी नोट किया था कि सैनिक भर्ती के दौरान घायल हुए जवानों को आर्थिक और चिकित्सा सुविधाएं मिलती हैं, लेकिन ऑफिसर कैडेट्स को वही सुविधाएं नहीं दी जातीं। कोर्ट ने इसे असमानता करार दिया था।

अदालत के अनुसार, हर साल करीब 40 ऑफिसर कैडेट्स ट्रेनिंग के दौरान चोट या दिव्यांगता के चलते बाहर हो जाते हैं। कोर्ट ने माना कि इस संख्या को देखते हुए सरकार पर पड़ने वाला वित्तीय बोझ बहुत अधिक नहीं होगा।

अदालत ने पहले की सुनवाई में सुझाव दिया गया था कि ऐसे कैडेट्स को चिकित्सा सुविधा, आर्थिक सहायता, शिक्षा, पुनर्वास और बीमा जैसी सुविधाएं दी जानी चाहिए। इसके अलावा उन्हें पूर्व सैनिक का दर्जा देने या उनके लिए अलग पुनर्वास कार्यक्रम बनाने पर भी विचार किया गया था।

बता दें कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान (सुओ मोटो) लिया था, जिसका उद्देश्य उन कैडेट्स को सम्मान और सुरक्षा देना है, जिन्होंने देश की सेवा की तैयारी के दौरान अपना भविष्य दांव पर लगा दिया।

Author

  • News Desk

    रक्षा समाचार न्यूज डेस्क भारत की अग्रणी हिंदी रक्षा समाचार टीम है, जो Indian Army, Navy, Air Force, DRDO, रक्षा उपकरण, युद्ध रणनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक खबरें पेश करती है। हम लाते हैं सटीक, सरल और अपडेटेड Defence News in Hindi। हमारा उद्देश्य है – "हर खबर, देश की रक्षा से जुड़ी।"

रक्षा समाचार WhatsApp Channel Follow US
News Desk
News Desk
रक्षा समाचार न्यूज डेस्क भारत की अग्रणी हिंदी रक्षा समाचार टीम है, जो Indian Army, Navy, Air Force, DRDO, रक्षा उपकरण, युद्ध रणनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक खबरें पेश करती है। हम लाते हैं सटीक, सरल और अपडेटेड Defence News in Hindi। हमारा उद्देश्य है – "हर खबर, देश की रक्षा से जुड़ी।"

Most Popular