📍नई दिल्ली | 30 Dec, 2025, 4:28 PM
Indian Army Year Ender 2025: साल 2025 भारतीय सेना के लिए बेहद अहम साबित हुआ। पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के आतंकी टिखानों पर किए गए ऑपरेशन सिंदूर ने साफ कर दिया कि भारत अब आतंकवाद के खिलाफ अब केवल प्रतिक्रिया नहीं देता, बल्कि रणनीति के साथ ठोस कार्रवाई भी करता है। इस ऑपरेशन में भारतीय सेना ने जिस सटीकता, तकनीक और आत्मविश्वास के साथ जवाब दिया, उसने पूरे दुनिया में भारत की सैन्य सोच को नए सिरे से परिभाषित कर दिया। इसी ऑपरेशन ने 2025 को भारतीय सेना के लिए एक निर्णायक साल बना दिया, जहां ड्रोन वारफेयर, प्रिसिजन स्ट्राइक, काउंटर-ड्रोन सिस्टम और स्वदेशी हथियारों ने युद्ध की तस्वीर बदल दी। भारतीय सेना का यह ट्रांसफॉर्मेशन इस बात का साफ संकेत है कि अब युद्ध केवल बंदूक और टैंक से नहीं लड़े जाएंगे, बल्कि ड्रोन, प्रिसिजन हथियार, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और रियल-टाइम इंटेलिजेंस इसकी रीढ़ होंगे।
Indian Army Year Ender 2025: ऑपरेशन सिंदूर: आतंक के खिलाफ ठोस सैन्य कार्रवाई
मई 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया। इस ऑपरेशन की पूरी योजना सेना की मिलिट्री ऑपरेशंस ब्रांच में तैयार की गई और इसे डायरेक्टरेट जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस के ऑप्स रूम से मॉनिटर किया गया। इस दौरान चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ और तीनों सेनाओं के प्रमुख मौजूद रहे।
ऑपरेशन के तहत सीमा पार मौजूद कुल नौ आतंकी ठिकानों को नष्ट किया गया। इनमें से सात ठिकानों को भारतीय सेना ने और दो को भारतीय वायुसेना ने तबाह किया। ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारतीय सेना ने पाकिस्तान के आतंकी लॉन्च पैड्स, हथियार डिपो और सपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर पर सटीक सैन्य कार्रवाई की। यह ऑपरेशन इस मायने में खास रहा क्योंकि इसमें सिर्फ सीमा पार फायरिंग नहीं, बल्कि प्रिसिजन स्ट्राइक, इंटेलिजेंस-ड्रिवन टार्गेटिंग और मल्टी-डोमेन कोऑर्डिनेशन देखने को मिला।
सेना के सूत्रों के मुताबिक, इस ऑपरेशन में आतंकियों की मूवमेंट, सप्लाई लाइन और कम्युनिकेशन नेटवर्क को एक साथ निशाना बनाया गया। इससे पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद को तगड़ा झटका लगा।
Indian Army Year Ender 2025: एलओसी पर आतंकी लॉन्च पैड्स पर कार्रवाई
साल 2025 में लाइन ऑफ कंट्रोल पर भी सेना ने लगातार दबाव बनाए रखा। दर्जन भर से ज्यादा आतंकी लॉन्च पैड्स को भारतीय सेना के ग्राउंड-बेस्ड हथियारों से नष्ट किया गया। इससे घुसपैठ के रास्ते टूटे और आतंकी नेटवर्क की सप्लाई लाइन बाधित हुई।
10 मई 2025 को हालात तब बदले जब पाकिस्तान के डीजीएमओ ने भारतीय डीजीएमओ से संपर्क कर जंग रोकने की बात कही। इसके बाद दोनों पक्षों में फायरिंग और सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति बनी।

Indian Army Year Ender 2025: ड्रोन वारफेयर: युद्ध का नया चेहरा
ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान की ओर से 7, 8, 9 और 10 मई की रात ड्रोन के जरिए हमलों की कोशिश की गई। लेकिन भारतीय सेना की एयर डिफेंस यूनिट्स ने इन सभी ड्रोन हमलों को नाकाम कर दिया। किसी भी तरह का नुकसान या जान-माल की क्षति नहीं हुई।
इस दौरान सेना की काउंटर यूएएस और लेयर्ड एयर डिफेंस सिस्टम की काबिलियत सामने आई। यह पहली बार था जब आधुनिक ड्रोन खतरों के खिलाफ भारतीय सेना की तैयारियां असल हालात में पूरी तरह परखी गईं।
भारतीय सेना के लिए ड्रोन केवल निगरानी तक सीमित नहीं रहे, बल्कि वे सीधे युद्ध का हिस्सा बन गए। सेना ने पहली बार बड़े पैमाने पर ड्रोन-बेस्ड यूनिट्स को ऑपरेशनल रोल में तैनात किया।
नई अशनि ड्रोन प्लाटून और शक्तिबाण यूनिट्स को खास तौर पर ड्रोन, लोटरिंग म्यूनिशन और प्रिसिजन अटैक के लिए तैयार किया गया। ये यूनिट्स दुश्मन के ठिकानों पर बिना सैनिकों की जान जोखिम में डाले हमला करने में सक्षम हैं।
ड्रोन के जरिए दुश्मन की लोकेशन, मूवमेंट और हथियारों की जानकारी रियल-टाइम में कमांड सेंटर तक पहुंचाई गई। इससे सेना की प्रतिक्रिया तेज और सटीक हो गई।

काउंटर-ड्रोन सिस्टम: दुश्मन के ड्रोन पर पड़े भारी
जहां एक तरफ भारतीय सेना ने ड्रोन का इस्तेमाल बढ़ाया, वहीं दूसरी ओर दुश्मन ड्रोन से निपटने के लिए काउंटर-ड्रोन शील्ड को भी मजबूत किया गया।
2025 में सेना ने इंटीग्रेटेड ड्रोन डिटेक्शन एंड इंटरडिक्शन सिस्टम (आईडीडी एंड आईएस) मार्क-2 को अपनाया। इसमें हाई-पावर लेजर, इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग और एडवांस रडार सिस्टम शामिल हैं।
इस सिस्टम की मदद से छोटे, कम ऊंचाई पर उड़ने वाले ड्रोन को भी आसानी से पकड़ा जा सकता है। सीमावर्ती इलाकों और संवेदनशील सैन्य ठिकानों पर इसकी तैनाती ने सुरक्षा को कई गुना बढ़ा दिया।

ब्रह्मोस और पिनाका: प्रिसिजन स्ट्राइक की रीढ़
2025 में मिसाइल क्षमता के मामले में भी भारतीय सेना ने बड़ा कदम उठाया। ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल और पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्च सिस्टम ने सेना की मारक क्षमता को नई ऊंचाई दी।
29 दिसंबर 2025 को पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट का सफल परीक्षण किया गया। करीब 120 किलोमीटर रेंज वाले इस रॉकेट ने भारतीय सेना को डीप स्ट्राइक की नई क्षमता दी। यह रॉकेट दुश्मन के हाई-वैल्यू टार्गेट्स को बहुत दूर से सटीक तरीके से निशाना बना सकता है। यह पूरी तरह स्वदेशी विकास का नतीजा है और भविष्य के युद्ध में अहम भूमिका निभाएगा।
वहीं, ब्रह्मोस मिसाइल ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान यह साबित कर दिया कि भारत के पास तेज, सटीक और भरोसेमंद स्ट्राइक क्षमता है।
बढ़ी लंबी दूरी की मारक क्षमता
2025 में भारतीय सेना की लॉन्ग-रेंज फायरपावर में बड़ा इजाफा हुआ। दिसंबर 2025 में दक्षिणी कमान की ब्रह्मोस यूनिट ने अंडमान-निकोबार कमान के साथ मिलकर ब्रह्मोस मिसाइल का सफल कॉम्बैट लॉन्च किया। इस परीक्षण में हाई-स्पीड उड़ान, स्थिरता और टर्मिनल एक्यूरेसी को परखा गया।
इसी साल पिनाका रॉकेट सिस्टम के दो नए रेजीमेंट्स को ऑपरेशनल किया गया। जून 2025 में यह प्रक्रिया पूरी हुई, जिससे स्टैंड-ऑफ फायरपावर और तेज प्रतिक्रिया क्षमता मजबूत हुई।
नए तकनीक से सीमा पर सख्त हुई निगरानी
2025 में भारतीय सेना ने चीन और पाकिस्तान से लगी सीमाओं पर निगरानी को पूरी तरह टेक्नोलॉजी-आधारित बना दिया। लद्दाख, अरुणाचल और जम्मू सेक्टर में नए रडार, सेंसर्स और सर्विलांस सिस्टम लगाए गए।
हाई-एल्टीट्यूड इलाकों में सैनिकों के लिए बेहतर लॉजिस्टिक्स, ऑल-वेदर इन्फ्रास्ट्रक्चर और तेज मूवमेंट की व्यवस्था की गई। इससे सेना की प्रतिक्रिया क्षमता पहले से कहीं तेज हो गई है।

Indian Army Year Ender 2025: नेटवर्क-सेंट्रिक वारफेयर पर फोकस
भारतीय सेना 2025 में नेटवर्क-सेंट्रिक वारफेयर की दिशा में तेजी से आगे बढ़ी है। इसका मतलब है कि मैदान में मौजूद सैनिक, ड्रोन, रडार, आर्टिलरी और कमांड सेंटर सब एक ही डिजिटल नेटवर्क से जुड़े हैं।
इससे सूचना साझा करने में देरी खत्म हुई और जल्दी फैसले लेने की क्षमता बढ़ी। इसे युद्ध के मैदान में यह एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
मिले तीन एएच-64ई अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर
जुलाई 2025 में भारतीय सेना को पहले तीन एएच-64ई अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर मिले। बाकी तीन हेलिकॉप्टर दिसंबर में शामिल हुए। इससे आर्मी एविएशन कॉर्प्स की मारक क्षमता और क्लोज एयर सपोर्ट में बड़ा सुधार हुआ।
नई यूनिट्स और बैटल फॉर्मेशन में बदलाव
2025 में भारतीय सेना ने भैरव बटालियन और अशनि ड्रोन प्लाटून जैसी नई फॉर्मेशंस को मैदान में उतारना शुरू किया। अक्टूबर 2025 में राजस्थान में हुए एक डेमो में इन नई यूनिट्स के साथ आधुनिक तकनीकी उपकरणों का प्रदर्शन किया गया।
इसके अलावा शक्तिबाण रेजीमेंट और दिव्यास्त्र बैटरियों की फॉर्मेशन तैयार की गई, जिन्हें ड्रोन, लोइटर म्यूनिशन और आधुनिक निगरानी सिस्टम से लैस किया गया।
2024 और 2025 टेक एब्जॉर्प्शन ईयर
भारतीय सेना ने 2024 और 2025 को टेक एब्जॉर्प्शन ईयर के रूप में मनाया। इस दौरान सिर्फ तकनीक अपनाने के बजाय उसे मिलिट्री स्ट्रक्चर में पूरी तरह शामिल करने पर जोर दिया गया।
पिछले एक साल में सेना ने करीब 3000 आरपीए, 150 टेथर्ड ड्रोन, स्वार्म ड्रोन, हाई एल्टीट्यूड लॉजिस्टिक ड्रोन और कामिकाजे ड्रोन शामिल किए। इससे निगरानी, लॉजिस्टिक्स और सटीक हमले की क्षमता कई गुना बढ़ी।
डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और इन-हाउस सॉफ्टवेयर
2025 में सेना ने डिजिटल सिस्टम को तेजी से अपनाया। एज डेटा सेंटर्स बनाए गए, ताकि फील्ड लेवल पर तेजी से निर्णय लिए जा सकें। इसके साथ ही कई इन-हाउस सॉफ्टवेयर तैयार किए गए, जैसे इक्विपमेंट हेल्पलाइन और सैनिक यात्री मित्र ऐप, जिससे सैनिकों को सीधी सहायता मिली।
आर्मी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस में ग्रे जोन वॉरफेयर पर चर्चा
अक्टूबर 2025 में जैसलमेर में हुई आर्मी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस में ग्रे जोन वॉरफेयर, जॉइंटनेस और आत्मनिर्भरता जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। वरिष्ठ सैन्य नेतृत्व ने भविष्य की जंग के लिए फोर्स डिजाइन और डॉक्ट्रिन को नई दिशा दी।
अंतरराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास और मिलिट्री डिप्लोमेसी
साल 2025 में भारतीय सेना ने फ्रांस, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, यूएई, ब्रिटेन, श्रीलंका और थाईलैंड के साथ कई संयुक्त सैन्य अभ्यास किए। इन अभ्यासों से इंटरऑपरेबिलिटी, काउंटर टेरर और शहरी युद्ध की तैयारी मजबूत हुई।
Indian Army Year Ender 2025: इनो-योद्धा और स्वदेशी इनोवेशन
नवंबर-दिसंबर 2025 में आयोजित इनो-योद्धा कार्यक्रम में 89 इनोवेशन सामने आए, जिनमें से 32 को आगे डेवलपमेंट और फील्डिंग के लिए चुना गया। इससे जमीनी स्तर से इनोवेशन को बढ़ावा मिला और आत्मनिर्भर सैन्य क्षमता को मजबूती मिली ।
Indian Army Year Ender 2025: सैनिकों की ट्रेनिंग और मानव संसाधन
तकनीक के साथ-साथ 2025 में सैनिकों की ट्रेनिंग पर भी खास जोर दिया गया। नए सिमुलेटर, वर्चुअल ट्रेनिंग सिस्टम और लाइव एक्सरसाइज के जरिए सैनिकों को आधुनिक युद्ध के लिए तैयार किया गया। युवाओं की भर्ती में भी टेक्नोलॉजी-फ्रेंडली स्किल्स को महत्व दिया गया, ताकि भविष्य की सेना डिजिटल और स्मार्ट हो।


