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तेजस एमके-1ए की डिलीवरी पर बड़ा फैसला जल्द, IAF और HAL की हाई-लेवल रिव्यू मीटिंग इसी महीने

तेजस एमके-1ए को वायुसेना में शामिल करने से पहले कुछ जरूरी तकनीकी और ऑपरेशनल शर्तों को पूरा करना होता है। इन्हें एयर स्टाफ क्वालिटी रिक्वायरमेंट कहा जाता है...

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📍नई दिल्ली | 1 Apr, 2026, 10:33 PM

Tejas Mk1A delivery delay: स्वदेशी फाइटर जेट तेजस एमके-1ए की डिलीवरी को लेकर इस महीने एक अहम मोड़ आने वाला है। भारतीय वायुसेना और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के बीच जल्द ही एक बड़ी रिव्यू बैठक होने जा रही है। इस बैठक में यह तय किया जाएगा कि तेजस एमके-1ए आखिर कब तक वायुसेना को सौंपा जा सकेगा।

Tejas Mk1A delivery delay: देरी के बीच अहम समीक्षा बैठक

सूत्रों के मुताबिक, इस रिव्यू मीटिंग में दोनों पक्ष यह देखेंगे कि विमान के जरूरी ऑपरेशनल मानक कितने पूरे हुए हैं। ये वही मानक हैं जिन्हें बिना पूरा किए विमान को सेवा में शामिल नहीं किया जा सकता।

अगर इन जरूरी शर्तों को पूरा कर लिया जाता है, तो अगले दो से तीन महीनों में पहले तेजस एमके-1ए की डिलीवरी हो सकती है। लेकिन अगर इनमें कमी रह जाती है, तो देरी और बढ़ सकती है।

इसलिए यह बैठक सिर्फ एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि पूरे प्रोग्राम की दिशा तय करने वाली मानी जा रही है।

क्या हैं अनिवार्य ऑपरेशनल जरूरतें

तेजस एमके-1ए को वायुसेना में शामिल करने से पहले कुछ जरूरी तकनीकी और ऑपरेशनल शर्तों को पूरा करना होता है। इन्हें एयर स्टाफ क्वालिटी रिक्वायरमेंट कहा जाता है।

इनमें सबसे अहम मिसाइल फायरिंग ट्रायल का पूरा होना है। इसके अलावा रडार और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम का सही तरीके से इंटीग्रेशन भी जरूरी है। विमान में लगे सभी हथियारों के पैकेज का सफल परीक्षण और वैलिडेशन भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा है।

पांच तेजस एमके-1ए विमान डिलीवरी के लिए तैयार!

फरवरी 2026 में एचएएल ने बताया था कि पांच तेजस एमके-1ए विमान डिलीवरी के लिए तैयार हैं। इनमें कई जरूरी क्षमताएं शामिल की जा चुकी हैं। लेकिन सूत्रों का कहना है कि अभी भी कुछ महत्वपूर्ण क्लीयरेंस बाकी हैं।
इसी वजह से वायुसेना अभी इंतजार की स्थिति में है और अंतिम फैसला इस रिव्यू के बाद ही लिया जाएगा।

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इंजन और सिस्टम इंटीग्रेशन की चुनौती

तेजस एमके-1ए की देरी के पीछे कई वजहें रही हैं। सबसे बड़ी समस्या इंजन की सप्लाई में आई देरी रही है। इसके लिए अमेरिकी कंपनी से एफ-404 इंजन आने थे, जो समय पर नहीं मिल सके। इसके अलावा विमान में लगे एडवांस रडार और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम के इंटीग्रेशन में भी समय लगा। खासकर एईएसए रडार और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम को एक साथ जोड़ना भी मुश्किल प्रक्रिया है। इन सभी तकनीकी चुनौतियों के चलते पूरा प्रोग्राम तय समय से पीछे खिसकता गया।

तेजस एमके-1ए की तकनीकी खूबियां

तेजस एमके-1ए, तेजस के पुराने वर्जन से काफी ज्यादा एडवांस माना जाता है। इसमें कई नए सिस्टम और क्षमताएं जोड़ी गई हैं। इसमें एईएसए रडार लगाया गया है, जो दूर तक टारगेट को ट्रैक कर सकता है। इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट इसे दुश्मन के रडार और मिसाइल से बचाने में मदद करता है।

विमान में आधुनिक हथियार ले जाने की क्षमता है, जिसमें बियॉन्ड विजुअल रेंज मिसाइल भी शामिल हैं। इसके अलावा इसमें एयर-टू-एयर और एयर-टू-ग्राउंड दोनों तरह के मिशन करने की क्षमता है।

इसकी अधिकतम गति करीब मैक 1.6 तक है और यह करीब 50,000 फीट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है। इसमें डिजिटल फ्लाई-बाय-वायर सिस्टम दिया गया है, जिससे नियंत्रण और स्थिरता बेहतर होती है।

भारतीय वायुसेना इस समय फाइटर स्क्वॉड्रन की कमी से जूझ रही है। जरूरत के मुकाबले उसके पास काफी कम स्क्वॉड्रन हैं, जिससे ऑपरेशनल दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में तेजस एमके-1ए को जल्दी शामिल करना जरूरी माना जा रहा है। यह विमान पुराने हो चुके फाइटर जेट की जगह लेने में अहम भूमिका निभाने वाला है।

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हालांकि वायुसेना पहले ही तेजस के शुरुआती वर्जन एमके-1 को शामिल कर चुकी है, लेकिन नए और ज्यादा सक्षम एमके-1ए वर्जन का इंतजार काफी समय से किया जा रहा है।

जब भी कोई नया विमान तैयार होता है, तो उसे सीधे सेवा में शामिल नहीं किया जाता। पहले उसकी कई स्तर पर जांच होती है।

फैक्ट्री से निकलने के बाद वायुसेना की तकनीकी टीम उसका निरीक्षण करती है। इसके बाद टेस्ट पायलट उसकी उड़ान भरते हैं और अलग-अलग परिस्थितियों में उसकी क्षमता को परखते हैं।

हर टेस्ट के बाद रिपोर्ट तैयार की जाती है। अगर कोई कमी सामने आती है, तो उसे ठीक करने के लिए वापस निर्माता को भेजा जाता है। यह पूरी प्रक्रिया समय लेने वाली होती है, लेकिन इससे यह सुनिश्चित होता है कि विमान पूरी तरह भरोसेमंद हो।

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