📍नई दिल्ली | 31 Oct, 2025, 7:25 PM
Young Leaders Forum 2025: सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि भारत की 65 फीसदी आबादी 35 साल से कम उम्र की है, और यही युवा भारत के भविष्य की असली ताकत हैं। उन्होंने कहा कि इन युवाओं की ऊर्जा, साहस और इनोवेशन की भावना को अनुशासन और जिम्मेदारी के साथ सही दिशा में लगाना देश की सबसे बड़ी जरूरत है।
उन्होंने यह बात शुक्रवार नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में भारतीय सेना और सेंटर फॉर लैंड वारफेयर स्टडीज (क्लॉज) की तरफ से आयोजित यंग लीडर्स फोरम में कही। यह कार्यक्रम भारतीय सेना के वार्षिक चाणक्य डिफेंस डायलॉग 2025 से पहले आयोजित किया गया था, जो 27–28 नवंबर को होगा।
सेना प्रमुख ने कहा कि युवाओं को आत्मनिर्भरता, राष्ट्रीय जिम्मेदारी और देशभक्ति को जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। उन्होंने कहा, “भारत की प्रगति केवल सरकारों या संस्थानों से नहीं होगी, बल्कि युवाओं की सोच, समर्पण और कर्म से होगी।”
Young Leaders Forum 2025: सेना प्रमुख ने ऑपरेशन सिंदूर का दिया उदाहरण
अपने संबोधन में जनरल द्विवेदी ने कहा कि भारतीय सेना ने आने वाले दशक को ‘डिकेड ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन’ घोषित किया है, जिसमें रिस्ट्रक्चरिंग, टेक्नोलॉजिकल इनोवेशन और युवाओं की भागीदारी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सेना ने युवाओं को डिफेंस इनोवेशन से जोड़ने के लिए आईआईटी में आर्मी सेल्स, टेक्नोलॉजी क्लस्टर्स, और इंडियन आर्मी इंटर्नशिप प्रोग्राम 2025 जैसी पहलें शुरू की हैं।
उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि इस अभियान में युवाओं का योगदान भारत की दृढ़ता और संयम का उदाहरण है। उन्होंने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर ने दिखाया कि भारत की सेना न केवल ताकत में बल्कि नैतिक बल में भी सबसे आगे है।”
सेना प्रमुख ने युवाओं से कहा कि वे देश की संप्रभुता और सुरक्षा को बनाए रखने में सक्रिय भूमिका निभाएं, क्योंकि आने वाले वर्षों में वही “विकसित भारत 2047” के निर्माण के केंद्र में होंगे।

रिजिजू बोले- फिटनेस, अनुशासन और देशभक्ति को जीवन का हिस्सा बनाएं युवा
फोरम में केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विकसित भारत 2047 का लक्ष्य तभी पूरा होगा जब देश के युवा और सशस्त्र बल मिलकर काम करेंगे।
उन्होंने सरदार पटेल और मेजर बॉब खाथिंग के योगदान को याद करते हुए कहा कि इन महान व्यक्तित्वों ने भारत की एकता और सुरक्षा को मजबूत किया। मंत्री ने कहा कि आज भारत 7 फीसदी से अधिक की आर्थिक वृद्धि दर के साथ तेजी से आगे बढ़ रहा है, जो देश के आत्मविश्वास और क्षमता को दर्शाता है।
रिजिजू ने युवाओं से कहा कि वे फिटनेस, अनुशासन और देशभक्ति को जीवन का हिस्सा बनाएं और देश की प्रगति में सक्रिय योगदान दें। उन्होंने कहा कि “सेना और युवाओं की एकजुटता भारत को आने वाले वर्षों में विश्व के अग्रणी राष्ट्रों में शामिल करेगी।”

“युवा हैं राष्ट्रीय सुरक्षा के केंद्र में”
कार्यक्रम की शुरुआत में सेंटर फॉर लैंड वारफेयर स्टडीज (क्लॉज) के महानिदेशक ले. जनरल (सेवानिवृत्त) दुष्यंत सिंह ने कहा कि यह आयोजन युवाओं की भागीदारी और देश की सुरक्षा में उनकी भूमिका को समर्पित है। उन्होंने कहा कि यंग लीडर्स फोरम “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना को साकार करता है और यह दिखाता है कि भारत की एकता और सुरक्षा की असली ताकत उसके युवा हैं।
उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम आने वाले चाणक्य डिफेंस डायलॉग 2025 की दिशा तय करता है। उन्होंने कहा, “नवंबर का महीना पूरी तरह सेना और क्लॉज के लिए विशेष है, क्योंकि यह महीना युवा नेतृत्व और राष्ट्रीय सुरक्षा पर गहन चर्चा के लिए समर्पित रहेगा।”
उन्होंने बताया कि इस वर्ष के संवाद की तीन मुख्य थीमें हैं। पहली, युवा और राष्ट्रीय सुरक्षा का भविष्य, जिसमें यह चर्चा होगी कि बदलती परिस्थितियों में सुरक्षा की परिभाषा क्या होनी चाहिए। दूसरी, युवा नेतृत्व और रक्षा सेवाएं, जिसमें युवाओं की भूमिका को सुरक्षा रणनीति के केंद्र में रखा गया है। तीसरी, नए युद्ध क्षेत्रों में युवाओं की भूमिका, जैसे साइबर, स्पेस और इंफॉर्मेशन वारफेयर।
दुश्यंत सिंह ने कहा कि “भारत का युवा वर्ग न केवल सेना में बल्कि समाज, विज्ञान, उद्योग और तकनीक के हर क्षेत्र में देश की सुरक्षा और विकास की नई ताकत बनकर उभर रहा है।” स्वामी विवेकानंद के शब्दों में उन्होंने कहा, “उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक रुको मत, यही आज के युवाओं का मंत्र होना चाहिए।”

“सुरक्षा केवल सीमाओं की नहीं, समाज की भी जिम्मेदारी है”
संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में अपनी सेवाएं दे चुकीं और संयुक्त राष्ट्र सैन्य जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर अवॉर्ड से सम्मानित
मेजर राधिका सेन ने फोरम में युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि “राष्ट्रीय सुरक्षा” की परिभाषा अब केवल सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हर नागरिक की जिम्मेदारी बन चुकी है।
उन्होंने कहा कि “आज सुरक्षा केवल बंदूक से नहीं, बल्कि कीबोर्ड, लैब, अस्पताल और खेतों से भी तय होती है। जो युवा साइबर सुरक्षा में काम कर रहा है, जो किसान जलवायु के बदलाव के लिए नई तकनीक अपना रहा है, या जो छात्र झूठी खबरें रोक रहा है, वह भी देश की सुरक्षा में योगदान दे रहा है।”
मेजर राधिका सेन ने युवाओं से कहा कि आज सुरक्षा की कई नई परतें हैं, डिजिटल सुरक्षा, स्वास्थ्य सुरक्षा, पर्यावरणीय सुरक्षा और सामाजिक एकता। उन्होंने कहा कि “जब कोई नागरिक फेक न्यूज रोकता है, जब कोई छात्र साइबर ठगी की रिपोर्ट करता है, या जब कोई युवा बाढ़ राहत में मदद करता है, वह भी एक सच्चा रक्षक होता है।”
उन्होंने कहा कि “21वीं सदी में सुरक्षा की पहली लाइन सीमा पर नहीं, बल्कि हर नागरिक के दिल और दिमाग में है।”
अपने भाषण में उन्होंने कौटिल्य के अर्थशास्त्र, स्वतंत्रता संग्राम, हरित क्रांति, पोखरण परमाणु परीक्षण, और कोविड-19 महामारी के उदाहरण देकर बताया कि राष्ट्रीय सुरक्षा का अर्थ समय के साथ कैसे बदला है।
मेजर सेन ने कहा कि “आज जब दुनिया डिजिटल, तकनीकी और पर्यावरणीय चुनौतियों से घिरी है, तो भारत के युवाओं को न केवल बहादुर बल्कि जागरूक और संवेदनशील नागरिक बनना होगा।”
राष्ट्रीय एकता दिवस पर हुआ आयोजन
यह कार्यक्रम राष्ट्रीय एकता दिवस पर आयोजित किया गया, जो सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। फोरम का उद्देश्य था युवाओं में ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को मजबूत करना और उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा, एकता और विकास की दिशा में प्रेरित करना। इस आयोजन में देशभर से युवा नेता, शोधकर्ता, विद्यार्थी, उद्यमी, एनसीसी कैडेट्स, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और सशस्त्र बलों के सदस्य शामिल हुए। कार्यक्रम को हाइब्रिड मोड में आयोजित किया गया और इसे देशभर के सेना प्रशिक्षण संस्थानों, आईआईटी, विश्वविद्यालयों और अन्य पेशेवर केंद्रों में लाइव प्रसारित किया गया।


