📍नई दिल्ली/देहरादून | 4 Jan, 2026, 9:45 PM
Indian Army Middle Sector: वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एलएसी के मध्य सेक्टर में चीन की बढ़ती गतिविधियों के बीच भारतीय सेना ने अपनी रणनीति में अहम बदलाव किए हैं। सीमा के इस हिस्से में चीन न केवल तेजी से इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण कर रहा है, बल्कि चीनी सेना ने पेट्रोलिंग का तरीका भी बदला है। जिसे देखते हुए सेना अब इस सेक्टर को लेकर पहले से कहीं ज्यादा प्रोएक्टिव अप्रोच अपना रही है।
Indian Army Middle Sector: उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश से जुड़ा हुआ है मिडिल सेक्टर
मिडिल सेक्टर एलएसी का वह हिस्सा है, जो मुख्य रूप से उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश से जुड़ा हुआ है। लंबे समय तक इस सेक्टर को शांत और स्थिर माना जाता रहा है। साल 2020 में गलवान घाटी में भारत और चीन की सेनाओं के बीच हुई हिंसक झड़प से पहले तक यह धारणा थी कि मिडिल सेक्टर में हालात नियंत्रण में हैं। लेकिन गलवान की घटना के बाद तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। इसके बाद चीन की गतिविधियों में साफ तौर पर बढ़ोतरी देखी गई है, जिससे भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की चिंता भी बढ़ी है। (Indian Army Middle Sector)
बीते कुछ सालों में चीन ने मिडिल सेक्टर के पास तेजी से सड़कें, ट्रैक, ब्रिज और लॉजिस्टिक फैसिलिटी तैयार की हैं। इन निर्माण कार्यों की वजह से पीएलए की तैनाती तो बढ़ी ही है, साथ ही मूवमेंट भी तेजी से बढ़ा है। इससे चीन की सेना को कम समय में ज्यादा तादाद में सैनिकों और हथियारों को सीमा तक पहुंचाने में आसानी हो रही है। भारतीय सेना इसे केवल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट नहीं, बल्कि संभावित सैन्य तैयारी के तौर पर देख रही है। (Indian Army Middle Sector)
सेना अधिकारियों का कहना है कि मिडिल सेक्टर की चुनौतियां बाकी सेक्टरों से अलग हैं। यहां का इलाका बेहद दुर्गम है। ऊंचे पहाड़, घने जंगल, सीमित सड़क नेटवर्क और दूर-दूर आबादी इस इलाके की खास पहचान है। इसके साथ ही यह इलाका पर्यावरण के तौर पर भी संवेदनशील है। इन सब वजहों से यहां सैन्य तैनाती और लॉजिस्टिक सपोर्ट अपने आप में कठिन काम है। हाल के समय में इस इलाके में ग्रे-जोन एक्टिविटी भी बढ़ी है, यानी चीन ने ऐसे कदम भी उठाए हैं, जो सीधे युद्ध जैसे नहीं लगते, लेकिन तनाव बढ़ाने का काम करते हैं। (Indian Army Middle Sector)
चीन की बदलती रणनीति को देखते हुए भारतीय सेना ने अपनी तैयारियों को नए सिरे से मजबूत करना शुरू कर दिया है। सर्विलांस सिस्टम को बेहतर किया गया है, फॉरवर्ड पोस्ट्स पर निगरानी बढ़ाई गई है और सैनिकों के बीच बेहतर तालमेल पर जोर दिया जा रहा है। इसके साथ ही रियल टाइम इंटेलिजेंस पर खास ध्यान दिया जा रहा है, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत मिल सके। (Indian Army Middle Sector)
सेना ने यह भी सुनिश्चित किया है कि हाई एल्टीट्यूड एरिया में तैनात जवानों को बेहतर लॉजिस्टिक सपोर्ट मिले। तेजी से ट्रूप रोटेशन, राशन और जरूरी सामान की सप्लाई, और मेडिकल फैसिलिटी को मजबूत किया जा रहा है। इसका मकसद यह है कि लंबे समय तक कठिन हालात में तैनात रहने के बावजूद सैनिकों की ऑपरेशनल क्षमता बनी रहे। (Indian Army Middle Sector)
इन तमाम चुनौतियों के बीच भारतीय सेना अब मिलिट्री और सिविल इंटीग्रेशन पर भी जोर दे रही है। इसी के मद्देनजर भारतीय सेना 7 जनवरी को देहरादून में एक अहम सेमिनार आयोजित कर रही है, जिसका नाम है ‘फोर्टिफाइंग हिमालय – ए प्रोएक्टिव मिलिट्री-सिविल फ्यूजन स्ट्रैटेजी इन मिडिल सेक्टर’। इस सेमिनार का आयोजन भारतीय सेना की 14 इन्फैंट्री डिवीजन कर रही है। (Indian Army Middle Sector)
इस सेमिनार में मिलिट्री लीडर्स, अकादमिक एक्सपर्ट्स और रणनीतिक मामलों के जानकार हिस्सा लेंगे। इसमें इस बात पर चर्चा होगी कि कैसे उत्तराखंड जैसे संवेदनशील इलाकों में मिलिट्री और सिविल कोऑर्डिनेशन के जरिए भारत अपने फ्रंटियर डिफेंस स्ट्रक्चर को और मजबूत बना सकता है। सड़क, कम्युनिकेशन, हेल्थ और लोकल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे मुद्दों पर सिविल एडमिनिस्ट्रेशन की भूमिका को भी इसमें अहम माना जा रहा है। (Indian Army Middle Sector)
रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन सीमा के पास ड्यूल-यूज फैसिलिटी भी तैयार कर रहा है, जिनका इस्तेमाल सिविल और मिलिट्री दोनों के लिए किया जा सकता है। इसके अलावा साइबर प्रोबिंग, डिजिटल सर्विलांस और बॉर्डर विलेज का तेजी से मिलिट्रीकरण भी भारत के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
भारतीय सेना ने जवाब में अपने सर्विलांस सिस्टम को और मजबूत किया है। वहीं, सेना अब रियल-टाइम इंटेलिजेंस पर विशेष जोर दे रही है। बॉर्डर इलाकों में सर्विलांस बढ़ाई गई है और फॉरवर्ड पोस्ट्स के बीच तालमेल को बेहतर किया गया है। इसके अलावा ऊंचाई वाले क्षेत्रों में लॉजिस्टिक सपोर्ट और सैनिकों की आवाजाही को अधिक सुचारू बनाया गया है। (Indian Army Middle Sector)


