📍नई दिल्ली | 23 Dec, 2025, 11:21 AM
DAC Meeting: इस साल डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (डीएसी) की आखिरी बैठक जल्द जल्द हो सकती है। 26 दिसंबर को होने वाली इस बैठक में कई अहम हथियारों पर फैसला हो सकता है। माना जा रहा है कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में मिसाइलों और रडार की खरीद पर मुहर लग सकती है। वजह भी साफ है, ऑपरेशन सिंदूर के बाद, सेना को लगा कि उनके पास जितनी तेजी से आधुनिक हथियार पहुंचने चाहिए, उतनी जल्दी नहीं पहुंच पा रहे। वहीं अब देरी की कोई गुंजाइश नहीं बची है।
DAC Meeting: इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट क्यों है जरूरी?
तो, इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट यानी ईपी का विकल्प सामने है। रक्षा मंत्रालय के पास ये खास व्यवस्था है, जिसमें अगर अचानक हालात बिगड़ते हैं या किसी बड़े ऑपरेशन के बाद हथियार की कमी साफ दिखती है, तो लंबी फाइलबाजी छोड़कर हथियारों की फटाफट खरीद हो सके। इसमें संख्या भले कम हो, लेकिन डिलीवरी जल्दी मिलती है। पिछला ईपी राउंड 19 नवंबर 2025 को खत्म हुआ था, लेकिन कुछ डील्स अभी भी अधूरी पड़ी हैं। अब 26 दिसंबर की बैठक में इन्हीं डील्स को आगे बढ़ाने और कुछ नए प्रस्तावों पर फैसला होना है। (DAC Meeting)
DAC Meeting: नौसेना को चाहिए MR-SAM मिसाइलें
नौसेना को एमआर-एसएएम (MRSAM) मिसाइलों की जरूरत है। नौसेना ने 700 से ज्यादा मीडियम रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइलें खरीदने की जरूरत बताई है। ये मिसाइलें दुश्मन के लड़ाकू विमान, हेलिकॉप्टर, ड्रोन और यहां तक कि दूसरी मिसाइलों को भी 70 किलोमीटर दूर से गिरा सकती हैं। पिछले दस साल से ये नौसेना के बड़े जहाजों पर लगी हैं, लेकिन अब स्टॉक कम पड़ रहा है। इन्हें डीआरडीओ और इजरायल की कंपनी आईएआई ने मिलकर बनाया है, और भारत डायनेमिक्स लिमिटेड इनका निर्माण करता है। एमआर-एसएएम थलसेना और वायुसेना में भी है, जिससे तीनों सेनाओं के पास साझा एयर डिफेंस सिस्टम मौजूद है। (DAC Meeting)
DAC Meeting: वायुसेना की नजर अस्त्र मार्क-2 पर
वहीं, वायुसेना की नजर इस बार अस्त्र मार्क-2 मिसाइलों पर है। वायुसेना की योजना है कि 600 से ज्यादा अस्त्र मार्क-2 खरीदें जाएं। ये मिसाइलें बियॉन्ड विजुअल रेंज एयर-टू-एयर कैटेगरी की हैं यानि दुश्मन का विमान आंखों से दिखे उससे बहुत पहले, करीब 200 किलोमीटर दूर से भी इन मिसाइलों का शिकार बन सकता है। वायुसेना में पहले से ही अस्त्र एमके-1 है, लेकिन मार्क-2 उससे कहीं ज्यादा लंबी रेंज और ताकतवर है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद साफ हो गया कि भविष्य के हवाई युद्धों में लंबी दूरी की मिसाइलें सबसे जरूरी होंगी। इससे हमारे फाइटर जेट्स अपनी सीमा के अंदर रहकर ही दुश्मन को निशाना बना पाएंगे और जोखिम भी कम होगा। (DAC Meeting)
स्पाइस बम और नए रडार भी एजेंडे में
वहीं, इस बैठक में सिर्फ मिसाइलें ही नहीं, बल्कि स्पाइस प्रिसिजन गाइडेड बम और नए रडार भी एजेंडे में हैं। इजरायल के बने स्पाइस बम 2019 के बालाकोट एयर स्ट्राइक में इस्तेमाल हो चुके हैं। ऑपरेशन सिंदूर के बाद इन्हें और खरीदने की जरूरत महसूस हुई। बैठक में 300 से ज्यादा स्पाइस सिस्टम्स का ऑर्डर दिया जा सकता है।
वहीं थलसेना ने हल्के और लो-लेवल रडार की मांग रखी है। असलेषा (3डी) और भरणी (2डी) रडार पहले से सेना के पास हैं, जिन्हें बीईएल ने बनाया है। अब सीमावर्ती इलाकों में निगरानी मजबूत करने के लिए इनकी संख्या और बढ़ाई जाएगी। ये रडार आकाशतीर कमांड एंड रिपोर्टिंग सिस्टम से भी जुड़े होते हैं, जिसने ऑपरेशन सिंदूर में शानदार काम किया था। (DAC Meeting)
डीएसी की बैठक में सिर्फ रक्षा मंत्री ही नहीं, बल्कि रक्षा राज्य मंत्री, सीडीएस, तीनों सेनाओं के प्रमुख, रक्षा सचिव और डीआरडीओ प्रमुख भी शामिल होते हैं। यहीं तय होता है कि कौन सा हथियार कब और कैसे खरीदा जाएगा। ईपी के तहत हर सिस्टम के लिए करीब 300 करोड़ रुपये तक का बजट रहता है, जिससे मिसाइल, गोला-बारूद, छोटे हथियार या एंटी-टैंक सिस्टम्स जैसी चीजें फटाफट खरीदी जा सकती हैं। (DAC Meeting)
अब अगर 26 दिसंबर की बैठक में प्रस्ताव पास हो जाते हैं, तो अगले कुछ महीनों में सेना, नौसेना और वायुसेना की ताकत में जबरदस्त इजाफा दिखेगा। एमआर-एसएएम से समुद्र की सुरक्षा मजबूत होगी, अस्त्र मार्क-2 से आसमान में बढ़त मिलेगी, और नए रडार से जमीन की निगरानी और पक्की होगी। कुल मिलाकर, ये बैठक सेना के लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट बन सकती है। (DAC Meeting)


