📍नई दिल्ली | 30 Dec, 2025, 7:09 PM
MoD Defence Deal 2025: रक्षा मंत्रालय ने 2025 खत्म होते-होते भारतीय सेनाओं को खास तोहफा दिया। मंत्रालय ने 30 दिसंबर को 4,666 करोड़ रुपये की लागत से दो बड़े रक्षा कॉन्ट्रैक्ट पर दस्तखत किए। यह डील क्लोज क्वार्टर बैटल (सीक्यूबी) कार्बाइन और हेवी वेट टॉरपीडो की खरीद को लेकर हैं। नई दिल्ली स्थित साउथ ब्लॉक में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की मौजूदगी में इन सौदों पर दस्तखत किए गए।
इन समझौतों का सीधा फायदा भारतीय सेना और भारतीय नौसेना को मिलेगा। एक तरफ सेना और नौसेना के जवानों को मॉडर्न सीक्यूबी कार्बाइन मिलेंगी, तो दूसरी ओर नौसेना की कलवरी क्लास सबमरीनों की मारक क्षमता बढ़ाने के लिए हेवी वेट टॉरपीडो शामिल किए जाएंगे। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ये दोनों ही कॉन्ट्रैक्ट मौजूदा और आने वाले समय की सुरक्षा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए किए गए हैं।
MoD Defence Deal 2025: सीक्यूबी कार्बाइन के लिए 2,770 करोड़ की डील
इन दो कॉन्ट्रैक्ट में सबसे बड़ा हिस्सा सीक्यूबी कार्बाइन का है। रक्षा मंत्रालय ने 4.25 लाख से अधिक क्लोज क्वार्टर बैटल कार्बाइन और उनसे जुड़ी एक्सेसरीज की खरीद के लिए 2,770 करोड़ रुपये का कॉन्ट्रैक्ट साइन किया है। ये हथियार भारतीय सेना और भारतीय नौसेना दोनों को दिए जाएंगे।
इस प्रोजेक्ट के लिए दो भारतीय कंपनियों भारत फोर्ज और पीएलआर सिस्टम्स को चुना गया है। रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, यह सौदा आत्मनिर्भर भारत के तहत स्वदेशी हथियारों को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
भारत फोर्ज लिमिटेड, अपनी सब्सिडियरी कल्याणी स्ट्रैटेजिक सिस्टम्स के जरिए, और पीएलआर सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड, जो अदाणी डिफेंस और इजराइल वेपन इंडस्ट्रीज का जॉइंट वेंचर है। रक्षा समाचार ने पहले बताया था कि भारत फोर्ज लगभग 60 फीसदी यानी करीब 2.55 लाख कार्बाइन सप्लाई करेगा, जबकि पीएलआर सिस्टम्स करीब 40 फीसदी यानी लगभग 1.70 लाख यूनिट्स देगा। डिलीवरी की शुरुआत 2026 से होगी और ज्यादातर कार्बाइन 2028 तक सैनिकों तक पहुंच जाएंगी।
सीक्यूबी कार्बाइन को खासतौर पर नजदीकी लड़ाई यानी क्लोज कॉम्बैट के लिए डिजाइन किया गया है। इसका कॉम्पैक्ट डिजाइन, हल्के वजन और तेज फायरिंग रेट के चलते इसे शहरी इलाकों, आतंकवाद विरोधी अभियानों और सीमित जगहों पर होने वाले ऑपरेशनों में इस्तेमाल किया जा सकता है।
MoD Defence Deal 2025: क्या हैं CQB कार्बाइन की खूबियां
सीक्यूबी कार्बाइन 5.56×45 एमएम कैलिबर की हैं, जो इंसास और नैटो दोनों तरह की एम्युनिशन के साथ काम कर सकती हैं। इनका वजन करीब 3.3 किलो है और इनका डिजाइन काफी कॉम्पैक्ट है, जिसकी कुल लंबाई 800 मिलीमीटर से भी कम रहती है। इनकी रेंज करीब 200 मीटर से ज्यादा है और लगभग 600 राउंड प्रति मिनट का फायर रेट है, जो क्लोज कॉम्बैट के लिए शानदार है।
इन कार्बाइनों में आधुनिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पिकाटिनी रेल्स दी गई हैं, जिन पर ऑप्टिकल साइट्स, लेजर, सप्रेसर जैसे उपकरण आसानी से लगाए जा सकते हैं। भारत फोर्ज के वैरिएंट को डीआरडीओ के पुणे स्थित आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (एआरडीई) ने डिजाइन किया है और इसे पूरी तरह भारत में बनाया जा रहा है। वहीं पीएलआर सिस्टम्स का वैरिएंट इजराइल वेपन इंडस्ट्रीज के गालिल ऐस (Galil ACE) प्लेटफॉर्म पर बेस्ड है। (MoD Defence Deal 2025)
MoD Defence Deal 2025: पुरानी कार्बाइन की जगह आधुनिक हथियार
भारतीय सेना लंबे समय से पुरानी 9 एमएम स्टर्लिंग कार्बाइन का इस्तेमाल कर रही थी, जिसका डिजाइन 1940 पर बेस्ड है। नई सीक्यूबी कार्बाइन के आने से इन पुराने हथियारों को चरणबद्ध तरीके से बदला जाएगा। इससे जवानों को आधुनिक तकनीक से लैस हथियार मिलेंगे, जो मौजूदा समय की जरूरत भी हैं।
BIG BOOST to India’s firepower 🇮🇳
The Ministry of Defence has signed ₹4,666 crore worth of contracts to strengthen the Indian Army and Navy with next-generation weapons.
🔫 CQB Carbines (₹2,770 cr)
Over 4.25 lakh Close Quarter Battle Carbines will be inducted for the Army and… pic.twitter.com/YmZYoFxCA0— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) December 30, 2025
नई कार्बाइन में आधुनिक साइट्स, बेहतर ग्रिप, कम रीकॉइल और ज्यादा एक्यूरेसी जैसे फीचर्स शामिल हैं। इन हथियारों को भारतीय परिस्थितियों में टेस्ट किया गया है और इन्हें अलग-अलग मौसम और इलाकों में इस्तेमाल के लिए तैयार किया गया है। 2022 में इस हथियार के लिए एक्सेप्टेंस ऑफ नेसेसिटी (एओएन) दी गई थी और 2025 में इसके ट्रायल्स पूरे हुए। (MoD Defence Deal 2025)
MoD Defence Deal 2025: मेक-इन-इंडिया और एमएसएमई को बढ़ावा
वहीं, सीक्यूबी कार्बाइन का यह कॉन्ट्रैक्ट मेक-इन-इंडिया पहल को भी मजबूती देगा। हथियारों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कई कंपोनेंट्स और रॉ मटेरियल देश के भीतर ही तैयार किए जाएंगे। इससे छोटे और मध्यम उद्योगों यानी एमएसएमई को भी काम मिलेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
रक्षा मंत्रालय का कहना है कि इस प्रोजेक्ट के जरिए निजी क्षेत्र और सरकार के बीच सहयोग को और मजबूती मिलेगी। इससे भविष्य में भी स्वदेशी हथियार प्रणालियों के विकास का रास्ता खुलेगा। (MoD Defence Deal 2025)
हेवी वेट टॉरपीडो के लिए 1,896 करोड़ रुपये का कॉन्ट्रैक्ट
दूसरा बड़ा कॉन्ट्रैक्ट भारतीय नौसेना के लिए है। रक्षा मंत्रालय ने 48 हेवी वेट टॉरपीडो और उनसे जुड़े इक्विपमेंट्स की खरीद के लिए लगभग 1,896 करोड़ रुपये की डील पर दस्तखत किए है। ये टॉरपीडो नौसेना की कलवरी क्लास सबमरीनों (प्रोजेक्ट-75) में लगाए जाएंगे। इन टॉरपीडो का नाम है ब्लैक शार्क है, जिसे दुनिया के सबसे एडवांस्ड हेवी वेट टॉरपीडो में गिना जाता है।
यह कॉन्ट्रैक्ट पर इटली की कंपनी वास सबमरीन सिस्टम्स (Whitehead Alenia Sistemi Subacquei) के साथ किया गयाा है। यह कंपनी अंडरवॉटर वेपन सिस्टम सेक्टर में जानी-मानी मानी जाती है।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन टॉरपीडो की डिलीवरी अप्रैल 2028 से शुरू होगी और इसे 2030 की शुरुआत तक पूरा कर लिया जाएगा। (MoD Defence Deal 2025)
MoD Defence Deal 2025: क्या हैं ब्लैक शार्क की खूबियां
ब्लैक शार्क टॉरपीडो एक बेहद आधुनिक हेवी वेट टॉरपीडो है, जिसे खास तौर पर दुश्मन की सबमरीन और वारशिप्स को नष्ट करने के लिए बनाया गया है। यह टॉरपीडो पानी के नीचे होने वाली लड़ाई में नौसेना को बड़ी बढ़त देता है।
यह एक वायर-गाइडेड टॉरपीडो है, यानी इसे लॉन्च करने के बाद भी सबमरीन उससे जुड़ी रहती है और जरूरत पड़ने पर उसकी दिशा बदली जा सकती है। इसमें इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम लगा होता है, जिससे यह बहुत कम आवाज करता है। कम शोर की वजह से दुश्मन के सोनार के लिए इसे पकड़ पाना बेहद मुश्किल हो जाता है।
ब्लैक शार्क की मारक क्षमता 50 किलोमीटर से ज्यादा मानी जाती है और यह 50 नॉट्स से अधिक की रफ्तार से पानी के भीतर चल सकता है। इसमें लगा हाई एक्सप्लोसिव वारहेड किसी भी बड़े जहाज या सबमरीन को भारी नुकसान पहुंचा सकता है। यह टॉरपीडो गहरे समुद्र यानी डीप सी में भी काम करता है और तट के पास के इलाकों यानी कोस्टल वॉटर्स में भी पूरी तरह से काम करता है।
इस टॉरपीडो में एक्टिव और पैसिव सोनार सिस्टम लगे होते हैं, जिनकी मदद से यह अपने टारगेट को खुद पहचान सकता है, ट्रैक कर सकता है और सही समय पर हमला कर सकता है। (MoD Defence Deal 2025)
क्या बैन हुई थी वास सबरमरीन सिस्टम्स?
इटली की कंपनी वास सबरमरीन सिस्टम्स की पेरेंट कंपनी फिनमेकानिका को भारत में पहले ब्लैक लिस्ट किया गया था। साल 2013-14 में भारत में अगस्तावेस्टलैंड वीवीआईपी हेलिकॉप्टर घोटाले का खुलासा हुआ था। यह करीब 3,600 करोड़ रुपये की डील थी, जिसमें रिश्वत और भ्रष्टाचार के आरोप लगे। अगस्तावेस्टलैंड उस समय इटली की बड़ी डिफेंस कंपनी फिनमेकानिका की सब्सिडियरी थी, जिसका नाम बाद में लियोनार्डो हो गया। जिसके बाद 2014 में रक्षा मंत्रालय ने फैसला लिया कि फिनमेकानिका ग्रुप और उससे जुड़ी सभी कंपनियों को नए डिफेंस कॉन्ट्रैक्ट नहीं दिए जाएंगे।
लेकिन इस बैन का सबसे बड़ा नुकसान भारतीय नौसेना को भी झेलना पड़ा। साल 2008-09 में वास ने ब्लैक शार्क हेवी वेट टॉरपीडो के लिए सबसे कम बोली (L1) लगाई थी। ये टॉरपीडो कलवरी-क्लास सबमरीन्स के लिए थे। लेकिन बैन लगने के कारण यह डील कैंसल हो गई। नतीजा यह हुआ कि भारतीय नौसेना को कई साल तक बिना आधुनिक टॉरपीडो के अपनी नई सबमरीन्स चलानी पड़ीं। इसी बीच स्टॉप-गैप अरेंजमेंट के तौर पर पुराने या स्वदेशी विकल्प इस्तेमाल किए गए। (MoD Defence Deal 2025)
MoD Defence Deal 2025: 2021 में हटा बैन
साल 2021 में बड़ा मोड़ आया। लियोनार्डो ने भारत सरकार के साथ बातचीत के बाद वीवीआईपी हेलिकॉप्टर डील से जुड़े अपने क्लेम (करीब 350 मिलियन यूरो) वापस ले लिए। इसके बाद रक्षा मंत्रालय ने ग्रुप पर लगा बैन औपचारिक तौर पर हटा दिया। मामले में जांच और कानूनी प्रक्रिया अपनी जगह चलती रही, लेकिन कंपनी लेकिन डिफेंस बिजनेस करने की अनुमति दोबारा मिल गई। वहीं, बैन हटने के बाद लियोनार्डो और वास ने फिर से एरो इंडिया जैसे इवेंट्स में हिस्सा लेना शुरू कर दिया। (MoD Defence Deal 2025)
ब्लैक शार्क से कलवरी क्लास सबमरीनों की ताकत बढ़ेगी
भारतीय नौसेना के पास इस समय छह कलवरी क्लास सबमरीन हैं, जिन्हें फ्रांस के स्कॉर्पीन डिजाइन पर देश में ही बनाया गया है। इन सबमरीनों की भूमिका समुद्र के भीतर निगरानी, दुश्मन के जहाजों और सबमरीनों को निशाना बनाना और समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करना है। (MoD Defence Deal 2025)
नए हेवी वेट टॉरपीडो के शामिल होने से इन सबमरीनों की कॉम्बैट क्षमता में इजाफा होगा। ये टॉरपीडो लंबी दूरी से दुश्मन के लक्ष्यों को निशाना बनाने में सक्षम हैं और आधुनिक गाइडेंस सिस्टम से लैस हैं।
नौसेना की ऑपरेशनल जरूरतों पर फोकस
रक्षा मंत्रालय (MoD Defence Deal 2025) का कहना है कि यह खरीद नौसेना की मौजूदा ऑपरेशनल जरूरतों को ध्यान में रखते हुए की गई है। समुद्री क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियों और बदलते सुरक्षा माहौल के बीच नौसेना के लिए आधुनिक और भरोसेमंद हथियार प्रणालियां जरूरी हो गई हैं। हेवी वेट टॉरपीडो की यह डील नौसेना की अंडरवॉटर वारफेयर क्षमता को मजबूत करेगी और कलवरी क्लास सबमरीनों की प्रभावशीलता बढ़ाएगी।
MoD Defence Deal 2025: वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड रक्षा सौदे
रक्षा मंत्रालय (MoD Defence Deal 2025) ने जानकारी दी है कि वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक 1,82,492 करोड़ रुपये के कैपिटल कॉन्ट्रैक्ट साइन किए जा चुके हैं। ये सौदे थलसेना, नौसेना और वायुसेना के मॉडर्नाइजेशन से जुड़े हैं। इन कॉन्ट्रैक्ट्स के जरिए हथियार, गोला-बारूद, प्लेटफॉर्म और सपोर्ट सिस्टम्स को अपडेट किया जा रहा है। मंत्रालय का उद्देश्य है कि सशस्त्र बलों को समय पर आधुनिक उपकरण मिलें और उनकी ऑपरेशनल तैयारियां मजबूत बनी रहें।



