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Samudra Pradakshina: इतिहास रचने निकली तीनों सेनाओं की 10 महिला अफसर, स्वदेशी नौका IASV त्रिवेणी से लगाएंगी दुनिया का चक्कर

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘समुद्र प्रदक्षिणा’ को वर्चुअल माध्यम से हरी झंडी दिखाई। इस अभियान पर 10 महिला सैन्य अधिकारी स्वदेशी नौका त्रिवेणी पर सवार होकर निकलीं हैं, जो अगले 9 महीनों में दुनिया की पूरी परिक्रमा करेंगी...

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📍नई दिल्ली/मुंबई | 11 Sep, 2025, 10:18 PM

Samudra Pradakshina: भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज मुंबई के गेटवे ऑफ इंडिया से एक ऐतिहासिक अभियान को हरी झंडी दिखाई। यह अभियान दुनिया का पहला ट्राई-सर्विसेज महिला नौकायन अभियान है, जिसे ‘समुद्र प्रदक्षिणा’ नाम दिया गया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘समुद्र प्रदक्षिणा’ को वर्चुअल माध्यम से हरी झंडी दिखाई। इस अभियान पर 10 महिला सैन्य अधिकारी स्वदेशी नौका त्रिवेणी पर सवार होकर निकलीं हैं, जो अगले 9 महीनों में दुनिया की पूरी परिक्रमा करेंगी।

यह दुनिया का पहला ट्राई सर्विसेज (थल, जल और वायु सेना) महिला परिक्रमा नौकायन अभियान है। इससे पहले इसी वर्ष मई 2025 में “नाविका सागर परिक्रमा-II” अभियान भी पूरा हुआ, जिसमें दो बहादुर नौसेना अधिकारी लेफ्टिनेंट कमांडर दिलना के और लेफ्टिनेंट कमांडर रूपा ए ने डबल-हैंडेड मोड में दुनिया की परिक्रमा कर भारत का परचम लहराया।

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Samudra Pradakshina: नारी शक्ति और आत्मनिर्भर भारत का प्रतीक

रक्षा मंत्री ने साउथ ब्लॉक से अपने संबोधन में कहा कि ‘समुद्र प्रदक्षिणा’ केवल समुद्री यात्रा भर नहीं है, बल्कि यह एक आध्यात्मिक साधना और अनुशासन का अभियान है। उन्होंने कहा कि इस नौकायन यात्रा में 10 महिला अधिकारी नौ महीने तक समुद्र की लहरों से जूझते हुए दुनिया की परिक्रमा करेंगी। इस दौरान वे चुनौतियों का सामना करेंगी, लेकिन उनका दृढ़ निश्चय अंधकार को चीरते हुए विजय की ओर अग्रसर होगा। रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में इस अभियान को न केवल एक नौकायन यात्रा बल्कि “आध्यात्मिक साधना और अनुशासन की परख” बताया। उन्होंने कहा कि हमारी अधिकारी अनेक चुनौतियों का सामना करेंगी, लेकिन उनका दृढ़ संकल्प अंधेरे को चीरकर उजाला लेकर आएगा।

Samudra Pradakshina: Raksha Mantri Flags Off First Tri-Service All-Women Sailing Expedition from Mumbai

इस यात्रा में 10 महिला अधिकारी स्वदेशी रूप से निर्मित भारतीय सेना नौकायन पोत त्रिवेणी (IASV Triveni) पर सवार होकर लगभग 26,000 समुद्री मील की दूरी तय करेंगी। यह पोत पुडुचेरी में बना 50 फुट लंबा यॉट है, जिसे आत्मनिर्भर भारत का प्रतीक बताया गया है।

Samudra Pradakshina: दो बार पार करेंगी भूमध्य रेखा

दल पूर्वी मार्ग से यात्रा करेगा और नौ महीने के दौरान भूमध्य रेखा (Equator) दो बार पार करनी होगी। दुनिया के तीन बड़े अंतरीपों लीउविन, हॉर्न और गुड होप का चक्कर लगाएंगी। यह यात्रा ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, दक्षिण अफ्रीका और कनाडा के बंदरगाहों को छूते हुए मई 2026 में मुंबई लौटेगी। इस दौरान अभियान दल अटलांटिक, हिंद महासागर और प्रशांत महासागर सहित सभी बड़े महासागरों से गुजरेगा। सबसे कठिन चरण दिसंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच दक्षिणी महासागर और ड्रेक पैसेज से गुजरना होगा, जहां विशाल लहरें, बर्फीली हवाएं और अप्रत्याशित तूफान नाविक कौशल की अंतिम परीक्षा माने जाते हैं।

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इस अभियान के दौरान दल चार अंतरराष्ट्रीय बंदरगाहों फ्रेमेंटल (ऑस्ट्रेलिया), लिटलटन (न्यूजीलैंड), पोर्ट स्टेनली (कनाडा) और केप टाउन (दक्षिण अफ्रीका) का दौरा करेगा। इन यात्राओं में भारतीय संस्कृति और सैन्य शक्ति का परिचय कराया जाएगा।

Samudra Pradakshina: Raksha Mantri Flags Off First Tri-Service All-Women Sailing Expedition from Mumbai

Samudra Pradakshina: अभियान दल की कमान है इनके हाथ

अभियान दल की कमान लेफ्टिनेंट कर्नल अनुजा वरुडकर संभाल रही हैं, जबकि स्क्वाड्रन लीडर श्रद्धा पी राजू उप-अभियान नेता हैं। टीम में मेजर करमजीत कौर, मेजर ओमिता दलवी, कैप्टन प्राजक्ता पी निकम, कैप्टन दौली बुटोला, लेफ्टिनेंट कमांडर प्रियंका गुसाईं, विंग कमांडर विभा सिंह, स्क्वाड्रन लीडर अरुवी जयदेव और स्क्वाड्रन लीडर वैशाली भंडारी शामिल हैं।

इस दल ने पिछले तीन सालों में कठिन ट्रेनिंग ली है। शुरुआत छोटे जहाजों पर ऑफशोर अभियानों से हुई और फिर अक्टूबर 2024 में अधिग्रहित त्रिवेणी यॉट पर अभ्यास किया गया। इस वर्ष की शुरुआत में उन्होंने मुंबई से सेशेल्स तक एक अंतरराष्ट्रीय परीक्षण अभियान भी सफलतापूर्वक पूरा किया।

Samudra Pradakshina: Raksha Mantri Flags Off First Tri-Service All-Women Sailing Expedition from Mumbai

Samudra Pradakshina: भारत में बनी है IASV त्रिवेणी

पुडुचेरी में निर्मित 50 फुट लंबा पोत IASV त्रिवेणी में अत्याधुनिक नेविगेशन और सुरक्षा तकनीक लगाई गई है। यह अभियान वर्ल्ड सेलिंग स्पीड रिकॉर्ड काउंसिल के सभी मानकों का पालन करेगा। इसके अनुसार, सभी देशांतरों और भूमध्य रेखा को पार करना और बिना नहरों या मशीनरी की मदद के केवल पाल के सहारे 21,600 समुद्री मील से अधिक दूरी तय करनी होगी।

यात्रा के दौरान दल राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान के साथ मिलकर वैज्ञानिक अनुसंधान भी करेगा। इसमें सूक्ष्म प्लास्टिक का अध्ययन, समुद्री जीवन का डॉक्यूमेंटेशन और महासागरों के स्वास्थ्य पर जागरूकता अभियान शामिल हैं।

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नाविका सागर परिक्रमा (2017-18)

हालांकि यह पहली बार नहीं है जब इस तरह से नौका के जरिए पूरी दुनिया की यात्रा की गई हो। इससे पहले 2017 में भी भारतीय नौसेना ने नाविका सागर परिक्रमा मिशन शुरू किया था। यह मिशन पूरी तरह महिला दल द्वारा संचालित था और 1 अप्रैल 2017 को मुंबई से रवाना हुआ।

दल ने 254 दिनों में लगभग 29,000 नॉटिकल मील की दूरी तय की और 20 देशों के 14 बंदरगाहों पर रुका। इस यात्रा में लेफ्टिनेंट कमांडर वर्तिका जोशी के नेतृत्व में छह महिला अधिकारियों ने आईएनएसवी तारिणी पर सवार होकर तूफानों, ऊंची लहरों और कठिन मौसम का सामना किया। यह पहली बार था जब भारतीय महिला अधिकारियों ने विश्व परिक्रमा पूरी की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी वापसी पर स्वागत किया। इस मिशन को नारी शक्ति पुरस्कार और अन्य सम्मान भी मिले।

नाविका सागर परिक्रमा-II (2024-25)

वहीं, पहले मिशन की सफलता के बाद भारतीय नौसेना ने दिसंबर 2024 में नाविका सागर परिक्रमा-II की शुरुआत की। दो महिला नौसेना अधिकारियों लेफ्टिनेंट कमांडर दिलना के और लेफ्टिनेंट कमांडर रूपा ए ने INSV तारिणी दुनिया की परिक्रमा पूरी की। यह भारत का पहला सफल प्रयास था, जिसमें किसी दल ने डबल-हैंडेड मोड में परिक्रमा पूरी की।

यह यात्रा 2 अक्टूबर 2024 को गोवा से शुरू हुई थी और लगभग आठ महीने चली। इस दौरान INSV तारिणी ने 25,600 नॉटिकल मील की दूरी तय की। अभियान के दौरान दल ने चार बड़े अंतरराष्ट्रीय बंदरगाहों फ्रेमेंटल (ऑस्ट्रेलिया), लिटलटन (न्यूजीलैंड), पोर्ट स्टेनली (फॉकलैंड द्वीप) और केपटाउन (दक्षिण अफ्रीका) पर कॉल किया।

यह यात्रा बेहद कठिन रही। दक्षिणी महासागर और ड्रेक पैसेज जैसे खतरनाक जलक्षेत्र पार करते समय दल को तूफानों, खतरनाक ऊंची लहरों और बर्फीली हवाओं का सामना करना पड़ा। लंबी अवधि तक अकेलेपन और थकान से भी जूझना पड़ा। लेकिन इन दोनों अधिकारियों ने अपनी मानसिक और शारीरिक शक्ति से हर चुनौती को पार किया।

कैप्टन दिलीप डोंडे ने अकेले लगाया दुनिया का चक्कर

2009-10 में कैप्टन दिलीप डोंडे ने भारतीय नौसेना के लिए अकेले नाव से विश्व की परिक्रमा पूरी की। उनकी यह यात्रा न केवल भारत के समुद्री इतिहास में एक मील का पत्थर थी, बल्कि यह भी साबित करती थी कि भारतीय नाविक वैश्विक स्तर पर असाधारण साहस और कौशल का प्रदर्शन कर सकते हैं। डोंडे ने अपनी नौका, आईएनएसवी म्हादेई पर, चार महासागरों को पार करते हुए लगभग 21,600 समुद्री मील की दूरी तय की। इस दौरान उन्होंने तूफानों, तकनीकी चुनौतियों और अकेलेपन का सामना किया।

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कमांडर अभिलाष टॉमी ने बनाया रिकॉर्ड

2012-13 में कमांडर अभिलाष टॉमी ने दुनिया की परिक्रमा करता हुए बड़ी उपलब्धि हासिल की। उन्होंने बिना रुके और बिना किसी बाहरी सहायता के विश्व की परिक्रमा पूरी की, जो भारत के लिए पहली बार था। टॉमी ने भी आईएनएसवी म्हादेई पर 150 दिनों में 23,000 समुद्री मील की यात्रा पूरी की। उनकी यह यात्रा न केवल तकनीकी रूप से कठिन थी, बल्कि इसमें मानसिक और शारीरिक चुनौतियां भी थीं।

1969 में सर रॉबिन नॉक्स-जॉनस्टन ने रचा इतिहास

1969 में सर रॉबिन नॉक्स-जॉनस्टन ने इतिहास रचते हुए दुनिया के पहले व्यक्ति बने जिन्होंने बिना रुके और बिना मदद के एकल नौकायन से विश्व की परिक्रमा पूरी की। उनकी नौका सुहैली पर उन्होंने 312 दिन में 30,000 समुद्री मील की यात्रा पूरी की। इस दौरान उन्होंने तूफानों, उपकरण खराबी और अकेलेपन जैसी चुनौतियों का सामना किया। यह उपलब्धि संडे टाइम्स गोल्डन ग्लोब रेस का हिस्सा थी, जिसमें वे एकमात्र प्रतिभागी थे जो दौड़ पूरी कर सके। उनकी इस साहसिक यात्रा ने समुद्री नौकायन में नया रिकॉर्ड बनाया और दुनियाभर में नाविकों को प्रेरित किया।

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  • हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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