📍नई दिल्ली | 2 Apr, 2026, 12:02 AM
ADG NG Air Defence Gun RFI: ऑपरेशन सिंदूर से सबक लेते हुए भारतीय सेना अब बड़ी तैयारी कर रही है। सेना की एयर डिफेंस क्षमता को और मजबूत करने के लिए सेना की एयर डिफेंस विंग ने नई पीढ़ी की एयर डिफेंस गन यानी एडीजी-एनजी की खरीद के लिए रिक्वेस्ट फॉर इंफॉर्मेशन जारी किया है। यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब युद्ध के मैदान में ड्रोन, स्वार्म ड्रोन, क्रूज मिसाइल और प्रिसीजन गाइडेड म्यूनिशन जैसे नए खतरे तेजी से बढ़ रहे हैं।
सेना का मानना है कि पारंपरिक फाइटर जेट या हेलीकॉप्टर के मुकाबले दुश्मन अब बड़े प्लेटफॉर्म की बजाय छोटे और सस्ते हथियारों का इस्तेमाल कर रहा है। ड्रोन के जरिए निगरानी के साथ-साथ हमले भी किए जा रहे हैं। कई बार एक साथ कई ड्रोन यानी स्वार्म अटैक किए जाते हैं, जिससे एयर डिफेंस सिस्टम पर दबाव बढ़ जाता है। ऐसे में एक ऐसी गन सिस्टम की जरूरत महसूस की गई है जो कम लागत में इन खतरों को तुरंत खत्म कर सके।
ADG NG Air Defence Gun RFI: ऑपरेशन सिंदूर का किया जिक्र
आरएफआई में ऑपरेशन सिंदूर का भी जिक्र किया गया है। इसमें बताया गया है कि पश्चिमी मोर्चे पर दुश्मन ने ड्रोन और स्वार्म ड्रोन का इस्तेमाल निगरानी और हमले दोनों के लिए किया था। इन हमलों में सिविल और डिफेंस ठिकानों को निशाना बनाया गया।
इन बदलते खतरों को देखते हुए अब एक नई पीढ़ी की गन सिस्टम की जरूरत महसूस की जा रही है। यह सिस्टम समय रहते टारगेट को पहचान सके, उसे ट्रैक कर सके और कम लागत में उसे खत्म कर सके, ताकि महत्वपूर्ण ठिकानों को किसी भी बड़े नुकसान से बचाया जा सके।
इसी वजह से सेना अब ऐसी गन सिस्टम चाहती है जो कम समय में ज्यादा टारगेट को ट्रैक और न्यूट्रलाइज कर सके। एडीजी-एनजी को इसी जरूरत को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है। (ADG NG Air Defence Gun RFI)
कैसे काम करेगी यह गन
आर्मी एयर डिफेंस का काम होता है कि वह युद्ध क्षेत्र और पीछे के इलाकों में मौजूद महत्वपूर्ण ठिकानों की हर मौसम में सुरक्षा करे। इन ठिकानों को दुश्मन के हवाई हमलों से बचाना इसकी जिम्मेदारी होती है।
नई एयर डिफेंस गन को व्हीकल पर भी लगाया जा सकेगा या फिर इसे खींचकर भी ले जाया जा सकेगा। इसमें इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल फायर कंट्रोल सिस्टम लगाया जाएगा, जिससे यह खुद ही टारगेट को पहचानकर उस पर हमला कर सकेगी।
यह सिस्टम अलग-अलग तरह के खतरों को निशाना बना सकेगा। इसमें फाइटर एयरक्राफ्ट, हेलीकॉप्टर, ड्रोन, रिमोट पायलटेड एयरक्राफ्ट, क्रूज मिसाइल और प्रिसीजन गाइडेड हथियार शामिल हैं।
नई एयर डिफेंस गन को इस तरह डिजाइन किया जाएगा कि यह कई तरह के हवाई खतरों को एक साथ संभाल सके। इसमें फिक्स्ड विंग एयरक्राफ्ट, हेलीकॉप्टर, ड्रोन, क्रूज मिसाइल और रॉकेट-आर्टिलरी-मोर्टार जैसे हथियार शामिल हैं।
इसका मुख्य काम होगा तेजी से टारगेट को पहचानना, उसे ट्रैक करना और सही समय पर सटीक फायर करके खत्म करना। खास बात यह है कि यह सिस्टम कम ऊंचाई पर उड़ने वाले टारगेट्स के खिलाफ भी प्रभावी होगा, जो अक्सर रडार से बच निकलते हैं। (ADG NG Air Defence Gun RFI)
क्या होंगी तकनीकी खूबियां
इस गन की मारक क्षमता कम से कम 4 किलोमीटर या उससे ज्यादा रखी गई है। यह 500 मीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से आने वाले टारगेट को भी निशाना बना सकेगी। फायरिंग स्पीड कम से कम 300 राउंड प्रति मिनट होगी, जिससे कम समय में ज्यादा फायर किया जा सकेगा। इसकी प्रभावी ऊंचाई 2500 मीटर या उससे ज्यादा होगी। इसमें छोटे टारगेट जैसे माइक्रो एयरक्राफ्ट, पैरा मोटर, पैराग्लाइडर और छोटे ड्रोन भी शामिल किए गए हैं।
इसमें इस्तेमाल होने वाला गोला-बारूद भी आधुनिक होगा। इसमें प्रोग्रामेबल और प्रॉक्सिमिटी फ्यूज वाले राउंड होंगे, जो टारगेट के पास पहुंचकर खुद ही फट सकते हैं। इसके अलावा सामान्य हाई एक्सप्लोसिव राउंड और ट्रेनिंग अम्यूनिशन भी शामिल होंगे।
गन में ऑटोमैटिक लोडिंग सिस्टम होगा, जिससे फायरिंग के दौरान समय की बचत होगी। कम क्रू के साथ इसे ऑपरेट किया जा सकेगा और दो लोग भी इसे रीलोड कर पाएंगे।
पावर और सिस्टम इंटीग्रेशन
गन में अपना पावर सिस्टम होगा, जिसमें जनरेटर और बैटरी दोनों शामिल होंगे। बैटरी के जरिए साइलेंट ऑपरेशन भी किया जा सकेगा, जिससे दुश्मन को इसकी लोकेशन का अंदाजा लगाना मुश्किल होगा।
यह सिस्टम मॉड्यूलर होगा, यानी जरूरत के हिसाब से इसमें बदलाव किया जा सकेगा। साथ ही इसे मौजूदा रडार और नेविगेशन सिस्टम के साथ भी जोड़ा जा सकेगा। (ADG NG Air Defence Gun RFI)
सेंसर और फायर कंट्रोल सिस्टम
इस गन की सबसे बड़ी ताकत इसका इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल फायर कंट्रोल सिस्टम होगा। इसमें डे और नाइट दोनों में काम करने की क्षमता होगी। कैमरा, थर्मल इमेजिंग और लेजर रेंज फाइंडर की मदद से यह दूर के टारगेट को भी पहचान सकेगा।
अगर किसी कारण से इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम फेल हो जाए, तब भी इसे मैनुअल ओपन साइट के जरिए चलाया जा सकेगा। इसका मतलब है कि खराब हालात में भी यह पूरी तरह बंद नहीं होगी। इस सिस्टम में रिकॉर्डिंग की सुविधा भी होगी, जिससे ऑपरेशन का डेटा बाद में देखा जा सकेगा। (ADG NG Air Defence Gun RFI)
हर इलाके में काम करने की क्षमता
सेना चाहती है कि यह गन हर तरह के इलाके में काम कर सके। चाहे ऊंचे पहाड़ी इलाके हों, रेगिस्तान हो या सामान्य मैदान, यह हर जगह तैनात की जा सके। मैदानी इलाकों में इसकी मूवमेंट स्पीड करीब 50 किलोमीटर प्रति घंटा तक हो सकती है, जबकि पहाड़ों में 30 किलोमीटर प्रति घंटा और ऑफ रोड में 20 किलोमीटर प्रति घंटा की क्षमता होगी।
यह सिस्टम -30 डिग्री से लेकर +55 डिग्री तक के तापमान में काम करने के लिए तैयार किया जाएगा। साथ ही इसे समुद्र तल से 4.5 किलोमीटर ऊंचाई तक इस्तेमाल किया जा सकेगा।
रक्षा मंत्रालय ने कंपनियों से यह भी जानकारी मांगी है कि उनका सिस्टम अलग-अलग टारगेट को कितनी दूरी से पहचान सकता है। इसमें छोटे ड्रोन से लेकर हेलीकॉप्टर और फाइटर जेट तक शामिल हैं।
इसके लिए खास तौर पर DJI Mavic Pro 3 ड्रोन, चीता हेलीकॉप्टर और राफेल जैसे फाइटर जेट को उदाहरण के तौर पर लिया गया है। (ADG NG Air Defence Gun RFI)
फील्ड ट्रायल भारत में ही
सेना इस सिस्टम को खरीदने के लिए टू-बिड सिस्टम अपनाएगी। पहले टेक्निकल मूल्यांकन होगा और उसके बाद कमर्शियल बिड खोली जाएगी। फील्ड ट्रायल भारत में ही किए जाएंगे, जहां अलग-अलग परिस्थितियों में इसकी क्षमता को परखा जाएगा।
इस प्रोजेक्ट में स्वदेशी हिस्सेदारी पर खास जोर दिया गया है। कम से कम 50 प्रतिशत इंडिजिनस कंटेंट जरूरी रखा गया है, यानी इसका बड़ा हिस्सा भारत में ही बनाया जाएगा।
इस प्रोजेक्ट में सरकारी और निजी दोनों सेक्टर की कंपनियों के लिए मौका खुला है। रक्षा क्षेत्र में काम करने वाली कई कंपनियां इसमें हिस्सा ले सकती हैं। उन्हें अपनी तकनीकी क्षमता, उत्पादन क्षमता और सपोर्ट सिस्टम की जानकारी देनी होगी।
सेना ने कंपनियों से यह भी पूछा है कि वे कितनी जल्दी उत्पादन कर सकती हैं और कितनी संख्या में गन सप्लाई कर सकती हैं।
प्री-सबमिशन मीटिंग अप्रैल के मध्य में रखी गई है, जहां कंपनियों को अपनी शंकाएं दूर करने का मौका मिलेगा। रक्षा मंत्रालय ने कंपनियों को 11 जून तक अपना जवाब जमा करने के लिए कहा है। इसके बाद आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। (ADG NG Air Defence Gun RFI)
ऑपरेशन सिंदूर में इस्तेमाल की थीं ये एयर डिफेंस गन
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना की एयर डिफेंस यूनिट्स ने बड़े स्तर पर ड्रोन हमलों का सामना किया। पश्चिमी मोर्चे पर पाकिस्तान ने 600 से ज्यादा छोटे ड्रोन और स्वार्म ड्रोन का इस्तेमाल किया, जिनका मकसद निगरानी करना और सैन्य ठिकानों पर हमला करना था। इन खतरों से निपटने के लिए आर्मी एयर डिफेंस ने मल्टी-लेयर सिस्टम अपनाया, जिसमें गन और मिसाइल दोनों का इस्तेमाल हुआ।
इस ऑपरेशन में सबसे ज्यादा इस्तेमाल बोफोर्स एल-70 40 मिमी एंटी-एयरक्राफ्ट गन का हुआ। यह गन अपग्रेडेड सिस्टम के साथ थी, जिसमें इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल फायर कंट्रोल सिस्टम और प्रॉक्सिमिटी फ्यूज अम्यूनिशन शामिल था। इसकी फायरिंग स्पीड 300 राउंड प्रति मिनट से ज्यादा है और इसने कई ड्रोन मार गिराए।
इसके अलावा जेडयू-23-2 ट्विन बैरल गन का भी इस्तेमाल किया गया। यह हल्की और तेज फायरिंग वाली गन है, जो छोटे ड्रोन को गिराने में काफी कारगर साबित हुई। वहीं कुछ जगहों पर व्हीकल माउंटेड जेडयू-23-4 शिल्का गन सिस्टम भी तैनात किया गया था, जो तेजी से मूव कर सकता है।
इन गन्स के साथ मिसाइल सिस्टम जैसे पिचोरा और ओसा-का भी इस्तेमाल हुए, जबकि सभी सिस्टम को एक साथ जोड़ने के लिए आधुनिक कमांड और कंट्रोल नेटवर्क का सहारा लिया गया। ऑपरेशन के दौरान इन गन्स ने बड़ी संख्या में ड्रोन को गिराकर महत्वपूर्ण ठिकानों की सुरक्षा की। (ADG NG Air Defence Gun RFI)


