SSS Defence: भारत का डिफेंस प्राइवेट सेक्टर तेजी से आगे बढ़ रहा है। असाल्ट राइफल्स बनाने वाली प्रमुख कंपनी बेंगलुरु की एसएसएस डिफेंस (SSS Defence) को स्नाइपर राइफल के लिए बड़ा ऑर्डर मिला है। साथ ही, कंपनी के साथ 30 मिलियन डॉलर (करीब 250 करोड़ रुपये) कीमत के एम्युनिशन यानी गोला-बारूद की भी बड़ी डील हुई है। यह डील सेंट्रल यूरोप और एक एशियाई देश के साथ हुई है।
जानकारी के मुताबिक, जिस देश को यह राइफल सप्लाई की गई हैं, वह भारत का दोस्त है। हालांकि इस डील में देश के नाम का खुलासा कंपनी ने नहीं किया है। लेकिन इस देश को पहले .338 लैपुआ मैग्नम कैलिबर की स्नाइपर राइफल सप्लाई की गई थी। अब उसने पॉजिटिव रेस्पॉन्स देते हुए अतिरिक्त राइफल्स का ऑर्डर दिया है। इस बार ऑर्डर का साइज पहले से कहीं बड़ा है। इसके साथ ही उसी देश ने 7.62×51 मिमी कैलिबर के गोला-बारूद के लिए भी कॉन्ट्रैक्ट किया है।
SSS Defence: इम्पोर्टर से एक्सपोर्टर बना भारत
कुछ साल पहले तक भारत स्नाइपर राइफल के लिए विदेशी कंपनियों पर निर्भर था। लेकिन एसएसएस डिफेंस ने न केवल इस माइंडसेट को बदला, बल्कि जुलाई 2024 में पहली बार भारत ने स्नाइपर राइफल निर्यात किया और अब यह कंपनी लगातार नए विदेशी ग्राहकों को भारत के साथ जोड़ रही है।
एसएसएस डिफेंस पहले ही करीब 50 मिलियन डॉलर के गोला-बारूद के ऑर्डर पूरे कर चुकी है, जिन्हें कई मित्र देशों को सप्लाई किया गया। इनमें से कुछ पड़ोसी देशों को भी सप्लाई दी गई थी।
वहीं, भारत सरकार भी इन डील्स में कंपनियों की मदद कर रही है। रक्षा मंत्रालय तेजी से क्लीयरेंस दे रहा है और विदेशी अनुरोधों को भारतीय कंपनियों तक पहुंचा रहा है।
SSS Defence: स्नाइपर प्रतियोगिता में भी दिखाया दम
फरवरी 2025 में हुई ऑल इंडिया पुलिस कमांडो प्रतियोगिता में नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) ने स्नाइपर कैटेगरी में पहला स्थान हासिल किया। एनएसजी टीम ने एसएसएस डिफेंस की .338 सेबर स्नाइपर राइफल का इस्तेमाल किया था।
जबकि, दूसरा स्थान महाराष्ट्र पुलिस की फोर्स वन ने हासिल किया, जिसने अमेरिकी बैरेट .50 कैल स्नाइपर राइफल का इस्तेमाल किया। यह वही राइफल है जो अमेरिकी स्पेशल फोर्सेस के साथ-साथ भारतीय सेना के पास भी सीमित संख्या में मौजूद है।
SSS Defence: सेबर .338 स्नाइपर राइफल की खूबियां
एसएसएस डिफेंस की सेबर .338 स्नाइपर राइफल पूरी तरह भारत में डिजाइन और मैन्युफैक्चर की गई है। यह स्नाइपर राइफल दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित कैलिबर में आती है और इसकी फायर पावर रेंज लगभग 1,500 मीटर तक है। यह राइफल सब 1 एमओए (Minute of Angle) एक्यूरेसी देती है। यानी 100 मीटर पर गोली का फैलाव सिर्फ 3×3 सेंटीमीटर होता है। इसमें भारत में ही बना 27 इंच का मैच बैरल लगा है, जो भारत में बना है। इसमें मोनोलीथिक चेसिस, टू-स्टेज ट्रिगर और भारत में बना सप्रेसर लगा है।
यूरोप और एशिया में कदम
एसएसएस डिफेंस ने हाल ही में सेंट्रल यूरोप के तीन देशों को स्नाइपर राइफल सप्लाई की है। इसके अलावा, कंपनी अब एशिया के दो और देशों को हथियार सप्लाई करने की तैयारी में है। इस पहल से न केवल भारत की “मेक इन इंडिया” को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि यूरोप के बड़े बाजारों में भी भारतीय कंपनियों की पहुंच बढ़ रही है। कंपनी का कहना है कि उसके हथियार न केवल टेक्नोलॉजी के मामले में बल्कि कॉस्ट में भी विदेशी कंपनियों को मात देते हैं। यही वजह है कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार ऑर्डर मिल रहे हैं।
CCC 2025 Kolkata: भारतीय सेनाएं इस महीने देश की सबसे महत्वपूर्ण सैन्य विचार-विमर्श बैठक कम्बाइंड कमांडर्स कॉन्फ्रेंस (Combined Commanders’ Conference – CCC) 2025 का आयोजन करने जा रही हैं। यह सम्मेलन 15 से 17 सितंबर तक कोलकाता में होगा और इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। इस उच्च स्तरीय सम्मेलन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, रक्षा राज्य मंत्री, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, रक्षा सचिव और विभिन्न मंत्रालयों के सचिव भी मौजूद रहेंगे।
इस साल सम्मेलन की थीम है– ईयर ऑफ रिफॉर्म्स – ट्रांसफॉर्मिंग फॉर द फ्यूचर यानी सुधारों का वर्ष: भविष्य के लिए बदलाव। इसमें मुख्य रूप से इंस्टीट्यूशनल रिफॉर्म्स, डीप इंटीग्रेशन प्रोसेस और टेक्नोलॉजी मॉर्डेनाइजेशन पर चर्चा होगी। इसके साथ ही मल्टी डोमेन ऑपरेशनल तैयारियों को मजबूत करने पर भी जोर दिया जाएगा।
भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के शीर्ष अधिकारी बदलते भू-राजनीतिक हालात में सुरक्षा चुनौतियों और युद्ध की नई रणनीतियों पर विचार करेंगे। इस दौरान ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट, आर्गेनाइजेशनल रिफॉर्म्स और भविष्य के जॉइंट मिलिट्री विजन पर भी चर्चा की जाएगी।
CCC 2025 Kolkata: ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े सबक पर होगी चर्चा
इस कॉन्फ्रेंस का एक अहम एजेंडा मई 2025 में हुए ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े सबक और अनुभव होंगे। ऑपरेशन सिंदूर को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद लॉन्च किया गया था, जिसमें 26 निर्दोष नागरिकों की जान गई थी। इसके जवाब में भारत ने 7 मई को पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी ढांचे को ध्वस्त करने के लिए ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया।
यह ऑपरेशन आतंकवाद के खिलाफ भारत की निर्णायक सैन्य कार्रवाई के रूप में देखा गया और इसमें तीनों सेनाओं ने मिलकर काम किया। अब इस कॉन्फ्रेंस में उस ऑपरेशन से सीखे गए सबक, आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल और जॉइंट ऑपरेशंस की रणनीति पर गहन चर्चा होगी।
CCC 2025 Kolkata: पीएम करेंगे संबोधित
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सीडीएस जनरल अनिल चौहान सम्मेलन में टॉप मिलिट्री अफसरों को संबोधित करेंगे। यह सम्मेलन ईस्टर्न कमांड के मुख्यालय कोलकाता में होगा।
प्रधानमंत्री देश की सुरक्षा से जुड़ी नीतियों की सुप्रीम बॉडी कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) के अध्यक्ष हैं, जबकि रक्षा मंत्री डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) के चेयरमैन हैं। इसलिए इस कॉन्फ्रेंस के एजेंडे पर लिए गए फैसलों का असर सीधे देश की सुरक्षा नीतियों और डिफेंस मॉर्डेनाइजेशन पर पड़ेगा।
कम्बाइंड कमांडर्स कॉन्फ्रेंस में अलग-अलग रैंकों के अधिकारियों और सैनिकों से भी संवाद किया जाता है। इससे जमीनी स्तर की चुनौतियों और अनुभवों को टॉप लेवल की रणनीति में शामिल किया जाता है। इस बार भी सम्मेलन में इंटरेक्टिव सेशन होंगे जिनमें विभिन्न रैंकों के अधिकारी हिस्सा लेंगे। यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। वर्ष 2014 तक यह सम्मेलन दिल्ली में होता था, लेकिन उसके बाद इसे अलग-अलग स्थानों पर आयोजित किया जाने लगा। अब तक यह सम्मेलन INS विक्रमादित्य पर, देहरादून, जोधपुर और भोपाल जैसे शहरों में आयोजित हो चुका है। इस बार पहली बार यह कोलकाता में हो रहा है।
CCC 2025 Kolkata: चीन और पाकिस्तान से बढ़ती चुनौतियां
इस सम्मेलन का आयोजन ऐसे समय हो रहा है जब चीन की नौसैनिक गतिविधियां हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ रही हैं और पाकिस्तान के साथ उसका सामरिक सहयोग भारत के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर रहा है। इसके अलावा साइबर, स्पेस और ड्रोन जैसे नए बैटलफील्ड भी सेनाओं के सामने हैं। इन सबको ध्यान में रखते हुए सीसीसी 2025 में ऑपरेशनल रेडीनेस यानी हर हालात में तैयार रहने पर विशेष जोर रहेगा।
वहीं, भारतीय सेनाएं इस समय मॉर्डनाइजेशनप्रक्रिया से गुजर रहे हैं। थलसेना में थिएटर कमांड्स पर विचार चल रहा है, नौसेना में नए युद्धपोत और पनडुब्बियों का निर्माण हो रहा है और वायुसेना में आधुनिक लड़ाकू विमान, ड्रोन और एयर डिफेंस सिस्टम शामिल किए जा रहे हैं। कॉन्फ्रेंस में इन सभी पहलुओं की प्रगति और भविष्य की जरूरतों पर भी समीक्षा होगी।
ध्यान देने वाली यह है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह पहली बार होगा जब प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री टॉप मिलिट्री लीडरशिप के साथ आमने-सामने बैठकर मिलिट्री मॉर्डनाइजेशन और रिफॉर्म्स पर चर्चा करेंगे। इस वजह से इस कॉन्फ्रेंस को और भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
Indian Army Flood Relief 2025: देश के कई हिस्से इस साल भयंकर बाढ़ की चपेट में हैं, लेकिन इन मुश्किल हालात में भारतीय सेना एक बार फिर सबसे आगे खड़ी दिखाई दी है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को निकालने से लेकर मेडिकल मदद पहुंचाने और राहत सामग्री बांटने तक, सेना के जवान लगातार “सेवा परमो धर्म” की भावना के साथ काम कर रहे हैं।
मॉनसून सीजन अप्रैल 2025 से शुरू हुआ और तभी से सेना की टीमें देशभर में मानवीय सहायता और आपदा राहत यानी ह्यूमैनिटेरियन असिस्टेंस एंड डिजास्टर रिलीफ (HADR) ऑपरेशनों में लगी हुई हैं। अब तक सेना 75 अलग-अलग स्थानों पर सक्रिय रही है, जहां उन्होंने हजारों लोगों की जान बचाई।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, सेना ने इस दौरान 126 रेस्क्यू कॉलम तैनात किए। इनकी मदद से 21,500 से अधिक नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया। इसके अलावा 9,700 लोगों को तुरंत चिकित्सा मदद दी गई और प्रभावित इलाकों में 23,500 किलोग्राम से ज्यादा राहत सामग्री पहुंचाई गई। सेना के इंजीनियरों ने राहत और बचाव कार्य को सुचारु बनाने के लिए 29 पुल बनाए, जिनमें से एक पुल 110 फीट लंबा था। साथ ही 12 स्थानों पर बंधों को मजबूत किया गया ताकि बाढ़ का पानी और नुकसान न पहुंचा सके।
भारतीय सेना की इन कोशिशों में हेलिकॉप्टर ऑपरेशनों की भूमिका भी बेहद अहम रही। सेना के हेलिकॉप्टरों ने 500 घंटे से ज्यादा की उड़ान भरकर राहत सामग्री पहुंचाई और फंसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। यह ऑपरेशन कई बार ऐसे इलाकों में चलाए गए जहां पहुंचना बेहद मुश्किल था और जवानों ने व्यक्तिगत जोखिम उठाकर अपनी जिम्मेदारी निभाई।
Indian Army at the Forefront of Nation’s Battle Against Floods 🇮🇳
From the plains of Punjab to the interiors of Himachal and J&K, the Indian Army has once again proven its ethos of Service Before Self.
📍 75 flood-hit locations covered
👥 21,500+ civilians rescued
🏥 9,700+… pic.twitter.com/fUxUuugBU1
— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) September 8, 2025
सेना की सबसे उल्लेखनीय कार्रवाई पंजाब में रही, जहां लगातार बारिश ने हालात बिगाड़ दिए थे। अकेले पंजाब में 48 रेस्क्यू कॉलम तैनात किए गए। इनकी मदद से लगभग 10,000 लोगों की जान बचाई गई, 4,700 लोगों को मेडिकल सहायता दी गई और 12,500 किलोग्राम आवश्यक सामग्री बांटी गई। यहां भी सेना के हेलिकॉप्टरों ने 250 घंटे से अधिक उड़ान भरकर राहत कार्य किया। इन हेलिकॉप्टरों ने न सिर्फ़ बाढ़ में फंसे ग्रामीणों को एयरलिफ्ट किया बल्कि उन गांवों में भी मदद पहुंचाई जहां सड़क से जाना संभव नहीं था।
पंजाब में ऑपरेशन के दौरान सेना ने सुरक्षा बलों के जवानों की भी मदद की। लस्सियां, कसोवाल और दरिया मंसूर जैसे इलाकों में बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के करीब 500 जवान फंसे हुए थे। सेना ने इन्हें भी सुरक्षित बाहर निकाला और अग्रिम चौकियों से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में सेना के इंजीनियर लगातार काम करते रहे। जहां सड़कें और पुल टूट गए थे, वहां अस्थायी पुल बनाए गए ताकि राहत सामग्री और मेडिकल टीम्स आसानी से पहुंच सकें। कई जगहों पर जवानों ने बंधों को मजबूत किया ताकि गांवों में और पानी न घुस सके। यह काम तेज धाराओं और लगातार बारिश के बीच किया गया।
भारतीय सेना की कोशिशें सिर्फ तकनीकी या सैन्य क्षमता तक सीमित नहीं रहीं। जवानों ने गांवों और कस्बों में जाकर सीधे नागरिकों से बातचीत की, उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया और बच्चों-बुजुर्गों को कंधों पर उठाकर बाहर निकाला। कई वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर सामने आईं जिनमें सेना के जवान बाढ़ में डूबते लोगों को बचाते और उन्हें सुरक्षित जगह ले जाते दिखाई दिए।
देश के अलग-अलग हिस्सों से आई तस्वीरें दिखाती हैं कि जब भी संकट आता है, भारतीय सेना सबसे पहले पहुंचती है और सबसे आखिर में लौटती है। चाहें आप उत्तराखंड के हर्षिल-धराली की बात कर लें या हिमाचल प्रदेश या फिर पंजाब, इस साल बाढ़ की तबाही ने हजारों परिवारों को प्रभावित किया है, लेकिन सेना की त्वरित कार्रवाई ने कई जिंदगियों को बचाया है।
पंजाब से लेकर देश के अन्य हिस्सों तक सेना की सक्रियता ने यह साबित किया है कि आपदा राहत कार्यों में उसकी भूमिका कितनी अहम है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री पहुंचाना, लोगों को सुरक्षित निकालना और बंधों को मजबूत करना सेना की उस क्षमता को दर्शाता है जो हर स्थिति में लोगों की मदद करने के लिए तैयार रहती है।
Indian Army Drone Shield: ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने भारत पर हमला करने के लिए ड्रोनों का सहारा लिया था। सैकड़ों सर्विलांस और अटैक ड्रोन भारतीय सीमा में दाखिल हुए थे, जिन्हें भारतीय सेना ने अपनी एयर डिफेंस गनों और सिस्टम की मदद से मार गिराया। इसके बावजूद, भारतीय सेना ने इस अनुभव से यह सीखा कि भविष्य में ड्रोन वॉरफेयर और भी बड़े खतरे के रूप में सामने आ सकते हैं। अब सेना अपनी ड्रोन शील्ड यानी एरियल सर्विलांस और सिक्योरिटी सिस्टम को और मजबूत बनाने जा रही है।
Indian Army Drone Shield: नया रडार सिस्टम खरीदने की तैयारी
सूत्रों के अनुसार, भारतीय सेना उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर एरियल सर्विलांस की क्षमता बढ़ाने के लिए एडवांस्ड रडार सिस्टम खरीदने की तैयारी कर रही है। यह रडार सिस्टम ऐसे एरियल ऑब्जेक्ट्स की भी पहचान सकेंगे जिनका रडार क्रॉस-सेक्शन (RCS) बहुत कम होता है, और जो आम रडार पर आसानी से पकड़ में नहीं आते। इन रडारों को आकाशतीर (Akashteer) एयर डिफेंस नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इससे सेना के कमांडर को आसमान की साफ तस्वीर मिलेगी और दुश्मन के ड्रोन या हवाई खतरे का तेजी से जवाब दिया जा सकेगा। जिसके बाद ऐसे ड्रोन या यूएवी भी ट्रैक हो सकेंगे जिन्हें पहले पहचानना मुश्किल था।
Indian Army Drone Shield: रिक्वेस्ट फॉर इंफॉर्मेशन और प्रपोजल जारी
सेना ने इस दिशा में औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। दो अलग-अलग रिक्वेस्ट फॉर इंफॉर्मेशन (RFI) जारी किए गए हैं। इसके तहत 45 तक लो लेवल लाइट वेट रडार-एन्हांस्ड (LLLR-E) और 48 एयर डिफेंस फायर कंट्रोल रडार-ड्रोन डिटेक्टर (ADFCR-DD) की मांग की गई है। इसके अलावा, एक रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) भी जारी किया गया है, जिसमें 10 लो लेवल लाइट वेट रडार-इम्प्रूव्ड (LLLR-I) मांगे गए हैं।
Indian Army Drone Shield: क्या है LLLR-I की क्षमता
LLLR-I एक थ्री-डायमेंशनल यानी 3D एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैनड अरे (AESA) रडार होगा। इसमें कमांडर का डिस्प्ले यूनिट, टारगेट डेजिग्नेशन सिस्टम और पावर सप्लाई यूनिट होगी। यह किसी भी इलाके में काम करने में सक्षम होगा, चाहे वह पहाड़ हो, ऊंचाई वाला क्षेत्र हो, रेगिस्तान हो या समुद्र तटीय इलाका हर जगह ये काम करेगा। इसकी क्षमता होगी कि यह 50 किलोमीटर के दायरे में सभी एरियल टारगेट्स की पहचान सके और एक साथ 100 से ज्यादा टारगेट्स को ट्रैक कर सके।
लो लेवल लाइट वेट रडार-एन्हांस्ड LLLR-E की खूबियां
LLLR-E यानी लो लेवल लाइट वेट रडार-एन्हांस्ड रडार में भी 3D स्कैनिंग की क्षमता होगी, लेकिन इसमें इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल ट्रैकिंग सिस्टम (EOTS) और पैसिव रेडियो-फ्रीक्वेंसी डिटेक्शन सिस्टम भी जोड़ा जाएगा। इससे यह छोटे ड्रोन या ड्रोन स्वार्म्स को भी पकड़ सकेगा और 10 किलोमीटर दूर तक टारगेट डेटा वेपन सिस्टम को भेज सकेगा। इसमें दिन-रात ट्रैकिंग की क्षमता में बढ़ोतरी होगी।
Indian Army Drone Shield: एयर डिफेंस फायर कंट्रोल रडार-ड्रोन डिटेक्टर
एयर डिफेंस फायर कंट्रोल रडार-ड्रोन डिटेक्टर (ADFCR-DD) में सर्च रडार, ट्रैक रडार, फायर कंट्रोल सिस्टम और आइडेंटिफिकेशन फ्रेंड-ऑर-फो (IFF) जैसी सुविधाएं होंगी। यह पूरा सिस्टम एक व्हीकल पर लगाया जाएगा और कम से कम दो L-70 एयर डिफेंस गनों को कंट्रोल कर सकेगा। यानी यह सिस्टम मोबाइल प्लेटफॉर्म पर माउंट होगा जिसमें सर्च रडार, ट्रैक रडार, फायर कंट्रोल सिस्टम और आइडेंटिफिकेशन फ्रेंड-ऑर-फो (Identification Friend-or-Foe – IFF) क्षमता होगी। साथ ही यह डेटा बहुत शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (VSHORADS) तक भी भेजेगा, ताकि दुश्मन के ड्रोन और मिसाइलों को पहले ही रोका जा सके।
— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) September 8, 2025
Indian Army Drone Shield: ऑपरेशन सिंदूर से मिले अनुभव
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने बड़े पैमाने पर स्वार्म ड्रोन का इस्तेमाल किया था। इनका लक्ष्य था भारतीय सेना के ठिकानों और नागरिक प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचाना। लेकिन भारतीय सेना की L-70, ZU-23 और शिल्का जैसी एयर डिफेंस गनों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया और बड़ी संख्या में ड्रोन गिराए। सेना का मानना है कि अगर इन गनों को आधुनिक फायर कंट्रोल रडार सिस्टम के साथ जोड़ा जाए तो और भी अधिक प्रभावी तरीके से इन खतरों को खत्म किया जा सकेगा।
L-70 गन को अपग्रेड करने की तैयारी
भारतीय सेना अब ऐसा नया फायर कंट्रोल सिस्टम चाहती है जो कई रडार और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सिस्टम से डेटा प्रोसेस कर सके। यह सिस्टम फायरिंग सॉल्यूशन तैयार करेगा और यह जानकारी गनों और शोल्डर-फायर एयर डिफेंस मिसाइलों दोनों तक पहुंचाएगा। इसका फायदा यह होगा कि दुश्मन के छोटे से छोटे निगरानी ड्रोन या अटैक UAV को भी समय रहते निशाना बनाया जा सकेगा।
L-70 एयर डिफेंस गन ऑपरेशन सिंदूर में वरदान साबित हुई थी। लेकिन यह गन 20-25 साल पुरानी तकनीक पर आधारित है। अब सेना इसे अपग्रेड कर रही है ताकि यह नई पीढ़ी के खतरों से भी निपट सके। नया फायर कंट्रोल रडार सिस्टम खासतौर पर ड्रोन की पहचान करने और उन्हें तुरंत निशाना बनाने के लिए डिजाइन किया जा रहा है। सेना के पास वर्तमान में लगभग 800 L-70 गन मौजूद हैं। इनके लिए नए रडार सिस्टम तैयार किए जाएंगे जो कम से कम दो गनों को एक साथ कंट्रोल कर सकें। इससे दुश्मन के ड्रोन को डिटेक्ट करने और उन्हें गिराने में लगने वाला समय बहुत कम हो जाएगा।
भारतीय सेना ने इस बार साफ किया है कि नए सिस्टम को पूरी तरह स्वदेशी रक्षा उद्योग से ही खरीदा जाएगा। पहले सेना ने विदेशी फायर कंट्रोल सिस्टम खरीदे थे जिनमें रूस और हॉलैंड से लिए गए उपकरण शामिल थे। लेकिन ये सिस्टम 70 और 90 के दशक के थे और पूरी तरह डिजिटल नहीं थे। अब सेना चाहती है कि नए सिस्टम अत्याधुनिक हों और ड्रोन सहित सभी प्रकार के हवाई खतरों को डिटेक्ट कर सकें।
ऑपरेशन सिंदूर में आकाशतीर प्रोजेक्ट
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान आकाशतीर प्रोजेक्ट ने भी अपनी क्षमता दिखाई। यह प्रोजेक्ट सभी एयर डिफेंस सेंसर्स को एक नेटवर्क में जोड़ता है। इससे सेना के पास देश के हवाई क्षेत्र की पूरी तस्वीर उपलब्ध हो जाती है। आकाशतीर प्रोजेक्ट का लगभग 60 फीसदी काम ऑपरेशन सिंदूर तक पूरा हो चुका था। इसके तहत अब तक 275 सिस्टम डिलीवर हो चुके हैं और 455 सिस्टम की जरूरत है। इस प्रोजेक्ट से सेना के एयर डिफेंस नेटवर्क को रियल-टाइम सिचुएशनल अवेयरनेस मिलती है।
पहले अलग-अलग रडार सिस्टम से मिली जानकारी को ऑपरेटरों को खुद एनालाइज करना पड़ता था। इसमें समय लगता था और कॉर्डिनेशन में देरी होती थी। लेकिन अब आकाशतीर सिस्टम सभी रडार से डेटा लेकर उसे तुरंत एनालाइज कर देता है और एकीकृत तस्वीर कमांडरों को दिखाता है। इससे दुश्मन के हवाई हमलों का मुकाबला करने में ज्यादा तेजी आती है।
Eastern Ladakh LAC Update: एससीओ समिट में पीएम मोदी और चीना राष्ट्रपति शी जिनपिंग की द्विपक्षीय बातचीत के बाद भी पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भारतीय सेना की तैनाती में कोई बदलाव नहीं किया गया है। दोनों नेताओं के बीच तियानजिन में हालिया मुलाकात के बाद भी सेना ने स्पष्ट कर दिया है कि मौजूदा हालात में भी सीमा पर कोई कमी नहीं की जाएगी। वहीं सीमा पर विंटर डिप्लॉयमेंट पहले की तरह जारी रहेगा यानी सर्दियों में भी बॉर्डर पर से सैनिकों की संख्या में कोई कटौती नहीं की जाएगी। जैसा पिछले साल था वैसा ही इस बार भी रहेगा।
Eastern Ladakh LAC Update: सीमा पर तैनाती की स्थिति
सेना के भरोसेमंद सूत्रों ने बताया कि चीनी सेना भी उतने ही सैनिक और हथियारबंद यूनिट्स लेकर सीमा पर मौजूद है। ऐसे में भारत की तैनाती भी संतुलन बनाए रखने के लिए समान स्तर पर की गई है। पिछले साल 21 अक्टूबर को एलएसी पर पेट्रोलिंग बहाल होने के बाद से हालात शांतिपू्र्ण हैं। जिसके बाद डेपसांग और डेमचोक इलाके में डिसएंगेजमेंट की प्रक्रिया शुरू हुई थी।
बता दें कि सर्दियों की शुरूआत होने वाली है, जिसके बाद हाई एल्टीट्यूड इलाकों में बर्फ जमने से रास्ते बंद हो जाएंगे और पेट्रोलिंग सीमित हो जाएगी। जिसके चलते सेना का फोकस सप्लाई लाइनों को बनाए रखने पर है। पूर्वी लद्दाख में अप्रैल 2020 के बाद चीन की भारी तैनाती के जवाब में भारत ने भी अतिरिक्त सैनिक, तोपें, टैंक, रॉकेट लॉन्चर, हेलिकॉप्टर और यूएवी तैनात किए थे। हालांकि हालात अब स्थिर हैं लेकिन अप्रैल 2020 से पहले जैसी सामान्य स्थिति अभी तक बहाल नहीं हुई है।
Eastern Ladakh LAC Update: थ्री-डी प्रस्ताव पर काम होना बाकी
भारत ने सीमा पर तनाव कम करने के लिए तीन-चरण में प्रस्ताव रखा है जिसे ‘थ्री-डी’ कहा जा रहा है। इसमें पहला ‘डी’ यानी डिसएंगेजमेंट (सैनिकों को फेस टू फेस डिप्लॉयमेंट से पीछे हटाना) पिछले साल अक्टूबर में पूरा हो गया था। लेकिन दूसरा चरण डी-एस्केलेशन (तनाव घटाना) और तीसरा डी-इंडक्शन (अतिरिक्त सैनिकों को स्थायी ठिकानों पर लौटाना) अब भी पूरा नहीं हुआ है और चीन के साथ बातचीत में इस पर कोई प्रगति नहीं हुई है। जबकि ये दोनों प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक सीमा पर सामान्य हालात नहीं बने रह सकते।
General Level Mechanism: 24वें विशेष प्रतिनिधि वार्ता में भारत और चीन ने सीमा विवाद पर नया जनरल लेवल मैकेनिज्म बनाने पर सहमति जताई। जानें यह मैकेनिज्म क्या है, SHMC और WMCC से कैसे अलग है और भारत-चीन सीमा प्रबंधन पर क्या होगा इसका असर…https://t.co/y0rTjfURpk@MEAIndia…
— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) August 21, 2025
पिछले तीन महीनों में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस. जयशंकर दोनों अपने-अपने चीनी समकक्षों से इस मुद्दे पर बातचीत कर चुके हैं। 19 अगस्त को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी की दिल्ली में स्पेशल रिप्रजेंटेटिव स्तर की मुलाकात हुई थी, जिसके बाद दोनों पक्षों ने एक साझा दस्तावेज भी जारी किया था जिसमें बॉर्डर मैनेजमेंट को लेकर बातचीत हुई थी। इसमें बॉर्डर मैनेजमेंट पर सहमति बनाने के लिए वर्किंग ग्रुप के गठन की बात कही थी, जिसमें WMCC के तहत एक वर्किंग ग्रुप बनाया जाएगा, ताकि सीमा पर प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित हो सके और शांति व स्थिरता बनी रहे।
इसके अलावा जनरल लेवल मैकेनिज्म को लेकर बातचीत हुई थी, जो अभी वेस्टर्न सेक्टर (पश्चिमी क्षेत्र) में है, उसके अलावा ईस्टर्न (पूर्वी), मिडल (मध्य) और अन्य सेक्टरों में भी जनरल लेवल मैकेनिज्म बनाया जाएगा। इसका मकसद है कि जमीनी स्तर पर जल्दी और सीधे तौर पर समन्वय हो सके। इसमें कमांडर स्तर के बीच सीधी बातचीत होगी।
साथ ही डिप्लोमैटिक और मिलिट्री लेवल मैकेनिज्म पर दोनों पक्षों ने यह तय किया था कि मौजूदा कूटनीतिक और मिलिट्री चैनलों का इस्तेमाल करते हुए बॉर्डर मैनेजमेंट के लिए कदम उठाए जाएंगे। इसका उद्देश्य है तनाव को कम करना (de-escalation) और उसी फ्रेमवर्क के भीतर काम करना, जिस पर पहले सहमति बनी थी।
वहीं, 31 अगस्त को तियानजिन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात हुई थी। इस दौरान मोदी ने स्पष्ट कहा कि सीमा पर शांति और स्थिरता जरूरी है ताकि द्विपक्षीय संबंधों का विकास सुचारू रूप से हो सके। बैठक के बाद विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए हैं कि सीमा पर शांति बनाए रखने के लिए मौजूदा मैकेनिज्म का इस्तेमाल किया जाएगा और बड़े रिश्तों में किसी तरह की बाधा नहीं आने दी जाएगी।
Eastern Ladakh LAC Update: पीएलए की तैनाती क्यों है चिंता की बात
वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के मुताबिक, चीन की कई ‘कंबाइंड आर्म्स ब्रिगेड्स’ कुछ इलाकों से पीछे हटी हैं, लेकिन कई ब्रिगेड्स अब भी एलएसी पर अग्रिम मोर्चे पर तैनात हैं। एक ब्रिगेड में करीब 4500 से 5000 सैनिक होते हैं जिनके पास टैंक, आर्मर्ड व्हीकल, आर्टिलरी और सरफेस टू एयर मिसाइलें होती हैं। यही वजह है कि भारतीय सेना अपनी तैनाती कम नहीं करना चाहती।
वहीं, डी-इंडक्शन यानी अतिरिक्त सैनिकों की स्थायी ठिकानों पर वापसी अभी तक शुरू नहीं हो पाई है। सेना के अधिकारियों का कहना है कि जब तक चीन पूरी तरह पीछे नहीं हटता और विश्वास बहाली के ठोस कदम नहीं उठाता, तब तक भारतीय तैनाती में कोई ढील नहीं दी जाएगी।
Eastern Ladakh LAC Update: नए जनरल-लेवल मैकेनिज्म की व्यवस्था
दोनों देशों ने अब एलएसी के अलग-अलग सेक्टरों के लिए नए जनरल-लेवल मैकेनिज्म बनाने पर सहमति जताई है। पश्चिमी सेक्टर (लद्दाख) में भारतीय 14 कॉर्प्स कमांडर और चीनी साउथ शिनजियांग मिलिट्री डिस्ट्रिक्ट चीफ पहले से बातचीत कर रहे हैं। अब मध्य सेक्टर (उत्तराखंड, हिमाचल) और पूर्वी सेक्टर (सिक्किम, अरुणाचल) के लिए भी इसी तरह की व्यवस्था की जाएगी। भारत की तरफ से इसमें बरेली स्थित उत्तर भारत एरिया और नगालैंड-आसाम स्थित 3 और 4 कॉर्प्स शामिल हो सकते हैं।
Eastern Ladakh LAC Update: कई इलाकों में पेट्रोलिंग राइट्स नहीं
पूर्वी लद्दाख में अब भी कई ऐसे इलाकों में भारतीय सेना की पैट्रोलिंग के अधिकार पूरी तरह बहाल नहीं हुए हैं। गलवान, पैंगोंग त्सो झील का उत्तरी किनारा, कैलाश रेंज और गोगरा-हॉट स्प्रिंग्स क्षेत्र में बफर जोन बनाए गए हैं, जिनकी चौड़ाई 3 किलोमीटर से 10 किलोमीटर तक है। यह बफर जोन भारतीय इलाकों में ही बने हैं।
HAL on Dhruv ALH glitch: भारतीय सेना के ध्रुव एडवांस्ड लाइट हेलिकॉप्टर (ALH Dhruv) में एक बार फिर तकनीकी खामी सामने आने पर हेलिकॉप्टर निर्माता कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने सफाई दी है। एचएएल का कहना है कि वन-टाइम चेक (ओटीसी) एक नियमित मेंटेनेंस प्रक्रिया है, जो टेल ड्राइव शाफ्ट (टीडीएस) में किसी खराबी के बाद जारी की जाती है। बता दें कि एक उड़ान के दौरान भारतीय सेना के एक हेलिकॉप्टर के टेल ड्राइव शाफ्ट (TDS) को नुकसान पहुंचा था, जिसके बाद सेना ने पूरे एएलएच बेड़े की जांच का आदेश दिया है।
हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने अपना बयान जारी करते हुए उस रिपोर्ट पर सवाल उठाए हैं, जिसमें एएलएच ध्रुव हेलीकॉप्टर में एक उड़ान के दौरान हेलिकॉप्टर के टेल ड्राइव शाफ्ट (TDS) को नुकसान पहुंचा था। यह घटना हाल ही में 4 सितंबर को आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन के हेलिकॉप्टर IA-1134 के साथ हुई थी। इस घटना ने एक बार फिर एडवांस्ड लाइट हेलिकॉप्टर ध्रुव की सेफ्टी को लेकर सवाल खड़े हो गए थे। एचएएल ने इस रिपोर्ट को एकतरफा बताया है।
HAL on Dhruv ALH glitch: वन-टाइम चेक सामान्य मेंटेनेंस प्रक्रिया
एचएएल की तरफ से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया, “वन-टाइम चेक (OTC) एक सामान्य मेंटेनेंस प्रक्रिया है, जिसे किसी भी समस्या के सामने आने पर किया जाता है। इस बार टेल ड्राइव शाफ्ट में समस्या आने पर यह आदेश जारी किया गया। एचएएल भारतीय सेना के साथ मिलकर काम कर रहा है और विशेषज्ञों की टीम को जांच के लिए भेजा गया है।”
This is with reference to articles published in the Hindustan Times newspaper on 6th September 2025, titled ‘New Glitch Plagues ALH Choppers’ and ‘Safety Alarm Triggers Fresh ALH Fleet Check’. The articles, unfortunately, present a one-sided view with misleading commentary.
एचएएल ने यह भी दोहराया कि ध्रुव ALH बेड़े ने अब तक 4.5 लाख से ज्यादा घंटे उड़ान भरी है और पिछले दो दशक से अधिक समय से इसे सेना, वायुसेना, नौसेना, कोस्ट गार्ड और सिविल ऑपरेटर इस्तेमाल कर रहे हैं। यह हेलिकॉप्टर हिमालय के ऊंचाई वाले इलाकों से लेकर समुद्री इलाकों तक कठिन परिस्थितियों में उड़ान भरता रहा है।
HAL on Dhruv ALH glitch: अभी भी प्लेटफॉर्म पर पूरा भरोसा
एचएएल का कहना है कि हेलीकॉप्टरों की निरंतर उड़ान योग्यता के लिए रखरखाव पहलू महत्वपूर्ण हैं और वह इस बात पर ज़ोर देता है कि सभी रखरखाव निर्देशों का कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए। एचएएल ने कहा कि हाल ही में बाढ़ के चलते कई इलाकों में चल रहे राहत और आपातकालीन बचाव अभियानों में, भारतीय सेना ने फंसे हुए नागरिकों और सीआरपीएफ कर्मियों को निकालने के लिए एएलएच ध्रुव का इस्तेमाल किया। यहां कि बेहद जोखिम वाले हेलीकॉप्टर बचाव अभियान भी चलाए, जो एएलएच ध्रुव की वजह से ही संभव हो पाए। एचएएल का कहना है कि यह बताता है कि सेना को अभी भी इस प्लेटफॉर्म पर पूरा भरोसा है।
सेना ने जारी किया पत्र
हेलिकॉप्टर के टेल ड्राइव शाफ्ट में गड़बड़ी सामने आने के बाद सेना की ओर से एक पत्र जारी किया गया था, जिसमें कहा गया है कि उड़ान के दौरान IA-1134 हेलिकॉप्टर में स्टेशन #9A पर TDS बेयरिंग माउंट टूटने की घटना दर्ज की गई। पत्र में लिखा गया कि फ्लाइट सेफ्टी सुनिश्चित करने के लिए सभी ध्रुव हेलिकॉप्टरों में वन-टाइम चेक अनिवार्य रूप से किया जाए।
इस जांच में वायुसेना और नौसेना के ध्रुव हेलिकॉप्टर भी शामिल किए गए हैं। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि सभी ALH की जांच टीडीएस बेयरिंग, इलास्टोमेरिक बुश, टेल बूम टॉप फेस शीट और TDS ब्रैकेट की विजुअल जांच के साथ की जाए। इसके लिए 10X मैग्निफाइंग ग्लास के इस्तेमाल का निर्देश भी दिया गया है।
एचएएल का कहना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों और सही डेटा को देखा जाना चाहिए। कंपनी ने मीडिया से अपील की है कि ध्रुव ALH जैसे स्वदेशी प्लेटफॉर्म पर रिपोर्टिंग करते समय गलत और भ्रामक जानकारियों से बचें।
एचएएल का मानना है कि ALH ध्रुव भारतीय सशस्त्र बलों का भरोसेमंद प्लेटफॉर्म है और इसकी तकनीकी जांच और सुधार लगातार जारी है।
पोरबंदर हादसे के बाद किया था ग्राउंड
इस साल जनवरी में गुजरात के पोरबंदर में कोस्ट गार्ड का एक एएलएच ध्रुव क्रैश हुआ था, जिसमें दो पायलट और एक एयरक्रू डाइवर की मौत हो गई थी। इसके बाद नौसेना और कोस्ट गार्ड के ध्रुव हेलिकॉप्टरों को ग्राउंडेड कर दिया गया था। पोरबंदर हादसे के बाद बनी हाई-लेवल कमिटी ने पाया था कि स्वाशप्लेट फ्रैक्चर दुर्घटना का कारण था। यह हेलिकॉप्टर के कंट्रोल सिस्टम का अहम हिस्सा है। हालांकि, इसके टूटने की असली वजह का पता नहीं चल सका। इसके बाद एचएएल ने जांच के दायरे को बढ़ाया और बेंगलुरु स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc) को फैटीग टेस्ट करने की जिम्मेदारी दी।
एचएएल ने नौसेना और कोस्ट गार्ड के दो एएलएच हेलिकॉप्टरों पर विशेष उपकरण लगाए हैं ताकि ट्रांसमिशन सिस्टम, गियरबॉक्स और रोटर हब जैसी अहम यूनिट्स का डेटा जुटाया जा सके। माना जा रहा है कि समुद्री माहौल में लंबे समय तक ऑपरेशन करने से एएलएच में तकनीकी दिक्कतें बढ़ रही हैं।
मई 2025 में गहन जांच के बाद सेना और वायुसेना के लगभग 300 ALH को फिर से उड़ान की अनुमति मिली थी। यह फैसला डिफेक्ट इन्वेस्टिगेशन कमिटी की सिफारिश पर हुआ था। इस कमेटी में CEMILAC (सेंटर फॉर मिलिट्री एयरवर्दीनेस एंड सर्टिफिकेशन), DG-AQA (डायरेक्टरेट जनरल ऑफ एरोनॉटिकल क्वालिटी एश्योरेंस) और एचएएल के अधिकारी शामिल थे। वहीं, नौसेना और कोस्ट गार्ड के ALH अब भी ग्राउंडेड हैं और उन्हें उड़ान की अनुमति नहीं मिली है।
रक्षा समाचार डॉट कॉम को जानकारी देते हुए एचएएल के सीनियर सूत्रों ने बताया था कि जल्द ही नौसेना और कोस्टगार्ड के ध्रुव हेलीकॉप्टरों को उड़ान की अनुमति दी जाएगी। उन्होंने बताया था कि अगले महीने तक कुछ ध्रुव उड़ान भरने लगेंगे। उन्हें पहले कुछ परीक्षणों से गुजरना होगा, और उसके बाद चरणबद्ध तरीके से उड़ान भरने की अनुमति मिलेगी।
पिछले पांच सालों में ध्रुव एएलएच हेलिकॉप्टरों के करीब 15 हादसे हो चुके हैं। 2023-24 में ही हेलिकॉप्टर का डिजाइन रिव्यू किया गया और इसके कंट्रोल सिस्टम में बदलाव किए गए। बावजूद इसके, कई बार तकनीकी खामियों के चलते एएलएच को ग्राउंड करना पड़ा।
एएलएच ध्रुव सेना, वायुसेना, नौसेना और कोस्ट गार्ड के लिए बेहद अहम भूमिका निभाता है। यह न केवल लॉजिस्टिक सपोर्ट बल्कि रेस्क्यू ऑपरेशन और कॉम्बैट मिशनों के लिए भी इस्तेमाल होता है।
Passing Out Parade: ओटीए गया और ओटीए चेन्नई में शनिवार को पासिंग आउट परेड आयोजित की गई। 6 सितंबर 2025 को आयोजित इस ऐतिहासिक समारोह में कुल 362 अफसरों को कमीशन मिला और उन्होंने अपने मिलिट्री करियर की शुरुआत की।
गया स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (ओटीए) से शॉर्ट सर्विस कमीशन (टेक्निकल) एंट्री के 207 कैडेट्स अफसर बने। इनमें 184 पुरुष कैडेट्स और 23 महिला कैडेट्स शामिल थीं। सभी कैडेट्स ने “अंतिम पग” मार्च करते हुए भारतीय सेना का अंग बनने की शपथ ली।
वहीं, परेड के रिव्यूइंग ऑफिसर लेफ्टिनेंट सेंट्रल कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता रहे। कैडेट्स की सधी हुई और तालमेल भरी ड्रिल ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
Lt. Gen. Sukriti Singh Dahiya, Commandant OTA Gaya standing behind Lieutenant General Anindya Sengupta, PVSM, UYSM, AVSM, YSM, General Officer Commanding-in-Chief, Central Command
समारोह में कई कैडेट्स को सम्मानित किया गया। बटालियन अंडर ऑफिसर कुलथे ध्रुव को सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडर घोषित किया गया और उन्हें प्रतिष्ठित स्वॉर्ड ऑफ ऑनर प्रदान की गई। अकादमी कैडेट एडजुटेंट मोनू कुमार को गोल्ड मेडल, अकादमी अंडर ऑफिसर पीयूष डिमरी को सिल्वर मेडल और बटालियन अंडर ऑफिसर मुकता सिंह को ब्रॉन्ज मेडल दिया गया। इसके अलावा कालिधर कंपनी को चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ बैनर से नवाजा गया।
अपने संबोधन में रिव्यूइंग ऑफिसर ने युवा कैडेट्स को इनोवेशन अपनाने, उभरती तकनीकों को सीखने और हर परिस्थिति में तैयार रहने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि परंपरा और आधुनिक नेतृत्व का मिश्रण ही भारतीय सेना को और मजबूत बनाएगा।
इससे पहले ओटीए गया में शहीद स्मारक पर रिव्यूइंग ऑफिसर और वरिष्ठ अधिकारियों ने शोक शस्त्र की परंपरा निभाते हुए देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले शहीदों को भी याद किया।
वहीं, ओटीए गया का सबसे भावुक दृश्य पिपिंग सेरेमनी के दौरान देखने को मिला। जब कैडेट्स के कंधों पर स्टार्स लगाए गए और वे भारतीय सेना के अफसर बन गए। परिवारों की मौजूदगी में यह क्षण गर्व और भावनाओं से सराबोर रहा। लेफ्टिनेंट कर्नल प्रखर धगत ने सभी कैडेट्स को शपथ दिलाई।
Passing Out Parade: ओटीए चेन्नई में भी पासिंग आउट परेड
इसी दिन चेन्नई स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी में भी पासिंग आउट परेड आयोजित हुई। परमेश्वरन ड्रिल स्क्वेयर पर हुई इस परेड में शॉर्ट सर्विस कमीशन एसएससी से 120 और एसएससी (महिला)-34 कोर्स के कैडेट्स शामिल हुए।
यहां कुल 155 कैडेट्स भारतीय सेना में अफसर बने, जिनमें 130 पुरुष और 25 महिला कैडेट्स शामिल थीं। इसके अलावा नौ मित्र देशों से आए 21 विदेशी कैडेट्स (9 पुरुष और 12 महिला) ने भी ट्रेनिंग पूरी की।
इस परेड के रिव्यूइंग ऑफिसर वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह रहे। अपने संबोधन में रिव्यूइंग ऑफिसर ने ऑफिसर कैडेट्स और ओटीए स्टाफ की उपलब्धियों की सराहना की और नए अफसरों से आह्वान किया कि वे सेना के मूल मूल्यों, राष्ट्र की निस्वार्थ सेवा और हर कार्य में उत्कृष्टता हासिल करने के संकल्प को हमेशा बनाए रखें। उन्होंने कैडेट्स को संबोधित करते हुए कहा कि सेना का मूल मूल्य निस्वार्थ सेवा और उत्कृष्टता की भावना है, जिसे हमेशा जीवित रखना होगा।
Passing Out Parade 2025: Indian Army Gets 362 New Officers from OTA Gaya and OTA Chennai
समारोह में एसीए राज बिस्वास को स्वॉर्ड ऑफ ऑनर और सिल्वर मेडल, एयूओ पारुल धडवाल को गोल्ड मेडल और बीयूओ प्रांजल दीक्षित को ब्रॉन्ज मेडल से सम्मानित किया गया।
ओटीए चेन्नई में पिपिंग सेरेमनी में उनके परिजनों ने कैडेट्स की वर्दी पर स्टार्स लगाए औऱ भारत के संविधान और देश की सुरक्षा के लिए शपथ ली। उत्साह और गर्व से भरे इन युवा अफसरों ने “सर्व विद ऑनर” की भावना के साथ आगे कदम बढ़ाया।
OTA Chennai POP: भारतीय सेना में सेवा और शौर्य की विरासत को आगे बढ़ाते हुए पंजाब के धडवाल परिवार ने एक नया इतिहास रच दिया है। इस परिवार की पांचवीं पीढ़ी ने वर्दी पहनकर देश की सेवा की राह चुनी है। लेफ्टिनेंट पारुल धडवाल को शनिवार को चेन्नई स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (ओटीए) से पास आउट होने के बाद भारतीय सेना की ऑर्डनेंस कोर में कमीशन मिला।
पारुल धडवाल की उपलब्धि और भी खास इसलिए है, क्योंकि उन्हें अपने कोर्स में पहला स्थान हासिल करने पर प्रेसिडेंट्स गोल्ड मेडल से भी सम्मानित किया गया।
OTA Chennai POP: सेना में परंपरा और आधुनिकता दोनों
पंजाब के होशियारपुर जिले के जनौरी गांव की रहने वाली लेफ्टिनेंट पारुल धडवाल अपने परिवार की पहली महिला अधिकारी बनी हैं। उनकी कमीशनिंग न सिर्फ एक पारिवारिक उपलब्धि है, बल्कि यह भी बताती है कि कैसे भारतीय सेना में महिलाओं की भागीदारी तेजी सेा बढ़ रही है। वहीं पारुल ने सेना ज्वॉइन करके बता दिया है कि कैसे परंपरा और आधुनिकता का संगम आज भी भारतीय सेना में कायम है।
OTA Chennai POP: 129 साल पुरानी सैन्य विरासत
धडवाल परिवार की सैन्य परंपरा बेहद गौरवशाली रही है। इस विरासत की शुरुआत सूबेदार हरनाम सिंह से हुई, जिन्होंने 74 पंजाब रेजिमेंट में 1 जनवरी 1896 से लेकर 16 जुलाई 1924 तक सेवा दी। उनके बाद दूसरी पीढ़ी में मेजर एलएस धडवाल (3 जाट) ने देश की सेवा की।
तीसरी पीढ़ी में यह परंपरा कर्नल दलजीत सिंह धडवाल (7 जम्मू कश्मीर राइफल्स) और ब्रिगेडियर जगत जमवाल (3 कुमाऊं) ने आगे बढ़ाई। चौथी पीढ़ी में पारुल के पिता मेजर जनरल केएसधडवाल, एसएम, वीएसएम और उनके भाई कैप्टन धनंजय धडवाल (20 सिख) वर्तमान में सेवा दे रहे हैं।
🚁🇮🇳 Indian Air Force in Action!
IAF helicopters are tirelessly conducting relief operations across Punjab, Himachal & J&K.
✅ 541 people evacuated from Bharmor–Chamba
✅ 10,000+ kg relief material airlifted in Kullu & Kishtwar
The IAF remains fully committed to Humanitarian… pic.twitter.com/s5qTj5jnMA
— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) September 6, 2025
OTA Chennai POP: एक ही परिवार से तीन अफसर
आज की तारीख में यह परिवार उन गिने-चुने परिवारों में शामिल है, जिनकी दो पीढ़ियों से तीन अधिकारी एक साथ सेवा में हैं। पारुल के पिता मेजर जनरल केएस धडवाल सेना मेडल और विशिष्ट सेना मेडल से सम्मानित हैं और भाई कैप्टन धनंजय धडवाल पहले से ही सेना की 20 सिख रेजीमेंट में देश की सेवा कर रहे हैं। वहीं अब कमीशन होने के बाद पारुल ने भी परिवार की इस परंपरा को आगे बढ़ाया है।
OTA Chennai POP: महिला अधिकारियों की बढ़ती भागीदारी
पारुल धडवाल की कमीशनिंग इस बात की भी गवाही है कि भारतीय सेना में महिलाओं की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है। हाल के वर्षों में महिलाओं को परमानेंट कमीशन, कॉम्बैट रोल और लीडरशिप रोल में जगह मिलने लगी है। पारुल की यह उपलब्धि देश की उन तमाम बेटियों के लिए प्रेरणा है जो सेना में करियर बनाने का सपना देखती हैं।
मिला प्रेसिडेंट्स गोल्ड मेडल
चेन्नई स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी से पास आउट होना अपने आप में गौरव की बात है, लेकिन पारुल ने इससे आगे बढ़कर अपने कोर्स में प्रथम स्थान हासिल कर इतिहास भी रचा है। उन्हें इस शानदार उपलब्धि के लिए प्रेसिडेंट्स गोल्ड मेडल से भी सम्मानित किया गया।
Dhruv ALH glitch: भारतीय सेना के ध्रुव एडवांस्ड लाइट हेलिकॉप्टर (ALH) में एक बार फिर गंभीर तकनीकी गड़बड़ी सामने आई है। उड़ान के दौरान एक हेलिकॉप्टर के टेल ड्राइव शाफ्ट (TDS) को नुकसान पहुंचा, जिसके बाद सेना ने सुरक्षा कारणों से पूरे ध्रुव बेड़े की तत्काल जांच के आदेश दिए हैं। यह मामला 4 सितंबर का है। जिसके बाद एक बार फिर इन हेलिकॉप्टरों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
टेल ड्राइव शाफ्ट हेलिकॉप्टर (Dhruv ALH glitch) के लिए बेहद अहम हिस्सा होता है। यह इंजन से पावर को टेल रोटर तक पहुंचाता है, ताकि मेन रोटर के टॉर्क को बैलेंस किया जा सके। इसकी मजबूती सीधे तौर पर हेलिकॉप्टर की डायरेक्शन और स्टेबिलिटी से जुड़ी होती है। सेना की डायरेक्टरेट जनरल ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड मैकेनिकल इंजीनियर्स (एविएशन) ने तुरंत सभी ध्रुव यूनिट्स को आदेश जारी कर जांच शुरू करने को कहा है। इस जांच में वायुसेना और नौसेना के ध्रुव भी शामिल हैं।
Dhruv ALH glitch: वन-टाइम चेक अनिवार्य
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन के IA-1134 (टेल नंबर) हेलिकॉप्टर के साथ हुई। घटना के तुरंत बाद हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को भी जानकारी दी गई और उनसे इस खराबी की जड़ तक पहुंचने के लिए मदद मांगी गई। बता दें कि एचएएल ने ही ध्रुव को डिजाइन और डेवलप किया है और फिलहाल वे सेना को जांच में सहयोग कर रहे हैं।
सेना की ओर से जारी पत्र में लिखा गया है, “उड़ान के दौरान IA-1134 हेलिकॉप्टर (Dhruv ALH glitch) के स्टेशन #9A पर टीडीएस बेयरिंग माउंट टूटने की घटना सामने आई है। फ्लाइट सेफ्टी सुनिश्चित करने के लिए सभी ध्रुव हेलिकॉप्टरों में वन-टाइम चेक अनिवार्य रूप से किया जाए।” इस पत्र में टूटे हुए हिस्सों की तस्वीरें भी लगाई गई हैं।
यह आदेश ऐसे समय में आया है जब मई 2025 में ही सेना और वायुसेना के ध्रुव हेलीकॉप्टरोंको गहन जांच के बाद उड़ान योग्य घोषित किया गया था। उससे पहले जनवरी 2025 में गुजरात के पोरबंदर में कोस्ट गार्ड के ध्रुव के क्रैश होने के बाद इन हेलिकॉप्टरों को महीनों तक ग्राउंडेड रखा गया था। उस हादसे में दो पायलट और एक एयरक्रू डाइवर की मौत हो गई थी।
पोरबंदर क्रैश के बाद नौसेना और कोस्ट गार्ड के ध्रुव हेलीकॉप्टर (Dhruv ALH glitch) अभी ग्राउंडेड हैं और उन्हें अब भी उड़ान भरने की अनुमति नहीं पाए हैं। वहीं, ऑपरेशन सिंदूर से पहले सेना और वायुसेना के लगभग 300 ध्रुव एएलएच को मई में डिफेक्ट इन्वेस्टिगेशन कमिटी की सिफारिश पर अनुमति मिली थी। इस कमेटी में CEMILAC (सेंटर फॉर मिलिट्री एयरवर्दीनेस एंड सर्टिफिकेशन), DG-AQA (डायरेक्टरेट जनरल ऑफ एरोनॉटिकल क्वालिटी एश्योरेंस) और एचएएल के अधिकारी शामिल थे।
यह हादसा ऐसे वक्त में जब हुआ है जब एचएएल नौसेना और कोस्ट गार्ड के हेलीकॉप्टरों (Dhruv ALH glitch) को अनुमति देने की योजना बना रहा था। रक्षा समाचार डॉट कॉम को जानकारी देते हुए एचएएल के सीनियर सूत्रों ने बताया था कि जल्द ही नौसेना और कोस्टगार्ड के ध्रुव हेलीकॉप्टरों को उड़ान की अनुमति दी जाएगी। उन्होंने बताया था कि अगले महीने तक कुछ ध्रुव उड़ान भरने लगेंगे। उन्हें पहले कुछ परीक्षणों से गुजरना होगा, और उसके बाद चरणबद्ध तरीके से उड़ान भरने की अनुमति मिलेगी।
वहीं, इस मामले में सेना ने जांच के लिए स्पष्ट निर्देश दिए हैं, जिनमें टीडीएसबेयरिंग और इलास्टोमेरिक बुश की जांच, टेल बूम टॉप फेस शीट पर तीन अलग-अलग स्टेशनों पर क्रैक की जांच और टीडीएस ब्रैकेट की विस्तृत विजुअल जांच शामिल है। इसके लिए 10X मैग्निफाइंग ग्लास के इस्तेमाल की सिफारिश भी की गई है।
एचएएलपहले ही नौसेना और कोस्ट गार्ड के दो ध्रुव हेलीकॉप्टरों (Dhruv ALH glitch) को इंस्ट्रूमेंट कर चुका है, ताकि ट्रांसमिशन सिस्टम, गियरबॉक्स और रोटर हब जैसी अहम यूनिट्स के परफॉरमेंस का डेटा जुटाया जा सके। माना जा रहा है कि समुद्र में लंबे समय तक ऑपरेशन करने से इन हेलिकॉप्टरों में तकनीकी दिक्कतें बढ़ रही हैं।
पोरबंदर हादसे के बाद बनी उच्चस्तरीय कमिटी ने पाया था कि स्वाशप्लेट फ्रैक्चर इस दुर्घटना का कारण बनी। यह हेलिकॉप्टर के कंट्रोल सिस्टम का अहम हिस्सा है। हालांकि, यह साफ नहीं हो सका कि यह हिस्सा क्यों टूटा। इसके बाद इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंसको भी जांच में शामिल किया गया और उन्होंने ट्रांसमिशन सिस्टम के अहम पुर्जों पर फैटीग टेस्ट किए।
पिछले पांच वर्षों में एडवांस लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (Dhruv ALH glitch) ध्रुवके 15 हादस हो चुके हैं, जिसके बाद इसके सुरक्षा रिकॉर्ड पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। 2023-24 में ही हेलिकॉप्टर का डिजाइन रिव्यू किया गया था और इसके कंट्रोल सिस्टम में बदलाव किए गए थे। लेकिन उसके बावजूद, कई घटनाओं के चलते इसे बार-बार ग्राउंडेड करना पड़ा।
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि एएलएचकी तकनीकी गड़बड़ियों को दूर करना बेहद जरूरी है, क्योंकि सेना, वायुसेना, नौसेना और कोस्ट गार्ड के पास यह हेलिकॉप्टर बड़ी संख्या में मौजूद हैं। यह न केवल लॉजिस्टिक सपोर्ट बल्कि रेस्क्यू और कॉम्बैट मिशनों के लिए भी अहम भूमिका निभाते हैं।
भारतीय सेना ने एचएएल से इस घटना की जांच के लिए “रूट कॉज एनालिसिस” को टॉप प्रायरिटी पर लेने को कहा है। आने वाले समय में इस जांच से यह पता चल पाएगा कि टीडीएस फेल्योर की वास्तविक वजह क्या थी और क्या इसे व्यापक स्तर पर ठीक किया जा सकता है।
General Upendra Dwivedi, COAS, today unveiled the book “Operation SINDOOR: The Untold Story of India's Deep Strikes Inside Pakistan” by Lieutenant General KJS 'Tiny' Dhillon (Retd).
Army Chief on Op Sindoor: भारतीय थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने शुक्रवार को साफ किया कि पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर 10 मई को खत्म नहीं हुआ था। उन्होंने कहा कि यह सैन्य अभियान लंबे समय तक चला और इसमें कई महत्वपूर्ण फैसले लेने पड़े।
दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में एक किताब के विमोचन कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा, “आप सोच रहे होंगे कि जंग 10 मई को खत्म हो गई थी, लेकिन ऐसा नहीं था। यह और लंबे समय तक चला क्योंकि बहुत से अहम फैसले लेने थे। उससे आगे की बात करना मेरे लिए मुश्किल होगा।”
Army Chief on Op Sindoor: जारी रहा ऑपरेशन
सेना प्रमुख ने रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लन की नई किताब “ऑपरेशन सिंदूर: द अनटोल्ड स्टोरीज ऑफ इंडियाज डीप स्ट्राइक्स इनसाइड पाकिस्तान” की लॉन्चिंग के मौके पर बोलते हुए कहा, 6-7 मई 2025 को पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। तीन दिन बाद यानी 10 मई तक इसे खत्म माना गया, लेकिन सेना प्रमुख ने पहली बार स्वीकार किया कि यह ऑपरेशन आगे भी जारी रहा। उन्होंने कहा, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अप्रैल 23 से लेकर 16 मई तक कई कठिन फैसले लेने पड़े। लोग सोचते हैं कि जंग 10 मई को खत्म हुई, लेकिन सच यह है कि कई अहम फैसले उसके बाद भी लिए गए। हमें यह तय करना था कि कब शुरू करें, कब रोकें, कितना समय, कितना संसाधन और किस तरह उपयोग करना है। कोई पहले से उदाहरण नहीं था, इसलिए हर फैसला अनुभव और चर्चा के आधार पर लेना पड़ा।
उन्होंने यह भी कहा कि लाइन ऑफ कंट्रोल पर इसका असर अभी आंकना जल्दबाजी होगी, क्योंकि पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
उन्होंने कहा, “क्या पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद खत्म हो गया? मुझे नहीं लगता, क्योंकि अब भी घुसपैठ की कोशिशें हो रही हैं। कितने आतंकियों को हमने मार गिराया और कितने भाग निकले, यह सब मीडिया में भी सामने आ चुका है।”
Army Chief on Op Sindoor: तालमेल और सिंक्रोनाइजेशन पर फोकस
जनरल द्विवेदी ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तीनों सेनाओं के बीच तालमेल को “रिदमिक वेव” यानी लयबद्ध तरंग की तरह बताया। उनके अनुसार, हर जवान और हर अफसर आदेशों से पूरी तरह अवगत था और एकजुट होकर काम कर रहा था।
Indian Army Chief General Upendra Dwivedi has made strong remarks on GST relief for defence corridors, MSMEs and startups, calling it a big boost for R&D, training and modernisation. He also clarified why Theaterization is crucial and commented on Operation Sindoor’s impact.… pic.twitter.com/AHTJ2Ks6xb
— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) September 6, 2025
उन्होंने कहा कि युद्ध में केवल हथियार ही काम नहीं आते, बल्कि कमांड और कंट्रोल का बेहतर स्ट्रक्चर भी उतना ही अहम होता है। इस दौरान सेंटर ऑफ ग्रेविटी पर लगातार फोकस रखा गया और यह सुनिश्चित किया गया कि हर कदम योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़े।
Army Chief on Op Sindoor: थिएटराइजेशन पर बोली यह अहम बाात
वहीं थिएटराइजेशन पर जनरल द्विवेदी ने अपनी राय रखते हुए कहा, “थिएटराइजेशन आज हो या कल, होना ही है। सवाल सिर्फ यह है कि इसमें कितना वक्त लगेगा। जब हम लड़ते हैं, तो केवल सेना नहीं लड़ती। हमारे पास बीएसएफ, आईटीबीपी, साइबर एजेंसी, स्पेस एजेंसी, कोऑपरेटिव वॉरफेयर एजेंसी, आईएसआरओ, सिविल डिफेंस, रेलवे और स्टेट एडमिनिस्ट्रेशन जैसी कई संस्थाओं से तालमेल बैठाना होता है। इतने सारे एजेंसियों के बीच तालमेल की स्थिति में थिएटराइजेशन ही जवाब है। हमें एक ही कमांडर चाहिए और यूनिटी ऑफ कमांड सबसे ज्यादा जरूरी है।”
COAS General Upendra Dwivedi
बता दें कि हाल के दिनों में थिएटराइजेशन (Theaterisation) पर बहस छिड़ी हुई है। रणसंवाद 2025 में एयरफोर्स चीफ, नेवी चीफ और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ ने भी इस पर अपने-अपने विचार रखे थे।
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने थिएटर कमांड को लेकर कहा था कि अभी थिएटर कमांड लागू करने का समय नहीं है। इस तरह की जल्दबाजी से तीनों सेनाओं की कोर स्ट्रेंथ को नुकसान हो सकता है। उनका कहना था मिलिट्री कॉर्डिनेशन का स्ट्रक्चर ऐसा होना चाहिए जिसे सीधे तीनों सेनाओं के प्रमुख मिलकर ऑपरेट करें। उन्होंने कहा कि इस स्तर पर जॉइंट प्लानिंग और फैसले अधिक व्यावहारिक होंगे और इससे अनावश्यक नई परतें जोड़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
उन्होंने आगे बोलते हुए कहा था कि हमें अभी किसी नए स्ट्रक्चर की जरूरत नहीं है। जो सिस्टम मौजूद है, उसी में बेहतर काम हो सकता है। हमें दिल्ली में एक जॉइंट प्लानिंग और कॉर्डिनेशन सेंटर बनाना चाहिए, जहां से योजनाएं तैयार हों और फिर उनका क्रियान्वयन अलग-अलग स्तरों पर किया जाए।
वहीं, नेवी चीफ एडमिरल दिनेश त्रिपाठी ने कहा था कि समुद्री मोर्चे पर मल्टी-डोमेन ऑपरेशन की जरूरत है और इसके लिए इंटीग्रेटेड कमांड ही समाधान है। वहीं सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने इस प्रक्रिया को “अनिवार्य” बताया था।
Army Chief on Op Sindoor: जीएसटी सुधारों की तारीफ
सेना प्रमुख ने हाल ही में घोषित जीएसटी सुधारों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि डिफेंस कॉरिडोर को इसका सीधा फायदा मिलेगा और छोटे उद्योगों तथा स्टार्टअप्स को भी राहत मिलेगी।
उन्होंने बताया कि भारतीय सेना में तीन चीजें सबसे अहम हैं, रिसर्च एंड डेवलपमेंट, ट्रेनिंग और मॉडर्नाइजेशन। रिसर्च एंड डेवलपमेंट में आईडीईएक्स (IDEX) प्रोजेक्ट्स को जीएसटी छूट से सीधा फायदा होगा। ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले सिम्युलेटर अब जीरो जीएसटी पर मिलेंगे, जिससे बड़ी संख्या में इन्हें खरीदा जा सकेगा।
मॉडर्नाइजेशन की बात करते हुए उन्होंने कहा कि भारी और हल्के उपकरणों की खरीद में अब बाधाएं कम होंगी। मिलिट्री ड्रोन (UAVs) पर जीएसटी जीरो कर दिया गया है, जिससे आने वाले युद्धों में उनकी अहमियत और बढ़ जाएगी। उन्होंने कहा, “ड्रोन, यूएवी और काउंटर-यूएवी आने वाले समय में युद्ध का चेहरा तय करेंगे। इस सुधार से हमें काफी फायदा होगा।”
Army Chief on Op Sindoor: एलओसी को लेकर बोले आर्मी चीफ
जनरल द्विवेदी ने लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) केजेएस ढिल्लन की नई किताब की तारीफ की। उन्होंने कहा कि इसमें कई ऐसी बातें सामने आई हैं जिन्हें अब तक वर्दीधारी अफसर नहीं बता सकते थे।
उन्होंने कहा, यह किताब सिर्फ मिलिट्री ऑपरेशंस की कहानी नहीं है, बल्कि भारतीय सेना की हिम्मत, प्रोफेशनलिज्म और अटूट जज्बे को भी सलाम है। उन्होंने कहा कि लाइन ऑफ कंट्रोल की लड़ाई और उससे जुड़े मुद्दों पर हम इतने अभ्यस्त हो गए थे कि उसकी अहमियत, जज्बात, नुकसान, उपलब्धियां और चुनौतियों को हम महसूस ही नहीं कर पाए। लेकिन ऑपरेशन सिंदूर में यही अनकही कहानी सामने आती है। आप जानते हैं कि गलती से जब पाकिस्तान की तरफ से पुरस्कार देने की सूची बाहर आई, तो उसमें साफ दिखा कि सबसे बड़ा श्रेय लाइन ऑफ कंट्रोल को ही जाता है। यहां तक कि उसमें लिखा गया था ‘बहुत हुआ, फाइल छोड़ो और जल्दी से मुजफ्फराबाद भागो’। यह उस जबरदस्त फायर असॉल्ट की गवाही देता है।
उन्होंने कहा कि इस किताब में तीन अहम मुद्दों पर भी चर्चा है, फोर्स विजुअलाइजेशन, फोर्स प्रोटेक्शन और फोर्स एप्लिकेशन। साथ ही इसमें सेंट्रलाइज्ड प्लानिंग और डीसेंट्रलाइज्ड एक्जीक्यूशन पर भी बात की गई है।
उन्होंने कहा, “इस किताब ने वह सब कह दिया जो अब तक अनकहा था। इसने ऑपरेशन सिंदूर की चुनौतियों, भावनाओं, नुकसान और उपलब्धियों को सामने रखा। यह किताब सिर्फ सैन्य ऑपरेशन का ब्यौरा नहीं बल्कि भारतीय सेना के साहस और प्रोफेशनलिज्म को श्रद्धांजलि भी है।”
Army Chief on Op Sindoor: एनसीईआरटी में शामिल
सेना प्रमुख ने यह भी बताया कि अब ऑपरेशन सिंदूर को एनसीईआरटी (NCERT) की किताबों में शामिल किया गया है। एक हिस्सा कक्षा 1 से 5 और दूसरा कक्षा 6 से 12 तक के बच्चों को पढ़ाया जाएगा। यह किताब न सिर्फ़ नींव है बल्कि भविष्य की पढ़ाई और शोध के लिए भी रेफरेंस मटेरियल बनेगी। मिलिट्री स्ट्रैटेजिस्ट भी इसे कोट करेंगे। और आने वाले युद्धों के लिए इससे कई सबक सीखे जाएंगे।”
ले. जन. (रि.) केजेएस ढिल्लन ने कही ये बात
लेफ्टिनेंट जनरल (रि.) केजेएस ढिल्लन ने अपनी नई किताब बोलते हुए कहा, यह किताब केवल एक मिलिट्री ऑपरेशन का ब्यौरा नहीं है, बल्कि उस राष्ट्रीय ऊर्जा, राजनीतिक इच्छाशक्ति और सैन्य समन्वय का दस्तावेज है जिसने पाकिस्तान के खिलाफ निर्णायक जीत सुनिश्चित की।
ढिल्लन ने बताया कि किताब की रूपरेखा 22 अप्रैल से लेकर 6 मई की रात तक की घटनाओं, इंटेलिजेंस इनपुट्स, कूटनीतिक पहल और सैन्य फैसलों पर आधारित है। इसमें टारगेट चुनने से लेकर सही हथियारों के इस्तेमाल और तेजी से किए गए हमलों तक का ब्यौरा है। उन्होंने खास तौर पर लाइन ऑफ कंट्रोल की जंग और नैरेटिव की जंग पर लिखे गए अध्यायों का जिक्र किया, जिन्हें अक्सर मीडिया कवरेज में नजरअंदाज कर दिया गया था। उनके अनुसार, यह वही मोर्चे थे जहां भारतीय सैनिकों का असली जिगरा सामने आया।
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