📍लद्दाख | 7 Dec, 2025, 1:16 PM
Galwan War Memorial: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज लद्दाख से वीडियो लिंक के माध्यम से देश को 125 सामरिक इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं समर्पित कीं। इसके साथ ही एक बार भी चीन का नाम लिए बिना बहुप्रतिक्षित गलवान वॉर मेमोरियल का भी आज उद्घाटन कर दिया गया। समारोह श्योक टनल के नजदीक रखा गया था, जहां से रक्षा मंत्री ने ऑनलाइन संबोधन कर इन परियोजनाओं और स्मारक को राष्ट्र को समर्पित किया। उद्घाटन के मौके पर रक्षा मंत्री ने शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि यह इंफ्रास्ट्रक्चर उनके बलिदान को नमन है।
Galwan War Memorial: चीन का नहीं किया जिक्र
रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में एक बार भी चीन का जिक्र किए बिना ऑनलाइन ही गलवान वॉर मेमोरियल देश को समर्पित कर दिया। उद्घाटन कार्यक्रम में रक्षा मंत्री ने कहा कि आज का दिन देश के लिए विशेष महत्व रखता है क्योंकि यह 20 शहीदों के शौर्य को याद करने का दिन भी है। उन्होंने शहीदों को नमन करते हुए कहा कि यह स्मारक उनके बलिदान को हमेशा लोगों के सामने रखेगा।
समरोह में भारतीय सेना की 14 कोर के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल हितेश भल्ला ने गलवान की पावन वीर भूमि से लाए गए पत्थर से बने मूमेंटो को भी रक्षा मंत्री को भेंट किया। (Galwan War Memorial)
Galwan War Memorial: 920 मीटर लंबी शियोक टनल का भी उद्घाटन
रक्षा मंत्री ने कहा कि आज एक साथ 125 इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का राष्ट्र को समर्पण होना अपने आप में ऐतिहासिक उपलब्धि है। यह केवल विकसित भारत के संकल्प का प्रमाण नहीं, बल्कि बॉर्डर इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की सरकार की अटूट प्रतिबद्धता का भी उदाहरण है। उन्होंने लद्दाख की दारबुक–श्योक–दौलत बेग ओल्डी रोड पर बनी 920 मीटर लंबी शियोक टनल का भी उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि यह टनल पूरे साल भरोसेमंद कनेक्टिविटी देगी और सेना की तुरंत तैनाती क्षमता को कई गुना बढ़ाएगी। यह टनल बर्फबारी, भूस्खलन और एवलांच से प्रभावित होने वाले मार्ग को सुरक्षित रखने के लिए विकसित किया गया है। सर्दियों के महीनों में तापमान कई बार –30°C तक चला जाता है, लेकिन यह टनल अब साल-भर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेगी। (Galwan War Memorial)
🇮🇳✨ Rajnath Singh inaugurates the Galwan Memorial today
A solemn tribute to the brave soldiers who laid down their lives during the Galwan Clash of 2020, the memorial stands as a symbol of courage, sacrifice and unwavering duty.
During the ceremony, GOC 14 Corps Lt Gen Hiteesh… pic.twitter.com/bThaVUk3uh— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) December 7, 2025
रक्षा मंत्री ने कहा कि कनेक्टिविटी केवल सड़क या पुल का निर्माण नहीं है, बल्कि यह सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, लॉजिस्टिक्स, व्यापार और नागरिक जीवन की धुरी है। बॉर्डर इलाकों में सड़कें सैनिकों की तेज मूवमेंट, रसद पहुंचाने, पर्यटन बढ़ाने और स्थानीय युवाओं के रोजगार के नए अवसर तैयार करती हैं। उन्होंने कहा कि मजबूत कनेक्टिविटी ही किसी भी आधुनिक राष्ट्र की रीढ़ है।
ऑपरेशन सिंदूर का किया जिक्र
अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर का भी विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पहलगाम के आतंकी हमले के बाद हमारी सशस्त्र सेनाओं ने धैर्य, पराक्रम और पेशेवर क्षमता का परिचय देते हुए ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया। यह ऑपरेशन इसलिए भी सफल रहा क्योंकि हमारी कनेक्टिविटी मजबूत थी। सड़कों की उपलब्धता, रियल टाइम कम्युनिकेशन नेटवर्क, सैटेलाइट सपोर्ट और समय पर लॉजिस्टिक सपोर्ट ने सेना को त्वरित और प्रभावी कार्रवाई में सक्षम बनाया। उन्होंने कहा कि “ऑपरेशन सिंदूर” ने दुनिया को दिखा दिया कि भारत अपने नागरिकों और जवानों की सुरक्षा के लिए किसी भी सीमा तक जा सकता है। (Galwan War Memorial)
उन्होंने कहा कि आज भारतीय सेना कठिन पहाड़ी इलाकों में मजबूती से इसलिए खड़ी है क्योंकि हमारे पास आधुनिक सड़कें, ब्रिज, टनल, स्मार्ट फेंसिंग, निगरानी प्रणालियां और लॉजिस्टिक नेटवर्क उपलब्ध हैं। कनेक्टिविटी अब सुरक्षा का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है और भारत लगातार इसे मजबूत कर रहा है।
घरेलू रक्षा उत्पादन 1.5 लाख करोड़ रुपये
रक्षा मंत्री ने आत्मनिर्भर भारत अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले दस वर्षों में देश में रक्षा उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धि हुई है। घरेलू रक्षा उत्पादन 46,000 करोड़ रुपये से बढ़कर आज 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। रक्षा निर्यात भी 1,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 25,000 करोड़ रुपये के आसपास पहुंच गया है। यह भारत की क्षमता और विश्वसनीयता का प्रमाण है।
रक्षा मंत्री ने बीआरओ की कार्यशैली की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि जिस गति और दक्षता से बीआरओ ने पिछले वर्षों में बॉर्डर क्षेत्रों में सड़कें, पुल और टनल बनाए हैं, उसने राष्ट्रीय विकास को नई दिशा दी है। बीआरओ न केवल निर्माण कार्य में बल्कि आपदा के समय मानवीय सहायता में भी उत्कृष्ट भूमिका निभाता रहा है।
आज समर्पित की गई परियोजनाओं में कुल 28 रोड़्स, 93 ब्रिज और चार अन्य रणनीतिक कार्य शामिल हैं। इन परियोजनाओं का कार्य भारत के सात राज्यों और दो केंद्रशासित प्रदेशों में पूरा हुआ है जिनमें लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, पश्चिम बंगाल और मिजोरम प्रमुख हैं।
उद्घाटन के मौके पर श्योक टनल के अलावा चंडीगढ़ में बनाये गये 3D-प्रिंटेड एचएडी कॉम्प्लेक्स को भी राष्ट्र को समर्पित किया गया। रक्षा मंत्री ने कहा कि 3D-प्रिंटेड तकनीक से तैयार यह सुविधा आधुनिक रक्षा इन्फ्रास्ट्रक्चर की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके साथ ही पूर्वोत्तर में बनाये गये प्रमुख मार्गों का उल्लेख किया गया जिनमें सेला-चाब्रेला-बीजे गोम्पा रोड और शंगेस्तर-सुलुला रोड भी हैं। इन मार्गों से अग्रिम इलाकों की पहुंच बेहतर होगी और स्थानीय लोगों को दैनिक जीवन व आर्थिक गतिविधियों में लाभ मिलेगा। (Galwan War Memorial)
वहीं, समारोह में बीआरओ के निदेशक जनरल लेफ्टिनेंट जनरल रघु श्रीनिवासन ने कहा कि कठिन मौसम और विषम भौगोलिक चुनौतियों के बावजूद इन प्रोजेक्ट्स का समापन टीम वर्क व स्वदेशी तकनीक के चलते संभव हुआ। उन्होंने बताया कि बीआरओ ने पिछले कुछ वर्षों में सीमावर्ती इलाकों में सड़कों, पुलों और टनलों के निर्माण पर तेजी से काम किया है और इन परियोजनाओं से न केवल सुरक्षा बल्कि स्थानीय विकास को भी बल मिला है।
विश्व का सबसे ऊंचा स्मारक- गलवान वॉर मेमोरियल
हिमालय की 14,500 फीट ऊंचाई पर स्थित यह स्मारक बेहद कठिन परिस्थितियों में बनाया गया। यह विश्व का सबसे ऊंचा स्मारक भी है। तापमान शून्य से कई डिग्री नीचे गिर जाता है और ऑक्सीजन का स्तर सामान्य इलाकों से बहुत कम होता है। ऐसे माहौल में निर्माण कार्य आसान नहीं था, लेकिन सेना और बीआरओ की टीमों ने समय पर यह कार्य पूरा किया। (Galwan War Memorial)
स्मारक में त्रिशूल और डमरू के आकार का मुख्य स्तंभ बनाया गया है, जो वीरता, ऊर्जा और सुरक्षा का प्रतीक है। स्मारक परिसर में शहीदों की कांस्य प्रतिमाएं, डिजिटल गैलरी, संग्रहालय और एक ऑडिटोरियम भी बनाया गया है। यहां गलवान की घटना से जुड़ी सामग्रियां और उन 20 शहीदों की वीरगाथाएं संजोई गई हैं। (Galwan War Memorial)
इस युद्ध स्मारक के साथ-साथ क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए यात्रियों की सुविधा का भी खास ध्यान रखा गया है। इसके तहत दुर्बुक और गलवान के बीच किलोमीटर 23 पर ‘टाइल्स एंड व्यू कैफे’, किलोमीटर 56 पर एक और कैफे, और युद्ध स्मारक स्थल पर एक सुंदर ‘ब्रेवहार्ट्स डिस्प्ले’ बनाया गया है, जहां लोग शहीद जवानों की वीरता के बारे में जान सकेंगे।
इसके अलावा, यहां एक सोविनियर शॉप, सेल्फी प्वाइंट और युद्ध स्मारक का एक मॉडल डिजाइन भी तैयार किया गया है, ताकि आने वाले पर्यटक इस जगह की यादें अपने साथ ले जा सकें। इसके अलावा पर्यटकों को एलएसी के नजदीकी इलाकों तक भी ले जाया जाए, ताकि वे इस क्षेत्र के महत्व को समझ सकें। (Galwan War Memorial)





