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Pinaka Rocket Systems: भारतीय सेना को मिलेगी नई ताकत, CCS ने 10,000 करोड़ रुपये के स्वदेशी पिनाका रॉकेट सिस्टम की खरीद को दी मंजूरी

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📍नई दिल्ली | 29 Jan, 2025, 7:20 PM

Pinaka Rocket Systems: केंद्र सरकार की कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) ने भारतीय सेना की मारक क्षमता को बढ़ाने के लिए 10,000 करोड़ रुपये के स्वदेशी पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम की खरीद को मंजूरी दे दी है। यह फैसला भारत की रक्षा रणनीति को मजबूत करने और आत्मनिर्भर भारत अभियान को बढ़ावा देने के लिए किया गया है। इस फैसले के बाद भारतीय सेना की तोपखाने (आर्टिलरी) क्षमता में जबरदस्त बढ़ोतरी होगी। रक्षा मंत्रालय (MoD) के सूत्रों के अनुसार, इस वित्तीय वर्ष के अंत यानी मार्च 2025 से पहले दो बड़े कॉन्ट्रैक्ट्स पर दस्तखत किए जाने की संभावना है।

Pinaka Rocket Systems: Indian Army to Get a Boost as CCS Approves Rs 10,000 Crore Indigenous Deal
File Photo

सरकारी मंजूरी के बाद, दो प्रमुख कॉन्ट्रैक्ट्स पर काम किया जाएगा। पहला कॉन्ट्रैक्ट लगभग 6,050 करोड़ रुपये का होगा, जिसे नागपुर स्थित निजी क्षेत्र की कंपनी सोलर ग्रुप को सौंपा जाएगा। दूसरा कॉन्ट्रैक्ट लगभग 4,000 करोड़ रुपये का होगा, जो सरकारी रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र की इकाई म्यूनिशन्स इंडिया लिमिटेड (MIL) को दिया जाएगा। ये दोनों कंपनियां पिनाका के लिए दो प्रकार के गोला-बारूद एरिया डिनायल म्यूनिशन (ADM) और पिनाका MKI की रेज बढ़ाने को लेकर काम करेंगी।

भारतीय सेना की तोपखाना रेजिमेंट (Regiment of Artillery) के पास 10 पिनाका रेजिमेंट हैं। इनमें से चार रेजिमेंट पहले ही सेवा में आ चुकी हैं, जिनमें से कुछ को चीन सीमा के ऊंचाई वाले इलाकों में तैनात किया गया है। इसके अलावा, छह और पिनाका रेजिमेंट्स को सेना में शामिल करने की प्रक्रिया चल रही है। इनकी तैनाती से भारतीय सेना की मारक क्षमता और उसकी युद्धक्षमता में वृद्धि होगी।

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Pinaka Rocket Systems की खूबियां

पिनाका को दुनिया के सबसे एडवांस मल्टी-लॉन्च रॉकेट सिस्टम में से एक माना जाता है। यह उच्च-विस्फोटक (High-Explosive) प्री-फ्रैगमेंटेड गोला-बारूद को 45 किलोमीटर की दूरी तक निशाना बनाने में सक्षम है। वहीं, एरिया डिनायल म्यूनिशन (ADM) प्रणाली 37 किलोमीटर की दूरी तक अपने टारगेट क्षेत्र को प्रभावी रूप से नष्ट कर सकती है। यह सिस्टम युद्ध क्षेत्र में दुश्मन सैनिकों और टैंकों को निष्क्रिय करने के लिए अत्यधिक कारगर मानी जाती है।

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने पिनाका के एक्सटेंडेड रेंज वेरिएंट डेवलप किए हैं, जो 75 किलोमीटर की दूरी तक मार कर सकते हैं। भविष्य में इसकी मारक क्षमता को 120 किलोमीटर और फिर 300 किलोमीटर तक बढ़ाने की योजना है।

Pinaka Rocket Systems को खरीद रहे कई देश

भारत न केवल अपनी सेना के लिए पिनाका सिस्टम को डेवलप कर रहा है, बल्कि इसे अन्य मित्र देशों को निर्यात करने की दिशा में भी प्रयास कर रहा है। ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल और आकाश वायु रक्षा प्रणाली की तरह, पिनाका भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पहचान बना रहा है। अर्मेनिया पहले ही पिनाका और आकाश डिफेंस सिस्टम खरीद चुका है, जबकि कई आसियान (ASEAN), अफ्रीकी और यूरोपीय देश भी इसे खरीदने में रुचि दिखा रहे हैं।

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इसके अलावा भारतीय सेना की तोपखाना रेजिमेंट (Regiment of Artillery) जल्द ही एक और बड़े सौदे पर हस्ताक्षर करने की तैयारी कर रही है। यह सौदा 8,500 करोड़ रुपये का होगा और इसके तहत 307 एडवांस टोन्ड आर्टिलरी गन सिस्टम (ATAGS) खरीदे जाएंगे, जिनकी मारक क्षमता 48 किलोमीटर तक होगी।

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भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा था कि पिनाका दुनिया के बेहतरीन रॉकेट सिस्टम में से एक है। इसकी रेजिमेंट को ऊंचाई वाले इलाकों में भी तैनात किया गया है और यह हमारी युद्ध क्षमता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने आगे कहा था कि जैसे ही हमें लंबी दूरी की मारक क्षमता वाले वर्जन मिलेंगे, हम अन्य लंबी दूरी के हथियारों के विकल्पों को छोड़कर पूरी तरह पिनाका सिस्टम पर फोकस कर सकते हैं।

सरकार की योजना पिनाका रॉकेट सिस्टम के और अधिक एडवांस वर्जन डेवलप करने की है। DRDO इस सिस्टम की क्षमता को बढ़ाने के लिए कई ट्रायल कर रहा है। आने वाले वर्षों में, भारतीय सेना के पास 300 किलोमीटर तक मारक क्षमता वाला स्वदेशी रॉकेट सिस्टम होगा, जो देश के डिफेंस सिस्टम को और मजबूत करेगा।

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  • हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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