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DRDO Pralay Missile Test: एक ही लॉन्चर से दो मिसाइलों का साल्वो लॉन्च सफल, भारतीय सेना के लिए गेम-चेंजर साबित होगी प्रलय

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📍नई दिल्ली | 31 Dec, 2025, 5:11 PM

DRDO Pralay Missile Test: 2025 के आखिरी दिन डीआरडीओ ने बड़ाा धमाका किया। डीआरडीओ ने बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए ओडिशा के तट के पास समुद्र में स्थित चांदीपुर इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से प्रलय मिसाइल का सफल साल्वो लॉन्च किया। इस टेस्ट की खास बात यह थी कि इसमें एक ही लॉन्चर से बेहद कम समय के अंतर में लगातार दो मिसाइलें दागी गईं और दोनों ने अपने तय टारगेट पर निशाना लगाया।

डीआरडीओ के अनुसार यह परीक्षण यूजर इवैल्यूएशन ट्रायल्स का हिस्सा था, यानी यह देखा जा रहा था कि मिसाइल एक्चुअल मिलिटरी सिचुएशन में कितनी भरोसेमंद है और सेना की जरूरतों पर कितनी खरी उतरती है। टेस्ट के दौरान दोनों मिसाइलें तय ट्रैजेक्टरी पर चलीं और सभी टेक्निकल स्टैंडर्ड्स को पूरा किया।

वहीं, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफल साल्वो लॉन्च पर डीआरडीओ, भारतीय सेना, भारतीय वायुसेना और देश के रक्षा उद्योग को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि यह सफलता मिसाइल सिस्टम की भरोसेमंद क्षमता को साबित करती है। डीआरडीओ प्रमुख और रक्षा अनुसंधान विभाग के सचिव डॉक्टर समीर वी कामत ने कहा कि यह उपलब्धि इस बात का संकेत है कि प्रलय मिसाइल अब उपयोगकर्ताओं के लिए जल्द ही तैनाती के लिए तैयार है। (DRDO Pralay Missile Test)

DRDO Pralay Missile Test:  क्या होता है साल्वो लॉन्च और क्यों है यह अहम

साल्वो लॉन्च का मतलब होता है एक ही सिस्टम से बहुत कम समय में एक से ज्यादा मिसाइलें दागना। आधुनिक युद्ध में इसकी जरूरत है। अगर किसी दुश्मन के पास एयर डिफेंस सिस्टम हो, तो एक साथ कई मिसाइलें दागकर उस डिफेंस को कन्फ्यूज किया जा सकता है। प्रलय मिसाइल का यह सफल साल्वो लॉन्च इस बात का संकेत है कि भारत अब इस तरह की एडवांस युद्ध क्षमता हासिल कर चुका है। (DRDO Pralay Missile Test)

चांदीपुर से समुद्र तक, हर सिस्टम ने किया काम

डीआरडीओ की ओर से बताया गया कि इस टेस्ट के दौरान इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज, चांदीपुर में तैनात ट्रैकिंग सिस्टम्स ने दोनों मिसाइलों की उड़ान को पूरी तरह मॉनिटर किया। मिसाइल के टर्मिनल फेज यानी आखिरी चरण की पुष्टि समुद्र में तैनात जहाजों पर लगे टेलीमेट्री सिस्टम्स के जरिए की गई।

इन सिस्टम्स ने यह कन्फर्म किया कि दोनों मिसाइलें अपने तय लक्ष्य बिंदु तक बिल्कुल सही तरीके से पहुंचीं और कोई भी तकनीकी गड़बड़ी सामने नहीं आई। (DRDO Pralay Missile Test)

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DRDO Pralay Missile Test: क्या है प्रलय मिसाइल

प्रलय भारत की स्वदेशी रूप से विकसित क्वासी-बैलिस्टिक सरफेस-टू-सरफेस मिसाइल है। यह मिसाइल दुश्मन के एयरबेस, रडार स्टेशन, कमांड एंड कंट्रोल सेंटर और अन्य हाई-वैल्यू टारगेट्स को बेहद सटीक तरीके से निशाना बना सकती है।

प्रलय मिसाइल को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह पारंपरिक यानी कन्वेंशनल वारहेड ले जाती है। इसका मकसद दुश्मन को भारी नुकसान पहुंचाना है। (DRDO Pralay Missile Test)

DRDO Pralay Missile Test
DRDO Pralay Missile Test

क्यों खास है प्रलय की क्वासी-बैलिस्टिक तकनीक

प्रलय मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत इसकी क्वासी-बैलिस्टिक ट्रैजेक्टरी है। जहां आम बैलिस्टिक मिसाइलें एक तय रास्ते पर उड़ती हैं, लेकिन प्रलय हवा में मैन्यूवर कर सकती है। इसका मतलब है कि यह रास्ता बदल सकती है और दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा दे सकती है।

आधुनिक युद्ध में जब एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम तेजी से डेवलप हो रहे हैं, तब ऐसी मैन्यूवर करने वाली मिसाइलें कहीं ज्यादा असरदार साबित होती हैं। (DRDO Pralay Missile Test)

समझें प्रलय की तकनीकी ताकत के बारे में

प्रलय मिसाइल सॉलिड प्रोपेलेंट रॉकेट मोटर पर आधारित है, जिससे यह लॉन्च के लिए फटाफट तैयार हो जाती है। इसकी रेंज करीब 150 किलोमीटर से लेकर 500 किलोमीटर तक मानी जाती है। यह थिएटर लेवल ऑपरेशंस के लिए बेहद उपयोगी है।

इस मिसाइल की रफ्तार टर्मिनल फेज में हाइपरसोनिक यानी मैक-5 से ज्यादा है। इतनी तेज रफ्तार की वजह से दुश्मन के लिए इसे रोक पाना बेहद मुश्किल हो जाता है। इसका गाइडेंस सिस्टम इतना एडवांस है कि यह 10 मीटर से भी कम की सटीकता से टारगेट को निशाना बना सकती है। (DRDO Pralay Missile Test)

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ले जा सकती है अलग-अलग तरह के वारहेड

प्रलय मिसाइल की एक और खास बात यह है कि यह अलग-अलग तरह के वारहेड ले जा सकती है। इसमें हाई एक्सप्लोसिव फ्रैग्मेंटेशन वारहेड, रनवे डिनायल सबम्यूनिशन और बंकर बस्टर जैसे विकल्प शामिल हैं। इससे सेना को अलग-अलग टारगेट के हिसाब से मिसाइल को कॉन्फिगर करने की सुविधा मिलती है।

यानी एयरबेस को अस्थायी रूप से बेकार करना हो, दुश्मन के कमांड सेंटर को तबाह करना हो या किसी रणनीतिक ठिकाने पर हमला करना हो, प्रलय हर स्थिति में कारगर साबित हो सकती है। (DRDO Pralay Missile Test)

DRDO Pralay Missile Test: रोड मोबाइल लॉन्चर से लॉन्च

प्रलय मिसाइल को रोड मोबाइल लॉन्चर से दागा जाता है। इसे हाई मोबिलिटी व्हीकल पर लगाया गया है, जिससे इसे आसानी से एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा सकता है। यह मिसाइल कैनिस्टराइज्ड सिस्टम में रहती है, जिससे इसे लंबे समय तक स्टोर किया जा सकता है और जरूरत पड़ने पर तुरंत लॉन्च किया जा सकता है।

इसका मतलब यह है कि युद्ध के समय दुश्मन को यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि मिसाइल कहां से दागी जाएगी। (DRDO Pralay Missile Test)

DRDO Pralay Missile Test: सेना और वायुसेना के लिए क्यों अहम

प्रलय मिसाइल को भारतीय थल सेना और भारतीय वायुसेना दोनों के लिए डेवलप किया गया है। थल सेना के लिए यह मिसाइल सीमाओं पर तैनात दुश्मन के ठिकानों को निशाना बनाने में मदद करेगी, जबकि वायुसेना के लिए यह एक अतिरिक्त सटीक स्ट्राइक ऑप्शन होगी। रक्षा सूत्रों के अनुसार, प्रलय को भारत की कन्वेंशनल डिटरेंस नीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है। यह मिसाइल बिना परमाणु हथियारों का इस्तेमाल किए दुश्मन को कड़ा संदेश देने में सक्षम है।

डिफेंस सूत्रों के मुताबिक, साल 2023 में भारतीय सेना के लिए एक पूरी रेजिमेंट के लिए करीब 250 प्रलय मिसाइलों का ऑर्डर अप्रूव किया गया था। इन मिसाइलों को एलएसी और एलओसी जैसे संवेदनशील इलाकों में तैनात किए जाने की योजना है। (DRDO Pralay Missile Test)

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वहीं, भारतीय वायु सेना ने भी प्रलय मिसाइल में रुचि दिखाई है। वर्ष 2022 में वायु सेना के लिए करीब 120 मिसाइलों का ऑर्डर दिया गया था। इस तरह थल सेना और वायु सेना दोनों के लिए कुल मिलाकर लगभग 370 मिसाइलों का ऑर्डर दिया गया है, जिसकी अनुमानित लागत करीब 7,500 करोड़ रुपये बताई जाती है।

DRDO Pralay Missile Test: इंडक्शन अब ज्यादा दूर नहीं

डिफेंस सूत्रों के अनुसार, 2025 के आखिर तक प्रलय मिसाइल के यूजर ट्रायल्स लगभग पूरे हो चुके हैं। जुलाई और दिसंबर में हुए दोनों बड़े परीक्षण पूरी तरह सफल रहे हैं। 31 दिसंबर को किया गया साल्वो लॉन्च इस बात का संकेत है कि मिसाइल सिस्टम अब ऑपरेशनल लेवल पर लगभग तैयार है। सूत्रों का कहना है कि अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो 2026 या 2027 में प्रलय मिसाइल की पहली रेजिमेंट पूरी तरह ऑपरेशनल हो सकती है। इसके इंडक्शन के साथ ही बिना न्यूक्लियर एस्केलेशन के जोखिम के भारत की कन्वेंशनल डिटरेंस क्षमता को बड़ा बल मिलेगा। (DRDO Pralay Missile Test)

DRDO Pralay Missile Test: डीआरडीओ की कई लैब्स जुड़ीं

इस मिसाइल के डेवलपमेंट में डीआरडीओ की कई प्रयोगशालाओं ने मिलकर काम किया है। हैदराबाद स्थित रिसर्च सेंटर इमारत के साथ-साथ डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लैबोरेटरी, एडवांस्ड सिस्टम्स लैबोरेटरी, हाई एनर्जी मटीरियल्स रिसर्च लैबोरेटरी और अन्य संस्थानों ने इसमें योगदान दिया।

इसके अलावा भारत डायनामिक्स लिमिटेड और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों ने इसके प्रोडक्शन और इंटीग्रेशन में अहम भूमिका निभाई है। (DRDO Pralay Missile Test)

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  • News Desk

    रक्षा समाचार न्यूज डेस्क भारत की अग्रणी हिंदी रक्षा समाचार टीम है, जो Indian Army, Navy, Air Force, DRDO, रक्षा उपकरण, युद्ध रणनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक खबरें पेश करती है। हम लाते हैं सटीक, सरल और अपडेटेड Defence News in Hindi। हमारा उद्देश्य है – "हर खबर, देश की रक्षा से जुड़ी।"

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