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Saturday, August 30, 2025
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AMCA Engine Deal: पहली बार भारत को मिलेगा फाइटर जेट इंजन का मालिकाना हक, फ्रांस के साथ समझौते से बनेगा डुअल इंजन इकोसिस्टम

भारत और फ्रांस ने AMCA स्टील्थ फाइटर के लिए 120 किलोन्यूटन इंजन बनाने की डील की है। इस खबर में जानिए कैसे यह डील भारत को आत्मनिर्भरता और डिफेंस एक्सपोर्ट्स में आगे बढ़ाएगी।

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अब तक भारत जिन लड़ाकू विमानों का निर्माण कर रहा था, उनके लिए विदेशी इंजन पर निर्भर रहना पड़ता था। तेजस विमान में इस्तेमाल होने वाले इंजन अमेरिका की जनरल इलेक्ट्रिक कंपनी से खरीदे जाते हैं। वहीं रूस से मिले मिग और सुखोई के इंजन भी वर्षों से भारतीय वायुसेना की रीढ़ बने हुए हैं। लेकिन इस बार भारत सिर्फ इंजन बनाएगा ही नहीं बल्कि उसका मालिक भी होगा...
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📍नई दिल्ली | 23 Aug, 2025, 11:50 AM

AMCA Engine Deal: एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट यानी AMCA के इंजन को लेकर भारत और फ्रांस के बीच हुई नई रक्षा साझेदारी को देश की डिफेंस हिस्ट्री में सबसे बड़ा मोड़ माना जा रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में घोषणा की कि भारत का पहला पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान अब अपने इंजन के साथ पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक पर खड़ा होगा। इस प्रोजेक्ट के तहत भारत और फ्रांस की राफेल का इंजन बनाने वाली कंपनी सफरान मिलकर नया स्वदेशी इंजन बनाएंगे। लेकिन इस बार सबसे बड़ी खासियत यह है कि इस इंजन का मालिकाना हक यानी बौद्धिक संपदा अधिकार (IP Ownership) भारत के पास होगी।

AMCA jet engine: भारत-फ्रांस मिलकर बनाएंगे पांचवी पीढ़ी का स्वदेशी इंजन, राजनाथ सिंह किया बड़ा एलान, राफेल बनाने वाली कंपनी सफरान के साथ होगी साझेदारी

AMCA Engine Deal: क्या कहा पीएम मोदी और रक्षा मंत्री ने

हाल ही में 15 अगस्त को लाल किला के प्राचीर से प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था, “आज मैं युवा वैज्ञानिकों, प्रतिभाशाली युवाओं, इंजीनियरों, पेशेवरों और सरकार के सभी विभागों से आग्रह करता हूं कि हमारे पास अपने स्वयं के मेड इन इंडिया लड़ाकू विमानों के लिए जेट इंजन होने चाहिए।

वहीं उसके बाद 22 अगस्त को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एलान किया, “आज हम पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान बनाने की दिशा में भी आगे कदम बढ़ा चुके हैं। हम एयरक्राफ्ट का इंजन भी भारत में ही बनाने की तरफ बढ़ चुके हैं। हम लोग फ्रेंच कंपनी सफरान के साथ इंजन मेकिंग का काम भारत में शुरू करने जा रहे हैं।”

AMCA Engine Deal: 100 फीसदी टेक्नोलॉजी ट्रांसफर

अब तक भारत जिन लड़ाकू विमानों का निर्माण कर रहा था, उनके लिए विदेशी इंजन पर निर्भर रहना पड़ता था। तेजस विमान में इस्तेमाल होने वाले इंजन अमेरिका की जनरल इलेक्ट्रिक कंपनी से खरीदे जाते हैं। वहीं रूस से मिले मिग और सुखोई के इंजन भी वर्षों से भारतीय वायुसेना की रीढ़ बने हुए हैं। लेकिन इस बार भारत सिर्फ इंजन (AMCA Engine Deal) बनाएगा ही नहीं बल्कि उसका मालिक भी होगा। यह पहली बार होगा जब भारत के पास दुनिया के सबसे एडवांस्ड जेट इंजनों में से एक का IP होगा। यह ऐसा अधिकार है जो आज तक भारत को किसी भी रक्षा सौदे में नहीं मिला है। सफरान के साथ इंजन डील में 100 फीसदी टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, भारत का IP राइट्स पर पूरा मालिकाना हक़, और AMCA के लिए हाई-थ्रस्ट इंजन का डेवलपमेंट शामिल है।

इस साझेदारी में सफरान और भारत की हिंदुस्तान एयरनॉटिक्स लिमिटेड मुख्य भूमिका निभाएगी। इसके साथ ही डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन का गैस टर्बाइन रिसर्च एस्टैब्लिशमेंट (GTRE) भी इस प्रोजेक्ट में शामिल होगा।

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AMCA Engine Deal: इंजन तकनीक में भारत की सबसे बड़ी छलांग

24 टन कैटेगरी वाले एएमसीए प्रोजेक्ट (AMCA Engine Deal) को भारत के सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स में गिना जा रहा है। यह एक स्टील्थ यानी अदृश्य क्षमता वाला लड़ाकू विमान होगा, जिसमें दो इंजन होंगे। स्टील्थ होने की वजह से इसे रडार पर पकड़ना बेहद मुश्किल होगा। लेकिन ऐसे विमानों की असली ताकत उनके इंजन में छुपी होती है। अब तक भारत अपनी लड़ाकू विमानों के लिए खुद का इंजन नहीं बना पाया था। कई बार कोशिशें हुईं, डीआरडीओ ने कावेरी भी बनाया, लेकिन तकनीकी बाधाओं, खासकर थ्रस्ट-टू-वेट रेश्यो जैसी दिक्कतों के चलते इंजन डेवलप नहीं हो पाया।

यही वजह है कि सफरान के साथ हुआ यह करार केवल एक तकनीकी सहयोग नहीं, बल्कि भारत की रणनीतिक स्थिति को भी मजबूत करेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि जब भारत को इंजन के डिजाइन, निर्माण और उत्पादन की पूरी तकनीक मिल जाएगी और उसके सारे अधिकार भारत के पास होंगे, तो यह आत्मनिर्भर भारत अभियान के सबसे बड़े मील के पत्थरों में गिना जाएगा।

रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह डील भारत के “मेक इन इंडिया” पहल को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी। इसके लिए भारत में एक पूरी इंजन बनाने की व्यवस्था तैयार की जाएगी, जिसमें निजी कंपनियों को भी मौका मिलेगा। इससे नौकरियों का सृजन होगा और देश की अर्थव्यवस्था को भी फायदा पहुंचेगा।”

वहीं इसका सीधा असर भारत के डिफेंस एक्सपोर्ट्स पर पड़ेगा क्योंकि भविष्य में भारत इस इंजन को अन्य देशों को बेच भी सकता है, और यह सिर्फ अपने विमानों में इस्तेमाल करने तक सीमित नहीं रहेगा।

AMCA Engine Deal: पहली बार डुअल इंजन इकोसिस्टम

स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस (AMCA Engine Deal) के लिए अभी तक भारत सिर्फ अमेरिकी जनरल इलेक्ट्रिक के इंजनों पर निर्भर था। तेजस एमके-2 और नौसेना के ट्विन-इंजन डेक-बेस्ड (TEDBF) नेवी फाइटर के लिए जीई का F414 इंजन इस्तेमाल किया जाना है। लेकिन अब सफरान के साथ मिलकर एएमसीए के लिए नया इंजन तैयार किया जाएगा। इसका मतलब है कि भारत के पास पहली बार एक साथ दो इंजन इकोसिस्टम होंगे।

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सफरान पहले से ही राफेल इंजन (M88) और हेलिकॉप्टर इंजनों में भारत का पार्टनर है। इस डील के बाद भारत के दो अलग-अलग इंजन इकोसिस्टम तेजस/एएमसीए (सफरान वाला) और GE F414 (तेजस एमके2) एकसाथ तैयार हो रहे हैं। यह डुअल इंजन इकोसिस्टम भारत को दुनिया के चुनिंदा देशों की श्रेणी में खड़ा करेगा जहां एक साथ पश्चिमी और स्वदेशी इंजन प्रोग्राम समानांतर रूप से आगे बढ़ेंगे।

AMCA Engine Deal: सफरान और जीई में कॉम्पिटिशन?

जीई के साथ तेजस एमके-2 के लिए F414 इंजन देने के लेकर बातचीत चल रही है। जिन्हें एचएएल और जीई दोनों कंपनियां मिल कर भारत में बनाएंगी। हालांकि हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स और जीई ने भारत में 98 किलोन्यूटन थ्रस्ट कैटेगरी में जीई-एफ414 इंजन के को-प्रोडक्शन के लिए अभी तक अंतिम सौदा नहीं हुआ है, जिसमें लगभग 1.5 बिलियन डॉलर में 80 फीसदी टेक्नोलॉजी ट्रांसफर होगा।

खास बात यह होगी कि सफरान (AMCA Engine Deal) का 120 किलोन्यूटन (kN) थ्रस्ट वाला इंजन होगा जबकि जीई का F414 इंजन 98 किलोन्यूटन थ्रस्ट का होगा। सफरान का इंजन AMCA के दूसरे चरण (Mk-2) के लिए डिजाइन किया जाएगा। इस इंजन का विकास 10 साल में पूरा होने की उम्मीद है, और यह पूरी तरह से नई डिज़ाइन पर आधारित होगा, जो राफेल के M88 इंजन से अलग होगा। यह इंजन AMCA को सुपरक्रूज और बेहतर थ्रस्ट-टू-वेट रेश्यो देगा।

जीई का F414 इंजन तेजस मार्क-2 और AMCA के पहले चरण (Mk-1) के लिए चुना गया है। यह इंजन एफ/ए-18 सुपर हॉर्नेट में इस्तेमाल होता है। जीई ने भारत को 80 फीसदी टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की सहमति दी है, जिसमें सिंगल क्रिस्टल ब्लेड और सेरामिक मैट्रिक्स कॉम्पोनेंट्स जैसे महत्वपूर्ण तकनीकी पहलू शामिल हैं। हालांकि, इस डील में कुछ संवेदनशील तकनीकों तक पहुंच नहीं है, जिसमें अमेरिकी निर्यात नियमों (ITAR) आड़े आ रहे हैं।

मौजूदा समय-सीमा के अनुसार, अपेक्षित थ्रस्ट-टू-वेट रेश्यो, एडवांस सेंसर फ्यूजन और इंटरनल वेपन बे और “सर्पेंट-टाइन एयर-इन्टेक” जैसी स्टील्थ सुविधाओं के साथ AMCA 2035 तक ही प्रोडक्शन के लिए तैयार हो पाएगा।

बता दें कि भारतीय वायुसेना ने एएमसीए के सात स्क्वाड्रन (126 जेट) शामिल करने की योजना बनाई है, जिनमें से पहले दो स्क्वाड्रन अमेरिकी जीई-एफ414 इंजन से ऑपरेट होंगे और अगले पांच स्क्वाड्रन 120 किलोन्यूटन इंजन से ऑपरेट होंगे।

सिर्फ डिफेंस नहीं, स्पेस और सिविल एविएशन पर भी असर

सफरान (AMCA Engine Deal) सिर्फ लड़ाकू विमान इंजन बनाने वाली कंपनी नहीं है। वह स्पेस प्रोप्ल और सिविल एविएशन सेक्टर में भी अग्रणी है। कंपनी पहले से ही इसरो के साथ कई प्रोजेक्ट्स में सहयोग कर चुकी है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि एएमसीए इंजन प्रोजेक्ट का असर भविष्य में भारत के स्पेस प्रोग्राम और डोमेस्टिक पैसेंजर्स एयरक्राफ्ट के विकास पर भी पड़ेगा।

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इसका मतलब है कि भारत सिर्फ लड़ाकू विमान इंजन बनाने तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि आने वाले सालों में सिविल एयरक्राफ्ट और स्पेस एयरक्राफ्ट के लिए भी एडवांस इंजन डेवलप कर सकेगा।

फ्रांस क्यों हुआ तैयार?

अब सवाल उठता है कि फ्रांस ने इतनी संवेदनशील तकनीक (AMCA Engine Deal) भारत के साथ साझा करने का फैसला क्यों लिया। रक्षा मामलों के जानकारों का कहना है, फ्रांस भारत को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन का सबसे बड़ा संतुलनकारी साझेदार मानता है। चीन की बढ़ती ताकत को रोकने के लिए पेरिस और नई दिल्ली के बीच रणनीतिक सहयोग लगातार बढ़ रहा है। यही वजह है कि पेरिस ने भारत को सिर्फ ग्राहक मानने के बजाय एक असली साझेदार का दर्जा दिया है। पहले राफेल डील और अब AMCA इंजन डीलके जरिए फ्रांस, भारत को इंडो-पैसिफिक में चीन को बैलेंस करने वाले देश के रूप में देख रहा है।

प्रधानमंत्री कार्यालय की सीधी नजर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने पिछले एक दशक में रक्षा उत्पादन पर लगातार ध्यान दिया है। तेजस विमान की भारी संख्या में खरीद, प्रचंड हेलिकॉप्टरों का बेड़ा, और ब्रह्मोस जैसी मिसाइलों के निर्यात ने भारत को रक्षा उत्पादन में नया आत्मविश्वास दिया है। अब एएमसीए इंजन प्रोजेक्ट में मिली यह सफलता प्रधानमंत्री कार्यालय की सीधी निगरानी में आगे बढ़ रही है। यही कारण है कि पिछले महीने प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा ने भी एचएएल की सुविधाओं का दौरा किया और तेजस प्रोजेक्ट की स्थिति का जायजा लिया।

584 अरब का प्रोजेक्ट, खुलेंगी निर्यात की संभावनाएं

सूत्रों का कहना है कि इस प्रोजेक्ट की लागत करीब सात बिलियन डॉलर यानी 584 अरब रुपये के आसपास मानी जा रही है। इस लागत में इंजन का डिजाइन, परीक्षण, उत्पादन और पूरी सप्लाई चेन शामिल होगी। लेकिन इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि एक बार तकनीक भारत के पास आने के बाद देश स्वतंत्र रूप से इसका इस्तेमाल कर सकेगा। भारत चाहे तो भविष्य में इस इंजन को निर्यात भी कर सकेगा। अभी तक भारत हथियार और मिसाइलें निर्यात कर रहा था, लेकिन इंजन जैसे हाई-टेक सिस्टम का निर्यात एक नए युग की शुरुआत होगी।

भारत ने पिछले एक दशक में रक्षा निर्यात के क्षेत्र में जबरदस्त प्रगति की है। 2013-14 में जहां यह आंकड़ा सिर्फ 686 करोड़ रुपये था, वहीं 2024-25 में यह 23,000 करोड़ रुपये से भी ऊपर पहुंच गया। सरकार ने 2029 तक इसे 50,000 करोड़ तक ले जाने का लक्ष्य रखा है।

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हरेंद्र चौधरी
हरेंद्र चौधरीhttp://harendra@rakshasamachar.com
हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवादों, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं। 📍 Location: New Delhi, in 🎯 Area of Expertise: Defence, Diplomacy, National Security

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