📍नाहरलगुन (अरुणाचल प्रदेश) | 24 Oct, 2025, 12:09 PM
BRO Project Arunank: सीमाई इलाकों में सड़कों के निर्माण और देश के दुर्गम इलाकों में विकास की पहचान बन चुके सीमा सड़क संगठन यानी बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन ने अरुणाचल प्रदेश के नाहरलगुन में चल रहे प्रोजेक्ट अरुणांक का 18वां स्थापना दिवस मनाया। यह आयोजन उन इंजीनियरों, मजदूरों और अधिकारियों की मेहनत का प्रतीक था, जिन्होंने देश के सबसे कठिन इलाकों में सड़कों और पुलों का निर्माण कर सुरक्षा और विकास दोनों को मजबूत किया है।
BRO Project Arunank की शुरुआत वर्ष 2008 में हुई थी। इसका उद्देश्य अरुणाचल प्रदेश के दुर्गम पहाड़ी इलाकों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ना और सीमावर्ती इलाकों में तैनात सशस्त्र बलों को सुरक्षित व तेज आवाजाही सुनिश्चित करना था। पिछले 17 सालों में इस प्रोजेक्ट ने 696 किलोमीटर सड़कों और 1.18 किलोमीटर लंबे प्रमुख पुलों का निर्माण और रखरखाव किया है।
इस परियोजना की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक 278 किलोमीटर लंबी हापोली–सरली–हुरी सड़क का निर्माण रहा, जिसे आजादी के बाद पहली बार ब्लैकटॉप किया गया। यह सड़क कुरुंग कुमेय जिले के सबसे दुर्गम इलाकों को जोड़ती है और इसने स्थानीय लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव लाया है।
BRO Project Arunank ने निर्माण में कई नवीन तकनीकों को अपनाया है, जिनमें स्टील स्लैग, कट-एंड-कवर टनल्स, जिओ सेल्स, प्लास्टिक शीट्स, जीजीबीएफएस कंक्रीट और गेबियन वॉल्स शामिल हैं। इन तकनीकों ने न केवल सड़कों की मजबूती बढ़ाई है बल्कि लागत घटाने और पर्यावरण के संरक्षण में भी मदद की है।
बीआरओ ने हाल के सालों में कई रणनीतिक सड़कों का काम पूरा किया है। ली–हुरी रोड को नेशनल हाइवे डेवलपमेंट लिमिटेड मानकों के अनुसार अपग्रेड किया गया है, वहीं किमिन–पोटिन रोड को डबल लेन बनाया गया। दिसंबर 2022 में माजा सेक्टर तक सड़क कनेक्टिविटी पूरी की गई, जो चीन सीमा से सटे अंतिम इलाकों में आता है। आने वाले महीनों में टीसीसी–माजा रोड का उद्घाटन भी प्रस्तावित है।
स्थापना दिवस पर नहरलागुन–जोरम टॉप–संग्राम–जीरो–नहरलागुन मार्ग पर एक मोटरेबल एक्सपेडिशन आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य स्थानीय लोगों में सड़क सुरक्षा और यातायात अनुशासन को बढ़ावा देना था। इस यात्रा ने दिखाया कि बीआरओ ने कितनी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में सड़कों को आधुनिक और सुरक्षित बनाया है।
पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी प्रोजेक्ट अरुणांक अग्रणी रहा है। ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत अरुणाचल प्रदेश में 23,850 पेड़ लगाए गए। यह अभियान बीआरओ की ग्रीन और सस्टेनेबल कंस्ट्रक्शन पॉलिसी को आगे बढ़ाता है।
स्थापना दिवस पर बीआरओ ने अपने कैजुअल पैड लेबरर्स यानी अस्थायी श्रमिकों के लिए कल्याणकारी उपायों की भी घोषणा की। इनमें बेहतर आवास, गर्म कपड़े, स्वास्थ्य जांच शिविर और सुरक्षित पानी-सैनिटेशन की सुविधाएं शामिल हैं। ये मजदूर बीआरओ की रीढ़ माने जाते हैं, जो हर मौसम में सीमाओं पर काम करते हैं।
ब्रिगेडियर स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस मौके पर प्रोजेक्ट अरुणांक की उपलब्धियों की सराहना की गई और कहा गया कि यह परियोजना भारत की सामरिक मजबूती, आत्मनिर्भरता और विकास की दिशा में एक जीवंत प्रतीक है।

