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भारतीय सेना की 7वीं पिनाका रेजिमेंट एक्टिव, 250 किमी रेंज वाले महेश्वरास्त्र की तैयारी!

सेना के अधिकारियों ने बताया कि आठवीं रेजिमेंट का गठन किया जा चुका है और इसके लिए जरूरी उपकरणों का आधे से ज्यादा हिस्सा भी मिल चुका है। इस समय यह यूनिट कन्वर्जन और ट्रेनिंग की प्रक्रिया से गुजर रही है...

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📍नई दिल्ली | 16 Mar, 2026, 12:02 PM

Pinaka Rocket System: भारतीय सेना अपनी लंबी दूरी की फायरपावर क्षमता को मजबूत करने के लिए लगातार कदम उठा रही है। भारतीय सेना ने इसी दिशा में आगे कदम बढ़ाते हुए एक और पिनाका रॉकेट सिस्टम की रेजिमेंट को ऑपरेशनल कर दिया है। सूत्रों के अनुसार अब भारतीय सेना की सातवीं पिनाका रेजिमेंट एक्टिव हो चुकी है और आठवीं रेजिमेंट को भी इस साल के आखिर तक पूरी तरह ऑपरेशनल बनाने की तैयारी चल रही है।

सेना के अधिकारियों ने बताया कि आठवीं रेजिमेंट का गठन किया जा चुका है और इसके लिए जरूरी उपकरणों का आधे से ज्यादा हिस्सा भी मिल चुका है। इस समय यह यूनिट कन्वर्जन और ट्रेनिंग की प्रक्रिया से गुजर रही है। उम्मीद है कि यह रेजिमेंट भी साल खत्म होने से पहले पूरी तरह तैयार हो जाएगी। (Pinaka Rocket System)

Pinaka Rocket System: बढ़ रही पिनाका रेजिमेंट्स की संख्या

भारतीय सेना ने वर्ष 2020 में छह नई पिनाका रेजिमेंट्स के लिए ऑर्डर दिया था। इनमें से दो और रेजिमेंट अगले साल तक तैयार होने की संभावना है। अगर यह योजना तय समय के अनुसार पूरी होती है तो भारतीय सेना के पास कुल दस पिनाका रेजिमेंट एक्टिव हो जाएंगी।

2010 से 2020 के बीच सेना ने चार पिनाका रेजिमेंट का ऑर्डर दिया था। इसके बाद 2020 में पूर्वी लद्दाख के गलवान घाटी क्षेत्र में चीन के साथ हुए सैन्य तनाव के बाद रॉकेट आर्टिलरी की क्षमता बढ़ाने पर ज्यादा जोर दिया गया। उसी के बाद इस सिस्टम के विस्तार की रफ्तार बढ़ाई गई। (Pinaka Rocket System)

2,580 करोड़ रुपये का रक्षा सौदा

2020 में रक्षा मंत्रालय ने लगभग 2,580 करोड़ रुपये के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए थे। यह कॉन्ट्रैक्ट बीईएमएल, टाटा पावर कंपनी लिमिटेड और लार्सन एंड टुब्रो जैसी कंपनियों के साथ किया गया था। इस सौदे के तहत छह अतिरिक्त पिनाका रेजिमेंट के लिए उपकरणों की खरीद का फैसला लिया गया।

इस ऑर्डर में कुल 114 लॉन्चर, 45 कमांड पोस्ट और 330 सपोर्ट व्हीकल्स शामिल थे। इन लॉन्चर्स में ऑटोमेटेड गन एमिंग एंड पोजिशनिंग सिस्टम लगाया गया है, जिससे रॉकेट को टारगेट की ओर सटीक तरीके से दागा जा सकता है। (Pinaka Rocket System)

आर्टिलरी रेजिमेंट का स्ट्रक्चर

आर्टिलरी की भाषा में एक रेजिमेंट सेना की मूल ऑपरेशनल यूनिट होती है। आमतौर पर एक रेजिमेंट में तीन बैटरियां होती हैं। हर बैटरी में छह पिनाका लॉन्चर होते हैं। इस तरह एक रेजिमेंट में कुल 18 लॉन्चर सक्रिय रूप से तैनात रहते हैं।

इसके अलावा दो अतिरिक्त लॉन्चर ट्रेनिंग और युद्ध के समय बैकअप के लिए रखे जाते हैं। इस तरह एक रेजिमेंट में कुल मिलाकर लगभग 20 लॉन्चर मौजूद होते हैं। (Pinaka Rocket System)

कुछ सेकंड में भारी फायरपावर

पिनाका रॉकेट सिस्टम की खासियत इसकी तेज और भारी फायरपावर है। एक बैटरी में मौजूद छह लॉन्चर लगभग 44 सेकंड में 72 रॉकेट दाग सकते हैं। इन रॉकेटों की बारिश से लगभग 1000 मीटर × 800 मीटर के क्षेत्र को कुछ ही मिनटों में निशाना बनाया जा सकता है।

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इस तरह के हमले का उद्देश्य दुश्मन के सैनिक जमावड़े, आर्टिलरी पोजिशन, लॉजिस्टिक बेस और अन्य महत्वपूर्ण ठिकानों को तेजी से निष्क्रिय करना होता है। (Pinaka Rocket System)

पिनाका के अलग-अलग वेरिएंट

भारतीय सेना पिनाका सिस्टम के कई अलग-अलग वेरिएंट का उपयोग करती है। इन वेरिएंट की मारक क्षमता धीरे-धीरे बढ़ाई जा रही है।

पिनाका का शुरुआती एमके-1 रॉकेट लगभग 37 से 40 किलोमीटर तक के लक्ष्य को निशाना बना सकता है। इसके बाद डेवलप किए गए एमके-2 एक्सटेंडेड रेंज रॉकेट की मारक क्षमता लगभग 60 किलोमीटर तक है।

इसके अलावा सेना के पास गाइडेड पिनाका रॉकेट भी हैं जो लगभग 75 से 90 किलोमीटर तक के लक्ष्य को ज्यादा सटीकता के साथ निशाना बना सकते हैं। (Pinaka Rocket System)

120 किलोमीटर रेंज का परीक्षण

पिछले साल दिसंबर में डीआरडीओ ने पिनाका लॉन्चर से एक लंबी दूरी के गाइडेड रॉकेट का सफल परीक्षण किया था। इस रॉकेट ने लगभग 120 किलोमीटर की दूरी पर लक्ष्य को सटीकता से निशाना बनाया।

रक्षा सूत्रों के अनुसार इस नए वेरिएंट में कई देशों ने रुचि दिखाई है और फ्रांस भी इस तकनीक में दिलचस्पी दिखा रहा है। (Pinaka Rocket System)

पिनाका रॉकेट में रैमजेट इंजन

रैमजेट पिनाका परियोजना में पिनाका रॉकेट सिस्टम को एडवांस बनाने पर काम हो रहा है। इसमें रैमजेट इंजन तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। इस तकनीक से रॉकेट की रेंज काफी बढ़ाई जा सकती है।

मौजूदा पिनाका सिस्टम की अधिकतम रेंज लगभग 120 किलोमीटर है। रामजेट तकनीक के इस्तेमाल से इसे 225 से 250 किलोमीटर तक बढ़ाने की योजना है।

यह परियोजना आईआईटी मद्रास और भारतीय सेना के सहयोग से विकसित की जा रही है। इस प्रोजेक्ट पर काम वर्ष 2020 में शुरू हुआ था। रिपोर्ट्स के अनुसार इसका परीक्षण चरण 2026 में शुरू हो सकता है।

रैमजेट तकनीक की मदद से रॉकेट की गति भी बढ़ेगी और इसकी अंतिम टर्मिनल वेलोसिटी अधिक होगी। इससे यह दुश्मन के एंटी-मिसाइल सिस्टम से बचते हुए लक्ष्य तक पहुंचने में सक्षम हो सकता है। (Pinaka Rocket System)

क्या है महेश्वरास्त्र-1 और महेश्वरास्त्र-2 प्रोजेक्ट

महेश्वरास्त्र भारत में विकसित की जा रही एक लंबी दूरी की आधुनिक रॉकेट प्रणाली है। इसे पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से तैयार करने की योजना है। यह प्रोजेक्ट मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत विकसित किया जा रहा है। इस सिस्टम को सोलर इंडस्ट्रीज लिमिटेड नाम की भारतीय कंपनी विकसित कर रही है। यह प्रोजेक्ट रक्षा मंत्रालय की मेक-II कैटेगरी में आता है। इस कैटेगरी में कंपनियां अपने खर्च पर हथियार या तकनीक का प्रोटोटाइप बनाती हैं और बाद में सेना के परीक्षण के बाद उसका उपयोग तय किया जाता है।

महेश्वरास्त्र प्रोजेक्ट की शुरुआत वर्ष 2022 में हुई थी। अभी यह सिस्टम सीएडी यानी कंप्यूटर-एडेड डिजाइन चरण में है। इसका मतलब है कि फिलहाल इसका डिजाइन और कंप्यूटर सिमुलेशन तैयार किया जा रहा है। इसके बाद प्रोटोटाइप तैयार किया जाएगा और फिर परीक्षण किए जाएंगे। (Pinaka Rocket System)

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महेश्वरास्त्र का पहला संस्करण महेश्वरास्त्र-1 होगा। इसकी अनुमानित मारक क्षमता लगभग 150 किलोमीटर तक बताई जा रही है। इस रॉकेट सिस्टम में लगभग 250 किलोग्राम वजन का वारहेड लगाया जा सकेगा। वारहेड यानी विस्फोटक भाग अलग-अलग प्रकार का हो सकता है। इसमें हाई-एक्सप्लोसिव, फ्रैगमेंटेशन या एंटी-पर्सनल वारहेड शामिल हो सकते हैं।

महेश्वरास्त्र-1 एक मल्टी-बैरेल गाइडेड रॉकेट लॉन्चर सिस्टम होगा। इसका मतलब है कि इसमें एक साथ कई रॉकेट दागने की क्षमता होगी। इसे इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि यह दुश्मन के सैनिक जमावड़े, आर्टिलरी पोजिशन, लॉजिस्टिक बेस और अन्य महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को निशाना बना सके। (Pinaka Rocket System)

इस रॉकेट का कैलिबर लगभग 300 मिलीमीटर के आसपास होगा। इसमें आधुनिक गाइडेंस सिस्टम लगाया जाएगा जिसमें इनर्शियल नेविगेशन और जीपीएस या नाविक सैटेलाइट सिस्टम का उपयोग किया जाएगा। इसकी सटीकता बहुत अधिक बताई जा रही है और इसका सर्कुलर एरर प्रोबेबल यानी सीईपी 10 मीटर से कम रखने की योजना है।

महेश्वरास्त्र का दूसरा और ज्यादा एडवांस वर्जन महेश्वरास्त्र-2 होगा। इसकी अनुमानित रेंज लगभग 250 से 290 किलोमीटर तक बताई जा रही है। इस सिस्टम में भी लगभग 250 किलोग्राम या उससे अधिक वजन का वारहेड लगाया जा सकेगा।

महेश्वरास्त्र-2 में लंबी दूरी के लिए बेहतर प्रोपेलेंट और एडवांस गाइडेंस तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे यह सिस्टम दूर स्थित लक्ष्यों को ज्यादा सटीकता के साथ निशाना बना सकेगा।

दोनों सिस्टम्स को हाई-मोबिलिटी व्हीकल पर लगाया जाएगा। आमतौर पर ऐसे सिस्टम्स को टाट्रा 8×8 जैसे सैन्य ट्रकों पर लगाया जाता है। इससे इन्हें तेजी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जा सकता है और जरूरत पड़ने पर तुरंत तैनात किया जा सकता है। (Pinaka Rocket System)

बता दें कि महेश्वरास्त्र सिस्टम डिजाइन और सिमुलेशन चरण में है। इसका प्रोटोटाइप परीक्षण 2026-27 के आसपास शुरू हो सकता है। सूत्रों का कहना है कि अगर डेवलपमेंट और ट्रायल्स तय समय पर पूरे हो जाते हैं तो यह सिस्टम 2028 से 2030 के बीच भारतीय सेना में शामिल किया जा सकता है। एक रेजिमेंट के लिए इसकी लागत लगभग 1000 से 1500 करोड़ रुपये तक हो सकती है। (Pinaka Rocket System)

ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ी जरूरत

लंबी दूरी के रॉकेट सिस्टम की आवश्यकता पिछले वर्ष हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी महसूस की गई थी। इसके बाद भारतीय सेना ने आपात खरीद प्रक्रिया के तहत इजरायली एलबिट सिस्टम्स से दो सूर्यास्त्र (पुल्स यानी प्रीसाइज एंड यूनिवर्सल लॉन्चिंग सिस्टम) लॉन्ग-रेंज रॉकेट लॉन्चर सिस्टम भी हासिल किए थे। इनकी रेंज 150-300 किमी रेंज तक है। वहीं, इस साल जनवरी में दो लॉन्चर्स भी डिलीवर हो चुके हैं।

यह सिस्टम भारत और इजराइल के सहयोग से विकसित किए गए हैं। इनका परीक्षण फिलहाल लाइव फायर ट्रायल के रूप में किया जा रहा है। (Pinaka Rocket System)

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सेना के पास मौजूद रॉकेट आर्टिलरी

वर्तमान समय में भारतीय सेना के पास लगभग 15 रॉकेट आर्टिलरी रेजिमेंट मौजूद हैं। जबकि साल 2007 में सेना के पास कुल 11 रॉकेट रेजिमेंट थीं। इनमें मुख्य रूप से तीन अलग-अलग प्लेटफॉर्म शामिल हैं। इनमें सात पिनाका रेजिमेंट, तीन रूसी मूल के स्मर्च सिस्टम और पांच पुराने बीएम-21 ग्रैड रॉकेट सिस्टम शामिल हैं।

सेना की योजना है कि धीरे-धीरे पुराने ग्रैड सिस्टम को हटाकर उनकी जगह नए पिनाका यूनिट्स को शामिल किया जाए। योजना के अनुसार 2030 तक लगभग 22 से 30 पिनाका रेजिमेंट तक विस्तार किया जा सकता है। (Pinaka Rocket System)

पाकिस्तान और चीन के सिस्टम

पिछले साल हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने फतह-2 गाइडेड रॉकेट दागा था, जिसे हरियाणा के सिरसा क्षेत्र के ऊपर भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम ने इंटरसेप्ट कर लिया था। पाकिस्तान का दावा है कि इस रॉकेट की रेंज लगभग 400 किलोमीटर तक हो सकती है।

अगस्त 2025 में पाकिस्तान ने सेना रॉकेट कमांड फोर्स बनाने की भी घोषणा की थी। बताया गया कि यह कमान लंबी दूरी के रॉकेट और मिसाइल सिस्टम के ऑपरेशन के लिए बनाई गई है। (Pinaka Rocket System)

दूसरी ओर चीन के पास भी बड़े पैमाने पर रॉकेट आर्टिलरी सिस्टम मौजूद हैं। चीनी सेना का पीएचएल-16 मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम लगभग 130 किलोमीटर तक के गाइडेड रॉकेट दागने की क्षमता रखता है। इसके अलावा यह सिस्टम लगभग 290 किलोमीटर तक के टैक्टिकल मिसाइल भी लॉन्च कर सकता है।

चीनी सेना इन रॉकेट सिस्टम को सैटेलाइट, ड्रोन और डिजिटल कमांड नेटवर्क से जोड़कर इस्तेमाल करती है, जिससे सीमा क्षेत्रों में दूर तक टारगेट को पहचानकर हमला किया जा सकता है। (Pinaka Rocket System)

रॉकेट-मिसाइल फोर्स बनाने की योजना

वहीं, इस साल जनवरी में सेना दिवस पर सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने बताया था कि भारतीय सेना एक समर्पित रॉकेट-कम-मिसाइल फोर्स बनाने की दिशा में काम कर रही है। इस फोर्स का उद्देश्य पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइल, क्रूज मिसाइल और मल्टी-बैरेल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम का ऑपरेशन होगा।

इस योजना के तहत पिनाका जैसे स्वदेशी सिस्टम को भी बड़े पैमाने पर शामिल किया जाएगा। सेना का मानना है कि आधुनिक युद्ध में लंबी दूरी की सटीक फायरपावर बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

भारतीय सेना के आर्टिलरी आधुनिकीकरण कार्यक्रम में पिनाका रॉकेट सिस्टम को महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म माना जा रहा है। डीआरडीओ और भारतीय उद्योग के सहयोग से विकसित यह सिस्टम स्वदेशी रक्षा तकनीक का एक प्रमुख उदाहरण है। (Pinaka Rocket System)

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