📍नई दिल्ली | 25 Oct, 2025, 3:18 PM
Astra Mk3 Gandiva missile: आने वाले कुछ ही सालों में भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता में जबरदस्त बढ़ोतरी होने वाली है। डीआरडीओ अब देश की नई पीढ़ी की एयर-टू-एयर मिसाइल अस्त्र एमके-3 गांडीव तैयार कर रहा है। यह मिसाइल 350 किलोमीटर की दूरी से भी दुश्मन के लक्ष्य को नष्ट करने में सक्षम होगी। यह मिसाइल 2030 तक भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल हो सकती है।
इस मिसाइल को पूरी तरह भारत में मेक इन इंडिया पहल के तहत डेवलप किया जा रहा है। इसका बड़े पैमाने पर उत्पादन भारत डायनेमिक्स लिमिटेड द्वारा किया जाएगा, लेकिन उससे पहले इसका ट्रायल और फाइनल अप्रूवल 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
Astra Mk3 Gandiva missile: अस्त्र एमके-3 की तकनीक और क्षमता
गांडीव मिसाइल बियॉन्ड विजुअल रेंज कैटेगरी की है। यानी यह ऐसे लक्ष्य को मार सकती है, जो पायलट की आंखों से दिखाई नहीं देता और सैकड़ों किलोमीटर दूर होता है। विमान के रडार और सेंसर सिस्टम की मदद से पायलट टारगेट को लॉक करता है और मिसाइल को लॉन्च करता है।
यह मिसाइल लगभग 220 किलोग्राम वजनी और चार मीटर लंबी है। इसमें दिन और रात दोनों समय हमले की क्षमता है। मिसाइल को इनर्शियल गाइडेंस सिस्टम और एक्टिव रडार होमिंग से लैस किया गया है, जिससे यह किसी भी तेजी से चलते हुए टारगेट पर सटीक वार कर सकती है।
अस्त्र एमके-3 का सबसे बड़ा फीचर इसका 350 किलोमीटर तक का रेंज है। इतनी लंबी दूरी से वार करने की क्षमता दुनिया की कुछ ही मिसाइलों में होती है। इसकी ताकत का मुख्य कारण इसका एडवांस इंजन है, जिसे सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट तकनीक कहा जाता है।
इस तकनीक की खासियत यह है कि यह हवा में मौजूद ऑक्सीजन का उपयोग करती है, जिससे मिसाइल को अतिरिक्त ऑक्सीडाइजर की जरूरत नहीं होती। इससे वजन हल्का रहता है और मिसाइल की रफ्तार और दूरी दोनों बढ़ जाती हैं। इस तकनीक से मिसाइल को बहुत अधिक ऊंचाई पर और तेज गति से उड़ने की क्षमता मिलती है।
Astra Mk3 Gandiva missile: मिसाइल दागने के बाद बदल सकती है दिशा
रिपोर्ट के अनुसार, डीआरडीओ इस मिसाइल को खास तौर पर उन हालात के लिए डेवलप कर रहा है, जहां भारतीय वायुसेना के पायलटों को दुश्मन के एयरबोर्न वॉर्निंग सिस्टम और मिड-एयर रिफ्यूलिंग टैंकरों को निशाना बनाना होगा। इस तरह के टारगेट आमतौर पर वायु क्षेत्र की अंदर में होते हैं और सीधे हमले के लिए मुश्किल माने जाते हैं।
इस मिसाइल में लगने वाला गैलियम नाइट्राइड आधारित एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड अरे रडार सीकर इसे और भी सटीक बनाता है। एईएसए तकनीक के कारण यह मिसाइल इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग से बची रहती है और लॉक-ऑन-आफ्टर-लॉन्च क्षमता से लैस होती है। यानी पायलट मिसाइल दागने के बाद दिशा बदल सकता है और मिसाइल टारगेट को अपने रडार से ट्रैक करती रहेगी।
Astra Mk3 Gandiva missile: मीटियोर को करेगी रिप्लेस!
अस्त्र मिसाइल कार्यक्रम भारत की रक्षा तकनीक में आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन चुका है। इसकी पहली पीढ़ी की मिसाइलें, अस्त्र एमके-1 और एमके-2, पहले ही भारतीय वायुसेना में शामिल की जा चुकी हैं। इन मिसाइलों का निर्माण भी डीआरडीओ और बीडीएल ने मिलकर किया था।
एमके-3 संस्करण यानी गांडीव इस श्रृंखला का सबसे एडवांस मॉडल होगा। इसकी रेंज, रफ्तार और सटीक वार, तीनों पिछले वर्जन से कहीं अधिक होंगी। एमके-3 आने के बाद भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल होगा जो खुद लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलें बनाते हैं। अभी भारत के पास यूरोपीय संघ (एमबीडीए) की बनाई मीटियोर बियोंड विजुअल रेंज एयर टू एयर मिसाइल है, जो यूरोफाइटर टाइफून, राफेल और ग्रिपेन जैसे लड़ाकू विमानों पर तैनात है। गांडीव के बनने के बाद भारत की मीटियोर से आयात निर्भरता कम होगी।
रिपोर्ट के अनुसार, इस मिसाइल का निर्माण चरणबद्ध तरीके से होगा। पहले इसके इंजनों और गाइडेंस सिस्टम के परीक्षण किए जाएंगे। इसके बाद भारतीय वायुसेना के सुखोई-30 एमकेआई और तेजस जैसे विमानों पर इसके ट्रायल किए जाएंगे।
भारत ने राफेल डील के साथ कुछ मीटियोर मिसाइलें भी खरीदी थीं। अनुमान के मुताबिक भारतीय वायुसेना के पास लगभग 250 मीटियोर मिसाइलें हैं। वहीं इन मिसाइल की कीमत लगभग 25 करोड़ रुपये या 3.2 मिलियन डॉलर प्रति युनिट है। इसके मुकाबले गांडीव की कीमत प्रति यूनिट 18 करोड़ रुपये के आसपास पड़ेगी। सूत्रों के मुताबिक एमके-3 प्रोग्राम में देरी के चलते भारत ने 26 राफेल मरीन डील के साथ अतिरिक्त मीटियोर भी ऑर्डर की हैं।
Astra Mk3 Gandiva missile: Astra MK3 Missile vs Meteor
भारत की अस्त्र एमके-3 (गांडीव) मिसाइल और यूरोप की मीटियोर मिसाइल दोनों ही आधुनिक बियॉन्ड-विजुअल-रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल हैं। दोनों में रैमजेट इंजन तकनीक है। अस्त्र एमके-3 की रेंज 350 किलोमीटर तक है, जो मीटियोर की लगभग 200 किलोमीटर रेंज से थोड़ी अधिक है। इसमें सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट तकनीक और एईएसए रडार सीकर लगे हैं, जिससे यह इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग से सुरक्षित रहती है।
अस्त्र एमके-3 की लंबाई लगभग 4 मीटर और वजन 220 किलोग्राम है, जबकि मीटियोर 3.7 मीटर लंबी और 190 किलोग्राम वजनी है। अस्त्र एमके-3 की गति मैक 4+ है, जो मीटियोर की मैक 4 के आसपास है।
दोनों मिसाइलें रैमजेट प्रोपल्सन पर आधारित हैं, लेकिन अस्त्र एमके-3 में सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट इंजन है, जो लगभग 18 फीसदी अधिक बर्न टाइम और 20 फीसदी ज्यादा थ्रस्ट देता है। इस वजह से इसका नो-एस्केप जोन यानी वह दायरा जिसमें लक्ष्य बच नहीं सकता, मीटियोर से बड़ा है।
रेंज के मामले में अस्त्र एमके-3 की मारक दूरी 300 से 350 किलोमीटर तक मानी जा रही है, जबकि मीटियोर की रेंज 200 किलोमीटर । वारहेड के मामले में दोनों मिसाइलें हाई-एक्सप्लोसिव फ्रैगमेंटेशन वारहेड का इस्तेमाल करती हैं। अस्त्र एमके-3 में लगभग 15 किलो, जबकि मीटियोर में करीब 20 किलो है।



