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IAF World Record: 32,000 फीट की ऊंचाई से जंप कर वायुसेना ने ‘अनजाने’ में बना दिया वर्ल्ड रिकॉर्ड! DRDO के मिलिट्री पैराशूट से लगाई थी छलांग

जंप के बाद विंग कमांडर विशाल लखेश को अहसास हुआ कि अभी तक किसी भी देश ने 30 हजार फीट की ऊंचाई पर मिलिट्री पैराशूट के जरिए जंप नहीं किया है। यहां तक कि भारतीय सेनाओं में भी इतनी उंचाई से जंप करने का कोई रिकॉर्ड नहीं है...

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📍नई दिल्ली | 6 Nov, 2025, 8:00 AM

IAF World Record: वायुसेना और डीआरडीओ ने पिछले दिनों कुछ ऐसा कारनामा कर दिया जिसकी खुद उन्हें भी उम्मीद नहीं थी। 15 अक्टूबर को भारतीय वायुसेना ने 32,000 फीट की ऊंचाई से सफलतापूर्वक मिलिट्री पैराशूट से छलांग लगाई थी। इस खास मिलिट्री कॉम्बैट पैराशूट सिस्टम डीआरडीओ ने स्वदेश में ही तैयार किया गया है। लेकिन जंप के दौरान किसी को अंदाजा नहीं था कि यह वर्ल्ड रिकॉर्ड बन सकता है।

Military Combat Parachute System: डीआरडीओ ने रचा इतिहास, 32,000 फीट से किया स्वदेशी मिलिट्री कॉम्बैट पैराशूट का सफल परीक्षण

इस ऐतिहासिक मिशन का नेतृत्व भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर विशाल लखेश, वीएम (जी) ने किया। यह जंप भारत में ही बने स्वदेशी मिलिट्री कॉम्बैट पैराशूट सिस्टम (MCPS) का इस्तेमाल करते हुए की गई थी। 32,000 फीट की ऊंचाई से भारतीय वायुसेना के टेस्ट जम्पर्स ने इस पैराशूट के जरिए ऊंचाई से फ्रीफॉल जम्प किया था। उस समय किसी को अंदाजा नहीं था कि यह जंप वर्ल्ड रिकॉर्ड बनने जा रही है।

जंप के बाद विंग कमांडर विशाल लखेश को अहसास हुआ कि अभी तक किसी भी देश ने 30 हजार फीट की ऊंचाई पर मिलिट्री पैराशूट के जरिए जंप नहीं किया है। यहां तक कि भारतीय सेनाओं में भी इतनी उंचाई से जंप करने का कोई रिकॉर्ड नहीं है।

IAF World Record: कैसे बना यह ऐतिहासिक मिशन

इस हाई-ऑल्टिट्यूड जंप को विशेष परिस्थितियों में अंजाम दिया गया था। वायुसेना के एक विशेष विमान से 32,000 फीट की ऊंचाई पर से टीम ने छलांग लगाई। यह जंप किसी “स्काइडाइविंग रिकॉर्ड” के लिए नहीं थी बल्कि यह एक कॉम्बैट फ्रीफॉल मिशन था, जिसे युद्ध जैसी परिस्थितियों में टेस्ट के तौर पर डिजाइन किया गया था। पैराशूट को 30,000 फीट की ऊंचाई पर खोला गया, जो अब तक का सबसे ऊंचा मिलिट्री पैराशूट डिप्लॉयमेंट माना जा रहा है।

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Highest Military Parachute Deployment
Data From Altimeters

इस मिशन में तीन अनुभवी टेस्ट जम्पर शामिल थे, विंग कमांडर विशाल लखेश, मास्टर वारंट ऑफिसर आरजे सिंह और विवेक तिवारी। यह कॉम्बैट फ्रीफॉल जंप था, जिसमें 150 किलो लोड (सैनिक+गियर) के साथ 40 किमी ग्लाइड रेंज और जीपीएस/नाविक नेविगेशन था। तीनों ने सुरक्षित लैंडिंग की और मिशन को 100 फीसदी सफलता के साथ पूरा किया।

वहीं अब विंग कमांडर विशाल लखेश ने रक्षा मंत्रालय को पत्र लिखकर इस उपलब्धि को वर्ल्ड रिकॉर्ड के तौर पर दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू करने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि “भारत अब दुनिया का पहला देश है जिसने 30,000 फीट पर लाइव मैनड मिलिट्री पैराशूट डिप्लॉयमेंट किया है।” इस रिकॉर्ड की पुष्टि के लिए डीआरडीओ को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स और वर्ल्ड एयर स्पोर्ट्स फेडरेशन (एफएआई) को तकनीकी डेटा, फ्लाइट लॉग और वीडियो सबूत सौंपने होंगे।

क्या है मिलिट्री कॉम्बैट पैराशूट सिस्टम

यह पैराशूट सिस्टम डीआरडीओ की दो प्रमुख प्रयोगशालाओं आगरा की एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट और बेंगलुरु की डिफेंस बायोइंजीनियरिंग एंड इलेक्ट्रोमेडिकल लेबोरेटरी ने मिलकर डेवलप किया है।

यह सिस्टम रैम-एयर कैनोपी डिजाइन पर बेस्ड है, जो इसे हवा में बहुत अधिक दूरी तय करने की क्षमता देता है। यह पैराशूट जवान और उसके इक्विपमेंट सहित लगभग 150 किलो वजन संभाल सकता है और लगभग 4 से 6 मीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से नीचे उतरता है।

इसमें ऑक्सीजन सिस्टम, जीपीएस नेविगेशन, और -45°C तक के तापमान में काम करने की क्षमता है। सिस्टम को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह सैनिकों को दुश्मन की सीमा के अंदर 40 किलोमीटर तक ग्लाइड करने की क्षमता देता है, यानी वे बिना दुश्मन के रडार में आए दूर तक प्रवेश कर सकते हैं।

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3,000 से 6,000 फीट की ऊंचाई पर खुलते हैं पैराशूट

दुनिया के अधिकांश देशों की सेनाएं हेलो (हाई एल्टीट्यूड लो ओपनिंग) और हाहो (हाई एल्टीट्यूड हाई ओपनिंग) तकनीक का इस्तेमाल करती हैं। आमतौर पर, सैनिक 25,000 से 35,000 फीट की ऊंचाई से जंप करते हैं, लेकिन पैराशूट को केवल 3,000 से 6,000 फीट की ऊंचाई पर खोला जाता है ताकि दुश्मन के रडार से बचा जा सके।

लेकिन भारत का यह मिशन अलग है, इसमें पैराशूट को 30,000 फीट पर खोला गया, जो अब तक किसी भी देश ने नहीं किया। इस ऊंचाई पर हवा बहुत पतली होती है, तापमान -45°C तक गिर जाता है और ऑक्सीजन की मात्रा बेहद कम हो जाती है। ऐसे में पैराशूट का स्थिर खुलना और सुरक्षित रूप से नीचे आना एक बहुत बड़ी तकनीकी चुनौती थी। डीआरडीओ ने इसके लिए एडवांस ऑक्सीजन प्री-ब्रीदर सिस्टम बनाया है जो 20,000 फीट से ऊपर जंपर को 30 मिनट तक ऑक्सीजन देता है।

साथ ही, एमसीपीएस पैराशूट में एक खास डिजिटल रेडियो फ्रीक्वेंसी मेमोरी तकनीक लगाई गई है, जो सिग्नल इंटरफेरेंस को कम करती है और हवा में स्थिरता बनाए रखती है। वहीं, बेंगलुरु की डिफेंस बायोइंजीनियरिंग ने बायो-सूट्स बनाया है, जो पैरा जंपर को ठंड और “डी-कंप्रेशन” जैसी समस्याओं से बचाते हैं।

IAF World Record: ये हैं रिकॉर्ड

अमेरिकी वायुसेना के जो किटिंगर ने 1960 में 102,800 फीट की ऊंचाई से छलांग लगाई थी, लेकिन उनका पैराशूट लगभग 18,000 फीट पर खुला था। इसी तरह 2014 में एलन यूस्टेस और 2012 में फेलिक्स बॉमगार्टनर ने भी हाई एल्टीट्यूड से छलांग लगाई थी, लेकिन उनकी डिप्लॉयमेंट 8,000 से 18,000 फीट के बीच हुई थी।

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  • हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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