📍नई दिल्ली | 7 Dec, 2025, 7:39 PM
Jaguar Jets: भारतीय वायुसेना अभी कुछ साल और अपनी पुरानी जगुआर फ्लीट को फ्लाइंग कंडीशन में बनाए रखेगी। इसकी वजह है कि ओमान ने अपने 20 से ज्यादा जगुआर फाइटर जेट्स भारत को देने का फैसला किया है, ताकि भारतीय वायुसेना इन जेट्स को स्पेयर्स पार्ट्स के तौर पर इस्तेमाल कर सके। भारतीय वायुसेना कई साल से इन जेट्स के लिए जरूरी पार्ट्स की कमी से जूझ रही थी, क्योंकि दुनिया के ज्यादातर देशों ने यह विमान बहुत पहले ही रिटायर कर दिए हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक ओमान की वायुसेना रॉयल एयर फोर्स ऑफ ओमान ने अपने सभी जगुआर फाइटर जेट्स कई साल पहले ही रिटायर कर दिए थे। ओमान ने 1974 और 1980 में कुल 24 जगुआर खरीदे थे। इन्हें 2014 में रिटायर्ड कर दिया गया। वहीं, अब इन जेट्स का ओमान के पास कोई बड़ा इस्तेमाल नहीं बचा था। लेकिन भारत के साथ लंबे समय से चली आ रही डिफेंस पार्टनरशिप के चलते ओमान ने इन्हें भारत को सौंपने पर सहमति दी। भारत इन जेट्स को उड़ाएगा नहीं, बल्कि इन्हें अलग-अलग कर इनके इंजन, व्हील्स, इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स, स्ट्रक्चरल कम्पोनेंट्स और दूसरे जरूरी हिस्सों को मौजूदा जगुआर स्क्वाड्रंस में लगाया जाएगा।
जगुआर जेट यानी शमशेर पहली बार 1979 में भारत आए थे और आज भी छह स्क्वाड्रन में काम कर रहे हैं। लेकिन अब इनकी उम्र काफी बढ़ चुकी है और मेंटेनेंस के लिए पार्ट्स जुटाना मुश्किल होता जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, फ्रांस, ब्रिटेन और नाइजीरिया ने अपने जगुआर जेट्स बहुत पहले ही सर्विस से बाहर हो चुके हैं। अब दुनिया में भारत ही वह देश है जो इस पुराने लेकिन भरोसेमंद जेट को अभी भी इस्तेमाल कर रहा है। यही वजह है कि स्पेयर्स जुटाने के लिए भारत को रिटायर्ड जेट्स को तोड़कर उनके पार्ट्स इस्तेमाल करने पड़ते हैं। ओमान से मिलने वाले ये 20 जेट भारतीय वायुसेना के लिए बड़ी मदद साबित होंगे, क्योंकि इनके जरिए आने वाले सालों तक मेंटेनेंस में आसानी रहेगी।
जगुआर जेट भारतीय वायुसेना के कई अहम मिशनों को भी अंजाम दे चुका है। इसे कारगिल संघर्ष के दौरान भी इस्तेमाल किया गया था और बाद में पाकिस्तान के खिलाफ कई ऑपरेशनों में भी तैनात किया गया। यह जेट डीप पेनिट्रेशन स्ट्राइक एयरक्राफ्ट माना जाता है, यानी लंबी दूरी पर हथियार ले जाकर सटीक हमला कर सकता है।
दरअसल जगुआर को सर्विस में बनाए रखना वायुसेना की मजबूरी भी है। क्योंकि वायुसेना इन दिनों पहले ही स्क्वाड्रनों की कमी से जूझ रही है। वर्तमान में वायुसेना के पास 29 एक्टिव स्क्वाड्रन हैं, जबकि जरूरत 42 स्क्वाड्रनों की है। तेजस जैसे स्वदेशी विमान और 114 राफेल जेट के आने में अभी वक्त है। तेजस की डिलीवरी अगले साल मार्च से शुरू होगी। ऐसे में जगुआर जेट्स को अभी कुछ साल और सर्विस में बनाए रखना बेहद जरूरी है।
पिछले वर्षों में फ्रांस ने 2018 में लगभग 30 एयरफ्रेम्स और ब्रिटेन ने 2 ट्विन-सीट जेट्स और कुथ स्पेयर पार्ट्स भारत को दिए थे। वहीं, ओमान ने भी 2018 में दो एयरफ्रेम, 8 इंजन और 3,500 स्पेयर्स भारत को दिए थे। बदले में ओमान से भारत से कोई सौदा नहीं किया था। भारत ने सिर्फ इनकी शिपिंग कॉस्ट पर खर्च किया था। लेकिन इस बार ओमान ने एक साथ 20 से ज्यादा जेट देने का फैसला किया है। भले ही जगुआर जेट पुराना हो चुका है, लेकिन इसकी स्ट्रक्चर एंड फ्लाइट कैपेबिलिटी इसे अभी भी उपयोगी बनाए हुए हैं।
भारतीय वायुसेना ने इन जेट्स को समय-समय पर अपग्रेड भी किया है, ताकि वे आधुनिक हथियारों और नेविगेशन सिस्टम के साथ काम कर सकें। दारिन-III अपग्रेड (नेविगेशन, EW सिस्टम्स, स्मार्ट वेपंस) के बाद जगुआर जेट में नई गाइडेड मिसाइलें और एडवांस इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम भी लगाई जा सकती हैं। ऐसे लगभग 60 से ज्यादा जगुआर जेट्स अपग्रेड किए जा रहे हैं। इसके अलावा इंजन को अदौर एमके 811 से रिप्लेस करने का 1.5 बिलियन डॉलर का प्रोजेक्ट भी चल रहा।
ओमान के ये जेट जैसे ही भारत पहुंचेंगे, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड इन्हें खोलकर इनके सही-सलामत पार्ट्स को अलग करेगी। फिर वो पार्ट्स देशभर में जगुआर स्क्वाड्रन में भेजे जाएंगे।

