📍नई दिल्ली/हैदराबाद | 13 Feb, 2026, 12:33 PM
ASMI SMG: अर्धसैनिक बल असम राइफल्स ने हैदराबाद की कंपनी लोकेश मशींस लिमिटेड को 1013 ‘अस्मी’ कार्बाइन की सप्लाई का ऑर्डर दिया है। टेक्नो-कमर्शियल इवैल्यूएशन के बाद कंपनी सबसे कम बोली लगाने वाली यानी एल-1 (L1) के तौर पर चुनी गई। ‘अस्मी’ सब-मशीन गन (एसएमजी) पूरी तरह स्वदेशी डिजाइन, विकास और निर्माण (आईडीडीएम) कैटेगरी के तहत बनाया गया है। इससे देश में छोटे हथियारों के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को मजबूती मिलती है।
ASMI SMG: स्पेशल फोर्सेज को ‘अस्मी’ सब-मशीन गन
यह लोकेश मशींस लिमिटेड की यह दूसरी बड़ी सफलता है। इससे पहले 6 अप्रैल 2024 को कंपनी ने भारतीय सेना की स्पेशल फोर्सेज के लिए 550 ‘अस्मी’ सब-मशीन पिस्टल का ऑर्डर हासिल किया था। उस समय कंपनी ने कई बड़ी कंपनियों को पीछे छोड़ते हुए लगभग 4.6 करोड़ रुपये का कॉन्ट्रैक्ट जीता था। यह ‘इंसास’ राइफल के बाद स्वदेशी छोटे हथियारों का पहला बड़ा ऑर्डर माना गया था। (ASMI SMG)
क्या है ‘अस्मी’ कार्बाइन?
‘अस्मी’ 9×19 मिमी कैलिबर की कॉम्पैक्ट कार्बाइन है। इसे करीब एक दशक से भी ज्यादा समय से सेवा में रही ब्रिटिश डिजाइन की स्टर्लिंग कार्बाइनों की जगह लेने के उद्देश्य से तैयार किया गया। पुराने हथियारों को बदलने की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी।
इस हथियार को बेहद कम लागत पर तैयार किया गया है। इसकी अनुमानित कीमत प्रति यूनिट 50 हजार रुपये से कम बताई जाती है। कम कीमत और भरोसेमंद डिजाइन के कारण इसे भविष्य में निर्यात के लिए भी उपयुक्त माना जा रहा है। (ASMI SMG)
किसने किया डिजाइन?
‘अस्मी’ का डिजाइन भारतीय सेना के कर्नल प्रसाद बंसोड़ ने तैयार किया। पिछले 75 वर्षों में वे ऐसे सैन्य अधिकारी हैं जिन्होंने स्वयं हथियार डिजाइन किया। इसका विकास डीआरडीओ के तहत आने वाली पुणे स्थित आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (एआरडीई) में किया गया।
यह कार्बाइन लिमिटेड सीरीज प्रोडक्शन है और भारतीय सेना के अलावा एनएसजी, आईटीबीपी और बीएसएफ जैसी एजेंसियों को भी सीमित संख्या में दी जा चुकी है। (ASMI SMG)
क्यों है यह सौदा अहम?
असम राइफल्स पूर्वोत्तर क्षेत्र में तैनात देश का एक प्रमुख अर्धसैनिक बल है। वहां के दुर्गम इलाकों में हल्के और भरोसेमंद हथियारों की जरूरत होती है। ‘अस्मी’ कार्बाइन हल्की, कॉम्पैक्ट और नजदीकी मुकाबले में उपयोगी मानी जाती है। ऐसे इलाकों में इस तरह के हथियार होने से जवानों को फायदा मिलता है। वहीं, असम राइफल्स को अस्मी की सप्लाई इस बात का संकेत भी है कि स्वदेशी छोटे हथियारों पर सुरक्षा बलों का भरोसा बढ़ रहा है।
हाल ही में जिंदल डिफेंस ने ब्राजील की कंपनी टॉरस के साथ साझेदारी में टी-9 मशीन पिस्टल का भी ऑर्डर हासिल किया था। वह ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी के तहत भारत में निर्मित की जा रही है। इससे स्पष्ट है कि छोटे हथियारों के क्षेत्र में निजी कंपनियों की सक्रिय भागीदारी बढ़ रही है। (ASMI SMG)
मशीन गन भी बनाई
लोकेश मशीन टूल्स ने एआरडीई के साथ मिलकर 7.62×51 मिमी बेल्ट-फेड मीडियम मशीन गन (एमएमजी) भी विकसित की है। यह प्रति मिनट लगभग 800 राउंड फायर कर सकती है और इसकी प्रभावी मारक दूरी 1800 मीटर तक बताई जाती है। इसे जहाजों, बख्तरबंद वाहनों और हेलीकॉप्टर पर भी लगाया जा सकता है। (ASMI SMG)
कंपनी को अगस्त 2025 में 17.7 करोड़ रुपये का एक और ऑर्डर मिला था, जिसमें सेवा में मौजूद बेल्जियम मूल की मैग-58 मशीन गन के पुर्जों की सप्लाई शामिल थी। यह गन भारत में लाइसेंस के तहत निर्मित होती रही है।
सरकार लंबे समय से रक्षा क्षेत्र में विदेशी निर्भरता कम करने पर जोर दे रही है। छोटे हथियारों के क्षेत्र में पहले बड़े पैमाने पर आयात होता था। अब निजी उद्योग और अनुसंधान संस्थानों के सहयोग से स्वदेशी विकल्प सामने आ रहे हैं। (ASMI SMG)

