📍नई दिल्ली | 17 Dec, 2025, 12:26 PM
Defence PSUs Order Book: संसद में पेश रक्षा मामलों की स्थायी समिति की रिपोर्ट के अनुसार, देश के सात नए डिफेंस पीएसयू के पास इस समय कुल 83,109 करोड़ रुपये का ऑर्डर बुक है। यह आंकड़ा 1 अप्रैल 2025 तक का है। यह आंकड़े दिखाते हैं कि ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड के कॉरपोरेटाइजेशन के बाद रक्षा उत्पादन क्षेत्र में स्थिरता और मांग दोनों बढ़ी हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, आर्मर्ड व्हीकल निगम लिमिटेड (AVNL) इस लिस्ट में सबसे आगे है। AVNL के पास 35,553 करोड़ रुपये के ऑर्डर हैं, जो टैंक, बख्तरबंद वाहन और अन्य आर्मर्ड सिस्टम से जुड़े हैं। इसके बाद म्यूनिशन्स इंडिया लिमिटेड (MIL) के पास 28,939 करोड़ रुपये के ऑर्डर हैं। म्यूनिशन्स इंडिया लिमिटेड भारतीय सेना के लिए गोला-बारूद और हथियारों के निर्माण में अहम भूमिका निभा रहा है। (Defence PSUs Order Book)
तीसरे नंबर पर एडवांस्ड वेपंस एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड (AWEIL) है, जिसके पास 8,236 करोड़ रुपये का ऑर्डर बुक है। वहीं दूसरी ओर ग्लाइडर्स इंडिया लिमिटेड (GIL) के पास सबसे कम 211 करोड़ रुपये के ऑर्डर हैं। समिति ने साफ किया है कि यह अंतर अलग-अलग कंपनियों के उत्पाद, क्षमता और बाजार की मांग के कारण है। (Defence PSUs Order Book)
रक्षा मामलों की स्थायी समिति ने कहा है कि 2021 में ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड के कॉरपोरेटाइजेशन के बाद इन कंपनियों को वित्तीय और प्रशासनिक स्वतंत्रता मिली है। इसके चलते ये कंपनियां अब घरेलू ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपने उत्पादों की पेशकश कर पा रही हैं। रक्षा मंत्रालय ने समिति को बताया कि ये पीएसयू भारतीय सेना की बदलती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आर्टिलरी गन, गोला-बारूद और आर्मर्ड सिस्टम पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। (Defence PSUs Order Book)
सरकार ने इन नए पीएसयू के आधुनिकीकरण के लिए भी बड़ा निवेश किया है। एम्पावर्ड ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स ने 2022 से 2027 के बीच 8,745 करोड़ रुपये की कैपिटल आउटले को मंजूरी दी है। इसमें से 7,251 करोड़ रुपये की राशि पहले ही जारी की जा चुकी है, जबकि बाकी राशि 2027 तक दी जाएगी। इस फंड का इस्तेमाल उत्पादन लाइन अपग्रेड, रिसर्च एंड डेवलपमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार में किया जा रहा है। (Defence PSUs Order Book)
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि रक्षा आयात पर निर्भरता कम करने में लगातार प्रगति हो रही है। रक्षा उत्पादन विभाग की पॉजिटिव इंडिजेनाइजेशन लिस्ट में शामिल 762 आइटम्स में से 515 आइटम्स का स्वदेशी विकास इन पीएसयू ने कर लिया है। इसके अलावा 136 अन्य आइटम्स भी विकसित किए गए हैं, जो सूची में शामिल नहीं थे। (Defence PSUs Order Book)
डिफेंस पीएसयू के लिए निर्यात के मोर्चे पर भी स्थिति काफी मजबूत हुई है। जहां 2021-22 में निर्यात केवल 22.55 करोड़ रुपये था, वहीं 2023-24 में यह बढ़कर 1,976.51 करोड़ रुपये हो गया। 2024-25 के अस्थायी आंकड़ों के अनुसार निर्यात 3,545 करोड़ रुपये से ज्यादा पहुंच चुका है। कुल मिलाकर इन कंपनियों का एक्सपोर्ट ऑर्डर बुक अब 8,500 करोड़ रुपये के पार है।
रक्षा मंत्रालय ने समिति को बताया है कि पीएसयू ने संभावित विदेशी बाजारों और उत्पादों की पहचान कर ली है। इसके लिए भारतीय दूतावासों, डिफेंस अताशे और विदेशी ओईएम कंपनियों के साथ मिलकर काम किया जा रहा है। समिति ने मंत्रालय से कहा है कि इन कंपनियों को लगातार रणनीतिक समर्थन देने की जरूरत है, ताकि वे सशस्त्र बलों की जरूरतों को समय पर और गुणवत्ता के साथ पूरा कर सकें। (Defence PSUs Order Book)


