📍नई दिल्ली | 28 Oct, 2025, 1:35 PM
Ayni Air Base: भारत ने ताजिकिस्तान में स्थित अपने पहले विदेशी एयर बेस अयनी को खाली कर दिया है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारतीय वायुसेना ने वहां मौजूद अपने मिलिट्री स्टाफ और उपकरणों को हटा दिया है। लगभग 25 सालों की मौजूदगी के बाद भारत ने यह उठाया है। अयनी एयर बेस ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे से लगभग 15 किलोमीटर पश्चिम में स्थित है और भारत की रणनीतिक पहुंच का एक अहम हिस्सा माना जाता था।
Ayni Air Base: आईएएफ ने किया पूरा ऑपरेशन क्लोजडाउन
डिफेंस कैपिटल की रिपोर्ट के मुताबिक भारत सरकार के दो वरिष्ठ अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की कि भारतीय वायुसेना ने अयनी एयर बेस से पूरी तरह खाली कर दिया है। एक अधिकारी ने कहा, “हमने अयनी बेस खाली कर दिया है। अब वहां भारत की कोई सैन्य मौजूदगी नहीं है।”

सूत्रों के मुताबिक, ताजिकिस्तान सरकार ने कुछ महीनों पहले भारत से कहा था कि वह अपनी सैन्य गतिविधियां बंद करे और बेस से हट जाए। हालांकि इस फैसले की आधिकारिक वजह अभी तक सामने नहीं आई है।
बेअसर रही सुखोई जेट्स की पेशकश
भारत ने कुछ समय पहले ताजिकिस्तान को अपने कुछ सुखोई-30 लड़ाकू विमानों की पेशकश की थी। ये विमान हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड द्वारा नासिक स्थित प्लांट में बनाए गए थे। लेकिन सूत्रों के अनुसार, ताजिकिस्तान ने भारत के इस प्रस्ताव में खास रुचि नहीं दिखाई।
अयनी एयर बेस पर भारतीय मौजूदगी की शुरुआत 2000 के दशक की शुरुआत में हुई थी। भारत ने इस बेस को अपग्रेड करने और इसे ऑपरेशनल बनाने में लगभग 70 मिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश किया था। 2010 में यहां 3,200 मीटर लंबा रनवे तैयार किया गया, ताकि लड़ाकू विमानों की आवाजाही संभव हो सके।
भारत की रणनीतिक चौकी
अयनी एयर बेस को भारत की पहली विदेशी मिलिट्री आउटपोस्ट या सैन्य चौकी कहा जाता था। इस बेस से भारत को पाकिस्तान और अफगानिस्तान पर रणनीतिक नजर रखने में मदद मिलती थी। इसके अलावा यह बेस चीन की पश्चिमी सीमा (शिंजियांग प्रांत) के नजदीक होने के चलते भी सामरिक तौर से महत्वपूर्ण था।
2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ताजिकिस्तान की यात्रा के दौरान इस बेस को देखने की इच्छा जताई थी। बताया जाता है कि इसके बाद भारत ने यहां सीमित संख्या में सुखोई और मिग सीरीज के विमान रखे थे।
ऑपरेशन सिंदूर के समय एक्टिव नहीं था बेस
सूत्रों का कहना है कि मई 2025 में हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, जब भारत ने पाकिस्तान में आतंकवादी ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई की थी, उस समय अयनी बेस एक्टिव नहीं था। संभव है कि भारत ने बेस को पहले ही खाली कर दिया था।
यह वही बेस था, जिसने 2021 में अफगानिस्तान से भारतीय नागरिकों की निकासी में अहम भूमिका निभाई थी। काबुल से निकाले गए भारतीयों को सड़क मार्ग से ताजिकिस्तान की सीमा तक लाया गया था और फिर उन्हें अयनी से भारत एयरलिफ्ट किया गया था।
क्या रूस और चीन का दबाव?
कई कूटनीतिक सूत्रों का मानना है कि रूस और चीन के दबाव के चलते ताजिकिस्तान ने भारत से बेस खाली करने को कहा था। रूस ताजिकिस्तान में पहले से अपनी 201वीं मोटराइज्ड डिवीजन को तैनात रखता है, वह नहीं चाहता था कि कोई अन्य देश खासकर गैर-क्षेत्रीय शक्ति वहां सैन्य मौजूदगी बनाए रखे।
चीन के लिए भी भारत की मौजूदगी संवेदनशील मानी जाती थी, क्योंकि ताजिकिस्तान और चीन की सीमा करीब 470 किलोमीटर लंबी है। चीन ने पिछले कुछ वर्षों में ताजिकिस्तान में बुनियादी ढांचे और सुरक्षा सहयोग में भारी निवेश किया है।
जारी रहेंगे भारत-ताजिकिस्तान के रिश्ते
हालांकि भारत और ताजिकिस्तान दोनों ने कभी अयनी बेस को “सैन्य ठिकाना” होने का औपचारिक एलान नहीं किया था। दोनों देशों ने इसे हमेशा “लॉजिस्टिक और ट्रेनिंग फैसिलिटी” बताया।
भारत ने 2018 में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की ताजिकिस्तान यात्रा के दौरान इस बेस का जिक्र किया था। उस दौरे में उन्होंने ताजिक राष्ट्रपति इमोमाली रहमान से सुरक्षा और आतंकवाद-रोधी सहयोग पर चर्चा की थी।
इसके अलावा, भारत अब भी ताजिकिस्तान के फरखोर में एक मिलिट्री अस्पताल चला रहा है। यहीं अफगान नेता अहमद शाह मसूद का इलाज हुआ था। फरखोर एयर बेस ताजिकिस्तान के दक्षिणी हिस्से में फरखोर शहर के पास स्थित एक सैन्य हवाई अड्डा है। यह दुशांबे (राजधानी) से लगभग 130 किमी दक्षिण-पूर्व में है और अफगानिस्तान की सीमा के करीब है। यह भारत का पहला और एकमात्र पूर्ण विदेशी सैन्य बेस है, जिसे भारतीय वायुसेना और ताजिक एयर फोर्स संयुक्त तौर पर ऑपरेट करते हैं। यह बेस एशिया में भारत की रणनीतिक उपस्थिति देता है, जिससे अफगानिस्तान, पाकिस्तान और चीन के खिलाफ “स्ट्रैटेजिक डेप्थ” मिलती है।

अयनी क्यों था महत्वपूर्ण
अयनी एयर बेस की भौगोलिक स्थिति भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण थी। दुशांबे से पश्चिम की ओर स्थित यह एयरफील्ड भारत को मध्य एशिया तक पहुंच देता था। यह पाकिस्तान के लिए “बैकडोर प्रेशर पॉइंट” कहा जाता था। विश्लेषकों के अनुसार, भारत इस बेस के जरिए पाकिस्तान पर एक रणनीतिक दबाव बनाए रख सकता था, क्योंकि यह अफगानिस्तान के उत्तर से केवल कुछ सौ किलोमीटर की दूरी पर था।
अभी तक आधिकारिक बयान नहीं
अब तक भारत सरकार या ताजिकिस्तान सरकार की ओर से इस बारे में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। न ही भारतीय वायुसेना ने अयनी बेस से हटने की तारीख बताई है। हालांकि रक्षा सूत्रों ने पुष्टि की है कि वहां तैनात भारतीय कर्मियों और उपकरणों को पूरी तरह भारत वापस लाया जा चुका है।



