📍नई दिल्ली | 31 Dec, 2025, 11:25 AM
Republic Day Parade 2026: इस साल कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस परेड में पहली बार लद्दाख के प्रसिद्ध ऊंट देखने को मिलेंगे। यह पहली बार होगा जब भारतीय सेना के रिमाउंट एंड वेटरनरी कोर के दस्ते में डबल हम्प बैक्ट्रियन ऊंट और जंस्कारी पोनी कदमताल करते नजर आएंगे। वहीं इस टुकड़ी को महिला अफसर लीड करेगी। सेना के इस कदम को परंपरा और आधुनिकता के अनोखे संगम के रूप में देखा जा रहा है।
जनरल उपेंद्र द्विवेदी के सेना प्रमुख बनने के बाद से भारतीय सेना तेजी से मॉर्डनाइजेशन की बढ़ रही है। ड्रोन, रोबोटिक म्यूल, ऑल टेरेन व्हीकल और हाई-टेक सर्विलांस सिस्टम के साथ-साथ सेना उन पारंपरिक साधनों को भी दोबारा अपना रही है, जो कठिन से कठिन हालात में भरोसेमंद साबित होते हैं। पूर्वी लद्दाख जैसे इलाकों में, जहां तापमान माइनस 20 से माइनस 40 डिग्री तक चला जाता है और ऑक्सीजन की कमी रहती है, वहां मशीनों के साथ-साथ जानवरों की भूमिका आज भी बेहद अहम है। इसी सोच के चलते पूर्वी लद्दाख के कठिन इलाकों में बैक्ट्रियन ऊंट और जंस्कारी पोनी को शामिल किया गया है।
Republic Day Parade 2026: लॉजिस्टिक और पेट्रोलिंग में कारगर हैं बैक्ट्रियन ऊंट
पूर्वी लद्दाख का इलाका बेहद ऊंचाई पर स्थित है, जहां ठंडा रेतीला मरुस्थल, कम ऑक्सीजन और बेहद कठोर मौसम सेना के सामने बड़ी चुनौती बनता है। यहां सड़कों और आधुनिक संसाधनों के बावजूद कई चौकियों तक अंतिम दूरी यानी “लास्ट माइल डिलिवरी” आज भी कठिन बनी रहती है। ऐसे में सेना ने दो कूबड़ वाले बैक्ट्रियन ऊंटों को लॉजिस्टिक और पेट्रोलिंग के काम में शामिल किया।
बैक्ट्रियन ऊंटों का वैज्ञानिक नाम कैमेलस बैक्ट्रियानस है। ये मध्य एशिया के मूल निवासी हैं और अपने दो कूबड़ों के लिए जाने जाते हैं। बैक्ट्रियन ऊंटों को भारतीय सेना ने पूर्वी लद्दाख की जरूरतों को देखते हुए शामिल किया है। ये ऊंट दो कूबड़ वाले होते हैं और दुनिया के सबसे कठिन इलाकों में काम कर सकते हैं। पिछले दो सालों से ये ऊंट पूर्वी लद्दाख के दुर्गम इलाकों में सेना की मदद कर रहे हैं। ये ऊंट 15,000 से 18,000 फीट की ऊंचाई पर 150 से 200 किलो तक वजन आसानी से ढो सकते हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि ये माइनस 20 डिग्री तापमान में भी बिना किसी परेशानी के काम करते हैं।
Republic Day Parade 2026: सेना में एक दर्जन से ज्यादा ऊंट
फिलहाल सेना में बैक्ट्रियन ऊंटों का पहला बैच शामिल किया गया है, जिसमें एक दर्जन से ज्यादा ऊंट हैं। गणतंत्र दिवस परेड में इनमें से दो ऊंट कर्तव्य पथ पर कदमताल करते नजर आएंगे। यह शायद पहला मौका होगा जब बैक्ट्रियन ऊंट लद्दाख के बाहर, दिल्ली की सड़कों पर दिखाई देंगे। आमतौर पर ये ऊंट मंगोलिया और सेंट्रल एशिया में पाए जाते हैं। माना जाता है कि पुराने जमाने में सिल्क रूट से होकर व्यापार करने वाले काफिलों के साथ ये ऊंट लद्दाख आए और फिर यहीं बस गए। इसलिए इन्हें मंगोलियन ऊंट भी कहा जाता है। आज लद्दाख के नुब्रा घाटी के हुंडर गांव में ये ऊंट देखे जा सकते हैं।

Republic Day Parade 2026: जंस्कारी पोनी भी बन रही हैं सेना की ताकत
बैक्ट्रियन ऊंटों के साथ-साथ जंस्कारी पोनी भी पहली बार कर्तव्य पथ पर मार्च करती दिखेंगी। लद्दाख के स्थानीय लोग लंबे समय से जंस्कारी पोनी का इस्तेमाल करते आ रहे हैं। सेना ने उनकी ताकत और क्षमता को देखते हुए इन्हें धीरे-धीरे रिमाउंट एंड वेटरनरी कोर (RVC) में शामिल किया।
करीब दो साल से ये पोनी सेना का हिस्सा हैं और पूर्वी लद्दाख के दुर्गम इलाकों में काम कर रही हैं। ये पोनी माइनस 40 डिग्री सेल्सियस तापमान में भी 70 किलोग्राम से ज्यादा वजन ढो सकती हैं और 18,000 फीट तक की ऊंचाई पर आसानी से काम करती हैं। गणतंत्र दिवस परेड में चार जंस्कारी पोनी दस्ते का हिस्सा होंगी।
रिसर्च के बाद सेना में शामिल हुए ऊंट और पोनी
सेना में बैक्ट्रियन ऊंट और जंस्कारी पोनी को शामिल करने का फैसला अचानक नहीं लिया गया। लेह स्थित डीआरडीओ की डिफेंस इंस्टीट्यूट ऑफ हाई एल्टीट्यूड रिसर्च लैब ने सेना के रिमाउंट एंड वेटरनरी कोर के साथ मिलकर कई सालों तक इन जानवरों पर रिसर्च की।
इस रिसर्च के दौरान ऊंटों और पोनी की शारीरिक क्षमता, कम ऑक्सीजन में अनुकूलन, वजन ढोने की सहनशक्ति और कठिन मौसम में व्यवहार का अध्ययन किया गया। इसके बाद इन्हें सेना की यूनिट्स में भेजकर वास्तविक परिस्थितियों में टेस्ट किया गया।
Silent Warriors take centre stage on Kartavya Path 🇮🇳🐾
On Republic Day 2026, the Indian Army will showcase a rare and powerful Animal Contingent of the Remount & Veterinary Corps (RVC)-honouring endurance, loyalty and high-altitude capability.
From Bactrian camels of Ladakh and… https://t.co/jtVG1jMzkl pic.twitter.com/VLt6F1g1K6— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) December 31, 2025
कुछ हफ्ते पहले डीआरडीओ ने 14 पूरी तरह प्रशिक्षित बैक्ट्रियन ऊंटों को सेना की 14 कोर, जिसे फायर एंड फ्यूरी कोर कहा जाता है, को सौंप दिया। इसके साथ ही ऊंटों की ट्रेनिंग, देखभाल और तैनाती से जुड़े स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर और हेल्थ रिकॉर्ड भी सेना को दिए गए।
Republic Day Parade 2026: ऊंटों के साथ इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग का खतरा नहीं
बैक्ट्रियन ऊंटों को गोलीबारी, धमाकों और युद्ध जैसे हालातों में भी परखा गया, ताकि यह देखा जा सके कि वे ऐसे माहौल में कैसे प्रतिक्रिया करते हैं। परीक्षणों में पाया गया कि ये ऊंट न केवल भारी वजन ढो सकते हैं, बल्कि युद्ध जैसी परिस्थितियों में भी स्थिर रहते हैं। इनके साथ इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग का कोई खतरा नहीं होता, जो ड्रोन और रोबोटिक सिस्टम के साथ एक बड़ी समस्या है। कम भोजन और कम देखभाल में काम कर पाने की क्षमता इन्हें सेना के लिए किफायती भी हैं।
Republic Day Parade 2026: ड्रोन के खिलाफ चील को किया ट्रेन
इस परेड में आधुनिक तकनीक और पारंपरिक साधनों का अनोखा मेल भी देखने को मिलेगा। दुश्मन के ड्रोन का मुकाबला करने के लिए सेना ने एंटी-ड्रोन सिस्टम के साथ-साथ चील को भी ट्रेनिंग दी है। ये चील हवा में उड़ते छोटे ड्रोन को पहचानकर उनका शिकार करने में सक्षम हैं। ऐसे चार चील भी रिमाउंट एंड वेटरनरी कोर के दस्ते का हिस्सा होंगी। पहली बार इन्हें साल 2022 में भारत-अमेरिका के संयुक्त सैन्य अभ्यास युद्धाभ्यास के दौरान देखा गया था।
Republic Day Parade 2026: डॉग स्क्वायड के दस कुत्ते भी परेड में
इसके अलावा डॉग स्क्वायड के दस कुत्ते भी कदमताल करेंगे। इनमें भारतीय नस्ल के मुधोल हाउंड, रामपुर हाउंड, चिप्पीपराई, कोम्बाई और राजा पलियम शामिल हैं, साथ ही कुछ पारंपरिक नस्लों के कुत्ते भी दस्ते का हिस्सा होंगे। ये कुत्ते सेना के लिए ट्रैकिंग, गार्ड ड्यूटी और सर्च ऑपरेशंस में अहम भूमिका निभाते हैं।
Republic Day Parade 2026: इस कदम के पीछे है ये रणनीतिक सोच
सेना से जुड़े सूत्र कहते हैं, सेना के इस कदम के पीछे की रणनीतिक सोच सीधे तौर पर भारत की सीमा सुरक्षा से जुड़ी है। पूर्वी लद्दाख के ऊंचे और बेहद ठंडे इलाकों में हालात सामान्य नहीं होते। यहां ऑक्सीजन कम होती है, तापमान माइनस में चला जाता है और कई जगहों पर सड़कें या तो हैं ही नहीं या फिर साल के बड़े हिस्से में बर्फ से ढकी रहती हैं। ऐसे माहौल में बड़े मशीनी वाहन हर समय काम नहीं कर पाते। इसी वजह से सेना के सामने सबसे बड़ी चुनौती होती है “लास्ट माइल सप्लाई”, यानी आखिरी चौकी तक रसद और जरूरी सामान पहुंचाना, और नियमित पेट्रोलिंग करना।
इन्हीं जरूरतों को देखते हुए डबल हंप बैक्ट्रियन ऊंट और जंस्कारी पोनी को सेना के सिस्टम में शामिल किया गया है। ये जानवर बेहद ठंडे मौसम, कम ऑक्सीजन और कठिन रास्तों में भी बिना ज्यादा परेशानी के काम कर सकते हैं। बैक्ट्रियन ऊंट भारी वजन उठाकर ऊंचाई वाले इलाकों में लंबे समय तक चल सकते हैं, जबकि जंस्कारी पोनी संकरे और खतरनाक पहाड़ी रास्तों पर बेहद भरोसेमंद साबित होती हैं।
राष्ट्रीय गौरव और जागरूकता है सेना का संदेश
गणतंत्र दिवस परेड में पहली बार इन जानवरों को शामिल करने के पीछे एक साफ संदेश भी है। सेना यह दिखाना चाहती है कि वह केवल आधुनिक तकनीक जैसे ड्रोन, रोबोटिक म्यूल और ऑल टेरेन व्हीकल्स पर ही निर्भर नहीं है, बल्कि जरूरत पड़ने पर पारंपरिक और आजमाए हुए तरीकों को भी उतनी ही मजबूती से अपनाती है। इसके अलावा, इस कदम का एक सांस्कृतिक और राष्ट्रीय पहलू भी है। परेड के जरिए लद्दाख की इन अनोखी प्रजातियों को राष्ट्रीय स्तर पर हाइलाइट करना चाहती है, जिससे उस क्षेत्र के सामरिक और सांस्कृतिक महत्व को देश के सामने लाया जा सके। (Republic Day Parade 2026)

