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Explainer: रूस-फ्रांस-अमेरिका और इजरायल से क्यों दूरी बना रहा भारत? क्या है देश का नया मिलिट्री डिप्लोमेसी प्लान?

इस बदलाव के तहत भारत ने उन देशों में अपनी सैन्य कूटनीतिक मौजूदगी कम करनी शुरू कर दी है, जो लंबे समय से उसके प्रमुख सप्लायर रहे हैं। इनमें रूस, फ्रांस, अमेरिका और इजरायल जैसे देश शामिल हैं...

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📍नई दिल्ली | 30 Mar, 2026, 4:24 PM

India Defence Attache Reshuffle: भारत ने अपनी मिलिट्री डिप्लोमेसी में एक बड़ा बदलाव करने की तैयारी शुरू कर दी है, जिसका सीधा असर कई देशों में देखने को मिलेगा। संसदीय समिति को सरकार ने बताया कि भारत अब विदेश में तैनात अपने डिफेंस अटैची नेटवर्क में बड़े बदलाव की तैयारी कर रहा है। अब भारत उन देशों में अपनी मौजूदगी कम कर रहा है, जहां से वह लंबे समय से हथियार खरीदता रहा है। वहीं, नई रणनीति के तहत उन देशों पर ध्यान बढ़ा रहा है जहां भारतीय हथियारों के खरीदार मौजूद हैं। यह बदलाव चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है और इसका मकसद रक्षा निर्यात को बढ़ाना है।

India Defence Attache Reshuffle: क्या होता है डिफेंस अटैची और क्या है इसकी भूमिका

डिफेंस अटैची किसी भी देश के दूतावास में तैनात एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी होता है। उसका काम दो देशों के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत करना, सैन्य सूचनाओं का आदान-प्रदान करना और रणनीतिक संवाद बनाए रखना होता है।

अब तक इन अधिकारियों की भूमिका मुख्य रूप से उन देशों में ज्यादा महत्वपूर्ण रही है, जहां से भारत हथियार और सैन्य तकनीक खरीदता था। लेकिन अब इस सिस्टम को बदला जा रहा है।

नई नीति के तहत डिफेंस अटैची सिर्फ सैन्य संपर्क अधिकारी नहीं रहेंगे, बल्कि वे भारत के रक्षा उद्योग का प्रतिनिधित्व भी करेंगे। (India Defence Attache Reshuffle)

सीडीएस ने क्यों लिया यह फैसला

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ अनिल चौहान ने डिफेंस अटैचियों में किए गए इस बदलाव पर संसदीय रक्षा स्थायी समिति के साथ बातचीत के दौरान चर्चा की। यह वही समिति है, जिसकी हालिया रिपोर्ट पिछले हफ्ते लोकसभा में पेश की गई थी।

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ अनिल चौहान ने संसदीय रक्षा समिति को बताया कि भारत अब एक एक्सपोर्टर की भूमिका निभाना चाहता है। इसके लिए जरूरी है कि सैन्य कूटनीति का फोकस भी बदला जाए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन देशों से भारत हथियार आयात करता था, वहां बड़ी संख्या में अटैची तैनात थे। अब उन्हें वहां से हटाकर उन देशों में भेजा जा रहा है जहां भारतीय रक्षा उत्पादों की मांग बनने की संभावना है।

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किन देशों में घट रही है तैनाती

इस बदलाव के तहत भारत ने उन देशों में अपनी सैन्य कूटनीतिक मौजूदगी कम करनी शुरू कर दी है, जो लंबे समय से उसके प्रमुख सप्लायर रहे हैं। इनमें रूस, फ्रांस, अमेरिका और इजरायल जैसे देश शामिल हैं।

पिछले वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि 2021 से 2025 के बीच भारत के कुल हथियार आयात का बड़ा हिस्सा इन्हीं देशों से आया था। रूस अकेले करीब 40 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ा सप्लायर रहा, जबकि फ्रांस और इजरायल का योगदान भी काफी बड़ा था।

अब इन देशों में अटैचियों की संख्या घटाई जा रही है, क्योंकि यहां भारत की भूमिका मुख्य रूप से खरीदार की रही है।

कहां बढ़ रही है भारत की मौजूदगी

दूसरी ओर, भारत अब उन क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है जहां रक्षा निर्यात की संभावनाएं ज्यादा हैं। दक्षिण-पूर्व एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के कई देशों में रक्षा जरूरतें तेजी से बढ़ रही हैं। इन देशों के पास सीमित बजट होता है, इसलिए वे ऐसे विकल्प तलाशते हैं जो सस्ते, भरोसेमंद और टिकाऊ हों।

भारत खुद को इसी रूप में पेश कर रहा है और डिफेंस अटैची नेटवर्क के जरिए इन देशों तक अपनी पहुंच मजबूत कर रहा है। (India Defence Attache Reshuffle)

तेजी से बढ़ता भारतीय रक्षा निर्यात

भारत का रक्षा निर्यात पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ा है। वित्त वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा 23,682 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले साल की तुलना में करीब 12 प्रतिशत ज्यादा है।

सरकार ने लक्ष्य रखा है कि 2029-30 तक इसे बढ़ाकर 50,000 करोड़ रुपये किया जाए।

इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए निर्यात को बढ़ावा देना जरूरी है, और इसी दिशा में डिफेंस अटैची नेटवर्क को फिर से व्यवस्थित किया जा रहा है।

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हाल ही में जारी सिपरी की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2016-20 से 2021-25 के बीच भारत के हथियार आयात में करीब 4 फीसदी की कमी आई है। इसके बावजूद भारत अब भी दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सैन्य उपकरण आयातक बना हुआ है और वैश्विक हथियार आयात में उसकी हिस्सेदारी लगभग 8.2 फीसदी है।

क्या-क्या बेच रहा है भारत

भारत अब दुनिया के करीब 100 देशों को रक्षा उपकरण निर्यात कर रहा है। इनमें मिसाइल, आर्टिलरी गन, रॉकेट, आर्मर्ड व्हीकल, ऑफशोर पेट्रोल वेसल, रडार, सर्विलांस सिस्टम और गोला-बारूद जैसे कई उत्पाद शामिल हैं।

इसमें निजी कंपनियों और सरकारी रक्षा उपक्रमों दोनों का योगदान है। निजी सेक्टर ने इस क्षेत्र में तेजी से अपनी जगह बनाई है। (India Defence Attache Reshuffle)

ब्रह्मोस की बढ़ रही मांग

भारत अब छोटे उपकरणों के साथ-साथ बड़े और एडवांस हथियार सिस्टम भी निर्यात करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ब्रह्मोस मिसाइल इसका प्रमुख उदाहरण है। फिलीपींस को इस मिसाइल सिस्टम की आपूर्ति पहले ही की जा चुकी है। इसके अलावा इंडोनेशिया के साथ भी इस मिसाइल को लेकर बातचीत चल रही है।

इसके साथ ही हल्के लड़ाकू विमान, एडवांस हेलीकॉप्टर और अन्य प्लेटफॉर्म भी निर्यात के लिए तैयार किए जा रहे हैं। (India Defence Attache Reshuffle)

क्या होगी डिफेंस अटैची की नई भूमिका

अब डिफेंस अटैची की जिम्मेदारी सिर्फ सैन्य संपर्क तक सीमित नहीं रहेगी। उन्हें यह निर्देश दिए गए हैं कि वे भारत के पूरे रक्षा उद्योग का प्रतिनिधित्व करें। इसमें सरकारी कंपनियों के साथ-साथ निजी कंपनियां भी शामिल हैं। इसका मतलब यह है कि अब अटैची विदेशी देशों में जाकर भारतीय रक्षा उत्पादों को बढ़ावा देने और नए बाजार तलाशने का काम करेंगे।

नीति सुधारों का असर

सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में रक्षा उत्पादन और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कई अहम सुधार किए हैं। लाइसेंसिंग प्रक्रिया को आसान बनाया गया है, कई कंपोनेंट्स को लाइसेंस की जरूरत से बाहर किया गया है और निर्यात अनुमति प्रक्रिया को सरल किया गया है। इन सुधारों के कारण रक्षा क्षेत्र में कंपनियों की संख्या बढ़ी है और निर्यात में तेजी आई है। (India Defence Attache Reshuffle)

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शिपबिल्डिंग सेक्टर पर जोर

भारत अब खुद को वैश्विक शिपबिल्डिंग हब के रूप में भी स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। इसके तहत अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को भारत में निवेश और तकनीकी सहयोग के लिए आमंत्रित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य समुद्री क्षमता को मजबूत करना और नए रोजगार के अवसर पैदा करना है।

हालांकि भारत अभी भी दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आयातक बना हुआ है, लेकिन इसमें धीरे-धीरे कमी आ रही है। इससे साफ है कि भारत अब आयात पर निर्भरता कम करने और निर्यात बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

चरणबद्ध तरीके से हो रहा बदलाव

डिफेंस अटैची नेटवर्क में यह बदलाव एक साथ नहीं किया गया है, बल्कि इसे चरणों में लागू किया गया है। पहले चरण में उन देशों से अटैचियों को हटाया गया जहां से आयात होता था, जबकि दूसरे चरण में नए बाजार वाले देशों में उनकी तैनाती बढ़ाई गई। इस पूरी प्रक्रिया का मकसद यह है कि भारत की सैन्य कूटनीति सीधे उसके आर्थिक और रणनीतिक लक्ष्यों को मजबूत करे। (India Defence Attache Reshuffle)

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    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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