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स्वदेशी सब-मशीन गन ‘अस्मी’ के डिजाइनर कर्नल प्रसाद बंसोड़ को मिला बड़ा सम्मान, SMG की सेनाओं में लगातार बढ़ रही डिमांड

‘अस्मी’ नाम संस्कृत से लिया गया है, जिसका मतलब होता है आत्मसम्मान और गर्व। कर्नल प्रसाद बंसोड़ ने भारतीय सेना की स्वदेशी मशीन पिस्टल ‘अस्मी’ के डिजाइन में अहम भूमिका निभाई है...

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📍नई दिल्ली/कोलकाता | 26 Mar, 2026, 5:52 PM

Asmi Machine Pistol: भारतीय सेना में स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रहे अधिकारी कर्नल प्रसाद बंसोड़ को सम्मानित कियाा गया है। ईस्टर्न कमांड के आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल आरसी तिवारी ने कर्नल प्रसाद बंसोड़ को प्रशंसा पत्र से सम्मानित किया है। यह सम्मान उन्हें ‘अस्मी’ सब-मशीन गन (एसएमजी) के डेवलपमेंट में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए दिया गया है।

Asmi Machine Pistol: ‘अस्मी’ मशीन पिस्टल के पीछे है कर्नल बंसोड़

अस्मी’ नाम संस्कृत से लिया गया है, जिसका मतलब होता है आत्मसम्मान और गर्व। कर्नल प्रसाद बंसोड़ ने भारतीय सेना की स्वदेशी मशीन पिस्टल ‘अस्मी’ के डिजाइन में अहम भूमिका निभाई है। यह एक 9 एमएम मशीन पिस्टल है, जिसे खास तौर पर क्लोज क्वार्टर बैटल यानी नजदीकी लड़ाई के लिए तैयार किया गया है। इस हथियार का डिजाइन पूरी तरह भारत में तैयार किया गया है और इसमें सेना की जरूरतों को ध्यान में रखा गया है।

‘अस्मी’ पूरी तरह स्वदेशी हथियार है और इसका उत्पादन भारत में ही किया जा रहा है। इसे हैदराबाद की कंपनी लोकेश मशीन्स लिमिटेड बना ररहाा है। यह पहली बार है जब किसी निजी कंपनी ने भारतीय सेना को इस तरह की स्वदेशी सबमशीन गन सप्लाई की है।

हल्की, कॉम्पैक्ट और इस्तेमाल में आसान

‘अस्मी’ का डिजाइन और विकास साल 2020 में शुरू हुआ था। तब लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद बंसोड़ ने बहुत कम समय में तैयार किया। उन्होंने इसे करीब चार महीनों में पूरा कर लिया इस प्रोजेक्ट में उन्होंने डीआरडीओ की आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट, पुणे के साथ मिलकर काम किया।

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कर्नल बंसोड़ के पास पहले से हथियार डिजाइन का अनुभव था। उन्होंने इंसास राइफल को समझकर उसे नए तरीके से बदलकर बुलपप कार्बाइन बनाने का काम भी किया था। इसी अनुभव का इस्तेमाल उन्होंने ‘अस्मी’ को तैयार करने में किया। उन्होंने इस हथियार को बनाते समय सैनिकों से मिले फीडबैक को ध्यान में रखा। खास तौर पर इसे हल्का, बिना जाम हुए काम करने वाला और आसानी से मेंटेन किया जा सकने वाला वेपन तैयार किया।

इस हथियार के विकास में 3डी प्रिंटिंग तकनीक का भी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया। इससे इसका प्रोटोटाइप यानी शुरुआती मॉडल जल्दी तैयार किया जा सका और उसमें जरूरी बदलाव भी आसानी से किए गए।

‘अस्मी’ को पहली बार साल 2021 में सार्वजनिक रूप से दिखाया गया था। इसके बाद 2022 में इसे इंटरनेशनल पुलिस एक्सपो और डेफएक्सपो जैसे बड़े कार्यक्रमों में भी प्रदर्शित किया गया। यह पूरी तरह स्वदेशी हथियार है, जो ‘मेक इन इंडिया’ पहल का एक मजबूत उदाहरण माना जाता है। इसके निर्माण में ऊपर का हिस्सा एयरक्राफ्ट ग्रेड एल्युमिनियम से बनाया गया है, जबकि हल्का और मजबूत रखने रखने के लिए नीचे का हिस्सा कार्बन फाइबर से तैयार किया गया है। (Asmi Machine Pistol)

अस्मी की खूबियां

‘अस्मी’ मशीन पिस्टल का वजन 2 किलोग्राम के बीच है। इस वजह से यह अपने अंतरराष्ट्रीय समकक्ष हथियारों की तुलना में करीब 10 से 15 प्रतिशत तक हल्की मानी जाती है। इसमें स्टैंडर्ड 9×19 मिमी पैराबेलम कारतूस का इस्तेमाल होता है, जो पहले से ही भारतीय सेनाओं में इस्तेमाल हो रहा है। ‘अस्मी’ की फायरिंग रेट लगभग 600 राउंड प्रति मिनट है और यह करीब 100 मीटर तक प्रभावी तरीके से लक्ष्य को भेद सकती है। इसकी मैगजीन क्षमता 33 राउंड की है और यह ग्लॉक मैगजीन के साथ भी इस्तेमाल की जा सकती है।

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हथियार की बैरल लंबाई मूल संस्करण में करीब 8 इंच यानी लगभग 203 मिमी है, जबकि नए वेरिएंट में इसे बढ़ाकर 9 इंच तक किया गया है। ‘अस्मी’ अपनी जामिंग-फ्री क्षमता के लिए जानी जाती है। परीक्षणों के दौरान इसने लगातार 3000 राउंड फायर करने की क्षमता दिखाई है। (Asmi Machine Pistol)

भारतीय सेनाओं को हो रही सप्लाई

साल 2024 में हैदराबाद की कंपनी लोकेश मशीन्स लिमिटेड ने ‘अस्मी’ मशीन पिस्टल की सप्लाई के लिए भारतीय सेना का कॉन्ट्रैक्ट हासिल किया। जिसके बाद उसे 550 यूनिट्स बनाने और देने का ऑर्डर मिला। यह ऑर्डर करीब 4.26 करोड़ रुपये का था। इसके बाद कंपनी ने तय समय के अंदर काम पूरा करते हुए अक्टूबर 2024 तक सभी 550 ‘अस्मी’ मशीन पिस्टल्स भारतीय सेना को सौंप दीं।

इन हथियारों को मुख्य रूप से नॉर्दर्न कमांड में शामिल किया गया, जो जम्मू-कश्मीर और लद्दाख जैसे संवेदनशील इलाकों की जिम्मेदारी संभालती है। यहां क्लोज क्वार्टर कॉम्बैट यानी नजदीकी लड़ाई की जरूरत ज्यादा होती है, इसलिए ‘अस्मी’ जैसे हल्के और कॉम्पैक्ट हथियार काफी उपयोगी माने जाते हैं। (Asmi Machine Pistol)

डिलीवरी के बाद इन हथियारों को पैरा स्पेशल फोर्सेज जैसी यूनिट्स को भी दिया गया, जहां तेज और सटीक कार्रवाई की जरूरत होती है। फरवरी 2026 में असम राइफल्स ने भी 1,013 ‘अस्मी’ कार्बाइन का ऑर्डर लोकेश मशीन्स लिमिटेड को दिया। इनकी डिलीवरी 90 दिनों के अंदर पूरी करनी है। असम राइफल्स पूर्वोत्तर राज्यों में तैनात रहती है, जहां इस हथियार का इस्तेमाल पुरानी कार्बाइनों की जगह किया जाएगा।

इसके अलावा मार्च 2026 में सशस्त्र सीमा बल यानी एसएसबी ने भी करीब 9.5 करोड़ रुपये का ऑर्डर दिया है, जिसमें ‘अस्मी’ सबमशीन गन्स की सप्लाई शामिल है। इसके अलावा राज्य पुलिस बल, नेशनल सिक्योरिटी गार्ड और बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स जैसी एजेंसियां भी इसमें रुचि दिखा रही हैं। (Asmi Machine Pistol)

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