📍नई दिल्ली | 6 Dec, 2025, 7:05 PM
Pinaka Advance Rocket: डीआरडीओ ने नया पिनाका मार्क-4 गाइडेड रॉकेट डेवलप करना शुरू कर दिया है। इस रॉकेट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह 300 किलोमीटर तक सटीक वार कर सकता है। रक्षा सूत्रों के अनुसार, क्रूज मिसाइल की तरह इसकी सटीकता इतनी अधिक होगी कि इसका निशाना 3 मीटर के अंदर लगेगा।
लेकिन इसकी लागत क्रूज मिसाइल की तुलना में बेहद कम लगभग 25 फीसदी है। इसका मतलब है कि सेना इसे बड़ी संख्या में दागकर दुश्मन के एयर-डिफेंस को दबाव में ला सकती है। इसकी लागत ब्रह्मोस और प्रलय जैसे हथियारों की तुलना में बहुत कम होगी।
अब तक के ज्यादातर गाइडेड रॉकेट एक तय रास्ते पर उड़ते हैं। लेकिन पिनाका मार्क 4 में यह क्षमता होगी कि यह उड़ान के दौरान अपनी दिशा अचानक बदल सके। यानी दुश्मन के रडार को यह आसानी से धोखा दे सकेगा और उसे पकड़ना मुश्किल होगा। इस रॉकेट में हवा में ऊपर जाते समय और वापस नीचे आते समय दोनों ही चरणों में तेजी से मोड़ लेने की क्षमता होगी।
पारंपरिक गाइडेड रॉकेट आमतौर पर एक तय रास्ते पर चलते हैं। ये रॉकेट अपने सेंसरों जैसे एक्सेलरोमीटर, जाइरोस्कोप, जीपीएस और रडार की मदद से उसी रास्ते पर सीधा आगे बढ़ते रहते हैं। लेकिन पिनाका मार्क-4उड़ान के दौरान अचानक दिशा बदल सकता है। यह कभी ऊपर जाएगा, कभी दाएं मुड़ेगा, कभी बाएं, ऐसे तरीकों से दुश्मन का एयर डिफेंस समझ ही नहीं पाएगा कि रॉकेट का अगला कदम क्या होगा।
दुश्मन के रडार के लिए ऐसे रॉकेट को पकड़ना बहुत मुश्किल हो जाता है। इसी वजह से इसे बीच में रोक पाना भी लगभग नामुमकिन होता है। इसकी ये अनियमित हरकतें इसे सुरक्षा घेरों से बचाते हुए आसानी से अपने लक्ष्य तक पहुंचने में मदद करती हैं।
इस रॉकेट में एक एडवांस गाइडेंस सिस्टम लगाया जा रहा है, जो कई तकनीकों को मिलाकर काम करेगा। इसमें इनर्शियल नेविगेशन, जीपीएस, आईआरएनएसएस जैसे भारतीय सैटेलाइट सिस्टम और मिलिमीटर-वेव सीकर शामिल होंगे। यह सीकर युद्ध के दौरान रडार जैमिंग जैसी मुश्किल परिस्थितियों में भी सटीक निशाना लगाने में मदद करेगा। यह रॉकेट 10 मीटर के अंदर सटीकता से टारगेट को हिट कर सकेगा।
पिनाका मार्क-4 पर 250 किलोग्राम का वारहेड लगाया जा सकेगा। यह बहुत तेजी से दागा जा सकता है। एक मल्टी-बैरल लॉन्चर सिर्फ 44 सेकंड में 12 रॉकेट फायर कर देता है। इससे दुश्मन पर जबरदस्त दबाव बनाया जा सकता है।
डीआरडीओ इस रॉकेट का एक नेवल वेरिएंट भी बना रहा है, जिसे नौसेना तट के पास मौजूद दुश्मन जहाजों पर हमले के लिए इस्तेमाल कर सकेगी। इससे इंडियन नेवी की समुद्री सुरक्षा और भी मजबूत होगी। नौसेना 2030 तक इसे अपनी सिस्टम में शामिल करने की योजना बना रही है।


