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भारतीय नौसेना को मिली बड़ी तकनीकी कामयाबी, अब बिना चालक समुद्र में पेट्रोलिंग करेगी इंटरसेप्टर बोट

A2NCS को खास तौर पर नौसेना की फास्ट इंटरसेप्टर बोट (FIB) के लिए डिजाइन किया गया है। जब इस बोट में यह सॉफ्टवेयर लगाया जाता है, तो इसे ऑटोनॉमस फास्ट इंटरसेप्टर बोट (A-FIB) कहा जाता है...

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📍नई दिल्ली | 17 Jan, 2026, 5:06 PM

BEL A2NCS software: भारतीय नौसेना और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड यानी बीईएल ने मिलकर समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी तकनीकी उपलब्धि हासिल की है। दोनों ने एडवांस्ड ऑटोनॉमस नेविगेशन एंड कंट्रोल सॉफ्टवेयर (A2NCS) विकसित किया है। यह पूरी तरह स्वदेशी सॉफ्टवेयर है, जिसे बिना चालक चलने वाली सतही नौकाओं यानी अनमैन्ड सरफेस वेसल्स (USV) के लिए तैयार किया गया है। इस सॉफ्टवेयर की मदद से नौसेना की फास्ट इंटरसेप्टर बोट अब समुद्र में पूरी तरह ऑटोनॉमस, यानी बिना किसी इंसानी मौजूदगी के काम कर सकती है।

BEL A2NCS software: फास्ट इंटरसेप्टर बोट के लिए किया तैयार

यह सॉफ्टवेयर बीईएल और भारतीय नौसेना की संस्था डब्ल्यूईएसईई (WESEE – वेपन्स एंड इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम्स इंजीनियरिंग एस्टैब्लिशमेंट) के सहयोग से तैयार किया गया है। इसका मकसद यह है कि समुद्र में खतरनाक और जोखिम भरे मिशनों के दौरान नौसैनिकों की जान को खतरे में डाले बिना ऑपरेशन पूरे किए जा सकें। (BEL A2NCS software)

A2NCS को खास तौर पर नौसेना की फास्ट इंटरसेप्टर बोट (FIB) के लिए डिजाइन किया गया है। जब इस बोट में यह सॉफ्टवेयर लगाया जाता है, तो इसे ऑटोनॉमस फास्ट इंटरसेप्टर बोट (A-FIB) कहा जाता है। यह बोट तेज रफ्तार से चलने वाली हल्की नौका है, जिसका इस्तेमाल निगरानी, सुरक्षा और विशेष अभियानों के लिए किया जाता है।

इस सॉफ्टवेयर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह समुद्र में चल रही भीड़भाड़ के बीच भी सुरक्षित तरीके से रास्ता तय कर सकता है। इसके लिए A2NCS कई तरह के सेंसर का इस्तेमाल करता है। इसमें रडार, एआईएस (AIS – ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम), ईओ/आईआर (EO/IR – इलेक्ट्रो ऑप्टिकल और इन्फ्रारेड कैमरे), आईएनएस (इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम), जीपीएस और इलेक्ट्रॉनिक नेविगेशन चार्ट्स शामिल हैं। इन सभी सेंसर से मिलने वाली जानकारी को सॉफ्टवेयर एक साथ प्रोसेस करता है और बोट को सुरक्षित दिशा में आगे बढ़ाता है। (BEL A2NCS software)

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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का भी इस्तेमाल

A2NCS में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का भी इस्तेमाल किया गया है। इसकी मदद से यह सॉफ्टवेयर समुद्र में मौजूद दूसरी नौकाओं, जहाजों या किसी भी तरह की बाधा को पहचान सकता है और उनसे टकराने से बच सकता है। इसे ऑब्स्टकल अवॉइडेंस कहा जाता है। यानी सामने खतरा दिखते ही सिस्टम खुद फैसला लेता है और रास्ता बदल देता है। (BEL A2NCS software)

BEL A2NCS software

कैसे काम करेगा सॉफ्टवेयर 

यह सॉफ्टवेयर अलग-अलग तरीकों से काम कर सकता है। पहला तरीका है रिमोट कंट्रोल मोड, जिसमें किसी कंट्रोल स्टेशन से बोट को दूर बैठे ऑपरेटर चलाता है। दूसरा तरीका है ऑटोनॉमस वेपॉइंट नेविगेशन, जिसमें पहले से तय किए गए रास्ते या पॉइंट्स के आधार पर बोट अपने आप चलती है। तीसरा और सबसे अहम तरीका है फुली सॉफ्टवेयर ड्रिवन ऑटोनॉमी, जिसमें बोट बिना किसी इंसानी दखल के पूरी तरह खुद फैसले लेकर मिशन पूरा करती है। (BEL A2NCS software)

A2NCS ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इस सॉफ्टवेयर को इंडियन रजिस्टर ऑफ शिपिंग (IRClass) से सर्टिफिकेशन मिला है। यह सर्टिफिकेशन किसी भी समुद्री सिस्टम की क्वालिटी, सेफ्टी और भरोसेमंद होने का प्रमाण होता है। A2NCS ऐसा पहला पूरी तरह भारतीय सॉफ्टवेयर है, जिसे अनमैन्ड सरफेस वेसल के लिए यह मान्यता मिली है।

IRClass सर्टिफिकेशन से पहले इस सॉफ्टवेयर का समुद्र में कड़े ट्रायल्स किए गए। इन ट्रायल्स के दौरान यह देखा गया कि सिस्टम कोलरेग (इंटरनेशनल रूल्स फॉर प्रिवेंटिंग कोलिजन एट सी) के नियमों का पालन करता है या नहीं। इसके अलावा साइबर सुरक्षा यानी साइबर रेजिलिएंस, और किसी खराबी की स्थिति में सुरक्षित तरीके से काम रोकने की क्षमता यानी फेल-सेफ ऑपरेशन को भी परखा गया। (BEL A2NCS software)

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खतरनाक माइंस का लगेगा पता 

A2NCS से लैस A-FIB को भारतीय नौसेना पहले ही कई अभियानों में इस्तेमाल कर चुकी है। इसे माइन काउंटर मेजर (MCM) मिशनों में तैनात किया गया है, जहां समुद्र में बिछी खतरनाक माइंस का पता लगाना और उन्हें निष्क्रिय करना होता है। इसके अलावा, इसे अलग-अलग कॉम्बैट एक्सरसाइज में भी आजमाया गया है, जहां इसने अपनी क्षमता साबित की है। (BEL A2NCS software)

इस पूरी परियोजना को आत्मनिर्भर भारत पहल का मजबूत उदाहरण माना जा रहा है। पहले ऐसी तकनीक के लिए भारत को विदेशी कंपनियों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब भारतीय नौसेना के पास अपना स्वदेशी और भरोसेमंद ऑटोनॉमस सिस्टम है। इससे न केवल देश की सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि भविष्य में इस तकनीक के निर्यात के रास्ते भी खुल सकते हैं। (BEL A2NCS software)

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